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RSS ने दी चेतावनी,कहा- ‘नही मनाने देंगे टीपू सुल्तान की जयंती’ !

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Newbuzzindia: पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कर्नाटका सरकार टीपू सुल्तान की जयंती मनाने के लिए अड़ी हुयी है। और इसके विपरीत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इसे रोकने की भरसक कोशिश में लगा हुआ है। आरएसएस की ओर से साफ़ कहा गया है कि वे टीपू सुल्तान की जयंती नही मनाने देंगे।

कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के क्षेत्रीय संघचालक वी नागराज ने कहा, ‘हमारा संगठन सड़कों पर उतर कर टीपू जयंती के विरोध में प्रदर्शन करेगा। क्योंकि वह धार्मिक रूप से कट्टर और हिंसक सुल्तान थे।’ आपको बता दे की 10 नवंबर को सिद्धारमैया सरकार 18वीं सदी में मैसूर के राजा टीपू सुल्तान की जयंती मनाने जा रही है। पिछले वर्ष भी इसे मनाया गया था जिसके चलते कुर्ग में हिंसा हो गयी थी साथ ही दो लोगो की मौत भी।

इसलिए RSS करता है विरोध-

RSS और भाजपा टीपू सुल्तान को एक कट्टर और हिंसक राजा के रूप में पेश करती आई है, जिसने बड़ी संख्या में हिन्दुओं और ईसाइयों को धर्मांतरण करवाया इस मामले को लेकर आरएसएस और इससे जुड़े संगठनों राज्यभर में इसके विरोध में आंदोलन का फैसला लिया है। इसके लिए बेंगलुरु में 8 नवंबर को बड़ी रैली भी होने जा रही है।

सर्वे से हुआ खुलासा, सपा के कलह से बड़ी अखिलेश यादव की ‘लोकप्रियता’!

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Newbuzzindia:  सपा का कलह, सपाइयों के बीच झड़प, सपा के नेताओं की टक्कर और सपा का बिखरने तक पहुँचना, इन बातों से कोई भी अंजान नही है। उत्तरप्रदेश ही नही देश के हर राज्य और राज्य का हर व्यक्ति सपा के इस गृह कलह से भलीभांति परिचित है। सपा में इतना कुछ हुआ और आखिरकार मामला शांत हो गया। पर क्या आपने सोचा है कि इन सब से फायदा किसको हुआ ? कहा जा रहा था कि सपा में चल रहे इस बवाल से राजनीति में सपा की पकड़ ढीली पड़ जाएगी और सपा का अस्तित्व तक खतरें में पड़ जाएगा। पर ऐसा कुछ भी नही हुआ, इतना सब कुछ हो गया और इसका फायदा भी मिला।

सपा के कलह और अंतर्द्वंद से जिस व्यक्ति को फायदा हुआ है, वह है उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ! एक सर्वे से खुलासा हुआ है कि सपा में चल रहे बवाल से अखिलेश यादव को अधिक लोग जानने लगे है। उनके चर्चे आम लोगों तक पहुचें है और इसी के चलते उनकी लोकप्रियता में इजाफा भी हुआ है।

यह सर्वे सी-वोटर की तरफ से किया गया था जिसमे सितम्बर और अक्टूबर के आंकड़े जारी किये गए है। जो की आम लोगों तक जाकर इकट्ठा किये गए है। सर्वे के मुताबिक सितंबर अखिलेश को पसंद करने वालों की संख्या 77.1 फीसदी थी, तो अक्तूबर में 83.1 फीसदी लोगों ने अखिलेश को पसंद किया। बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश को 66.7 फीसदी लोगों ने पसंद किया। वहीं, उन्हें अक्टूबर मुख्यमंत्री के तौर पसंद करने वालों की आंकड़ा 75.7 फीसदी रहा।

वहीँ सर्वें से चौकाने वाला खुलासा भी हुआ है। सपा के अंतर्द्वंद से सपा के महानायक मुलायम सिंफह यादव की छवि को खासा नुकसान हुआ है। उत्तरप्रदेश में उनके चाहने वालों की संख्या में गिरावट देखी गयी है। मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री के रूप में देखने वालों को संख्या पहले 19.1 फीसदी थी जो अब मात्र 14.9 फीसदी रह गयी है।

आजम खान ने योगी आदित्यनाथ के पौरुष पर उठायी ऊँगली, कहा- ‘शादी करके साबित करे अपनी मर्दानगी’

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Newbuzzindia: राजनीति में रहना है तो चर्चाओं में रहना होगा और चर्चाओं में रहना है तो कुछ ना कुछ अलग करना होगा। ऐसा ही कुछ करते रहते है आजम खान। समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तरप्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान हमेशा से ही विवादित बयान देने के लिए जाने जाते है। इन्हें कट्टर मुस्लिम समर्थक नेता के रूप में भी देखा जाता है। ये हमेशा से ही हिन्दू समर्थक नेताओं को निशाने बनाते या रहे है।

