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मध्यप्रदेश सरकार ने आईएएस अफसरों के तबादले किए, सलीना सिंह को उच्च शिक्षा विभाग दिया

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राज्‍य शासन ने गुरुवार को 11 आईएएस अफसरों के तबादले कर दिए। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। जबकि एक आईएएस अफसर को अतिरिक्त प्रभार दिया है, वहीं दो अफसरों को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।

अपर मुख्‍य सचिव सलीना सिंह को उच्‍च शिक्षा विभाग, प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल को श्रम एवं तकनीकी शिक्षा, एसएन मिश्रा को अनुसूचित जाति कल्‍याण विभाग का प्रमुख सचिव, संजय शुक्‍ला को पीएचई एवं जल निगम का प्रमुख सचिव बनाया है। हरिरंजन राव को प्रमुख सचिव पर्यटन एवं सह-आयुक्त एवं प्रबंध संचालक पर्यटन विकास बोर्ड बनाया गया है। दीपाली रस्‍तोगी को प्रमुख सचिव एवं आयुक्‍त आदिवासी कल्‍याण, संजय दुबे को प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं आवास की जिम्मेदारी दी गई है।

नर्मदांचल संभाग के संभागायुक्त उमाकांत उमराव को ग्रामीण सड़क विकास का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। ये प्रभार अब तक अपर मुख्य सचिव गौरी सिंह के पास था। उमाकांत उमराव के स्थान पर रवीन्द्र मिश्रा को नर्मदांचल संभाग का संभागायुक्त बनाया गया है।

सलीना सिंह को उच्च शिक्षा विभाग देने के बाद ग्रामीण विकास और कुटीर के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई को इन विभागों के अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त कर दिया गया है। संजय गोयल को वर्तमान कार्य के साथ एमडी पावर मैनेजमेंट कंपनी, जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया है।

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गौरक्षा के नाम पर मॉबलीचिंग या हिंसा बर्दाश्‍त नहीं : कमलनाथ

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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमारी सरकार गौरक्षा करने में सक्षम। हम ना गौमाता को सड़क पर तड़पने देंगे ना उस पर किसी को अत्याचार करने देंगे। हमने गौवंश की रक्षा के लिये 1000 गौशालाएँ प्रदेश में खोलने का निर्णय लिया है। हमारी सरकार ने हाल ही में गौवध करने वालों पर भी कड़ी कार्यवाही की है। लेकिन हमारी सरकार में गौरक्षा के नाम पर वसूली व गुंडागर्दी का खेल नहीं चलेगा। नाथ ने कहा कि गौरक्षा व गौमाता के नाम पर मॉबलीचिंग या किसी भी प्रकार की हिंसा व गुंडागर्दी की घटनाएँ प्रदेश में बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व गुना में गोरक्षा के नाम पर तथाकथित गोरक्षकों की गुंडागर्दी व तोड़फोड़ की घटना सामने आयी है। मुख्यमंत्री ने इस घटना को गम्भीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन से ली जानकारी। पुलिस ने ख़ुद बैल व बछड़ों से भरे एक ट्रक को पकड़ा। उस पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्यवाही की। कुछ युवक ख़ुद को गौरक्षक बताते हुए पहुँचे। माहौल ख़राब करने की कोशिश की।उन्होंने हंगामा किया, तोड़फोड़ व गुंडागर्दी की। क़ानून हाथ में लेने की कोशिश की। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी भी पूर्व में ऐसे लोगों पर कड़ी कार्यवाही का कह चुके है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि यदि किसी के पास गौ तस्करी या गौवध की सूचना है तो वह ज़िम्मेदार प्रशासन के अधिकारी को जानकारी दे।हमारी सरकार ऐसे लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेगी। किसी को बख्शेगी नहीं।लेकिन क़ानून हाथ में लेने की किसी को इजाज़त नहीं देगी।गौरक्षा के नाम पर कुछ असामाजिक तत्वों का वर्षों से चल रहा वसूली व गुंडागर्दी का खेल अब नहीं चलेगा। पिछले 15 वर्षों में गौवंश की रक्षा के लिये क्या क़दम उठाये गये, यह सभी जानते है। उन्होंने प्रदेश के डीजीपी को कहा है कि जो गौ तस्करी व गौ अत्याचार रोकने में जो क़ानून सम्मत तरीक़े से मदद करते है,जानकारी देते है,ऐसे लोगों को छोड़कर गौ रक्षा के नाम पर वसूली व गुंडागर्दी का खेल खेलने वालों को क़तई बख़्शा नहीं जाए। इस आड़ में माहौल ख़राब करने की कोशिश करने वालों को बख़्शा नहीं जावे। ऐसे लोगों की ज़िलावार सूची बनायी जाये।

