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राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत, छुआ 100 का आंकड़ा

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राजस्थान के रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की शाफिया जुबैर खां ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 12,228 वोटों से जीत हासिल कर ली है। इस जीत के साथ राजस्थान के विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक सीट कम रह गई है। अभी तक कांग्रेस के पास 99 सीटें थीं जबकि सहयोगी आरएलडी के साथ एक सीट मिलाकर कांग्रेस ने यहां सरकार बनाई थी। इस जीत के बाद कांग्रेस के पास अब कांग्रेस के पास 100 सीटें हैं।
इस लिहाज से कांग्रेस के लिए रामगढ़ विधानसभा सीट शुरू से ही अहम मानी जा रही थी। यह जीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी खास है। वह अपनी पहली परीक्षा में पास हो गए हैं। अशोक गहलोत ने जीत पर कहा, ‘मैं खुश हूं कि लोगों ने सोच-विचारकर कदम उठाया है। उन्होंने सही फैसला किया है। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने ऐसे समय में संदेश दिया है जब इसकी जरूरत थी। यह पार्टी को लोकसभा चुनाव के लिए प्रोत्साहित करेगा।’


इस सीट पर विधानसभा चुनाव के पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के उम्मीदवार प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। रामगढ़ में कांग्रेस ने शाफिया जुबैर खां पर भरोसा जताया था, वहीं बीजेपी ने सुखवंत सिंह और बीएसपी ने जगत सिंह को मैदान में उतारा था। रामगढ़ में दूसरे नंबर पर बीजेपी रही। सुखवंत सिंह को 71,083 वोट मिले। लोकसभा चुनाव से पहले हुए इस आखिरी उपचुनाव को काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान में बीजेपी को क्लीन स्वीप मिली थी।

10 बार कांग्रेस यहां से जीत चुकी है


कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में बीजेपी और उसके स्थानीय नेता ज्ञानदेव आहूजा की काफी किरकरी हुई थी जो बीजेपी की हार की मुख्य वजह रही। जीत के बाद कांग्रेस की प्रत्याशी शाफिया खां ने मीडिया से कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति के चलते ही बीजेपी को यहां हार मिली है। उन्होंने कहा कि रकबर खान की हत्या के मामले में रामगढ़ को काफी बदनाम किया गया था। उन्होंने कहा, ‘लोगों को पता है कि हम काम करने में यकीन करते हैं।’

बीएसपी ने लगाई वोटों में सेंध


रामगढ़ में इस बार कांग्रेस, बीजेपी के साथ बीएसपी के प्रत्याशी के बीच भी मुकाबला था। बीएसपी के वजह से कांग्रेस को कुछ वोटों का नुकसान भी उठाना पड़ा। कांग्रेस का मानना है कि उनका वोटबैंक दलित भी है इस वजह से बीएसपी ने उनके वोटों पर सेंध लगाने का काम किया है वरना जीत का आंकड़ा और अधिक होता।

कांग्रेस का हौसला बुलंद


रामगढ़ में पलड़ा कांग्रेस का ही भारी रहा है। यहां अब तक 14 विधानसभा चुनावों में 10 बार कांग्रेस और 4 बार बीजेपी जीती है। बीजेपी के ज्ञानदेव आहूजा यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वहीं शाफिया के पति जुबैर खां भी इस सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं। रामगढ़ की इस जीत से अब आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का हौसला और मजबूत हो गया है। अब कांग्रेस की निगाहें राज्य की 25 लोकसभा सीटों पर है।

ओवररेटेड चुनाव आयोग का औसत काम, सांप्रदायिक बहसों पर क्यों नहीं लगाता लगाम: रविश कुमार

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छत्तीसगढ़ के दूसरे चरण के मतदान में 562 मशीनों के ख़राब होने की ख़बर छपी है। जिन्हें 15-20 मिनट में बदल देने का दावा किया गया है। चुनाव से पहले मशीनों की बक़ायदा चेकिंग होती है फिर भी इस तादाद में होने वाली गड़बड़ियाँ आयोग के पेशेवर होने को संदिग्ध करती है। क्या लोगों की कमी हैं या फिर कोई अन्य बात है। जबकि छत्तीसगढ़ में गुजरात में इस्तमाल की गई अत्याधुनिक थर्ड जनरेशन का M-3 श्रेणी की मशीनें लाई गईं। एक वीडियो चल रहा है जिसमें छत्तीसगढ़ के मंत्री बूथ के भीतर जाकर अगरबत्ती दिखा रहे हैं और नारियल फोड़ रहे हैं। मतदाता सूची से लेकर ईवीएम मशीनों के मामले में चुनाव आयोग का काम बेहद औसत है।