इस बार आजम खान के निशाने पर उत्तरप्रदेश के कद्दावर नेता और भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ आये है। आजम खान ने आदित्यनाथ को लेकर विवादित बयान दिया है। आजम खान ने कहा कि ‘योगी शादी करें और अपनी मर्दानगी साबित करें।’ आजम खान ने यह बयान उनसे पूछे एक सवाल में दिया है जिसमे उनसे पूछा गया था कि
‘क्या आप योगी आदित्यनाथ के गढ़ में है और प्यार-मोहब्बत से क्या उनसे तल्ख रिश्तों को खत्म करेंगे?’

आपको बता दे की इससे पहले आजम खान ने साक्षी महाराज को लेकर भी एक विवादित बयान दिया जिसमें उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि ‘बलात्कारी की बात मत करें। जो आदमी पहले से ही बलात्कार के मामले में आरोपी है तो उसकी मैं क्या बात करूं।’

‘मुस्लिम और मुस्लिमों के वोट नही है किसी पार्टी की ‘जागीर’ !’

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Newbuzzindia: उत्तर प्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव होने को है और इसी बीच प्रदेश के महानायक मुलायम सिंह यादव की पार्टी समाजवादी पार्टी में घमासान मच गया इस घमासान के बीच यूपी में राजनीति का खेल और भी तेज हो गया और खेल में उत्तरप्रदेश का हर नेता शरीक होने चाह रहा है। इसमें अपने आप को शामिल करने के लिए हर राजनेता अपना नया तरीका आजमा रहा है। वही यूपी में मुस्लिम समुदाय का अच्छा वोट बैंक है, जिसके चलते हर पार्टी और नेता उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने के भरसक कोशिश कर रहे है।

ऐसा ही कुछ यूपी के कद्दावर नेता आजम खान भी कर रहे हैं वह एक तीर से दो निशाने लगाने की फिराक में है। आज़म खान मुस्लिम और मुस्लिम वोटों पर अपना रुख किया है और कहा कि, कुछ पार्टियों ने मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर समझ रखा है। मुसलमानों का बुद्धिजीवी वर्ग और खुद मुसलमान अपना भला बुरा समझते हैं। मुसलमान पानी का बुलबुला नहीं हैं और ना ही थाली का बैंगन हैं। जिसे कहीं भी लुढ़का दिया जाए।

आजम खान ने कहा की उत्तरप्रदेश का मुस्लिम समुदाय यूपी में चल रहे सियाशी घमासान से परेशान हो चूका है। आजम खान ने यहाँ तक कह दिया की यूपी का मुस्लिम समुदाय हारी हुयी पार्टी के साथ नही जाना चाहता। खैर उनकी तरफ से बात साफ़ भी कर दी गयी की up का मुस्लिम समुदाय सेक्युलर हिंदुओं का समर्थन जरूर करेगा। इन बयानों के आधार पर आजम ने अपने दबे शब्दों में समाजवादी पार्टी पर तीर छोड़े है।

शिवराज सरकार का एक और बड़ा घोटाला , ‘व्यापमं-2’ !

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Newbuzzindia: मध्य प्रदेश में 3 साल पहले एक महा घोटाला ‘व्यापमं’ हुआ था जिस से कि मध्य प्रदेश में नहीं देश की राजनीति भी पूरी तरह हिल गई थी । शिवराज सरकार में हुए इस महाघोटाले से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सभी विरोधियों ने उंगली उठाई तो मुख्यमंत्री पद से त्याग देने के लिए तक दबाव बनाया । यह व्यापमं घोटाला अभी तक पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में एक नया घोटाला सामने आया है। कयास लगाए जा रहे है की यह घोटाला व्यापमं घोटाले के स्तर का ही हो सकता है।

यह घोटाला मध्य प्रदेश में राज्य की सबसे अहम मानी जाने वाली भर्ती आयोग, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) में होने की आशंका है। एमपीपीएससी द्वारा कुछ साल पहले उच्च शिक्षा विभाग में की गई प्रोफेसरों की सीधी भर्ती में भारी अनियमितता सामने आई है।

