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कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मुद्दे पर भाजपा के समर्थन में खड़ी हुई बसपा

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bsp chief mayawati

बहुजन समाज पार्टी के सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मोदी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आज संसद में कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं क्योंकि इसकी अवधि खत्म हो रही है।

बता दें की कांग्रेस के साथ कई विपक्षी दलों ने कश्मीर में लड़े राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा था कि कश्मीर में बड़ी हिंसा के लिए भाजपा और पीडीपी गठबंधन जिम्मेदार है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा क्यों नही ?

इन तीन बदलावों के साथ “तीन-तलाक” पर चौथी पर बार अध्यादेश लाने की तैयारी में मोदी सरकार

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तीन-तलाक पर 3 बार अध्यादेश ला चुकी मोदी सरकार अब चौथी बार संसद में यह बिल पेश करने की तैयारी में है. इस बार यह बिल पास हो जाए, इसके लिए सरकार ने कई तैयारियां भी की है. दरअसल मुसलमानो में तीन तलाक के दुरूपयोग को रोकने के लिए मोदी सरकार चौथी बार अध्यादेश ला रही है।

तीन तलाक से जुड़े चौथे अध्यादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को मंजूरी दी गई। इसमें विपक्ष की कुछ मांगों को भी शामिल किया गया है।

पिछले सत्र में नही हो पाया था पास


पिछले सत्र में जब सरकार ने अंतिम दिन राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने यह कहकर बिल पास नहीं होने दिया कि सरकार ने बहुत ही हड़बड़ी में बिना सबकी सहमति लिए इसे पेश कर दिया। अब इसे संसद के बजट सत्र में पेश किया जएगा।

विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने पहले ही कुछ प्रमुख बदलाव किए थे। इन प्रमुख बदलावों में-

1- इस मामले में एफआईआर तभी स्वीकार्य की जाएगी जब पत्नी या उसके नजदीकी खून वाले रिश्तेदार दर्ज कराएंगे। विपक्ष और कई संगठनों की चिंता की थी कि इस मामले में एफआईआर का कोई दुरुपयोग कर सकता है।

2- पति और पत्नी के बीच मैजिस्ट्रेट समझौता करा सकते हैं, अगर बाद में दोनों के बीच इसकी पहल होती है। इससे पहले के बिल में इसके लिए प्रावधान नहीं थे। विपक्ष का तर्क था कि इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।

3- तत्काल तीन तलाक अभी गैरजमानती अपराध बना रहेगा लेकिन अब इसमें ऐसी व्यवस्था कर दी गई है, जिसके बाद मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है लेकिन इससे पहले पत्नी की सुनवाई करनी होगी। इससे पहले बिल में तीन साल की सजा के प्रावधान के बाद जमानत की गुंजाइश नहीं दी गई थी।

गौरतलब है कि तीन तलाक पर सरकार की तरफ से प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि तीन तलाक पर कानून बनाने में सरकार हड़बड़ी दिखा रही है। इस प्रस्तावित कानून में कई खामियां हैं जिन पर बहस होनी चाहिए और इस बिल में आवश्यक संशोधनों को शामिल किया जाना चाहिए।

मोदी कैबिनेट से बाहर हुई मेनका गांधी को मिल सकती है यह बड़ी जिम्मेदारी

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ऐतिहासिक जीत और पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट में कुल 24 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्य मंत्रियों को शामिल किया है।

एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार में कई नए चेहरों को शामिल किया है तो वहीं दूसरी ओर के दिग्गज नेता सरकार से बाहर भी हुए है। सरकार में जिन नेताओं को जगह नही मिली है उनमें अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, राज्यवर्धन राठौर और मेनका गांधी शामिल है। अरुण जेटली और सुषमा स्वराज के बारे में कहा जा रहा है कि यह स्वयं की मर्जी से सरकार में शामिल नही हुए वहीं राठौर और मेनका गांधी को सरकार से बाहर रखने का कारण अभी तक स्पष्ट नही हुआ है।

