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मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

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दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

योगी आदित्यनाथ पर भड़के साधु-संत, बोले आप से अच्छी थी पिछली सरकार ।

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यूपी के इलाहाबाद में योगी सरकार को साधु-संतों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है। यूपी के साधु-संत योगी सरकार से इस कदर नाराज है कि उन सभी ने मिलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर बोला कि अगर आपको गुजरात चुनाव से फुरसत मिल जाए तो यूपी के माघ मेला पर भी कुछ ध्यान देने का कष्ट करें। 
साधु संतों ने यहां तक कह दिया कि आपकी सरकार से अच्छी तो पिछली सपा सरकार थी। कम से कम हमें वहां इज्जत और सम्मान तो मिलता था। 

आप को बता दें कि रामानंद सरस्वती की अध्यक्षता में संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिठ्ठी लिखी है और माघ मेला में अव्यवस्थाओं का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि 16 दिन बाद शुरू होने वाले माघ मेले के लिए हजारों लोग पहुंच चुके हैं, लेकिन वहां अभी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। माघ मेले को लेकर नए डीएम की उदासीनता पर सवाल उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कुंभ की व्यवस्था को देख रहे हैं जिसकी वजह से माघ मेला की दुर्दशा हो रही है।

स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोलते हुए साधु-संतों ने कहा कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करती है वहीं मेले में एक शौचालय तक कि व्यवस्था नही की गई है । जिसके कारण लोग जगह जगह सौच करके गंदगी फैला रहे है। 
मुख्यमंत्री को लिखी संतों की चिट्ठी से प्रशासन में हड़कंप तो मच ही गया है, साथ ही ये चिट्ठी इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ गुजरात चुनाव के चक्कर में अपने प्रदेश को भी पूरी तरह से भूल गए और जनता को परेशान होने के लिए छोड़ दिया।

सीएम योगी के गृह जिले में नही रुक रहा मौत का सिलसिला, फिर हुई 30 मासूमों की मौत 

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​​गोरखपुर. सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। यहां स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में बीते 48 घंटों में एक बार फिर 30 मासूमों की मौत की घटना सामने आई है। इन बच्चों की मौत 1 नवम्बर से 3 नवम्बर के बीच हुई। बता दें कि पिछले तीन महीनों में बीआरडी कॉलेज के बालरोग विभाग में 1300 बच्चों की मौत हो चुकी हैं।

 

गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज उस समय सुर्खियों में आया जब 10-11 अगस्‍त की रात ऑक्‍सीजन बाधित होने के कारण 36 बच्‍चों की मौत हो गई। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के तत्‍कालीन प्राचार्य डा. राजीव मिश्र, उनकी पत्‍नी डा. पूर्णिमा शुक्‍ला, डा. कफील खान सहित कुल 9 लोगों को जेल जाना पड़ा।

इसके बावजूद भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत का सिलसिला नहीं थमा। हर रोज हो रही मासूमों की मौत ने आम लोगों को हैरान तो किया है। लेकिन, पूर्व में इसे सामान्‍य मौत मानने वाला बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी अब यह मानने लगा है कि इन मौतों को सामान्‍य मौतें नहीं कहा जा सकता है।

क्या बोले डॉक्टर ?

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डा. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नवंबर की रात 12 बजे तक 48 घंटे में कुल 30 बच्‍चों की मौत हुई है। उन्‍होंने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 1 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नवंबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू (नियो नेटल यूनिट) में कुल 15 बच्‍चों की मौत हुई है। वहीं पीआईसीयू (पीडिया) में 15 बच्‍चों की मौत हुई है।

उन्‍होंने बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे से 2 नंवबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू में 7 और पीआईसीयू में 5 बच्‍चों की मौत हो गई। तो वहीं 2 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नंवबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू में 8 और पीआईसीयू में 10 बच्‍चों की मौत हुई है।

जनता के भारी विरोध के बाद भाजपा ने मारी पलटी, योगी ने की ताज महल की तारीफ !

