मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ ने सोमवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में शपथ ली। शपथ में कांग्रेस और विपक्ष के वरिष्ट नेताओं से साथ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी भी शामिल हुए। वहीं विपक्षी एकता के इस मंच से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नदारद दिखे। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री केजरीवाल को नियोता भी भेजा गया है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नही हो पाया है कि आखिर अरविंद या आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता कार्यक्रम में शामिल क्यों नही हुआ। वहीं अटकलें इस बात की भी लगे जा रही है कि सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा सिख दंगों पर सुनाए गए फैसले के चलते केजरीवाल कार्यक्रम में शामिल नही हुए।

तो क्या सिख दंगों के दाग ने केजरीवाल को भोपाल आने से रोका ?

सिख दंगों का कोई आरोपी बचना नही चाहिए: केजरीवाल

कमलनाथ की शपथ के साथ ही सोमवार को 1984 के सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके बाद दिल्ली में आप के सांसद भगवंत मान ने मांग की है कि सिख दंगों में कमलनाथ पर भी केस चलना चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं केजरीवाल ने भी सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि वे इसका स्वागत करते हैं। केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि दंगे में शामिल कोई भी आरोपी नहीं बचना चाहिए, चाहे कोई कितनाभी ताकतवर क्यों न हो। आम आदमी पार्टी इससे पहले भी सिख दंगों में कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि सिख दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ सफेद कुर्ते पहनकर घूम रहे हैं। कांग्रेस ने 32 साल से अपनी मानसिकता नहीं बदली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिख दंगों के दाग से बचने के लिए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कमलनाथ के शपथग्रहण में शामिल नही हुए ?
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