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गौरक्षा के नाम पर मॉबलीचिंग या हिंसा बर्दाश्‍त नहीं : कमलनाथ

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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमारी सरकार गौरक्षा करने में सक्षम। हम ना गौमाता को सड़क पर तड़पने देंगे ना उस पर किसी को अत्याचार करने देंगे। हमने गौवंश की रक्षा के लिये 1000 गौशालाएँ प्रदेश में खोलने का निर्णय लिया है। हमारी सरकार ने हाल ही में गौवध करने वालों पर भी कड़ी कार्यवाही की है। लेकिन हमारी सरकार में गौरक्षा के नाम पर वसूली व गुंडागर्दी का खेल नहीं चलेगा। नाथ ने कहा कि गौरक्षा व गौमाता के नाम पर मॉबलीचिंग या किसी भी प्रकार की हिंसा व गुंडागर्दी की घटनाएँ प्रदेश में बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व गुना में गोरक्षा के नाम पर तथाकथित गोरक्षकों की गुंडागर्दी व तोड़फोड़ की घटना सामने आयी है। मुख्यमंत्री ने इस घटना को गम्भीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन से ली जानकारी। पुलिस ने ख़ुद बैल व बछड़ों से भरे एक ट्रक को पकड़ा। उस पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्यवाही की। कुछ युवक ख़ुद को गौरक्षक बताते हुए पहुँचे। माहौल ख़राब करने की कोशिश की।उन्होंने हंगामा किया, तोड़फोड़ व गुंडागर्दी की। क़ानून हाथ में लेने की कोशिश की। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी भी पूर्व में ऐसे लोगों पर कड़ी कार्यवाही का कह चुके है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि यदि किसी के पास गौ तस्करी या गौवध की सूचना है तो वह ज़िम्मेदार प्रशासन के अधिकारी को जानकारी दे।हमारी सरकार ऐसे लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेगी। किसी को बख्शेगी नहीं।लेकिन क़ानून हाथ में लेने की किसी को इजाज़त नहीं देगी।गौरक्षा के नाम पर कुछ असामाजिक तत्वों का वर्षों से चल रहा वसूली व गुंडागर्दी का खेल अब नहीं चलेगा। पिछले 15 वर्षों में गौवंश की रक्षा के लिये क्या क़दम उठाये गये, यह सभी जानते है। उन्होंने प्रदेश के डीजीपी को कहा है कि जो गौ तस्करी व गौ अत्याचार रोकने में जो क़ानून सम्मत तरीक़े से मदद करते है,जानकारी देते है,ऐसे लोगों को छोड़कर गौ रक्षा के नाम पर वसूली व गुंडागर्दी का खेल खेलने वालों को क़तई बख़्शा नहीं जाए। इस आड़ में माहौल ख़राब करने की कोशिश करने वालों को बख़्शा नहीं जावे। ऐसे लोगों की ज़िलावार सूची बनायी जाये।

प्रत्येक पात्र किसान का ऋण माफ होः कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने जय किसान फसल ऋण माफी योजना में पात्र प्रत्येक किसान का ऋण माफ हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकाला गया है, वे बगैर किसी भय के सामने आयें, सरकार उन्हें न्याय दिलायेगी और दोषियों को दंडित करेगी। श्री नाथ आज मंत्रालय में फसल ऋण माफी योजना की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में सहकारिता एवं सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री सचिन यादव, मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहन्ती एवं वित्त, कृषि और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि फसल ऋण माफी योजना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ हर उस किसान को मिलना चाहिए, जो योजना की परिधि में शामिल हैं। उन्होंने किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकालने के प्रकरणों पर नाराजी व्यक्त की। उन्होंने किसानों से अपील की कि अगर उनके नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकाला गया है तो वे निर्भय होकर बतायें, सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिये कि फर्जी ऋण प्रकरणों के मामलों को गंभीरता से लें और इसकी सूक्ष्मता से जाँच करवायें। जो भी दोषी पाया जाये उसके खिलाफ सख्त कार्रावाई की जाये।

