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मुरादाबाद से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे इमरान प्रतापगढ़ी

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लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी सातवी सूची जारी कर दी है। इस सूची में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु, ओडिशा, तेलंगाना, त्रिपुरा, पुडुचेरी और उत्तरप्रदेश के 35 उम्मीदवारों के नाम शामिल है।

इस सूची में कांग्रेस पार्टी ने कुछ बदलाव भी किये है।

  1. प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर की सीट मुरादाबाद से बदलकर फतेहपुर सीकरी कर दी गई है।
  2. मुरादाबाद से कांग्रेस राज बब्बर की जगह लोकप्रिय कवि इमरान प्रतापगढ़ी को मैदान में उतारा है।
  3. बिजनोर से कांग्रेस ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को इंदिरा भट्टी की जगह मैदान में उतारा है।

इमरान प्रतापगढ़ी के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें काफी समय से आ रही थी। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी से उनकी इस विषय मे बात हुई थी। इमरान प्रतापगढ़ी मुस्लिम युवकों के बीच काफी लोकप्रिय है और मुस्लिमों में शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर काफी प्रयास करते रहे है।

कांग्रेस पार्टी की सातवी सूची

Congress seventh list for loksabha election part 1

Congress seventh list for loksabha election part 2

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मिर्ज़ापुर के पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल सपा छोड़ कांग्रेस में हुए शामिल

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मिर्ज़ापुर लोकसभा से संसद रहे बाल कुमार पटेल ने आज समाजवादी पार्टी छोड़ कांग्रेस का हाँथ थाम लिया। पटेल को कांग्रेस की सदस्यता दिलवाते समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे।

कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पटेल का पार्टी में स्वागत करते हुए ट्विटर पर लिखा “मिर्जापुर से सपा सांसद रहे बाल कुमार पटेल जी आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जी महासचिव प्रियंका गांधी जी व यूपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर जी के समक्ष कांग्रेस परिवार में सम्मलित हुए-यूपी में आपके साथ से कांग्रेस के हाथ को और अधिक मज़बूती मिलेगी।”

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस बाल कुमार पटेल अब कांग्रेस की टिकट पर मिर्ज़ापुर से अपना दल की अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

योगी आदित्यनाथ पर भड़के साधु-संत, बोले आप से अच्छी थी पिछली सरकार ।

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यूपी के इलाहाबाद में योगी सरकार को साधु-संतों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है। यूपी के साधु-संत योगी सरकार से इस कदर नाराज है कि उन सभी ने मिलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर बोला कि अगर आपको गुजरात चुनाव से फुरसत मिल जाए तो यूपी के माघ मेला पर भी कुछ ध्यान देने का कष्ट करें। 
साधु संतों ने यहां तक कह दिया कि आपकी सरकार से अच्छी तो पिछली सपा सरकार थी। कम से कम हमें वहां इज्जत और सम्मान तो मिलता था। 

आप को बता दें कि रामानंद सरस्वती की अध्यक्षता में संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिठ्ठी लिखी है और माघ मेला में अव्यवस्थाओं का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि 16 दिन बाद शुरू होने वाले माघ मेले के लिए हजारों लोग पहुंच चुके हैं, लेकिन वहां अभी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। माघ मेले को लेकर नए डीएम की उदासीनता पर सवाल उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कुंभ की व्यवस्था को देख रहे हैं जिसकी वजह से माघ मेला की दुर्दशा हो रही है।

स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोलते हुए साधु-संतों ने कहा कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करती है वहीं मेले में एक शौचालय तक कि व्यवस्था नही की गई है । जिसके कारण लोग जगह जगह सौच करके गंदगी फैला रहे है। 
मुख्यमंत्री को लिखी संतों की चिट्ठी से प्रशासन में हड़कंप तो मच ही गया है, साथ ही ये चिट्ठी इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ गुजरात चुनाव के चक्कर में अपने प्रदेश को भी पूरी तरह से भूल गए और जनता को परेशान होने के लिए छोड़ दिया।

सीएम योगी के गृह जिले में नही रुक रहा मौत का सिलसिला, फिर हुई 30 मासूमों की मौत 

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​​गोरखपुर. सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। यहां स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में बीते 48 घंटों में एक बार फिर 30 मासूमों की मौत की घटना सामने आई है। इन बच्चों की मौत 1 नवम्बर से 3 नवम्बर के बीच हुई। बता दें कि पिछले तीन महीनों में बीआरडी कॉलेज के बालरोग विभाग में 1300 बच्चों की मौत हो चुकी हैं।

