Wednesday, December 11, 2019
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मध्यप्रदेश में बच्चों को पढ़ाने की जगह चुनाव प्रचार में जुटे शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता !

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शिक्षकों को विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए देखा जाता है. लेकिन कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो अपना कर्त्तव्य भूलकर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. ताजा मामला सीधी जिले के रामगढ़ नंबर 2 का है. राकेश रोशन शुक्ला नाम का शिक्षक जो कि सरकारी स्कूल में कार्यरत है वह अपना काम भूलकर चुनाव प्रचार में लगा हुआ है। बता दें कि सीधी विधानसभा के कई गावों में 17 जनवरी को ग्राम पंचायतों के चुनाव होने हैं।

अगले पेज पर देखें कैसे चुनाव प्रचार में जुटे हुए है शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

1नियमों की उड़ रही धज्जियां

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शिवराज सरकार को उखाड़ फेंकने तक नही पहनूंगा फूलों की माला: ज्योतिरादित्य सिंधिया

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कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को संकल्प लिया कि जब तक वह शवराज सरकार को मध्यप्रदेश के सत्ता से उखाड़ फेंकने में सफल नही हो जाते , तब तक वह फूलों की माला नही पहनेंगे।

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगवाली में विधानसभा उपचुनाव होने है। जिसकी तैयारियों के सिलसिले में सिंधिया तीन दिन के दौरे पर निकले हुए है। इस दौरान सिंधिया ने मुंगवाली में कई जनसभाएं संबोधित की और कई कार्यकर्ताओं से मिले।

शिवराज सरकार पर किया हमला
इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि इस समय मध्यप्रदेश में ऐसी सरकार है जिसने किसानों को हक़ मांगने पर गोली मारी। सिंधिया ने आगे कहा कि शवराज सरकार किसान, गरीब मजदूर और नौजवानों पर जुल्म कर रही है।
हम गांधी के सिद्धांतों से नाता रखते है: सिंधिया
सिंधिया ने कहा की वह महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने वाली कॉग्रेस पार्टी से नाता रखते है। सिंधिया ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा सरकार को सबक सिखाएगी। इसके साथ ही सिंधिया ने नोटबंदी और जीएसटी को लेकर भी मोदी सरकार पर हमला बोला।

राम की नगरी चित्रकूट में इन 5 वजहों से मुरझाया कमल और जीत के साथ मजबूत हुई कांग्रेस !

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राम नगरी चित्रकूट में आज कमल मुरझाया हुआ दिख रहा है। यहाँ हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने बीजेपी उम्मीदवार को 14333 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चित्रकूट चुनाव में कांग्रेस की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले साल के अंत तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में चित्रकूट चुनाव को सेमी फाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। 
इन कारणों से जीती कांग्रेस 

केंद्रऔर राज्य दोनो की सत्ता में बैठी भाजपा को चित्रकूट में हार का सामना क्यों करना पड़ा ? देखें राम की नगरी में भाजपा के हर के 5 प्रमुख कारण

गुटबाजी का शिकार हुई बीजेपी
शंकर दयाल त्रिपाठी के बीजेपी प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही पार्टी गुजबाजी का शिकार हुई। बीजेपी के स्थानीय नेता भी एक साथ काम करने में नाकाम रहे। मध्यप्रदेश में जिस गुजबाजी ने कांग्रेस की लुटिया डुबोई थी उसी गुजबाजी का शिकार चित्रकूट में बीजेपी हुई।

कांग्रेस का गढ़ रहा है चित्रकूट
चित्रकूट हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है । इसके पहले चित्रकूट विधायक प्रेम सिंह भी कांग्रेस पार्टी से ही थे। चित्रकूट में हमेशा से ही कांग्रेस का वोटबैंक मजबूत रहा है।

असंतुष्ट नेता आए कांग्रेस के साथ
चित्रकूट में कांग्रेस सभी असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ लाने में कामयाब रही। चित्रकूट चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस सहित बाकी पार्टियों के असंतुष्ट नेताओं को भी अपने साथ शामिल किया। इन असंतुष्ट नेताओं में बीजेपी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी शामिल है।

परिवार का फायदा
कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी को सबसे बड़ा फायदा उनके परिवार का मिला। मौजूदा समय में नीलांशु चतुर्वेदी की बहन कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष है। इसके सातग ही नीलांशु खुद भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके है।

छत्रिय वोट आए कांग्रेस के साथ
आम तौर पर चित्रकूट में चुनाव ब्राह्मण बनाम छत्रिय रहा है लेकिन इस बार बीजेपी कांग्रेस दोनो ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे थे। जिसके कारण ब्राह्मण वोट दोनों पार्टियों में बट गए। जिसके बाद पूर्व विधायक प्रेम सिंह की मौत के कारण छत्रिय वोट सहानुभूति के कारण कांग्रेस के पाले में आ गए।

राम की नगरी चित्रकूट में इन 5 वजहों से मुरझाया कमल और जीत के साथ मजबूत हुई कांग्रेस !

