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मुख्यमंत्री शिवराज के साले संजय सिंह, कांग्रेस में हुए शामिल

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image of cm shivraj singh chouhan's brother in law sanjay singh with pcc chief kamalnath at aicc head office in delhi

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के सगे भाई संजय सिंह ने कांग्रेस का दामन थामा। शनिवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर कमलनाथ ने संजय के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी दी। जहां मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के साथ प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सिंधिंया भी मौजूद थे। इस दौरान संजय ने भाजपा पर हमला कर कमलनाथ को खासतौर पर धन्यवाद भी किया।

संजय सिंह : मैं मुख्यमंत्री का परिवार नहीं रिश्तेदार हूँ , मेरा कुल और गोत्र दोनो अलग है।

संजय सिंह का आरोप  :

संजय सिंह ने 5 मिनट की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भाजपा पर कई आरोप लगाए, जिसमें उन्होंने भाजपा को कामदारों की नहीं नामदारों की पार्टी भी कहा। साथ ही भाजपा में परिवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया है। वहीं परिवार को धोखा देने के सवाल पर संजय ने कहा कि “मैं मुख्यमंत्री के परिवार नहीं रिश्तेदार हूँ, मेरा कुल और गोत्र दोनो अलग है।”

वहीं कांग्रेस दो घंटे में मध्यप्रदेश विधानसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : भाजपा की 177 सीटों पर 16 महिला उम्मीदवार

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प्रदेश में करीब 50 प्रतिशत महिला वोटर होने के बावजूद पार्टियां उन्हें तव्ज्जो नहीं दे रही है। एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश चुनाव को लेकर पहली सूची में 177 में सिर्फ 16 महिलाओं उम्मीदवारों कोे जगह दी है।

शुक्रवार को भाजपा ने 230 विधानसभा सीटों में से 177 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है, जिसमें 16 महिलाओं के नाम शामिल है। जहां 16 महिला उम्मीदवारों में से 7 अनुसूचित जनजाति(ST) और 9 सामान्य वर्ग से है। वहीं इस सूची में एक भी अनुसूचित जाति(SC) महिला उम्मीदवार का नाम शामिल नहीं है।

महिला उम्मीदवारों के नाम :

अनुसूचित जनजाति(ST) :

1. जैतपुर : मनीषा सिंह

2. मानपुर : मीना सिंह

3. सिहोरा : नंदिनी मरावी

4. नेपानगर : मंजू राजेंद्र दादू

5. मनावर : रंजना बघेल

6. घोड़ाडोंगरी : गीता बाई उइके

7. बैहर : अनुपमा नेताम

प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में अनुसूचित जनजाति(ST)  की प्रदेश में 47 सीटे हैं जिसमें 40 सीटों पर घोषणा की गई है। इन 40 सीटों में भाजपा ने सिर्फ 7 महिला उम्मीदवारों को जगह दी है। बाकी बची 7 सीटों में देखना होगा कि भाजपा कितने SC महिला उम्मीदवारों को उतारती है।

अनुसूचित जाति(SC) :

भाजपा की पहली सूची में फिलहाल किसी महिला SC उम्मीदवार का नाम नहीं है। प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से 35 SC के लिए आरक्षित है। 29 सीटों पर घोषणा हो चुकी है, बाकि बची 6 सीटों पर देखना होगा कि कोई महिला उम्मीदवार को भाजपा जगह देती है या नहीं।

सामान्य वर्ग की महिला उम्मीदवार :

1.  बरगी : प्रतिभा सिंह

2. चचौरा : ममता मीना

3. छतरपुर :  अर्चना सिंह

4. मलहरा : ललिता यादव

5. देवास : गायत्री राजे पनवान

6. बुरहानपुर : अर्चना चिटनिस

7. धार : नीना वर्मा

8. सबलगढ़ : सरला रावत

9. शिवपुरी : यशोधरा राजे सिंधिया

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की पहली सूची

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आखिरकार भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. बता दें कि भाजपा ने 177 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की है. शिवराज सिंह चौहान अपने पुरानी सीट बुधनी से ही लड़ेंगे.

