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Tuesday, August 11, 2020
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मध्यप्रदेश का सियासी ड्रामा जारी, कांग्रेस के पक्ष में वोट कर सकते है 9 भाजपा विधायक

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देर शाम जारी हुई मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यसूची से फ्लोर टेस्ट को शामिल नहीं किए जाने के बाद एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा जहां राज्यपाल से मिलकर कल ही फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग कर रही है तो वहीं कांग्रेस कह रही है कि विधानसभा की कार्यवाही अध्यक्ष ही तय करेंगे।

जहां एक ओर फ्लोर टेस्ट की उम्मीद में भाजपा के विधायक भी दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना हो चुके है तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया सलाहकार पंकज शर्मा ने ट्वीट कर बड़ी बात कही है। पंकज शर्मा ने ट्वीट करते हुए दावा किया है कि मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के 9 विधायक कर क्रास वोटिंग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि कल सोमवार को फ्लोर टेस्ट नहीं होगा।

इससे पहले भाजपा विधायक दल फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर राजभवन पहुंचा थे। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और बीजेपी के मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा सहित कई भाजपा नेता थोड़ी देर में राज्यपाल टंडन से मुलाकात कर कल ही फ्लोर टेस्ट कराया जाए। बता दें कि राज्यपाल के निर्देश के बावजूद विधानसभा की कार्यसूची से फ्लोर टेस्ट के विषय को शामिल नहीं किया गया है।


गौरतलब है कि कल से शुरू होने वाले बजट सत्र में विधानसभा की कार्यसूची से फ्लोर टेस्ट के विषय को को शामिल नहीं किया गया है। इस लिहाज से ये माना जा रहा है कि कल सदन में फ्लोर टेस्ट नहीं कराया जाएगा। बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन ने कल ही सीएम कमलनाथ को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा था कि किसी भी शर्त में 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराया जाना है, सदन की कार्यवाही किसी भी शर्त में स्थगित नहीं की जाएगी। वहीं, विधानसभा की कार्यसूची राज्यपाल के अभिभाषण के बाद भाषण पर कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रस्ताव है।

वहीं, दूसरी ओर फ्लोर टेस्ट कराए जाने को लेकर कहा है कि कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि हमारे 16 विधायकों को भाजपा ने बंधक बना लिया है और इन हालातों में क्या फ्लोर टेस्ट करना संविधानिक होगा? इससे पहले आज ही सभी विधायकों ने एक पत्र जारी कर कहा था कि हम विधानसभा अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत होने में असमर्थ हैं, कृपया इसे ही हमारा इस्तीफा समझा जाए।

भाजपा ने नही निभाया वादा, अब कांग्रेस बनाएगी “राम वन गमन पथ”

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने श्रीलंका दौरे के दौरान मध्यप्रदेश में सीता माता का भव्य मंदिर बनाने की घोषणा की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि जिस जगह से रावण ने मां सीता को बंदी बनाया था उसी जगह यह मंदिर बनाया जाएगा।

घोषणा किये हुए सालों हो गए लेकिन इस वादे पर कोई अमल नही किया गया। जिसके बाद अब मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री चौहान पर हमला बोला है।

शर्मा ने कहा कि “पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने श्रीलंका दौरे के दौरान सीता माता का विशाल मंदिर बनाने की घोषणा करके बहुत वाहवाही लूटी थी लेकिन आज तक कुछ नही हुआ। हमने ‘राम वन गमन पथ’ पर काम शुरू कर दिया है। भाजपा सिर्फ वादे और घोषणाएं करती है, हम सारे धार्मिक कार्यों को पूरा करते है।”

Alirajpur – The poorest district in Madhya Pradesh and in India

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When we topic of development comes up, the governments keep showing the pictures of bustling cities, ‘clean’ industrial towns and some parts of villages where the ray of development has reached. The governments change but the trend remains the same. The neglected districts like Siddharth Nagar (Read here: The story of neglected birthplace of Gautam Buddha, Siddharth Nagar) keep praying for a slight recognition from the government. Alirajpur is one of those neglected districts.

Alirajpur is notorious for being the poorest district in India with 76.5% people living below poverty line. Based on the Multidimensional Poverty Index 2018 data, Madhya Pradesh is the 4th poorest state in India. Alirajpur was a princely state in the Malwa region before India’s independence. The economy of Alirajpur is predominantly dependent on Agriculture, the cash crop being mangoes. Recently, it was in the limelight for a 30K bribery case. The Lokayukta police Wednesday caught an employee of the Madhya Pradesh Panchayat Department in Alirajpur district allegedly taking a bribe of Rs 30,000.