बैठक में बताया गया कि ऋण माफी योजना में 50 लाख 61 हजार आवेदन भरे गए हैं। इसमें से 45 लाख 9 हजार आवेदन ऑनलाइन किये गये हैं। ऋण माफी की यह प्रक्रिया 22 फरवरी तक पूरी हो जायेगी और किसानों के खाते में राशि पहुँचना शुरू हो जायेगी। योजना में लघु एव सीमांत किसानों के ऋण प्राथमिकता में माफ किये जायेंगे।

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कर्जमाफी के लिए 50 लाख से अधिक लोगों ने किया आवेदन

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

प्रदेश में जय किसान फसल ऋण माफी योजना में 15 जनवरी से पाँच फरवरी 2019 तक कुल 50 लाख 40 हजार 861 पात्र किसानों द्वारा आवेदन जमा किये गए हैं। जिनमें से 43 लाख 50 हजार आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किए जा चुके थे। वहीं बाकी आवेदन ऑनलाइन दर्ज करने का कार्य निरतंर जारी है।

आवेदन की अंतिम तिथि पाँच फरवरी तक हरे ऋण खाते के 29 लाख 61 हजार 84 में से 26 लाख 23 हजार 423 आवेदन, सफेद ऋण खाते के 26 लाख 628 में से 19 लाख 20 हजार 505 आवेदन तथा चार लाख 96 हजार 933 गुलाबी आवेदन, इस प्रकार 50 लाख 40 हजार 861 आवेदन प्राप्त हुए है। प्रदेश में कुल 55 लाख 61 हजार 712 ऋण खाते हैं। इनमें अपात्रता वाले किसान जैसे आयकरदाता/शासकीय सेवक, जन-प्रतिनिधि (विधायक, सांसद आदि) और जीएसटी पंजीयन वाले किसानों के फसल ऋण खाते भी सम्मिलित हैं। साथ ही जिन कृषकों के अलग-अलग ऋण खातों में 2 लाख रुपये ऋण से ज्यादा की ऋण राशि हैं, उनके द्वारा भी 2 लाख रुपये से ऊपर के अन्य ऋण खातों में आवेदन नहीं किये जाने के कारण कुल प्राप्त आवेदनों की संख्या 50 लाख 40 हजार 861 रही है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली में की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है।

कमलनाथ ने शुरू की नई योजना, अब शहरी युवाओं को भी मिलेगा निश्चित रोजगार

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मुख्यमंत्री कमल नाथ ने प्रदेश के शहरी युवा बेरोजगारों को उनकी इच्छा के अनुरूप क्षेत्र में रोजगार की गारंटी देते हुए युवा स्वाभिमान योजना लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने योजना की जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तो मनरेगा के अंतर्गत रोजगार के अवसर मिल जाते हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र के युवा ऐसे अवसरों से वंचित रह जाते हैं। अस्थाई रोजगार और कौशल विकास को जोड़कर युवा स्व स्वाभिमान को योजना को जन-हितैषी स्वरूप प्रदान किया गया है। प्रदेश का भविष्य युवा शक्ति में निहित है। युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, आवश्यकता केवल प्रतिभाओं को निखारने की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शीघ्र ही मंत्रि-परिषद की मंजूरी के पश्चात योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की युवा शक्ति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का लाभ प्राप्त करने योग्य बनाना युवा स्वाभिमान योजना का उद्देश्य है। योजना से शहरी युवा बेरोजगारों को उनकी इच्छा के अनुरूप क्षेत्र में एक वर्ष में 100 दिन का तात्कालिक अस्थाई रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा। रोजगार के दौरान ही युवाओं को उनकी पसंद के क्षेत्र में कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिलवाया जायेगा।

वचनपत्र का एक और वादा किया पूरा

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा वचन-पत्र में किये गये युवाओं के रोजगार के अधिकार के वादे को अमली जामा पहनाने के वचन की पूर्ति की दिशा में युवा स्वाभिमान योजना एक बड़ा कदम है। युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उनकी पसंद के रोजगार में स्थापित होने के लिये राज्य सरकार समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध करवायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि युवाओं को स्व-रोजगार के क्षेत्र में सक्षम बनाने के लिये राज्य सरकार कृत-संकल्पित होकर कार्य करेगी।

