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शिवराज के बनाए आलीशान भवन से सरकार चलाएँगे कमलनाथ

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मध्यप्रदेश में 15 साल का वनवास काटने के बाद कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आई है। कमलनाथ ने प्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ भी ले ली है और अब वह 613 करोड़ से ज्यादा की लागत से बने नए एनेक्सी भवन से सरकार चलाएंगे। शपथग्रहण के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ एनेक्सी भवन आए, जिसके लिए यहां खास तैयारी की गई थी। नए एनेक्सी भवन को फूलों से सजाया गया था। वहीं सुरक्षा के लिए भी कड़े इंतजाम किए गए थे। इस बिल्डिंग को आकार देने का काम तो पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने किया था, लेकिन अब कमलनाथ इसमें बैठेंगे। मंत्रालय में जगह कम पड़ने की वजह से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2015 में नई एनेक्सी भवन बनाने का सपना देखा था।

जनवरी 2015 में शिवराज सिंह ने एनेक्सी भवन का निर्माण शुरू कराया। कोशिश तो ये थी कि मौजूदा विधानसभा चुनाव के 6 महीने पहले ही इसका शुभारंभ हो जाए, लेकिन सीएम शिवराज सिंह के ये अरमान पूरे नहीं हो सके और अब कमलनाथ इस नई कॉपोर्रेट बिल्डिंग से अपनी सरकार चलाएंगे। मध्य प्रदेश की सबसे महंगी बिल्डिंग बताए जा रहे एनेक्सी की पांचवीं मंजिल पर सीएम का कमरा है। इस कमरे में भव्य सिंहासननुमा कुर्सी रखी गई है। जिस पर पहले तो शिवराज सिंह को बैठना था, लेकिन अब कमलनाथ इस पर बैठकर राज्य की बागडोर संभालेंगे। इस बिल्डिंग में 200 लोगों के बैठने के लिए खास हॉल बनाया गया है। यहां अफसरों के साथ सीएम कमलनाथ बैठक करेंगे। इसमें एलईडी स्क्रीन के साथ ही प्रोजेक्ट कर लगाए गए हैं। इसका लोकार्पण पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना था। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई थी। सितंबर के आखिरी हफ्ते में भोपाल में हुए कार्यकर्ता महाकुंभ के वक्त ही इसका लोकार्पण होना था। लेकिन उस वक्त ये नहीं हो सका और उसके कुछ दिनों बाद ही चुनाव आचार संहिता लगने की वजह से पूर्व सीएम शिवराज सिंह भी यहां नहीं बैठ सके।

ऐसी है नई एनेक्सी बिल्डिंग

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बीते कार्यकाल में भोपाल के मंत्रालय भवन में अति आधुनिक एनेक्सी बनाने का फैसला किया था। 615 करोड़ खर्च करके पांच मंजिल बनी इस एनेक्सी में जिस तरह का मुख्यमंत्री सचिवालय तैयार किया गया है, वह शायद पूरे देश में नहीं होगा। नई बिल्डिंग में सीएम और मुख्य सचिव के लिए अलग से लिफ्ट लगाई गई है। वहीं जिस कमरे में सीएम बैठेंगे बुलेटप्रूफ कांच लगाए गए हैं। अकेले सीएम के सचिवालय को ही हाईटेक बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए। एनेक्सी में सीएम के कमरे की सजावट पर ही एक करोड़ से ज्यादा खर्च हुए हैं। ग्रीन बिल्डिंग के सिद्धांतों के हिसाब से इसे डिजाइन किया गया है। ये बिल्डिंग कुल पांच लाख 75 हजार वर्गफीट में फैली हुई है। वहीं इसमें 1180 कारों की पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।

करीब 6 लाख वर्ग फीट में बनी और धौलपुर के पत्थरों से सजी मंत्रालय की यह एनेक्सी कार्पोरेट तर्ज पर बनी है। इसकी पांचवीं मंजिल के 40 हजार वर्गफीट एरिया में सीएम सचिवालय बनाया गया है। इसमें सीएम कक्ष के बगल में मीटिंग रूम है। पांच हजार वर्गफीट ओपन एरिया है। 50 मीटर की लॉबी है, जिसमें सीएम सचिवालय के अधिकारी बैठ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक के लिए भी हाईटेक हॉल बनाया गया है। जिसमें ई-कैबिनेट की व्यवस्था की गई है। बड़े-बड़े प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। इसमें 700 कारों के खड़े रहने के लिए मल्टी लेवल पार्किंग बनाई गई है। इसके अलावा अलग-अलग विभागों के प्रमुख सचिवों के लिए हाईटेक ऑफिस और मीटिंग रूम बनाए गए हैं। इसे आकार लेने में साढ़े तीन साल लगे हैं।

