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राम मंदिर को लेकर शिवसेना का पीएम मोदी पर तीखा हमला, बोले- अभी नही तो कब बनेगा राम मंदिर

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राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि उसे इस बात पर ताज्जुब है कि अगर भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो फिर कब होगा। शिवसेना ने कहा कि अगर राम मंदिर का निर्माण 2019 चुनावों से पहले नहीं हुआ तो यह देश के लोगों को धोखा देने जैसा होगा जिसके लिए भाजपा और संघ को उनसे माफी मांगनी होगी।

केन्द्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की राज्य सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 1 जनवरी को दिए इंटरव्यू में राम मंदिर पर पीएम मोदी के बयान को लेकर उनपर हमला बोला है। दरअसल इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि मंदिर निर्माण पर सरकार कोई भी कदम न्यायिक प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही उठाएगी। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में शिवसेना ने कहा, वह (मोदी) राम के नाम पर सत्ता में आए थे हालांकि उनके मुताबिक भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं। अब सवाल यह है कि अगर बहुमत वाली सरकार में मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब बनेगा।’’

संपादकीय में शिवसेना ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य प्रतिमा बनाई है लेकिन राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सरदार’ वाला साहस नहीं दिखा पाए। संपादकीय में आगे कहा कि राम मंदिर के लिए आंदोलन 1991-92 में शुरू हुआ था और सैकड़ों ‘कारसेवकों’ ने अपनी जान गंवाई थी। इसमें पूछा गया, किसने यह नरसंहार किया और क्यों? एक ओर सैकड़ो हिंदू कारसेवक मारे गए साथ ही मुंबई बम धमाकों में दोनों पक्ष ( हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय) के सैकड़ों लोग मारे गए। अगर फैसला उच्चतम न्यायालय को ही करना था तो यह नरसंहार एवं खूनखराबा क्यों?’’

उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने आगे पूछा कि क्या भाजपा एवं आरएसएस इन हत्याओं एवं खूनखराबे की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है। संपादकीय में कहा गया, सिखों के नरसंहार (1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद) के लिए जिस तरह से कांग्रेस को माफी मांगनी पड़ी उसी प्रकार हमें भी उन लोगों की भावनाओं को समझना होगा जो हिंदुओ के नरसंहार के लिए (भाजपा से) माफी की मांग करते हैं।’’

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जितने पैसे प्रधानमंत्री ने अपने दोस्तों के माफ किए उतने में बनते 40 एम्स अस्पताल : राहुल गांधी

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राहुल गांधी की फाइल फोटो

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्तों के 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा माफ कर दिए, इतने पैसों में गरीबों के लिए काफी काम हो सकते थे। तुकबंदी करते हुए राहुल ने लिखा, ’’चौकीदार का भेष, चोरों का काम, बैंकों के 41,167 करोड़, सौंपे जिगरी दोस्तों के नाम।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा कि इतने रुपये में मनरेगा के एक साल का खर्च निकल जाता, तीन राज्यों के किसानों का कर्ज माफ हो जाता, देश में 40 नए एम्स अस्पताल खुल जाते।

दरअसल राहुल गांधी पिछले कई समय से प्रधानमंत्री मोदी पर कुछ चुनिंदा द्योगपतियों का कर्ज माफ करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने बाद कांग्रेस ने तीनों राज्यों में किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। जिसके बाद भाजपा दबाव में आ गई है।

मोदी बोले- यूरिया मांगा तो किसानों पर चली लाठियां, कमलनाथ का पलटवार

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उप्र के ग़ाज़ीपुर में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन राज्यों में सरकार बदलते ही यूरिया के लिए लाठियां चलने लगी हैं। कर्नाटक में कर्ज माफी का किसानों को लालीपाप पकड़ा दिया गया। लाखों किसानों का कर्ज माफ होना था लेकिन सिर्फ आठ सौ लोगों को फायदा मिला। किसानों के साथ किस तरह का धोखा हो रहा है, उसे समझना चाहिए। जिनका कर्ज माफ नहीं हुआ, उनके पीछे पुलिस छोड़ दी गई है। तात्कालिक लाभ के लिए जो वादे और फैसले होते हैं, उनसे देश का फायदा नहीं होता। कांग्रेस ने 2009 के चुनाव से पहले भी कर्ज माफी का वादा किया था लेकिन किसानों को धोखा दिया गया।