10 फरवरी से शुरु होगा रजिस्ट्रेशन

युवा स्वाभिमान योजना का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में शहरी बेरोजगार युवाओं के रजिस्ट्रेशन का कार्य 10 फरवरी, 2019 से नगरीय निकायों में प्रारंभ किया जा रहा है। रजिस्टर्ड युवाओं को फरवरी माह में ही उनकी पसंद के रोजगार के लिये कौशल प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। युवा स्वाभिमान योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नगरीय निकायों को सौंपी जा रही है। नगरीय निकाय द्वारा ऐसे सभी शासकीय विभागों को योजना से जोड़ा जायेगा, जिनके द्वारा निर्माण और सेवा के कार्य संबंधित नगरीय क्षेत्र में संचालित किये जा रहे हैं अथवा स्वीकृत किए जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने किया ‘किसान विजय रथ यात्रा’ का शुभारंभ

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कांग्रेस की 41 दिवसीय ‘किसान विजय रथ यात्रा’ बुधवार को आरंभ हुई। यात्रा पूरे प्रदेश में किसानों के बीच पहुंचकर राज्य सरकार द्वारा की गई किसानों की कर्जमाफी का प्रचार प्रसार करेगी।

मध्यप्रदेश किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाना भाऊ पटोले ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से प्रदेश कांग्रेस किसान खेत मजदूर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुर्जर के नेतृत्व में प्रारंभ होने वाली किसान विजय रथ यात्रा शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, पीसी शर्मा, बृजेन्द्र सिंह राठोर, कमलेश्‍वर पटेल, राजमणि पटेल ने किसानों के लिये सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं के बारे में बताया और यात्रा शुभारंभ पर बधाई दी।

कांग्रेस तक पहुंचेगी किसानों की बात

प्रदेश कांग्रेस के प्रशासन प्रभारी महामंत्री राजीव सिंह ने कहा कि किसान रथ यात्रा के माध्यम से किसानों की बात कांग्रेस तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने किसानों के हितों के लिए जो योजनाएं बनायी है वे भी किसानों तक पहुंचेंगी। किसान कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने कहा कि 41 दिवासीय यह यात्रा पूरे प्रदेश में जाएगी। यात्रा का उद्देश्य किसानों की कर्ज माफी का व्यापक प्रचार प्रसार करना तथा कमलनाथ के अन्य जनहितैषी निर्णयों को जनता तक पहुंचाना है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने वायदा किया था कि कांग्रेस सरकार बनने पर किसानों का कर्जा दस दिन में माफ होगा। इस किसान यात्रा के माध्यम से किसानों का कांग्रेस को समर्थन करने के लिए आभार व्यक्त किया जाएगा।

यह नेता रहे मौजूद

इस अवसर पर कांग्रेस पदाधिकारी महेन्द्र जोशी, केडी द्विवेदी, प्रकाश जैन, मृणाल पंत, अरूण श्रीवास्तव, देवेन्द्र पटेल, जोधाराम गुर्जर, आभा सिंह, कैलाश मिश्रा, फिरोज सिद्वीकी, साजिद खान, मुमताज खान, मिथुनसिंह अहिरवार, रामशरण सिंह राणा उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के तौर पर 1 महीने में कमलनाथ ने पूरे किए यह 10 बड़े वादे।

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17 दिसंबर को मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 17 जनवरी को अपनी सरकार का एक महीना पूरा कर लिया। वैसे तो एक महीना सरकार को काम संभालने में ही लग जाता है लेकिन मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इस एक महीने में अपने वचनपत्र के कई मुख्य वादे पूरे करके दिखाए है। आइये नजर डालते है इस एक महीने में कमलनाथ सरकार द्वारा किये कुछ अहम फैसलों पर।

1किसानों का कर्ज माफ

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा वादा जो किया था, वह था किसानों की कर्जमाफी का। कमलनाथ सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस की जीत में भी कर्जमाफी का योगदान काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने कुछ घंटों के भीतर प्रदेश के किसानों का सारा कर्जा माफ करके अपना वादा निभाया।

2पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश

मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नही थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आते ही प्रदेश के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार ने एक महीने के भीतर ही अपने इस वादे को भी पूरा करके दिखाया है।

3मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51,000 की

कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलने वाली राशि जो कि पहले 25000 थी, उसको बढ़ाकर 51,000 किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए इस राशि को 51,000 कर दिया।

4आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में इजाफा।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का वादा भी कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले महीने में ही पूरा करके दिखाया। किसानों की कर्जमाफी के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आशा कार्यकर्ताओं को एरियर सहित प्रतिमाह 2 हजार रु. प्रोत्साहन राशि देने का भी आदेश जारी कर दिया था।

5पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण

कांग्रेस के वचनपत्र में एक जो सबसे चौकाने वाला वादा था, वह था गौशाला निर्माण का। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश की हर पंचायत के साथ ही शहरों में भी गौ शालाओं का निर्माण किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने इस विषय मे आदेश जारी कर दिए है और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है।

6अध्यात्म विभाग बनाने का आदेश

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किये गए वादे को पूरा करते हुए अध्यात्म विभाग बनाने के निर्देश दे दिए है। कमलनाथ सरकार ने आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर अध्यात्म विभाग बनाने का वादा किया है।

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा शिप्रा ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनानेऔर पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा।

7प्रदेश के लोगों को रोजगार में 70% आरक्षण

सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 70% स्थानीय आरक्षण देने का वादा किया था। सरकार ने कहा कि प्रदेश में लगे उद्द्योगों को सरकार से मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए 70% स्थानीय लोगों को रोजगार देने होगा। कमलनाथ के इस फैसले से जहां प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलने की खुशी है तो वहीं विपक्ष ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

8बंद होगा व्यापम

शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला, व्यापम को कमलनाथ सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है। कमलनाथ सरकार व्यापम को बंद कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग जैसे संस्था बनाने पर विचार कर रही है।

9दीनदयाल वनांचल योजना को किया बंद

सत्ता में आने साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई दीनदयाल वनांचल योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

10मंत्रियों के बजाय कलेक्टर करेंगे घोषणाएं

एक नई मिसाल कायम करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित घोषणाएं मंत्रियों की जगह कलेक्टरों द्वारा करवाने के आदेश जारी किए है। इससे पहले सरकार की योजनाओं से संबंधित सभी घोषणाएं संबंधित विभाग के मंत्री ही किया करते थे।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, 12 दिसंबर तक का किसान कर्ज होगा माफ !

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

मध्य प्रदेश में किसान कर्जमाफी को लेकर कमलनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कर्जमाफी की डेडलाइन मार्च से बढ़ाकर दिसम्बर तक करने का फैसला लिया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 5 जनवरी को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में कर्जमाफी का प्रस्ताव लाया जाएगा।

खबर है कि अब किसानों की कर्ज माफी के लिए मध्यप्रदेश में डेडलाइन 12 दिसंबर 2018 होगी, जबकी पहले यह 31 मार्च तक 2018 तक थी। इसमें सहकारी, आरआरबी और राष्ट्रीयकृत बैंकों के हर किसान के दो लाख रू तक के अल्पकालीन ऋण माफ होंगे। इसके लिए बैंक लोन लेने वाले किसानों की सूची पंचायत में चस्पा की जाएगी। इसके बाद किसान अपना नाम लिखकर बैंक में ऋण माफी के लिए आवेदन देगा और कागजातों की पुष्टि करके सरकार माफ लोन कर देगी। किसानों को सुविधा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर भी आवेदन करने की सुविधा रखी गई है। पिछले दिनों मंत्रियों ने सीएम के सामने डेडलाइन बढ़ने की मांग रखी थी, जिससे किसानों को कर्जमाफी योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके|

कमलनाथ सरकार कर्जमाफी के लिए तय तारीख 31 मार्च को आगे बढ़ाने का फैसला करने जा रही है। अब 12 दिसंबर 2018 तक के कर्ज को माफ किया जाएगा। हालांकि इसकी कोई अधिकारिक पुष्टी नही हुई है, लेकिन सुत्रों की माने तो कल मंत्रालय मे होने वाली कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया जा सकता है। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलेगा। कैबिनेट की अगली बैठक 5 जनवरी को रखी गई है, जिसमें कर्जमाफी का प्रस्ताव लाया जाएगा। बताया जा रहा है कि मंत्रियों से सलाह मशवरा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि मार्च की सीमा को बढ़ाकर दिसंबर तक कर दिया जाए ।

