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मोयावती ने ट्विटर पर की धमाकेदार एंट्री

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जहां एक ओर सभी राजनैतिक पार्टीयां सोशल मीडिया को इस्तेमाल करते हुए चुनावी माहौल तैयार करती हैं, वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) जैसे बड़े राजनीतिक दल ने आज तक सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी। बसपा के किसी भी बड़े नेता का भी कोई आधिकारिक अकाउंट नहीं था। जिसके बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक नई शुरुआत की है और ट्विटर पर अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया है।

मायावती का यह अकाउंट अक्टूबर 2018 में ही बनाया गया था, मगर जनवरी तक इस पर कोई ट्वीट नहीं था। 22 जनवरी को उन्होंने पहला ट्वीट किया। मायावती ने लिखा, ‘नमस्कार भाइयो-बहनो, पूरे सम्मान के साथ मैं आप सबके समक्ष ट्विटर पर कदम रख रही हूं। यह मेरा पहला ट्वीट है। @sushrimayawati मेरा आधिकारिक अकाउंट है और यहीं से मैं भविष्य में आप सबसे जुड़ूंगी। धन्यवाद।’ बता दें कि मायावती जैसी बड़ी नेता और बीएसपी जैसे बड़े राजनीतिक दल का सोशल मीडिया पर ना होना, उनके समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स के लिए हैरानी का विषय था। कई बार बीएसपी के नाम से कुछ फर्जी हैंडल भी चर्चा में आए, लेकिन पार्टी ने हमेशा ही इनका खंडन किया और साफ किया कि इनसे बीएसपी का कुछ लेना-देना नहीं है।

मायावती का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट

बुधवार को मायावती का ट्विटर अकाउंट वेरिफाइड भी हो गया और उस पर ब्लू टिक भी आ गया। बीएसपी ने भी एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मायावती के ट्विटर अकाउंट के बारे में जानकारी दी है। अकाउंट वेरिफाइ होने के बाद मायावती के फॉलोअर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। खबर लिखे जाने तक उनके करीब 7,500 फॉलोअर्स थे।

लोकसभा चुनाव : मोदी और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनीं यह तीन महिलाएं

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Priyanka gandhi Mayawati and mamata banerjee

लोकसभा चुनाव को लेकर मोसम जमने लगा है। वार- जलटवार और आरोप- प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरु हो चुका है। भाजपा अपना लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के चहरे पर लड़ने वाली है तो वही विपक्ष संगठित रूप से चुनाव में उतरने वाला है। 2014 के चुनाव में भाजपी की जीत के पीछे महंगाई जैसे मुद्दे पर महिलाओं का समर्थन की अहम भूमिका थी। इस चुनाव में जहां विपक्ष के पास कई बड़े मिहिला चहरे हैं तो वहीं भाजपा के पास महिला चहरों की कमी दिखाई देगी। भाजपा के पास जो लोकप्रीय और आक्रमक महिला नेता 2014 में थी, वह या तो इस लोकसभा चुनाव में उतरेंगी नही या फिर उनका प्रभाव पिछली बार की तरह नही होगा। सुषमा स्वराज पहले ही अगला चुनाव लड़ने से इंकार कर चुकी है तो स्मृती इरानी पिछला चुनाव हार चुकी है। वहीं उमा भारती का कद भी अब पहले जितना नही रहा। ऐसे में जब चुनाव अभीयान के दौरान विपक्ष की महिला नेता जब प्रधानमंत्री और भाजपा पर सीधा हमला बोलेंगी तो भाजपा को मजबूत और लोकप्रीय महिला नेताओं की कमी जरूर खलेगी।

वहीं विपक्ष की बात करें तो प्रियंका की एंट्री ने कांग्रेस को नई जान दे दी है। राहुल ने भी प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर और महत्वपूर्ण पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देकर अपने इरादे साफ कर दिया हैं। उधर दो अन्य दिग्गज महिला नेता भी इस चुनाव में भाजपा को चुनौती देने को तैयार हैं। ये हैं पश्‍चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती। ये दोनों नेका मोदी और एनडीए गठबंधन को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होते दिख रहे हैं, हालांकि अभी कोई औपचारिक ऐलान होना बाकी है।

बीजेपी छोड़ चुके वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि विपक्ष के पास बीजेपी से ज्यादा मजबूत महिला नेतृत्व है। जनता अगले आम चुनाव में इस नेतृत्व को वोट करेगी और खासतौर पर महिलाओं का समर्थन मिलेगा। बीजेपी के लिए यह परेशान होने का वक्त है, खासतौर पर तीन हिंदीभाषी राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद।