इस पर प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान भी विभिन्न सभाओं में प्रदेश की जनता को भ्रमित व गुमराह करने वाली तमाम वो बातें कही जो सत्य से परे थी। जनता पर इनका कोई असर नहीं पढ़ा। चुनाव परिणाम से सब स्पष्ट हो गया। जनता ने कांग्रेस के प्रति विश्वास व्यक्त किया। अब मोदी ने प्रदेश की नवनिर्वाचित कांग्रेस की सरकार की छवि बिगाड़ने का प्रयास किया है।

नाथ ने कहा कि मोदी जी को राजनीतिक मतभिन्नता छोड़ प्रदेश की 12 दिन की कांग्रेस की सरकार की दिल खोलकर प्रशंसा करना चाहिये थी कि सरकार ने किसानों के 2 लाख तक के कर्ज़ माफ़ी की घोषणा पूरी कर अपना वादा निभाया। उन्होंने यूरिया संकट पर भी अपने संबोधन में ग़लतबयानी की। उन्हें तो इस पर भी प्रदेश सरकार के तूफ़ानी व सतत प्रयासों की तारीफ़ करना थी, जिसके कारण इस संकट पर काफ़ी हद तक क़ाबू पा लिया गया। यूरिया संकट प्रदेश सरकार की देन नहीं है। हम इस पर शुरू से ही कोई राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं करना चाहते है। यह हमारी नाकामी नहीं , यह केन्द्र सरकार का विषय है। हमें हमारी माँग के अनुरूप आपूर्ति हो जाती तो यह संकट कभी होता ही नहीं।

नाथ ने कहा कि मैंने अधिकारियों को खुलेआम चेताया था कि मेरी सरकार किसानों की सरकार है। यूरिया की लाइन में लगे किसानों के ऊपर लाठियाँ या किसी प्रकार का दमन में बर्दाश्त नहीं करूँगा। यह पूर्व की भाजपा सरकार नहीं है, जिसमें किसानों के सीने पर गोलियाँ तक दाग़ी गई थीं।

नाथ ने कहा कि जहाँ तक कालाबाज़ारी की बात है तो यह शिवराज सरकार के समय से धड़ल्ले से जारी रही और कालाबाज़ारियों को खुला संरक्षण मिलता रहा लेकिन यह हमारी सरकार में यह बिलकुल नहीं चलेगा। यूरिया- खाद की कालाबाज़ारी कांग्रेस सरकार में बिल्कुल नहीं चलेगी। कोई कितना भी बड़ा हो, यदि इसमें लिप्त हो तो उस पर कड़ी कार्यवाही की जाए। हमारी सरकार में कालाबाज़ारी जेल में होंगे।

नेटफ्लिक्स और त्रिवागो को पीछे छोड़ भाजपा बनी टीवी पर सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाली पार्टी

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टीवी चैनलों को विज्ञापन देने के मामले में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है। इससे पहले सबसे ज्यादा टीवी विज्ञापन देने वाली कंपनियो में नेटफ्लिक्स, त्रिवागो और विमल पान मसाला शामिल थे। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 17 नवंबर से शुरू हुए सप्ताह में भाजपा ने विमल पान मसाला को पेच्चे छोड़ दिया है। ख़ास बात यह है कि अन्य कोई भी राजनैतिक दल टॉप 10 में भी नही है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी सबसे आगे है और उनके बाद नेटफ्लिक्स और त्रिवागो का नंबर है। वहीं इसके बाद संतूर साबुन, डेटॉल लिक्विड सोप, वाइप, कोलगेट डेंटल क्रीम, डेटॉल टॉयलेट सोप्स, अमेजन प्राइम वीडियो, रूप मंत्रा आयुष फेस क्रीम का नंबर आता है।

विधानसभा चुनाव के चलते जोरदार प्रचार कर रही है भाजपा

बता दें की इस महीने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे है। भाजपा इन चुनावों में जोरदार प्रचार कर रही है। राजस्थान , मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ , तेलंगाना और मिजोरम में इस समय भारतीय जनाता पार्टी प्रचार कर रही है।

