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लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मोदी सरकार के खिलाफ बिगुल फूकेंगे अन्ना हजारे

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2014 में लोकपाल के मुद्दे पर अनशन कर कांग्रेस की सरकार गिरने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर अनशन पर बैठ रहे है। इस बार यह अनशन मोदी सरकार के खिलाफ है लेकिन मुद्दे फिर वही है, लोकपाल। मोदी सरकार पर लोकपाल के मुद्दे पर हमला बोलते हुए अन्ना ने बुधवार को सुबह 10 बजे अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठने का ऐलान किया है।

मीडिया से बात करते हुए अन्ना ने कहा कि लोकपाल कानून बनकर 5 साल हो गया और नरेंद्र मोदी सरकार 5 साल बाद भी बार-बार बहानेबाजी करती है।

मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के दिल में अगर यह मुद्दा अहम होता तो क्या 5 साल लगना जरुरी था?

इससे पहले अन्ना ने कहा था कि उनका यह अनशन समाज और देश की भलाई के लिए होगा। अन्ना हजारे ने कहा कि उनका यह अनशन किसी व्यक्ति, पक्ष, पार्टी के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज और देश की भलाई के लिए वह आंदोलन करतेेे आए हैं। उसी प्रकार यह अनशन भी उनके इसी आंदोलन का हिस्सा है।

मित्रों को फायदा पहुंचाने मोदी सरकार ने किया 69381 करोड़ का टेलीकॉम घोटाला: कांग्रेस

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लोकसभा कगुणाव के नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर होता नजर आ रहा है। विपक्ष एक के बाद एक घोटाले के आरोप सरकार पर लगा रहा है। इसी सिलसिले में अब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा घोटाले के आरोप लगाया है।

खेड़ा का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने 4 साल 8 माह के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर अपने मित्रों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए सरकार को यह नुकसान पहुंचाया है। खेड़ा का दावा है कि ये सभी बातें कैग रिपोर्ट में साफ-साफ लिखी हैं। उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर के इस महा घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में कराने की मांग की है।

सोमवार को एक प्रेसवार्ता में पवन खेड़ा ने कहा, मोदी सरकार के कार्यकाल में टेलीकॉम सेक्टर के तीन बड़े घोटाले हुए हैं। ताजा घोटाला माइक्रो वेव स्पेक्ट्रम का सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट को लेकर जो नियम तय गए किए थे, सरकार ने उनका खुलेआम उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के टेंडर नीलामी प्रक्रिया के द्वारा अलॉट किए जाएं, लेकिन मोदी सरकार ने पहले आओ, पहले पाओ के तहत स्पेक्ट्रम दे दिए।

सुप्रीम के निर्देशों की सरकार ने उड़ाई धज्जियां: खेड़ा

आठ जनवरी 2018 को जारी हुई सीएजी रिपोर्ट के 125 पन्नों में स्पेक्ट्रम घोटाला देखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने टूजी मामले के संदर्भ में कहा था कि किसी भी स्पेक्ट्रम को नीलामी और बाजार की शर्तों के अनुसार ही अलॉट किया जाएगा। खेड़ा का कहना है कि मोदी सरकार ने यहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने दोस्तों को ये स्पेक्ट्रम अलॉट कर दिए। कोर्ट ने ऐसे स्पेक्ट्रम अलॉट करते वक्त रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल का ध्यान रखना जरुरी बताया था, मगर सरकार ने पुराने फार्मूले से स्पेक्ट्रम जारी कर दिए।

डिफेंस को छूट नहीं दी, मगर मित्रों को छूट :खेड़ा

पवन खेड़ा के अनुसार, 21 जनवरी 2015 को एक प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा गया था। इसमें डिफेंस के लिए ‘बैंड और इंटरेस्ट जोन’ को स्पेक्ट्रम अलॉट्मेंट में कुछ छूट दिए जाने का प्रावधान था। हैरानी की बात है कि आज तक कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी नहीं दी है। दूसरी ओर मोदी सरकार ने प्राइवेट टेलीकॉम सेक्टर से जो चार्ज लेना था, उसे छोड़ दिया। इसके चलते सरकार को 45 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ तो वहीं मोदी के दोस्तों, जिन्हें स्पेक्ट्रम मिला है, को यह अनुचित लाभ दे दिया गया।