मुख्यमंत्री- मामा बने मध्यप्रदेश के ‘आम आदमी’

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13 सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री और बच्चों के मामा रहे शिवराज सिंह चौहान विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद ‘आम आदमी’ बन गये है। भाजपा की हार के बाद मुख्यमंत्री पद से हटते ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर प्रोफाइल से ‘मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री’ हटाकर ‘द कॉमन मैन ऑफ़ मध्यप्रदेश’, अर्थात ‘मध्यप्रदेश का आम आदमी’ लिख दिया है।

इसके पहले शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह साफ़ कर दिया था कि वह आगे भी केंद्र में जाने की जगह प्रदेश की राजनीती ही करेंगे। ऐसे में अब देखना होगा की मध्यप्रदेश की राजनीती में मुख्यमंत्री से आम आदमी बने शिवराज सिंह चौहान क्या क्या भूमिका निभाते है।

ऑपरेशन क्लीनबोल्ड के चौथे भाग में प्रियंका ने उठाया बलात्कार और कुपोषण का मामला

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priyanka chaturvedi with shobha soja holding press confress in bhopal

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ऑपरेशन क्लीनबोल्ड का चौथा भाग जारी किया। ऑपरेशन के चौथे भाग में प्रियंका ने प्रदेश में बच्चों के साथ कुपोषण और महिलाओं के साथ बड़ते बलात्कार के मुद्दों को उठाया। प्रियंका ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री शिवराज अपने आपको बच्चों का मामा बताते है और अपनी छवि पर करोड़ों रुपये खर्च करते है। वहीं दूसरी उर प्रदेश की बहन-बेटिओं के साथ बलात्कार और अपहरण जैसी घटनाएँ बढती जा रही है।

महिला अपराध के साथ ही प्रियंका ने प्रदेश में बढ़ते कुपोषण को लेकर भी मुख्यमंत्री शिवराज पर जमकर हमला बोला। प्रियंका के कहा कि मध्यप्रदेश में बच्चों एवं नवजात शिशुओं की म्रत्यु डर देश में सबसे ज्यादा है। कुछ आंकड़े पेश करते हुए प्रियंका ने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष 90 हजार बच्चे अपना पहला जन्मदिन तक नही मना पाते। हर वर्ष 61 हजार बच्चे अपने जीवन का एक महीने के भीतर ही कुपोषण या लचर स्वास्थ व्यवस्था के चलते दम तोड़ देते है। मामा के राज में 32% नाबालिग बेटिओं की शादी करा दी जाती है।

प्रदेश में बड़ी बच्चों की तस्करी

प्रियंका ने कहा की मामा शिवराज जी के राज में बड़े पैमाने पर बच्चों की तस्करी हो रही है। प्रियंका ने बताया की प्रदेश में 2004 से 2017 तक 1,18,789 बच्चे गम हो गये, जिनमें से 70 हजार से जयादा बेटियां है। कानून यह कहता है कि कोई भी बच्चा अगर 3 महीने तक नही मिलता है तो मानव तस्करी का मुकदमा दर्ज होना चाहिए लेकिन मामा के राज में यह मुकदमा दर्ज नही किया जाता। यहाँ तक की बच्चों की तस्करी में भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों का तक नाम आ रहे है। एक सोशल एक्टिविस्ट के स्टिंग ऑपरेशन में अलीराजपुर के एक भाजपा नेता पिंटू जैसवाल के समधी शैलेन्द्र जैन का नाम बच्चों की तस्करी में आया हैं।

लहार में फायरिंग, चुनाव आयोग से शिकायत करेगी कांग्रेस

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस मीडिया विभाग की प्रदेश अध्यक्ष शोभा ओझा ने लहार विधानसभा में फायरिंग का मामला भी उठाया। ओझा ने कहा कि लहार विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी रसालसिंह के परिवार ने कांग्रेस प्रत्याशी गोविन्द सिंह के भतीजे और युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अनुरुद्ध प्रताप सिंह पर जान से मारने की नियत से हमला किया।

