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मध्यप्रदेश में कमलनाथ के शपथग्रहण में केजरीवाल के शामिल न होने का यह हो सकता है बड़ा कारण

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मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ ने सोमवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में शपथ ली। शपथ में कांग्रेस और विपक्ष के वरिष्ट नेताओं से साथ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी भी शामिल हुए। वहीं विपक्षी एकता के इस मंच से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नदारद दिखे। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री केजरीवाल को नियोता भी भेजा गया है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नही हो पाया है कि आखिर अरविंद या आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता कार्यक्रम में शामिल क्यों नही हुआ। वहीं अटकलें इस बात की भी लगे जा रही है कि सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा सिख दंगों पर सुनाए गए फैसले के चलते केजरीवाल कार्यक्रम में शामिल नही हुए।

तो क्या सिख दंगों के दाग ने केजरीवाल को भोपाल आने से रोका ?

सिख दंगों का कोई आरोपी बचना नही चाहिए: केजरीवाल

कमलनाथ की शपथ के साथ ही सोमवार को 1984 के सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके बाद दिल्ली में आप के सांसद भगवंत मान ने मांग की है कि सिख दंगों में कमलनाथ पर भी केस चलना चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं केजरीवाल ने भी सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि वे इसका स्वागत करते हैं। केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि दंगे में शामिल कोई भी आरोपी नहीं बचना चाहिए, चाहे कोई कितनाभी ताकतवर क्यों न हो। आम आदमी पार्टी इससे पहले भी सिख दंगों में कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि सिख दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ सफेद कुर्ते पहनकर घूम रहे हैं। कांग्रेस ने 32 साल से अपनी मानसिकता नहीं बदली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिख दंगों के दाग से बचने के लिए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कमलनाथ के शपथग्रहण में शामिल नही हुए ?

मध्य प्रदेश में 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी नीतीश की जेडीयू

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मध्यप्रदेश चुनाव में महज 39 दिन बाकी है और राजनैतिक माहौल गरमाता जा रहा है। इस चुनावी रण में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) ने भी छंलाग लगा दी है। इसकी जानकारी जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल ने दी है। जानकारी के मुताबिक जेडीयू 150 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है। जिसमें विंध्य, बुंदेलखंड, महाकौशल और नर्मदांचल की सीटें शामिल हैं।

क्या मध्यप्रदेश की कमान प्रशांत के हाथों में ?

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर जेडीयू में शामिल हो गए हैं। नीतीश ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौपीं है। प्रशांत किशोर ही इस समय जेडीयू की चुनावी रणनीति तैयार करते नजर आ रहे हैं। अब ये देखना काफी दिलचस्प होगा की क्या प्रशांत किशोर का जादू मध्यप्रदेश में चलेगा?? 25 अक्टूबर को जेडीयू की चुनावी रणनीति पर चर्चा को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को पटना बुलाया गया है।

छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन का प्रयास :

जेडीयू चुनाव में उतरने से पहले प्रदेश की छोटी पार्टीयों को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है। जिसमें अपना दल, भारतीय शक्ति चेतना, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नाखुश लोगों से इस मसले पर बात कर रही है। 22 अक्टूबर को नीतीश ने सभी छोटे दलो के पदाधिकारियों के साथ बैठक बुलाई है, जिसमें सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा की जाएगी। फिर 23 अक्टूबर को जेडीयू अपनी पहली सूची जारी कर देगी।

गोंडवाना और जेडीयू का गठबंधन हो पाएगा ?