Times Now के सर्वे में पीएम मोदी पर भारी पड़ीं प्रियंका।

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सक्रिय राजनीति में प्रवेश के साथ ही प्रियंका गांधी मीडिया और सोशल मीडिया पर छाई हुई है। कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता जहां खुशियां मना रहे है तो वहीं मीडिया इस बात का विश्लेषण करने में लगा है कि प्रियंका गांधी के आने कंग्रेस्स को कितना फायदा होगा और भाजपा को कितना नुकसान।

अंग्रेजी न्यूज़ चैनल ‘टाइम्स नाउ’ ने हाल ही में अपने ट्विटर एकाउंट पर एक सर्वे किया। सर्वे में चैनल ने पूछा कि ‘क्या प्रियंका गांधी नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को टक्कर दे पाएंगी ?

सर्वे में जवाब के लिए दो विकल्प दिए गए थे। पहला ‘हाँ’ और दूसरा ‘न’..

66% फीसदी लोगों ने दिया प्रियंका का साथ

टाइम्स नाउ के इस सर्वे में कुल 56,518 लोगों ने वोट किया। जिसमें से 66% लोगों ने इस बात से सहमति दर्ज कराई है कि प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को टक्कर दे सकती है। वहीं सिर्फ 34% लोगो का मानना था कि प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को टक्कर नही दे पाएंगी।

टाइम्स नाउ का सर्वे

https://twitter.com/TimesNow/status/1087979845370421248?s=19

हम किसानों का कर्ज माफ करते हैं, मोदी उद्योगपतियों का: राहुल

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राहुल गांधी की फ़ाइल फ़ोटो

लोकसभा चुनाव को लेकर राहुल ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। बुधवार को अपनी बहन प्रियंका गांधी को सक्रीय राजनीति में लाने के बाद गुरुवार को राहुल ने रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर हमला बोला है।

प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए राहुल ने कहा कि पीएम मोदी ने अच्छे दिन का वादा किया था, वह अच्छे दिन कहां है? चौकीदार ने इन चार साल में साबित कर दिया कि वह चोर है। कर्जमाफी के मुद्दे पर राहुल ने कहा कि मोदी सरकार कहती है हमारे पास पैसा नहीं है। हमनें एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में दस दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ किरके दिखाया है। हमनें जो वादा किया था, उसे हमने दो दिन के अंदर ही पूरा कर दिया।

पीएम मोदी ने 15 से 20 उद्योगपतियों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है। वह पैसा आपका था, वह अमेठी, यूपी, और देश के अन्य युवाओं का पैसा था। नरेंद्र मोदी जी के साथ साठगांठ करके उद्योगपति अपना कर्जा माफ कराते हैं। पूरे देश में मनरेगा चलाने के लिए 35 हजार करोड़ रुपये लगते हैं, पीएम मोदी ने एक साल का मनरेगा का पैसा नरीव मोदी के नाम किया। वह 30 हजार करोड़ रुपये लेकर भाग गया।

जांच के ड़र से सीबीआई प्रमुख को हटाया

राहुल ने आगे कहा कि सीबीआई के डायरेक्टर कहता है कि मैं राफेल की जांच करूंगा, चौकीदार ने चोरी की मैं जांच करूंगा तो पीएम मोदी ने डेढ़ बजे रात को ऑर्डर लिखके सीबीआई डायरेक्टर को निकाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह गलत हुआ और फिर से उसे डायरेक्टर बनाया जाता है। दो घंटे के अंदर उन्हे हटाने के लिए फिर से मीटिंग बुलाई जाती है। आखिर इतनी जल्दी क्यों, क्योंकि चौकीदार चोर है और यह बात अब यह हर युवा समझ गया है।

बेरोजगारी, कृषि संकट और नोटबंदी के मुद्दे पर रघुराम राजन का मोदी सरकार पर हमला

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दावोस में चल रहे विश्‍व आर्थिक मंच में हिस्सा लेने पहुंचे भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बेरोजगारी, नोटबंदी और कृषि संकट के मुद्दो पर मोदी सरकार की आलोचना की है। राजन ने कहा कि नोटबंदी एक नाकामयाब कदम था। नोटबंदी के बाद कैश का प्रयोग घटने से जुड़े सवाल पर राजन ने कहा कि उन्हें नहीं पता नोटबंदी से लोगों के व्यवहार में कोई बदलाव आया हो।