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ताजमहल पर भाजपा नेताओं के विवादित बयान के भारी विरोध के बाद बीजेपी बैकफुट पर आ गयी है । जिसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटी मारते हुए ताज महल की तारीफ की है ।

पलटी मारते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ” यह मायने नही रखता की ताज महल किसने बनाया और कैसे बनाया, ताजमहल भारतीय मजदूरों के खून और पसीने से बनाया गया था ।
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि ताजमहल हमारे लिए पर्यटन लहजे से बहुत अहम है । हम ताजमहल को सभी सुविधाएं और पर्यटकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य है।
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले भाजपा नेता संगीत सोम ने ताजमहल पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि ताज महल मुगलों ने बनाया था और उसे देश के इतिहास से मिटा दिया जाएगा ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री समेत भाजपा के कई नेताओं को देना होगा इस्तीफ़ा !

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Newbuzzindia : उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस्तीफ़ा  देने वाले है  . योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा को भी इस्तीफ़ा देना होगा . इन तीन नेताओं के एलावा अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा और परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह भी इस्तीफ़ा देने वालों की लिस्ट में शामिल है .

 

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत यह पाँचों नेता इस समय उत्तरप्रदेश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नही है . वही मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री या फिर मंत्री बनने के लिए विधानसभा या विधानपरिषद् का सदस्य होना अनिवार्य है .

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समय गोरखपुर से संसद है . केशव प्रसाद मौर्या इलाहबाद के फूलपुर से सांसद है. वहीं दिनेश शर्मा लखनऊ के महापौर है .

 

 

लोकसभा से देना होगा इस्तीफ़ा 

 

इन सभी नेताओं को अपने पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनना होगा . वहीं इन 5 नेताओं को विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनाने के लिए  मौजूदा सदस्यों को इस्तीफ़ा देना होगा .

 

सूत्रों के अनुसार योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की सदर विधानसभा से चुनाव मैदान में उतर सकते है . सदर विधानसभा से मौजूदा विधायक डॉक्टर राधामोहन दास अग्रवाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए इस्तीफ़ा दे सकते है . राधामोहन के एलावा और भी कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार है .

 

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की सीएम योगी आदित्यनाथ किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते है . वैसे तो योगी आदित्यनाथ बिना चुनाव लड़े विधानपरिषद के रास्ते ही मुख्यमंत्री बने रह सकते है .

 

केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा

सूत्रों के अनुसार केशव प्रसाद को इलाहाबाद की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है . वहीं दिनेश शर्मा को विधानपरिषद का सदस्य बनने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है . दिनेश शर्मा को विधानपरिषद में सत्ता पक्ष का नेता भी बनाया जा चुका है .

 

नवंबर में होंगे चुनाव

 

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश में इसी साल नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव होने है . जिसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर लोकसभा सीट और केशव प्रसाद मौर्या की इलाहाबाद लोकसभा सीट पर भी चुनाव होंगे . ऐसे में विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हर चुकी कांग्रेस , बसपा और सपा अपनी पूरी ताकत लगाकर यह चुनाव जीतना चाहेंगी .

शुरू हुए योगी आदित्यनाथ के बुरे दिन , 21 अगस्त से शुरू होगी उलटी गिनती

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वैसे तो मोदी सरकार के आने के बाद से ही भाजपा के अच्छे दिन शुरू हो गये है . लेकिन उत्तर प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज करके मुख्यमंत्री बनने  वाले योगी आदित्यनाथ के बुरे दिन शुरू होने वाले है . ऐसा कह रहे है जाने माने ज्योतिष और हस्तरेखा विशेषज्ञ अनिल कात्यन . आपको बता दें की अनिल कात्यान इससे पहले भी कई राजनैतिक भविष्यवाणी कर चुके है . जिनमें से ज्यादातर भविष्यवाणी सही साबित हुई है .

 

कात्यान का कहना है की 7 अप्रैल के बाद ग्रहों की स्तिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ हो रही  है . जिसके कारण आदित्यनाथ को बड़ी मुश्किल और विरोध का सामना करना पद सकता है . कात्यान का कहना है की जिस तरह आदित्यनाथ अधिकारिओं को भरोसे में लिए बिना बड़ी बड़ी घोषणा कर रहे है . जिसके कारण  धीरे-धीरे अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बातें सुनना कम कर सकते है .