प्रियंका की राजनीति में औपचारिक एंट्री पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्‍न मानाया था। तमाम वरिष्ठ नेताओं ने इसे स्वागतयोग्य फैसला बताया है। हालांकि मायावती और ममता के पास प्रियंका से कहीं ज्यादा अनुभव है और माना जा रहा है कि दोनों अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का चेहरा हो सकती हैं।

मायावती ने जहां उत्तर प्रदेश में अपने सबसे बड़े विरोधी दल समाजवादी पार्टी से पुरानी ’दुश्मनी’ भुलाकर गठबंधन किया, वहीं दूसरी ओर ममता ने पिछले महीने ही कोलकाता में संयुक्त विपक्ष रैली का आयोजन किया था। जिसमें लगभग सभी बड़े विपक्षी दलों के नेता या उनके प्रतिनिधि पहुंचे थे। हालांकि ममता की इस रैली में खुद बीएसपी सुप्रीमो मायावती के ना आने और अपनी जगह अपने प्रतिनिधि सतीश चंद्र मिश्रा को भेजने पर कई तरह के कयास भी लगे।

महिलाओं के लिए मोदी सरकार मे शुरु की कई योजनाएं लोकिन महंगाई पर नही कर पाए काबू
कई ऐसी महिलाओं के हित की योजनाएं हैं जो मोदी सरकार ने ही शुरू कीं। मोदी सरकार ने ’बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया, उज्ज्वला योजना के जरिए ऐसे करोड़ों घरों में मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंचाए जहां आज तक महिलाएं चूल्हे पर खाना पकाती थीं। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने लाखों शौचालयों से भी सबसे ज्यादा महिलाओं को ही लाभ हुआ है। इस सभी योजनाओं के बावजूद मोदी सरकार महंगाई को काबू करने में पूरी तरह से नाकामयाब रही। मोदी की 26 सदस्यीय कैबिनेट में छह महिलाएं हैं और सबसे महत्वपूर्ण पांच सदस्यीय कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी में भी दो महिलाएं (विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण) हैं।

कांग्रेस परिवार के करीबी नेताओं की मानें तो प्रियंका महिलाओं, युवाओं और फर्स्ट टाइम वोटर्स को लुभा सकती हैं। प्रियंका की औपचारिक एंट्री भले ही 2019 में हुई हो, लेकिन वह पिछले करीब 20 सालों से अपने भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्रों अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के दौरान अहम भूमिका निभाती आई हैं।

बीएसपी प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि मायावती का महिला होना कभी उनकी नेतृत्व क्षमता के आड़े नहीं आया। उन्होंने कहा, ’मायावती ने पार्टी को जमीन से उठाकर इस मुकाम तक पहुंचाया है। महत्वपूर्ण बात है कि उन्होंने महिलाओं, दलितों, पिछड़ी जातियों को एकजुट किया है। वह एक राष्ट्रीय नेता हैं।’ ममता बनर्जी वही नेता हैं, जिन्होंने 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार को 2011 के विधानसभा चुनाव में पश्‍चिम बंगाल से उखाड़ फेंका था। वह अपनी सादगी और तेज-तर्रार राजनीतिक लहजे से अलग पहचान बनाती हैं। वह अकसर बीजेपी पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर देश में एक सेक्युलर सरकार की जरूरत पर जोर देती रहती हैं।

बसपा को कमजोर करना चाहती है कांग्रेस : मायावती

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bsp president mayavati in bhopal

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में प्रचार करने के लिए मंगलवार को बसपा प्रमुख मायावती ने भोपाल के दशेहरा मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया। इससे पहले मायावती ने बालाघाट के वारासिवनी में चुनावी सभा को संबोधित किया था। जिसके कारण वह भोपाल की सभा में लगभग आधे घंटे देरी से पहुंची। सभा में मायावती ने नोटबंदी और राफेल के मुद्दे पर भाजपा पर हमला किया तो वहीं गठबंधन न करने पर कांग्रेस को आड़े हांथों लिया।

मोदी सरकार और बीजेपी पर हमला करते हुए मायावती ने कहा कि भाजपा ने देश और प्रदेश में विकास के नाम पर लोगों के साथ छल और धोखा किया हैं। भाजपा की नीतिओं से प्रदेश का किसान वर्ग और मजदूर वर्ग दोनों परेशान है। पेट्रोल व डीजल के दाम में बढ़ोतरी ने भी सबको परेशान किया हुआ हैं। वहीं भाजपा की गलत आर्थिक नीति के चलते देश और प्रदेश में गरीबी और बेरोजगारी बढ़ी हैं। मायावती ने आगे कहा कि “सिर्फ बसपा ने ही सभी जाती और सभी वर्गों के लोगों के विकास का कार्य किया है। उत्तरप्रदेश में हमने ऐसा कार्य करके दिखाया है और आगे भी करना है, इसके लिए हमे बसपा को देश और प्रदेश में मजबूत करना होगा।”

