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सरकार ने उद्योगपतियों का 2 लाख 75 हजार करोड़ किया माफ, नाम बताने से इनकार।

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भारतीय स्टेट बैंक ने एक बार फिर बड़े उद्योगपतियों द्वारा लिया गया करोड़ों रूपये का कर्ज माफ किया है। एसबीआई के साथ ही कई अन्य सरकारी और प्राइवेट बेंकों ने भी बैड लोन के नाम कर करोंडों के कर्ज को माफ किया है। बड़ी बात यह रही कि इस बार जिन लोगों का कर्ज माफ किया गया है उनके नाम भी सार्वजनिक नही किये गए है।

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने हाल ही में 220 कर्जदारों के 76,600 करोड़ रुपये के कर्ज को माफ किया है। इन सभी पर बैंक का 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।

एसबीआई ने बताया था कि 31 मार्च, 2019 तक 33 लोगों पर 37,700 करोड़ रुपये के कर्ज है जिये वसूल नही किया जा सकता। इन 33 लोगों में सभी पर 500 करोड़ रुपये और अधिक के ऋण है।

आरबीआई द्वारा एक आरटीआई के जवाब में सीएनएन को 31 मार्च तक बेंकों द्वारा 100 करोड़ और 500 करोड़ से ज्यादा के ऋण माफी की जानकारी दी गई है।

जानकारी के मुताबिक 100 करोड़ से ज्यादा का कर्ज लेने वाले लोगों का लगभग 2 लाख 75 हजार करोड़ माफ किया गया है। जिसमें आए 67,600 करोड़ रुपये 500 करोड़ से ज्यादा का कर्ज लेने वालों का है।

आरबीआई से लगभग 980 कार्यजदारों की एक सूची जारी की है जिनका 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज माफ किया जाना है। जिनमें से 220 खाते भारतीय स्टेट बैंक के शामिल है।

Source: CNN News 18

यह सारी जानकारी सीएनएन-न्यूज़ 18 द्वारा लगाई गई आरटीआई के जवाब में आरबीआई द्वारा जारी की गई है।

सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभब ने ट्विटर पर लिखा, सुप्रभात। एक बार फिर से बैंकों ने अपने borrowers के ₹2,750,000,000,000 (₹2 लाख 75 हज़ार करोड़)बट्टे खाते में डाले। इस बार भी loan लेने वालों का नाम(जिनका loan बट्टे खाते में डाला है)गुप्त रखा गया है।उपरोक्त रक़म देश के,3 माह के GST collection के बराबर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दी श्रद्धाजंलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की जयंती पर ट्वीट करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा की “हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि”।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं है।

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जून में निर्यात का आंकड़ा 41 महीनों में सबसे कम रहा है। आयात भी 9 प्रतिशत कम हो गया है। जो कि 34 महीने में सबसे कम है। सरकार मानती है कि दुनिया भर में व्यापारिक टकरावों के कारण ऐसा हुआ है।

सरकार ने 2018-19 और 2019-20 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर सरचार्ज लगाकर 17000 करोड़ वसूले हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड लिखता है कि सरकार इस पैसे का दूसरे मद में इस्तमाल करेगी। जिन चीज़ों के लिए सरजार्च लिया गया था उसमें नहीं। कायदे से यह पैसा राषट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जाना चाहिए था, खासकर एक ऐसे समय में जब हाईवे के लिए पैसे की तंगी हो रही है। अपना पैसा कहीं और खपा कर परिवहन मंत्रालय निजी आपरेटरों की तलाश में लगा है।