देश में बड़ा कृषि संकट और बेरोजगारी

राजन ने कृषि और बेरोजगारी के मुद्दे पर कहा कि कृषि संकट को हल करने और देश में और रोजगार पैदा करने की जरूरत सरकार को है। रोजगार पैदा हो रहे हैं लेकिन वो कम हैं। राजन ने बताया कि कृषि संकट और रोजगार सृजन के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने उनके साथ और कई विशेषज्ञों की राय ली है। राजन ने भी इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट बनाई है, जिसका पार्टी अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्रयोग करेगी।

कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों पर लगाया विराम

कांग्रेस सरकार बनने पर उन्हें देश का वित्त मंत्री बनाया जा सकता है, ऐसी अटकलों को खारिज करते हुए राजन ने कहा कि वे सभी पार्टी के नेताओं से बात करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू समेत और कई नेताओं से उनकी बात होती है। राजन ने कहा कि वे कोई राजनीतिज्ञ नहीं हैं और भविष्य में भी अच्छी नीतियां बनाना पसंद करेंगे।

एनपीए को बताया बड़ी समस्या

एनपीए की समस्या पर बोलते हुए रघुराम राजन ने कहा कि यह देश की बैंकिंग व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। एनपीए को बैंकिंग व्यवस्था से साफ करने और पुन: पुंजीकरण करने की जरूरत है। एनपीए की समस्या से लड़ने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया बैंकरप्सी कोड को राजन ने महत्वपूर्ण कदम बताया।

वहीं राष्ट्रीय बैंकों के निजीकरण के बारे में उन्होंने कहा कि ये हो सकता है। लेकिन सार्वजिक क्षेत्र का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। राजन ने कहा कि बैंकिंग में सुधार को नौकरशाही द्वारा हाईजैक कर लिया गया। हमने बैंकिंग में सुधार के अवसर खो दिए। इसके लिए अब नेक्स्ट जेनेरेशन के सुधार की आवश्यकता है।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा देश में शिक्षा और श्रम कानून का क्षेत्र चिंता का विषय है। इनमें सुधार के लिए सबसे बेहतरीन मंत्री मानव संसाधन मंत्रालय में होना चाहिए। राजन ने कहा कि निजी निवेश को फिर से सक्रिय करने की जरूरत है। आरबीआई गवर्नर के तौर पर अपने कार्यकाल के बारे में रघुराम राजन ने कहा कि उनका अनुभव अच्छा रहा। आरबीआई के मौद्रिक नीति बोर्ड ने अच्छा काम किया। पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थाओं अखंडता की रक्षा किए जाने की आवश्यकता है, साथ ही आरबीआई के परिचालन की स्वयत्तता की रक्षा करनी होगा।

गुजरात मे बाहरी लोगों को नही मिलेगा सवर्ण आरक्षण का लाभ

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मोदी सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण को लेकर कानून बनाने के बाद गुजरात पहला राज्य था जिसने इस कानून को राज्य में लागू किरने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद बुधवार को गुजरात सरकार ने इसके लिए निर्धारित नियमों को भी मंजूरी दे दी, जिसमें घर या जमीन के मालिकाना हक के मापदंडों को शामिल नहीं किया गया है। गुजरात सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों के मुताबिक राज्य में 1978 के पहले से रह रहे लोग ही इस आरक्षण का लाभ उठा पाएंगें। सरकार का कहना है कि आरक्षण में गुजरातियों कोे प्राथमिकता देने के उद्देश से 1978 से पहले तक दूसरे शहरों से आकर गुजरात में बसे लोगों को ही इस आरक्षण के योग्य माना जाएगा। जिसका मतलब है कि 1978 के बाद देश के किसी भी राज्य से यदि कोई व्यक्ति गुजरात जाकर बसा है तो उसे या उसके बच्चों को इस आरक्षण का लाभ नही मिलेगा।