प्रदेश में महागठबंधन न बन पाने के मुद्दे पर मायावती ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने पहले तो गठबंधन करने की बातें की लेकिन बाद में गठबंधन नही किया। कांग्रेस बसपा को कमजोर या ख़त्म करना चाहती है, इसी कारण वह बसपा को चुनाव में कम सीटें दे रही थी, इसलिये हमने मध्यप्रदेश में अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

मुरैना में बसपा बदल रही है उम्मीदवार, हो सकती है बगावत

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कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन बनाने में असफल रही बहुजन समाज पार्टी की मैदानी दिक्कतें बढ़ती जा रही है. मध्यप्रदेश में मुरैना की गिनती उन चुनिंदा  जिलों में की जाती है जहाँ बसपा लड़ने और जीतने की स्तिथि में दिखाई देती है.

जिले की मुरैना विधानसभा सीट को लेकर पार्टी में गुटबाजी और खींचतान देखने को मिल रही है. पार्टी ने पिछले दिनों मुरैना विधानसभा सीट से जिला अध्यक्ष रामप्रकाश राजौरिया को उम्मीदवार घोषित किया था. जिसके बाद राजोरिया तेजी से अपना चुनाव प्रचार कर रहे थे. 

प्रचार शुरू होने के कुछ दिनों बाद अब अचानक उनके स्थान पर नया उम्मीदवार घोषित किये जाने की चर्चाएं तेज हो गई है.

बताया जा रहा है कि दिमनी के विधायक बलवीर दंडोतिया मुरैना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं. बलवीर के साथ ही एक अन्य नाम, शिव सिंह गुर्जर का भी सामने आया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदीप अहिरवार ने कहा की ‘काकी राजोरिया का टिकट बदला जा रहा है या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कह सकते सूची जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी’

पार्टी के जिला अध्यक्ष राकेश कुमार कहा कि सितंबर में राजोरिया को उम्मीदवार घोषित करने के निर्देश पार्टी मुख्यालय से प्राप्त हुए थे इसलिए उन्हें अधिकृत उम्मीदवार का पत्र दिया गया था अगर पार्टी कोई नया नाम भेजेगी दो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

सूत्रों ने बताया कि मुरैना में चल रहे घमासान के कारण पार्टी ने अपनी सूची को जारी होने से फिलहाल रोक दिया है

‘मायावती कुँवारी हैं तो इतने पैसे ले रही हैं, शादीशुदा होती तो क्या करती।’ : साक्षी महाराज

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NewBuzzIndia: अपने विवादित बयानों के लिये मशहूर भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने इस बार भी एक बहुत बड़ा बयान देकर सियासत को गर्म कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बसपा सुप्रीमों मायावती पर एक भद्दा कमेंट करते हुए कहा, ‘मायावती इस समय टिकट देने के नाम पर 7 करोड़, 5 करोड़, 4 करोड़ रुपए ले रही हैं. इसीलिए उनकी पार्टी के धुरंदर पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं. बहन कुमारी मायावती कुंवारी हैं तो करोड़ों ले रही हैं, अगर शादीशुदा होतीं तो न जाने कितना लेतीं।’
एक न्यूज़ पोर्टल के मुताबिक बुधवार को साक्षी महाराज ने शिवपुर ग्रामसभा में बीजेपी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों को संबोधित करने के दौरान मायवती पर अभद्र टिप्पणी की।

राहुल ने मायावती-मुलायम को लिया आड़े हाथ, कहा दोनों का रिमोट है मोदी के हाथ !

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rahul gandhi


Newbuzzindia: उत्तरप्रदेश में जल्द ही चुनाव होने को है और इसका असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। जहाँ एक तरफ यूपी सरकार में घरेलु खलबली मची हुई है, वहीँ दूसरे राजनैतिक दल उन्हें घेरे हुए है। कांग्रेस भी इस खलबली का फायदा उठाने में लगी हुई है तो वहीँ भाजपा को भी आड़े हाथों ले रही है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह और बसपा सुप्रीमों मायावती को सीधा निशाना लगाते हुए कहा कि ‘मुलायम सिंह और मायावती,नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सकते, क्योंकि इनका रिमोट कंट्रोल CBI और मोदीजी के पास है!’

यूपी में 2017 में विधानसभा चुनाव होने को है। ऐसे में ये देखना ख़ास होगा की चुनाव में इस बयानबाजी का लय फायदा मिलता है और किसे फायदा मिलेगा …!! 

