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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की पहली सूची

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आखिरकार भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. बता दें कि भाजपा ने 177 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की है. शिवराज सिंह चौहान अपने पुरानी सीट बुधनी से ही लड़ेंगे.

  • देवास से सांसद मनोहर ऊंटवाल आगर से लड़ेंगे चुनाव
  •  मंत्री माया सिंह का टिकट कटा
  • मंदसौर- यशपालसिंह सिसोदिया
  • सुवासरा- राधेश्याम पाटीदार,
  • मनासा- माधव मारू
  • नीमच- दिलीप परिहार
  • जावद- ओमप्रकाश सकलेचा
  • मल्हारगढ़- जगदीश देवड़ा
  • जावरा- राजेन्द्र पांडेयके नाम
  • गरोठ, की घोषणा नहीं।

प्रत्याशियों की सूची

कैलाश की निगाहें इंदौर लोकसभा पर तो कई दिग्गज हार के डर से हट रहे हैं पीछे

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।

इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल

राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।

इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।

सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

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सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी

कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

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पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

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दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा बारहवां सवाल- ‘मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के सिलसिले में मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बारहवां सवाल पूछा है. बारहवें सवाल में कमल नाथ ने गौ माता पर हो रहे अत्याचार को लेकर सवाल किया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मोदी जी ने बताया मामा जी के मुखौटे में नहीं है दम, मप्र में गौ माता हो गईं कम। मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ? गौ माता के भोजन पर भी क्यों करते हैं वार ?

सवाल नंबर बारह

1)बीजेपी के लोग गौ-माता के नाम पर ख़ूब हल्ला मचाते हैं।
हम हर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं ।
आइए,देखिए मामा जी गौ माता की कितनी अनदेखी किए जाते हैं:

2) मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टॉक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि:
18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ -धन की संख्या में भारी कमी आई है। मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख़ गौधन था ,जो 5 सालों में कम होकर 1करोड़96 लाख़ रह गया ।

3) यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख़ 13 हज़ार गौ-धन खत्म हो गया ।
4) शिवराज जी, जवाब दीजिए? 23लाख़ 13हज़ार गौ-धन कहाँ गया ?
5)भैंसों की संख्या 91लाख़ 29हज़ार से कम होकर 81लाख़ 87हज़ार रह गई। शिवराज जी, जवाब दीजिए 9 लाख़ 41 हज़ार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं?

6) सभी तरह के पशुधन में 43लाख़ 62 हज़ार की कमी आई है । क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ?
7) इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है। मध्यप्रदेश में 26 लाख़ 79 हज़ार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए।

8) क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रु किया, मगर 2 रु भी ख़र्च नहीं किये ?
2013-14 में सालाना 608 रुपए अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रु 66 पैसे
-2014-15 में सालाना 635 रु अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 73 पैसे

-2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 61 पैसे।
-2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 58 पैसे।
-2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे

9) मामा जी,क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया ?

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

धार में राहुल गांधी के भाषण की मुख्य बातें

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कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपने दो दिवसीय यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के धार जिले पहुंचे। जहां पर उन्होंने लोगों को सम्बोधित करते हुए मोदी सरकार द्वारा जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी कई आरोप लगाए।

पढ़िए धार में राहुल गांधी की 10 बड़ी बातें

1 – मध्य प्रदेश में युवाओं को रोजगार नही है , लाखो युवा बेरोजगार है , युवा प्रदेश के बाहर जाते है।
2 – पीएम ने कहा था 15 लाख बैंक में आएंगे , नही आये ।
3 – पीएम ने 5 सालों में अमीरों का करोड़ो का कर्जा माफ किया है ।
4 – कांग्रेस की सरकार आने वाली है और कांग्रेस का cm 10 दिन में किसानों का कर्जा माफ करेगा।
5 – अनिल अंबानी ओर नीरव मोदी को गरीबो का पैसा दिया ।
6 – एक व्यक्ति आया था बोला मित्रो मुझे प्रधानमंत्री मत बनाओ मुझे चौकीदार बनाओ । चौकीदार प्रधानमंत्री बनता है और फ्रांस जाते है अनिल अंबानी के माध्यमसे विमान का करार होता है ।
7 फ्रांस से 526 करोड़ का विमान 1600 करोड़ में खरीदा । देश का चौकीदार डरता है और सीबीआई के प्रमुख को बाहर कर देता है क्योंकि राफेल डील की जांच में दो लोगो का नाम आ जाता अनिल अंबानी ओर मोदी जी का ।
8 – चौकीदार ने चौकीदारी की पर नीरव मोदी , अनिल अंबानी की ।

गैर मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को निर्वाचन चिन्ह आरक्षित

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विधानसभा निर्वाचन 2018 में 8 पंजीकृत एवं गैर मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को निर्वाचन चिन्ह (आरक्षण एवं आवंटन) के लिए निर्वाचन आयोग ने आदेश जारी कर दिए हैं. निर्वाचन आयोग ने प्रतीक आदेश 1968 के पैरा 10 बी के प्रावधानों के तहत ये आदेश दिए.