 

गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज उस समय सुर्खियों में आया जब 10-11 अगस्‍त की रात ऑक्‍सीजन बाधित होने के कारण 36 बच्‍चों की मौत हो गई। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के तत्‍कालीन प्राचार्य डा. राजीव मिश्र, उनकी पत्‍नी डा. पूर्णिमा शुक्‍ला, डा. कफील खान सहित कुल 9 लोगों को जेल जाना पड़ा।

इसके बावजूद भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत का सिलसिला नहीं थमा। हर रोज हो रही मासूमों की मौत ने आम लोगों को हैरान तो किया है। लेकिन, पूर्व में इसे सामान्‍य मौत मानने वाला बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी अब यह मानने लगा है कि इन मौतों को सामान्‍य मौतें नहीं कहा जा सकता है।

क्या बोले डॉक्टर ?

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डा. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नवंबर की रात 12 बजे तक 48 घंटे में कुल 30 बच्‍चों की मौत हुई है। उन्‍होंने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 1 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नवंबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू (नियो नेटल यूनिट) में कुल 15 बच्‍चों की मौत हुई है। वहीं पीआईसीयू (पीडिया) में 15 बच्‍चों की मौत हुई है।

उन्‍होंने बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे से 2 नंवबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू में 7 और पीआईसीयू में 5 बच्‍चों की मौत हो गई। तो वहीं 2 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नंवबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू में 8 और पीआईसीयू में 10 बच्‍चों की मौत हुई है।

जनता के भारी विरोध के बाद भाजपा ने मारी पलटी, योगी ने की ताज महल की तारीफ !

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ताजमहल पर भाजपा नेताओं के विवादित बयान के भारी विरोध के बाद बीजेपी बैकफुट पर आ गयी है । जिसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटी मारते हुए ताज महल की तारीफ की है ।

पलटी मारते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ” यह मायने नही रखता की ताज महल किसने बनाया और कैसे बनाया, ताजमहल भारतीय मजदूरों के खून और पसीने से बनाया गया था ।
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि ताजमहल हमारे लिए पर्यटन लहजे से बहुत अहम है । हम ताजमहल को सभी सुविधाएं और पर्यटकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य है।
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले भाजपा नेता संगीत सोम ने ताजमहल पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि ताज महल मुगलों ने बनाया था और उसे देश के इतिहास से मिटा दिया जाएगा ।

मदरसों को तिरंगे का सम्मान सिखाने वाली बीजेपी ने अपने ही कार्यालय में किया तिरंगे का अपमान ।

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यूपी के कौशांबी में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने सारी हदें पार कर दी है । दरअसल भाजपा के कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रध्वज का अपमान किया गया । इस दौरान मौके पर भाजपा के जिला अध्यक्ष रमेश पासी भी मौजूद थे ।

ऐसा भी नहीं की तिरंगे के अपमान की जानकारी यहां के विधायक और सांसद को नहीं थी ।  बल्कि वे सब कुछ अपनी आंखों से देखते हुए नजर अंदाज कर गए।
बीजेपी के जिला स्तरीय कार्यालय से उभरी ये राष्ट्रध्वज के अपमान किये जाने की तस्वीरें पार्टी के जिम्मेदारों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जिला के विधायक और सांसद के अलावा आलाधिकारी भी इस अपमान की बखूबी जानकारी रखते हैं। उसके बावजूद किसी ने पार्टी ध्वज से ऊपर राष्ट्रध्वज फहराए जाने की जोहमत नहीं उठाई। 

आपको बता दें कि कौशांबी में सिराथू रोड स्तिथ मंझनपुर में बीजेपी का जिला स्तरीय कार्यालय है। स्वन्त्रता दिवस की 71वें वर्षगांठ पर पार्टी के जिला अध्यक्ष रमेश पासी ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मंगलवार की सुबह ध्वजारोहण किया । जिलाध्यक्ष रमेश पासी ने अपने पार्टी ध्वज के नीचे राष्ट्रध्वज को फहराया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री समेत भाजपा के कई नेताओं को देना होगा इस्तीफ़ा !

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Newbuzzindia : उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस्तीफ़ा  देने वाले है  . योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा को भी इस्तीफ़ा देना होगा . इन तीन नेताओं के एलावा अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा और परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह भी इस्तीफ़ा देने वालों की लिस्ट में शामिल है .

 

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत यह पाँचों नेता इस समय उत्तरप्रदेश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नही है . वही मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री या फिर मंत्री बनने के लिए विधानसभा या विधानपरिषद् का सदस्य होना अनिवार्य है .