सरकार संप्रभु बॉन्ड के ज़रिए विदेशों से कर्ज़ उठाने की तैयारी में है। बजट में घोषणा हुई है। बिजनेस स्टैंडर्ड की ख़बर है कि सरकार धीरे धीरे कर्ज़ लेने की दिशा में कदम उठाएगी। हांगकांग, न्यूयार्क, सिंगापुर और लंदन में ये बान्ड लांच होंगे। 20 साल के लिए यह बान्ड जारी होगा। शुरूआती चरण में सरकार 3-4 अरब डॉलर का कर्ज़ उठाने की कोशिश करेगी। भारत जीडीपी का मात्र 5 प्रतिशत संप्रभु बान्ड के ज़रिए विदेशों से कर्ज़ लेता है। जो कि कम है। भारत सरकार अपने बजट को पूरा करने के लिए सात लाख करोड़ का कर्ज़ लेगी। इसे लेकर बिजनेस अख़बारों में बहस चल रही है कि ठीक है या नहीं। उम्मीद है हिन्दी के कूड़ा और चमचा अख़बार और चैनल आप दर्शक और पाठकों को इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में जानकारी दे रहे होंगे।

आटोमोबिल सेक्टर में उत्पादन ठप्प होने और बिक्री काफी घट जाने के कारण कितनों की नौकरियां गईं हैं, इसकी ठोस जानकारी नहीं है। कभी किसी अखबार में 25,000 छपता है तो कभी 30,000। इस तिमाही में बिक्री की हालत पिछले दस साल में सबसे बदतर है। पंतनगर में अशोक लेलैंड ने अपनी फैक्ट्री 9 दिनों के ए बंद कर दी है क्योंकि मांग ही नहीं है। पिछले महीने भी एक हफ्ते के लिए प्लांट बंद था। इसका असर स्टील निर्माताओं पर भी पड़ रहा है। मांग कम होने के कारण हालत खराब है। टाटा स्टील के टी वी नरेंद्ररन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा है कि ओला और ऊबर के कारण युवा पीढ़ी कम कारें खरीदेगी। इसके कारण भी मांग घट रही है।

IHS Markit India ने एक बिजनेस सर्वे कराया है। इस सर्वे मे यह निकल कर आया है कि बिजनेस सेंटीमेंट तीन साल में सबसे कम है। प्राइवेट कंपनियों ने अपना आउट पुट ग्रोथ अब 18 प्रतिशत की जगह 15 प्रतिशत ही देख रही हैं। डॉलर के सामने रुपया कमज़ोर हो रहा है इसलिए आयात महंगा होता जा रहा है। मांग कम होने के कारण सरकार की नीतियां भी ज़िम्मेदार हैं।

कर्ज़ न मिलने के कारण रियल स्टेट सेक्टर की भी हालत ख़राब है। 20 प्रतिशत ब्याज़ पर लोन लेने पड़ रहे हैं।

कारपोरट की कमाई घट गई है। भारत की चोटी की कंपनियों ने बताया है कि कर्ज़ का अनुपात बढ़ता ही जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भी हालत खराब है। जिस अनुपात में कर्ज़ बढ़ रहे हैं उस अनुपात में शेयरधारकों की कमाई नहीं हो रही है। जिसके कारण उनका बैलेंसशीट कमज़ोर हो गया है।

महेश व्यास ने लिखा है कि 2017-18 मे कंपनियों में रोज़गार वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत ही रही। 2016-17 में 2.6 प्रतिशत थी। जबकि यह बेहतर आंकड़ा है पिछले वर्षों की तुलना में। रोज़गार घटा है। लेकिन मज़दूरी थोड़ी बढ़ी है। महेश लिखते हैं कि मात्र 46 प्रतिशत कंपनियों ने ही रोज़गार वृद्धि दर्ज की है। 41 प्रतिशत कंपनियों में रोज़गार घटे हैं। 13 प्रतिशत कंपनियों में रोज़गार में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

महेश व्यास लिखते हैं कि नौकरी मिलने और सैलरी बढ़ने का स्वर्ण युग 2003-04 से 2008-09 ही था। 2013-14 तक कोरपोरेट सेक्टर में रोज़गार बढ़ता रहा। जब भी जीडीपी 7 प्रतिशत थी। मज़दूरी 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी और रोज़गार 3.5 प्रतिशत की दर से। यानि 7 प्रतिशत जीडीपी का असर दिखता था। इसकी तुलना मौजूदा सरकार की 7 प्रतिशत जीडीपी दौर में ऐसा नहीं लगता है। रोज़गार घट रहा है और मज़दूरी काफी कम बढ़ रही है। महेश व्यास ने बिजनेस स्टैंडर्ड में लिखा है।