मध्यप्रदेश चुनाव से पहले पार्टियों के गठबंधन का सिलसिला शुरु हो चुका है। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और सपा के गठबंधन की खबरें आ  रहीं थीं। पर अब चुनावी मैदान में जेडीयू भी गोंगपा को अपने पाले में लाने में जुट गई है। अब देखना होगा कि गोंगपा किसके समर्थन में जाती है। वहीं एक ओर प्रदेश में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, सपाक्स समेत कई छोटी बड़ी पार्टियां भी चुनाव लड़ने वाली है।

कंगाल हुई अरविंद की आप, दोबारा इमानदार सरकार चाहिए तो देना होगा चंदा

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राज्य दर राज्य चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी अब कंगाल हो चुकी है। तालकटोरा स्टेडियम में पार्टी के मासिक चंदा अभियान का आगाज करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वहां मौजूद जनता से कहा की ‘इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है की सरकार के पास बहुत पैसा है लेकिन पार्टी कंगाल है। दो साल बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने है और पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा नही है। ऐसे में अगर आप दिल्ली में एक बार फिर ईमानदार सरकार चाहते है तो इसके लिए आपको चंदा देना पड़ेगा’।
अरविंद केजरीवाल ने इस मौके पर एक मोबाइल नंबर (9871010101) भी जारी किया। इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर कोई भी पार्टी से जुड़ सकता है और चंदा दे सकता है।
अरविंद केजरीवाल ने इस मौके सभी लोगो से हर महीने पार्टी को चंदा देने कि अपील की। केजरीवाल ने कहा की पार्टी के वॉलेंटियर्स भी हर महीने 100 रुपए जरूर दान करें।

https://twitter.com/raghav_chadha/status/1051821338241961990?s=19

कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने कहा की ‘दिल्ली में देश की सबसे ईमानदार सरकार है। पिछले साढ़े तीन साल में हमने 4 बजट पेश किये है और कुल दो लाख करोड़ खर्च किये है। ऐसे में अगर हम ठेकेदारों से 1 फीसदी कमीशन भी लेते तो 2000 करोड़ रुपये हमारे पास होते लेकिन हमने ईमानदारी से काम किया। हमने वो करके दिखाया जो दुसरे राज्यों में 15-15 सालों से सत्ता पर बैठे लोग नही कर पाए।’
दिल्ली सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए केजरीवाल ने कहा की ‘हमने ईमानदारी से काम किया। मोहल्ला क्लीनिक बनाए, स्कूलों की हालत सुधारी। 24 घंटे सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराई। अगर हमने ठेकेदारों से पैसे लिए होते तो हम यह सब नही कर पाते’।

20 विधायकों की बर्खास्तगी पर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दिल्ली की जनता के नाम पत्र