पिछले सप्ताह की बात करें तो टीवी विज्ञापन पर भारतीय जनता पार्टी के विज्ञापन को को कुल 22,099 बार दिखाया गया। वहीं नंबर 2 पर रही नेटफ्लिक्स के विज्ञापन को 12,951 बार दिखाया गया तो नंबर 3 रही त्रिवागो के विज्ञापन को 12,795 बार दिखाया गया। इसके एलावा डेटॉल लिक्विड साबुन के विज्ञापन को 9487, वाइप के विज्ञापन को 9082, कोलगेट डेंटल क्रीम के विज्ञापन को 8938, डेटॉल टॉयलेट साबुन के विज्ञापन को 8633, अमेजन प्राइम वीडियो के विज्ञापन को 8031 और रुप मंत्रा आयूर फेस क्रीम के विज्ञापन को को 7962 बार दिखाया गया।

बीजेपी द्वारा चुनाव प्रचार पर इतनी भारी भरकम रकम खर्च करने पर विपक्षी पार्टिओं ने भाजपा पर हमला करना शुरू कर दिया है। वहीं इसके साथ ही कयास लगाए जा रहे है कि अभी यह हाल है तो लोकसभा चुनाव के समय क्या हाल होगा।

सीताराम केसरी को दलित बताकर ट्रोल हुए पीएम मोदी।

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चुनावी माहौल के बीच गांधी परिवार को घेरने के चक्कर में प्रधानमंत्री खुद सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए। दरअसल छत्तीसगढ़ के महासमुंद में रैली को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा था कि दलित सीताराम केसरी को कांग्रेस अध्यक्ष पद का अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने नहीं दिया, उन्हें सोनिया गांधी की ताजपोशी के लिए रास्ते से हटाया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में गांधी परिवार को तो जमकर घेरा लेकिन सीताराम केसरी को दलित बताकर गलती कर दी। क्योंकि केसरी दलित नहीं थे, बल्कि बनिया थे।

प्रधानमंत्री मोदी की इस गलती को पकड़ते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने पीएम मोदी को जमकर ट्रोल किया। ट्विटर यूज़र अभिषेक ने कमेंट किया “जैसे मोदी जी चुनावी रैलियों में स्वयं को पिछड़े परिवार में जन्म लेने वाला कहते हैं वैसे ही उन्होंने सीताराम केसरी को दलित कह दिया, इतना घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। मोदी जी की बातों को अब कोई सीरियस नहीं लेता है, उनके बोलने पर हर कोई यही मानता है कि झूठ बोलेगा या फेकेगा। वहीं ट्विटर यूज़र मनीष ने कमेंट में लिखा कि हमारे प्रधानसेवक को झूठ बोलने की इतनी आदत है कि अब वह झूठ में ही जीने लगे हैं। वो इतने महान बन गए की उनके लिए झूठ और सच के बीच कोई फर्क ही नहीं बचा है।

वहीं कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी पर पलटवार करते हुए सवाल किया, क्या यह सच है कि भाजपा के पहले और एकलौते दलित अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण जी के अंतिम संस्कार में आडवाणी जी के एलावा भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता नही गया ?

आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला – मोदी निर्मित तबाही, नोटबंदी से आई : सुरजेवाला

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randeep singh surjewala in bhopal

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को नोटबंदी की दूसरी बरसी पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेस वार्ता में सुरजेवाला ने कहा कि नोटबंदी को अब दो साल हो गये है। लोगों को समझ आ गया है कि नोटबंदी कोई क्रन्तिकारी कदम नही था बल्कि कालेधन को सफ़ेद करने वाली ‘फेयर एंड लवली योजना’ थी। जिसके कारण लाखों लोग बेरोजगार हो गये, हजारों कारखाने बंद हो गये, 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी और देश की अर्थव्यस्था चौपट हो गयी। सुरजेवाला ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जापान में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए ताली बजा-बजाकर देश के गरीब व मध्यम वर्ग का मजाक उड़ाते हुए कह रहे थे कि “घर में शादी है और पैसे नहीं हैं, देखो नोटबंदी का कमाल”। यह भाजपा के अहंकार की आखिरी सीमा थी। सच तो यह है कि जहां एकतरफ नोटबंदी ने किसान, नौजवान, महिलाएं, छोटे व्यवसायी व दुकानदार की कमर तोड़ डाली, तो दूसरी तरफ कालाधन वालों की हो गई ‘ऐश’, जिन्होंने रातों रात सफेद कर लिया सारा कैश।