मतदान प्रतिशत के जश्न की आड़ में चुनाव आयोग के औसत कार्यों की लोक-समीक्षा नहीं हो पाती है। तरह तरह की तरकीबें निकाल कर प्रधानमंत्री आचार संहिता के साथ धूप-छांव का खेल खेल रहे हैं और आयोग अपना मुँह बायें फेर ले रहा है। आयोग के भीतर बैठे डरपोक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि वे प्रधानमंत्री की रैली की सुविधा देख कर प्रेस कांफ्रेंस कराने के लिए नहीं बैठे हैं।

टीवी की बहसों के ज़रिए सांप्रदायिक बातों को प्लेटफ़ार्म दिये जाने पर भी आयोग सुविधाजनक चुप्पी साध लेता है। क्या आयोग का काम रैलियों पर निगरानी रखना रह गया है? खुलेआम राजनीतिक प्रवक्ता सांप्रदायिक टोन में बात कर रहे हैं। एलान कर रहे हैं। टीवी की बहसें सांप्रदायिक हो गई हैं।यह सब चुनावी राज्यों में बकायदा सेट लगाकर हो रहा है। आयोग यह सब होने दे रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। आयोग को अपनी ज़िम्मेदारियों का विस्तार करना चाहिए वरना आयुक्तों को बैठक कर इस संस्था को ही बंद कर दे।

यह एक नई चुनौती है। आख़िर आयोग ने खुद को इस चुनौती के लिए क्यों नहीं तैयार किया? क्या इसलिए कि हुज़ूर के आगे बोलती बंद हो जाती है। क्या आयोग ने न्यूज़ चैनलों के नियामक संस्थाओं से बात की, उन्हें नोटिस दिया कि चुनावी राज्यों में या उसके बाहर भी चुनाव के दौरान, टीवी की बहसों में सांप्रदायिक बातें नहीं होंगी। क्या मौजूदा आयोग को अपनी संस्था की विरासत की भी चिन्ता नहीं है? कैसे खुल कर चैनलों पर राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को खुलकर हिन्दू मुस्लिम बातें करने की छूट दी जा रही है।

यह संस्था ओवररेटेड हो गई है। इसकी जवाबदेही को नए सिरे से व्याख्यायित करने की ज़रूरत है। यही कारण है कि अब लोग चुनाव आयोग के आयुक्त का नाम भी याद नहीं रखते हैं। आयुक्तों को सोचना चाहिए कि वहां बैठकर विरासत को बड़ा कर रहे हैं या छोटा कर रहे हैं। चुनाव का तमाशा बना रखा है। चुनाव का तमाशा तो बनता ही रहा है, आयोग अपना तमाशा क्यों बना रहा है।

नोट: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार है, newbuzzindia.com का इन विचारों से सहमत होना अनिवार्य नही है।

सट्टा बाजार: मध्यप्रदेश और राजस्थान में जीत रही कांग्रेस, छत्तीसगढ़ में कड़ा मुकाबला

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का माहौल अब और रोचक हो चुका है। न्यूज़ चैनल और अखबारों के सर्वे के बाद अब सट्टा बाजार में भी सत्ता बदलती नजर आ रही है। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के सट्टा बाजार में जहां पहले बीजेपी हावी थी तो वहीं अब कांग्रेस हावी दिख रही है।

मध्यप्रदेश में 2 हफ्ते के पहले जो सटोरी बीजेपी पे पैसा लगा रहे थे वही सटोरी अब कांग्रेस पर दांव लगा रहे है।

हिंदी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले एक महीने से सट्टा बाजार में बीजेपी के ऊपर पैसा लगाया जा रहा था लेकिन अब यह पैसा कांग्रेस पर लग रहा है। एक महीने पहले अगर आप बीजेपी पर पैसा लगते तो आपको 10 हजार के 11 हजार रुपये मिलते। वहीं कांग्रेस पर 4400 रुपये लगाने पर आपको 10 हजार रुपये मिलते। मतलब सट्टा बाजार में बीजेपी के जीतने की उम्मीदें ज्यादा थी।