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इन्होंने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया …
मेरे प्यारे दिल्लीवासी,
आज इस खुले पत्र के माध्यम से मैं आपसे सीधे बात करना चाहता हूँ। मन दुःखी है। पर निराश नहीं हूँ। क्यूँकि मुझे आप पर भरोसा है। दिल्ली के और देश के लोग मेरी आशा हैं। 
तीन साल पहले आपने 70 में से 67 विधायक चुनकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनायी थी। आज इन्होंने आपके 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया। इनका कहना है की ये 20 विधायक “लाभ के पद” पर थे। 
हमने इन 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था और इन्हें अलग अलग जिम्मेदारियाँ दी थी। जैसे एक विधायक को सरकारी स्कूलों की ज़िम्मेदारी दी। वो रोज़ सरकारी स्कूलों में जाता था, देखता था कि टीचर आए हैं, सब कुछ ठीक चल रहा है। जहाँ ज़रूरत होती थी वहाँ ऐक्शन लेता था। इसी तरह एक विधायक को सरकारी अस्पतालों की ज़िम्मेदारी दी, एक विधायक को मोहल्ला क्लीनिक की ज़िम्मेदारी दी। इस तरह 20 विधायकों को हमने अलग अलग जिम्मेदारियाँ दी। बदले में इन विधायकों को कोई सरकारी गाड़ी नहीं दी, कोई बंगला नहीं दिया, एक नया पैसा तनख़्वाह नहीं दी। कुछ भी नहीं दिया। ये सभी विधायक अपने ख़ुद के पैसे ख़र्च करके काम करते थे क्योंकि ये सब आंदोलन से आए थे और देश के लिए काम करने का जुनून था। 
जब इनको कुछ नहीं दिया तो ये “लाभ का पद” कैसे हो गया? आपके इन विधायकों ने चुनाव आयोग को कहा कि इन्हें अपनी बात कहने का मौक़ा दिया जाए। ये साबित कर देंगे कि इन्होंने कोई लाभ नहीं लिया। चुनाव आयोग ने इन्हें 23 जून को पत्र लिखकर कहा कि इन्हें सुनवाई के लिए तारीख़ दी जाएगी। उसके बाद इन्हें सुनवाई की कोई तारीख़ नहीं दी गयी और सीधे केंद्र सरकार ने आपके इन 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया, बिना सुनवाई किए, बिना इनके सबूत और गवाह देखे। 
ये तो केंद्र सरकार जनता के साथ घोर अन्याय कर रही है। आपके द्वारा चुने हुए 20 विधायकों को बिना सुनवाई के मनमाने ढंग से बर्खास्त कर दिया? 
केंद्र सरकार ऐसा पहली बार नहीं कर रही। पिछले तीन सालों में उन्होंने आपके द्वारा चुनी हुई दिल्ली सरकार को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आपके 18 विधायकों के ख़िलाफ़ झूठे मुक़दमे लगा कर गिरफ़्तार किया गया। जब कोर्ट में पेशी हुई तो कोर्ट ने सबको छोड़ दिया। कई मामलों में तो कोर्ट ने केंद्र सरकार को फ़र्ज़ी मुक़दमे लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई। फिर इन्होंने आपके CM अरविंद केजरीवाल पर CBI की रेड करवा दी लेकिन इनको कुछ नहीं मिला। फिर इन्होंने आपके विधायकों को करोड़ों रुपए देकर ख़रीदने की कोशिश की। पर आपके विधायक इतने मज़बूत निकले कि ये लोग आपके एक विधायक को भी नहीं तोड़ पाए। फिर इन्होंने केजरीवाल सरकार की 400 फ़ाइलो की जाँच के आदेश दे दिए। इनको उम्मीद थी कि इन फ़ाइलो में केजरीवाल के ख़िलाफ़ ज़रूर कुछ मिल जाएगा और ये केजरीवाल को गिरफ़्तार कर लेंगे। 6 महीने तक LG साहब के दफ़्तर में 20 अफ़सर इन फ़ाइलो की जाँच करते रहे पर इनको कुछ नहीं मिला। 
सब तरफ़ से हारकर इन्होंने अब आपके 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया। ये लोग आख़िर ये सब क्यों कर रहे हैं? ये लोग हमें इतना तंग क्यों कर रहे हैं? हमारा क़सूर क्या है? 
मैं बताता हूँ कि ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। तीन साल पहले आपने देश की सबसे ईमानदार सरकार चुनी। पिछले तीन सालों में आपकी सरकार ने ढेरों काम किए- दिल्ली में बिजली के दाम देश में सबसे कम कर दिए, तीन साल से दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ने नहीं दिए, पानी मुफ़्त कर दिया, 309 कालोनियों में पाइप बिछा कर घर घर तक पानी पहुँचाया, सरकारी स्कूलों का कायापलट किया, प्राइवट स्कूलों से बढ़ी फ़ीस वापिस दिलवाई, मोहल्ला क्लीनिक बनाए, सभी अस्पतालों में दवाई और टेस्ट मुफ़्त कर दिए, बुज़ुर्गों की पेन्शन बढ़ा दी, कई नए फ़्लाइओवर बनाए, कई नई सड़के बनवाई, कई कालोनियों में गली और नालियाँ बनवाई। आपकी ईमानदार सरकार ने इन तीन सालों में और भी ढेरों काम किए। 
अब 2 साल बचे हैं। इन दो सालों में और बहुत सारे काम करने हैं। पूरी दिल्ली में CCTV कैमरे लगाने हैं, पूरी दिल्ली में फ़्री Wi Fi देने की योजना बना ली है, सरकारी सेवाओं की डोरस्टेप डिलिवरी की योजना लागू होने जा रही है, हर महीने राशन घर घर तक पहुँचाने का इंतज़ाम कर रहे है, दिल्ली की सारी कच्ची कालोनियों में पानी, सीवर, गली और नाली बनाने का काम शुरू हो गया है। ये सब काम अगले 2 साल में करने हैं। 
ये लोग इसी बात से घबरा रहे हैं। जिस तेज़ी से केजरीवाल सरकार काम कर रही है, इन्हें उसी बात से डर लग रहा है। केजरीवाल जी अपने अच्छे कामों की वजह से दिल्ली ही नहीं, पूरे देश में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। ये केजरीवाल सरकार को काम नहीं करने देना चाहते। 
भाजपा का अपना ग्राफ़ तेज़ी से गिर रहा है। भाजपा से आज सब ग़ुस्सा हैं- दलित, किसान, व्यापारी, मज़दूर, यूथ, विद्यार्थी, अल्पसंख्यक- सब इनसे नाराज़ हैं। ये लोग केजरीवाल को काम करने से हर हाल में रोकना चाहते हैं। 
20 विधायकों को बर्खास्त करके इन्होंने दिल्ली पर चुनाव थोप दिए। अब आचार संहिता लग जाएगी और दिल्ली में सारा सरकारी काम रुक जाएगा। उसके बाद लोक सभा के चुनाव आ जाएँगे। फिर आचार संहिता लग जाएगी और फिर सारा सरकारी काम रुक जाएगा। और उसके बाद विधान सभा के चुनाव आ जाएँगे। 
तो इन 20 विधान सभाओं पर चुनाव थोप कर एक तरह से भाजपा ने अगले दो सालों तक दिल्ली में सारा विकास का काम रोक दिया। और इन 20 विधानसभाओं में चुनाव पर फ़िज़ूल में आपका पैसा व्यर्थ होगा। 
क्या ये गंदी राजनीति नहीं है? क्या दिल्ली को इस तरह चुनावों में धकेलना ठीक है? क्या दिल्ली के सारे विकास कार्यों को दो साल तक ठप करना सही है? क्या इस तरह ग़ैर संवैधानिक और ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से आपके चुने हुए विधायकों को बर्खास्त करना सही है?
मुझे आपसे ही उम्मीद है। आप ज़रूर इसका सही और असरदार जवाब देंगे। 
आपका अपना
मनीष सिसोदिया