मेनका गांधी पिछली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थी। 8 बार की सांसद मेनका गांधी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें सरकार में शामिल न करके पार्टी उन्हें लोकसभा का अस्थाई स्पीकर बना सकती है।

मोदी सरकार में शामिल मंत्रियों की सूची

कैबिनेट मंत्री

  1. राजनाथ सिंह ( उत्तर प्रदेश)
  2. अमित शाह (पहली बार) (गुजरात)
  3. नितिन गडकरी (महाराष्ट्र)
  4. सदानंद गौड़ा (कर्नाटक)
  5. निर्मला सीतारमण (राज्यसभा सदस्य) (तमिलनाडु)
  6. राम विलास पासवान (बिहार)
  7. नरेंद्र सिंह तोमर (मध्य प्रदेश)
  8. रविशंकर प्रसाद (बिहार)
  9. हरसिमरत कौर बादल (पंजाब)
  10. थावर चंद गहलोत (राज्यसभा सदस्य) (मध्य प्रदेश)
  11. एस जयशंकर (पहली बार) (दिल्ली)
  12. डॉ. रमेश पोखरियाल (पहली बार) (उत्तराखंड)
  13. अर्जुन मुंडा (पहली बार) (झारखंड)
  14. स्मृति इरानी (उत्तर प्रदेश)
  15. डॉ हर्षवर्धन (दिल्ली)
  16. प्रकाश जावडेकर (राज्य सभा सदस्य) (मध्य प्रदेश)
  17. पीयूष गोयल (राज्य सभा सदस्य)
  18. धर्मेंद्र प्रधान (राज्य सभा सदस्य)
  19. मुख्तार अब्बास नकवी (राज्य सभा सदस्य) (उत्तर प्रदेश)
  20. प्रहलाद जोशी (पहली बार) (कर्नाटक)
  21. महेंद्र नाथ पांडेय (उत्तर प्रदेश)
  22. अरविंद सावंत (पहली बार) (महाराष्ट्र)
  23. गिरिराज सिंह (बिहार)
  24. गजेंद्र सिंह शेखावत (राजस्थान)

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार

  1. संतोष कुमार गंगवार (उत्तर प्रदेश)
  2. राव इंद्रजीत सिंह (हरियाणा)
  3. श्रीपद नाइक (गोवा)
  4. जितेंद्र सिंह (जम्मू कश्मीर)
  5. किरन रिजिजू (अरुणाचल प्रदेश)
  6. प्रहलाद पटेल (पहली बार) (मध्य प्रदेश)
  7. आर के सिंह (बिहार)
  8. हरदीप सिंह पुरी (पंजाब)
  9. मनसुख मांडविया (गुजरात)

राज्य मंत्री

  1. फग्गन सिंह कुलस्ते (मध्य प्रदेश)
  2. अश्विनी चौबे (बिहार)
  3. अर्जुनराम मेघवाल (राजस्थान)
  4. जनरल वीके सिंह (उत्तर प्रदेश)
  5. कृष्णपाल सिंह गुर्जर (हरियाणा)
  6. राव साहब दानवे (महाराष्ट्र)
  7. जी कृष्ण रेड्डी (पहली बार) (तेलंगना)
  8. पुरुषोत्तम रुपाला (गुजरात)
  9. रामदास आठवले (महाराष्ट्र)(राज्यसभा सदस्य)
  10. साध्वी निरंजन ज्योति (उत्तर प्रदेश)
  11. संजीव बालियान (उत्तर प्रदेश)
  12. बाबुल सुप्रीयो (पश्चिम बंगाल)
  13. संजय शामराव (पहली बार)( महाराष्ट्र)
  14. अनुराग ठाकुर (पहली बार)(हिमाचल प्रदेश)
  15. सुरेश अंगाडी (पहली बार) (कर्नाटक)
  16. नित्यानंद राय (पहली बार) (बिहार)
  17. रतनलाल कटारिया (पहली बार) (हरियाणा)
  18. वी मुरलीधरन (पहली बार)(राज्यसभा) (महाराष्ट्र)
  19. रेणुका सिंह (पहली बार)(छत्तीसगढ़ )
  20. सोम प्रकाश (पहली बार) (पंजाब)
  21. रामेश्वर तेली (पहली बार)(असम)
  22. प्रताप चंद(ओडिशा)
  23. कैलाश चौधरी (पहली बार)(राजस्थान)
  24. देबश्री चौधरी (पहली बार) (पश्चिम बंगाल)

