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मुख्यमंत्री के तौर पर 1 महीने में कमलनाथ ने पूरे किए यह 10 बड़े वादे।

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17 दिसंबर को मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 17 जनवरी को अपनी सरकार का एक महीना पूरा कर लिया। वैसे तो एक महीना सरकार को काम संभालने में ही लग जाता है लेकिन मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इस एक महीने में अपने वचनपत्र के कई मुख्य वादे पूरे करके दिखाए है। आइये नजर डालते है इस एक महीने में कमलनाथ सरकार द्वारा किये कुछ अहम फैसलों पर।

1किसानों का कर्ज माफ

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा वादा जो किया था, वह था किसानों की कर्जमाफी का। कमलनाथ सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस की जीत में भी कर्जमाफी का योगदान काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने कुछ घंटों के भीतर प्रदेश के किसानों का सारा कर्जा माफ करके अपना वादा निभाया।

2पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश

मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नही थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आते ही प्रदेश के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार ने एक महीने के भीतर ही अपने इस वादे को भी पूरा करके दिखाया है।

3मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51,000 की

कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलने वाली राशि जो कि पहले 25000 थी, उसको बढ़ाकर 51,000 किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए इस राशि को 51,000 कर दिया।

4आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में इजाफा।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का वादा भी कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले महीने में ही पूरा करके दिखाया। किसानों की कर्जमाफी के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आशा कार्यकर्ताओं को एरियर सहित प्रतिमाह 2 हजार रु. प्रोत्साहन राशि देने का भी आदेश जारी कर दिया था।

5पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण

कांग्रेस के वचनपत्र में एक जो सबसे चौकाने वाला वादा था, वह था गौशाला निर्माण का। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश की हर पंचायत के साथ ही शहरों में भी गौ शालाओं का निर्माण किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने इस विषय मे आदेश जारी कर दिए है और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है।

6अध्यात्म विभाग बनाने का आदेश

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किये गए वादे को पूरा करते हुए अध्यात्म विभाग बनाने के निर्देश दे दिए है। कमलनाथ सरकार ने आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर अध्यात्म विभाग बनाने का वादा किया है।

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा शिप्रा ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनानेऔर पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा।

7प्रदेश के लोगों को रोजगार में 70% आरक्षण

सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 70% स्थानीय आरक्षण देने का वादा किया था। सरकार ने कहा कि प्रदेश में लगे उद्द्योगों को सरकार से मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए 70% स्थानीय लोगों को रोजगार देने होगा। कमलनाथ के इस फैसले से जहां प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलने की खुशी है तो वहीं विपक्ष ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

8बंद होगा व्यापम

शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला, व्यापम को कमलनाथ सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है। कमलनाथ सरकार व्यापम को बंद कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग जैसे संस्था बनाने पर विचार कर रही है।

9दीनदयाल वनांचल योजना को किया बंद

सत्ता में आने साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई दीनदयाल वनांचल योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

10मंत्रियों के बजाय कलेक्टर करेंगे घोषणाएं

एक नई मिसाल कायम करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित घोषणाएं मंत्रियों की जगह कलेक्टरों द्वारा करवाने के आदेश जारी किए है। इससे पहले सरकार की योजनाओं से संबंधित सभी घोषणाएं संबंधित विभाग के मंत्री ही किया करते थे।

मध्यप्रदेश में सत्यापन के बाद एक बार फिर शुरु हुई मीसाबंदी पेंशन

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madhya pradesh congress chief kamalnath

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बुधवार को मीसाबंदियों की रोकी गई पेंशन एक बार फिर शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश जारी कर कहा है कि मीसाबंदियों के भौतिक सत्यापन के बाद पेंशन फिर से शुरू की जाए।

वहीे इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार के आदेश की कॉपी ट्वीट करते हुए लिखा है- टू टर्न।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान वर्ष 1975 से 1977 के बीच लगे आपातकाल के दौरान जेल में डाले गए लोगों को मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में करीब 4000 लोगों को 25,000 रुपये की मासिक पेंशन दी जाती है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने साल 2008 में इस योजना की शुरूआत की थी। 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियो को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया था। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये की गई थी। इसके बाद 2017 में पेंशन राशि को बढ़ाकर 25 हजार कर दी गई। कांग्रेस सरकार ने पेंशन वितरण रोके जाने का प्रमुख कारण महालेखाकार की उस रिपोर्ट को बताया है जिसमें महालेखाकार ने पिछले वित्तीय वर्षों में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि में भुगतान को बजट प्रावधान से अधिक का बताया था।

सामान्य प्रशासन विभाग ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के राशि के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे। 29 दिसंबर को जारी आदेश में कहा गया था कि ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है। साथ ही लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है। अत: आगामी माह से लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि राशि का वितरण अगली कार्यवाही होने के पश्चात किया जाए।’ इसके बाद मीसा बंदियों को पेंशन मिलना बंद हो गई थी।

भाजपा नेताओं ने सरकार के इस फैसले को विरोध करते हुए इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया था। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि भाजपा से जुड़े लोग फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे हैं। इस संबंध में पिछले सप्ताह ग्वालियर की हाईकोर्ट बैंच में एक याचिका भी दायर की गई थी। अब सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 15 जनवरी को देर शाम जारी किए गए आदेश में समस्त आयुक्तों और और कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि लोकतंत्र सेनानियों के भौतिक सत्यापन आश्यकता है। राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि लोकतंत्र सेनानी या दिवंगत लोकतंत्र के आश्रित का भौतिक सत्यापन की कार्यवाही स्‍थल पर जाकर कराई जाए। उनके बारे में स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद लोकतंत्र सेनानियों को फिर से निधि दी जाए।

सरकार संभालते ही कमलनाथ ने फिजूलखर्ची पर लगाई रोक

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photograph of kamalnath
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

प्रदेश में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की कवायद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री कमल नाथ के निर्देश पर वित्त विभाग ने विभिन्न खर्चों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश जारी कर दिये हैं। प्रदेश में अब नवीन वाहनों की खरीदी पर इस वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एयरकण्डीशनर समेत अन्य विलासिता संबंधी उपकरणों की खरीदी पर भी रोक लगा दी गई है।

वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश में राजस्व विभाग (शासकीय मुद्रणालय) को छोड़कर अन्य विभागों, निगम, मण्डलों आदि द्वारा वर्ष 2019 के लिये डायरी, कैलेण्डर के मुद्रण पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी के साथ, कार्यालयों की मरम्मत, संधारण, कार्यालयीन सामग्री और अन्य कार्यों पर वित्तीय नियंत्रण रखने के लिये खर्चे की सीमा तय की गई है। वर्ष 2018-19 का इनकार्यों के लिये आवंटित बजट अथवा वर्ष 2017-18 में इन कार्यों पर हुए व्यय में से जो भी कम होगा उसे खर्चे की सीमा बना दिया गया है। खर्चे की यह सीमा कार्यालयीन फर्नीचर, पुस्तकें, पत्रिकाएँ और लेखन सामग्री की खरीदी, आतिथ्य व्यय, मुद्रण एवं प्रकाशन, कंसल्टेंसी सर्विसेस, विशेष सेवाओं के लिये मानदेय, सुरक्षा, सफाई, परिवहन व्यवस्था, मशीन और उपकरणों का संधारण, वाहन संधारण, फर्नीचर संधारण आदि के लिये निर्धारित की गई है।

अस्पताल, आंगनवाड़ी, आश्रमों पर बैन नहीं

राज्य सरकार ने आवश्यक श्रेणी में व्ययों को प्रतिबंध से छूट प्रदान की है। विदेशी सहायता प्राप्त परियोजनाएँ, केन्द्रीय क्षेत्रीय योजनाएँ और प्राप्त केन्द्रीय अनुदान को प्रतिबंध से छूट दी गई है। इसके साथ ही, छात्रावास, आश्रम विद्यालय, अस्पताल, जेल, पशु चिकित्सालय और आँगनवाड़ी में लगने वाली आवश्यक दवाइयाँ और खास सामग्री की पूर्ति मद में भी व्यय सीमा में प्रतिबंध की छूट रहेगी। राज्य शासन ने अस्पतालों में उपचार कार्य में उपयोग में आने वाली सामग्री लिनिन, गॉज, बैण्डेज और अन्य सामग्री की खरीदी पर भी छूट प्रदान की है। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में मितव्ययता संबंधी आदेश के साथ विभागों को आवश्यक निर्देश भी जारी किये हैं।

मोदी बोले- यूरिया मांगा तो किसानों पर चली लाठियां, कमलनाथ का पलटवार

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उप्र के ग़ाज़ीपुर में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन राज्यों में सरकार बदलते ही यूरिया के लिए लाठियां चलने लगी हैं। कर्नाटक में कर्ज माफी का किसानों को लालीपाप पकड़ा दिया गया। लाखों किसानों का कर्ज माफ होना था लेकिन सिर्फ आठ सौ लोगों को फायदा मिला। किसानों के साथ किस तरह का धोखा हो रहा है, उसे समझना चाहिए। जिनका कर्ज माफ नहीं हुआ, उनके पीछे पुलिस छोड़ दी गई है। तात्कालिक लाभ के लिए जो वादे और फैसले होते हैं, उनसे देश का फायदा नहीं होता। कांग्रेस ने 2009 के चुनाव से पहले भी कर्ज माफी का वादा किया था लेकिन किसानों को धोखा दिया गया।

इस पर प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान भी विभिन्न सभाओं में प्रदेश की जनता को भ्रमित व गुमराह करने वाली तमाम वो बातें कही जो सत्य से परे थी। जनता पर इनका कोई असर नहीं पढ़ा। चुनाव परिणाम से सब स्पष्ट हो गया। जनता ने कांग्रेस के प्रति विश्वास व्यक्त किया। अब मोदी ने प्रदेश की नवनिर्वाचित कांग्रेस की सरकार की छवि बिगाड़ने का प्रयास किया है।

नाथ ने कहा कि मोदी जी को राजनीतिक मतभिन्नता छोड़ प्रदेश की 12 दिन की कांग्रेस की सरकार की दिल खोलकर प्रशंसा करना चाहिये थी कि सरकार ने किसानों के 2 लाख तक के कर्ज़ माफ़ी की घोषणा पूरी कर अपना वादा निभाया। उन्होंने यूरिया संकट पर भी अपने संबोधन में ग़लतबयानी की। उन्हें तो इस पर भी प्रदेश सरकार के तूफ़ानी व सतत प्रयासों की तारीफ़ करना थी, जिसके कारण इस संकट पर काफ़ी हद तक क़ाबू पा लिया गया। यूरिया संकट प्रदेश सरकार की देन नहीं है। हम इस पर शुरू से ही कोई राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं करना चाहते है। यह हमारी नाकामी नहीं , यह केन्द्र सरकार का विषय है। हमें हमारी माँग के अनुरूप आपूर्ति हो जाती तो यह संकट कभी होता ही नहीं।

नाथ ने कहा कि मैंने अधिकारियों को खुलेआम चेताया था कि मेरी सरकार किसानों की सरकार है। यूरिया की लाइन में लगे किसानों के ऊपर लाठियाँ या किसी प्रकार का दमन में बर्दाश्त नहीं करूँगा। यह पूर्व की भाजपा सरकार नहीं है, जिसमें किसानों के सीने पर गोलियाँ तक दाग़ी गई थीं।

नाथ ने कहा कि जहाँ तक कालाबाज़ारी की बात है तो यह शिवराज सरकार के समय से धड़ल्ले से जारी रही और कालाबाज़ारियों को खुला संरक्षण मिलता रहा लेकिन यह हमारी सरकार में यह बिलकुल नहीं चलेगा। यूरिया- खाद की कालाबाज़ारी कांग्रेस सरकार में बिल्कुल नहीं चलेगी। कोई कितना भी बड़ा हो, यदि इसमें लिप्त हो तो उस पर कड़ी कार्यवाही की जाए। हमारी सरकार में कालाबाज़ारी जेल में होंगे।

मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की शाखाओं में शामिल होने पर प्रतिबंध की तैयारी

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अपने वचन के मुताबिक कांग्रेस सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के संघ की शाखाओं में शामिल होने पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी कवायद करने लगा है। मप्र में कर्मचारियों पर संघ की शाखा में बैन लगाने के लिए केंद्र सरकार के आदेश को आधार बनाया जाएगा। इसके अलावा सरकारी परिसरों में संघ की शाखा लगाने पर भी बैन लगाया जाएगा।

कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में इन दोनों कार्यों का उल्लेख किया था, जिस पर खूब बवाल मचा था। भाजपा ने इसे संघ पर प्रतिबंध लगाने से जोड़ते हुए चुनावी मुद्दा बनाया था, जिसका कुछ हद तक उसे फायदा भी हुआ।, लेकिन कांग्रेस की सरकार बनते ही अब इस वचन पर अमल करने के लिए मंत्रालय में तैयारी तेज हो गई है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद पत्रकारवार्ता में भी इस बात के संकेत देते हुए कहा था कि राज्य सरकार कोई नया काम नहीं करने जा रही है। केंद्र और गुजरात सरकार ने यह प्रतिबंध पहले से लागू कर रखा है।

केंद्र ने 1993 में लगाया था प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद कर्मचारियों के संघ की शाखा में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाया था। गृह मंत्रालय ने संघ की गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे।

2000 में दिग्विजय ने जारी किया था आदेश

केंद्र सरकार के आदेश का पालन करने के लिए ही वर्ष 2000 में दिग्विजय सरकार में एक आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा।”

2006 में शिवराज ने हटाया था प्रतिबंध

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में सितंबर 2006 में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था। इसमें दिग्विजय सरकार के आदेश को शिथिल कर दिया गया था।

मीसाबंदी की पेंशन पर सीएम लेंगे फैसला

मीसाबंदियों की पेंशन बंद करने के लिए विधानसभा में विधेयक लाने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ फैसला करेंगे। नाथ को ही यह फैसला करना है कि इसे कब से बंद करना है, लेकिन इसके लिए सरकार को कानून समाप्त करने के लिए विधानसभा जाना पड़ेगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री सचिवालय को विभाग की प्रमुख गतिविधियों का ब्यौरा भेजा है, जिसमें मीसाबंदी पेंशन भी शामिल है।

विभागों से मंगवाई जानकारी

मुख्यमंत्री कमलनाथ सभी विभागों की समीक्षा भी करेंगे। इस समीक्षा के लिए सभी विभागों से उनके प्रमुख कामकाज, योजनाओं और बजट को लेकर जानकारी मांगी गई है।

कमलनाथ ने अपने कैबिनेट में शामिल किए 28 मंत्री, देखें पूरी लिस्ट

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मध्यप्रदेश के भोपाल स्तिथ राजभवन में आज प्रदेश सरकार के भावी मंत्रियों ने शपथ ली। मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपनी टीम के नाम तय करने में तगड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा है। मंत्रियों के नामों पर सहमति बनाने के लिए कमलनाथ ने सोमवार देर रात 2.00 बजे मंत्रिमंडल की सूची को अंतिम रूप दिया। कमलनाथ ने अपनी टीम में 28 मंत्री बनाए है। इस सभी मंत्रियों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया है। सूची को अंतिम रूप देने के लिए कमलनाथ ने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रदेश के नेताओं के साथ मंथन किया। इस दौरान पूर्व मुक्यमंत्री दिग्विजय सिंह और चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस मंत्रिमंडल को मिशन 2019 की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। मालवा-निमाड़ अंचल को सबसे ज्यादा 9 मंत्री मिले हैं। मध्यक्षेत्र से 6 और ग्वालियर-चंबल से 5 मंत्री बनाए जा रहे हैं।

शपथ समारोह आज 3 बजे से राजभवन में हुआ। कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सिंधिया समेत सभी इस कार्यक्रम में शामिल हुए ।

मंत्रिमंडल की पूरी लिस्ट

जेनिफर नामित विधायक : जबलपुर की जेनिफर निवाइस को एंग्लो इंडियन वर्ग में नामित विधायक नियुक्त किया जा रहा है।

1- डॉ। गोविंद सिंह- लहार से सातवीं बार निर्वाचित। पहले कांग्रेस सरकार में गृह और सहकारिता मंत्री रहे।

2- आरिफ अकील- भोपाल उत्तर से छठवीं बार जीते। अल्पसंख्यक कल्याण एवं गैस राहत एवं पुनर्वास मंत्री रह चुके हैं।

3- सज्जन सिंह वर्मा- सोनकच्छ से चौथी बार विधायक बने। नगरीय प्रशासन मंत्री रह चुके हैं। अजा का बड़ा चेहरा।

4- बाला बच्चन- राजपुर से पांचवीं बार विधायक बने। पहले खेल एवं युवा कल्याण और स्वास्थ्य मंत्री रहे।

5- विजयलक्ष्मी साधौ – महेश्वर से तीन बार विधायक रहीं। एक बार राज्यसभा सदस्य और मंत्री रहीं।

6- हुकुम सिंह कराड़ा- शाजापुर से पांचवीं बार के विधायक, पहले उर्जा मंत्री रहे, मालवा का बड़ा चेहरा

ये बनेंगे पहली बार मंत्री –
7- तरूण भनोट- जबलपुर पश्चिम से दूसरी बार विधायक। कमलनाथ के करीबी। ब्राह्मण चेहरा।

8- लखन घनघोरिया- जबलपुर पूर्व से दूसरी बार विधायक। कमलनाथ के करीबी। अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व।

9- ब्रजेंद्र सिंह राठौर-पृथ्वीपुर से पांचवीं बार के विधायक। दिग्विजय गुट के माने जाते हैं। बुंदेलखंड का बड़ा चेहरा।

10- लाखन सिंह यादव- भितरवार विधानसभा से लगातार चौथी बार विधायक बने। सिंधिया गुट में माने जाते हैं।

11- तुलसी सिलावट- सांवेर से चौथी बार के विधायक। मालवा का एससी चेहरा, सिंधिया गुट में माने जाते हैं।

12- गोविंद सिंह राजपूत- सुरखी से तीसरी बार के विधायक। बुंदेलखंड के युवा नेता। सिंधिया गुट में माने जाते हैं।

13- ओमकार मरकाम- डिंडौरी से लगातार तीसरी बार विधायक। आदिवासियों में अच्छी पकड़। कमलनाथ समर्थक।

14- सुखदेव पांसे-मुलताई से तीसरी बार विधायक बने। युवा चेहरा। कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं।

15- प्रभुराम चौधरी- सांची से तीसरी बार के विधायक, अनुसूचित जाति से प्रतिनिधित्व। सिंधिया समर्थक।

