Thursday, June 24, 2021
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दी श्रद्धाजंलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की जयंती पर ट्वीट करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा की “हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि”।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

मोदी सरकार के बजट को चुनावी स्टंट बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया बड़ा हमला

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मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष बजट को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमले बोल रहा है। वहीं इसी बाच अब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट को चुनावी स्टेट बताते हुए हमला बोला है।

केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि यह बजट मई में होने वाले लोकसभा चुनावों पर प्रभाव डालेगा। इस बजट में सरकार ने मध्यम वर्ग, किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। यह एक चुनावी बजट है।

वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बजट को ‘अंतिम जुमला’ करार देते हुए कहा था कि कि इससे दिल्ली को निराशा ही हाथ लगी है। केंद्रीय करों में हमारा हिस्सा 325 करोड़ रुपये पर ही अटका रहा और स्थानीय निकायों के लिए कुछ भी आवंटित नहीं किया गया।

बता दें कि 5 लाख तक की आय वालों के लिए टैक्स में छूट की घोषणा करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह अंतरिम बजट नहीं है, बल्कि यह बजट देश के विकास का वाहक बनेगा। सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे 15 हजार तक की आय वाले कामगारों के लिए साठ साल की उम्र के बाद पेंशन की घोषणा भी की है।

दि ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर सियासत तेज, इन मशहूर हस्तियों ने तोड़ी चुप्पी

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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब पर आधारित अनुपम खेर की फिल्म द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर सियासत खत्म होने का नाम नही ले रही है। फिल्म के ट्रेलर रिलीज होते ही इस विवाद की शुरुआत हुई जब भारतीय जनता पार्टी ने इसे अपने ऑफिशियल ट्रिटर हैंडल से शेयर किया। वहीं विवाद बढ़ते ही भाजपा-कांग्रेस के साथ कई मशहूर हस्तियां अब इस विवाद में कूद पड़ी है। फिल्म 11 जनवरी को रिलीज होनी है और लगता है कि उसके पहले सह विवाद थमने वाला नही है। कांग्रेस इस फिल्म को भाजपा की साजिश बता रही है तो भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि यह फिल्म डॅा मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब पर आधारित है, जब इस किताब पर उस समय विवाद नही हुआ तो अब क्यों?

आईए देखते है फिल्म पर अभी तक आई प्रमुख बयान

सुरजीत सिंह कोहली( मनमोहन सिंह के भाई )-

दुनिया मनमोहन सिंह की क्षमता को जानती है और कांग्रेस सरकार में उनके 10 साल के कार्यकाल में उनके काम को देखा है। मैं हैरान हूं कि कैसे कोई उनकी छवि खराब करने के बारे में सोच सकता है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह विपक्ष का प्लान है कि लोकसभा चुनाव से पहले डॉक्टर सिंह को खराब नजरिए से पेश किया जाए। बीजेपी ने पीएम रहते हुए भी उनके स्वतंत्र अधिकारों को लेकर छवि खराब करने की कोशिश की थी। जब उन्हें कांग्रेस के खिलाफ कुछ नहीं मिला तो उन्होंने 2019 में सत्ता में आने के बाद डॉ साहब की छवि खराब करने की कोशिश की।

दलजीत सिंह कोहली(भाजपा में शामिल मनमोहन सिंह के भाई)-

देश के लिए उनकी सत्यनिष्ठा या उनके काम को लेकर कोई सवाल या शक किया ही नहीं जा सकता।

एच डी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री)-

‘मैं नहीं जानता किसने इसकी इजाजत दी और क्यों? सच कहूं तो मैं इस तथाकथित ‘एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के बारे में नहीं जानता, बल्कि मुझे लगता है कि मैं भी ’एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ हूं’

अनुपम खेर (अभिनेता)-

केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड फिल्म को देख चुकी है और अब रिलीज से पहले किसी को देखने का हक नहीं, फिर भी मैं कहता हूं कि अगर डॉ. मनमोहन सिंह जी फिल्म को रिलीज होने से पहले देखना चाहेंगे तो हम सिर्फ उनके लिए ही इस बात पर तैयार हो सकते हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह(पंजाब के मुख्यमंत्री)-