कांग्रेस को मिल रही 116 से ज्यादा सीटें

सट्टा बाजार की माने तो प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रही है। कांग्रेस को 230 विधानसभा सीटों में से 116 से ज्यादा सीटें मिल रही है। वहीं बीजेपी को 102 के आस पास सीटें मिलती दिख रही है।

राजस्थान में कांग्रेस तो छत्तीसगढ़ में सेफ खेल रहा सट्टा बाजार

मध्यप्रदेश के एलावा राजस्थान विधानसभा चुनाव की बात करें तो सट्टा बाजार राजस्थान में भी कांग्रेस की सरकार बनवा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ में सट्टा बाजार सेफ खेल रहा है, मतलब दोनों ही पार्टियों में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

नोट: चुनावों में सट्टा लगाना देश मे गैरकानूनी है। पुलिस इसके लिए कई गंभीर कदम भी उठा रही है लेकिन इसके बाद भी चुनावों में लोग सट्टा बाजार में काफी सक्रिय रहते है।

राजस्थान में एक और मंत्री ने छोड़ी भाजपा, पार्टी का झंडा जलाकर बोले बीजेपी मुर्दाबाद।

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राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने आज अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। लिस्ट में 131 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी घोषित किये है, जिसमे 23 मौजूद विधायकों के टिकट काटे गए है। टिकट कटने के बाद भाजपा के कई विधायक बगावत पर उतर गए है।

राजस्थान के वरिष्ठ बीजेपी नेता और वसुंधरा सरकार में कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र गोयल ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुरेंद्र गोयल ने टिकट कटने के बाद राजस्थान में भाजपा को हराने की कसम खाते हुए भाजपा का झंडा जलाया और भाजपा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।

टिकट काटने पर गुस्साए सुरेंद्र गोयल ने कहा कि ‘मैंने बीजेपी के जिस वृक्ष को खड़ा किया है उसे उखाड़ कर फेंक दूंगा। जैतारण विधानसभा सीट पर मैंने भाजपा का कमाल खिलाया था पर अब में उस कमल को उखाड़ फेंकूँगा।”

जैतारण सीट से लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुके सुरेंद्र गोयल को टिकट न मिलने से वहां के बीजेपी कार्यकार्य खासे नाराज है। सुरेंद्र ने कहा कि मैंने आज तक किसी भी भाजपा नेता की चापलूसी नही की इसलिए भाजपा नेतृत्व को लगता है कि मै संघ विरोधी हूं जिसके चलते मेरा टिकट काटा गया है।

सोशल वाणी: चुनाव प्रचार के लिए भाजपा ने गौमाता पर पोता भाजपा का झंडा।

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का प्रचार शुरू हो गया है। ऐसे में चुनाव प्रचार में गौमाता भी उतर गयी है। दरअसल सोशल मीडिया पर भाजपा का प्रचार करते हुए गौमाता की यह तस्वीर जमकर वायरल हो रही है। तस्वीर में गौमाता पर किसी ने भाजपा का ध्वज बना दिया है। पता नही यह अचार संहिता का उल्लंघन है या नही पर लोगों ने इस तस्वीर को देख भाजपा को जमकर लताड़ लगाई।

ट्विटर यूज़र अंकित ने कमेंट में लिखा, “जिसने भी हमारी गौ-माता को पेंट से पोता है, जिसने भी इनपे ऐसा अत्याचार किया है उनको म.प्र की जनता लात मारके पाकिस्तान भेज देगी। भाजपा का गौमाता पे ऐसा अत्याचार नही सहेगा हिंदुस्तान।”वहीं सुमित ने कमेंट किया, “शरम आनी चाहिए, अपनी मां को ऐसे रंग कर शान जता रहे हैं। धिक्कार है।” वहीं एक ट्विटर यूज़र ने लिखा “क्यों गाया को नेता बना रहे हो उसे भगवान ही बने रहने दो।”

हर घर भाजपा ध्वज ?

