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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : भाजपा की 177 सीटों पर 16 महिला उम्मीदवार

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प्रदेश में करीब 50 प्रतिशत महिला वोटर होने के बावजूद पार्टियां उन्हें तव्ज्जो नहीं दे रही है। एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश चुनाव को लेकर पहली सूची में 177 में सिर्फ 16 महिलाओं उम्मीदवारों कोे जगह दी है।

शुक्रवार को भाजपा ने 230 विधानसभा सीटों में से 177 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है, जिसमें 16 महिलाओं के नाम शामिल है। जहां 16 महिला उम्मीदवारों में से 7 अनुसूचित जनजाति(ST) और 9 सामान्य वर्ग से है। वहीं इस सूची में एक भी अनुसूचित जाति(SC) महिला उम्मीदवार का नाम शामिल नहीं है।

महिला उम्मीदवारों के नाम :

अनुसूचित जनजाति(ST) :

1. जैतपुर : मनीषा सिंह

2. मानपुर : मीना सिंह

3. सिहोरा : नंदिनी मरावी

4. नेपानगर : मंजू राजेंद्र दादू

5. मनावर : रंजना बघेल

6. घोड़ाडोंगरी : गीता बाई उइके

7. बैहर : अनुपमा नेताम

प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में अनुसूचित जनजाति(ST)  की प्रदेश में 47 सीटे हैं जिसमें 40 सीटों पर घोषणा की गई है। इन 40 सीटों में भाजपा ने सिर्फ 7 महिला उम्मीदवारों को जगह दी है। बाकी बची 7 सीटों में देखना होगा कि भाजपा कितने SC महिला उम्मीदवारों को उतारती है।

अनुसूचित जाति(SC) :

भाजपा की पहली सूची में फिलहाल किसी महिला SC उम्मीदवार का नाम नहीं है। प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से 35 SC के लिए आरक्षित है। 29 सीटों पर घोषणा हो चुकी है, बाकि बची 6 सीटों पर देखना होगा कि कोई महिला उम्मीदवार को भाजपा जगह देती है या नहीं।

सामान्य वर्ग की महिला उम्मीदवार :

1.  बरगी : प्रतिभा सिंह

2. चचौरा : ममता मीना

3. छतरपुर :  अर्चना सिंह

4. मलहरा : ललिता यादव

5. देवास : गायत्री राजे पनवान

6. बुरहानपुर : अर्चना चिटनिस

7. धार : नीना वर्मा

8. सबलगढ़ : सरला रावत

9. शिवपुरी : यशोधरा राजे सिंधिया

कांग्रेस के पूर्व सांसद और दिग्विजय सिंह के करीबी प्रेमचंद गुड्डू भाजपा में शामिल

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congress leader premchandra guddu joining bjp in presense of kailash vijayvargiya and narottam mishra

कांग्रेस के पूर्व सांसद और दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले प्रेमचंद गुड्डू भाजपा में शामिल हो गए हैं. आज शुक्रवार की शाम दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में सदस्यता ली. गौर करने वाली बात है कि गुड्डू के सदस्यता लेने के दौरान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ थावरचंद गहलोत भी मौजूद थे. बता दें कि उज्जैन जिले की घट्टिया सीट से गुड्डू और गहलोत चुनावी मैदान में आमने सामने रहते थे. 

सूत्रों की मानें तो प्रेमचंद गुड्डू कांग्रेस में साइड लाइन होने की वजह से पिछले कई दिनों से परेशान चल रहे थे. इसलिए उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. प्रेमचंद गुड्डू उज्जैन से सांसद रह चुके हैं इसके बावजूद भी उज्जैन में नियुक्तियों के दौरान उन्हें नजरअंदाज किया गया. सभी पद कमलनाथ के करीबी को दे दिया गया. जिस वजह से गुड्डू काफी नाराज चल रहे थे. हालांकि इस मामले पर दिग्विजय सिंह ने गुड्डू का साथ भी दिया था लेकिन कमलनाथ ने पद देने से इंकार कर दिया. यही कारण है कि गुड्डू और कमलनाथ की बिलकुल नहीं बनती.

कैलाश विजयवर्गीय ने दिलाई सदस्यता

प्रेमचंद गुड्डू के भाजपा में शामिल होने के संकेत भाजपा के राष्‍ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पहले ही दे दिया था. विजयवर्गीय ने एक टीवी चैनल को बताते हुए कहा था कि आज शाम तक बड़ा ‘धमाका’ करने वाले हैं, उनके इस ऐलान से कांग्रेस को झटका लगेगा. बता दें कि कैलाश विजयवर्गीय ने ही गुड्डू को सदस्य्ता दिलाई.