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समय गोरखपुर से संसद है . केशव प्रसाद मौर्या इलाहबाद के फूलपुर से सांसद है. वहीं दिनेश शर्मा लखनऊ के महापौर है .

 

 

लोकसभा से देना होगा इस्तीफ़ा 

 

इन सभी नेताओं को अपने पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनना होगा . वहीं इन 5 नेताओं को विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनाने के लिए  मौजूदा सदस्यों को इस्तीफ़ा देना होगा .

 

सूत्रों के अनुसार योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की सदर विधानसभा से चुनाव मैदान में उतर सकते है . सदर विधानसभा से मौजूदा विधायक डॉक्टर राधामोहन दास अग्रवाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए इस्तीफ़ा दे सकते है . राधामोहन के एलावा और भी कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार है .

 

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की सीएम योगी आदित्यनाथ किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते है . वैसे तो योगी आदित्यनाथ बिना चुनाव लड़े विधानपरिषद के रास्ते ही मुख्यमंत्री बने रह सकते है .

 

केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा

सूत्रों के अनुसार केशव प्रसाद को इलाहाबाद की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है . वहीं दिनेश शर्मा को विधानपरिषद का सदस्य बनने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है . दिनेश शर्मा को विधानपरिषद में सत्ता पक्ष का नेता भी बनाया जा चुका है .

 

नवंबर में होंगे चुनाव

 

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश में इसी साल नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव होने है . जिसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर लोकसभा सीट और केशव प्रसाद मौर्या की इलाहाबाद लोकसभा सीट पर भी चुनाव होंगे . ऐसे में विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हर चुकी कांग्रेस , बसपा और सपा अपनी पूरी ताकत लगाकर यह चुनाव जीतना चाहेंगी .

