Wednesday, June 23, 2021
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राजधानी भोपाल में आया तीन तलाक का मामला,पीड़िता ने जताया अपना दुख

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राजधानी भोपाल(Bhopal) में फिर एक बड़ा मामला पुलिस(Police) के लिए काफी सिरदर्द बन गया। प्रकरण मुस्लिम परिवार के बीच का था। घटना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal Triple Talaq) की है। मुस्लिम नीति नियमों के अनुसार भी सुलह की कोशिश हुई थी। पत्नी सुलह नहीं चाहती पर रिश्ते बचाने के लिए पति जान देने के लिए तैयार है।

शाहजहांनाबाद थाना पुलिस ने 12 जनवरी की रात लगभग आठ बजे धारा 498ए/323/3/4 के तहत प्रकरण दर्ज हुआ है। मामले में आरोपी पेशे से पेंटर है और उसने 2007 में निकाह किया था। आरोपी का तेरह साल का बेटा भी है। आरोपी ने बताया कि वह बेटे के साथ—साथ पत्नी को भी बहुत प्यार करता है। उसने आत्महत्या करने की भी चेतावनी दी।


मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता का कहना है कि वह ऐसे ही विरोध नहीं कर रही। उसने पति के मोबाइल पर दूसरी युवती के साथ चैट और तस्वीर देखी है। और इसी बात को लेकर विरोध करने पर नवंबर, 2018 में पति ने तलाक, तलाक तलाक बोला था। पीड़िता ने बताया कि विवाद होने पर 6 जनवरी को ज्यादा हाथापाई हो गई थी जिसके कारण पति—पत्नी का विवाद थाने पहुंचा था। इससे पहले मुस्लिम विवाह अधिनियम के तहत समाज में सुनवाई चल रही थी। जांच अधिकारी एसआई अर्शिया सिद्दीकी ने बताया कि अभी तफ्तीश जारी है।

इन तीन बदलावों के साथ “तीन-तलाक” पर चौथी पर बार अध्यादेश लाने की तैयारी में मोदी सरकार

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तीन-तलाक पर 3 बार अध्यादेश ला चुकी मोदी सरकार अब चौथी बार संसद में यह बिल पेश करने की तैयारी में है. इस बार यह बिल पास हो जाए, इसके लिए सरकार ने कई तैयारियां भी की है. दरअसल मुसलमानो में तीन तलाक के दुरूपयोग को रोकने के लिए मोदी सरकार चौथी बार अध्यादेश ला रही है।

तीन तलाक से जुड़े चौथे अध्यादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को मंजूरी दी गई। इसमें विपक्ष की कुछ मांगों को भी शामिल किया गया है।

पिछले सत्र में नही हो पाया था पास


पिछले सत्र में जब सरकार ने अंतिम दिन राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने यह कहकर बिल पास नहीं होने दिया कि सरकार ने बहुत ही हड़बड़ी में बिना सबकी सहमति लिए इसे पेश कर दिया। अब इसे संसद के बजट सत्र में पेश किया जएगा।

विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने पहले ही कुछ प्रमुख बदलाव किए थे। इन प्रमुख बदलावों में-

1- इस मामले में एफआईआर तभी स्वीकार्य की जाएगी जब पत्नी या उसके नजदीकी खून वाले रिश्तेदार दर्ज कराएंगे। विपक्ष और कई संगठनों की चिंता की थी कि इस मामले में एफआईआर का कोई दुरुपयोग कर सकता है।

2- पति और पत्नी के बीच मैजिस्ट्रेट समझौता करा सकते हैं, अगर बाद में दोनों के बीच इसकी पहल होती है। इससे पहले के बिल में इसके लिए प्रावधान नहीं थे। विपक्ष का तर्क था कि इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।

3- तत्काल तीन तलाक अभी गैरजमानती अपराध बना रहेगा लेकिन अब इसमें ऐसी व्यवस्था कर दी गई है, जिसके बाद मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है लेकिन इससे पहले पत्नी की सुनवाई करनी होगी। इससे पहले बिल में तीन साल की सजा के प्रावधान के बाद जमानत की गुंजाइश नहीं दी गई थी।

गौरतलब है कि तीन तलाक पर सरकार की तरफ से प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि तीन तलाक पर कानून बनाने में सरकार हड़बड़ी दिखा रही है। इस प्रस्तावित कानून में कई खामियां हैं जिन पर बहस होनी चाहिए और इस बिल में आवश्यक संशोधनों को शामिल किया जाना चाहिए।