कांग्रेस प्रत्याशी गोविन्द सिंह ने इस मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी व्ही। एल कान्ताराव को पत्र लिखकर उचित कार्यवाही और सुरक्षा की मांग की।

मामा ने राफेल बनाने वाली कंपनी को दी जमीन, 2 साल 9 महीने बाद भी नही आया निवेश: सुरजेवाला

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anil ambani with chief minister of madhyapradesh shivraj singh chouhan

फ्रांस के साथ मिलकर राफेल बनाने वाली अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस एण्ड एयरो स्पेस प्रायवेट लिमिटेड को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फरवरी 2016 में भोपाल एयरपोर्ट के पास 76 एकड़ और धार जिले के पीथमपुर में 195 एकड़ जमीन काफी कम दामों पर दी। 2 साल और 9 महीने बीत जाने के बाद भी अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस ने यहाँ कोई निवेश नही किया। ऑपरेशन क्लीनबोल्ड के तीसरे भाग को जारी करते हुए कांग्रेस मीडिया विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणदीप सुरजेवाला ने यह आरोप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगाए।

शुक्रवार शाम प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता को समोधित करते हुए सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा इन्वेस्टर्स मीट के नाम पर निवेश के फर्जी आंकड़े जारी करने का आरोप लगाया। सुरजेवाला ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2007 से 2016 तक कुल 12 इन्वेस्टर्स मीट की। जिसमें मामा ने 6,821 निवेश के प्रस्तावों और कुल 17,49,739 करोड़ रूपये के निवेश का दावा करके झूठी प्रसिद्धि हासिल की। सच्चाई तो यह है कि निवेश के प्रस्ताव न तो ज़मीन पर आए और न ही लागू हुए। विशेषज्ञों के मुताबिक इन इन्वेस्टर्स मीट के 17,49,739 करोड़ के निवेश के प्रस्तावों में से 50,000 करोड़ का निवेश भी जमीन पर नहीं आया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए सुरजेवाला ने आगे कहा कि सच्चाई यह है कि मामा ने उद्योगों में निवेश नहीं, स्वयं की खोखली छवि में निवेश किया है। अब इस ढोल की पोल खोलने का वक्त आ गया है।

कांग्रेस करेगी जनवरी की इन्वेस्टर्स मीट

जनवरी 2019 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक और इन्वेस्टर्स मीट करने जा रहे है, कांग्रेस अगर सरकार में आती है तो क्या यह मीट कराएगी ? के जवाब में सुरजेवाला ने कहा कि शिवराज जी झूठी इन्वेस्टर्स मीट करवाते है। कांग्रेस की सरकार आएगी तो मध्यप्रदेश के युवाओं और किसानों के लिए इन्वेस्टर्स मीट करवाएगी।

निवेश न करने वाली कंपनियों से जमीन वापिस लेगी कांगेस

एक सवाल के जवाब में सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस सरकार में आएगी तो जमीन लेकर निवेश न करने वाली कंपनियों से जमीन वापिस लेगी और उन कंपनियों को देगी जो प्रदेश में निवेश भी करे और प्रदेश के युवाओं को रोजगार भी दे।

प्रधानमंत्री मोदी की झूठ बोलने की आदत जाती नही: सुरजेवाला

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कर्नाटक और पंजाब में कांग्रेस द्वारा किसानों का कर्जा माफ़ नही करने के दावे पर पलटवार करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी को झूठ बोलने की आदत है और शायद उन्हें यह आदत बचपन की है इसलिए जा ही नही रही। कांग्रेस ने कर्नाटक और पंजाब में किसानों का कर्जा माफ़ किया है। पंजाब में तो मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जिला-जिला जाकर किसानों से मिल रहे है, जहां किसान मुख्यमंत्री को कर्ज माफ़ी की पर्ची दिखा रहे है। मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करूंगा की वह मेरे साथ पंजाब चलें और खुद किसानों के कर्जमाफी के सबूत देखें।

मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने बावजूद मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा बुधनी: अरुण यादव

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Image of Formet President of Madhya Pradesh COngress Arun Yadav

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और बुधनी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव ने गुरूवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेस वार्ता में अरुण यादव ने सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 15 साल से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की विधानसभा होने के बावजूद बुधनी में कोई विकास नही हुआ। बुधनी के लोग आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे है। 


