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ममता vs सीबीआईः सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोलीं ममता, यह हमारी जीत

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मोदी सरकार की सीबीआई और ममता सरकार की पुलिस के बीच पैदा हुआ टकराव अब राजनीतिक लड़ाई में बदल गया है। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले ममता ने इस मुद्दे को बंगाल से उठाकर दिल्ली तक फैला दिया है। यही नहीं सोमवार को संसद में भी विपक्ष ने केन्द्र के खिलाफ नारेबाजी कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद कर रही है और सीबीआई जैसी अन्य जांच एजेंसियों के सहारे राज्य सरकारों को डराने का काम कर रही है। ममता की इस लड़ाई में समुचा विपक्ष एकजुट होता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने ममता को समर्थन दिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जान दे देंगी लेकिन समझौता नहीं करेंगी। दूसरी तरफ केन्द्र सरकार ने भी बंगाल सरकार के तानाशाही होने का आरोप लगाया है। विवाद को देखते हुए राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को गोपनीय रिपोर्ट सौंपी है। दिनभर होगी सियासत के बीच मामला कोर्ट में पहुंचा।

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लोकसभा चुनाव : मोदी और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनीं यह तीन महिलाएं

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Priyanka gandhi Mayawati and mamata banerjee

लोकसभा चुनाव को लेकर मोसम जमने लगा है। वार- जलटवार और आरोप- प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरु हो चुका है। भाजपा अपना लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के चहरे पर लड़ने वाली है तो वही विपक्ष संगठित रूप से चुनाव में उतरने वाला है। 2014 के चुनाव में भाजपी की जीत के पीछे महंगाई जैसे मुद्दे पर महिलाओं का समर्थन की अहम भूमिका थी। इस चुनाव में जहां विपक्ष के पास कई बड़े मिहिला चहरे हैं तो वहीं भाजपा के पास महिला चहरों की कमी दिखाई देगी। भाजपा के पास जो लोकप्रीय और आक्रमक महिला नेता 2014 में थी, वह या तो इस लोकसभा चुनाव में उतरेंगी नही या फिर उनका प्रभाव पिछली बार की तरह नही होगा। सुषमा स्वराज पहले ही अगला चुनाव लड़ने से इंकार कर चुकी है तो स्मृती इरानी पिछला चुनाव हार चुकी है। वहीं उमा भारती का कद भी अब पहले जितना नही रहा। ऐसे में जब चुनाव अभीयान के दौरान विपक्ष की महिला नेता जब प्रधानमंत्री और भाजपा पर सीधा हमला बोलेंगी तो भाजपा को मजबूत और लोकप्रीय महिला नेताओं की कमी जरूर खलेगी।

वहीं विपक्ष की बात करें तो प्रियंका की एंट्री ने कांग्रेस को नई जान दे दी है। राहुल ने भी प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर और महत्वपूर्ण पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देकर अपने इरादे साफ कर दिया हैं। उधर दो अन्य दिग्गज महिला नेता भी इस चुनाव में भाजपा को चुनौती देने को तैयार हैं। ये हैं पश्‍चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती। ये दोनों नेका मोदी और एनडीए गठबंधन को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होते दिख रहे हैं, हालांकि अभी कोई औपचारिक ऐलान होना बाकी है।

बीजेपी छोड़ चुके वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि विपक्ष के पास बीजेपी से ज्यादा मजबूत महिला नेतृत्व है। जनता अगले आम चुनाव में इस नेतृत्व को वोट करेगी और खासतौर पर महिलाओं का समर्थन मिलेगा। बीजेपी के लिए यह परेशान होने का वक्त है, खासतौर पर तीन हिंदीभाषी राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद।

प्रियंका की राजनीति में औपचारिक एंट्री पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्‍न मानाया था। तमाम वरिष्ठ नेताओं ने इसे स्वागतयोग्य फैसला बताया है। हालांकि मायावती और ममता के पास प्रियंका से कहीं ज्यादा अनुभव है और माना जा रहा है कि दोनों अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का चेहरा हो सकती हैं।

मायावती ने जहां उत्तर प्रदेश में अपने सबसे बड़े विरोधी दल समाजवादी पार्टी से पुरानी ’दुश्मनी’ भुलाकर गठबंधन किया, वहीं दूसरी ओर ममता ने पिछले महीने ही कोलकाता में संयुक्त विपक्ष रैली का आयोजन किया था। जिसमें लगभग सभी बड़े विपक्षी दलों के नेता या उनके प्रतिनिधि पहुंचे थे। हालांकि ममता की इस रैली में खुद बीएसपी सुप्रीमो मायावती के ना आने और अपनी जगह अपने प्रतिनिधि सतीश चंद्र मिश्रा को भेजने पर कई तरह के कयास भी लगे।