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राम नगरी चित्रकूट में आज कमल मुरझाया हुआ दिख रहा है। यहाँ हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने बीजेपी उम्मीदवार को 22000 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चित्रकूट चुनाव में कांग्रेस की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले साल के अंत तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में चित्रकूट चुनाव को सेमी फाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। 
इन कारणों से जीती कांग्रेस 

केंद्रऔर राज्य दोनो की सत्ता में बैठी भाजपा को चित्रकूट में हार का सामना क्यों करना पड़ा ? देखें राम की नगरी में भाजपा के हर के 5 प्रमुख कारण

गुटबाजी का शिकार हुई बीजेपी
शंकर दयाल त्रिपाठी के बीजेपी प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही पार्टी गुजबाजी का शिकार हुई। बीजेपी के स्थानीय नेता भी एक साथ काम करने में नाकाम रहे। मध्यप्रदेश में जिस गुजबाजी ने कांग्रेस की लुटिया डुबोई थी उसी गुजबाजी का शिकार चित्रकूट में बीजेपी हुई।

कांग्रेस का गढ़ रहा है चित्रकूट
चित्रकूट हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है । इसके पहले चित्रकूट विधायक प्रेम सिंह भी कांग्रेस पार्टी से ही थे। चित्रकूट में हमेशा से ही कांग्रेस का वोटबैंक मजबूत रहा है।

असंतुष्ट नेता आए कांग्रेस के साथ
चित्रकूट में कांग्रेस सभी असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ लाने में कामयाब रही। चित्रकूट चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस सहित बाकी पार्टियों के असंतुष्ट नेताओं को भी अपने साथ शामिल किया। इन असंतुष्ट नेताओं में बीजेपी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी शामिल है।

परिवार का फायदा
कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी को सबसे बड़ा फायदा उनके परिवार का मिला। मौजूदा समय में नीलांशु चतुर्वेदी की बहन कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष है। इसके सातग ही नीलांशु खुद भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके है।

छत्रिय वोट आए कांग्रेस के साथ
आम तौर पर चित्रकूट में चुनाव ब्राह्मण बनाम छत्रिय रहा है लेकिन इस बार बीजेपी कांग्रेस दोनो ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे थे। जिसके कारण ब्राह्मण वोट दोनों पार्टियों में बट गए। जिसके बाद पूर्व विधायक प्रेम सिंह की मौत के कारण छत्रिय वोट सहानुभूति के कारण कांग्रेस के पाले में आ गए।

चित्रकूट विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत, 14,333 वोटों से जीती कांग्रेस !

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मध्यप्रदेश के चित्रकूट में चल रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी ने बड़ी जीत दर्ज की है। वहीं बीजेपी उम्मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी को करारी हार झेली पड़ी है। आपको बता दें कि कांग्रेस उम्मीदवार ने बीजेपी को 22000 वोटों के बड़े अंतर से हराया है।
आप को बता दें कि वोटों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरु होनी थी लेकिन सतना के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में जिन कमरों में ईवीएम रखी थी उसकी चाभी गुम हो गई। इसके बाद ताला तोड़कर वोटों की गिनती शुरू की गई।
गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक प्रेम सिंह का निधन होने के चलते चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है। बीते तीन चुनाव से प्रेम सिंह ही यहां से जीतते आ रहे थे। इस बार यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी और भाजपा के शंकर दयाल त्रिपाठी के बीच था।
अगले साल के अंत तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में चित्रकूट विधानसभा में जीत दर्ज करने का फायदा कांग्रेस को 2018 में जरूर देखने को मिलेगा। 

गुरदासपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत, भाजपा की शर्मनाक हार !

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पंजाब में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से ही कांग्रेस आत्मविश्वास से भरी हुई थी । जिसका नतीजा कांग्रेस को गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में देखने को मिला है । कांग्रेस ने गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करते हुए भाजपा एयर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को करारी हार दी है । 
कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने भाजपा उम्मीदवार को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराकर रिकॉर्ड जीत दर्ज की है । कांग्रेस की इस जीत के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश बड़ गया है । जिसका नतीजा गुजरात, मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ और राजस्थान में देखने को मिलेंगे । 
नवजोत सिंह ने दी राहुल गांधी को बधाई

कांग्रेस की इस जीत को नवजोत सिंह सिद्धू ने राहुल गांधी के लिए दिवाली का तोहफा बताया है । इसके साथ ही सिद्धू ने कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी । 


ख़ुशी मनाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता 

https://twitter.com/ANI/status/919444598396559360

किसानों की हत्यारी शिवराज सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए सिंधिया ने तैयार किया यह मास्टर प्लान !