भाजपा ने जिस प्रकार फिल्म के ट्रेलर का उपयोग अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कर रही है और इसे भाजपा के नेता प्रचारित कर रहे हैं, इससे उनकी निराशा साफ झलकती है। भाजपा ने जनसमर्थन खो दिया है। यही कारण है कि वह अब इस तरह की सस्ती राजनीति पर उतर आई है। डॉ. सिंह के कटु आलोचक भी कभी ऐसी गलती नहीं कर सकते थे, जैसे भाजपा कर रही है।

अहमद पटेल( वरिष्ट कांग्रेस नेता)-

यह तिकड़मबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है। भाजपा के पास बहुत पैसा है और वह इस बात में व्यस्त है कि इसका दुरुपयोग कैसे किया जाए। वह जो करना चाहते हैं उन्हें करने दीजिए। ऐसी फिल्में आती-जाती रहती हैं, हम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।’

Madhya Pradesh won’t ban ‘The Accidental Prime Minister’

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Congress-led Madhya Pradesh won’t ban the movie ‘The Accidental Prime Minister’. In this movie, Anupam Kher plays former Prime Minister Dr. Manmohan Singh’s role. The film has sparked a row for the distortion of facts.

The move by the MP government also clears the party’s stand on the movie. Earlier, Maharashtra Youth Congress president Satyajeet Tambe Patil has written to the producers asking for a special screening before the movie’s launch on January 11.

Mr Patil says from the trailer it appears that “facts have been played with and presented in incorrect manner with regards to the ex-prime minister Manmohan Singh, UPA chairperson Sonia Gandhi and Congress party to malign the image of the party.”

The trailer has been given top rating by the ruling BJP, which tweeted the clip along with its glowing review.

“Riveting tale of how a family held the country to ransom for 10 long years. Was Dr Singh just a regent who was holding on to the PM’s chair till the time heir was ready? Watch the official trailer of The Accidental Prime Minister, based on an insider’s account, releasing on 11 Jan!” the BJP tweeted from its official account.

Former prime minister Manmohan Singh today did not comment when asked by reporters for a reaction to the trailer of “The Accidental Prime Minister”, the biopic based on the eponymous book by his former media advisor Sanjaya Baru.
Manmohan Singh was accosted by reporters as he arrived at the Congress office for the party’s 134th anniversary celebration.

He paused before the mics, but moved away without a word as soon as the question was asked: “What do you think about the film made about you?”

Taking advantage of the situation, former Jammu and Kashmir Chief Minister, Omar Abdullah, said that he is waiting for the film ‘The Insensitive Prime Mime Minister’.

Abdullah’s comment were aimed at the government. The Opposition has often targetted the government, accusing it of being intolerant and insensitive’.

Though a section of Congress party wants a special screening of the movie but they want to portray that they are ‘free to criticize’. Thus, they want to show a contrasting perspective of the current government which is becoming notorious for being ‘intolerant’. The image rectification of the Congress party has been started from farmers’ loan waiver scheme and shall be continued till 2019 elections.

जब इंदिरा गांधी ने कहा- मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं, मेरे खून का एक-एक कतरा देश को मजबूत करेगा

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आज ही के दिन 31 अक्टूबर 1984 को आयरन लेडी कही जाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उन्हीं के अंगरक्षकों द्वारा गोली मार ह्त्या कर दी गई थी. कहा जाता है कि इंदिरा गांधी को अपने मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था. यही कारण था कि 30 अक्टूबर की रात इंदिरा गांधी ठीक से सो भी नहीं पाई थी.

30 अक्टूबर का वो भाषण

भुवनेश्वर के परेड ग्राउंड में 30 अक्टूबर को एक चुनावी सभा के दौरान इंदिरा गांधी ने अपने सूचना सलाहकार एच वाई शारदा प्रसाद का लिखा हुआ भाषण पढ़ते हुए बीच में छोड़कर दूसरी बातें बोलना शुरू कर दी थीं. उस भाषण में आयरन लेडी ने कहा, ‘मैं आज यहां हूं. कल शायद यहां न रहूं. मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं. देश की चिंता करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है. मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा.’