  • देवास से सांसद मनोहर ऊंटवाल आगर से लड़ेंगे चुनाव
  •  मंत्री माया सिंह का टिकट कटा
  • मंदसौर- यशपालसिंह सिसोदिया
  • सुवासरा- राधेश्याम पाटीदार,
  • मनासा- माधव मारू
  • नीमच- दिलीप परिहार
  • जावद- ओमप्रकाश सकलेचा
  • मल्हारगढ़- जगदीश देवड़ा
  • जावरा- राजेन्द्र पांडेयके नाम
  • गरोठ, की घोषणा नहीं।

प्रत्याशियों की सूची

भोपाल: प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करने से पहले भाजपा-कांग्रेस कार्यालय में बढ़ी सुरक्षा

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भोपाल स्थित भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय के बाहर पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। बता दें कि आज भाजपा विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है। वहीं कांग्रेस भी कल चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करेगी।

पुलिस को आशंका है कि टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ता और समर्थक कार्यालय के बाहर तोड़फोड़ कर सकते है। जिसके चलते पुलिस ने दोनों ही कार्यालय के बाहर पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।

https://youtu.be/iCvo4k6LY4c

मध्यप्रदेश चुनाव : कांग्रेस की बैठक टलते ही फर्जी लिस्ट हुई वायरल

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी की दिल्ली में चल रही बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है। वहीं दूसरी ओर बैठक टलते ही सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों के नाम की एक लिस्ट वायरल होने लगी। जिसमें 150 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी ने इस लिस्ट को फर्जी बताया है और जल्द ही मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर चर्चाओं का दौर जल्द ही शुरु होगा।

150 नाम वाली फर्जी लिस्ट :

मध्यप्रदेश कांग्रेस पार्टी की मीडिया सेल की अध्यक्ष शोभा ओझा ने इस लिस्ट को फर्जी बताते हुए इसका खंडन किया है। बता दें कि इस लिस्ट में अटेर से हेमंत कटारे, रोघौगढ़ से जयवर्धन सिंह, पवई से मुकेश नायक, रीवा से कविता पांडे, गोविंदपुरा से गोविंद गोयल जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल थे।

मध्यप्रदेश चुनाव : भाजपा-कांग्रेस आज जारी कर सकती है टिकट

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आज भाजपा और कांग्रेस टिकटों का ऐलान कर सकती है। टिकटों को लेकर राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के बीच दिल्ली में हो रही लगातार बैठकों में ये कयास लगाए जा रहें है कि टिकटों की घोषणा जल्द ही हो सकती हैं। दोनों ही पार्टियों में सीटों को लेकर अंर्तविरोध देखा जा रहा है। मीटिंग के दौरान बड़े नेताओं के भी आपस में भिड़ने की खबरें लगातार बनी हुई हैं।

भाजपा की मीटिंग धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में खत्म हो चुकी है वहीं कांग्रेस की मीटिंग राहुल गांधी के नेतृत्व में फिलहाल अभी भी जारी है। दोनों पार्टियों में सीटों को लेकर पार्टी नेताओं के बीच धमासान को विशेष तौर पर ध्यान दिया जा रहा है। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को एक चरण में पूरे प्रदेश में चुनाव होने वालें हैं। वहीं 11 दिसंबर को इस चुनाव के परिणाम भी आ जाएंगे।

भाजपा की सीटों को लेकर दिल्ली स्थित धर्मेंद्र प्रधान के घर में बैठकों का सिलसिला आखिर कार  खत्म हो चुका है। जहां राष्ट्रीय स्तर के नेताओं और प्रदेश के नेताओं के बीच लगातार बैंठक हो रही थी, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा समेत कई बड़े नेताओं के बीच सीटों के मंथन का दौर समाप्त हो चुका है और जल्द ही भाजपा अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस पार्टी की फिलहाल मीटिंग अभी जारी है, जहां प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योर्तिरादित्य सिंधिया मौजूद है। टिकट बटवारे को लेकर दिग्विजय सिंह और सिंधिया बे बीच भिड़ने की भी खबर वायरल हो रही थी। लेकिन बाद में सिंधिया ने इस बात का खंडन करते हुए कहा कि इस प्रकार की कोई भी विवाद हमारे बीच नहीं हुआ है।

दिगंबर अखाड़े ने कम्प्यूटर बाबा को किया निष्कासित

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गुरुवार को 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा को दिगंबर अखाड़े ने निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही प्रयागराज कुंभ में अखाड़ा की गतिविधियों में बाबा शामिल नहीं हो पाएंगे। इस बात की पुष्ठी दिगंबर अखाड़े के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने की है। कम्प्यूटर बाबा अपने नाम और काम दोनों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं, फिलहाल बाबा राज्यमंत्री पद से  इस्तीफा देकर शिवराज के खिलाफ करने को लेकर चर्चाओं में बनें हुए हैं।