नेशनल दस्तक के अनुसार, यह घोटाला जनवरी 2009 में एमपीपीएससी ने उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसरों की भर्ती के लिए 385 पदों का विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत प्रोफेसर पद पर सीधे साक्षात्कार के माध्यम से नियुक्ति की जानी थी। वर्ष 2011 के मध्य में यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। शिकायतों के बाद इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। उसी समिति ने हाल में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है जिसमे कहा गया है कि आयोग द्वारा विज्ञापन जारी होने तथा चयन हेतु साक्षात्कार पूरा करने के बाद अनुभव के बारे में जो स्पष्टीकरण जारी किया गया वह पूरी तरह नियम के विरुद्ध है। जांच समिति ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए साक्षात्कार होने के बाद अगस्त, 2011 में विज्ञापन में संशोधन जारी किया गया। नियमानुसार यदि संशोधन करना आवश्यक था तो पूरी प्रक्रिया निरस्त कर फिर से आवेदन मंगाए जाने थे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। समिति के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग के भर्ती नियमों के मुताबिक अनुभव योग्यताएं, जो पारंपरिक रूप से पदोन्नति के लिए भी स्वीकार की जाती हैं, से अलग योग्यताओं की व्याख्या या स्पष्टीकरण लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किया गया।

RSS का नाम भी आया सामने-
जिस समय यह भर्ती प्रक्रिया चली उस दौरान प्रोफेसर पीके जोशी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल 13 जून 2006 से 28 सिंतबर, 2011 तक था। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि का माना जाता है। उच्च शिक्षा विभाग के सूत्र नाम न बताने की शर्त पर जानकारी देते हैं कि चयनित कई उम्मीदवार भी संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं।

Exclusive: फिर साथ-साथ होंगे नितीश-मोदी, गठबंधन की तलाश में जुटे नितीश कुमार !

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नितीश-मोदी

Newbuzzindia: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पुराने दिनों को याद कर रहे है, और फिर से पुराने दिनों की तलाश में जुट गए है। जी हां, हम बात कर रहे है नितीश कुमार के जदयू और भाजपा के गठबंधन की। ये गठबंधन कुछ साल पहले ही टुटा है, जिसकी कमी नितीश कुमार को महसूस होने लगी है।

इंग्लिश न्यूज़पेपर संडे गार्जियन के अनुसार  नीतिश कुमार फिर से भाजपा का दामन थामने के चक्कर में है और BJP से गठबंधन करने का मन बना रहे है। नितीश कुमार ये काम अपने एक नेता, जो की डॉक्टर भी है, से करवा रहे है। यह नेता दिल्ली में भाजपा के बड़े नेता से बैठक करके गठबंधन के रास्तों की खोज कर रहा है।

बताया जा रहा है लालू प्रसाद के साथ गठबंधन से नितीश कुमार अपनी छवि को ख़राब सा महसूस कर रहे है इसलिए वो अपनी छवि को फिर से चमकाने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने के रास्ते खोज रहे है।

विरोधी चाहे कितने भी गठबंधन कर लें , पंजाब में आएगी “आप की सरकार”

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Newbuzzindia: जैसे -जैसे पंजाब में चुनाव करीब आ रहा है, वैसे वैसे नेताओं और पार्टियों में जुबानी जंग भी तूल पकड़ने लगी है। इस लड़ाई में आम आदमी पार्टी सबसे आगे खड़ी है। आम आदमी पार्टी, पंजाब में अपने विरोधियों को नीचा दिखाने का जहां एक मौका भी नही छोड़ रही है तो वही अपने जुबानी तीरों से विरोधियों को तार-तार कर रही है।

आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को एक बयान दिया जिसमें कहा कि चाहे विरोधी दल कुछ कर ले, चाहे कितने गठबंधन बना ले, पंजाब में तो AAP की ही सरकार आएगी। भले ही दूसरे दल गठबंधन करके हमारे खिलाफ खड़े हो जाएं, लेकिन हम दिल्ली की तरह पंजाब में भी बाजी मारेंगे।

इस संबंध में AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने एक ट्वीट भी किया, जिसमे कहा कि
‘दिल्ली में भी अकाली, भाजपा और कांग्रेस को यह गलतफहमी थी लेकिन हमारी आईं 70 में से 67 सीटें, पंजाब में आएंगी 100 सीटें।’

आपको बता दे कि इससे पहले सुखबीर बादल ने बयान दिया था कि ‘पंजाब में होने वाले आगामी विधानसबा चुनावों में उनका मुकाबला सिर्फ कांग्रेस से होने जा रहा है। अगर जीत पाई तो आप सिर्फ 10 सीटें जीत पाएगी। इस बयान पर संजय सिंह ने पंजाब में अपनी सरकार बनने का दावा करते हुए 100 सीटें जीतने का दावा किया।’ संजय सिंह ने अपना बयान इसी बयान के पलटवार में दिया है।

UP: चुनाव से पहले ही भाजपा की बड़ी जीत ! BJP में एक साथ शामिल हुए सैकड़ों वकील और नेता !