प्रत्येक पात्र किसान का ऋण माफ होः कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने जय किसान फसल ऋण माफी योजना में पात्र प्रत्येक किसान का ऋण माफ हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकाला गया है, वे बगैर किसी भय के सामने आयें, सरकार उन्हें न्याय दिलायेगी और दोषियों को दंडित करेगी। श्री नाथ आज मंत्रालय में फसल ऋण माफी योजना की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में सहकारिता एवं सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री सचिन यादव, मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहन्ती एवं वित्त, कृषि और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि फसल ऋण माफी योजना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ हर उस किसान को मिलना चाहिए, जो योजना की परिधि में शामिल हैं। उन्होंने किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकालने के प्रकरणों पर नाराजी व्यक्त की। उन्होंने किसानों से अपील की कि अगर उनके नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकाला गया है तो वे निर्भय होकर बतायें, सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिये कि फर्जी ऋण प्रकरणों के मामलों को गंभीरता से लें और इसकी सूक्ष्मता से जाँच करवायें। जो भी दोषी पाया जाये उसके खिलाफ सख्त कार्रावाई की जाये।

बैठक में बताया गया कि ऋण माफी योजना में 50 लाख 61 हजार आवेदन भरे गए हैं। इसमें से 45 लाख 9 हजार आवेदन ऑनलाइन किये गये हैं। ऋण माफी की यह प्रक्रिया 22 फरवरी तक पूरी हो जायेगी और किसानों के खाते में राशि पहुँचना शुरू हो जायेगी। योजना में लघु एव सीमांत किसानों के ऋण प्राथमिकता में माफ किये जायेंगे।

कर्जमाफी के लिए 50 लाख से अधिक लोगों ने किया आवेदन

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

प्रदेश में जय किसान फसल ऋण माफी योजना में 15 जनवरी से पाँच फरवरी 2019 तक कुल 50 लाख 40 हजार 861 पात्र किसानों द्वारा आवेदन जमा किये गए हैं। जिनमें से 43 लाख 50 हजार आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किए जा चुके थे। वहीं बाकी आवेदन ऑनलाइन दर्ज करने का कार्य निरतंर जारी है।

आवेदन की अंतिम तिथि पाँच फरवरी तक हरे ऋण खाते के 29 लाख 61 हजार 84 में से 26 लाख 23 हजार 423 आवेदन, सफेद ऋण खाते के 26 लाख 628 में से 19 लाख 20 हजार 505 आवेदन तथा चार लाख 96 हजार 933 गुलाबी आवेदन, इस प्रकार 50 लाख 40 हजार 861 आवेदन प्राप्त हुए है। प्रदेश में कुल 55 लाख 61 हजार 712 ऋण खाते हैं। इनमें अपात्रता वाले किसान जैसे आयकरदाता/शासकीय सेवक, जन-प्रतिनिधि (विधायक, सांसद आदि) और जीएसटी पंजीयन वाले किसानों के फसल ऋण खाते भी सम्मिलित हैं। साथ ही जिन कृषकों के अलग-अलग ऋण खातों में 2 लाख रुपये ऋण से ज्यादा की ऋण राशि हैं, उनके द्वारा भी 2 लाख रुपये से ऊपर के अन्य ऋण खातों में आवेदन नहीं किये जाने के कारण कुल प्राप्त आवेदनों की संख्या 50 लाख 40 हजार 861 रही है।

यादव महासभा में बोले कमलनाथ, कृषि के प्रति नए नजरिये की जरूरत

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

सोमवार को समन्वय भवन में आयोजित यादव महासभा में शामिल हुए मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि राज्य सरकार का नजरिया एकदम साफ है। किसान और युवा कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश के विकास के लिये नए दृष्टिकोण के साथ कृषि क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये किसान की क्रय शक्ति को बढ़ाना होगा। किसान कर्ज माफी की 55 हजार करोड़ रूपये की योजना पहले से ही तैयार थी, जिस पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। आने वाले दिनों में 35 लाख किसानों की ऋण माफी की कार्रवाई पूरी हो जायेगी। यदि आम आदमी की जिन्दगी में परिवर्तन नहीं हो रहा है, तो आर्थिक और व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिये निवेश को बढ़ाना जरूरी है। मूलभूत सुविधाओं में किये गये निवेश से भी रोजगार के अनेक नये अवसर बनते हैं।