योगी की लोकप्रियता ने उड़ाई मोदी-शाह की नींद।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की बढ़ती लोकप्रियता ने भाजपा के गुजराती नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों को ही योगी  को अपने लिए भविष्य की चुनौती दिखने लगे हैं। दिल्ली नगर निगम चुनाव प्रचार में योगी के तय रोड-शो को रद्द कर दिए जाने से इन अटकलों को बल मिला है। टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया सभी जगह योगी का जिस अंदाज में महिमा मंडन चल रहा है, वह वाकई भाजपा के कद्दावर नेताओं को हैरान परेशान कर रहा है।
आदित्यनाथ योगी की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की रही है। वे 1998 से लगातार पांचवीं बार गोरखपुर से लोकसभा के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उनकी कार्यशैली में बदलाव दिखा है। वे टकराव के बजाए सुशासन पर फोकस कर रहे हैं। उनकी सरकार देश में भाजपा की अकेली सरकार है जिसमें पार्टी ने दो-दो उपमुख्यमंत्री बनाए हैं। केशव मौर्य जहां पार्टी के सूबेदार हैं, वहीं दिनेश शर्मा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष। दोनों के साथ ही योगी का अच्छा तालमेल बरकरार है। पर पार्टी आला कमान को ज्यादा हैरानी श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह के नजरिए में आए बदलाव से हुई है। श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह दोनों ही उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनने से पहले तक भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे। जहां वे मोदी और शाह के प्रचार-प्रसार पर ही पूरा ध्यान लगा रहे थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में मंत्री पद संभालने के बाद उन्होंने अपनी वफादारी योगी के प्रति बढ़ा दी। पार्टी के शिखर नेतृत्व को लगता है कि योगी की मीडिया में विराट छवि उभारने में इन दोनों की भी बड़ी भूमिका है। वजह है दोनों का मीडिया के साथ अच्छा तालमेल होना। केंद्र की राजनीति में चूंकि इन दोनों को अब अपनी ज्यादा संभावना नहीं दिख रही लिहाजा वे योगी के साथ बेहतर तालमेल दिखा चुके हैं।
योगी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के कद को तराशने की मंशा भी देखी गई थी। राजनाथ की तरह योगी भी राजपूत हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं उत्तर व पश्चिम भारत के कई राज्यों में राजपूतों की संख्या खासी है, लेकिन एक महीने के भीतर ही यूपी ही नहीं सारे देश में योगी की लोकप्रियता का ग्राफ जिस तेजी से ऊपर गया है, उसने गैरों से ज्यादा बेचैनी अपनों की ही बढ़ाई है। सोशल मीडिया पर तो लगातार इस तरह के जुमले प्रचारित हो रहे हैं जिनमें मोदी और अमित शाह को इस फैसले पर पछतावा करते दिखाया जा रहा है।दरअसल, भाजपा के भीतर अभी तक किसी भी नेता का व्यक्तित्व और लोकप्रियता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने लायक नहीं है। मोदी भाषणों में बेशक सबका साथ और सबका विकास का नारा दोहराते हों पर उनकी कार्यप्रणाली में अपने समकक्ष किसी को नहीं उभरने देना अहम रहा है। गुजरात में केशु भाई पटेल, कांशीराम राणा, शंकर सिंह वाघेला, एके पटेल व हरिन पाठक जैसे तमाम कद्दावर पार्टी नेताओं को उन्होंने हाशिए पर पहुंचा दिया था। दिल्ली में भी बड़ों को जहां मार्गदर्शक मंडल में पहुंचा दिया वहीं अपनी सरकार के साथ-साथ पार्टी पर भी अपना एकछत्र वर्चस्व बना रखा है, लेकिन योगी भविष्य में दिल्ली की सत्ता के दावेदार न बन जाएं, इसकी चिंता उन्हें अभी से हो रही है। उत्तर प्रदेश में योगी ने दो मुद्दों पर फोकस किया है। पहला भ्रष्टाचार पर चोट और दूसरा कानून व्यवस्था में सुधार। तकरीबन निराश हो चुके सूबे के लोग एक महीने के भीतर ही कानून व्यवस्था की हालत में दिख रहे सुधार से बम बम हैं। सत्ता संभालते ही तबादलों की झड़ी लगाने की परंपरा को भी तोड़ा है। जो पुलिस वाले अपराधियों और अराजक तत्वों से सांठगांठ के लिए बदनाम थे वे ही अचानक कर्तव्य परायण हो गए हैं। ऊपर से सूबे का पुलिस महानिदेशक सबसे वरिष्ठ व ईमानदार छवि के सुलखान सिंह को बना कर योगी ने अपने मंसूबों को धरातल पर उतारा है।
गैरों से ज्यादा अपने ही बेचैन
’आदित्यनाथ योगी की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की रही है। वे 1998 से लगातार पांचवीं बार गोरखपुर
से लोकसभा के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उनकी कार्यशैली में बदलाव दिखा है।
’एक महीने के भीतर ही यूपी ही नहीं सारे देश में योगी की लोकप्रियता का ग्राफ जिस तेजी से ऊपर
गया है, उसने गैरों से ज्यादा बेचैनी अपनों की बढ़ाई है। सोशल मीडिया पर तो लगातार इस तरह
के जुमले चले रहे हैं जिनमें मोदी और शाह को इस फैसले पर पछतावा करते दिखाया जा रहा है।
’टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया सभी जगह योगी का जिस अंदाज में महिमा मंडन चल रहा
है, वह वाकई भाजपा के कद्दावर नेताओं को हैरान और परेशान कर रहा है।

भगवा वेश में आतंकी कर रहे है यूपी में हमले की तैयारी।

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यूपी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठनों ने भगवा चोले को ढाल बनाया है। आतंकी संगठनों ने किशोर उम्र के आतंकियों को साधु और तांत्रिक के वेश में प्रशिक्षित कर यूपी में उतार दिया है। यह लोग प्रमुख धार्मिक स्थलों के अलावा प्रतिष्ठित संस्थानों को भी निशाना बनाने की तैयारी में हैं। एमपी पुलिस की इंटेलिजेंस यूनिट से जानकारी मिलने के बाद यूपी की सुरक्षा शाखा ने सभी जोन के आईजी, रेंज के डीआईजी, जिलों के कप्तान व एएसपी रेलवे को अलर्ट कर दिया है। इसके अलावा शुक्रवार की रात से खुफिया एजेंसियों को भी चौकन्ना कर दिया गया है।
क्या हैं इनपुट्स?
एमपी इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के मुताबिक, आतंकी वारदात के लिए यूपी में भेजे गए युवा 17-18 साल के हैं। इन लोगों को हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों की ट्रेनिंग दी गई है। यह लोग साधु संतों व तांत्रिकों के वेश में रहते हैं। इसी साल फरवरी में 20-25 युवाओं को आतंकी संगठनों ने भारत-नेपाल बॉर्डर से यूपी में भेज दिया है। यूपी में घुसने के बाद इन लोगों ने हिंदू बहुल शहरों में हिंदू बस्तियों में ठिकाना बना लिया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए आतंकी अपना हिंदू नाम रखकर किराए के मकान में रहने की योजना लेकर दाखिल हुए हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा के अलावा आगरा का ताज महल, इलाहाबाद और लखनऊ की हाई कोर्ट बिल्डिंग, विधान भवन, सचिवालय के अलावा प्रमुख प्रतिष्ठान, रेलवे स्टेशन और भीड़ भाड़ वाले बाजार इनके निशाने पर हैं।