इंदिरा गांधी को आखिरी रात नींद नहीं आई

इंदिरा गांधी की बहू सोनिया गांधी के मुताबिक 30 अक्टूबर 1984 की रात इंदिरा जी को नींद नहीं आई थी. जब सोनिया गांधी अपने दमे की दवाई लेने के लिए रात को उठी तो इंदिरा गांधी जाग रही थीं. उन्होंने सोनिया की दवाई खोजने में सहायता भी की और कहा कि अगर रात में कोई दिक्कत हो तो आवाज देना.

राहुल, सोनिया और मनमोहन सिंह ने दी श्रद्धांजलि

इंदिरा गांधी के पुण्यतिथि पर राहुल गांधी,सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह समेत कई कोंग्रेसी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.

भारत के पहले और विश्व के 138 वें अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से इंदिरा गांधी की बातचीत

40 दिन 40 सवाल: पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर कमलनाथ ने पूछा दसवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से दसवां सवाल पूछा। अपने दसवें सवाल में कमल नाथ ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर किया।

सवाल नंबर दस

मोदी जी ने निकाला पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला,
मामा क्यों डाला मुँह पर ताला ? शर्म करो शिवराज ।
मनमोहन जी के समय ‘धरना-धर’ और उपवास का स्वाँग,
अब क्यों नही उठाते बासमती की माँग ?

1) कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था। मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्रायः कर दिया । इस मंत्रालय के 2014-15 के 7000 करोड़(BE) के बजट को 2015-16 में 94 करोड़(BE) कर दिया गया ।

2) इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे।
पहला- देश के पिछड़े जिलों का विकास BRGF) और दूसरा पंचायतों को सशक्त करने के लिये राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान (RGPSA)। मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया।

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3) कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि ( BRGF) कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था । जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर 2995.59 करोड़ रु खर्च किए ।
4)अलीराजपुर ,अनूपपुर ,अशोकनगर,बालाघाट ,बड़वानी
,बैतूल,बुरहानपुर ,झाबुआ ,मंडला, टीकमगढ,डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का अनुदान बंद ।

5) मोदी जी ने आने के बाद 2015 -16 से मध्यप्रदेश को यह(BRGF) अनुदान बंद कर दिया ।आखरी साल 2014 – 15 के लिए मोदी जी ने 647.20 करोड़ रु प्रावधानित किए ,मगर जारी किए सिर्फ़ 221.22 करोड़ और मामा जी ने ख़र्च किए मात्र 197.52 करोड़ ।

6) इसी प्रकार मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया । मोदी जी ने आखरी वर्ष 2015-16 में इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़ ।

7)शिवराज जी फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान,जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) ने स्वीकारी है,को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है।ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है

8) अब क्या हुआ मामा जी , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे ?

9) मध्यप्रदेश में 2 लाख़ हेक्टेयर के 13 जिलों,विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद ,नरसिंहपुर ,जबलपुर, गुना ,शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी जी ने कहा कि वे अपने चावल बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे ।

10)मामा जी,मप्र के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वाँग भी नही करोगे?अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?
सोर्स -केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण
धरना-धर मामा का स्वाँग

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

राहुल गांधी के गुरूद्वारे जाने से क्या ‘सिख दंगे’ का दाग धुल जाएगा ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिन के लिए मध्य प्रदेश दौरे पर हैं जहा पर उन्होंने मंदिर, मस्जिद पर मत्था टेकने के बाद ग्वालियर के एक गुरुद्वारे पहुंचे। ये संयोग ही है कि जब भी राहुल गांधी गुरूद्वारे जाते हैं तो सिख दंगे का दाग उनका पीछा करता ही रहता है। यद्यपि राहुल गांधी नें इससे पीछा छुड़ाने के लिए सिख दंगो पर कई बार अपनी सफाई दे चुके हैं।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे सिख दंगे