नोटबंदी घोटाले ने किया सबको बेज़ार,
किसान हों, नौजवान हों, व्यवसायी या दुकानदार,
रोजी गई, गया रोजगार – अर्थव्यवस्था का बंटाधार,
ऐश की कालाधन वालों ने, भुगत रहे हैं ईमानदार,
वोट की चोट से बताएंगे, कि भाजपाई हैं जिम्मेवार

रणदीप सिंह सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा ” दो साल पहले, 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की तबाही को आर्थिक क्रांति का नया सूत्र बताते हुए तीन वादे किये – सारा काला धन पकड़ा जाएगा, फर्जी नोट पकड़े जाएंगे, आतंकवाद व नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। ऐसे में अब दो साल बाद नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान से नोटबंदी पर जवाब मांगने का समय आ गया है.” कांग्रेस मीडिया प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मौके पर भाजपा सरकार से 8 प्रमुख सवाल किये.

सारा कालाधन कहां गया ?

10 दिसंबर, 2016 को मोदी सरकार ने देश की सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि 15.44 लाख करोड़ पुराने नोटों में 3 लाख करोड़ कालाधन है, जो जमा नहीं होगा और जब्त हो जाएगा। सुरजेवाला ने बताया कि “24 अगस्त, 2018 की आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के दिन चलन में 15.44 लाख करोड़ के नोटों में से 99.9 प्रतिशत मतलब 15.31 लाख करोड़ पुराने नोट तो बैंकों में जमा हो गए। बाकी बचा पैसा भी रॉयल बैंक ऑफ नेपाल व भूटान तथा अदालतों में केस प्रॉपर्टी के तौर पर जमा है। तो फिर कालाधन गया कहां ?

फर्जी नोट कहां गए ?

मोदी जी और बीजेपी ने नोटबंदी के समय बड़े-बड़े दावे किये थे कि नोटबंदी से हजारों करोड़ के नकली नोट पकडे जायेंगे। साल 2017-18 आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक 15.44 लाख करोड़ के पुराने नोटों में से मात्र 58.30 करोड़ ही नकली नोट पाए गए, यानि 0.0034 प्रतिशत। क्या नोटबंदी से नकली नोटों पर नकेल कसना भी भाजपाई जुमला निकला ?

क्या ख़त्म हुआ उग्रवाद और नक्सलवाद ?

बीजेपी ने दावा किया था कि नोटबंदी से नक्सलवाद और उग्रवाद ख़त्म हो जाएगा। नोटबंदी के बाद अकेले जम्मू-कश्मीर में 86 बड़े उग्रवादी हमले हुए, जिनमें 127 जवान और 99 नागरिक शहीद हुए। वहीं 1030 नक्सलवादी हमले हुए, जिनमें 114 जवान शहीद हुए। तो क्या मोदी सरकार ने देश को जानबूझकर गुमराह किया?

क्या नए नोट छापने व बांटने की कीमत नोटबंदी की बचत से 300 प्रतिशत अधिक है?

आरबीआई के मुताबिक साल, 2016-18 के बीच नए नोट छापने तथा लिक्विडिटी ऑपरेशन में लगभग 30,303 करोड़ रु. खर्च हुए है, वहीं नोटबंदी में मात्र 10,720 करोड़ रु. वापस जमा नही हो पाए। क्या भाजपाई बताएंगे कि इतने बड़े आर्थिक नुकसान के लिए कौन जिम्मेवार है?

क्या डिजिटल हो गया इंडिया ?

8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के समय देश में 17.71 लाख करोड़ नगद चलन में था। वहीं 28 अक्टूबर, 2018 को चलन में कैश की मात्रा बढ़कर 19.61 लाख करोड़ हो गई है। तो फिर डिजिटल भुगतान कैसे बढ़ा?

नोटबंदी से पड़ी बेरोजगारी की मार ?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी से सीधे तौर पर 15 लाख नौकरियां गईं और देश की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। क्या यह सीधे तौर पर आर्थिक आतंकवाद नहीं?