ऑपरेशन कृष्णा इंडिया से है ताल्लुक

पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हिंदू रीति रिवाजों का प्रशिक्षण देकर एजेंटों को हिंदू आबादी में प्रवेश करवाने के लिए ऑपरेशन कृष्णा इंडिया शुरू किया था। इन एजेंटों को भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है। आईएसआई की योजना इन एजेंटों को साधु वेश् में धार्मिक स्थलों में स्थापित करने की है, ताकि वह अपना काम आसानी से कर सकें। उसके बाद यह लोग धार्मिक विद्वेष फैलाने के साथ ही किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की रणनीति बना सकते हैं।

इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल से भी मिले इनपुट

इसी साल मार्च में एमपी, लखनऊ व कानपुर से गिरफ्तार इस्लामिक स्टेट के खुरासान मॉड्यूल के एजेंट्स और मास्टरमाइंड गौस मोहम्मद से भी इंटेलिजेंस को अहम इनपुट मिले हैं। गौस मोहम्मद लखनऊ में करन खत्री बनकर किराए के मकान में रह रहा था। इसके अलावा 12 सितंबर 2014 को बिजनौर में हुए आईईडी ब्लॉस्ट की घटना में मारे गए सिमी आतंकियों (खंडवा जेल से फरार हुए थे) के हाथ में भी कलावा और माथे पर तिलक मिला था। जेल से फरार होने के बाद इन लोगों ने हिंदू नामों से बिजनौर में किराए का मकान लिया था। फिलहाल खुफिया एजेंसियां अब यूपी में दाखिल एजेंट्स को भी इन्हीं आतंकियों की कड़ी का हिस्सा मानकर छानबीन कर रही हैं।

योगी के मंत्री ने नही मानी पीएम मोदी की बात, कर दीया अपमान !

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सीएम योगी आदित्यनाथ पद संभालते ही एक्शन में आ गये हैं। पिछने एक महीने से जिस लगन और वो सख्ती से काम करने में लगे हैं वो सभी ने देखा है। और सिर्फ वही नहीं बल्कि उनके मंत्री भी इसी सख्ती से अपना कार्यभार संभाल रहे हैं। योगी ने अपने मंत्रियों के लिए आचार संहिता भी जारी की है। लेकिन ये क्या प्रदेश की बीजेपी सरकार के एक मंत्री का बुधवार को अलग ही रूप देखने को मिला। योगी सरकार में खादी और ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ने एक दिव्यांग को सरेआम बेइज्जत किया।
दिव्यांग व्यक्ति के लिए मंत्री ने कहा कि ‘लूले-लंगड़े लोगों को संविदा पर रखा है, ये क्या सफाई कर पायेगा। तभी ऐसा हाल है यहां की सफाई का।’ इस दौरान दफ्तर के कई और लोग भी वहां मौजूद थे। यहां आपको बता दें कि योगी सरकार ने दिव्यांगों के सम्मान में विभाग नाम बदलकर दिव्यांगजन जनसशक्तिकरण विभाग कर दिया है। और इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ही देशवासियों से अपील की थी, कि वे विक्लांगों को दिव्यांग कहें। जिसके बाद से दिव्यांग शब्द चलन में आया।
जब मंत्री दफ्तर पहुंचे, तो उन्होंने मुख्य गेट बंद करवाया। मंत्री ने हर जगह सफाई का जायजा लिया। तभी उन्होंने दिव्यांग सफाई कर्मचारी को देख उससे पूछा कि तुम कौन हो, दिव्यांग ने कहा कि वह यहां पर सफाई कर्मचारी है।
उसके बाद मंत्री ने पूरे दफ्तर का जायजा लिया और गंदगी देख अफसरों को खरी खोटी सुनाई। उन्होंने अफसरों से कहा कि प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हैं, और आपको सफाई करनी नहीं आती। शाम तक सफाई नहीं की गई तो सिर पर रखकर कूड़ा उठवाएंगे। आपको बता दें कि योगी सरकार के मंत्री लगातार अपने दफ्तरों का जायजा ले रहे हैं, और सफाई पर काफी ध्यान दे रहे हैं।

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