Opposition uniting against Election Commision decision of disqualifying 20 AAP MLA’s

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Election commission on Friday disqualified 20 AAP MLA’s over ‘Office Of Profit’ case. After which, Aam aadmi party went to high court which will resume the hearing on Monday. 
After the decision by Election Commision BJP is criticising AAP & Arvind Kejriwal and asking for CM’s resignation. While the opposition excluding Indian National Congress is supporting Aam aadmi party and stated the decision undemocratic.

Let’s have a look at the leaders supporting Aam aadmi party.
Ex JDU President Sharad Yadav

JDU’s former president Sharad Yadav also came in support of Arvind Kejriwal and told that the suspension of 20 MLA’s by Election Commission is undemocratic. Sharad Yadav wrote on Twitter ‘@ArvindKejriwal Disqualification of AAP MLAs was undemocratic as they were not even heard which is against natural justice. Constitutional bodies in d country are being misused nowadays.Appeal to public to deeply think about which hands d country will be secured in future.’
CPI(M) came in support of Aam aadmi party

CPI(M) also extended there support towards Aam aadmi party & Arvind Kejriwal. CPI(M) took on Twitter and wrote ‘ Brinda Karat: EC decision to disqualify 20 AAP MLAs is undemocratic & selective in procedure & substance. It does not enhance the credibility of the election commission as an autonomous, independent, impartial body. We strongly oppose the decision of the EC.
Mamata Banerjee came up in support of Arvind Kejriwal over disqualification of 20 MLA’s