क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद बनाने का एक बड़ा घोटाला था ?


रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नोटबंदी को कालेधन को सफ़ेद बनाने वाला देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया। सुरजेवाला ने कहा कि “नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा व आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रु. की संपत्ति पूरे देश में खरीदी। सितंबर, 2016 में बैंकों में यकायक 5,88,600 करोड़ रुपया अतिरिक्त जमा हुआ। नोटबंदी वाले दिन, यानि 8 नवंबर, 2016 को भाजपा की कलकत्ता इकाई के खाता नंबर 554510034 में 500 व 100 रु. के तीन करोड़ रुपए जमा करवाए गए। कर्नाटक के पूर्व मंत्री व भाजपा नेता, जी. जनार्दन रेड्डी (बेल्लारी ब्रदर्स) के सहयोगी, रमेश गौड़ा ने नोटबंदी के बाद खुदकुशी कर ली तथा सुसाईड नोट में लिखा कि 100 करोड़ रु. का कालाधन भाजपा नेताओं द्वारा बदला जा रहा था। क्या भाजपा व आरएसएस को नोटबंदी के निर्णय की जानकारी पहले से थी? क्या कारण है कि भाजपा व आरएसएस ने इतने सैकड़ों व हजारों करोड़ की संपत्ति खरीदी व इसे सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया? क्या इसकी जाँच नहीं होनी चाहिए?”

क्या अमित शाह व भाजपा नेताओं की जाँच हुई?

नोटबंदी के बाद मात्र 5 दिनों में यानि, 10 नवंबर से 14 नवंबर, 2016 के बीच अहमदाबाद जिला को -ऑपरेटिव बैंक में 745.58 करोड़ रु. के पुराने नोट जमा हो गए। इस बैंक के डायरेक्टर, भाजपा अध्यक्ष, श्री अमित शाह हैं, जो इससे पहले बैंक के चेयरमैन भी रहे हैं। 7 मई, 2018 के आरटीआई जवाब (A1 व A2) में बताया गया कि देश में किसी भी जिला को-ऑपरेटिव बैंक में जमा हई पुराने नोटों की यह सबसे बड़ी राशि थी। ऐसा क्यों? क्या इसकी जाँच हुई? क्या श्री अमित शाह की जाँच हुई?

रणदीप सुरजेवाला ने 8 सवाल पूछने के बाद कहा कि आज नोटबंदी को 731 दिन बीत गए हैं और देशवासी भुगत रहे हैं. जनता अब सब समझ गयी है और नोटबंदी का जवाब वोटबंदी करके देगी। कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो नोटबंदी के दौरान कालाधन बदलने वालों की जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसे सजा मिलेगी।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी- विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा की ये खास बातें

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विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा जो सरदार बल्ल्भ भाई पटेल ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)’ के रूप में तैयार है. आज यानि की 31 अक्टूबर 2018 को सरदार बल्लभ भाई पटेल की 143वीं जयंती भी है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य प्रतिमा का अनावरण कर उन्हे श्रद्धांजलि देते हुए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन किया. आइये जानते हैं ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के बारे में कुछ ख़ास बातें…

  • यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
  • मूर्ति को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया. कंपनी के मुताबिक, कांसे की परत चढ़ाने के आशिंक कार्य को छोड़ कर बाकी पूरा निर्माण देश में ही किया गया है.
  • इस मूर्ति बनाने वाली कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने दावा किया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है और महज 33 माह के रिकॉर्ड कम समय में बनकर तैयार हुई है.
  • सरदार पटेल की मुख्य प्रतिमा बनाने में 1,347 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये.
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है और ऊंचाई 522 फिट यानी 182 मीटर है. इसके पैर की ऊंचाई 80 फिट, हाथ की ऊंचाई 70 फिट, कंधे की ऊंचाई 140 फिट और चेहरे की ऊंचाई 70 फिट है.
  • सरदार पटेल की यह मूर्ति राम वी. सुतार की निगरानी में हुई है. राम वी. सुतार को साल 2016 में सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था. इससे पहले वर्ष 1999 में उन्हें पद्मश्री भी प्रदान किया जा चुका है.
  • इस मूर्ति में दो लिफ्ट भी लगी है, जिनके माध्यम से आप सरदार पटेल की छाती पहुंचेंगे और वहां से आप सरदार सरोवर बांध का नजारा देख सकेंगे और खूबसूरत वादियों का मजा ले सकेंगे.
  • यह स्टैच्यू 180 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा में भी स्थिर खड़ा रहेगा. यह 6.5 तीव्रता के भूकंप को भी सह सकता है.
  • इस मूर्ति के निर्माण में भारतीय मजदूरों के साथ 200 चीन के कर्मचारियों ने भी हाथ बंटाया है. इन लोगों ने सितंबर 2017 से ही दो से तीन महीनों तक अलग-अलग बैचों में काम किया.
  • इसके लिए मूर्ति के 3 किलोमीटर की दूरी पर एक टेंट सिटी भी बनाई गई है. जो 52 कमरों का श्रेष्ठ भारत भवन 3 स्टार होटल है. जहां आप रात भर रुक भी सकते हैं.
  • वहीं स्टैच्यू के नीचे एक म्यूजियम भी तैयार किया गया है, जहां पर सरदार पटेल की स्मृति से जुड़ी कई चीजें रखी जाएंगी.
  • सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति में 4 धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगी. स्टैच्यू में 85 फीसदी तांबा का इस्तेमाल किया गया है.
  • 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए किए जाएंगे। 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च किये गये.

दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति

  • यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है. इसकी लम्बाई 182 मीटर है.
  • दूसरे नंबर पर स्प्रिंग टेंपल बुद्धा-चीन (153 मीटर)
  • तीसरे नंबर यूशिकु दाईबुत्शु-जापान( 120 मीटर)
  • स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी-अमेरिका (93 मीटर)
  • द मदरलैंड कॉल्स -रूस (85 मीटर)
  • क्राइस्ट द रीडीमर-ब्राजील (38 मीटर)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर उठी अध्यादेश लाने की मांग

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राम मंदिर पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग एक बार फिर उठ गई है। अध्यादेश की मांग करने वाले अधिकांश लोगों का कहना है कि सरकार एससी-एसटी एक्ट और तीन तलाक पर अध्यादेश ला सकती है तो फिर राम मंदिर पर क्यों नही ? अध्यादेश की मांग करने वाले अधिकांश लोग भाजपा और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए है। लोगों का कहना है कि अब बहुत हुआ सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार न करके संसद के रास्ते मंदिर का निर्माण करना चाहिए।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भाजपा को काफी बड़ा झटका लगा है। सरकार को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट 4 राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के पहले राम मंदिर निर्माण पर सुनवाई करेगा। जिसके माध्यम से भाजपा पार्टी से नाराज चल रहे सवर्णों को एक बार फिर पार्टी के साथ लाने में कामयाब हो जाएगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई टालने के बाद भाजपा को एक बार फिर सवर्णों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भाजपा डैमेज कंट्रोल के लिए अपनी ही पार्टी के लोगों से अध्यादेश की मांग करवा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर स्वयंसेवक विकास पांडेय का कहना है कि ” राम मंदिर पर सुनवाई टलना मोदी सरकार के लिए आशीर्वाद है। राम मंदिर का श्रेय अदालत को क्यों मिले ? श्रेय नरेंद्र मोदी जी को मिलना चाहिए।” तो वहीं कर्नाटक में बीजेपी युथ विंग के महासचिव तेजश्वी सूर्या का कहना है कि ” राम मंदिर पर अध्यादेश लाने का समय हो चुका है। चाहे सुप्रीम कोर्ट अध्यादेश रोक दे, या फिर अध्यादेश राज्यसभा में पास न हो पाए लेकिन सरकार को संसद में राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाना चाहिए। इससे राम मंदिर को लेकर हमारी प्रतिबद्धता दिखेगी। ट्विटर यूजर प्रशांत पटेल का कहना है कि सरकार को राम मंदिर के नाम पर बहुमत दिया गया था,सरकार को अध्यादेश लाकर फौरन राम मंदिर का निर्माण करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अध्यादेश लाने का मुद्दा अब भाजपा के लिए उल्टा पड़ता दिख रहा है। विपक्ष भी सरकार पर आरोप लगा रही है कि भाजपा के लिए राम मंदिर सिर्फ एक चुनावी जुमला है। भाजपा और हिन्दू संगठनों की इस मांग पर तंज कसते हुए आज तक के पत्रकार रोहित सरदाना ने कहा “जब सरकार ने साढ़े चार साल में राम मंदिर के लिए क़ानून लाने/बनाने का विचार नहीं बनाया तो अब ये ट्विटर पर #Ordinance4RamMandir का ट्रेंड चलने से थोड़े ना क़ानून आ जाएगा”