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Newbuzzindia: उत्तरप्रदेश में नये वर्ष के शुरूआती महीनों में विधानसभा चुनाव होने है। और इसी वजह से उत्तरप्रदेश पर सभी लोग नजर टिकाये हुए है। जहां एक तरफ उत्तरप्रदेश की राजनीति के महानायक मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा में आपसी मतभेद से टूटने की स्थिति बन गयी है तो वहीँ इस दौर में भाजपा को ख़ासी मजबूती मिल रही है।

शनिवार को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के उपाध्यक्ष जानकी शरण पांडेय समेत सैकड़ों वकीलों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। ये सदस्यता ऐसी स्थिति में ली गयी है जब up में जल्द ही चुनाव होने है। इस बात से उत्तरप्रदेश में भाजपा विरोधी दलों को जरूर जोरों का झटका लगा है।
भारतीय जनता पार्टी में नए शामिल हुए समस्त लोगो का उत्तरप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्वागत किया और  कहा कि विधिक वर्ग के प्रतिनिधियों के बड़े संख्या में शामिल होने से पार्टी की प्रदेश के 404 सदस्यीय विधानसभा में 265 सीटों से अधिक पाने के लक्ष्य का और मजबूती दी है।
आपको बता दे की शनिवार को ही बहुजन समाज पार्टी के नेता रमेश पटेल, समाजवादी पार्टी के नेता राम नरेश पासवान, पीस पार्टी के प्रदेश महासचिव ध्रुव प्रताप सिंह भी भाजपा में शामिल हुए है।

खत्म हुआ इन्तजार, जनवरी-फरवरी में तय हो जायेगी UP की किस्मत, जल्द मिलेगा नया मुख्यमंत्री !

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Newbuzzindia: आज देश में सबसे बड़े मुद्दों में से एक मुद्दा उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 भी है। जो की लगभग 2 सालों से चर्चा का विषय बना हुआ है और राजनीति में लगातार हड़कंप मचा रहा है।

पर अब कयास लगाए जा रहे है कि , UP विधानसभा चुनाव जनवरी-फरवरी 2017 में हो जाएंगे। क्योकि इसके पहले का विधानसभा सत्र की अवधि 27 मई 2017 तक है।

ये होंगे चुनाव के चरण:

  1. पहला चरण :  5 या 11 फरवरी (60 सीटें)
  2. दूसरा चरण : 15 फरवरी बुधवार (55 सीटें)
  3. तीसरा चरण : 18 फरवरी शनिवार(59 सीटें)
  4. चौथा चरण : 22 फरवरी बुधवार (56 सीटें)
  5. पांचवा चरण : 26 फरवरी रविवार (56 सीटें)
  6. छठवां चरण : 1 मार्च बुधवार (49 सीटें)
  7. सातवां चरण : 4 या 5 मार्च (68सीटें)

आपको बता दे की पुरे उत्तरप्रदेज़ह में वोटरों की कुल संख्या 11,50,000,00 से ज्यादा भी ज्यादा है। जो की 403 सीटों पर होने वाले चुनाव में अपनी भागीदारी निभाएंगे।

केजरीवाल ने गुजरात पर कसा शिकंजा! BJP को बताया दलित विरोधी तो हार्दिक पटेल हुए देशभक्त !

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Newbuzzindia: छोटा पैकेट बड़ा धमाका ! हां आप सही समझ रहे है। अरविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पर ये बात पूरी तरह बैठती है। बहुत कम समय में सत्ता हतियाने वाली राजनीतिक पार्टी AAP दिल्ली में अपने झंडे तो गाड़ ही चुकी है। अब उसकी नजर देश के अन्य प्रदेशों पर आ टिकी है। जहां केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए जी जान लगा दी है तो वहीँ अब वे मोदी के गढ़ और गृह राज्य गुजरात में भी सेंध लगाने के मकसद से कड़ी टक्कर में उतर आये है।

केजरीवाल राजनीति के नए खिलाड़ी के रूप में उभरे है और अब उनकी नजर गुजरात की सत्ता पर भी टीक चुकी है। इसी के चलते उन्होंने हार्दिक पटेल का तहे दिल से support किया है तो वहीँ भाजपा को बैकफुट पर लाने के लिए अनेकों हथकंडे अपना रहे है। 

केजरीवाल ने सूरत में एक बड़ी रैली की है जिससे गुजरात भाजपा में थोड़ी हलचल मची हैं। केजरीवाल ने रैली में एक तीर से तीन निशाने लगाए है। उन्होंने गुजरात में भड़के पटेल आंदोलन को समर्थन दिया तो वहीँ हार्दिक पटेल को देशभक्त का दर्जा भी दिया साथ ही दलितों के प्रति संवेदना भी जाहिर की। इसी दौरान भाजपा को दलित विरोधी बता कर दलितों के वोट बैंक पर एक तिरछी नजर डाली है।

आपको बता दे की सूरत में केजरीवाल की रैली के पहले ही गुजरात के कई जिलों में केजरीवाल का विरोध शुरू हो गया था। तो कहीं कहीं हंगामे भी हुए।

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