16- जयवद्र्धन सिंह-राधौगढ़ से लगातार दूसरी बार विधायक। दिग्विजय सिंह के पुत्र। युवा चेहरा।

17- हर्ष यादव- देवरी से दूसरी बार विधायक बने। यादव समाज का प्रतिनिधित्व। दिग्विजय समर्थक।

18- कमलेश्वर पटेल- सिंहावल से लगातार दूसरी बार विधायक। विंध्य से ओबीसी चेहरा। कमलनाथ करीबी।

19- सचिन यादव- कसरावद से दूसरी बार विधायक। दिग्गज नेता रहे सुभाष यादव के पुत्र और अरूण यादव के भाई

20- पीसी शर्मा- भोपाल दक्षिण-पश्चिम से जीते। दो बार विधायक रहे। ब्राह्मण चेहरा। दिग्विजय सिंह के करीबी।

21- सुरेंद्र सिंह बघेल- कुक्षी से दूसरी बार जीते। एसटी युवा चेहरा। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह के पुत्र। कमलनाथ समर्थक।

22- जीतू पटवारी- राउ से दूसरी बार विधायक। मालवा का तेज तर्रार चेहरा। राहुल गांधी के नजदीकी।

23- उमंग सिंघार- गंधवानी से तीसरी बार जीते। पूर्व उपमुख्यमंत्री जमुनादेवी के भतीजे। दिग्विजय के समर्थक।

24- प्रद्युम्न सिंह- ग्वालियर से दूसरी बार विधायक। मंत्री जयभान सिंह पवैया को हराया। सिंधिया समर्थक।

25- प्रदीप जायसवाल- वारासिवनी से चौथी बार विधायक। कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय जीते। कमलनाथ समर्थक।

26- महेंद्र सिसोदिया- बमौरी से दूसरी बार विधायक। ग्वालियर क्षेत्र का क्षत्रिय चेहरा। सिंधिया समर्थक।

27- इमरती देवी- डबरा से तीसरी बार विधायक। एससी का महिला चेहरा। सिंधिया गुट की मानी जाती हैं।

28- प्रियव्रत सिंह- खिलचीपुर से दूसरी बार विधायक बने। क्षत्रिय युवा चेहरा। दिग्विजय सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं।

मध्यप्रदेश में अकेले पड़ते शिवराज, अपने भी नही दे रहे साथ।

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फाइल फोटो

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते हुए तीसरा विधानसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतर रहे है। पिछले दो चुनावों की तरह इस बार भी भाजपा शिवराज भरोसे मैदान में उतर रही है। टिकट वितरण से लेकर घोषणा पत्र तक, कोई भी फैसला शिवराज सिंह की सलाह के बिना नही हो रहा। आरएसएस द्वारा 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों की टिकट काटने के सुझाव को भी शिवराज सिंह ने हासिये पर रख दिया। शिवराज सिंह चौहान की इजाजत के बिना मध्यप्रदेश भाजपा का एक पत्ता भी नही हिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को तक अपनी बहू को टिकट दिलाने के लिए मौन व्रत धारण करना पड़ गया। तो वहीं दिग्गज नेता सरताज सिंह की तो दाल ही नही गली। आलम यह है कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और अमित शाह के बेहद करीबी नेता कैलाश विजयवर्गीय को भी अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए अपनी सीट त्याग करनी पड़ गयी।

एक ओर शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में अपने आगे किसी की चलने नही दे रहे तो वहीं लोग भी अब शिवराज सिंह चौहान से दूरी बना रहे है। चुनाव में जीत हुई तो ताज शिवराज सिंह चौहान के सर पे होगा लेकिन अगर हारी तो हार का ठीकरा भी शिवराज सिंह के सर ही फोड़ा जाएगा।

लगातार 14 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद शिवराज का जादू अब मध्यप्रदेश में फीका पड़ता जा रहा है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी अब हार की सुगबुगाहट होने लगी है। यही कारण है कि गुजरात मे 34 और कर्नाटक में 21 रैली करने वाले प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश में एक दर्जन से भी कम रैली करने वाले है। मध्यप्रदेश में अभी तक आरएसएस भी सक्रिय भूमिका में नही आया है। अचार सहिंता लगने के बाद से शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा में से भी भीड़ गायब होने लगी थी। जिसके कारण मुख्यमंत्री को यह यात्रा बीच मे ही रोकनी पड़ गयी।

सरकार विरोधी लहर से पार पाना शिवराज के लिए मुश्किल

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार को 13 साल और भाजपा सरकार को लगभग 15 साल होने को है। जनता, कर्मचारी वर्ग और यहां तक कि मीडिया भी शिवराज के चेहरे से ऊब चुका है। भाजपा नेताओं के कार्यक्रम में खाली कुर्सी, स्पाक्स का चुनावी मैदान में उतरना और मीडिया में दिखाए गए सर्वे तो यही इशारा कर रहे है। प्रदेश का जो मीडिया अभी तक शिवराज गाथा गए नही थकता था, उसी मीडिया ने संबित पात्रा जैसे प्रवक्ता को होटल के रूम में बैठने को मजबूर कर दिया है।

हार का डर अब पार्टी में बैठे लोगों को भी होने लगा है। तभी कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के नेता पाला बदल रहे है। टिकट घोषित होने से पहले ही भाजपा के दो मौजूदा विधायक और खुद शिवराज सिंह चौहान के साले ने उनका साथ छोड़ कांग्रेस का हांथ थाम लिया है। भाजपा को प्रदेश की सत्ता पर बैठने वाला किसान, युवा और सवर्ण वर्ग भी अब सरकार से रूठा बैठा है।

कांग्रेस की तिकड़ी कर सकती है कमाल

2003 विधानसभा चुनाव हारने के बाद से मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के आरोप लगते आए है। भाजपा की जीत के पीछे भी कांग्रेस के नेताओं का बागी होना एक बड़ा कारण रहा है। लेकिन इस बार हालात पिछले 3 चुनावों से काफी अलग है। कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय समेत कांग्रेस के सभी नेता अब एक मंच पर आ रहे है, एक लाइन पर चल रहे है और एक ही बात बोल रहे है। टिकट बटवारे के बाद जो अंतरकलह कभी कांग्रेस में दिखाई देती थी वह अब भाजपा में दिखाई दे रही है। कांग्रेस पार्टी में दिख रही इस एकता का बड़ा श्रेय समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह को जाता है। दिग्विजय सिंह ने न सिर्फ प्रदेश भर का दौरा कर कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया बल्कि टिकट न मिलने पर नाराज कांग्रेस नेताओं को भी पार्टी के साथ लाए।