कांग्रेस के मोदी विरोधी सुर में चंद्रबाबू का राग: कहा खतरे में है लोकतंत्र

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तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख एवं आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस के मोदी विरोधी सुर में अपना राग भी जोड़ दिया है। नायडू ने कहा कि आयकर विभाग तेलगुदेशम पार्टी के नेताओं और करीबी उद्योगपतियों को निशाना बना रही है। आयकर विभाग की 19 टीमें पांच अक्टूबर को आंध्रपदेश भेजी गईं। नायडू ने कहा कि देश में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता खतरे में है।

साढ़े चार साल तक मोदी का समर्थन करते रहे हैं चंद्रबाबू

आंध्रपदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू कुछ माह पहले तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए का हिस्सा थे। आंध्रप्रदेश को स्पेशल पैकेज के मुद्दे पर नायडू ने अपने आपको एनडीए से अलग कर लिया था। नायडू का आरोप है कि एनडीए से अलग होने के बाद ही केन्द्र सरकार की विभिन्न जांच एजेंसियां आंध्रप्रदेश में सक्रिय हो गईं हैं।

नायडू ने सवाल किया कि क्या इससे पहले आंध्रप्रदेश में कर चोरी नहीं होती थी। केन्द्र से समर्थन वापस लेने के बाद ही क्या कर चोरी होने लगी? तेदेपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने हर राज्य में यही नीति अपनायी है। वह विपक्षी नेताओं के साथ विपक्षी दलों को चंदा देने वाले उद्योगपतियों को भी निशाना बना रही है। उन्होंने सवाल किया – क्या यह लोकतंत्र है? सीबीआई में शीर्ष स्तर पर जारी संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने संस्थानों को धराशायी कर दिया है। अधिकतर महत्वपूर्ण संस्थानों के प्रमुख गुजरात या गुजरात कैडर के हैं।

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अशोक गहलोत ने पुराने कांग्रेसियों से की पार्टी में लौट आने की अपील

चंद्रबाबू नायडू के बयान के साथ ही एक बयान कांग्रेस मुख्यालय से भी आया। यह बयान कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत का है। इस बयान में गहलोत ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। गहलोत ने पार्टी छोड़कर जा चुके नेताओं से अपील की है कि वे कांग्रेस पार्टी में अब वापस लौट आएं। तारिक अनवर की वापसी के बाद कांग्रेस यह उम्मीद कर रही है कि कुछ और लोग पार्टी में वापस आ सकते हैं।

गहलोत ने कहा कि देश गहरे संकट में हैं इसलिये सभी को आपसी मतभेद भूलकर एकजुट हो जाना चाहिए। सभी नेताओं को आपसी मतभेदों को भुलाकर देश सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों का लोकतंत्र, लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संविधान में कोई यकीन नहीं है इसलिये ये आवश्यक है कि समय-समय पर विभिन्न कारणों से कांग्रेस से अलग हुए लोग वापस आयें और देश को बचायें। सीबीआई का उदाहरण देते हुए गहलोत बोले सत्ता में ऐसे लोग काबिज हो गये हैं जो संवैधानिक संस्थाओं को ध्वस्त करने मे जुटे हैं और उनकी स्वायत्तता खत्म कर रहे हैं।

तेलंगाना में राहुल गांधी का पीएम-सीएम पर हमला, वादा खिलाफी और मिलीभगत का लगाया आरोप.