मोदी कैबिनेट से बाहर जेडीयू, नीतीश कुमार ने बताया कारण

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लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ लड़कर बिहार में 16 लोकसभा सीट जीतने वाली जेडीयू, नरेंद्र मोदी कैबिनेट से बाहर रही है। सरकार में जेडीयू के किसी भी सांसद को शामिल नही किया गया है। जिसके बाद मीडिया में कई तरह से सवाल पैदा होने लगे थे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि ” हमें जब बताया गया था कि हमारी पार्टी से किसी एक सांसद को मंत्री बनाया जाएगा तो मैंने कहा कि हमें यह नही चाहिए, फिर भी मैं एक बार पार्टी से बात करके बताऊंगा। मैंने पार्टी के नेताओं से बात की और उन्होंने भी कहा कि यह सही नही होगा कि हम सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से सरकार में शामिल हों। जिसके बाद हमने मंत्री पद के लिए मना कर दिया। हम सरकार के साथ है और इससे दुखी नही है।

https://twitter.com/ANI/status/1134357791273971712

लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण लाईवः भाजपा की बुराई करते करते लोग देश की बुराई करने लगते हैं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय लोकसभा में भाषण देते हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दे रहे हैं। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब एक गरीब ने दिल्ली की सल्तनत को चुनौती दी तो कांग्रेस इसे पचा नहीं पा रही है।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बगैर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इनके लिए AD का मतलब आफ्टर डायनेस्टी और BC का मतलब बिफोर कांग्रेस है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि दुख होता है कि लोग मोदी और बीजेपी की आलोचना करते-करते लोग देश की बुराई करने लगते हैं।

हमारे लाईव ब्ल़ॉग पर पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में भाषण और उस से जुड़ी अन्य लाईव अपडेट्स

लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान करने जा रहे बड़ा प्रदर्शन

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मोदी सरकार द्वारा किसानों को रिझाने के हर प्रयास फेल होते नजर आ रहे हैं। जिसके कारण किसानों का मोदी सरकार के प्रति आक्रोश भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अंतरिम बजट के सहारे मोदी सरकार ने किसानों को रिझाने का एक अंतिम प्रयास भी कर लिया है लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नही दिख़ रहा है। सरकार से नाराज किसान अब अपने जमीन अधिग्रहण में उचित मुआवजे की मांग को लेकर दिल्ली में कूच करने जा रहे हैं। वह 7 फरवरी तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।

किसानों के आंदोलन को देखते हुए शुक्रवार को नोएडा और ग़ाजियबाद को दिल्ली से जोडऩे वाले डीएनडी फ्लाईवे को कुछ देर के लिए बंद करना पड़ा। सहायक पुलिस अधीक्षक डॉक्टर कौस्तुभ ने बताया कि अलीगढ़, आगरा, हाथरस, बुलंदशहर गौतम बुद्ध नगर आदि जगहों के किसान प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने के लिए डीएनडी के रास्ते दिल्ली जा रहे थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें डीएनडी पर रोक दिया जिससे दिल्ली व नोएडा में जगह-जगह जाम लग गया।