Alirajpur fulfills all the duties of a democratic district. This state election saw a rise of more than 4% in voting and reached more than 60%. This turnout was much higher than the average. Congress’ Mukesh Rawat won the seat by a margin of about 22000 votes.

Despite fulfilling all the responsibilities of a democratic district, why is it the poorest district? Why did the development didn’t reach the lowest strata of society? Madhya Pradesh had a stable government of BJP since 2005. Besides, BJP is in power in the center. Then, why was this district neglected? Whatever the case might be, people haven’t lost their hope. They still vote and this time, they voted for Congress. Let’s see if Congress becomes a savior for the people of Alirajpur or it becomes a BJP 2.0 version. Only time will tell.

शिवराज सरकार ने किया 2000 करोड़ से ज्यादा का कृषी घोटाला, कांग्रेस कराएगी जांच औऱ एफआईआर

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मध्यप्रदेश प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पिछली शिवराज सरकार में हुए फर्जीवाड़े का आए दिन खुलासा हो रहा है। काग्रेस द्वारा की जा रही किसान कर्जमाफी की प्रक्रिया में आ रही गड़बड़ियों पर आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़ा बयान देते शिवराज सरकार पर किसानों के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया है। मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि ‘ पिछली सरकार में फर्ज़ी कर्ज़ का यह बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। हमें लग रहा है कि यह घोटाला 2000 करोड़ से लेकर 3000 करोड़ तक पहुंच सकता है। हम इस घोटाले की जांच कराएंगे और किसी को छोड़ेंगे नहीं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आगे कहा कि, ‘मैं दो-तीन लोगों से मिला, किसी ने भी लोन नहीं लिया है लेकिन लिस्ट में उनके नाम पर लोन दिखाया गया है। कुछ ऐसे भी लोग मिले हैं जिनका नाम गलत तरीके से कर्ज माफी की लिस्ट में शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है और यह दो हजार करोड़ से भी बड़ा हो सकता है। यह बीजेपी शासन का बड़ा घोटाला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी बैंक मैनेजरों के खिलाफ हमारी सरकार कार्रवाई करेगी।

जल्द होगा गौशालाओं का निर्माण

गोशालाओं के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ‘मुझे बड़ा दुःख है कि पिछले 15 वर्षों में जो ख़ुद को गोरक्षक कहते थे, उन्होंने एक भी गोशाला का निर्माण नहीं किया। हमने कल ही निर्णय लिया है कि हम अपने वचन पत्र के वादे के अनुसार गोशालाओं का निर्माण करवाएंगे। हम लक्ष्य तय करेंगे कि कितनी गोशाला कितने समय में हम बना देंके। हम इसकी हर माह समीक्षा करेंगे। हमारी सरकार गोल्फ़ कोर्स की सरकार नहीं है, इसलिए हमने गोल्फ़ कोर्स निरस्त करने का निर्णय लिया है। वहीं राम मंदिर को लेकर कमलनाथ ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को राम मंदिर की याद सिर्फ़ चुनाव के वक़्त ही आती है। पिछले 4.5 वर्षों में उन्हें इसकी याद क्यों नहीं आयी।

मिशन ‘गौशाला’ पर कमलनाथ सरकार ने शुरु किया काम, प्रदेश भर में बनेंगी गौशाला

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कांग्रेस ने विधानसभा चुनावो के समय अपने वचन पत्र में हर ग्राम पंचायत में एक गौशाला खोलने का वादा किया था। जिसको पूरा करने के लिए अब कमलनाथ सरकार ने काम करना शुरू कर दिया गया है। निराश्रित पशुओं की उचित देखभाल के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर गौशालाओं के सब्सटेंशियल मॉडल विकसित के लिए अपर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा मंडल श्री इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में अपर मुख्य सचिव वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा पशुपालन विभाग, प्रमुख सचिव कृषि विभाग और प्रमुख सचिव कृषि को समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। आयुक्त मनरेगा को समिति में सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। समिति द्वारा गौशालाओं के सब्सटेंशियल मॉडल निर्माण एवं संचालन के लिए आवश्यक मार्गदर्शीय सिद्धांतों का निर्धारण और समय-समय पर प्रदेश स्तर की समीक्षा की जायेगी।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में अनुमानित 6 लाख निराश्रित गोवंश हैं। प्रदेश में कुल पंजीकृत 1285 गौशाला में से 614 क्रियाशील गौशाला हैं, जिनमें 1,53,834 गौवंश हैं। सड़कों पर आवारा घूम रहे निराश्रित गोवंश को गौ-शालाओं में रखने की तैयारी की जा रही है। 16 जनवरी से भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। पशुपालन, मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री लाखन सिंह यादव ने बताया था कि 5 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को शहर के बाहरी इलाके सूखी सेवनिया में बनी बरखेडी गौशाला में रखा जायेगा। गौसंवर्धन के मद में 50 करोड़ रूपये हैं। गौशाला में उनके लिए चारे की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के सभी 52 जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिख कर कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में आने वाली पंचायतों में वह सरकारी भूमि चिन्हित करें, जहां गौशाला बनाई जा सके। फिर हमें इसकी सूचना दी जाए ताकि गौशाला निर्माण किया जा सके।