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राहुल गांधी की फाइल फोटो

तेलंगाना में  शनिवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान की शुरुआत की। राहुल गाँधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर जमकर हमला बोला। अदिलाबाद जिले के भाइंसा में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा की ‘ प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव, दोनों ने ही जनता से किये गये वादों को पूरा नही किया। पीएम मोदी देश के युवाओं को रोजगार देने की बात की, किसानों को फसलों के सही दाम देने की बात की, सभी को 15 लाख देने की बात की लेकिन दिया कुछ नही।  मोदी जी ने कहा की में देश का चौकीदार बनना चाहता हूँ लेकिन उन्होंने यह नही बताया की वह किसकी चौकीदारी करेंगे। पीएम मोदी ने गरीबों की नही बल्कि नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या और अनिल अंबानी जैसे अमीरों की चौकीदारी की।’


राफेल के मुद्दे पर पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा की ‘यूपीए सरकार ने राफेल लड़ाकू हवाई जहाज का कांट्रैक्ट एचएएल को दिया था। मोदी जी प्रधानमंत्री बने और उन्होने राफेल का कांट्रैक्ट एचएएल से छीनकर अपने मित्र अनिल अंबानी को दिया। एचएएल पर एक रुपया कर्जा नहीं है उल्टा सरकार ने एचएएल से 3000 करोड़ रुपया लिया है वहीं अनिल अंबानी पर 45000 करोड़ रुपये का कर्जा है। सदन में मोदी जी ने डेढ़ घंटा भाषण दिया लेकिन अंबानी के बारे में और राफेल के बारे में एक शब्द नहीं कहा।’ 


अपने भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ‘तेलंगाना का सीएम बनते ही केसीआर ने भ्रष्‍टाचार शुरू कर दिया। राजीव सागर प्रोजेक्ट, इंदिरा सागर प्रोजेक्ट की असल लागत 2500 करोड़ रुपये थी, इसको मुख्यमंत्री ने बदलकर 12000 करोड़ रुपये कर दिया। जैसे तेलंगाना में केसीआर ने 38000 करोड़ के प्रोजेक्ट को 1 लाख करोड़ में बदला, वैसे ही केन्द्र में मोदी जी ने 526 करोड़ के हवाई जहाज को 1670 करोड़ में खरीदा’ 


राहुल गाँधी ने केसीआर पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा की ‘तेलंगाना में केसीआर भाजपा की मदद कर रही है। केसीआर बीजेपी के हर निर्णय में उनके साथ खड़ी हो जाती है। केसीआर के बाद अब एमआईएम भी नरेन्द्र मोदी की मदद करने में लग गयी है। चाहे वह नोटबंदी का फैसला हो या कोई और यह दोनों ही पार्टी भाजपा के साथ खड़ी दिखाई दी।
अपने भाषण की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि ‘आज हम यहाँ आकर कौमाराम भीम जी और डा भीमराव अंबेडकर जी को याद करते हैं। लेकिन पता नहीं क्यों यहाँ के मुख्यमंत्री को अंबेडकर जी का नाम अच्छा नहीं लगता है। तेलंगाना में सिंचाई परियोजना का नाम भीमराव आंबेडकर जी के नाम पर रखा गया था। पर पता नही क्यों आपके मुख्यमंत्री ने उसका नाम बदल दिया। यह आंबेडकर जी का अपमान है।


राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस पार्टी कभी झूठे वादा नहीं करती है। यूपीए की सरकार ने 10 साल में सबसे ज्यादा लोगों को गरीबी से निकालने का काम किया। किसानों और आदिवासियों का शोषण रोकने के लिए कांग्रेस सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल पेश किया था और यह सुनिश्चित किया गया था कि उन्हें भूमि की बाजार कीमत से चार गुणा ज्यादा दाम मिलें। तेलंगाना की सरकार ने एससी-एसटी को तीन एकड़ भूमि और 12 फीसदी आरक्षण आदिवासियों को देने का वादा किया था लेकिन इस वादे को राज्य सरकार पूरा नहीं कर पाई।’


राहुल गाँधी ने कहा की पांच साल होने वाले हैं तेलंगाना का जो सपना था वो अधूरा है, टूट गया। अगर कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो तेलंगाना में बेरोजगार युवाओं को तीन हजार रुपये का बेरोजगारी भत्ता दिलवाएंगे।  केवल कांग्रेस ही तेलंगाना के वादे के पूरा कर सकती है। हर परिवार कर्ज तले दबा है। पिछले चुनाव में आपने केसीआर पर भरोसा किया था। लेकिन अब लोगों को पता चल गया है केसीआर सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है।


119 विधानसभा सीटों वाले तेलंगाना में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी।

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