वहीं कामन चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाने की छूट राज्य के 5 प्रतिशत विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े करने की शर्त पर दी गई. बता दें कि 28 नवम्बर को मतदान किया जायेगा और परिणाम 11 दिसंबर को आएगा।

राजनैतिक दल आप सबकी अपनी पार्टी का कामन चुनाव चिन्ह पैन स्टैंड

  • पंच पाटी का चुनाव चिन्ह चाय छलनी
  • राष्ट्रीय महाजन शक्ति पार्टी का चिन्ह टाईप मशीन
  • सांझी विरासत पार्टी का चिन्ह मोतियों का हार
  • भारतीय अपना अधिकार पार्टी का चिन्ह माचिस की डिब्बी
  • महनवादी पार्टी का चिन्ह करनी
  • भारतीय जन युग पार्टी का चिन्ह तुरही
  • जन सम्मान पाटी का चिन्ह कोट होगा

अब 66 तक कुल पार्टी दलों के अभ्यर्थियों को आयोग ने कामन सिम्बल आवंटित करने की दी छूट.

भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवालों से भागे संबित पात्रा

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के सिलसिले में राजधानी भोपाल पहुंचे बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भोपाल स्थित नेशनल हेराल्ड की बिल्डिंग के सामने प्रेस कांफ्रेंस की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर जमकर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि, ‘हमारे पास गांधी परिवार की सच्चाई सामने लाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. मध्यप्रदेश के लोगों को गांधी परिवार का असली चेहरा देखना चाहिए.’

राहुल गांधी और सोनिया गांधी जमानत पर हैं बाहर

कॉन्फ्रेंस में पात्रा ने आगे कहा कि, ‘नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ही 50,000 के मुचलके पर बाहर घूम रहें है. यह दोनों ही जेल से कुछ कदम दूर हैं.’ वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने जमकर हंगामा किया. उन्होंने बीजेपी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सड़क किनारे निजी जमीन पर प्रेसवार्ता कर रही है.

पत्रकारों के सवालों से भागते दिखे पात्रा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सवाल-जवाब के लिए भी समय दिया गया था. लेकिन जब पत्रकारों ने सवाल पूछना शुरू किया तो पात्रा ने चुनिंदा सवालों का ही जवाब दिया. बाकी सवालों से भागते नजर आये. बता दें कि संबित पात्रा नेशनल हेराल्ड मामले पर भोपाल एम.पी नगर स्थित विशाल मेगा मार्ट के सामने ये प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे.

40 दिन 40 सवाल- शिक्षा में हो रही धांधली को लेकर कमल नाथ ने पूछा सातवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ को लेकर सातवां सवाल पूछा है. कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘मोदी सरकार से जानिये मामा सरकार की स्कूली शिक्षा का रोंगटे खड़े कर देने वाला सच।’
बच्चों के भविष्य को पहुँचाई चोट, मामा के मुखौटे में निकले कई खोट। मामा जी, बच्चों से क्यों किया विश्वासघात ? स्कूली शिक्षा को क्यों पहुँचाया गंभीर आघात ?

इसके बाद कमल नाथ ने एक के बाद एक 11 ट्वीट्स के जरिये आंकड़ों के साथ शिक्षा में होने वाली धांधली पर सवाल पूछा।

(1) मध्यप्रदेश के प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक ,कुल 150762 स्कूलों में से 1 लाख़ 6 हज़ार से अधिक,अर्थात 71% स्कूलों मे बिजली पहुँची ही नहीं है ।
(2) मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15. 7 % स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है

अर्थात राज्य के 1.22 लाख़ स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है ।
(3) मध्यप्रदेश के सिर्फ़ 15.6 % माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19% उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है । सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है ।

(4) केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 19 हज़ार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं ।
(5) 14.6 हज़ार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते।
6)राज्य में 46.6हजार स्कूलों में अब भी नहीं बन पाया बच्चों के लिए खेल मैदान।प्रदेश के 93 हजार से अधिक स्कूलों में आज भी दिव्यांग बच्चों के लिये नहीं बन पाया है रैंप
(7)आज भी मप्र के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं।