West Bengal chief minister Mamta Banerjee came in support of Aam aadmi party over the suspension of 20 MLA’s. Mamata Banerjee wrote on Twitter “A Constitutional body cannot be used for political vendetta. The 20 AAP MLAs were not even given a hearing by the Hon EC. Most unfortunate This goes against the principles of natural justice. At this hour we are strongly with Arvind Kejriwal and his team ”

               

               

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Mamata Banerjee came up in support of Arvind Kejriwal over disqualification of 20 MLA’s

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West Bengal chief minister Mamta Banerjee came in support of Aam aadmi party over the suspension of 20 MLA’s. Mamata Banerjee wrote on Twitter “A Constitutional body cannot be used for political vendetta. The 20 AAP MLAs were not even given a hearing by the Hon EC. Most unfortunate This goes against the principles of natural justice. At this hour we are strongly with Arvind Kejriwal and his team ”

Election Commision of India on Friday recommended the disqualification of 20 AAP MLA’s over ‘Office Of Profit’ case. Aam aadmi party has approached high court against the decision. The hearing will now resume on Monday. 
Mamata Banerjee and Arvind Kejriwal have been a good friend now. 
Election Commission decision to disqualify 20 AAP MLA’s is undemocratic: CPI(M)

Along with Mamata Banerjee CPI(M) also extended there support towards Aam aadmi party & Arvind Kejriwal. CPI(M) took on Twitter and wrote ‘ Brinda Karat: EC decision to disqualify 20 AAP MLAs  is undemocratic & selective in procedure & substance. It does not enhance the credibility of the election commission as an autonomous, independent, impartial body. We strongly oppose the decision of the EC.

#AAPMLAsDisqualified’

गुजरात में कांग्रेस के साथ आए अरविंद केजरीवाल, जनता से की अपील..

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की जनता से अपील की है कि वह अपना वोट ना बाटे। केजरीवाल ने कहा है कि पूरे देश की निगाहें गुजरात पर लगी हुई है। केजरीवाल ने जनता से कहा कि आज देश की जनता जीएसटी और नोटबंदी से परेशान है। 
केजरीवाल ने कहा कि पहले नोटबंदी फिर जीएसटी ने लोगों के काम धंधे बन्द कर दिए है। लोग बेरोजगार हो गए है। केजरीवाल ने गुजरात की जनता से अपील की है कि वह बीजेपी के खिलाफ वोट करके देश की आवाज बन सकते है। 

बता दें कि सीएम केजरीवाल ने यह बयान आम आदमी पार्टी की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया है। केजरीवाल ने आगे कहा कि हमारा फ़र्ज बीजेपी को हराना है । 

बिना नाम लिए किया कांग्रेस का समर्थन
केजरीवाल ने कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस का नाम लिए बिना गुजरात की जनता से अपील की है कि वह जब वोट देने जाएं तो पूरे देश के बारे में सोचें। जहां आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार है, वहां आप को वोट दें। जहां आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवार नही उतरे है वहां जो उम्मीदवार बीजेपी को हरा सकता है उसे वोट करें। हमारा मकसद बीजेपी को हराना है।

जानकारों का कहना है कि केजरीवाल के बयान से यह साफ होता है कि वह बिना नाम लिए गुजरात की जनता से कांग्रेस के पक्ष में वोट देने की अपील की है। आप चाहती है कि किसी भी तरह सेक्युलर वोटों का विभाजन रोकना जरूरी है।

आप ने पंजाब चुनाव से ली सीख
आम आदमी ने पंजाब चुनाव से सीख लेते हुए यह कदम उठाया है। पंजाब चुनाव में करारी हार झेलने के बाद आम आदमी पार्टी ने गुजरात की चुनिंदा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं बाकी सीटों पर जनता से अपील की है कि वह बीजेपी के खिलाफ वोट करे।

देश की आवाज है- सरकार बहानेबाज है, राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तंज !