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गुना के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में चल रहे सत्याग्रह का समापन हो गया । जिसके बाद सिंधिया ने कहा कि वह किसानों की हत्यारी शिवराज सरकार को मध्यप्रदेश की सत्ता से उखाड़ फेकेंगे । इसके लिए सिंधिया ने पूरा मास्टर प्लान तैयार कर लिया है ।

सिंधिया ने कहा कि अब गाँव-गाँव सत्याग्रह होगा और किसानों को न्याय दिलाया जाएगा । मध्यप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सिंधिया ने कमर कस ली है । पूरी कांग्रेस पार्टी सिंधिया के साथ दिखाई दे रही है ।

सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सिंधिया का मुख्यमंत्री उम्मीदवार होना लगभग तय हो चुका है । वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कमलनाथ और अरुण यादव का नाम चल रहा है ।

28 घंटे के भीतर शिवराज सिंह चौहान का उपास भी खत्म हो गया है । ऐसे में शिवराज का उपास अनशन कम और नौटंकी ज्यादा लग रही है । वहीं कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को चुनाव तक खींचना चाहेगी ।

सिंधिया द्वारा किये गए इस सत्याग्रह में राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह, पूर्व केन्द्रिय मंत्री सुरेश पचौरी, कांग्रेस विधायक एवं किसान मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इस सत्याग्रह में शामिल हुए।

बता दे कि, किसान आंदोलन में पुलिस की गोलीबारी में 6 किसानों की मृत्यु के चलते सरकार के विरोध में सिंधिया ने सत्याग्रह किया था।

जिसके समापन के समय लोगो ने सिंधिया द्वारा प्रदेश की बागडोर सँभालने की इच्छा जताई, लेकिन सिंधिया ने नारेबाजों को सख्ती से मना किया कि किसी के भी नाम की नारे नहीं लगाये जायेंगे। वही सिंधिया ने ये भी कहा कि, जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होंगी तब तक शांत नहीं बैठेंगे।

सोनिया को कांग्रेसी नेता की नसीहत, कहा- राहुल को राजनीति से निकाल बिज़नेस में डाल दो।

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Newbuzzindia: राहुल गांधी इन दिनों अगले वर्ष उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पल्ला भारी करने की हर मुमकिन कोशिश में जुटे हुए है। इस काम को लेकर जहां एक तरफ कई कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की तारीफ़ कर रहे है तो वहीँ दूसरी तरफ केंद्र, भाजपा और दूसरे विपक्षी दल उन्हें सेना पर दिए बयान पर घेर रहे है। यही नही अब इन सब के साथ कुछ कांग्रेसी नेताओं का गुस्सा भी राहुल गांधी पर फूटता नजर आ रहा है। 

​राहुल गांधी का विरोध करने के लिये मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के कांग्रेस जिला संगठन सचिव शैलेष चौबे सामने आये है। उन्होंने  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से राहुल गांधी को पार्टी से बाहर निकालने की अपील की है।

आपको बता दे शैलेश चौबे ने इस संबंध में सोशल मीडिया लार एक वीडियो जारी किया है जिसमे उन्होंने साफ़ गौर पर सोनिया गांधी से राहुल गांधी को पार्टी से बाहर करके किसी अच्छे बिज़नेस में लगाने की सलाह दी है। शैलेष का कहना है कि राहुल यूपी चनावों में अपनी पार्टी का प्रचार चाहे बहुत बढ़िया तरीके से कर रहे हों लेकिन सेना के जवानों के लिए ऐसी बातें बोलना यह दर्शाता है कि राहुल पार्टी का भला नहीं कर सकते या उनमें राजनीतिक योग्यता नहीं है।

मध्यप्रदेश में भाजपा की करारी हार, तीनों सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा..!

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Newbuzzindia: राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली कांग्रेस ने जीत का अपना क्रम बरकरार रखा है। मध्यप्रदेश में हुये तीन नगर पालिका चुनाव के सोमवार को आये परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में गये हैं। तीनों ही जगहों पर बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। तीनों ही जगहों पर कांग्रेस के प्रत्याशी बड़े अन्तर से जीते हैं। भोपाल में हुये हिन्दू उत्सव समिति के चुनाव में भी बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है।

प्रदेश के मैहर और मंडीदीप नगर पालिका तथा ईसागढ़ नगर परिषद के लिये चुनाव हुये थे। अभी हाल में ही मैहर विधानसभा सीट जीतने वाली बीजेपी को वहां बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के धर्मेश घई ने भाजपा के धीरज पांडे को 4 हजार से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है। राजधानी भोपाल से लगी मंडीदीप नगर पालिका में भी बीजेपी की हार हुई है। मंडीदीप में कांग्रेस के बद्रीलाल चौहान ने बीजेपी के राजेन्द्र अग्रवाल को 5 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। अशोक नगर जिले की ईशागढ़ नगर परिषद में भी कांग्रेस के भूपेन्द्र द्विवेदी ने बीजेपी के हरिवल्लभ को हरा कर कांग्रेस का झंडा बुलंद किया है।