यादव ने कहा कि ” मैंने पिछले 10 दिनों में बुधनी के 200 से ज्यादा गाँवों का दौरा किया है। यहां जनता के पास पीने के पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नही है। गांव के गांव कीचड से सने हुए है। कांग्रेस को बुधनी में भारी जनसमर्थन मिल रहा है और हम भारी मतों से बुधनी में जीत दर्ज करने वाले है। “


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर कुछ कंपनियो को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बुधनी के किसानों से कम दाम पर जमीन खरीदकर ट्राइडेंट और वर्धमान जैसी कंपनियो को दी है। वहीं मुख्यमंत्री के कुछ पसंदीदा ठेकेदारों ने क्षेत्र में भय का माहौल बना रखा है।

मतदान में गड़बड़ी की आशंका


अरुण यादव ने बुधनी के कुछ मतदान केन्द्रों पर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस को भारी जनसमर्थन के बावजूद कुछ मतदान केन्द्रों पर 5, 10, 25 और 50 वोट मिले है। जिसके कारण पार्टी को इन केन्द्रों में कुछ गड़बड़ी होने की आशंका है। 
प्रेस वार्ता के बाद अरुण यादव ने चुनाव आयोग से इन मतदान केन्द्रों की विशेष निगरानी करने की मांग की है।

मध्यप्रदेश में अकेले पड़ते शिवराज, अपने भी नही दे रहे साथ।

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shivraj singh chauhan
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फाइल फोटो

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते हुए तीसरा विधानसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतर रहे है। पिछले दो चुनावों की तरह इस बार भी भाजपा शिवराज भरोसे मैदान में उतर रही है। टिकट वितरण से लेकर घोषणा पत्र तक, कोई भी फैसला शिवराज सिंह की सलाह के बिना नही हो रहा। आरएसएस द्वारा 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों की टिकट काटने के सुझाव को भी शिवराज सिंह ने हासिये पर रख दिया। शिवराज सिंह चौहान की इजाजत के बिना मध्यप्रदेश भाजपा का एक पत्ता भी नही हिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को तक अपनी बहू को टिकट दिलाने के लिए मौन व्रत धारण करना पड़ गया। तो वहीं दिग्गज नेता सरताज सिंह की तो दाल ही नही गली। आलम यह है कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और अमित शाह के बेहद करीबी नेता कैलाश विजयवर्गीय को भी अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए अपनी सीट त्याग करनी पड़ गयी।

एक ओर शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में अपने आगे किसी की चलने नही दे रहे तो वहीं लोग भी अब शिवराज सिंह चौहान से दूरी बना रहे है। चुनाव में जीत हुई तो ताज शिवराज सिंह चौहान के सर पे होगा लेकिन अगर हारी तो हार का ठीकरा भी शिवराज सिंह के सर ही फोड़ा जाएगा।

लगातार 14 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद शिवराज का जादू अब मध्यप्रदेश में फीका पड़ता जा रहा है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी अब हार की सुगबुगाहट होने लगी है। यही कारण है कि गुजरात मे 34 और कर्नाटक में 21 रैली करने वाले प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश में एक दर्जन से भी कम रैली करने वाले है। मध्यप्रदेश में अभी तक आरएसएस भी सक्रिय भूमिका में नही आया है। अचार सहिंता लगने के बाद से शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा में से भी भीड़ गायब होने लगी थी। जिसके कारण मुख्यमंत्री को यह यात्रा बीच मे ही रोकनी पड़ गयी।

सरकार विरोधी लहर से पार पाना शिवराज के लिए मुश्किल

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार को 13 साल और भाजपा सरकार को लगभग 15 साल होने को है। जनता, कर्मचारी वर्ग और यहां तक कि मीडिया भी शिवराज के चेहरे से ऊब चुका है। भाजपा नेताओं के कार्यक्रम में खाली कुर्सी, स्पाक्स का चुनावी मैदान में उतरना और मीडिया में दिखाए गए सर्वे तो यही इशारा कर रहे है। प्रदेश का जो मीडिया अभी तक शिवराज गाथा गए नही थकता था, उसी मीडिया ने संबित पात्रा जैसे प्रवक्ता को होटल के रूम में बैठने को मजबूर कर दिया है।