इसके अलावा भारत में सब ठीक है।

जियो का भी गांवों में ग्रोथ सबसे अधिक है। वोटाफोन और एयरटेल ने लाखों उपभोक्ता बढ़ा दिए हैं।

ठीक होने का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है।

2019 का चुनाव दुनिया का लैंडमार्क चुनाव था। 45साल में सबसे अधिक बेरोज़गारी का मुद्दा पिट गया। बेरोज़गारों ने बेरोज़गारी के सवाल को ही ख़ारिज कर दिया। उन्हें बेरोज़गार रहना पसंद था मगर मोदी का हारना नहीं। बीजेपी को शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि युवा उनसे नौकरी नहीं मांगते हैं। ऐसी किस्मत दुनिया में किसी भी पार्टी को नसीब नहीं हुई है। सारे गठबंधन हवा में उड़ गए। बेरोज़गारी मज़ाक का मुद्दा है। ऐसा सिर्फ नरेद्र मोदी की प्रचंड लोकप्रियता और उनके नेतृत्व में गहरी आस्था के कारण हो सका।

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बल्लेबाज आकाश विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री मोदी के तेवर सख्त, हो सकती है कार्यवाही

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भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और इंदौर से विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा सरकारी कर्मचारी की बल्ले से पिटाई करने पर प्रधानमंत्री मोदी की तीखी प्रतिक्रिया आई है।

भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि “बीजेपी संसदीय दल की बैठक में पीएम ने आज कहा कि किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार जो पार्टी का नाम खराब करता है, वह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए, फिर चाहे वो कोई भी हो।

रूडी ने आगे कहा कि “पीएम मोदी ने आज पार्टी के सभी सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।

बता दें कि कुछ दिनों पहले भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय का सरकारी कर्मचारी को बल्ले से पीटते हुए वीडियो वायरल हो गया था। जिसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। वहीं इस मामले में आकाश की गिरफ्तारी हुई उर उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मुद्दे पर भाजपा के समर्थन में खड़ी हुई बसपा

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bsp chief mayawati

बहुजन समाज पार्टी के सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मोदी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आज संसद में कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं क्योंकि इसकी अवधि खत्म हो रही है।

बता दें की कांग्रेस के साथ कई विपक्षी दलों ने कश्मीर में लड़े राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा था कि कश्मीर में बड़ी हिंसा के लिए भाजपा और पीडीपी गठबंधन जिम्मेदार है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा क्यों नही ?

इन तीन बदलावों के साथ “तीन-तलाक” पर चौथी पर बार अध्यादेश लाने की तैयारी में मोदी सरकार

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तीन-तलाक पर 3 बार अध्यादेश ला चुकी मोदी सरकार अब चौथी बार संसद में यह बिल पेश करने की तैयारी में है. इस बार यह बिल पास हो जाए, इसके लिए सरकार ने कई तैयारियां भी की है. दरअसल मुसलमानो में तीन तलाक के दुरूपयोग को रोकने के लिए मोदी सरकार चौथी बार अध्यादेश ला रही है।

तीन तलाक से जुड़े चौथे अध्यादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को मंजूरी दी गई। इसमें विपक्ष की कुछ मांगों को भी शामिल किया गया है।

पिछले सत्र में नही हो पाया था पास


पिछले सत्र में जब सरकार ने अंतिम दिन राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने यह कहकर बिल पास नहीं होने दिया कि सरकार ने बहुत ही हड़बड़ी में बिना सबकी सहमति लिए इसे पेश कर दिया। अब इसे संसद के बजट सत्र में पेश किया जएगा।

विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने पहले ही कुछ प्रमुख बदलाव किए थे। इन प्रमुख बदलावों में-

1- इस मामले में एफआईआर तभी स्वीकार्य की जाएगी जब पत्नी या उसके नजदीकी खून वाले रिश्तेदार दर्ज कराएंगे। विपक्ष और कई संगठनों की चिंता की थी कि इस मामले में एफआईआर का कोई दुरुपयोग कर सकता है।