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राहुल गांधी इन दिनों सोशल मीडिया पर छाए हुए है। राहुल गांधी के ट्वीट्स को इन दिनों नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल से भी ज्यादा पसंद किया जा रहा है। राहुल गांधी ने इस सिलसिले को जारी रखते हुए ट्वीट के जरिये मोदी सरकार पर हमला बोला।
राहुल गांधी ने जीएसटी के मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने ट्विटर पर ट्वीट करके कहा कि –

देश की आवाज है- सरकार बहानेबाजी बंद करे

आम जनता के इस्तेमाल की अधिकतम चीजों पर GST खत्म करे।

महंगाई का बोझ कम करने के लिए पेट्रोल, डीजल और गैस सिलिंडर को GST के अंदर लाए।

GST का “एक रेट” तय करे जो कम से कम हो और किसी भी हालत में 18% से ज्यादा न हो।


देश को नही चाहिए गब्बर सिंह टैक्स: राहुल गांधी
एक अन्य ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा कि देश की जनता को गब्बर सिंह टैक्स नही चाहिए बल्कि देश की जनता को सरल जीएसटी चाहिए। कांग्रेस और देश की जनता ने लड़कर कई वस्तुओं पर 28% टैक्स ख़त्म करवाया है।18% CAP के साथ एक रेट के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। अगर भाजपा ये काम नहीं करेगी, तो कांग्रेस करके दिखाएगी।

किसे फिक्र है दिल्ली की हवा में घुले जहर की : पुण्य प्रसून वाजपेयी

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2675 करोड 42 लाख रुपये । तो ये देश का पर्यावरण बजट है । जी पर्यावरण मंत्रालय का बजट।  यानी जिस देश में प्रदूषण की वजह से हर मिनट 5 यानी हर बरस 25 लाख से ज्यादा लोग मर जाते है उस देश में पर्यावरण को ठीक रखने के लिये बजट सिर्फ 2675.42 हजार करोड हैं । यानी 2014 के लोकसभा चुनाव में खर्च हो गये 3870 करोड़। औसतन हर बरस बैंक से उधारी लेकर ना चुकाने वाले रईस 2 लाख करोड़ डकार रहे है । हिमाचल-गुजरात के चुनाव प्रचार में ही 3000 करोड़ से ज्यादा फूंके जा रहे हैं। पर देश के पर्यावरण के लिये सरकार का बजट है 2675.42 करोड़ । और उस पर भी मुश्किल ये है कि पर्यावरण मंत्रालय का बजट सिर्फ पर्यावरण संभालने भर के लिये नहीं है । बल्कि दफ्तरों को संभालने में 439.56 करोड खर्च होते हैं। राज्यों को देने में 962.01 करोड खर्च होते हैं।  तमाम प्रोजेक्ट के लिये 915.21 करोड़ का बजट है। तो नियामक संस्थाओं के लिये 358.64 करोड का बजट है। 
यानी इस पूरे बजट में से अगर सिर्फ पर्यावरण संभालने के बजट पर आप गौर रकेंगे तो जानकार हैरत होगी कि  सिर्फ 489.53 करोड ही सीधे प्रदूषण से जुडा है जिस्स दिल्ली समेत समूचा उत्तर भारत परेशान है । और प्रदूषण को लेकर जब हर कोई सेन्ट्रल पौल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड से सवाल करता है तो सीपीसी का कुल बजट ही 74 करोड 30 लाख का है ।