हार का डर अब पार्टी में बैठे लोगों को भी होने लगा है। तभी कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के नेता पाला बदल रहे है। टिकट घोषित होने से पहले ही भाजपा के दो मौजूदा विधायक और खुद शिवराज सिंह चौहान के साले ने उनका साथ छोड़ कांग्रेस का हांथ थाम लिया है। भाजपा को प्रदेश की सत्ता पर बैठने वाला किसान, युवा और सवर्ण वर्ग भी अब सरकार से रूठा बैठा है।

कांग्रेस की तिकड़ी कर सकती है कमाल

2003 विधानसभा चुनाव हारने के बाद से मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के आरोप लगते आए है। भाजपा की जीत के पीछे भी कांग्रेस के नेताओं का बागी होना एक बड़ा कारण रहा है। लेकिन इस बार हालात पिछले 3 चुनावों से काफी अलग है। कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय समेत कांग्रेस के सभी नेता अब एक मंच पर आ रहे है, एक लाइन पर चल रहे है और एक ही बात बोल रहे है। टिकट बटवारे के बाद जो अंतरकलह कभी कांग्रेस में दिखाई देती थी वह अब भाजपा में दिखाई दे रही है। कांग्रेस पार्टी में दिख रही इस एकता का बड़ा श्रेय समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह को जाता है। दिग्विजय सिंह ने न सिर्फ प्रदेश भर का दौरा कर कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया बल्कि टिकट न मिलने पर नाराज कांग्रेस नेताओं को भी पार्टी के साथ लाए।

आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला – मोदी निर्मित तबाही, नोटबंदी से आई : सुरजेवाला

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randeep singh surjewala in bhopal

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को नोटबंदी की दूसरी बरसी पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेस वार्ता में सुरजेवाला ने कहा कि नोटबंदी को अब दो साल हो गये है। लोगों को समझ आ गया है कि नोटबंदी कोई क्रन्तिकारी कदम नही था बल्कि कालेधन को सफ़ेद करने वाली ‘फेयर एंड लवली योजना’ थी। जिसके कारण लाखों लोग बेरोजगार हो गये, हजारों कारखाने बंद हो गये, 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी और देश की अर्थव्यस्था चौपट हो गयी। सुरजेवाला ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जापान में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए ताली बजा-बजाकर देश के गरीब व मध्यम वर्ग का मजाक उड़ाते हुए कह रहे थे कि “घर में शादी है और पैसे नहीं हैं, देखो नोटबंदी का कमाल”। यह भाजपा के अहंकार की आखिरी सीमा थी। सच तो यह है कि जहां एकतरफ नोटबंदी ने किसान, नौजवान, महिलाएं, छोटे व्यवसायी व दुकानदार की कमर तोड़ डाली, तो दूसरी तरफ कालाधन वालों की हो गई ‘ऐश’, जिन्होंने रातों रात सफेद कर लिया सारा कैश।

नोटबंदी घोटाले ने किया सबको बेज़ार,
किसान हों, नौजवान हों, व्यवसायी या दुकानदार,
रोजी गई, गया रोजगार – अर्थव्यवस्था का बंटाधार,
ऐश की कालाधन वालों ने, भुगत रहे हैं ईमानदार,
वोट की चोट से बताएंगे, कि भाजपाई हैं जिम्मेवार

रणदीप सिंह सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा ” दो साल पहले, 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की तबाही को आर्थिक क्रांति का नया सूत्र बताते हुए तीन वादे किये – सारा काला धन पकड़ा जाएगा, फर्जी नोट पकड़े जाएंगे, आतंकवाद व नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। ऐसे में अब दो साल बाद नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान से नोटबंदी पर जवाब मांगने का समय आ गया है.” कांग्रेस मीडिया प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मौके पर भाजपा सरकार से 8 प्रमुख सवाल किये.

सारा कालाधन कहां गया ?

10 दिसंबर, 2016 को मोदी सरकार ने देश की सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि 15.44 लाख करोड़ पुराने नोटों में 3 लाख करोड़ कालाधन है, जो जमा नहीं होगा और जब्त हो जाएगा। सुरजेवाला ने बताया कि “24 अगस्त, 2018 की आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के दिन चलन में 15.44 लाख करोड़ के नोटों में से 99.9 प्रतिशत मतलब 15.31 लाख करोड़ पुराने नोट तो बैंकों में जमा हो गए। बाकी बचा पैसा भी रॉयल बैंक ऑफ नेपाल व भूटान तथा अदालतों में केस प्रॉपर्टी के तौर पर जमा है। तो फिर कालाधन गया कहां ?