सोशल वाणी: कमलनाथ के खिलाफ फेक न्यूज़ फैलाते पकड़े गये संबित पात्रा।

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bjp spokeperson sambit patra at bjp headquaters in new delhi
संबित पात्रा की फाइल फोटो

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मध्यप्रदेश के मीडिया प्रभारी संबित पात्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का एक विडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया जिसपर लोगों ने संबित पात्रा पर फेक न्यूज़ फ़ैलाने का आरोप लगाया. विडियो में कमलनाथ कुछ कार्यकर्ताओं से आरएसएस को बाद में देख लेने की बात कर रहे है. कमलनाथ ने विडियो में कहा कि आरएसएस के लोग जो प्रदेश में बीजेपी का प्रचार कर रहे है, उनका एक ही स्लोगन है ‘अगर हिन्दू को वोट देनी है तो हिन्दू शेर मोदी को वोट दो और अगर मुस्लिम को वोट देना है तो कांग्रेस को वोट दो’. यह आरएसएस की रणनीति है और इसमें आप लोगों को बड़ा सतर्क रहना पड़ेगा, यह आपको उलझाने की कोशिश करेंगे. हम निपट लेंगे इनसे बाद में लेकिन मतदान के दिन तक आपको सब-कुछ सहना पड़ेगा.”

कमलनाथ का यह विडियो शेयर करते हुए संबित पात्रा ने लिखा ” अभी अस्थायी जनेऊ पहन रखा है, निपट लेंगे इनसे बाद में. इन नकली हिन्दुओं की असलियत एक बार फिर सामने आ गयी है. कमलनाथ जी ने मुस्लिम लोगों से वादा किया है कि वह हिन्दुओं को चुनाव बाद देख लेंगे, फिलहाल मुस्लिमों को कांग्रेस के साथ रहना होगा.”

संबित पात्रा के इस ट्वीट पर पत्रकार अभिसार शर्मा ने लिखा “संबित, आप खुद में एक बेज्जती हो. कमलनाथ विडियो में आरएसएस से निपटने की बात कर रहे है हिन्दुओं से निपटने की नही.

संबित पात्रा के ट्वीट के जवाब में एक ट्विटर यूज़र ने लिखा ” संबित जी, आरएसएस को हिन्दू बता रहे हो. क्या ऐसे ही ठगी करके डाक्टर बने थे ? वहीं एक एक अन्य ट्विटर यूज़र ने लिखा “इस देश मे तुमहारे सिवा कोई हिन्दू ही नही ओर भाजपा से बड़ा कोई ठेकेदार भी नही है।”

पत्रकार रोहिणी सिंह ने भी संबित पात्रा पर झूठी ख़बरें फ़ैलाने का आरोप लगाते हुए लिखा “आश्चर्यजनक है कि संबित झूठी खबर फैला रहे है, संबित जैसा बोल रहे है विडियो में वैसा कुछ भी नही है.”

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने वचन पत्र में भी अपने मित्र संजय गांधी को याद रखा है

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल की उपेक्षा को लेकर लगातार कांग्रेस पर किए जा रहे हमलों के बाद कांग्रेस अभी पूरी तरह से गांधी-नेहरू से बाहर तो नहीं निकल पाई है लेकिन, उसने पटेल के अलावा देवी अहिल्या बाई, स्वामी विवेकानंद, और टंटया भील जैसे नामों को भी अपनाना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी किए गए घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ता पर खास तौर पर जोर दिया गया है।


कांग्रेस  ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को वचन पत्र का नाम दिया है। इस वचन पत्र में प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने मित्र संजय गांधी को भी जगह दी है। संजय गांधी की विधवा मेनका गांधी के सास इंदिरा गांधी का घर छोड़ दिए जाने के बाद कांगे्रस ने भी संजय गांधी का नाम लेना बंद कर दिया था। वचन पत्र में विधानसभा की कार्यवाही को हंगामे से बचाने के लिए कार्यबाधित होने पर सदस्यों को उस दिन का भत्ता न देने प्रावधान लागू करने की घोषणा की गई है। जनता भी विधानसभा में मंत्रियों से सीधे सवाल पूछ सके,इसके लिए जनता प्रहर शुरू करने का एलान किया गया है।

किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज ही माफ होंगे

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के शिवाजी नगर स्थित कार्यालय में चुनाव का वचन पत्र जारी करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता मौजूद थे। चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस वचन पत्र पर कहा कि इसमें दर्ज एक-एक अक्षर घोषणा नहीं है, कांग्रेस का वचन है। हर वचन को सरकार बनने के बाद समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। वचन पत्र में कांग्रेस ने किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज माफ करने का वादा किया है। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश भर में घूम-घूमकर अपनी सभाओं में किसानों का पूरा कर्जा दस दिन में माफ करने की बात कह रहे हैं। राहुल गांधी की इस मंशा के अनुरूप ही छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफी की कोई सीमा निर्धारित नहीं की है। दस दिन का वादा भी किया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के वचन पत्र में दस दिन की समय-सीमा का उल्लेख भी नहीं किया गया है। यद्यपि उस कर्ज को भी माफ करने का वचन कांग्रेस ने दिया है, जो कालातीत हो चुका है। किसानों का बिजली का बिल आधा किए जाने के लिए दस हॉर्सपावर की सीमा निर्धारित की गई है। लगभग डेढ़ दर्जन फसलों के अलावा दूध पर भी पांच रूपए प्रति लीटर का बोनस दिए जाने का वचन दिया गया है। किसानों को फसल बीमा का लाभ ग्रामसभा की अनुशंसा पर दिलाए जाने का वचन भी दिया गया है। राज्य कृषि विकास आयोग का गठन किए जाने का उल्लेख भी किया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि किसानोंे को उनकी उपज को मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकने दिया जाएगा।