 

ज्योतिष के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम करने की दिशा सही हो सकती है . लेकिन कार्यं करने का प्रारूप तय नही होने के कारण अडचनें आ सकती है .

उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले भी की थी भविष्यवाणी

 

अगर आपने मीडिया में सुना हो तो अनिल कात्यान ने उत्तरप्रदेश चुनाव के पहले भी भविष्यवाणी की थी . कात्यान ने कहा था की उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी . इसके साथ ही कात्यान ने कहा  था की समाजवादी पार्टी के खराब दिन शुरू होने वाले है .

 

21 अगस्त के बाद शुरू होगी उलटी गिनती

 

अगर ज्योतिष अनिल कात्यान की बातों को सही मानो तो 21 अगस्त से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उलटी गिनती शुरू होने वाली है . कात्यान के अनुसार योगी आदित्यनाथ के यह बुरे दिन पूरे तीन महीने यानि 31 नवम्बर तक चलेंगे . इस बीच कुछ ऐसी स्तिथि पैदा हो सकती है की आदित्यनाथ को पार्टी आलाकमान के विरोध का सामना करना पड़े . अब देखना दिलचस्प होगा की मोदी जी के डिजिटल इंडिया में क्या ज्योतिष की बातें सच होती है ? और क्या योगी आदित्यनाथ के बुरे दिन आते है ?

क्या अब स्कूल यूनिफॉर्म का रंग भी हो जाएगा भगवा! पढ़िए बड़ी खबर

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यूपी के सीएम की कुर्सी पर काबिज होने के बाद से योगी आदित्यनाथ धड़ाधड़ फैसले ले रहे हैं। यूपी के विकास के लिए योगी लगभग हर रोज अलग-अलग विभागों के अफसरों और मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे इसे लेकर वे बेहद गंभीर हैं। बीते दिनों बेसिक शिक्षा विभाग की हुई प्र‍ेजेंटेशन के दौरान कुछ ऐसा वाक्या घटित हुआ जिससे यह साफ़ है कि सीएम योगी जनता के लिए काम करना चाहते हैं।