मुख्यमंत्री नाथ ने पूर्व उप मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुभाष यादव का स्मरण करते हुए समन्वय भवन का नामकरण स्व. यादव के नाम पर करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यादव समाज का गौरवपूर्ण इतिहास है। उन्होंने यादव समाज को सांस्कृतिक क्रियाकलापों के लिए भूमि आवंटन का आश्‍वासन भी दिया और यादव समाज का आव्हान किया कि भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के लिये कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की महानता का आधार उसकी संस्कृति तथा सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्य हैं। पूरी दुनिया भारत की विभिन्नताओं में एकता से प्रभावित है, सम्मान से हमारे देश की ओर देखती है। धर्म, भाषा, परम्पराओं, खान-पान और पहनावे में विभिन्नताओं वाला दुनिया का अकेला हमारा देश है। सोवियत संघ भी विभिन्नताओं वाला देश था, जो बिखर गया। हमारे देश की इस ताकत का आधार है भारतीय सामाजिक मूल्य और आध्यात्मिक सांस्कृतिक परम्पराएँ।

बता दें कि यादव महासभा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ ही कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हर्ष यादव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सचिन यादव, यादव महासभा के अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, दामोदर सिंह और वरिष्ठ सदस्य भगवान सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, महासभा के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।

कमलनाथ ने शुरू की नई योजना, अब शहरी युवाओं को भी मिलेगा निश्चित रोजगार

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मुख्यमंत्री कमल नाथ ने प्रदेश के शहरी युवा बेरोजगारों को उनकी इच्छा के अनुरूप क्षेत्र में रोजगार की गारंटी देते हुए युवा स्वाभिमान योजना लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने योजना की जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तो मनरेगा के अंतर्गत रोजगार के अवसर मिल जाते हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र के युवा ऐसे अवसरों से वंचित रह जाते हैं। अस्थाई रोजगार और कौशल विकास को जोड़कर युवा स्व स्वाभिमान को योजना को जन-हितैषी स्वरूप प्रदान किया गया है। प्रदेश का भविष्य युवा शक्ति में निहित है। युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, आवश्यकता केवल प्रतिभाओं को निखारने की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शीघ्र ही मंत्रि-परिषद की मंजूरी के पश्चात योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की युवा शक्ति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का लाभ प्राप्त करने योग्य बनाना युवा स्वाभिमान योजना का उद्देश्य है। योजना से शहरी युवा बेरोजगारों को उनकी इच्छा के अनुरूप क्षेत्र में एक वर्ष में 100 दिन का तात्कालिक अस्थाई रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा। रोजगार के दौरान ही युवाओं को उनकी पसंद के क्षेत्र में कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिलवाया जायेगा।

वचनपत्र का एक और वादा किया पूरा

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा वचन-पत्र में किये गये युवाओं के रोजगार के अधिकार के वादे को अमली जामा पहनाने के वचन की पूर्ति की दिशा में युवा स्वाभिमान योजना एक बड़ा कदम है। युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उनकी पसंद के रोजगार में स्थापित होने के लिये राज्य सरकार समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध करवायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि युवाओं को स्व-रोजगार के क्षेत्र में सक्षम बनाने के लिये राज्य सरकार कृत-संकल्पित होकर कार्य करेगी।

10 फरवरी से शुरु होगा रजिस्ट्रेशन

युवा स्वाभिमान योजना का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में शहरी बेरोजगार युवाओं के रजिस्ट्रेशन का कार्य 10 फरवरी, 2019 से नगरीय निकायों में प्रारंभ किया जा रहा है। रजिस्टर्ड युवाओं को फरवरी माह में ही उनकी पसंद के रोजगार के लिये कौशल प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। युवा स्वाभिमान योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नगरीय निकायों को सौंपी जा रही है। नगरीय निकाय द्वारा ऐसे सभी शासकीय विभागों को योजना से जोड़ा जायेगा, जिनके द्वारा निर्माण और सेवा के कार्य संबंधित नगरीय क्षेत्र में संचालित किये जा रहे हैं अथवा स्वीकृत किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के तौर पर 1 महीने में कमलनाथ ने पूरे किए यह 10 बड़े वादे।