सरकारी नौकरयों में नहीं घुस सकेंगे दूसरे राज्यों के बेरोजगार

कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में युवाओं को नौकरी न दिला पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का कोई सीधा वादा नहीं किया है। युवाओं को उद्योगों में रोजगार मिल सके इसके लिए उद्योगपतियों को वेतन अनुदान दिए जाने की योजना का एलान किया गया है। इस योजना का लाभ उन उद्योगपतियों को दिया जाएगा, जो पचास करोड़ के निवेश से नया उद्योग लगाएगें अथवा उद्योग का विस्तार कर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देंगे। सरकार रोजगार के एवज में वेतन का पच्चीस प्रतिशत अथवा दस हजार रूपए प्रतिमाह, जो भी कम उद्योगपति को देगी। सरकारी नौकरियों में राज्य के बाहर के उम्मीदवारों का चयन रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा है कि वे ही लोग शासकीय अथवा सार्वजनिक उपक्रमों में नौकरी के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने दसवीं अथवा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा मध्यप्रदेश से उत्तीण की हो। कांग्रेस ने व्यापमं को बंद कर इसके स्थान पर राज्य कर्मचारी चयन आयोग के गठन का एलान किया है। परिवार की छह लाख से कम बार्षिक आय होने पर चयन परीक्षा शुल्क से छूट देने का वादा किया गया है। अधिकतम आयु सीमा में दो साल की वृद्धि देने का भी उल्लेख वचन पत्र में है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागी रहे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी न दे पाने की स्थिति में हर माह पंद्रह हजार रूपए सम्मान निधि देने का उल्लेख भी वचन पत्र में है।

लड़कियों की पीएचड़ी तक की शिक्षा मुफ्त

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों के लिए चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं के जवाब में कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में एक लाइन में लिखा है कि कन्याओं को स्कूल से पीएचड़ी तक नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। कॉलेज जाने वाली छात्राओं को दो पहिया वाहन के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण दिलाए जाने का भी वचन दिया गया है। महिला अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ ठोस कानून बनाने की बात कही गई है। ज्ञातव्य है कि महिला अपराधों के मामले में देश में मध्यप्रदेश का पहला नंबर होने पर कांग्रेस लगातार शिवराज सिंह चौहान पर हमले कर रही है। महिला अपराधों को कांग्रेस ने चुनाव का मुद्दा भी बनाया है। कांग्रेस का वचन पत्र 75 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित है। इसमें रामपथ गमन का निर्माण और पंचायत स्तर पर गौशालाएं खोलना भी शामिल है। सपाक्स की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने सरकार में आने पर सामान्य वर्ग आयोग के गठन का भी एलान किया है। राज्य के असंतुष्ट कांग्रेस ी नेताओं को साधने के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर विधान परिषद के गठन का कार्ड खेला है। डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस सस्ता करने का वचन भी दिया गया है।

वचन पत्र में नेहरू नहीं संजय गांधी का उल्लेख है

कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस भवन में टंगी तस्वीरों में भी बदलाव देखा गया था। इंदिरा-राजीव के साथ-साथ कमलनाथ ने संजय गांधी की तस्वीर को भी कांग्रेस के दफ्तर में जगह दी है। कांग्रेस के वचन पत्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू के उल्लेख कहीं नहीं है। लेकिन, इंदिरा-राजीव के साथ संजय गांधी का उल्लेख किया गया है। संजय गांधी के नाम पर पर्यावरण मिशन शुरू करने की बात वचन पत्र में कही गई है। समग्र सामाजिक सुरक्षा परिवार कार्यक्रम को वैधानिक मान्यता हेतु राजीव गांधी स्व निराकरण सेवा नाम से अधिनियम बनाया जाएगा। राजीव गांधी स्मार्टकार्ड देने की योजना भी प्रस्तावित है। इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत सौ यूनिट तक बिजली सौ रूपए प्रतिमाह की दर पर दिए जाने की घोषणा की गई है। वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान की सरकार दो सौ रूपए प्रतिमाह की निश्चित दर पर एक हजार वॉट पर बिजली दे रही है। घोषणा पत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर किसान पुत्र स्वावलंबन योजना की घोषणा की गई है। विवेकानंद के नाम पर युवा शक्ति निर्माण मिशन शुरू करने की घोषणा है। देवी अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर लड़कियों की नि:शुल्क शिक्षा योजना शुरू की जाएगी। रानी दुर्गावती के नाम से महिला पुलिस बटालियन बनाने की घोषणा की गई है।

विधायकों ने रोकी सदन की कार्यवाही तो नहीं मिलेगा भत्ता

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सबसे महत्वपूर्ण पहल सदन को जवाबदेह बनाने की दिशा में की है। सदन की कार्यवाही बिना बाधा के चले इसके लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि विधायकों द्वारा सदन की कार्यवाही बाधित किए जाने की स्थिति में उस दिन का भत्ता सदस्यों को नहीं दिया जाएगा। देश में कहीं भी अब तक इस तरह की व्यवस्था लागू नहीं है। राज्यसभा और लोकसभा में भी कार्यवाही बाधित होने पर भी भत्ता नहीं रोका जाता। विधायकों एवं मंत्रियों को प्रतिवर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण पटल पर रखना होगा। विधानसभा में जनता सीधे मंत्रियों से सवाल पूछ सके इसके लिए जनता पहर की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की गई है। इस तरह की व्यवस्था भी देश में कहीं भी प्रचलन में नहीं है।

MP Congress Manifesto: मध्यप्रदेश कांग्रेस का घोषणा पत्र

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कृषि एवं किसान सशक्तिकरण

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, डीजल, खाद, बीज के भाव बढ़ने से लागत बढ़ी है, उस अनुपात में उपज के दाम नहीं मिले हैं। कर्ज बढ़ा है, इन तनावों के चलते आत्‍महत्‍याएं बढ़ी हैं, भाजपा सरकार का किसानों की आय कोदो गुना करने का सपना खोखला साबित हुआ है। म.प्र. में कांग्रेस सरकार बनने पर कांग्रेस पार्टी वचन देती है कि-

1.1 सभी किसानों का 2.00 लाख तक कर्जमाफ करेंगे। जिसमें सहकारी बैंक एवं राष्‍ट्रीकृत बैंकों का चालू एवं कालातीत कर्ज शामिल रहेगा।