तीन तलाक पर सरकार की अग्नि परीक्षा, यह है बहुमत का गणित

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लोकसभा में तीन तलाक बिल को पास कराने के बाद आज राज्यसभा में मोदी सरकार की असली अग्नी परीक्षा होगी। सरकार के इरादे जरूर बुलंद है लेकिन राज्यसभा की राह इतनी आसान नही है। एक ओर सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नही है वहीं दूसरी ओर सभी विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ एक होते नजर आ रहे है। सभी विपक्षी दल एकजुट होकर इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे हैं। सदन में सांसदों की उपस्थिति को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को व्हिप जारी किया। कांग्रेस ने लोकसभा और राज्य सभा के अपने सभी सांसदों को 31 दिसंबर को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है।

दरअसल आज राज्यसभा में तीन तलाक मुद्दे पर बहस हो सकती है जिसके मद्देनजर पार्टी ने यह व्हिप जारी किया है। कांग्रेस नहीं चाहती कि उसके सांसद तीन तलाक मुद्दे पर पार्टी के खिलाफ जाएं। वहीं लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद भाजपा भी राज्यसभा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसलिए पार्टी ने एक बार फिर से सांसदों के सदन में उपस्थित रहने को लेकर व्हिप जारी किया है।

क्या होता है व्हिप

व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के तहत माना जा सकता है और सदस्यता रद्द कर दी जा सकती है। व्हिप तीन तरह का होता है- एक लाइन का व्हिप। दो और तीन लाइन का व्हिप। इन तीनों मे तीन लाइन का व्हिप महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कठोर कहा जाता है। इसका इस्तेमाल अविश्‍वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए किया जाता है तथा उल्लंघन के बाद सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती है। हालांकि व्हिप को लोकतंत्र की मान्यताओं के अनुकूल नहीं माना जाता है, क्योंकि इसमें सदस्यों को अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि पार्टी की इच्छा के अनुसार कार्य करना होता है जो लोकतंत्र की भावनाओं के विरुद्ध है।

बहुमत का गणित है सरकार के खिलाफ

तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास करवाना सरकार के लिए काफी मुश्किल दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी जरूर बन गई है लेकिल बहुमत से काफी दूर है। राज्यसभा के कुल 244 सांसदों में से भाजपा के पास कुल 73 सांसद हैं। वहीं जेडीयू, अकाली दल, शिवसेना और अन्य संभावित साथी सांसदों को मिलाकर भी एनडीए का आंकड़ा 100 के अंदर ही दिख रहा है।

राज्यसभा में सरकार के संभावित साथी

राज्यसभा के मौजूदा सांसद – 244

  1. बीजेपी के पास सांसद – 73
  2. सहयोगियों में जेडीयू के सांसद – 6
  3. अकाली दल के सांसद – 3
  4. शिवसेना के सांसद – 3
  5. कुछ छोटे दलों के समर्थक सांसद – 3
  6. नामांकित और निर्दलीय साथ आ सकने वाले सांसद- 9

सदन में कुल 244 में से कुल 98 सांसदों का समर्थन

तीन तलाक के मुद्दे पर जहां एनडीए अल्पमत में दिख रही है तो वहीं यूपीए के साथ इस मुद्दे पर बहुमत नजर आ रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस का पास राज्यसभा में 50 सांसद हैं। वहीं तीन तलाक के मुद्दे पर 13-13 सांसदो वाली टीएमसी, एआईडीएमके और समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस के साथ नजर आ रही है। अगर तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद सांसदों के आंकड़ो पर नजर डालें तो यह आंकड़ा बहुमत के साथ 135 के आस-पास दिख रहा है। यह सभी सांसद बिल को राज्यसभा में पारित कराने से पहलेे ज्वांइट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना चाहते हैं।

राज्यसभा में बिल के खिलाफ संभावित सांसद

  1. कांग्रेस के सांसद – 50
  2. टीएमसी के सांसद- 13
  3. एआईडीएमके के सांसद- 13
  4. समाजवादी पार्टी के सांसद- 13
  5. लेफ्ट फ्रंट के सांसद – 7
  6. टीडीपी के सांसद- 6
  7. टीआरएस के सांसद – 6
  8. आरजेडी के सांसद- 5
  9. बीएसपी के सांसद- 4
  10. डीएमके के सांसद- 4
  11. बीजू जनता दल के सांसद- 9
  12. आम आदमी पार्टी के सांसद- 3
  13. पीडीपी के सांसद- 2