शुक्रवार की शाम को दिल्ली-नोएडा फ्लाईवे पर किसानों ने जाम लगा दिया। किसानों की मांग है कि सरकार 2013 में पारित भूमि अधिग्रहण विधेयक के तहत भूमि ले। डीएनडी पर जाम होने की वजह से लोगों ने दूसरा रास्ता अपनाया जिससे अन्य रास्तों में भी जाम लग गया। बढ़ती भीड़ के चलते तात्कालिक रूप से रास्तों को डायवर्ट भी किया गया और यात्रा परामर्श भी जारी किया गया।

कुंभ में आयाजित धर्म संसद में सरकार से नाराज संतो ने लिया बड़ा फैसला

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प्रयागराज में कुंभ के बीच चल रही संतों की धर्म संसद में संतों ने ऐलान किया गया है कि संत समाज के लोग अगले महीने प्रयाग से अयोध्या के लिए कूच करेंगे। ‘परमधर्म संसद’ की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में कहा गया है कि मंदिर निर्माण के लिए 21 फरवरी की तारीख तय की गई है। कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा गया है कि खेद का विषय है कि कुत्ते तक को तत्काल न्याय दिलाने वाले राम के देश में रामजन्मभूमि के मुकदमे को न्याय नहीं मिल रहा है।

पीएम मोदी के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए धर्मसंसद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि न्याय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब उनकी बारी आएगी तो वह अपनी भूमिका निभाएंगे। वह अपने वचन पर स्थिर नहीं रह सके और उन्होंने रामजन्मभूमि विवाद की न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करवाई है, जिसमें गैर-विवादित जमीन को उसके मालिकों को लौटाने की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि 48 एकड़ भूमि रामजन्मभूमि न्यास की है जबकि सच्चाई यह है कि एक एकड़ भूमि के अलावा सारी जमीन उत्तर प्रदेश सरकार की है, जो रामायण पार्क के लिए अधिगृहीत की गई थी।’

गोली खानी पड़े या जेल जाना पड़े, हम तैयारः स्वरूपानंद सरस्वती

धर्म संसद की अगुवाई कर रहे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ’हम सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस पहले चरण में हिंदुओं की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 21 फरवरी 2019 की तारीख तय की गई है। बसंत पंचमी के बाद हम प्रयागराज से अयोध्या के लिए प्रस्थान करेंगे। उसके लिए हमें अगर गोली भी खानी पड़ी या जेल भी जाना पड़े तो हम प्रस्तुत हैं। अगर इस काम में सत्ता के तीन अंगों में से किसी के द्वारा अवरोध डाला गया तो हम संपूर्ण हिंदू जनता को धर्मादेश जारी करते हैं कि जबतक मंदिर निर्माण नहीं हो जाता, तबतक हर हिंदू का यह कर्तव्य होगा कि वह गिरफ्तारी देनी हो तो गिरफ्तारी दें। यह आंदोलन तबतक चलेगा जबतक रामजन्मभूमि हिंदुओं को सौंप नहीं दी जाती और उस पर हम मंदिर का निर्माण नहीं कर लेते।

बेरोजगारी के आंकड़ें दबाकर बैठी मोदी सरकार, 2 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा।

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राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद मामले पर राजनीति तेज हो गई है। बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। वरिष्ट काग्रंस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा, “सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। रिपोर्ट और इसे तैयार करने वाले आयोग का ताल्लुक भारत की जनता से है, न कि किसी राजनीतिक दल से। इसका कोई मतलब नहीं है कि सरकार इस रिपोर्ट को सिर्फ इसलिए जारी नहीं करे कि इसके तथ्य उसके मुताबिक नहीं है।’’

मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए पटेल ने कहा कि सांख्यिकी आयोग के सदस्यों के इस्तीफे से एक और संस्थान निष्क्रिय हो गया है। मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “सांख्यिकी आयोग उन प्रतिष्ठित संस्थानों की कतार में शामिल हो गया है जिनको प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने बर्बाद किया है। इनमें आरबीआई, सीबीआई, सीवीसी, सीबीडीटी, ईडी और आयकर पहले से हैं।’’