 
तो पर्यावरण को लेकर जब देश के पर्यावरण मंत्रालय के कुल बजट का हाल ये है कि देश में  प्रति व्यक्ति 21 रुपये सरकार खर्च करती है और इसके बाद इस सच को समझिये कि एक तरफ देश में पर्यावरण मंत्रालय का बजट 2675.42 करोड है । दूसरी तरफ पर्यावरण से बचने का उपाय करने वाली इंडस्ट्री का मुनाफा 3 हजार करोड से ज्यादा का है । तो पर्यावरण को लेकर इन हालातों के बीच ये सवाल कितना मायने रखता है कि देश के पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन उस वक्त जर्मनी में थे जब दिल्ली गैस चैबर हो चली । और लौट कर भी दिल्ली नहीं पहुंचे बल्कि वह अपनी बात गोवा से कर रहे है । तो जाहिर है पर्यावरण मंत्री भी इस सच को समझते है कि उनके मंत्रालय के बजट में सिर्फ प्रदूषण से मुक्ति के लिये ही जब 275 करोड रुपये है और प्रजोक्ट टाइगर के लिये 345 करोड है । तो फिर पर्यावरण मंत्री का काम दुनियाभर में पर्यावरण को लेकर चिता के बीच अलग अलग कान्फ्रेस में शामिल होने के अलावे और क्या काम हो सकता है । और जर्मनी भी पर्यावरण मंत्री सयुक्त राष्ट्र के मौसम बदलाव के कॉन्फ्रेंस में शामिल होने ही गये थे । 

ऐसे में एक सवाल जीने के अधिकार का भी है क्योकि संविधान की धारा 21 में साफ साफ लिखा है जीने का अधिकार । और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वस्थ वातावरण में जीवन जीने के अधिकार को पहली बार उस समय मान्यता दी गई थी, जब रूरल लिटिगेसन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र बनाम राज्य, AIR 1988 SC 2187 (देहरादून खदान केस के रूप में प्रसिद्ध) केस सामने आया था।   यह भारत में अपनी तरह का पहला मामला था, जिसमें सर्वोच्च  न्यायालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत पर्यावरण व पर्यावरण संतुलन संबंधी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में गैरकानूनी खनन रोकने के निर्देश दिए थे। 

वहीं एमसी मेहता बनाम भारतीय संघ, AIR 1987 SC 1086 के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदूषण रहित वातावरण में जीवन जीने के अधिकार को भारतीय संविधान के अनु्छेद 21 के अंतर्गत जीवन जीने के मौलिक अधिकार के अंग के रूप में माना था। तो फिर दिल्ली के वातावरण में जब जहर धुल रहा है । देश में हर मिनट 5 लोगो की मौत पप्रदूषण से हो रही है । तो क्या सरकार इस चिंता से वाकई दूर है । खासकर तब जब देश में पीएम से लेकर सीएम और हर मंत्री ही नही हर संसद सदस्य तक संविधान की शपथ लेकर ही पद संबालता है । तो फिर जीने के अधिकार की खुली धज्जियां उड़ रही है तो संसद का विसेष सत्र क्यो नही बुलाया जा रहा है । सुप्रीम कोर्ट अपनी ही  व्याख्या के तहत केन्द्र को नोटिस देकर ये सवाल क्यो नहीं पूछ रहा है । 
क्योकि एम्स के डायरेक्टर तक कह रहे है कि दिल्ली में लंदन के 1952 के द ग्रेट स्मॉग जैसे हालात बन रहे हैं । और पर्यावरण को लेकर संसद तो दूर तमाम राज्यों के सीएम भी आपस में बैठने को तैयार नहीं है । केजरीवाल पंजाब और हरियाणा के सीएम से मुलाकात का वक्त मांग रहे है । हर राज्य की मुस्किल तो ये भी है कि किसी के पास पर्यावरम से पैदा होते प्रदूषण को रोकने के लिये  अलग से बजट नहीं है । तो गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी दिल्ली में लोगों की सांस कब सीने से उखड़ जाए-कहा नहीं जा सकता। देश की राजधानी में लोग स्मॉग में घुटकर नहीं मरेंगे-इसकी गारंटी लेने वाला कोई नहीं। क्योंकि सच यही है कि आम आदमी की जान की फ्रिक किसी को है नहीं। 