फर्जी नोट कहां गए ?

मोदी जी और बीजेपी ने नोटबंदी के समय बड़े-बड़े दावे किये थे कि नोटबंदी से हजारों करोड़ के नकली नोट पकडे जायेंगे। साल 2017-18 आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक 15.44 लाख करोड़ के पुराने नोटों में से मात्र 58.30 करोड़ ही नकली नोट पाए गए, यानि 0.0034 प्रतिशत। क्या नोटबंदी से नकली नोटों पर नकेल कसना भी भाजपाई जुमला निकला ?

क्या ख़त्म हुआ उग्रवाद और नक्सलवाद ?

बीजेपी ने दावा किया था कि नोटबंदी से नक्सलवाद और उग्रवाद ख़त्म हो जाएगा। नोटबंदी के बाद अकेले जम्मू-कश्मीर में 86 बड़े उग्रवादी हमले हुए, जिनमें 127 जवान और 99 नागरिक शहीद हुए। वहीं 1030 नक्सलवादी हमले हुए, जिनमें 114 जवान शहीद हुए। तो क्या मोदी सरकार ने देश को जानबूझकर गुमराह किया?

क्या नए नोट छापने व बांटने की कीमत नोटबंदी की बचत से 300 प्रतिशत अधिक है?

आरबीआई के मुताबिक साल, 2016-18 के बीच नए नोट छापने तथा लिक्विडिटी ऑपरेशन में लगभग 30,303 करोड़ रु. खर्च हुए है, वहीं नोटबंदी में मात्र 10,720 करोड़ रु. वापस जमा नही हो पाए। क्या भाजपाई बताएंगे कि इतने बड़े आर्थिक नुकसान के लिए कौन जिम्मेवार है?

क्या डिजिटल हो गया इंडिया ?

8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के समय देश में 17.71 लाख करोड़ नगद चलन में था। वहीं 28 अक्टूबर, 2018 को चलन में कैश की मात्रा बढ़कर 19.61 लाख करोड़ हो गई है। तो फिर डिजिटल भुगतान कैसे बढ़ा?

नोटबंदी से पड़ी बेरोजगारी की मार ?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी से सीधे तौर पर 15 लाख नौकरियां गईं और देश की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। क्या यह सीधे तौर पर आर्थिक आतंकवाद नहीं?

क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद बनाने का एक बड़ा घोटाला था ?


रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नोटबंदी को कालेधन को सफ़ेद बनाने वाला देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया। सुरजेवाला ने कहा कि “नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा व आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रु. की संपत्ति पूरे देश में खरीदी। सितंबर, 2016 में बैंकों में यकायक 5,88,600 करोड़ रुपया अतिरिक्त जमा हुआ। नोटबंदी वाले दिन, यानि 8 नवंबर, 2016 को भाजपा की कलकत्ता इकाई के खाता नंबर 554510034 में 500 व 100 रु. के तीन करोड़ रुपए जमा करवाए गए। कर्नाटक के पूर्व मंत्री व भाजपा नेता, जी. जनार्दन रेड्डी (बेल्लारी ब्रदर्स) के सहयोगी, रमेश गौड़ा ने नोटबंदी के बाद खुदकुशी कर ली तथा सुसाईड नोट में लिखा कि 100 करोड़ रु. का कालाधन भाजपा नेताओं द्वारा बदला जा रहा था। क्या भाजपा व आरएसएस को नोटबंदी के निर्णय की जानकारी पहले से थी? क्या कारण है कि भाजपा व आरएसएस ने इतने सैकड़ों व हजारों करोड़ की संपत्ति खरीदी व इसे सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया? क्या इसकी जाँच नहीं होनी चाहिए?”

क्या अमित शाह व भाजपा नेताओं की जाँच हुई?

नोटबंदी के बाद मात्र 5 दिनों में यानि, 10 नवंबर से 14 नवंबर, 2016 के बीच अहमदाबाद जिला को -ऑपरेटिव बैंक में 745.58 करोड़ रु. के पुराने नोट जमा हो गए। इस बैंक के डायरेक्टर, भाजपा अध्यक्ष, श्री अमित शाह हैं, जो इससे पहले बैंक के चेयरमैन भी रहे हैं। 7 मई, 2018 के आरटीआई जवाब (A1 व A2) में बताया गया कि देश में किसी भी जिला को-ऑपरेटिव बैंक में जमा हई पुराने नोटों की यह सबसे बड़ी राशि थी। ऐसा क्यों? क्या इसकी जाँच हुई? क्या श्री अमित शाह की जाँच हुई?