सिंघवी ने आगे कहा कि आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोग इस सरकार के दबाव में नहीं झुक सकते और न ही डेटा के साथ छेड़छाड़ का प्रयास कर सकते हैं। परंतु झुकने वाले नौकरशाहों का इस्तेमाल बदले की राजनीति के लिए हो सकता है। इनको आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोगों से सीखना चाहिए।

गौरतलब है कि सांख्यिकी आयोग के दो स्वतंत्र सदस्यों पी सी मोहनन और जे वी मीनाक्षी ने सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने के चलते इस्तीफा दे दिया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मोहनन आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे।

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मोदी सरकार के खिलाफ बिगुल फूकेंगे अन्ना हजारे

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2014 में लोकपाल के मुद्दे पर अनशन कर कांग्रेस की सरकार गिरने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर अनशन पर बैठ रहे है। इस बार यह अनशन मोदी सरकार के खिलाफ है लेकिन मुद्दे फिर वही है, लोकपाल। मोदी सरकार पर लोकपाल के मुद्दे पर हमला बोलते हुए अन्ना ने बुधवार को सुबह 10 बजे अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठने का ऐलान किया है।

मीडिया से बात करते हुए अन्ना ने कहा कि लोकपाल कानून बनकर 5 साल हो गया और नरेंद्र मोदी सरकार 5 साल बाद भी बार-बार बहानेबाजी करती है।

मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के दिल में अगर यह मुद्दा अहम होता तो क्या 5 साल लगना जरुरी था?

इससे पहले अन्ना ने कहा था कि उनका यह अनशन समाज और देश की भलाई के लिए होगा। अन्ना हजारे ने कहा कि उनका यह अनशन किसी व्यक्ति, पक्ष, पार्टी के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज और देश की भलाई के लिए वह आंदोलन करतेेे आए हैं। उसी प्रकार यह अनशन भी उनके इसी आंदोलन का हिस्सा है।

पीएम मोदी पर भारी पड़ा उन्हीं का वफादार, लोकसभा में सवाल कर सभी को चौकाया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही कितने दावे कर लें कि देश में रोजगार के क्षेत्र में कई गुना वृद्धि हुई है लेकिन उन्ही की पार्टी के एक सासंद ने एक सवाल खड़ा कर मोदी सरकार समेत सभी को चौंका दिया है। दरअसल भाजपा सांसद ने सोमवार को रोजगार के आंकड़ों को लेकर अपनी ही सरकार से सबूत मांगे लिये। यही नहीं नेता जी ने तो कुछ ऐसा कह दिया जिससे प्रधानमंत्री मोदी समेत पार्टी के तमाम आला नेताओं की नींद उड़ गई। भाजपा सांसद ने कहा कि मंत्री जी कहते तो हैं सदन में लेकिन असलियत में होता नहीं है।
सोमवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सांसद हरिनारायण राजभर ने श्रम और उद्योग पर वैश्विक मंदी के प्रभाव को लेकर कई सवाल दागे। यूपी के घोसी से बीजेपी सांसद राजभर ने आगे कहा कि श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय पिछले कई सालों में रोजगार सृजित करने का जो दावा पेश कर रहे हैं वो जमीनी स्तर पर बिलकुल भी सच नहीं है।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि अगर वाकई ऐसा हुआ है तो मंत्री जी इसका प्रूफ दें। उनका कहना था कि असलियत में रोजगार के अवसर सृजित ही नहीं हुए हैं। राजभर के इस सवाल से सदन में बैठे सत्ता पक्ष के कई मंत्री असहज स्थिति में दिखे वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने मेंजे थपथपा कर भाजपा सांसद की बात का पुरजोर समर्थन कर मोदी सरकार की आलोचना की। हांलाकि श्रम मंत्री ने राजभर की इस टिप्पणी का कोई जवाब नहीं दिया।

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