सरकार का कहना है कि 1978 की कटऑफ डेट जारी करने का मकसद गुजरातियों के हितों की रक्षा करना है। इसका मतलब है कि सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण उन लोगों पर लागू होगा जो 1978 से पहले गुजारत में बसे हैं। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के उच्च सूत्रों ने कहा कि यह शर्त अपने आप लाखों गैर-गुजरातियों को आरक्षण के लिए अयोग्य साबित कर देगा।

इन सभी को मिलेगा आरक्षण का लाभ

डेप्युटी सीएम नितिन पटेल ने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोग कोटा के लिए सेंट्रल जॉब में अप्लाई कर सकते हैं। जमीन, प्लॉट या फ्लैट का मालिकाना हक आरक्षण की योग्यता को प्रभावित नहीं करेगा। हमारा मकसद युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने और उच्च शिक्षा के लिए मदद करना है।’ उन्होंने जोर दिया कि सरकार अतिरिक्त सीटें बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को अतिरिक्त अनुदान देगी।

10% में भी 33% महिला आरक्षण

चुनाव से पहले आरक्षण लागू करने करके 10 फीसदी वर्ग में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। 2015 में गुजरात सरकार ने 33 फीसदी पुलिस नौकरी महिलाओं के लिए आरक्षित करने का फैसला किया था। पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य की गुजरात अनारक्षित शिक्षा और आर्थिक विकास निगम द्वारा जारी की गई विभिन्न योजनाओं के लिए 4.5 लाख रुपये और 6 लाख रुपये का आय मानदंड जारी रहेगा।

अटके, लटके और भटके प्रॉजेक्ट्स को हमने किया पूरा – मोदी

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मणिपुर के इंफाल में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुऐ कहा कि पहले की सरकारों ने ही पूर्वोत्तर को दिल्ली से दूर किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों के अटके, लटके और भटके प्रॉजेक्ट्स को हम पूरा कर रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद हमारे सामनेे बहुत बड़ी चुनौती थी, दशकों से लटके, ’लेइशांगअटके और भटके प्रॉजेक्ट को पूरा करना है। मणिपुर के हप्ता कांगजीबंग में पीएम मोदी ने 8 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

इस दौरान उन्होंने चार अन्य योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इस मौके पर पीएम ने कहा, ’जिस मणिपुर को, जिस नॉर्थ ईस्ट को नेताजी ने भारत की आजादी का गेटवे बताया था, उसको अब न्यू इंडिया की विकास गाथा का द्वार बनाने में हम जुटे हुए हैं। मैं खुद बीते साढ़े चार साल में करीब 30 बार नॉर्थ ईस्ट आ चुका हूं। आपसे मिलता हूं, बातें करता हूं तो एक अलग ही सुख मिलता है, अनुभव मिलता है। मुझे अफसर से रिपोर्ट नहीं मांगनी पड़ती, सीधे आप लोगों से मिलती है। ये फर्क है पहले और आज में।

लेइशांग और मणिपुर का नाम आएगा

उन्होंने कहा कि आज मणिपुर को 125 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का भी उपहार मिला है। ये सिर्फ एक चेक पोस्ट नहीं है बल्कि दर्जनों सुविधाओं का केंद्र भी है। अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए पीएम मोदी ने कहा, ’देश के जिन 18 हजार गांवों को रेकॉर्ड समय में अंधेरे से मुक्ति मिली है, उनमें सबसे आखिरी गांव कांगपोकपी जिले का लेइशांग है। जब भी भारत के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के अभियान की बात आएगी तो लेइशांग और मणिपुर का नाम भी आएगा। आज शिक्षा, स्किल और स्पोर्ट्स से जुड़े प्रॉजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया है। मैरी कॉम की जन्मभूमि और कर्मभूमि मणिपुर का देश को स्पोर्टिंग सुपर पावर बनाने में बहुत बड़ा रोल रहने वाला है।’