रणदीप सुरजेवाला ने 8 सवाल पूछने के बाद कहा कि आज नोटबंदी को 731 दिन बीत गए हैं और देशवासी भुगत रहे हैं. जनता अब सब समझ गयी है और नोटबंदी का जवाब वोटबंदी करके देगी। कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो नोटबंदी के दौरान कालाधन बदलने वालों की जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसे सजा मिलेगी।

भ्रष्टाचार और अपराध का पर्याय बनी शिवराज सरकार: प्रमोद तिवारी

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senior congress leader pramod tiwari in bhopal

कांग्रेस के वरिष्ट नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए शिवराज सरकार को भ्रष्टाचार और अपराध का पर्याय बताया। तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में प्रदेश अपराधियों के गढ़ में तब्दील हो गया है। शिवराज सिंह चैहान मामा का मुखौटा लगाकर यहां भ्रष्टाचारियों, महामारियों, अपराधियों, व्यभिचारियों, जमाखोरों और कमीशनखोरों की सरकार चला रहे हैं। ऐसा कोई अपराध नहीं बचा है जो शिवराज सरकार के सानिध्य में मध्यप्रदेश में न हुआ हो।

प्रमोद तिवारी ने निजी संस्था टाटा स्ट्रेटेजिक मेनेजमेंट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि “बीते तेरह वर्षों के ‘मामा-राज’ में 30 हजार से अधिक हत्यायें, 46 हजार से अधिक बलात्कार, सवा दो लाख से अधिक जघन्य अपराध, और 28 लाख से अधिक आईपीसी के अपराध दर्ज किये गए। न्याय व्यवस्था का यह हाल है कि मध्यप्रदेश में साल के अंत तक 668920 आईपीसी के क्राइम पेंडिंग थे।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि “मैंने अपने पूरे जीवन में ऐसा कोई घोटाला नही देखा जिसमे 50 से ज्यादा लोगों की जान गयी हो। व्यापमं घोटाले में मुख्यमंत्री ने एक करोड़ युवाओं के भविष्य को बेच दिया और 50 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। हजारों करोड़ का ई-टेंडर घोटाल हुआ। हजारों करोड़ के रेत का अवैध उत्खनन मामा जी के आशीर्वाद से चल रहा है। अब तो हालात यह हो गये हैं कि भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों के वीडियो सामने आने लगे हैं, जिसमें वे कह रहे हैं कि 100 करोड़ रूपये मोदी जी को दूंगा और कृषि मंत्री बन जाऊंगा।”

महिला अपराध में नंबर वन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि “मध्यप्रदेश में अपराध में यह परिस्थितियां निर्मित हो गई है कि शाम 6 बजे के बाद बेटियों ने घर से निकलना बंद कर दिया है। मध्यप्रदेश में कामकाजी महिलाऐं देश में सबसे ज्यादा असुरक्षित है। मामा के राज में प्रदेश बलात्कार के मामने में नंबर वन रहा है। मामा सरकार के आने के बाद बलात्कार की घटनाओं में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई। न्याय व्यवस्था का हाल यह है कि प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी तो महिलाओं के खिलाफ सिर्फ 7000 मुक़दमे लंबित थे जो आज बढ़कर 85383 हो गये हैं। “

राम मंदिर पर कोर्ट के फैसले के साथ रहेगी कांग्रेस

कांग्रेस के वरिष्ट नेता प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर निर्माण और राकेश सिन्हा के प्राइवेट बिल से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा कि “चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को मंदिराइटिस नाम की बीमारी हो जाती है। हिंदी राज्यों चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को यहाँ राम मंदिर की याद आती है और चुनाव के बाद वह भगवान श्री राम को एक बार फिर वनवास पे भेज देती है। राकेश सिन्हा द्वारा संसद में लाए जा रहे प्राइवेट बिल के समर्थन के सवाल पर तिवारी ने कहा कि “राम मंदिर का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह कांग्रेस पार्टी को मान्य होगा और रही बात राकेश सिन्हा की तो वह जब बिल लाएँगे तब उसपर भी पार्टी अपना फैसला लेगी।

40 दिन 40 साल: कमलनाथ ने किसानों की मौत को लेकर पूछा पंद्रहवां सवाल

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madhya pradesh congress chief kamalnath

40 दिन 40 साल पूछने की कड़ी में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से पंद्रहवां सवाल पूछा है. पंद्रहवें सवाल में कमलनाथ ने पूछा कि, ‘शिवराज जी, किसानों को तो उतार दिया मौत के घाट, अब खेती को क्यों पहुँचा रहे हो आघात ?’