आलम ये सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एनजीटी ने तीन साल में केंद्र और दिल्ली सरकार को प्रदूषण रोकने में नाकाम रहने के लिए कई बार फटकार लगाई और तीनों अदालतों ने तीन साल में 44 से ज्यादा बार अलग अलग ऑर्डर दिए-जिनकी धज्जियां उड़ा दी गईं। मसलन , सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल में 18 आदेश दिए । हाईकोर्ट ने तीन साल में 18 आदेश दिए । एनजीटी ने तीन साल में 8 आदेश दिए । और इन आदेशों पर अमल हुआ होता तो दिल्ली का आज यह हाल न होता। क्योंकि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से लेकर डीजल गाड़ियों पर रोक तक कई आदेश दिए गए लेकिन अमली जामा किसी पर पहनाया नहीं जा सका। और आज जब दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है-तब का हाल यह है कि धुंध की वजह से बीते 24 घंटे में 17 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है । 

दिल्ली-पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने आपस में बात तक नही की है । कृत्रिम बारिश पर कोई फैसला हो नहीं सका। एक एजेंसी कहती है कि यह जरुरी है तो केंद्र सरकार खारिज करती है। सरकार के ही अलग अलग मंत्री अलग बात करते हैं । तो आखरी सच यही है कि  धुंध में पसरे जहर को सांसों में उतारना उस गरीब आदमी की मजबूरी है-जिसे रात को पेट भरने के लिए सुबह को काम पर निकलना जरुरी है। वो घर की चारदीवारी में नहीं बैठ सकता। वो एयर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकता। वो अपनी कार में काम पर नहीं जाता। उसे काम पर निकलना ही होगा। उसे सांसों के जरिए जहर छाती में लेना ही होगा। 

तो सवाल यही है कि क्या जहरीली धुंध पर सरकार कुछ करेगी या एक तमाशा जो जारी है-वो कुदरत के आसरे खुद की खत्म हो जाएगा। क्योंकि प्रृकति देर सबरे खुद धुंध छांटेगी ही और जनता-सरकार-अदालत सब फिर अपने काम में लग जाएंगे। जहरीले धुंध से बेपरवाह।

नोट : यह लेख आज तक के प्राइम टाइम एंकर और एग्जीक्यूटिव एडिटर पुण्य प्रसून वाजपेयी द्वारा लिखा गया है। यह लेख लेखक की फेसबुक प्रोफाइल से लिया गया है। इस लेख को Newbuzzindia द्वारा संपादित नही किया गया है। 

Twitter पर नरेंद्र मोदी और अरविन्द केजरीवाल से भी आगे निकले राहुल गांधी, देखें रिपोर्ट

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2014 में भाजपा की जीत का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया मीडिया रहा था । वहीं कांग्रेस उस समय सोशल मीडिया से काफी दूर थी । उस समय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर अकाउंट तक नही बनाया था ।

 

जिसके बाद अपनी गलती से सीख लेते हुए कांग्रेस भी सोशल मीडिया की रेस में शामिल हो गयी । कांग्रेस सोशल मीडिया पर देर से जरूर आई पर दुरुस्त आई । जून 2015 में ट्विटर पर आए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर फॉलोवर्स की संख्या 2 मिलियन से ज्यादा हो गए है ।

अक्टूबर 2017 : नरेंद्र मोदी और केजरीवाल से आगे निकले राहुल गांधी

 

फॉलोवर्स के मामले में राहुल गांधी जरूर नरेंद्र मोदी और अरविन्द केजरीवाल के काफी पीछे है लेकिन Retweet के मामले में राहुल गांधी ने दोनों नेताओं को पीछे छोड़ दिया है ।

अक्टूबर महीने के twitter stats पर नजर डाली जाए तो नरेंद्र मोदी को हर Tweet पर लगभग 2500 Retweet मिले है । वहीं अरविन्द केजरीवाल के हर ट्वीट को लगभग 1500 लोगों ने Retweet किया है । वहीं राहुल गांधी ने इस मामले में दोनों पीछे छोड़ दिया है । राहुल गांधी के हर ट्वीट को लगभग 3800 Retweet मिले है ।


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