महिलाओं के लिए मोदी सरकार मे शुरु की कई योजनाएं लोकिन महंगाई पर नही कर पाए काबू
कई ऐसी महिलाओं के हित की योजनाएं हैं जो मोदी सरकार ने ही शुरू कीं। मोदी सरकार ने ’बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया, उज्ज्वला योजना के जरिए ऐसे करोड़ों घरों में मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंचाए जहां आज तक महिलाएं चूल्हे पर खाना पकाती थीं। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने लाखों शौचालयों से भी सबसे ज्यादा महिलाओं को ही लाभ हुआ है। इस सभी योजनाओं के बावजूद मोदी सरकार महंगाई को काबू करने में पूरी तरह से नाकामयाब रही। मोदी की 26 सदस्यीय कैबिनेट में छह महिलाएं हैं और सबसे महत्वपूर्ण पांच सदस्यीय कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी में भी दो महिलाएं (विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण) हैं।

कांग्रेस परिवार के करीबी नेताओं की मानें तो प्रियंका महिलाओं, युवाओं और फर्स्ट टाइम वोटर्स को लुभा सकती हैं। प्रियंका की औपचारिक एंट्री भले ही 2019 में हुई हो, लेकिन वह पिछले करीब 20 सालों से अपने भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्रों अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के दौरान अहम भूमिका निभाती आई हैं।

बीएसपी प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि मायावती का महिला होना कभी उनकी नेतृत्व क्षमता के आड़े नहीं आया। उन्होंने कहा, ’मायावती ने पार्टी को जमीन से उठाकर इस मुकाम तक पहुंचाया है। महत्वपूर्ण बात है कि उन्होंने महिलाओं, दलितों, पिछड़ी जातियों को एकजुट किया है। वह एक राष्ट्रीय नेता हैं।’ ममता बनर्जी वही नेता हैं, जिन्होंने 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार को 2011 के विधानसभा चुनाव में पश्‍चिम बंगाल से उखाड़ फेंका था। वह अपनी सादगी और तेज-तर्रार राजनीतिक लहजे से अलग पहचान बनाती हैं। वह अकसर बीजेपी पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर देश में एक सेक्युलर सरकार की जरूरत पर जोर देती रहती हैं।

राजस्थान के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की करारी हार ।

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राजस्थान में अलवर और अजमेर लोकसभा सीट और मांडलगढ़ विधानसभा सीट गवाने के बाद बीजेपी को एक और झटका लगा है। राजस्थान के साथ ही पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की उम्मीदों पर पानी फिर गया। 

श्चिम बंगाल की एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में टीएमसी ने जीत दर्ज की है. राज्य की नवपाड़ा विधानसभा सीट को टीएमसी उम्मीदवार सुनील सिंह ने 63018 मतों से जीता. उन्हें एक लाख से ज्यादा वोट मिले. दूसरे नंबर पर बीजेपी के संदीप बनर्जी को 38,711 मत मिले. इसके अलावा हावड़ा के उलुबेरिया लोकसभा सीट पर भी टीएमसी जीत की ओर अग्रसर है.

2016 के चुनाव में नवपाड़ा विधानसभा सीट पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस को महज 10527 वोट मिले हैं. वो चौथे पायदान पर रही. दिलचस्प बात ये है कि बीजेपी को सीपीआई(एम) से ज्यादा वोट मिले हैं. सीपीएम 35497 वोटों से तीसरे नंबर पर रही.

उलुबेरिया लोकसभा सीट के 9वें राउंड की मतगणना के बाद टीएमसी उम्मीदवार को 3 लाख 74074, बीजेपी को 1 लाख 38229 और कांग्रेस को 12373 वोट मिले हैं. इस तरह देखा जाए तो टीएमसी इस सीट पर भी करीब दो लाख मतों से बढ़त बनाए हुए है. उलुबेरिया लोकसभा सीट पर टीएमसी अपना दबदबा कायम रखती हुई नजर आ रही है. ये सीट सांसद सुल्तान अहमद के निधन के कारण खाली हुई थी. 

पश्चिम बंगाल की एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नवपाड़ा विधानसभा सीट पर भले ही बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन जिस तरह से सीपीआई(एम) को पीछे करके पार्टी दूसरे नंबर पर आई है. ये बंगाल की सियासत में चौकाने वाला है.

टीएमसी से बगावत करके बीजेपी में आए मुकुल रॉय के नेतृत्व में पार्टी उपचुनाव में उतरी थी. ऐसे में ममता और लेफ्ट दोनों के लिए बीजेपी राज्य में एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है.बीजेपी को 38,711 मत मिले हैं.

नवपाड़ा से जीत दर्ज करने वाले टीएमसी उम्मीदवार सुनील सिंह ने कहा, ‘स्थानीय होने के बाद भी मुकुल रॉय का कोई प्रभाव नहीं है. जबकि रॉय बैरकपुर के पास रहते हैं. 

Opposition uniting against Election Commision decision of disqualifying 20 AAP MLA’s

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Election commission on Friday disqualified 20 AAP MLA’s over ‘Office Of Profit’ case. After which, Aam aadmi party went to high court which will resume the hearing on Monday. 
After the decision by Election Commision BJP is criticising AAP & Arvind Kejriwal and asking for CM’s resignation. While the opposition excluding Indian National Congress is supporting Aam aadmi party and stated the decision undemocratic.