8)कक्षा 1से5 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक साल मे 3.57लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है।कक्षा 6से8 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही 1साल में 3.42लाख बच्चो को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है
(9)कुल मिलाकर कक्षा 1से8 तक 1साल मे 7.17लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है

10) कंट्रोलर ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख़ 46 हज़ार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया ।
11) सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ़्त किताबें बाँटे जाने का प्रावधान है ।
कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख़ 88 हज़ार किताबें बाँटी ही नहीं गईं ।
12) कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हज़ार 851 शिक्षकों की कमी है।
13)सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284.61 करोड़ रुपए (आवंटन का 31 प्रतिशत) जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही ।

कल्पना कीजिए बग़ैर पुस्तक , बग़ैर शिक्षक ,बग़ैर कंप्यूटर , बग़ैर बिजली लाखों बच्चे अपना भविष्य कैसे सँवार सकते हैं । -उखाड़ फेंकिये ऐसी सरकार – 
सोर्स : HRD की EDI , DISE रिपोर्ट CAG की रिपोर्ट

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

‘मैं कांग्रेस पार्टी का कोषाध्यक्ष हूँ’

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“मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही हूँ, मैं तीन बार मध्यप्रदेश कांग्रेस का महामंत्री रहा हूँ और वर्तमान में कांग्रेस पार्टी का कोषाध्यक्ष हूँ. मुझे कांग्रेस पार्टी में कोषाध्यक्ष जैसा महेत्व्पूर्ण पद देने के लिए में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ जी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का धन्यवाद देना चाहता हूँ.”

पीसीसी में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता गोविन्द गोयल ने भाजपा और शिवराज सरकार पर हमला बोला पर पूरी प्रेस वार्ता में उनका जोर यह बात बताने पर ज्यादा था कि वह कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष है. तकरीबन 20 मिनट की प्रेस वार्ता में गोविन्द गोयल ने लगभग 10 बार यह बात दौहराई.

मध्यप्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष गोविन्द गोयल ने मुख्य प्रवक्ता शोभा ओझा के साथ पीसीसी में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए 2-3 घटनाओं का जिक्र किया और शिवराज सरकार पर झूठी ख़बरें फ़ैलाने और उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया. 

दरअसल कांग्रेस नेता गोविन्द गोयल पिछले दिनों मीडिया की सुर्खिओं में थे. कभी उनपर नवरात्री के दौरान आरती करते हुए झांकी में आग लगाने का आरोप लगा तो कभी परवलिया में जमीन कब्जाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगे साथ ही 19 अक्टूबर की शाम उन्हें भाजपा कार्यालय के बाहर देखा गया तो खबर फैली की गोविन्द गोयल भाजपा कार्यालय गये थे और जल्द ही बीजेपी में शामिल भी हो सकते है. 

इन्ही सभी आरोपों पर सफाई देते हुए गोयल ने कहा कि न तो मेरे हांथ से आरती की थाली गिरी और न ही मेरे कारण झांकी में आग लगी. मेरे पास तस्वीर मौजूद है जब आग लगने पर मैं एक हाँथ से आरती कर रहा था वहीं दुसरे हाँथ से आग बुझा रहा था.

जमीन कब्जाने के आरोपों पर सफाई देते हुए गोयल ने कहा की परवलिया में मेरी कोई जमीन ही नही है. मैं उस दिन परवलिया गया ही नही, मैं तो उस दिन 12 बजे से शाम के 7 बजे तक पीसीसी में ही था.

भाजपा कार्यालय जाने के आरोप पर सफाई देते हुए गोयल ने कहा की ‘में भाजपा कार्यालय में नही गया, में बीजेपी कार्यालय के पास ‘पान की दुकान’ पर पान खाने गया था. तभी मुझे मीडिया के कुछ साथी मिल गये और में उनसे गले मिलने लगा. मुझे वहां देखकर मीडिया के लोगों ने खबर छाप दी कि में भाजपा कार्यालय गया था.’

गोयल ने कहा कि “भारतीय जनता पार्टी सोशल मीडिया का उपयोग करके मेरी छवि बिगाड़ने का षड्यंत्र कर रही है. भारतीय जनता पार्टी घबराई हुई है वहीं कांग्रेस पार्टी कमलनाथ जी के नेतृत्व में भाजपा से दो-दो हाँथ करने के लिए तैयार है. मैं कांग्रेस पार्टी में था, कांग्रेस पार्टी में हूँ और कांग्रेस पार्टी में ही रहूँगा. 1972 में जब कांग्रेस पार्टी ने मुझे निलंबित किया था तब भी मैं किसी और पार्टी में नही गया.