31 अक्टूबर 1984 को तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही दो सुरक्षा गार्डों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। ह्त्या के 24 घंटे के भीतर पुरे भारत का इतिहास ही बदला गया। जगह-जगह पर हिंसा की ख़बरें आने लगी। हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा दिल्ली के आसपास इलाकों में करीब 3000 लोग मारे गए थे।

यह दाग बहुत ही गहरे हैं

यद्यपि राहुल गांधी इस बात को लेकर कितना भी इंकार कर दें लेकिन इस सच्चाई को नाकारा नहीं जा सकता। सिख दंगे के दाग से जगदीश टाइटलर और सज्जान कुमार जैसे कितने कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक कैरियर ही समाप्त हो गया। यही वजह है कि 21 साल बाद प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने संसद में माफ़ी मांगते हुए कहा था कि, ‘जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है।’

कमलनाथ पर भी आरोप

वर्तमान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर भी सिख दंगे के आरोप लगते रहते हैं। उनपर आरोप है कि दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में कमलनाथ यदि वहां रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की। वहां पर उनकी मौजदूगी का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में भी है।

दंगों की तपिश आज भी जहन में

सिख दंगे हुए लगभग तीन दशक से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन आज भी कई ऐसे सिख परिवार इस दर्दनाक घटना से उबर नहीं पाए हैं। आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो दंगे का भयावह तस्वीर याद कर जिसमें अपनों को मरते हुए देखा था वो भुला नहीं पाते। इन दंगों में हजारों लोगों की जानें गई थी और न जाने कितने घरों को जला दिया गया था।

प्रधानमंत्री जी से पूछिए तो कि वे भारत को विश्व गुरु बना रहे हैं या बेवकूफ बना रहे हैं ?

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स्वीस नेशनल बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि 2017 में उसके यहां जमा भारतीयों का पैसा 50 प्रतिशत बढ़ गया है। नोटबंदी के एक साल बाद यह कमाल हुआ है। ज़रूरी नहीं कि स्विस बैंक में रखा हर पैसा काला ही हो लेकिन काला धन नहीं होगा, यह क्लिन चिट तो मोदी सरकार ही दे सकती है। मोदी सरकार को यह समझदारी की बात तब नहीं सूझी जब ख़ुद नरेंद्र मोदी अपने ट्विटर हैंडल से ट्विट किया करते थे कि स्विस बैंक में जमा काला धन को वापस लाने के लिए वोट करें। ऑनलाइन वोटिंग की बात करते थे।

सरकार को बताना चाहिए कि यह किसका और कैसा पैसा है? काला धन नहीं तो क्या लीगल तरीके से भी भारतीय अमीर अपना पैसा अब भारतीय बैंकों में नहीं रख रहे हैं? क्या उनका भरोसा कमज़ोर हो रहा है? 2015 में सरकार ने लोकसभा में एक सख्त कानून पास किया था। जिसके तहत बिना जानकारी के बाहर पैसा रखना मुश्किल बताया गया था। जुर्माना के साथ साथ 6 महीने से लेकर 7 साल के जेल की सज़ा का प्रावधान था। वित्त मंत्री को रिपोर्ट देना चाहिए कि इस कानून के बनने के बाद क्या प्रगति आई या फिर इस कानून को कागज़ पर बोझ बढ़ाने के लिए बनाया गया था।

इस वक्त दो दो वित्त मंत्री हैं। दोनों में से किसी को भारतीय रुपये के लुढ़कने पर लिखना चाहिए और बताना चाहिए कि 2013 में संसद में जो उन्होंने भाषण दिया था, उससे अलग क्यों बात कर रहे हैं और उनका जवाब मनमोहन सिंह के जवाब से क्यों अलग है। एक डॉलर की कीमत 69 रुपये पार कर गई और इसके 71 रुपये तक जाने की बात हो रही है। जबकि मोदी के आने से 40 रुपये तक ले आने का ख़्वाब दिखाया जा रहा था।

ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध को लेकर छप रही ख़बरों पर नज़र रखिए। क्या भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र राह पर चलेगा या अमरीका जिधर हांकेगा उधर जाएगा। टाइम्स आफ इंडिया की हेडिंग है कि निक्की हेले सख़्त ज़बान में बोल रही हैं कि ईरान से आयात बंद करना पड़ेगा। निक्की हेले संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत हैं और भारत की यात्रा पर हैं।

अमरीका चाहता है कि भारत ईरान से तेल का आयात शून्य पर लाए। ओबामा के कार्यकाल में जब ईरान पर प्रतिबंध लगा था तब भारत छह महीने के भीतर 20 प्रतिशत आयात कम कर रहा था मगर अब ट्रंप चाहते हैं कि एक ही बार में पूरा बंद कर दिया जाए।

इंडियन एक्सप्रेस में तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान छपा है। आप इस बयान पर ग़ौर कीजिए जिसका मैंने एक्सप्रेस से लेकर अनुवाद किया है। ऐसा लगता है कि तेल मंत्री ही विदेश मंत्री हैं और इन्होंने ट्रंप को दो टुक जवाब दे दिया है। अगर ऐसा है तो प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री को औपचारिक रूप दे देना चाहिए ताकि जनता को पता चले कि ईरान प्रतिबंध को लेकर भारत की क्या नीति है।

“पिछले दो साल में भारत की स्थिति इतनी मज़बूत हो चुकी है कि कोई भी तेल उत्पादक देश हमारी ज़रूरतों और उम्मीदों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। मेरे लिए मेरा हित ही सर्वोपरि है और मैं जहां से चाहूंगा वहीं से भू-राजनीतिक स्थिति और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से कच्चा तेल ख़रीदूंगा। हम जहां से चाहेंगे वहां से कच्चा तेल ख़रीदेंगे। ”

ये बयान है धर्मेंद्र बयान का। आपको हंसी आनी चाहिए। अगर दो साल में भारत की स्थिति मज़बूत हो गई है तो भारत साफ साफ क्यों नहीं कह देता है।

जबकि इसी एक्सप्रेस में इसी बयान के बगल में एक कालम की खबर लगी है कि तेल रिफाइनरियों को कहा गया है कि वे विकल्प की तलाश शुरू कर दें। उन्हें ये बात तेल मंत्रालय ने ही कही है जिसके मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं। सूत्रों के हवाले से इस ख़बर में लिखा है कि तैयारी शुरू कर दें क्योंकि हो सकता है कि तेल का आयात बहुत कम किया जाए या फिर एकदम बंद कर दिया जाए।

इसके बरक्स आप मंत्री का बयान देखिए। साफ साफ कहना चाहिए कि जो अमरीका कहेगा हम वही करेंगे और हम वही करते रहे हैं। इसमें 56 ईंच की कोई बात ही नहीं है। आप रुपये की कीमत पर पोलिटिक्स कर लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, बना लिया और बना भी लेंगे लेकिन उसका गिरना थोड़े न रोक सकते हैं। वैसे ही ट्रंप को सीधे सीधे मना नहीं कर सकते। ज़रूर भारत ने अमरीका से आयात की जा रही चीज़ों पर शुल्क बढ़ाया है मगर इस सूची में वो मोटरसाइकिल नहीं है जिस पर आयात शुल्क घटाने की सूचना खुद प्रधानमंत्री ने ट्रंप को दी थी। अब आप पोलिटिक्स समझ पा रहे हैं, प्रोपेगैंडा देख पा रहे हैं?

बिजनेस स्टैंडर्ड के पेज छह पर निधि वर्मा की ख़बर छपी है कि भारत ईरान से तेल आयात को शून्य करने के लिए तैयार हो गया है। आप ही बताइये क्या इतनी बड़ी ख़बर भीतर के पेज पर होनी चाहिए थी? इस खबर में लिखा है कि तेल मंत्रालय ने रिफाइनरियों को कहा है कि वैकल्पिक इंतज़ाम शुरू कर दें। यह पहला संकेत है कि भारत सरकार अमरीका की घुड़की पर हरकत करने लगी है।