रविवार को ट्विटर पर बीजेपी की राजस्थान इकाई ने #हर_घर_भाजपा_ध्वज ट्रेंड किया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा “विकास का उजाला समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुनिश्चित तरीके से पहुंचाते हुए बीजेपी सरकार ने प्रदेश में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। वहीं पूरे जोश और उत्साह के साथ राजस्थान की जनता ने एक बार फिर कमल खिलाने का मन बना लिया है।

#हर_घर_भाजपा_ध्वज”वसुंधरा राजे के एलावा भाजपा के और भी कई नेताओं ने ‘हर घर भाजपा ध्वज’ की बात करते हुए भाजपा सरकार की जमकर तारीफ की। वहीं कई लोगों ने इस हैशटैग पर बीजेपी को ट्रोल भी किया।संघमित्रा ने इस हैशटैग पर लिखा, “देखो यह बीजेपी और संघ वाले ‘हर घर भाजपा ध्वज की बात कर रहे है, यह कभी ‘हर घर तिरंगा ध्वज’ की बात नही करेंगे। बीजेपी और आरएसएस ने हमेशा अपने ध्वज को तिरंगे से ऊपर रखा है।”  

फर्जी वोटर लिस्ट: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी वोटर लिस्ट में गड़बडी

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वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर होने का आरोप लगा रही कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटाक लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ की याचिका खारिज कर दी है। कमलनाथ के अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी एक याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ही चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत पर ही वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया था। इस पुनरीक्षण में चौबीस लाख से अधिक ऐसे वोटरों के नाम हटाए गए थे जिनकी मृत्यु हो गई थी अथवा अन्य क्षेत्र में जाकर रहने लगे थे।

चुनाव आयोग का तर्क था कि नए स्थान पर वोटर लिस्ट में अपना नाम तो जुड़वा लेते हैं लेकिन, पुराने स्थान की लिस्ट से नाम नहीं कटवाते हैं। कांग्रेस ऐसे ही वोटरों का फर्जी बता रही थी। जबकि चुनाव आयोग लिस्ट में दोहराव मान रही थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खरिज हो जाने के बाद अब कांग्रेस के लिए वोटर लिस्ट में संशोधन के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।

विधानसभा चुनाव 2018: मध्यप्रदेश का चुनावी समीकरण,इन सीटों पर आ सकती है कांग्रेस

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मध्य प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग के द्वारा इस संबंध में आज अहम घोषणा की जा सकती है। EC शनिवार शाम तक मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में चुनाव होने तय हैं, जबकि तेलंगाना में चुनाव कराए जाने की संभावना है।

मध्य प्रदेश का चुनावी समीकरण

वर्तमान में बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें है। इनमें से 230 सीटों पर ही चुनाव होते हैं और बाकी के एक सदस्य को नॉमिनेट किया जाता है।मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 166 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस के पास 57 सीटें हैं और बीएसपी के पास 4 सीटें हैं। यहां की मुख्य लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। वहीं बसपा का भी राज्य में अच्छा दबदबा है। इन तीनों मुख्य पार्टियों के अलावा इस बार के विधानसभा चुनाव में कई पार्टियां उतरने वाली हैं जिसमें सपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस जैसी पार्टियां शामिल है। वहीं इस बार एससी\एसटी एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ सपाक्स की ‘अनारक्षित समाज पार्टी’ ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

राजस्थान का चुनावी समीकरण

राजस्थान में कुल 200 सीटें हैं। जिसमें सरकार 161 सीट पर काबिज है। इस में 160 सीट भाजपा के ही पास है और एक एनपीपी के पास है। विपक्ष के पास कुल 36 सीट हैं जिसमें कांग्रेस 25, बीएसपी 2 एनयूजेडपी 2 और निर्दलीय 7 सीट हैं। जबकि तीन सीट अभी खाली है। इस विस चुनाव में भी सीधे तौर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। जबकि इन दोनों के अलावा कई क्षेत्रीय पार्टियां भी अपनी किस्मत आजमाने जा रही है।

छत्तीसगढ़ का चुनावी समीकरण

छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं और एक नॉमिनेटेड सीट है। पिछले चुनाव यानि की 2013 के विस चुनाव परिणाम के मुताबिक बीजेपी के पास 49 सीट, कांग्रेस को 39, बीएसपी को 1 और अन्य को एक सीट मिली थी। यहां भी मुख्य रूप से लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच की है। इन दोनों के अलावा कांग्रेस नेता और पूर्व में सीएम रह चुके अजीत जोगी ने जनता कांग्रेस-जोगी के नाम से पार्टी बनाई है और वे बीएसपी के साथ गठबंधन में चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।