1.2 किसानों को शून्‍य ब्‍याज योजना का वास्‍तविक लाभ देने के लिए भुगतान की नई तिथि रबी फसल हेतु 31 मई तक और खरीफ फसल हेतु 31 दिसम्‍बर रखेंगे।

1.3 स्‍वामीनाथन आयोग की स्‍थापना यूपीए सरकार के समय हुई थी उनकी सिफारिशें किसानोंके हित में थीं, लेकिन भाजपा सरकार ने नहीं माना है। हमारी कांग्रेस सरकार बनने पर किसानोंको उनकी उपज का उचित मूल्‍य दिलायेंगे। मंडियों में समर्थन मूल्‍य से नीचे फसल नहीं बिकनेदेंगे , कांग्रेस सरकार किसानों को – गेहूँ, धान, ज्‍वार, बाजरा, मक्‍का, सोयाबीन, सरसों,कपास, अरहर, मूंग, चना मसूर, उड़द, लहसुन, प्‍याज, टमाटर तथा गन्‍ने पर बोनसदेगी।

1.4 ‘’इन्दिरा किसान ज्‍योति योजना’’ इस नई योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपावर तक के कृषिप्रयोजन के लिए आधी दर पर विद्युत प्रदाय करेंगे। अंत्‍योदय परिवार को पूर्वकी भांति पूरीछू ट रहेगी।

  • 10 हॉर्सपावर तक के अस्‍थायी विद्युत कनेक्‍शन में 50 प्रतिशत की छू ट दी जायेगी तथा कृषक इसे फसल की थ्रेशिग हेतु इस्‍तेमाल कर सकेगा।
  • किसानों को 3 फ़े स की बिजली प्रतिदिन 12 घंटे देना सुनिश्चित करेंगे, जिसमें कम से कम 8 घण्‍टे दिन का समय रहेगा। 1.5 नवीन फसल बीमा योजन कांग्रेस सरकार नवीन फसल बीमा योजना लायेगी, फसल बीमा की इकाई खेत रहेगा, जो किसान स्‍वेच्‍छा से इससे पृथक रहना चाहते हैं, उन्‍हे अनुमति रहेगी। बीमा कम्‍पनियों द्वाराकिसानों को बीमा पॉलिसी एवं प्रीमियम राशि की रसीद देना सुनिश्चित किया जायेगा।
  • नई फसल आने के पूर्व फसल क्‍लेम का वितरण करायेंगे।
  • ग्रामसभा की अनुशंसा पर फसल बीमा का लाभ किसान को देंगे ।
  • फसल बीमा से वंचित किसानों की फसल नुकसानी पर मुआवजा हेतु भू-राजस्‍व परिपत्र 6-4 में संशोधन करेंगे।
  • बिना कर्ज लिये खेती करने वाले कृषक को भी फसल बीमा से जोड़ेंगे।

1.6 कृषकों का जीवन एवं स्‍वास्‍थ्‍य बीमा किया जायेगा ।

1.7 किसानों को क्रेडिट कार्ड देंगे एवं क्रेडिट कार्डकी लिमिट बढ़ाने के लिए केन्‍द्र को लिखेंगे।

1.8 भूमि अधिग्रहण एक्‍ट 2014 (UPA सरकार के समय का मूल एक्ट) को अक्षरश: लागू किया जायेगा।

1.9 किसान आंदोलन के समय किसानों पर दर्ज आपराधिक व राजनैतिक आंदोलनों में दर्ज सभी प्रकरण वापिस लिये जायेंगे।

1.10 मंदसौर गोलीकांड लाठीचार्जकांड की पुन: न्‍यायायिक जांच माननीय उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश से कराने के लिए माननीय मुख्‍य न्‍यायाधीश से अनुरोध करेंगे।

1.11 किसान को उपज का भुगतान तीन दिन के भीतर जिस तरह किसान चाहेगा उस तरह करेंगे। आयकर विभाग द्वारा नगद भुगतान की निर्धारित सीमा को इस प्रयोजन हेतु बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे।

1.12 मंडियों में इलेक्‍ट्रॉनिक धर्मकांटा लगवायेंगे।

1.13 मंडी कमेटियों का पुनर्गठन करेंगे, मंडी अधिनियम में संशोधन करेंगे तथा प्रदेश एवं देश की अन्‍य मंडियों से जोड़ेंगे ।

1.14 मण्‍डी शुल्‍कों का युक्तियुक्‍तकरण करेंगे ।

1.15 मंडियों में ग्रेडिग प्‍लांट के लिए किसानों के स्‍वसहायता समूह/ समितियों को रिक्‍त भूमि आवंटित की जायेगी।

1.16 सूचना एवं परामर्शकेन्‍द्र खोलेंगे तथा मंडियों में ठहरने एवं रियायती दर पर भोजन की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.17 राज्‍य कृ षि विकास आयोग की स्‍थापना की जायेगी।

1.18 सरदार वल्‍लभ भाई पटेल किसान पुत्र स्‍वावलंबन योजना पात्रता- कृषक परिवार के शिक्षित बेरोजगार जो स्‍नातक हैं और वह स्वयं कृषि विकास एवं विस्‍तार तथा कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, सहायक कृषि उद्योग जैसे पशुपालन, डेयरी विकास, कुक्‍कुट पालन, आदि करने के इच्‍छुक हैं, जिनकी आयु सीमा 25 से 50 वर्षहै और वे ग्रामीण क्षेत्र के मूल निवासी हैं तथा अन्‍य किसी व्‍यवसाय/नौकरी से उनकी आय नहीं है, वे पात्र होंगे। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सुविधाएं:-

  •  रियायती ब्याज दर पर 5 वर्षके लिए रूपये 1 करोड़ तक का ऋण बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।
  •  कृषि प्रयोजन के लिए विद्युत में 25 प्रतिशत की छू ट देंगे।
  • सिंचाई कर में छू ट देंगे।
  • उपज के विक्रय की स्‍वतंत्रता तथा मंडी कर से छू ट देंगे।

1.19 गुणवत्‍तायुक्‍त और प्रमाणित बीज समय पर उपलब्‍ध करायेंगे, बीज उत्‍पादन सहकारी समिति और स्‍वसहायता समूह को जोड़ेंगे।

1.20 सहायक कृषि आधारित उद्योग जैसे- पशुपालन, डेयरी विकास, कुक्‍कुट पालन, म‍त्‍स्‍य पालन, उद्यानिकी के लाभ के लिए किसानों को प्रोत्साहन देंगे, रियायती ब्याज दर पर बैंक से 5 वर्ष का ऋण उपलब्‍ध कराएंगे।