भारत ने कह चुका है कि वह किसी देश की तरफ से इकतरफा प्रतिबंध को मान्यता नहीं देता है। वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध का ही अनुसरण करता है। लेकिन जब यह कहा है कि तो फिर इस बात को तब क्यों नहीं दोहराया जा रहा है जब निक्की हेली दिल्ली आकर साफ साफ कह रही हैं कि ईरान से आयात को शून्य करना पड़ेगा।

हिन्दी अखबारों में ये सब जानकारी नहीं मिलेगी। मेहनत से आप तक लाता हूं ताकि आप इन्हें पढ़ते हुए देश दुनिया को समझ सकें। ज़रूरी नहीं कि आप भक्त से नो भक्त बन जाएं मगर जान कर भक्त बने रहना अच्छा है, कम से कम अफसोस तो नहीं होगा कि धोखा खा गए।

अब देखिए, मूल सवालों पर चर्चा न हो इसलिए सरकार या भाजपा का कोई न कोई नेता इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ लाता है। वो भी ग़लत सलत। तू तू मैं मैं की पोलिटिक्स चलाने के लिए। हर दिन आप चैनल खोल कर खुद से देख लें, पता चलेगा कि देश कहां जा रहा है। जिन नेताओं के पास जनता की समस्या पढ़ने और निराकरण का वक्त नहीं है, वो अचानक ऐसे बयान दे रहे हैं जैसे सुबह सुबह उठते ही इतिहास की एक किताब ख़त्म कर लेते हैं। उसमें भी गलत बोल देते हैं।

अब देखिए प्रधानमंत्री मगहर गए। कबीर की जयंती मनाने। वहां भाषण क्या दिया। कितना कबीर पर दिया और कितना मायावती अखिलेश पर दिया, इससे आपको पता चलेगा कि उनके लिए कबीर का क्या मतलब है। जब खुद उनकी पार्टी मज़ार मंदिर जाने की राहुल गांधी की राजनीति की आलोचना कर चुकी है तो इतनी जल्दी तो नहीं जाना चाहिए था। जब गए तो ग़लत सलत तो नहीं बोलना था।

मगहर में प्रधानमंत्री ने कहा कि ” ऐसा कहते हैं कि यहीं पर संत कबीर, गुरु नानक देव जी और गुरु गोरखनाथ एक साथ बैठकर आध्यात्मिक चर्चा करते थे” जबकि तीनों अलग अलग सदी में पैदा हुए। कर्नाटक में इसी तरह भगत सिंह को लेकर झूठ बोल आए कि कोई उनसे मिलने नहीं गया।

आप सोचिए, जब प्रधानमंत्री इतना काम करते हैं, तो उनके पास हर दूसरे दिन भाषण देने का वक्त कहां से आता है। आप उनके काम, यात्राओं और भाषण और भाषणों में ग़लत सलत तथ्यों को ट्रैक कीजिए, आपको दुख होगा कि जिस नेता को जनता इतना प्यार करती है, वो नेता इतना झूठ क्यों बोलता है। क्या मजबूरी है, क्या काम वाकई कुछ नहीं हुआ है।

आज नहीं, कल नहीं, साठ साल बाद ही सही, पूछेंगे तो सही। कबीर, नानक और गोरखनाथ को लेकर ग़लत बोलने की क्या ज़रूरत है। क्या ग़लत और झूठ बोलने से ही जनता बेवकूफ बनती है? क्या भारत को विश्व गुरु बनाने की बात करने वाले मोदी भारत को बेवकूफ बनाना चाहते हैं?

Why Is “Prime Minister’ Speechless Now?

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Silence is the most powerful scream. Silence is the language of God. Silence is the source of strength and the fortress for the wise. It is the best reply to a fool and sometimes, silence silences the louds. Unfortunately, our Prime Minister’s silence has none of these traits. The silence on his comments on his predecessor, Dr. Manmohan Singh, tells a different story about his nature. It’s not the first time and it won’t be his last silence on the things that would jeopardize his ‘image’ in front of his ‘followers’. He was quiet when hundreds of people died due to demonetization. He was silent when Doklam standoff did not pay off well. He was silent when economy was on the rocks. He was quiet when children died in UP. He was also quiet on Gauri Lankesh’s murder. His silence on beef lynching and the people spreading the saffron terror in the country. He used to shrew away from the responsibilities of his position and hide behind his ministers and party. Ministers worsen the situation. The fresh example is Hegde on secularism.