मिजोरम का चुनावी समीकरण

पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में कुल 40 विधानसभा सीटें हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। कुल 40 में से 34 सीटों पर जीत कर यहां कांग्रेस की सरकार बनी थी। बाकी के सीटों में एमएनएफ को 5 और और एमपीसी को 1 सीट मिली थी। इस बार यहां जीत हासिल करने के लिए बीजेपी भी जोर लगा रही है।

तेलंगाना की चुनावी समीकरण

तेलंगाना में कुल 119 विधानसभा सीटें हैं। यहां पिछली बार 2014 में लोकसभा चुनाव के साथ ही यहां चुनाव कराए गए थे। उस दौरान केसीआर की पार्टी टीआरएस को 90 सीटें मिली थी। इसके अलावा कांग्रेस को 13, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को 7, बीजेपी को 5 और सीपीआईएम को 1 सीट मिली थी। इस बार भी इन्हीं पार्टियों के बीच मुकाबला है।

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा अब कुछ ही देर में,राहुल गाँधी कर रहे हैं सभा

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की भी आज घोषणा हो सकती है। चुनाव आयोग ने इसकी पूरी तैयारियां भी कर ली हैं। चुनाव आयोग आज दोपहर तीन बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला है जिसमें इन राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो सकती है। पहले यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 12:30 बजे होनी थी, लेकिन किसी कारणवश अब यह प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन बजे रखी गई है। आयोग अलग-अलग चरणों में यह चुनाव करवा सकता है। आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद ही राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाएगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा पहले ही कमर कस चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शानिवार को मध्य प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में आज चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।

तेलंगाना विधानसभा चुनाव की भी हो सकती है घोषणा

मध्य प्रदेश में 2013 में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों की घोषणा 4 अक्टूबर को की गई थी। इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी आचार संहिता जल्द लागू हो सकती है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनावों की भी घोषणा की जा सकती है।

हालांकि, माना ये भी जा रहा है कि तेलंगाना में 9 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, इसलिए उसके बाद ही चुनावों के तारीखों की घोषणा की जाएगी। इसके अलावा ऐसा भी माना जा रहा है कि 12 अक्टूबर के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत मनीला दौरे पर जा रहे हैं। जब वह वहां से वापस लौटेंगे, उसके बाद ही चुनाव के तारीखों की घोषणा होगी।

कहां-कितनी सीटें?

बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 231 सीटों पर चुनाव होगा, जबकि राजस्थान में 200 सीटों पर, छत्तीसगढ़ में 91 सीटों पर, मिजोरम में 40 सीटों पर और तेलंगाना में कुल 119 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने हैं।

राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश के मंगौली-कोलारस में भी जारी रहेगा कांग्रेस की जीत का सिलसिला: ज्योतिरादित्य सिंधिया

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राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस की जबरदस्त जीत के बाद कांग्रेस नेटक़ों में जबरदस्त उत्साह है। राजस्थान में 2 लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने तीनों सीट पर कब्जा जमाया। तीनों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार शुरू से ही बढ़त बनाए हुए थे। 

राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने है। तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद कांग्रेस नेताओं का मनोबल काफी मजबूत हुआ है। 

राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश की बारी।



कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राजस्थान में मिली जीत की बधाई देते हुए कहा है कि ‘राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश के मुंगवाली और कोलारस में भी कांग्रेस की जीत का सिलसिला जारी रहेगा’ राजस्थान उपचुनाव के बाद इसी महीने अब मध्यप्रदेश में उपचुनाव होने है। मध्यप्रदेश मंगौली और कोलारस विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने है। यह दोनों सीटें कांग्रेस सांसद ज्योतोरादित्य सिंधिया के छेत्र में आती है। 

कांग्रेस सांसद ज्योतोरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘राजस्थान के #अजमेर, #अलवर लोकसभा व #मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में विराट विजय पर कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों, कार्यकर्ताओं को बधाई व प्रदेश की जनता का कांग्रेस की नीतियों पर भरोसा करने के लिए आभार – कांग्रेस की विजय का ये सिलसिला मुंगावली-कोलारस में भी जारी रहेगा’

https://twitter.com/JM_Scindia/status/959012478444285953

सचिन पायलट के इस “मास्टर प्लान” के सहारे कांग्रेस ने राजस्थान में किया भाजपा का सूपड़ा साफ !