यादव महासभा में बोले कमलनाथ, कृषि के प्रति नए नजरिये की जरूरत

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photograph of kamalnath
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

सोमवार को समन्वय भवन में आयोजित यादव महासभा में शामिल हुए मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि राज्य सरकार का नजरिया एकदम साफ है। किसान और युवा कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश के विकास के लिये नए दृष्टिकोण के साथ कृषि क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये किसान की क्रय शक्ति को बढ़ाना होगा। किसान कर्ज माफी की 55 हजार करोड़ रूपये की योजना पहले से ही तैयार थी, जिस पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। आने वाले दिनों में 35 लाख किसानों की ऋण माफी की कार्रवाई पूरी हो जायेगी। यदि आम आदमी की जिन्दगी में परिवर्तन नहीं हो रहा है, तो आर्थिक और व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिये निवेश को बढ़ाना जरूरी है। मूलभूत सुविधाओं में किये गये निवेश से भी रोजगार के अनेक नये अवसर बनते हैं।

मुख्यमंत्री नाथ ने पूर्व उप मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुभाष यादव का स्मरण करते हुए समन्वय भवन का नामकरण स्व. यादव के नाम पर करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यादव समाज का गौरवपूर्ण इतिहास है। उन्होंने यादव समाज को सांस्कृतिक क्रियाकलापों के लिए भूमि आवंटन का आश्‍वासन भी दिया और यादव समाज का आव्हान किया कि भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के लिये कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की महानता का आधार उसकी संस्कृति तथा सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्य हैं। पूरी दुनिया भारत की विभिन्नताओं में एकता से प्रभावित है, सम्मान से हमारे देश की ओर देखती है। धर्म, भाषा, परम्पराओं, खान-पान और पहनावे में विभिन्नताओं वाला दुनिया का अकेला हमारा देश है। सोवियत संघ भी विभिन्नताओं वाला देश था, जो बिखर गया। हमारे देश की इस ताकत का आधार है भारतीय सामाजिक मूल्य और आध्यात्मिक सांस्कृतिक परम्पराएँ।

बता दें कि यादव महासभा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ ही कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हर्ष यादव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सचिन यादव, यादव महासभा के अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, दामोदर सिंह और वरिष्ठ सदस्य भगवान सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, महासभा के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।

भाजपा ने पंद्रह साल पहले मुँह खोला होता तो ये हालात नहीं होते: कांग्रेस

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madhya pradesh congress chief kamalnath

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने कहा कि 15 साल बाद ये पहला अवसर है जब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और राकेश सिंह ने अपराध के खिलाफ अपना मुँह खोला है। सत्ता में रहते जनता की चिंता कभी नहीं की, प्रदेश को अपराधियों के हवाले कर मौन साध लिया था। भाजपा को अब शिकायत यह है कि भाजपा नेताओं पर हमले हो रहे हैं। इसीलिए वे अपराध के खिलाफ खड़े हुए हैं। मगर हमलों में खुद भाजपा नेताओं पर आरोप हैं।

अभय दुबे ने कहा कि कांग्रेस ने कभी अपने दायित्वों से मुँह नहीं चुराया। हम प्रतिबद्ध हैं, अपराध को कांग्रेस सरकार जड़ से समाप्त करेगी। कांग्रेस सरकार को जो अपराधों की विरासत भाजपा के 15 सालों के शासन में मिली है, वो खुद मोदी सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के हवाले से भाजपा को जाननी चाहिये।