सवाल नंबर पंद्रह –

मध्यप्रदेश में खेती पर संकट के बादल छा रहे हैं ,
मोदी जी अपनी रिपोर्ट में बता रहे हैं ।
शिवराज जी, किसानों को तो उतार दिया मौत के घाट ,
अब खेती को क्यों पहुँचा रहे हो आघात ?

1) मोदी सरकार ने मध्यप्रदेश की खेती पर 24 सितंबर 2018 को एक रिपोर्ट जारी की है। उसके मुताबिक मध्यप्रदेश में 2011 से 15 के बीच किसानों की संख्या 11लाख़ 31 हज़ार ,अर्थात 12.74% बढ़ गई ,और खेती का रकबा 1 लाख़ 66 हज़ार हेक्टेयर कम हो गया ।

2) मप्र में गंभीर संकट यह पैदा हुआ कि 1 हेक्टेयर से कम खेती करने वाले छोटे किसान 24.25 % बढ़ गए और छोटी खेती अर्थात 1 हेक्टेयर से छोटे खेत 23.85% बढ़ गए

3) मप्र में अनुसूचित जाति के बड़े किसान मामा राज में बीते पाँच सालों में 36% कम हो गए और उनकी खेती का रकबा 35 % कम हो गया

4) आदिवासी भाइयों में बड़े किसानों की संख्या 26% कम हो गई और उनकी खेती का रकबा 28% कम हो गया ।

5) मध्यप्रदेश में छोटे और मंझोले किसानों का प्रतिशत बढ़कर 75.57% हो गया,जो बेहद चिंता जनक है ।

6) मध्यप्रदेश में छोटी और मझौली खेती चिंताजनक रूप से 34% से बढ़कर 39% हो गई है, अर्थात किसानों की लागत का बढ़ना और मुनाफ़ा कम होना।

7) मध्यप्रदेश में मार्जिनल किसान के पास एवरेज खेत मात्र 0.49 हेक्टेयर है,जो बेहद चिंताजनक है ।

8)यह तथ्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि व्यक्तिगत खेती की श्रेणी में मप्र के मार्जिनल किसानों के पास खेती का रकबा मात्र 0.38 हेक्टेयर है और साझा खेती में यह मात्र 0.40 हेक्टेयर है
9)मामा,की किसान पुत्र के रूप में जैसे जैसे ब्रांडिंग हुई,वैसे वैसे खेती और किसान समाप्त होते गए

-40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर मामा सरकार”

मुख्यमंत्री शिवराज के साले संजय सिंह, कांग्रेस में हुए शामिल

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image of cm shivraj singh chouhan's brother in law sanjay singh with pcc chief kamalnath at aicc head office in delhi

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के सगे भाई संजय सिंह ने कांग्रेस का दामन थामा। शनिवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर कमलनाथ ने संजय के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी दी। जहां मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के साथ प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सिंधिंया भी मौजूद थे। इस दौरान संजय ने भाजपा पर हमला कर कमलनाथ को खासतौर पर धन्यवाद भी किया।

संजय सिंह : मैं मुख्यमंत्री का परिवार नहीं रिश्तेदार हूँ , मेरा कुल और गोत्र दोनो अलग है।

संजय सिंह का आरोप  :

संजय सिंह ने 5 मिनट की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भाजपा पर कई आरोप लगाए, जिसमें उन्होंने भाजपा को कामदारों की नहीं नामदारों की पार्टी भी कहा। साथ ही भाजपा में परिवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया है। वहीं परिवार को धोखा देने के सवाल पर संजय ने कहा कि “मैं मुख्यमंत्री के परिवार नहीं रिश्तेदार हूँ, मेरा कुल और गोत्र दोनो अलग है।”

वहीं कांग्रेस दो घंटे में मध्यप्रदेश विधानसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है।

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