Image Source: Google

In contrast with his silence on these matters, he was the first person who took the credit for the Surgical Strike. When economy rose a little, he was the first person to bow in order to receive the medal. He was highly vocal in recently conducted Gujarat elections. He mocked his opponents. He polarized the vote bank directly. He even termed former Prime Minister as the Pakistani agent and would insinuate to assassinate him.

Image Source: Google

Silence was always like an offensive veil to Manmohan Singh. He used to be silent and hardly attended any rallies. But, he was highly vocal in press conferences and answer the questions well without spitting on his opponents. His silence was his shield from the mediocrity surrounding him. It was note-worthy that he spoke through his actions more. The Liberalization policy he framed in 1992 lifted Indian economy from the gallows of dark ages and eventually became the foundation for the future development. He was the mastermind when India dodged the recession bullet in 2007-08 when Greece, Spain became bankrupt. It was his tenure when crude oil touched $140/barrel and still we used to get petrol at Rs. 70/litre. The point is that the man who carried out his responsibilities with such class and perfection, the man who hardly spit any venom on his opponents, the man who endorsed the policy of true liberal and progressive politics, should deserve some respect from the nation. And on the other hand, the leader of the nation himself making such derogatory remarks on him and ignoring the issue, thinking that it would pass-off with time.
Now the consequences of Modi’s silence will be that his ‘bhakts’ will take his remarks as the truth, which they always do, and will tarnish the image of him further on social media and other platforms. This would once again divert the minds of people from the ultimate goal of development and upliftment. Congress has already been protesting against PMs silence in the Parliament and are not in any mood to stop their disruption of Parliament sessions.
BJP at last apologized for the debacle on the former PM in Rajya Sabha. Apology by Arun Jaitely was well received by Ghulam Nabi Azad and promised to break their protest. Mind that PM Modi is still silent. The shrewd and hypocritical nature of Mr. Modi won’t be tolerated in the long run by the public.

कांग्रेस की बड़ी जीत, “2जी घोटाले” में कोर्ट ने दी क्लीन चिट !

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21 दिसंबर के दिन कांग्रेस के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। अदालत ने 2जी घोटाले में कुल 17 लोगों को बरी कर दिया। जिसमे पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और कनिमोड़ी शामिल है। अदालत द्वारा फैसला सुनाते ही पूरा कोर्टरूम तालियों से गूंज उठा। कोर्ट द्वारा सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी किया गया।

आरोप साबित करने में नाकाम रही सीबीआई: कोर्ट
फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि सभी आरोपियों पर सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही है इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जा रहा है। अदालत ने माना कि यूपीए सरकार पर बिना किसी आधार के बड़े पैमाने पर आरोप लगाए गए है।

नही हुआ कोई घोटाला, विनोद राय मांगी माफी: कांग्रेस
फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते है। यूपीए सरकार पर लगाए गए सभी आरोप निराधार साबित हुए है। इसके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि मेरी बात आज सच साबित हुई। न कोई भ्रष्टाचार हुआ और ना ही कोई घोटाला हुआ है। अगर कोई घोटाला है तो वह झूठ का घोटाला है। कोर्ट का फैसला आने के बाद विनोद राय को सामने आना चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए।

हमारे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया था: डीएमके
कोर्ट का फैसला आने के बाद खुशी जाहिर करते हुए कनिमोड़ी ने कहा कि ” मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद करती हूं जो इस मुश्किल भारी घड़ी में हमारे साथ थे। हमारे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया था और आज यह बात साबित हो गयी। डीएमके नेता आरएस भर्ती ने कहा कि पिछले 2 विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया गया था, जिसका हमे नुकसान उठाना पड़ा था लेकिन अब यह गलत साबित हो गया है।