पीएम मोदी पर ट्रंप के तंज को भारत ने किया खारिज, कांग्रेस ने भी किया हमला

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भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के तंज ने सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों को एक साथ ला दिया है। युद्ध से त्रस्त देश में एक पुस्तकालय के वित्त पोषण को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसने को आधिकारिक सूत्रों ने खारिज कर दिया। कांग्रेस ने भी ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अफगानिस्तान में विकास कार्यों के संदर्भ में भारत को अमेरिका से उपदेश की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि प्रिय ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री का मजाक बनाना बंद करिए। अफगानिस्तान पर भारत को अमेरिका के उपदेश की जरूरत नहीं है। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत ने अफगानिसतान में नेशनल असेंबली की इमारत बनाने में मदद की। मानवीय जरूरतों से लेकर रणनीतिक-आर्थिक साझेदारी तक, हम अफगान भाइयों एवं बहनों के साथ हैं।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी ठीक नहीं है और यह अस्वीकार्य है। हम आशा करते हैं कि सरकार सख्ती से इसका जवाब देगी और अमेरिका को यह याद दिलाएगी कि भारत ने अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर सड़कें एवं बांध बनवाएं हैं तथा तीन अरब डॉलर के मदद की प्रतिबद्धता भी जताई है।’’

राम मंदिर को लेकर शिवसेना का पीएम मोदी पर तीखा हमला, बोले- अभी नही तो कब बनेगा राम मंदिर

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राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि उसे इस बात पर ताज्जुब है कि अगर भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो फिर कब होगा। शिवसेना ने कहा कि अगर राम मंदिर का निर्माण 2019 चुनावों से पहले नहीं हुआ तो यह देश के लोगों को धोखा देने जैसा होगा जिसके लिए भाजपा और संघ को उनसे माफी मांगनी होगी।

केन्द्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की राज्य सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 1 जनवरी को दिए इंटरव्यू में राम मंदिर पर पीएम मोदी के बयान को लेकर उनपर हमला बोला है। दरअसल इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि मंदिर निर्माण पर सरकार कोई भी कदम न्यायिक प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही उठाएगी। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में शिवसेना ने कहा, वह (मोदी) राम के नाम पर सत्ता में आए थे हालांकि उनके मुताबिक भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं। अब सवाल यह है कि अगर बहुमत वाली सरकार में मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब बनेगा।’’

संपादकीय में शिवसेना ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य प्रतिमा बनाई है लेकिन राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सरदार’ वाला साहस नहीं दिखा पाए। संपादकीय में आगे कहा कि राम मंदिर के लिए आंदोलन 1991-92 में शुरू हुआ था और सैकड़ों ‘कारसेवकों’ ने अपनी जान गंवाई थी। इसमें पूछा गया, किसने यह नरसंहार किया और क्यों? एक ओर सैकड़ो हिंदू कारसेवक मारे गए साथ ही मुंबई बम धमाकों में दोनों पक्ष ( हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय) के सैकड़ों लोग मारे गए। अगर फैसला उच्चतम न्यायालय को ही करना था तो यह नरसंहार एवं खूनखराबा क्यों?’’

उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने आगे पूछा कि क्या भाजपा एवं आरएसएस इन हत्याओं एवं खूनखराबे की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है। संपादकीय में कहा गया, सिखों के नरसंहार (1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद) के लिए जिस तरह से कांग्रेस को माफी मांगनी पड़ी उसी प्रकार हमें भी उन लोगों की भावनाओं को समझना होगा जो हिंदुओ के नरसंहार के लिए (भाजपा से) माफी की मांग करते हैं।’’

जितने पैसे प्रधानमंत्री ने अपने दोस्तों के माफ किए उतने में बनते 40 एम्स अस्पताल : राहुल गांधी

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राहुल गांधी की फाइल फोटो

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्तों के 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा माफ कर दिए, इतने पैसों में गरीबों के लिए काफी काम हो सकते थे। तुकबंदी करते हुए राहुल ने लिखा, ’’चौकीदार का भेष, चोरों का काम, बैंकों के 41,167 करोड़, सौंपे जिगरी दोस्तों के नाम।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा कि इतने रुपये में मनरेगा के एक साल का खर्च निकल जाता, तीन राज्यों के किसानों का कर्ज माफ हो जाता, देश में 40 नए एम्स अस्पताल खुल जाते।

दरअसल राहुल गांधी पिछले कई समय से प्रधानमंत्री मोदी पर कुछ चुनिंदा द्योगपतियों का कर्ज माफ करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने बाद कांग्रेस ने तीनों राज्यों में किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। जिसके बाद भाजपा दबाव में आ गई है।

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