उज्जैन जिले की घट्टिया विधानसभा सीट से लड़ सकते हैं चुनाव

बहरहाल, प्रेमचंद गुड्डू का भाजपा में शामिल होने से इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि उज्जैन जिले की घट्टिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. क्योंकि जैसे ही प्रेमचंद ने भाजपा में शामिल हुए वैसे ही भाजपा मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, ‘घट्टिया विधानसभा सीट से पहली सूची में उम्मीदवार का नाम त्रुटिवश जारी हो गया है. अभी इस सीट पर उम्मीदवार का निर्णय नहीं हुआ है. अगली सूची में इस विधानसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी.’

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की पहली सूची

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आखिरकार भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. बता दें कि भाजपा ने 177 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की है. शिवराज सिंह चौहान अपने पुरानी सीट बुधनी से ही लड़ेंगे.

  • देवास से सांसद मनोहर ऊंटवाल आगर से लड़ेंगे चुनाव
  •  मंत्री माया सिंह का टिकट कटा
  • मंदसौर- यशपालसिंह सिसोदिया
  • सुवासरा- राधेश्याम पाटीदार,
  • मनासा- माधव मारू
  • नीमच- दिलीप परिहार
  • जावद- ओमप्रकाश सकलेचा
  • मल्हारगढ़- जगदीश देवड़ा
  • जावरा- राजेन्द्र पांडेयके नाम
  • गरोठ, की घोषणा नहीं।

प्रत्याशियों की सूची

40 दिन 40 सवाल- ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से तेरहवां सवाल पूछा है। तेरहवें सवाल में कमल नाथ ने पूछा, ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

सवाल नंबर तेरह –

मोदी जी की निगाह से देखिए मामा जी की विदेशी यात्राओं का कमाल,
निवेश में मध्यप्रदेश ठन ठन गोपाल ।
मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ?
क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शिवराज ब्रांड झूठ ।

12 सालों से शिवराज जी देश विदेश में चमक-धमक के साथ इन्वेस्टर्स मीट कर रहे हैं। कहते हैं कि 40 लाख़ करोड़ रुपए के अनुबंध भी हुए हैं। सच क्या है? सच 23 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताया गया।

1.वर्ष 2103-14 में भारत में कुल 24299.33 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया।

इसमें से केवल 118.85 मिलियन डॉलर (यानी 0.49%) का निवेश मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया। इतने में से पूरा भी मप्र में नहीं आया।

2.वर्ष 2014-15 में भारत में कुल 30930.50मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 100.13 मिलियन डाॅलर (यानी 0.32%) मप्र और छतीसगढ़ में आया।

3.वर्ष 2015-16 में भारत में कुल 4000000मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया। इसमें से केवल 80.02 मिलियन डाॅलर (यानी 0.20%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

4.वर्ष 2016-17में भारत में 43478.27मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया।

इसमें से केवल 76.10 मिलियन डाॅलर ही (यानी 0.17%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

5.वर्ष 2017-18 में भारत में कुल 44856.75 मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 28.16 मिलियन डाॅलर (यानी 0.06%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

शिवराज जी, सरकारी खज़ाने से विदेश यात्रायें करने के बाद भी कोई निवेश करने क्यों नहीं आया?
क्योंकि निवेशक शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार से भयभीत रहे।

शिवराज ब्राँड झूठ
सबसे ज्यादा विदेशी निवेश कर्नाटक, तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश में आया, जहाँ भाजपा की सरकारें नहीं हैं।

40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

कैलाश की निगाहें इंदौर लोकसभा पर तो कई दिग्गज हार के डर से हट रहे हैं पीछे

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।

इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल

राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।

इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।

सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

suryaprakash meena pic

सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी

कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

gopal bhargav

पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा बारहवां सवाल- ‘मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के सिलसिले में मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बारहवां सवाल पूछा है. बारहवें सवाल में कमल नाथ ने गौ माता पर हो रहे अत्याचार को लेकर सवाल किया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मोदी जी ने बताया मामा जी के मुखौटे में नहीं है दम, मप्र में गौ माता हो गईं कम। मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ? गौ माता के भोजन पर भी क्यों करते हैं वार ?

सवाल नंबर बारह

1)बीजेपी के लोग गौ-माता के नाम पर ख़ूब हल्ला मचाते हैं।
हम हर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं ।
आइए,देखिए मामा जी गौ माता की कितनी अनदेखी किए जाते हैं:

2) मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टॉक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि:
18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ -धन की संख्या में भारी कमी आई है। मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख़ गौधन था ,जो 5 सालों में कम होकर 1करोड़96 लाख़ रह गया ।

3) यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख़ 13 हज़ार गौ-धन खत्म हो गया ।
4) शिवराज जी, जवाब दीजिए? 23लाख़ 13हज़ार गौ-धन कहाँ गया ?
5)भैंसों की संख्या 91लाख़ 29हज़ार से कम होकर 81लाख़ 87हज़ार रह गई। शिवराज जी, जवाब दीजिए 9 लाख़ 41 हज़ार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं?