योगी की लोकप्रियता ने उड़ाई मोदी-शाह की नींद।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की बढ़ती लोकप्रियता ने भाजपा के गुजराती नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों को ही योगी  को अपने लिए भविष्य की चुनौती दिखने लगे हैं। दिल्ली नगर निगम चुनाव प्रचार में योगी के तय रोड-शो को रद्द कर दिए जाने से इन अटकलों को बल मिला है। टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया सभी जगह योगी का जिस अंदाज में महिमा मंडन चल रहा है, वह वाकई भाजपा के कद्दावर नेताओं को हैरान परेशान कर रहा है।
आदित्यनाथ योगी की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की रही है। वे 1998 से लगातार पांचवीं बार गोरखपुर से लोकसभा के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उनकी कार्यशैली में बदलाव दिखा है। वे टकराव के बजाए सुशासन पर फोकस कर रहे हैं। उनकी सरकार देश में भाजपा की अकेली सरकार है जिसमें पार्टी ने दो-दो उपमुख्यमंत्री बनाए हैं। केशव मौर्य जहां पार्टी के सूबेदार हैं, वहीं दिनेश शर्मा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष। दोनों के साथ ही योगी का अच्छा तालमेल बरकरार है। पर पार्टी आला कमान को ज्यादा हैरानी श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह के नजरिए में आए बदलाव से हुई है। श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह दोनों ही उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनने से पहले तक भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे। जहां वे मोदी और शाह के प्रचार-प्रसार पर ही पूरा ध्यान लगा रहे थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में मंत्री पद संभालने के बाद उन्होंने अपनी वफादारी योगी के प्रति बढ़ा दी। पार्टी के शिखर नेतृत्व को लगता है कि योगी की मीडिया में विराट छवि उभारने में इन दोनों की भी बड़ी भूमिका है। वजह है दोनों का मीडिया के साथ अच्छा तालमेल होना। केंद्र की राजनीति में चूंकि इन दोनों को अब अपनी ज्यादा संभावना नहीं दिख रही लिहाजा वे योगी के साथ बेहतर तालमेल दिखा चुके हैं।
योगी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के कद को तराशने की मंशा भी देखी गई थी। राजनाथ की तरह योगी भी राजपूत हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं उत्तर व पश्चिम भारत के कई राज्यों में राजपूतों की संख्या खासी है, लेकिन एक महीने के भीतर ही यूपी ही नहीं सारे देश में योगी की लोकप्रियता का ग्राफ जिस तेजी से ऊपर गया है, उसने गैरों से ज्यादा बेचैनी अपनों की ही बढ़ाई है। सोशल मीडिया पर तो लगातार इस तरह के जुमले प्रचारित हो रहे हैं जिनमें मोदी और अमित शाह को इस फैसले पर पछतावा करते दिखाया जा रहा है।दरअसल, भाजपा के भीतर अभी तक किसी भी नेता का व्यक्तित्व और लोकप्रियता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने लायक नहीं है। मोदी भाषणों में बेशक सबका साथ और सबका विकास का नारा दोहराते हों पर उनकी कार्यप्रणाली में अपने समकक्ष किसी को नहीं उभरने देना अहम रहा है। गुजरात में केशु भाई पटेल, कांशीराम राणा, शंकर सिंह वाघेला, एके पटेल व हरिन पाठक जैसे तमाम कद्दावर पार्टी नेताओं को उन्होंने हाशिए पर पहुंचा दिया था। दिल्ली में भी बड़ों को जहां मार्गदर्शक मंडल में पहुंचा दिया वहीं अपनी सरकार के साथ-साथ पार्टी पर भी अपना एकछत्र वर्चस्व बना रखा है, लेकिन योगी भविष्य में दिल्ली की सत्ता के दावेदार न बन जाएं, इसकी चिंता उन्हें अभी से हो रही है। उत्तर प्रदेश में योगी ने दो मुद्दों पर फोकस किया है। पहला भ्रष्टाचार पर चोट और दूसरा कानून व्यवस्था में सुधार। तकरीबन निराश हो चुके सूबे के लोग एक महीने के भीतर ही कानून व्यवस्था की हालत में दिख रहे सुधार से बम बम हैं। सत्ता संभालते ही तबादलों की झड़ी लगाने की परंपरा को भी तोड़ा है। जो पुलिस वाले अपराधियों और अराजक तत्वों से सांठगांठ के लिए बदनाम थे वे ही अचानक कर्तव्य परायण हो गए हैं। ऊपर से सूबे का पुलिस महानिदेशक सबसे वरिष्ठ व ईमानदार छवि के सुलखान सिंह को बना कर योगी ने अपने मंसूबों को धरातल पर उतारा है।
गैरों से ज्यादा अपने ही बेचैन
’आदित्यनाथ योगी की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की रही है। वे 1998 से लगातार पांचवीं बार गोरखपुर
से लोकसभा के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उनकी कार्यशैली में बदलाव दिखा है।
’एक महीने के भीतर ही यूपी ही नहीं सारे देश में योगी की लोकप्रियता का ग्राफ जिस तेजी से ऊपर
गया है, उसने गैरों से ज्यादा बेचैनी अपनों की बढ़ाई है। सोशल मीडिया पर तो लगातार इस तरह
के जुमले चले रहे हैं जिनमें मोदी और शाह को इस फैसले पर पछतावा करते दिखाया जा रहा है।
’टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया सभी जगह योगी का जिस अंदाज में महिमा मंडन चल रहा
है, वह वाकई भाजपा के कद्दावर नेताओं को हैरान और परेशान कर रहा है।

योगी के मंत्री ने नही मानी पीएम मोदी की बात, कर दीया अपमान !