दिगंबर अखाड़े ने जारी किया पत्र।

बाबा का लगातार शिवराज पर वार :

शिवराज सरकार में राज्यमंत्री रहते हुए लगातार नर्मदा में हो रहे अवैध उत्खनन, गौरक्षा और मंदिर निर्माण के मुद्दे को उठाते रहते थे। जिसे लेकर सरकार की तरफ से किसी प्रकार का कदम ना उठाने पर बाबा ने इस्तीफा देकर शिवराज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकाल कर जगह-जगह आंदोलन करते नजर आ रहें थे।

बाबाओं को मंत्री बनाने पर हुआ था विवाद :

सरकार ने नर्मदानंदजी, हरिहरानंदजी, कंप्यूटर बाबाजी, भय्यूजी महाराज और योगेंद्र महंतजी को राज्य सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया था। जिसे लेकर  विपक्ष लगातार सरकार पर महाकुंभ और नर्मदा घोटाले का  आरोप लगा रही थी, तभी कम्प्यूटर बाबा ने  भी बगावत कर शिवराज की मुश्किले बढ़ा दी थी। 

बाबा पर समागम के दौरान पैसे बांटे का आरोप :

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बाबा ने अपनी मन की बात के ज़रिए सरकार के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। जिसे लेकर 23 अक्टूबर को इंदौर, 30 अक्टूबर को ग्वालियर में उन्होंने मन की बात के ज़रिए संत समागम किया और अब 4 नवंबर को खंडवा, 11 नवंबर को रीवा, 23 नवंबर को जबलपुर में संतों के समागम में मन की बात करने की तैयारी में हैं। बाबा के ग्वालियर में हुए समागम मे पैसे बांटते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके  बाद बाबा पर आरोप लगाए जा रहे थे कि समागम में साधुओं को पैसा देकर बुलाया जाता है।

ग्वालियर समागम की तस्वीर

कैलाश की निगाहें इंदौर लोकसभा पर तो कई दिग्गज हार के डर से हट रहे हैं पीछे

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।

इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल

राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।

इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।

सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

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सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी

कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

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पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

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दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

उपेंद्र कुशवाहा ने तोड़ी चुप्पी, मध्यप्रदेश की 66 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि भाजपा ने सीटों के आधे-आधे बंटवारें के फैसले पर नाराज हैं। साथ ही मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। कुशवाहा ने बताया की पार्टी प्रदेश की 66 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।

बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा, आरएलएसपी और पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार की 40 सीटों में एक साथ चुनाव लड़ा था, जिसमें भाजपा को 22, लोक जनशक्ति पार्टी 6 और आरएलएसपी को तीन सीटें मिलीं थीं।

क्या है मामला :

26 अक्टूबर को दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हुई, जिसमें आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के बटवारें पर फैसला लिया गया। प्रेस कांर्फेंस कर दोनो ने बराबरी की सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही। साथ ही बिहार में भाजपा के सहयोगी दल आरएलएसपी (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) और लोक जनशक्ति पार्टी को भी सम्मान जनक सीटें देने की बात कही।

इसी दिन दूसरी तरफ कुशवाहा की मुलाकात लालू के बेटे और आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) नेता तेजस्वी यादव से हुई, जिसके बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि शायद कुशवाहा अब आरजेडी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ सकतें हैं। साथ ही शाह-नीतीश की लड़ाई से नाराज कुशवाहा के इस्तीफा देने की खबरें भी आने लगी थी। खैर कुशवाहा ने चुप्पी तोड़ते हुए सारी बतों का खंडन किया और मध्यप्रदेश में भाजपा को झटका देते हुए 66 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।

उपेंद्र कुशवाहा और तेजस्वी यादव की मुलाकात।

मध्यप्रदेश में बाहरी पार्टियों की भरमार :

28 नवंबर को मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इस चुनावीं जंग में बाहर की कई पार्टियों ने छलांग लगा दिया है। इसी कड़ी में बिहार में भाजपा के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव लड़ने वाली उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी मध्यप्रदेश में भाजपा की प्रतिव्दंदी बन खड़ी हो गई है। भाजपा-कांग्रेस के अलावा प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, कम्यूनिस्ट पार्टी जैसी कई पार्टियों ने हिस्सा लिया है।

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