  1. हत्या रू भाजपा शासन-काल में लगभग 7 हत्याएं रोज हुआ करती थीं।
  2. हत्या के प्रयास रू लगभग 6 हत्या के प्रयास रोज हुआ करते थे।
  3. बलात्कार रू लगभग 10 बेटियाँ रोज बलात्कारियों का शिकार होती थीं
  4. जघन्य अपराध रू हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण जैसे 48 अपराध रोज मध्यप्रदेश में हुआ करते थे।
  5. आईपीसी अपराध रू आईपीसी के 607 अपराध रोज मध्यप्रदेश में हुआ करते थे।

दुबे ने कहा कि हमें याद है कि कभी भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री किसी रेप पीड़िता से मिलने नहीं गए, कभी एक ट्वीट तक नहीं किया। पूरे समय बस अपनी सत्ता की भूख को मिटाने के लिए रैलियों और राजनैतिक आयोजनों में लगे रहते थे। इसीलिए ये हाल प्रदेश का हुआ।

भावांतर योजना बंद हुई, तो करूंगा आंदोलनः शिवराजसिंह चौहान

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प्रदेश सरकार यदि किसानों उनकी उपज का वाजिब मूल्य देने से बचती है और भावांतर योजना को येन-केन-प्रकारेण बंद करती है, तो यह त्रासद होगा और ऐसे में किसानों को उनकी राशि का भुगतान कराने के लिए मुझे आंदोलन पर बाध्य होना पड़ेगा। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर कही। शिवराज ने कहा कि किसान भाई-बहनों को उनका अधिकार दिलाने यदि मुझे सरकार के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष करना पड़ा, तो मैं वो भी करूंगा।

शिवराज ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भाजपा सरकार द्वारा लागू की गई भावांतर योजना को बंद करना चाहती है, इस आशय के समाचार सोमवार को कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। इन समाचारों में प्रदेश के कृषि मंत्री के हवाले से यह जानकारी दी गई है। जिसको लेकर शिवराज ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को सोमवार को पत्र लिखा है।

वाजिब मूल्य देने से बच रही सरकार

चौहान ने पत्र में कहा है कि भावांतर योजना के तहत तत्कालीन सरकार ने यह निर्णय लिया था कि किसानों को सोयाबीन पर 500 रुपए एवं मक्का पर 500 रुपए प्रति क्विंटल फ्लैट भुगतान किया जाएगा। गेहूं 2100 रुपए एवं धान 2500 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का निर्णय भी लिया था। इसके अलावा उड़द एवं मूंग पर फ्लैट रेट से भुगतान का निर्णय लिया था। सरकार द्वारा भावांतर योजना बंद करने के निर्णय से यह स्पष्ट है कि सरकार सोयाबीन, मक्का, गेंहूं, धान, उड़द, मूंग आदि फसलों के लिए किसानों को भावांतर योजना के अनुसार भुगतान करने से बचना चाहती है और न ही सरकार इन्हें तय मूल्य पर खरीदने की मंशा रखती है।

किसानों को भुगतान सरकार की जिम्मेदारी

चौहान ने पत्र में लिखा है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करना और उसके अनुसार किसानों को राशि का भुगतान करना सरकार का दायित्व है। इसलिए आपसे आग्रह है कि पूर्ववर्ती सरकार के निर्णयों के अनुसार किसानों को उनकी उपज का भुगतान तत्काल किया जाए, ताकि उनके हितों का संरक्षण हो सके। ऐसा न किये जाने पर चौहान ने सड़कों पर संघर्ष करने की चेतावनी भी दी है।

मुख्यमंत्री के तौर पर 1 महीने में कमलनाथ ने पूरे किए यह 10 बड़े वादे।

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17 दिसंबर को मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 17 जनवरी को अपनी सरकार का एक महीना पूरा कर लिया। वैसे तो एक महीना सरकार को काम संभालने में ही लग जाता है लेकिन मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इस एक महीने में अपने वचनपत्र के कई मुख्य वादे पूरे करके दिखाए है। आइये नजर डालते है इस एक महीने में कमलनाथ सरकार द्वारा किये कुछ अहम फैसलों पर।

1किसानों का कर्ज माफ

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा वादा जो किया था, वह था किसानों की कर्जमाफी का। कमलनाथ सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस की जीत में भी कर्जमाफी का योगदान काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने कुछ घंटों के भीतर प्रदेश के किसानों का सारा कर्जा माफ करके अपना वादा निभाया।

2पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश

मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नही थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आते ही प्रदेश के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार ने एक महीने के भीतर ही अपने इस वादे को भी पूरा करके दिखाया है।

3मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51,000 की

कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलने वाली राशि जो कि पहले 25000 थी, उसको बढ़ाकर 51,000 किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए इस राशि को 51,000 कर दिया।

4आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में इजाफा।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का वादा भी कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले महीने में ही पूरा करके दिखाया। किसानों की कर्जमाफी के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आशा कार्यकर्ताओं को एरियर सहित प्रतिमाह 2 हजार रु. प्रोत्साहन राशि देने का भी आदेश जारी कर दिया था।

5पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण

कांग्रेस के वचनपत्र में एक जो सबसे चौकाने वाला वादा था, वह था गौशाला निर्माण का। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश की हर पंचायत के साथ ही शहरों में भी गौ शालाओं का निर्माण किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने इस विषय मे आदेश जारी कर दिए है और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है।

6अध्यात्म विभाग बनाने का आदेश

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किये गए वादे को पूरा करते हुए अध्यात्म विभाग बनाने के निर्देश दे दिए है। कमलनाथ सरकार ने आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर अध्यात्म विभाग बनाने का वादा किया है।

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा शिप्रा ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनानेऔर पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा।

7प्रदेश के लोगों को रोजगार में 70% आरक्षण

सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 70% स्थानीय आरक्षण देने का वादा किया था। सरकार ने कहा कि प्रदेश में लगे उद्द्योगों को सरकार से मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए 70% स्थानीय लोगों को रोजगार देने होगा। कमलनाथ के इस फैसले से जहां प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलने की खुशी है तो वहीं विपक्ष ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

8बंद होगा व्यापम

शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला, व्यापम को कमलनाथ सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है। कमलनाथ सरकार व्यापम को बंद कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग जैसे संस्था बनाने पर विचार कर रही है।

9दीनदयाल वनांचल योजना को किया बंद

सत्ता में आने साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई दीनदयाल वनांचल योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

10मंत्रियों के बजाय कलेक्टर करेंगे घोषणाएं

एक नई मिसाल कायम करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित घोषणाएं मंत्रियों की जगह कलेक्टरों द्वारा करवाने के आदेश जारी किए है। इससे पहले सरकार की योजनाओं से संबंधित सभी घोषणाएं संबंधित विभाग के मंत्री ही किया करते थे।

मध्यप्रदेश में सत्यापन के बाद एक बार फिर शुरु हुई मीसाबंदी पेंशन

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मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बुधवार को मीसाबंदियों की रोकी गई पेंशन एक बार फिर शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश जारी कर कहा है कि मीसाबंदियों के भौतिक सत्यापन के बाद पेंशन फिर से शुरू की जाए।

वहीे इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार के आदेश की कॉपी ट्वीट करते हुए लिखा है- टू टर्न।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान वर्ष 1975 से 1977 के बीच लगे आपातकाल के दौरान जेल में डाले गए लोगों को मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में करीब 4000 लोगों को 25,000 रुपये की मासिक पेंशन दी जाती है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने साल 2008 में इस योजना की शुरूआत की थी। 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियो को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया था। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये की गई थी। इसके बाद 2017 में पेंशन राशि को बढ़ाकर 25 हजार कर दी गई। कांग्रेस सरकार ने पेंशन वितरण रोके जाने का प्रमुख कारण महालेखाकार की उस रिपोर्ट को बताया है जिसमें महालेखाकार ने पिछले वित्तीय वर्षों में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि में भुगतान को बजट प्रावधान से अधिक का बताया था।

सामान्य प्रशासन विभाग ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के राशि के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे। 29 दिसंबर को जारी आदेश में कहा गया था कि ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है। साथ ही लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है। अत: आगामी माह से लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि राशि का वितरण अगली कार्यवाही होने के पश्चात किया जाए।’ इसके बाद मीसा बंदियों को पेंशन मिलना बंद हो गई थी।

भाजपा नेताओं ने सरकार के इस फैसले को विरोध करते हुए इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया था। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि भाजपा से जुड़े लोग फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे हैं। इस संबंध में पिछले सप्ताह ग्वालियर की हाईकोर्ट बैंच में एक याचिका भी दायर की गई थी। अब सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 15 जनवरी को देर शाम जारी किए गए आदेश में समस्त आयुक्तों और और कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि लोकतंत्र सेनानियों के भौतिक सत्यापन आश्यकता है। राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि लोकतंत्र सेनानी या दिवंगत लोकतंत्र के आश्रित का भौतिक सत्यापन की कार्यवाही स्‍थल पर जाकर कराई जाए। उनके बारे में स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद लोकतंत्र सेनानियों को फिर से निधि दी जाए।