6) सभी तरह के पशुधन में 43लाख़ 62 हज़ार की कमी आई है । क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ?
7) इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है। मध्यप्रदेश में 26 लाख़ 79 हज़ार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए।

8) क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रु किया, मगर 2 रु भी ख़र्च नहीं किये ?
2013-14 में सालाना 608 रुपए अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रु 66 पैसे
-2014-15 में सालाना 635 रु अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 73 पैसे

-2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 61 पैसे।
-2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 58 पैसे।
-2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे

9) मामा जी,क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया ?

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा ग्यारहवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से पूछा ग्यारहवां सवाल . ग्यारहवें सवाल में कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए पूछा, ‘मोदी जी बता रहे हैं मनरेगा की बात, मामा जी ने मेहनतकशों से किया कुठाराघात । रोज़गार का कानूनी अधिकार मामा, क्यों किया बेकार ?

ग्यारहवां सवाल-

1) मध्यप्रदेश में 68.35 लाख़ मनरेगा के जॉब कार्ड्स हैं,अर्थात लगभग 3 करोड़ 41 लाख़ 75 हज़ार लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मज़दूरी के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं ।

2) कांग्रेस ने यह तय किया था कि एक साल में 100 दिनों का रोज़गार इस योजना के तहत दिया जाएगा ।

मप्र में मनरेगा में पंजीकृत लोगों मे से
वर्ष 2014-15 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,58,776 (2.33%)।
वर्ष 2015-16 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 2,25,502 (3.30%)।
वर्ष 2016-17 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार -1,40,990 (2.1%)।

वर्ष 2017-18 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,34,724 (1.97%) ।

3) कांग्रेस द्वारा बनाए गए क़ानून में कहा गया था कि हर मज़दूर को काम करने के एक सप्ताह के भीतर मज़दूरी का भुगतान हो जाएगा; और यदि नहीं हुआ तो सरकार देरी से मज़दूरी के भुगतान का मुआवजा देगी।

4)शिवराज जी ने वर्ष 2013-14 से सितम्बर 2018-19 तक 6हज़ार 167 करोड़ रुपए की मज़दूरी का देरी से भुगतान किया।
हज़ारों मज़दूरों को अब भी उनकी मेहनत की कमाई नहीं दी गई। क़ानून के मुताबिक देरी से भुगतान पर सरकार को 10 % के मान से कम से कम 610 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का अनुमान था,

मगर मामा ने दिये लगभग केवल 3 करोड़ रुपए।
2013-14- देरी से दिये 1706 करोड़ रुपए ।
2014-15- देरी से दिये 1740 करोड़ रुपये।
2015-16 – देरी से दिये 1326 करोड़ रुपए।
2016-17- देरी से दिये 787 करोड़ रुपए।
2017-18- देरी से दिये 434करोड़ रुपये।
2018-19-देरी से1734करोड़ रुपये।

Total- 6167 करोड़ -देरी से दिया गया भुगतान ।

5) मामा सरकार द्वारा मुहैया कराया गया एवरेज रोजगार: 2014-15मात्र 42 दिन ,2015-16 मात्र 45 दिन 2016-17 मात्र 40 दिन ,2017-18मात्र 46 दिन और 2018 -19 मात्र 38 दिन ।

6)मामा सरकार द्वारा मुहैया कराई गई एवरेज मजदूरी प्रतिदिन :
2014-15 मात्र 149रु ,2015-16 मात्र 149 रु 2016-17 मात्र 155रु ,2017-18मात्र165रु और
2018 -19 मात्र 170रु।

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

धार में राहुल गांधी के भाषण की मुख्य बातें

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कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपने दो दिवसीय यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के धार जिले पहुंचे। जहां पर उन्होंने लोगों को सम्बोधित करते हुए मोदी सरकार द्वारा जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी कई आरोप लगाए।