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सीएम योगी आदित्यनाथ पद संभालते ही एक्शन में आ गये हैं। पिछने एक महीने से जिस लगन और वो सख्ती से काम करने में लगे हैं वो सभी ने देखा है। और सिर्फ वही नहीं बल्कि उनके मंत्री भी इसी सख्ती से अपना कार्यभार संभाल रहे हैं। योगी ने अपने मंत्रियों के लिए आचार संहिता भी जारी की है। लेकिन ये क्या प्रदेश की बीजेपी सरकार के एक मंत्री का बुधवार को अलग ही रूप देखने को मिला। योगी सरकार में खादी और ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ने एक दिव्यांग को सरेआम बेइज्जत किया।
दिव्यांग व्यक्ति के लिए मंत्री ने कहा कि ‘लूले-लंगड़े लोगों को संविदा पर रखा है, ये क्या सफाई कर पायेगा। तभी ऐसा हाल है यहां की सफाई का।’ इस दौरान दफ्तर के कई और लोग भी वहां मौजूद थे। यहां आपको बता दें कि योगी सरकार ने दिव्यांगों के सम्मान में विभाग नाम बदलकर दिव्यांगजन जनसशक्तिकरण विभाग कर दिया है। और इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ही देशवासियों से अपील की थी, कि वे विक्लांगों को दिव्यांग कहें। जिसके बाद से दिव्यांग शब्द चलन में आया।
जब मंत्री दफ्तर पहुंचे, तो उन्होंने मुख्य गेट बंद करवाया। मंत्री ने हर जगह सफाई का जायजा लिया। तभी उन्होंने दिव्यांग सफाई कर्मचारी को देख उससे पूछा कि तुम कौन हो, दिव्यांग ने कहा कि वह यहां पर सफाई कर्मचारी है।
उसके बाद मंत्री ने पूरे दफ्तर का जायजा लिया और गंदगी देख अफसरों को खरी खोटी सुनाई। उन्होंने अफसरों से कहा कि प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हैं, और आपको सफाई करनी नहीं आती। शाम तक सफाई नहीं की गई तो सिर पर रखकर कूड़ा उठवाएंगे। आपको बता दें कि योगी सरकार के मंत्री लगातार अपने दफ्तरों का जायजा ले रहे हैं, और सफाई पर काफी ध्यान दे रहे हैं।

यूपी में हो रहा है मीट पर बवाल तो वही प.बंगाल में ममता ने शुरू की घर-घर ‘मीट की डिलिवरी’।

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश के कई शहरों में बूचड़खाने बंद कर दिए गए. जिसके बाद राज्य में मीट की सप्लाई ठप हो गई है. लेकिन इन सबके बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीट की डिलिवरी शुरू की है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, ममता सरकार मांसाहारी खाना खाने वाले लोगों के घर अब मीट पहुंचाने की योजना बना रही है. इस योजना का नाम ‘मीट ऑन व्हीलज़’ है. इस योजना से कोलकाता के घरों में मीट पहुंचाया जाएगा. इस पहल की शुरुआत वेस्ट बंगाल लाइवस्टॉक डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (WBLDCL) के मशहूर ब्रांड ‘हरिंघता मीट’ ने की है.

अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के अनुसार पका हुआ नॉन-वेज खाना ले जाने के अलावा इसमें हरिंघता के पैक आईटम भी बेचे जाएंगे. यह योजना पशु संसाधन विकास विभाग के मंत्री स्वप्न देबनाथ ने विभाग के सॉल्ट लेक हेडक्वार्टर पर लॉन्च की थी. अधिकारियों का कहना है, ’’कोलकता में फिलहाल डिलिवरी के लिए अभी तीन वैन रखी गई हैं. हालांकि बाद में वैन की संख्या में बढोत्तरी कर दी जाएगी.’’
मंगलवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश में बूचड़खानों पर की गई कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “जाति, सम्प्रदाय और धर्म के नाम पर हो रहे भेदभाव से लोग डरे हुए हैं.” ‘बटर बिरयानी, गुंडाराज टर्की और डक रोस्ट’ कुछ ऐसी व्यंजन हैं जो बेचे जाएंगे.

एक अधिकारी ने बताया, ‘हरिंघता मीट’ ब्रांड की सेल पिछले कुछ सालों में तीन गुनी बढ़ गई है. उन्होंने कहा, “2014-15 में हमनें मीट के जरिए 4.35 लाख की बिक्री की थी. 2015-16 में यह आंकड़ा 9.58 लाख रुपए तक पहुंच गया है और अगर इसमें अहारे बंग्ला फूड फेस्टिवल को भी जोड़ लिया जाए तो इसकी बिक्री दस लाख तक पहुंच गई.”

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