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17 दिसंबर को मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 17 जनवरी को अपनी सरकार का एक महीना पूरा कर लिया। वैसे तो एक महीना सरकार को काम संभालने में ही लग जाता है लेकिन मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इस एक महीने में अपने वचनपत्र के कई मुख्य वादे पूरे करके दिखाए है। आइये नजर डालते है इस एक महीने में कमलनाथ सरकार द्वारा किये कुछ अहम फैसलों पर।

1किसानों का कर्ज माफ

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा वादा जो किया था, वह था किसानों की कर्जमाफी का। कमलनाथ सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस की जीत में भी कर्जमाफी का योगदान काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने कुछ घंटों के भीतर प्रदेश के किसानों का सारा कर्जा माफ करके अपना वादा निभाया।

2पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश

मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नही थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आते ही प्रदेश के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार ने एक महीने के भीतर ही अपने इस वादे को भी पूरा करके दिखाया है।

3मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51,000 की

कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलने वाली राशि जो कि पहले 25000 थी, उसको बढ़ाकर 51,000 किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए इस राशि को 51,000 कर दिया।

4आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में इजाफा।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का वादा भी कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले महीने में ही पूरा करके दिखाया। किसानों की कर्जमाफी के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आशा कार्यकर्ताओं को एरियर सहित प्रतिमाह 2 हजार रु. प्रोत्साहन राशि देने का भी आदेश जारी कर दिया था।

5पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण

कांग्रेस के वचनपत्र में एक जो सबसे चौकाने वाला वादा था, वह था गौशाला निर्माण का। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश की हर पंचायत के साथ ही शहरों में भी गौ शालाओं का निर्माण किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने इस विषय मे आदेश जारी कर दिए है और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है।

6अध्यात्म विभाग बनाने का आदेश

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किये गए वादे को पूरा करते हुए अध्यात्म विभाग बनाने के निर्देश दे दिए है। कमलनाथ सरकार ने आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर अध्यात्म विभाग बनाने का वादा किया है।

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा शिप्रा ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनानेऔर पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा।

7प्रदेश के लोगों को रोजगार में 70% आरक्षण

सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 70% स्थानीय आरक्षण देने का वादा किया था। सरकार ने कहा कि प्रदेश में लगे उद्द्योगों को सरकार से मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए 70% स्थानीय लोगों को रोजगार देने होगा। कमलनाथ के इस फैसले से जहां प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलने की खुशी है तो वहीं विपक्ष ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

8बंद होगा व्यापम

शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला, व्यापम को कमलनाथ सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है। कमलनाथ सरकार व्यापम को बंद कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग जैसे संस्था बनाने पर विचार कर रही है।

9दीनदयाल वनांचल योजना को किया बंद

सत्ता में आने साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई दीनदयाल वनांचल योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

10मंत्रियों के बजाय कलेक्टर करेंगे घोषणाएं

एक नई मिसाल कायम करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित घोषणाएं मंत्रियों की जगह कलेक्टरों द्वारा करवाने के आदेश जारी किए है। इससे पहले सरकार की योजनाओं से संबंधित सभी घोषणाएं संबंधित विभाग के मंत्री ही किया करते थे।

मध्यप्रदेश में सत्यापन के बाद एक बार फिर शुरु हुई मीसाबंदी पेंशन

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madhya pradesh congress chief kamalnath

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बुधवार को मीसाबंदियों की रोकी गई पेंशन एक बार फिर शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश जारी कर कहा है कि मीसाबंदियों के भौतिक सत्यापन के बाद पेंशन फिर से शुरू की जाए।

वहीे इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार के आदेश की कॉपी ट्वीट करते हुए लिखा है- टू टर्न।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान वर्ष 1975 से 1977 के बीच लगे आपातकाल के दौरान जेल में डाले गए लोगों को मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में करीब 4000 लोगों को 25,000 रुपये की मासिक पेंशन दी जाती है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने साल 2008 में इस योजना की शुरूआत की थी। 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियो को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया था। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये की गई थी। इसके बाद 2017 में पेंशन राशि को बढ़ाकर 25 हजार कर दी गई। कांग्रेस सरकार ने पेंशन वितरण रोके जाने का प्रमुख कारण महालेखाकार की उस रिपोर्ट को बताया है जिसमें महालेखाकार ने पिछले वित्तीय वर्षों में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि में भुगतान को बजट प्रावधान से अधिक का बताया था।