मायावती ने किया ऐलान, करोड़ों दलितों के साथ करेंगी धर्म परिवर्तन

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NewBuzzIndia:   

​केंद्र सरकार के राज्यमंत्री और महाराष्ट्र के बड़े दलित नेता रामदास अठावले ने मायावती पर जमकर निशाना साधा था अठावले ने दलित मुद्दों को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती पर जोरदार हमला बोला किया था। इसके जवाब में बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले पर पलटवार करते हुए कहा कि,  ‘समय आने पर देश के करोड़ों दलितों के साथ वे बौध धर्म अपनाएंगी।’ 
मायावती ने अठावले पर हमला करते हुए कहा कि, “बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपनाने मे हड़बड़ी नहीं की। लाखों अनुयाइयों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली. मैं भी समय आने पर बौध धर्म अपना लूंगी।”



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उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की मंशा है. मायावती ने कहा कि गौहत्या के नाम पर दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है। 

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गौरतलब है कि, भाजपा नेता अठावले ने मायावती पर हमला करते हुए कहा था कि, मायावती बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर राजनीति तो करती हैं लेकिन, उनके आदर्शों को नहीं मानती। अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाली मायावती ने अभी तक बौद्ध धर्म क्यों नहीं अपनाया। उन्होंने आगे कहा कि दलितों के हितों से मायावती को कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि मायावती ने कई बार बौद्ध धर्मं अपनाने की बात की, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया और अभी तक वो हिंदू हैं।

ये क्या ? मायावती की नाक काट कर उन्हें बना दिया शूर्पनखा और स्वाति बनी भवानी !

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Newbuzzindia: उत्तरप्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव होने है। इसलिए यूपी का हर दल दूसरे दल को हर मुद्दे पर गंभीरता से घेरने में जुटा हुआ है। विपक्षी दल की एक गलती उसके बड़े वोट बैंक को खतरे में डाल सकता है । ऐसा ही कुछ मायावती के साथ हो रहा है। वे स्वाति सिंह और उनकी बेटी पर बयान देकर फंस चुकी है ।

मायावती को स्वाति सिंह रोज नए तरीके से घेर रही है। इस बार एक नया पोस्टर निकाला गया है। इन्हें बीजेपी के छात्र नेताओं की तरफ से पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में स्वाति सिंह और उनकी बेटी के खिलाफ नारेबाजी करने पर मायावती, और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं पर निशाना साधा गया है। इस पोस्टर पर विवाद शुरू हो गया है। इस पोस्टर में बीएसपी सुप्रीमो मायावती को शूर्पनखा और बीएसपी नेता नसीमुद्दीन को रावण बताया गया है।

आपको बता दे की इस पोस्टर में दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह को देवी दुर्गा के रूप में दिखाया गया है। वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या को कलयुग का राम बताया गया है।  पोस्टर में दयाशंकर सिंह को लक्ष्मण के रूप में दिखाया गया है तो वहीं मायावती का साथ छोड़ चुके स्वामी प्रसाद मौर्या को विभीषण बताया गया है। मायावती के करीबी सतीश चंद्र मिश्रा को मारीच का रूप दिया गया है। फिलहाल इस पोस्टर को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बीजेपी की तरफ से कहा गया है कि उसका इस पोस्टर से कुछ लेना देना नहीं है लेकिन इसने सूबे की सियासत में हलचल तो मचा ही दी है।

जानकारी के अनुसार इन पोस्टरो को इलाहाबाद के आरक्षण मुक्त महासंग्राम नाम के एक संगठन की तरफ से अनुराग शुक्ला और संजय कुमार सोनकर के द्वारा लगाए हैं। 

मायावती का केजरीवाल पर हमला “केंद्र के अधीन रहे पुलिस, केजरीवाल अपनी मांग पर करे पुनर्विचार !”

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#Newbuzzindia/लखनऊ | अरविन्द केजरीवाल को राजनीति के हर खिलाड़ी से नसीहते मिलना शुरू हो गयी है। इस कड़ी में नया नाम मायावती का आया है। मायावती ने केजरीवाल की एक मांग को गलत बताया और उन्हें पुनर्विचार करने की हिदायत भी दी।

केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि दिल्ली पुलिस की कमान केंद्र नही दिल्ली सरकार को होनी चाहिए। केजरीवाल की इस मांग को मायावती ने अनुचित बताते हुए कहा कि पुलिस की कमान तो केंद्र को ही रहनी चाहिए क्योंकि दिल्ली देश की राजधानी है और यहाँ देश के महत्वपूर्ण फैसले होते है। वही मायावती ने केजरीवाल को यह भिबकह कि वे अपनी मांग पर पुनर्विचार करे।

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