2- पति और पत्नी के बीच मैजिस्ट्रेट समझौता करा सकते हैं, अगर बाद में दोनों के बीच इसकी पहल होती है। इससे पहले के बिल में इसके लिए प्रावधान नहीं थे। विपक्ष का तर्क था कि इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।

3- तत्काल तीन तलाक अभी गैरजमानती अपराध बना रहेगा लेकिन अब इसमें ऐसी व्यवस्था कर दी गई है, जिसके बाद मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है लेकिन इससे पहले पत्नी की सुनवाई करनी होगी। इससे पहले बिल में तीन साल की सजा के प्रावधान के बाद जमानत की गुंजाइश नहीं दी गई थी।

गौरतलब है कि तीन तलाक पर सरकार की तरफ से प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि तीन तलाक पर कानून बनाने में सरकार हड़बड़ी दिखा रही है। इस प्रस्तावित कानून में कई खामियां हैं जिन पर बहस होनी चाहिए और इस बिल में आवश्यक संशोधनों को शामिल किया जाना चाहिए।

पीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस, खोदा पहाड़ निकली चुहिया : कांग्रेस का पलटवार

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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई पहली और आखरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

वार्ता में राफेल के मुद्दे पर राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह प्रेस कांफ्रेंस कर रहें। मैंने पीएम मोदी से राफेल को लेकर सवाल पूछा था। मैं उन्हें भ्रष्टाचार पर बहस की चुनौती दी थी, लेकिन उन्होंने मुझसे बहस नहीं की।

राफेल के साथ ही 15 लाख के मुद्दे पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि “हमने पीएम मोदी के झूठ को उजागर किया है। हमने बताया कि वह 15 लाख रुपये नहीं दे सकते हैं। 23 तारीख को पता लग जाएगा कि जनता क्या चाहती है। वैसे प्रधानमंत्री मोदी से सवाल क्यों नहीं किया जाता है।”

पीएम की पहली प्रेस वार्ता, खोदा पहाड़-निकली चुहिया: रणदीप सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रेस वार्ता पर हमला बोलते हुए कहा, “मोदीजी की पहली और आखिरी प्रेसवार्ता, अमित शाह की बैसाखी बना। खोदा पहाड़, निकली चुहिया। 1 घंटे का भाषण, पत्रकारों के चेहरे पर थकान, पत्रकारिता पर बहुत सारा प्रवचन, 1 सवाल नहीं, 1 जबाब नहीं।”

https://twitter.com/rssurjewala/status/1129353549207539714

बिहार में बोले प्रधानमंत्री मोदी, एक तरफ वोट भक्ति और दूसरी तरफ देशभक्ति की राजनीति

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बिहार के अररिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आज कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश मे आज एक तरफ वोटभक्ति की राजनीति हो रही है तो दूसरी तरफ देशभक्ति की।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि “याद करिए 26/11 को मुम्बई में जब आतंकी हमला हुए था तब कांग्रेस सरकार ने क्या किया था ? तब देश के वीर जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर बदल लेने की इजाजत मांगी थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने उन्हें कुछ भी करने के लिए मन कर दिया।

कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया क्यों क्योंकि वो वोटेभक्ति की राजनीति करती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि ” सबको पता था कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें सजा देने की बजाय हिंदुओं को आतंकी बताने पर ध्यान लगाया।

https://twitter.com/ANI/status/1119516297262452737?s=19

अंबानी का चौकीदार बनकर प्रधानमंत्री मोदी ने देश के चौकीदारों को किया बदनाम: राहुल गांधी

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बिहार के सुपौल में एक जनसभा को संबोधित करते ह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज प्रधानमंत्री माफी पर जमकर हमला बोला। जनसभा में राहुल ने कहा कि बिहार के युवा पूरे देश मे जाकर बैंक, सरकारी दफ्तरों में चौकीदार का काम करते हैं। जो बिहार से चौकीदार बनकर जाता है वह ईमानदार होता है। अगर कोई बिहार का चौकीदार किसी बैंक में है तो उस बैंक में चोरी नहीं हो सकती।

राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि “जो व्यक्ति खुद को देश का चौकीदार कहता है असल में वह अनिल अंबानी का चौकीदार है। बिहार के युवा पूरे देश में देश की रक्षा करते हैं, ईमानदारी से ,धूप-आंधी-तूफान में, आधी रोटी खार, उन सबको एक चौकीदार ने बदनाम किया है।”

चौकीदारों से मोदी संवाद के कवरेज़ को लेकर चैनलों की चतुराई भी देखे चुनाव आयोग: रविश कुमार

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प्रधानमंत्री मोदी ने रेडियो के ज़रिए चौकीदारों से बात की। कार्यक्रम रेडियो का था मगर उसे टीवी के लिए भी बनाया गया। इसे सभी न्यूज़ चैनलों पर लगातार दिखाया गया। सभी चैनलों पर एक ही कवरेज़ रहा और एक ही एंगल से सारे वीडियो दिखे। किसी चैनल ने अपने दर्शकों को नहीं बताया कि स्क्रीन पर जो वीडियो आ रहा है, वो किसका है। बीजेपी की तरफ से प्रसारित हो रहा है या न्यूज़ एजेंसी ए एन आई की तरफ से। क्या ए एन आई विपक्ष के कार्यक्रम को भी इसी तरह से कवर करता है और चैनल दिखाते हैं?

यही नहीं जो चौकीदार खड़े दिख रहे हैं वो किसकी कंपनी के हैं। उन कंपनियों का क्या बीजेपी से क्या नाता है। एक कंपनी है एस आई एस जिसके संस्थापक आर के सिन्हा हैं, जो भाजपा के राज्य सभा सांसद हैं। क्या चैनलों ने बताया कि विजुअल में जो गार्ड दिख रहे हैं को वो एस आई एस के हैं और इनके संस्थापक बीजेपी के सांसद हैं? चैनलों ने आपको नहीं बताया। क्या चुनाव आयोग को इसकी जांच नहीं करनी चाहिए कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए कहीं एस आई एस के गार्ड को आदेश तो जारी नहीं किया गया। बाकी गार्ड किस कंपनी के थे और क्या उनका संबंध बीजेपी नेताओं से था, दर्शक नहीं जान सका।

एंकर बार बार कहते रहे कि प्रधानमंत्री ने 25 लाख चौकीदारों से संवाद किया। मगर किसी ने नहीं बताया कि वे यह बात किस आधार पर कह रहे हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान चैनलों के स्क्रीन पर गार्ड दिखाए गए, उनकी कुल संख्या 500 भी नहीं होगी। हर जगह पचीस तीस गार्ड बैठे हुए नज़र आए। तो मीडिया को कहना चाहिए कि यह बीजेपी का दावा है कि 25 लाख चौकीदारों को संबोधित किया गया। हमने अपनी तरफ से संख्या की पुष्टि नहीं की है।

पहला सवाल यही था कि ” सर मेरा एक सवाल था आपसे, हम गांव के गरीब परिवार से आते हैं, इज्जत ही हमारी पूंजी है। कई महीनों की मेहनत से सम्मान और भरोसा जीतते हैं। राजनीति के चलते हुए हमें चोर कहा गया है। हम जहां काम करते हैं, वहां हमें शक की नज़र से देखा रहा है। देश के सारे जवान भी चौकीदार हैं, क्या वे भी चोर हैं। मन बहुत दुखी हो रहा है, इसलिए आपसे ये सवाल की हूं।”

यूपी के फर्रूख़ाबाद की रेणु पीटर ने यह सवाल किया था। सवाल की बनावट से ज़ाहिर होता है कि पूछने वाले को लिख कर दिया गया था। जिसे हम पत्रकारों की भाषा में प्लांट कहते हैं। पिछले दो दिनों से सिक्योरिटी गार्ड अपने कम वेतन, निम्न जीवन स्तर की बात कर रहे है। सरकारी चौकीदार समय से वेतन न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। किसी ने अपने मुद्दे की बात नहीं रखी। क्या वाकई ऐसा हो सकता है।

( डिस्क्लेमर: यह लेख पत्रकार रविश कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है. लेख में दिए विचार लेखक के नीजी विचार है )

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