सामान्य प्रशासन विभाग ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के राशि के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे। 29 दिसंबर को जारी आदेश में कहा गया था कि ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है। साथ ही लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है। अत: आगामी माह से लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि राशि का वितरण अगली कार्यवाही होने के पश्चात किया जाए।’ इसके बाद मीसा बंदियों को पेंशन मिलना बंद हो गई थी।

भाजपा नेताओं ने सरकार के इस फैसले को विरोध करते हुए इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया था। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि भाजपा से जुड़े लोग फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे हैं। इस संबंध में पिछले सप्ताह ग्वालियर की हाईकोर्ट बैंच में एक याचिका भी दायर की गई थी। अब सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 15 जनवरी को देर शाम जारी किए गए आदेश में समस्त आयुक्तों और और कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि लोकतंत्र सेनानियों के भौतिक सत्यापन आश्यकता है। राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि लोकतंत्र सेनानी या दिवंगत लोकतंत्र के आश्रित का भौतिक सत्यापन की कार्यवाही स्‍थल पर जाकर कराई जाए। उनके बारे में स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद लोकतंत्र सेनानियों को फिर से निधि दी जाए।

सरकार संभालते ही कमलनाथ ने फिजूलखर्ची पर लगाई रोक

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

प्रदेश में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की कवायद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री कमल नाथ के निर्देश पर वित्त विभाग ने विभिन्न खर्चों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश जारी कर दिये हैं। प्रदेश में अब नवीन वाहनों की खरीदी पर इस वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एयरकण्डीशनर समेत अन्य विलासिता संबंधी उपकरणों की खरीदी पर भी रोक लगा दी गई है।

वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश में राजस्व विभाग (शासकीय मुद्रणालय) को छोड़कर अन्य विभागों, निगम, मण्डलों आदि द्वारा वर्ष 2019 के लिये डायरी, कैलेण्डर के मुद्रण पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी के साथ, कार्यालयों की मरम्मत, संधारण, कार्यालयीन सामग्री और अन्य कार्यों पर वित्तीय नियंत्रण रखने के लिये खर्चे की सीमा तय की गई है। वर्ष 2018-19 का इनकार्यों के लिये आवंटित बजट अथवा वर्ष 2017-18 में इन कार्यों पर हुए व्यय में से जो भी कम होगा उसे खर्चे की सीमा बना दिया गया है। खर्चे की यह सीमा कार्यालयीन फर्नीचर, पुस्तकें, पत्रिकाएँ और लेखन सामग्री की खरीदी, आतिथ्य व्यय, मुद्रण एवं प्रकाशन, कंसल्टेंसी सर्विसेस, विशेष सेवाओं के लिये मानदेय, सुरक्षा, सफाई, परिवहन व्यवस्था, मशीन और उपकरणों का संधारण, वाहन संधारण, फर्नीचर संधारण आदि के लिये निर्धारित की गई है।

अस्पताल, आंगनवाड़ी, आश्रमों पर बैन नहीं

राज्य सरकार ने आवश्यक श्रेणी में व्ययों को प्रतिबंध से छूट प्रदान की है। विदेशी सहायता प्राप्त परियोजनाएँ, केन्द्रीय क्षेत्रीय योजनाएँ और प्राप्त केन्द्रीय अनुदान को प्रतिबंध से छूट दी गई है। इसके साथ ही, छात्रावास, आश्रम विद्यालय, अस्पताल, जेल, पशु चिकित्सालय और आँगनवाड़ी में लगने वाली आवश्यक दवाइयाँ और खास सामग्री की पूर्ति मद में भी व्यय सीमा में प्रतिबंध की छूट रहेगी। राज्य शासन ने अस्पतालों में उपचार कार्य में उपयोग में आने वाली सामग्री लिनिन, गॉज, बैण्डेज और अन्य सामग्री की खरीदी पर भी छूट प्रदान की है। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में मितव्ययता संबंधी आदेश के साथ विभागों को आवश्यक निर्देश भी जारी किये हैं।

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