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राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस ने अजमेर व अलवर लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. वहीं मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस के उम्मीदवार बीजेपी से आगे निकलते दिख रहे हैं. इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू हो गया है कि आखिरकार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने ऐसी क्या खास रणनीति बनाई थी जो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की प्लानिंग पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई. राजस्थान उपचुनाव को जमीनी स्तर पर कवर करने वाले जानकार बताते हैं कि सचिन पायलट ने जातीय समीकरण की जबरदस्त ताना-बाना बुना था, जिसे भेदने में बीजेपी नाकाम साबित हुए. अगर केवल अजमेर लोकसभा सीट की बात करें तो यहां सचिन पायलट की रणनीति को ध्वस्त करने के लिए वसुंधरा सरकार ने पूरी ताकत लगा दी थी, लेकि कामयाबी नहीं मिली.

8 विधायक मिलकर भी कांग्रेस प्रत्याशी को हरा नहीं पाए

अजमेर लोकसभा सीट के तहत विधानसभा की 8 सीटें हैं. इन सभी आठ सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं. दूदू- प्रेमचंद, किशनगढ़- भागीरथ चौधरी, पुष्कर- सुरेश सिंह रावत, अजमेर उत्तर- वासुदेव देवनानी, अजमेर दक्षिण- अनिता भदेल, नसीराबाद- सांवर लाल, मसूदा- सुशील कुमार पलाड़ा और केकड़ी सीट से बीजेपी के शत्रुघ्न गौतम विधायक हैं. सीएम वसुंधरा ने इन आठों विधायकों से कहा था कि वे उपचुनाव में दिन रात ड्यूटी करें, लेकिन इनकी रणनीति नाकाम साबित हुई.

रघु शर्मा के सहारे सचिन पायलट ने चली ये चाल

अजमेर इलाके में मुस्लिम, राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य और रावत समुदाय से जुड़े लोग भी बड़ी तादाद में रहते हैं. हालांकि राजपूत समाज के लोग ही निर्णायक रोल निभाते हैं. गैंगस्टर आनंदपाल एनकाउंटर और फिल्म पद्मावत पर बैन नहीं लगने से पूरा राजपूत समाज नाराज है. सचिन ने इस बात को भांपते हुए रघु शर्मा के सहारे राजपूत समाज के एक बड़े तबके को कांग्रेस के पाले में करने में सफल रहे. साथ ही कांग्रेस के पारंपरिक वोटर जाट, मुस्लिम और वैश्य समाज के लोगों को भी एकजुट करने में सफल रहे. इस फॉर्मूले का वसुंधरा के पास कोई काट नहीं था.

सहानुभूति कार्ड पर भारी पड़ा अयोग्य उम्मीदवार की छवि

अजमेर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने राम स्वरूप लांबा को प्रत्याशी बनाया था. राम स्वरूप पूर्व मंत्री सांवरलाल जाट के बेटे हैं. सांवरलाल जाट ने अजमेर में बड़ी आबादी वाले जाट समुदाय को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी. वे जाट समाज के कद्दावर नेता माने जाते थे. वहीं अजमेर के लोगों के बीच राम स्वरूप की छवि अयोग्य की है. राम स्वरूप जब राजनीति में आए तो लोग उनमें सांवरलाल की छवि तलाशने लगे, लेकिन पिता की जगह भरने में अयोग्य साबित हुए. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी सहानुभूति कार्ड खेलकर राम स्वरूप के लिए वोट मांगती दिखी. 
हालांकि कांग्रेस खेमा सहानुभूति कार्ड पर राम स्वरूप की खराब छवि को डोमिनेट करने में सफल साबित हुई. रामस्वरूप जनता के बीच का नेता नहीं माने जाते हैं. इनकी छवि एसी गाड़ियों में घुमने वाले नेता की है. वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी रघु शर्मा की छवि जननेता की है. रघु शर्मा क्षेत्र के सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं. वे यहां से विधायक भी रह चुके हैं, जिसके चलते उनकी यहां के लोगों के बीच अच्छी पकड़ है.

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