40 दिन 40 सवाल – राज्य में बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालने को लेकर कमल नाथ ने पूछा पांचवा सवाल

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40 दिन 40 सवाल के अभियान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने प्रदेश में हो रहे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ को लेकर शिवराज सरकार से पांचवा सवाल किया है. उन्होंने एक के बाद एक 10 ट्वीट्स के जरिये मध्य प्रदेश में होने वाले बच्चों पर शोषण, अपहरण और पैदा होते ही बच्चों की मौत को लेकर कई सवाल दागे हैं.

सवाल नंबर पांच-

मोदी सरकार से जानिये, क्या किया है मामा ने मध्यप्रदेश के नौनिहालों का हाल , बच्चों को बनाकर ढाल चलते रहे बस चुनावी चाल । शर्मनाक शिवराज जी , बच्चे राज्य का भविष्य होते हैं।आपने प्रदेश के भविष्य को ही अंधकार की आग में क्यों झोंक दिया ?

1)बच्चों के प्रति अपराध में मप्र नं1: 2004से 2016के बीच बच्चों के साथ अपराधों के सबसे ज़्यादा 88908मामले मप्र मे दर्ज हुए
2016मे मप्र मे बच्चों के साथ अपराध के हर रोज 38मामले दर्ज हुए
2)मामा सरकार के आने के वक्त 2004मे बच्चों पर 3653अपराध होते थे,तो आज 13746अपराध होने लगे है

3)मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा बच्चे गुम हुए : वर्ष 2016 में ही मध्यप्रदेश में 8503 बच्चे गुम हुए।इनमें से 6037 लड़कियां थीं। पिछले सालों की संख्या भी मिला ली जाए तो वर्ष 2016 की स्थिति में कुल 12068 बच्चे गायब थे। एक साल में मध्यप्रदेश में हर रोज़ 23 बच्चे गुमते हैं।

4)सबसे ज़्यादा नवजात शिशु मृत्यु : नवजात शिशु मृत्यु दर (32 नवजात शिशु मृत्यु/एक हज़ार जीवित जन्म) भी मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा है। वर्ष 2008 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में 6.79 लाख़ बच्चों की जन्म लेने के 28 दिनों के भीतर ही मृत्यु हो गई।

5)सबसे ज़्यादा शिशु मृत्यु : शिशु मृत्यु दर (यानी एक हज़ार जीवित जन्म पर मृत होने वाले एक साल से कम उम्र के बच्चे) भी मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा यानी 47 है। वर्ष 2008 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में 9.84 लाख़ बच्चों की अपना पहला जन्मदिन मनाने से पहले ही मृत्यु हो गई।

6)बच्चों का अपहरण : बच्चों के लिए मध्यप्रदेश को आपने सबसे असुरक्षित राज्य बना दिया है। वर्ष 2004 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में बच्चों के अपहरण के 23099 मामले दर्ज़ हुए। अकेले वर्ष 2016 में राज्य में 6016 ,यानी हर रोज़ बच्चों के अपहरण के 16 मामले दर्ज़ हुए।

7) मामा सरकार जब सत्ता में आई तब 2004 में बच्चों के 179 अपहरण होते थे, तो आज 2016 में 6119 अपहरण होने लगे हैं।
8) नैशनल फैमेली हेल्थ सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश में 32% नाबालिग बच्चियों की शादी करा दी जाती है ।

9)बाल विवाह की गंभीर स्थिति:जनगणना 2011के मुताबिक मप्र मे8.91लाख बच्चो की शादी कर दी गई।इनमे से2.4लाख लड़कियाँ माँ बन चुकी है।3.90लाख बच्चियो की माँ बनने की उम्र 19साल से कम है।इसी तरह 29441बच्चे ऐसे थे,जो विधवा/विधुर,अलग हुए/तलाकशुदा थे।इनमे से 12382लड़किया और 17059लड़के थे
10)बच्चे बने मज़दूर – राज्य में जनगणना के आंकड़ों के अनुसार कुल बाल श्रमिकों की वास्तविक संख्या 7 लाख़ है।15 सालों में शिवराज सरकार ने बाल श्रमिकों का सर्वे ही नहीं करवाया।

सोर्स : केंद्रीय गृह मंत्रालय,राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो,NHFS-4

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