Let’s have a look at the leaders supporting Aam aadmi party.
Ex JDU President Sharad Yadav

JDU’s former president Sharad Yadav also came in support of Arvind Kejriwal and told that the suspension of 20 MLA’s by Election Commission is undemocratic. Sharad Yadav wrote on Twitter ‘@ArvindKejriwal Disqualification of AAP MLAs was undemocratic as they were not even heard which is against natural justice. Constitutional bodies in d country are being misused nowadays.Appeal to public to deeply think about which hands d country will be secured in future.’
CPI(M) came in support of Aam aadmi party

CPI(M) also extended there support towards Aam aadmi party & Arvind Kejriwal. CPI(M) took on Twitter and wrote ‘ Brinda Karat: EC decision to disqualify 20 AAP MLAs is undemocratic & selective in procedure & substance. It does not enhance the credibility of the election commission as an autonomous, independent, impartial body. We strongly oppose the decision of the EC.
Mamata Banerjee came up in support of Arvind Kejriwal over disqualification of 20 MLA’s

West Bengal chief minister Mamta Banerjee came in support of Aam aadmi party over the suspension of 20 MLA’s. Mamata Banerjee wrote on Twitter “A Constitutional body cannot be used for political vendetta. The 20 AAP MLAs were not even given a hearing by the Hon EC. Most unfortunate This goes against the principles of natural justice. At this hour we are strongly with Arvind Kejriwal and his team ”

               

               

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Mamata Banerjee came up in support of Arvind Kejriwal over disqualification of 20 MLA’s

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West Bengal chief minister Mamta Banerjee came in support of Aam aadmi party over the suspension of 20 MLA’s. Mamata Banerjee wrote on Twitter “A Constitutional body cannot be used for political vendetta. The 20 AAP MLAs were not even given a hearing by the Hon EC. Most unfortunate This goes against the principles of natural justice. At this hour we are strongly with Arvind Kejriwal and his team ”

Election Commision of India on Friday recommended the disqualification of 20 AAP MLA’s over ‘Office Of Profit’ case. Aam aadmi party has approached high court against the decision. The hearing will now resume on Monday. 
Mamata Banerjee and Arvind Kejriwal have been a good friend now. 
Election Commission decision to disqualify 20 AAP MLA’s is undemocratic: CPI(M)

Along with Mamata Banerjee CPI(M) also extended there support towards Aam aadmi party & Arvind Kejriwal. CPI(M) took on Twitter and wrote ‘ Brinda Karat: EC decision to disqualify 20 AAP MLAs  is undemocratic & selective in procedure & substance. It does not enhance the credibility of the election commission as an autonomous, independent, impartial body. We strongly oppose the decision of the EC.

#AAPMLAsDisqualified’

यूपी में हो रहा है मीट पर बवाल तो वही प.बंगाल में ममता ने शुरू की घर-घर ‘मीट की डिलिवरी’।

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश के कई शहरों में बूचड़खाने बंद कर दिए गए. जिसके बाद राज्य में मीट की सप्लाई ठप हो गई है. लेकिन इन सबके बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीट की डिलिवरी शुरू की है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, ममता सरकार मांसाहारी खाना खाने वाले लोगों के घर अब मीट पहुंचाने की योजना बना रही है. इस योजना का नाम ‘मीट ऑन व्हीलज़’ है. इस योजना से कोलकाता के घरों में मीट पहुंचाया जाएगा. इस पहल की शुरुआत वेस्ट बंगाल लाइवस्टॉक डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (WBLDCL) के मशहूर ब्रांड ‘हरिंघता मीट’ ने की है.

अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के अनुसार पका हुआ नॉन-वेज खाना ले जाने के अलावा इसमें हरिंघता के पैक आईटम भी बेचे जाएंगे. यह योजना पशु संसाधन विकास विभाग के मंत्री स्वप्न देबनाथ ने विभाग के सॉल्ट लेक हेडक्वार्टर पर लॉन्च की थी. अधिकारियों का कहना है, ’’कोलकता में फिलहाल डिलिवरी के लिए अभी तीन वैन रखी गई हैं. हालांकि बाद में वैन की संख्या में बढोत्तरी कर दी जाएगी.’’
मंगलवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश में बूचड़खानों पर की गई कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “जाति, सम्प्रदाय और धर्म के नाम पर हो रहे भेदभाव से लोग डरे हुए हैं.” ‘बटर बिरयानी, गुंडाराज टर्की और डक रोस्ट’ कुछ ऐसी व्यंजन हैं जो बेचे जाएंगे.

एक अधिकारी ने बताया, ‘हरिंघता मीट’ ब्रांड की सेल पिछले कुछ सालों में तीन गुनी बढ़ गई है. उन्होंने कहा, “2014-15 में हमनें मीट के जरिए 4.35 लाख की बिक्री की थी. 2015-16 में यह आंकड़ा 9.58 लाख रुपए तक पहुंच गया है और अगर इसमें अहारे बंग्ला फूड फेस्टिवल को भी जोड़ लिया जाए तो इसकी बिक्री दस लाख तक पहुंच गई.”

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