इन तीनों ही नगर पालिकाओं में पहले बीजेपी की कब्जा था। मजे की बात यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान के अलावा बीजेपी के कई बड़े नेता और मंत्री इन तीनों जगहों पर पार्टी का प्रचार करने गये थे। मैहर में तो मुख्यमंत्री चौहान ने कई बड़ी घोषणायें की थी। विधानसभा उपचुनाव के समय इस इलाके के लिए उन्होंने कई योजनाओं का ऐलान किया था, लेकिन जनता ने पालिका चुनाव में उनकी इन ऐलानों पर कोई ध्यान नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने इस चुनाव परिणाम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है। पार्टी की तरफ से भी हार-जीत को चुनाव का एक सामान्य अंग बताकर मामले को टाल दिया गया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि हार की मुख्य वजह प्रत्याशियों का चुनाव रहा है। दरअसल पार्टी के नेताओं को यह लग रहा था कि वे ‘मिट्टी के माधौ’ को भी चुनाव जितवा सकते हैं। इस जीत से बीजेपी के लिये एक संदेश यह भी निकला है कि यदि उसने शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा उपचुनाव के समय प्रत्याशी चुनने में इसी तरह का रवैया अपनाया तो उसे मुश्किल हो सकती है।

उधर कांग्रेस ने इस चुनाव परिणाम को जनता की जीत बताया है। प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचैरी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जीत के लिये मतदाताओं का आभार जताया है। प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव ने कहा है कि सरकारी मशीनरी और पैसे का दुरूपयोग कर के बीजेपी चुनाव जीतती रही है। अब छोटी जगहों की जनता ने उसे हराकर स्पष्ट संदेश दे दिया है। नगर पालिकाओं की छोटी-छोटी जीत प्रदेश में कांग्रेस के लिये मील का पत्थर साबित होंगी।

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव: मायावती ने की कांग्रेस की जीत पक्की, भाजपा को लगा बड़ा झटका !

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Newbuzzindia: बसपा प्रमुख मायावती की पार्टी बसपा मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के राज्‍य सभा उम्‍मीदवार का समर्थन करेगी। मायावती ने शनिवार को इस बात की घोषणा की। कांग्रेस के लिए यह एलान राहत की सांस लेकर आया है। क्‍योंकि उसके उम्‍मीदवार विवेक तनखा को राज्‍य सभा जाने के लिए 58 विधायकों के वोट की जरूरत थी लेकिन कांग्रेस के पास केवल 57 विधायक ही थे।

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, ”मध्‍य प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश कई राज्‍यों में राज्‍य सभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें साम्‍प्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई है। लेकिन बसपा मध्‍य प्रदेश में अपना उम्‍मीदवार नहीं चुन सकती क्‍योंकि हमारे पास नंबर नहीं है। इसलिए साम्‍प्रदायिक ताकतों को कमजोर करने के लिए कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक तनखा का साथ देने का फैसला किया गया है।”

57 विधायकों के साथ कांग्रेस अपने उम्‍मीदवार को जिताने के आंकड़े से एक सीट दूर थी। साथ ही सदन में उसके नेता सत्‍यदेव कटारे का मुंबई में इलाज चल रहा है जबकि एक विधायक रमेश पटेल जेल में हैं। वहीं बताया जा रहा है कि एक विधायक ने भाजपा को वोट देने का एलान किया है।

230 सदस्‍यीय मध्‍य प्रदेश विधानसभा में एक उम्‍मीदवार को जीतने के लिए 58 विधायकों की जरूरत होती है। बसपा के समर्थन की घोषणा के बाद कांग्रेस राहत की सांस ले सकती है। अब अगर तीन विधायक छूट भी जाते हैं तो बसपा के विधायकों को मिलाकर उसका आंकड़ा 58 का हो जाएगा।

इधर, सत्‍ता में काबिज भाजपा के दो उम्‍मीदवारों की जीत तय है। पार्टी के महासचिव विनोद गोटिया निर्दलीय के रूप में मैदान में है। तीसरे उम्‍मीदवार के लिए भाजपा के पास केवल 50 विधायक ही रह जाएंगे। विधानसभा में तीन निर्दलीय विधायक भी हैं।

कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक तनखा को सीएम शिवराज सिंह चौहान का करीबी माना जाता है। इसके चलते माना जा रहा था कि भाजपा तीसरी सीट पर शायद ही लड़े लेकिन पार्टी आलाकमान के निर्देश के बाद गोटिया को निर्दलीय के रूप में उतारा गया।

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