पढ़िए धार में राहुल गांधी की 10 बड़ी बातें

1 – मध्य प्रदेश में युवाओं को रोजगार नही है , लाखो युवा बेरोजगार है , युवा प्रदेश के बाहर जाते है।
2 – पीएम ने कहा था 15 लाख बैंक में आएंगे , नही आये ।
3 – पीएम ने 5 सालों में अमीरों का करोड़ो का कर्जा माफ किया है ।
4 – कांग्रेस की सरकार आने वाली है और कांग्रेस का cm 10 दिन में किसानों का कर्जा माफ करेगा।
5 – अनिल अंबानी ओर नीरव मोदी को गरीबो का पैसा दिया ।
6 – एक व्यक्ति आया था बोला मित्रो मुझे प्रधानमंत्री मत बनाओ मुझे चौकीदार बनाओ । चौकीदार प्रधानमंत्री बनता है और फ्रांस जाते है अनिल अंबानी के माध्यमसे विमान का करार होता है ।
7 फ्रांस से 526 करोड़ का विमान 1600 करोड़ में खरीदा । देश का चौकीदार डरता है और सीबीआई के प्रमुख को बाहर कर देता है क्योंकि राफेल डील की जांच में दो लोगो का नाम आ जाता अनिल अंबानी ओर मोदी जी का ।
8 – चौकीदार ने चौकीदारी की पर नीरव मोदी , अनिल अंबानी की ।

तीन भाजपा नेताओं ने कमल छोड़ थामा कांग्रेस का हाथ

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जैसे-जैसे मध्य प्रदेश विधानसभ चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे दल बदल की राजनीति भी शुरू हो गई है। जिसका जीता जागता नजारा दिखाई दिया नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में जहां भाजपा विधायक संजय शर्मा ने मंगलवार सुबह राहुल गांधी के सामने कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

बता दें कि संजय शर्मा भाजपा से पहले कांग्रेस में ही थे, भाजपा में आने के बाद उन्हें तेंदूखेड़ा से टिकट दिया गया था जिसके बाद वे विधायक बने थे। वहीं इस बार के विधानसभा चुनवा में संजय शर्मा को ये आभास होने लगा था कि अबकी बार टिकट मिलने के आसार कम ही दिखाई दे रहे हैं। जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का मन बना लिया।

ये नेता भी हुए शामिल

संजय शर्मा के साथ भाजपा से पूर्व विधायक कमलापत आर्य और व्यापमं घोटाले में आरोपी और भाजपा नेता डॉ गुलाब सिंह किरार ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली। बता दें कि गुलाब सिंह किरार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं।

8 और भाजपा नेता हो सकते हैं कांग्रेस में शामिल

सूत्रों की माने तो संजय शर्मा, कमलापत आर्य और डॉ गुलाब सिंह किरार 8 नेता और भाजपा को अलविदा कह सकते हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 28 नवम्बर को होगा जिसका परिणाम 11 दिसम्बर को आएगा।

40 दिन 40 सवाल: पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर कमलनाथ ने पूछा दसवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से दसवां सवाल पूछा। अपने दसवें सवाल में कमल नाथ ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर किया।

सवाल नंबर दस

मोदी जी ने निकाला पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला,
मामा क्यों डाला मुँह पर ताला ? शर्म करो शिवराज ।
मनमोहन जी के समय ‘धरना-धर’ और उपवास का स्वाँग,
अब क्यों नही उठाते बासमती की माँग ?

1) कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था। मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्रायः कर दिया । इस मंत्रालय के 2014-15 के 7000 करोड़(BE) के बजट को 2015-16 में 94 करोड़(BE) कर दिया गया ।

2) इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे।
पहला- देश के पिछड़े जिलों का विकास BRGF) और दूसरा पंचायतों को सशक्त करने के लिये राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान (RGPSA)। मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया।

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3) कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि ( BRGF) कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था । जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर 2995.59 करोड़ रु खर्च किए ।
4)अलीराजपुर ,अनूपपुर ,अशोकनगर,बालाघाट ,बड़वानी
,बैतूल,बुरहानपुर ,झाबुआ ,मंडला, टीकमगढ,डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का अनुदान बंद ।

5) मोदी जी ने आने के बाद 2015 -16 से मध्यप्रदेश को यह(BRGF) अनुदान बंद कर दिया ।आखरी साल 2014 – 15 के लिए मोदी जी ने 647.20 करोड़ रु प्रावधानित किए ,मगर जारी किए सिर्फ़ 221.22 करोड़ और मामा जी ने ख़र्च किए मात्र 197.52 करोड़ ।

6) इसी प्रकार मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया । मोदी जी ने आखरी वर्ष 2015-16 में इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़ ।

7)शिवराज जी फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान,जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) ने स्वीकारी है,को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है।ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है

8) अब क्या हुआ मामा जी , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे ?

9) मध्यप्रदेश में 2 लाख़ हेक्टेयर के 13 जिलों,विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद ,नरसिंहपुर ,जबलपुर, गुना ,शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी जी ने कहा कि वे अपने चावल बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे ।

10)मामा जी,मप्र के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वाँग भी नही करोगे?अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?
सोर्स -केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण
धरना-धर मामा का स्वाँग

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

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