1.21 दूध उत्‍पादक कृषक को दुग्‍ध संघ के माध्‍यम से प्रति लीटर 5 रूपये बोनस देंगे। दुधारू पशुओं का बीमा/ चिकित्‍सा सुविधा नि:शुल्क करेंगे।

1.22 खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्र, सिंचाई आदि में कर/शुल्‍क की दरों बढ़ोतरी नहीं करेंगे ।

1.23 कृषि यंत्र तथा किसानी के उपयोग की वस्‍तुओं व पशुआहार पर 0 प्रतिशत जीएसटी हेतु जीएसटी काउंसिल (भारत सरकार) को अनुशंसा भेजेंगे ।

1.24 अमानक खाद, बीज तथा कीटनाशक बेचने वाले विक्रेताओं के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही के लिए कानून बनायेंगे । खाद की आपूर्ति समय पर सहकारी समितियों के माध्‍यम से करायेंगे।

1.25 मिट्टी एवं बीज परीक्षण नि:शुल्क सुविधा प्रदाय करेंगे।

1.26 मेरा खेत मेरा तालाब – ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्‍तर को बनाये रखने के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।

1.27 सिंचाई के साधन की अनुदान राशि में बढ़ोतरी करेंगे।

1.28 कृषि पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति बनाएंगे, पूंजी उपलब्‍ध करायेंगे। उद्योग विभाग के अनुदान की पात्र सूची में कृषि आधारित उद्योगों को जोड़ेंगे।

1.29 फसल की अनुकू लता के आधार पर स्‍पेशल एग्रीकल्‍चर ज़ोन स्‍थापित करेंगे। 1.30 200 से 500 हेक्टर विशेष कृषि प्रक्षेत्र विकसित किये जायेंगे, जिसमें एक ही स्‍थान पर कृषि उपकरण, सिंचाई, विद्युत, बीजोपचार, मिट्टी परीक्षण, ग्रेडिग, भण्‍डारण की सुविधा रहेगी, इन क्षेत्रों को मण्‍डी कर से मुक्‍त रखेंगे।

1.31 कृ षि भूमि की रजिस्‍ट्री में छूट’- प्रदेश के किसानों को खेती के विस्‍तार हेतु पटवारी हल्‍के में कृषि भूमि खरीदने पर स्‍टाम्‍प 6 प्रतिशत तथा कृषक महिलाओं के लिए 3 प्रतिशत स्‍टाम्‍प शुल्‍क रहेगा। इसमें शर्त यह रहेगी कि संबंधित व्‍यक्ति की प्रमुख आय खेती से हो। कृषि भूमि की रजिस्‍ट्री के आधार पर ही स्‍वत: नामांतरण एवं सीमांकन की व्‍यवस्‍था करेंगे। पारिवारिक बंटवारे के अंतर्गत स्‍टाम्‍प शुल्‍क 1 प्रतिशत की दर से पंजीकृत करने की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.32 गौशाला- प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में गौशाला खोलेंगे एवं चिन्हित क्षेत्रों में गौ अभ्‍यारण्‍य बनाएंगे, इनके संचालन एवं रख रखाव के लिये सरकार अनुदान देगी ।

  • गौशाला में गोबर खाद, कण्‍डा व गौमूत्र एवं अन्‍य वस्‍तुओं का व्‍यावसायिक स्‍तर पर उत्‍पादन करायेंगे ।
  •  मुख्‍य मार्गों पर गौवंश के संरक्षण एवं देखभाल के लिए अस्‍थायी शिविर की व्‍यवस्‍था, दुर्घटना में घायल गायों का उपचार एवं मृत गायों के अंतिम संस्‍कार की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.33 पशुओं से फसल क्षति पर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को सरलीकरण करेंगे तथा वन/ राजस्‍व विभाग को जवाबदेह बनायेंगे।

1.34 कृषकों की निजी भूमि पर छोटे-बड़े झाड़ लगे हैं जिनको काटने की अनुमति नहीं मिलती और न ही कृषक कृषि एवं अन्‍य कार्यकर पाता है, ऐसे जटिल प्रावधानों को शिथिल करेंगे।

1.35 कृषकों की कन्‍याओं के विवाहों के लिए ‘’कृषक कन्‍या विवाह सहायता योजना’’ प्रारंभ करेंगे। प्रोत्‍साहन राशि 51,000 रु. दी जायेगी। इस लाभ के लिए 2.5 एकड़ तक के खाताधारक भी पात्र होंगे।

1.36 आधुनिक कृषि उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग किसान करें, इसके लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रोत्‍साहन कार्यक्रम चलायेंगे।

1.37 आधुनिक कृषियंत्र जिनकी लागत दो लाख तक है उस पर 50 प्रतिशत अनुदान देंगे।

1.38 बंजर, बीहड़ एवं दुर्गम क्षेत्र की भूमि को कृषि योग्‍य बनाने एवं एक फसली क्षेत्र को दो फसली, दो फसली क्षेत्र को तीन फसली क्षेत्र बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलायेंगे।

1.39 जैविक कृ षि उत्‍पाद – जैविक कृषि उत्‍पाद के प्रमाणीकरण के लिए केन्‍द्र स्‍थापित करेंगे तथा जैविक उत्‍पाद की ब्रांडिग करेंगे।

  • जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणित बीज एवं विपणन हेतुविशेष पैके ज देंगे।

1.40 किसानों को आधुनिक तकनीकी के आधार पर सब्‍जी, मसाला, औषधि फसल एवं फूल उत्‍पादन आदि के लिये पॉलीहाउस एवं ग्रीनहाउस की वर्तमान योजना के साथ-साथ छोटे आकार 1 हजार से 5 हजार वर्गफीट की यूनिट भी बनायेंगे तथा रियायती ब्याज दर पर बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।

1.41 किसानों के लिए नई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना प्रारंभ करेंग, इसके अंतर्गत 1000 रु. मासिक पेंशन देंगे, जिसके अंतर्गत 60 वर्षके एवं 2.5 एकड़ से कम भूमिधारक तथा अन्य किसी स्रोतों से आय न होने वाले किसान पात्र होंगे।

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