बता दे कि शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद कमलनाथ ने जिस पहली फाइल पर दस्तखत किए उसमें मध्य प्रदेश के किसानों का अल्पकालीन फसल ऋण दो लाख रू तक माफ करने की घोषणा की थी। इस घोषणा में ऋण माफी के लिए यह शर्त रखी गई थी कि जिन किसानों ने 31 मार्च 2018 तक ऋण लिया है, उन्हीं के ऋण माफ होंगे। लेकिन पड़ोस की राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने भी ऋण माफी की घोषणा की है और इस ऋण माफी की घोषणा में कर्ज माफी के लिए नियत तिथि 30 नवंबर 2018 रखी गई है। इतना ही नहीं राजस्थान की सरकार ने तो सहकारी बैंकों के किसानों के लिए ऋण माफी की अधिकतम राशि अनलिमिटेड घोषित की है। जिसके बाद कमलनाथ सरकार भी तारीख बढ़ाने जा रही है|

मध्यप्रदेश में मीसाबंदियों की पेशन पर अस्‍थाई रोक, भाजपा का विरोध

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कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के मीसा बंदी पेंशन योजना पर अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। सरकार मीसा बंदियों की जांच कराने के बाद इसे फिर से शुरू करेगी।

इस संबंध में आदेश 28 दिसंबर को जारी कर दिए गए हैं। आदेशानुसार सरकार मीसाबंदियों को मिलने वाली पेशन के संबंध में जांच करवाएगी। सरकार ऐसा लोगों को पेंशन की सूची से बाहर करेगी जो इसके सही पात्र नहीं है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने अपने खास लोगों को उपकृत करने के लिए करोड़ों की फिजूलखर्ची की है। सरकार 75 करोड़ रुपये सालाना लुटा रही थी, इसको तुरंत बंद होना चाहिए।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में फिलहाल 2000 से ज्यादा मीसाबंदी 25 हजार रुपए मासिक पेंशन ले रहे हैं। साल 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियों को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपए की गई। साल 2017 में मीसा बंदियों की पेंशन राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई। इस पर सालाना करीब 75 करोड़ का खर्च आता है। इस रोक पर लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक का कहना है कि जांच की कोई बात है ही नहीं।यह बदले की भावना से फैसला लिया गया है। पेंशन रोकने के विरोध में कोर्ट का सहारा लेंगे।

बंद नहीं की पेंशन, भाजपा बेवजह राजनीति कर रही : सलूजा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा है कि सरकार बने हुए सिर्फ 15 दिन हुए हैं। इतने कम समय में सरकार द्वारा लिये गये जनहितैषी निर्णयों से बौखलाकर भाजपाई जान बूझकर वंदे मातरम् और मीसाबंदियों के मामले को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे भाजपाईयों को पहले सामान्य प्रशासन विभाग का वह परिपत्र पढ़ना चाहिए जो मीसाबंदियों को लेकर जारी हुआ है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि प्रदेश में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के भुगतान में बजट प्रावधान से अधिक व्यय की स्थितियां महालेखाकार के परीक्षण प्रतिवेदनों के माध्यम से संज्ञान में आई है। इस कारण लोक लेखा समिति के समक्ष विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई आती है। शासन ने इस स्थिति की पुर्नरावृत्ति को रोकने के लिए लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाये जाने की आवश्यकता बतायी है। शासन ने यह भी माना है कि लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है और इसके लिए पृथक से विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये जाने का उल्लेख सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र में है।

सलूजा ने कहा कि सरकार के परिपत्र में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि बंद करने के बारे में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। यह कार्यवाही होने के बाद सम्मान निधि राशि का वितरण किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के शपथग्रहण में केजरीवाल के शामिल न होने का यह हो सकता है बड़ा कारण

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मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ ने सोमवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में शपथ ली। शपथ में कांग्रेस और विपक्ष के वरिष्ट नेताओं से साथ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी भी शामिल हुए। वहीं विपक्षी एकता के इस मंच से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नदारद दिखे। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री केजरीवाल को नियोता भी भेजा गया है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नही हो पाया है कि आखिर अरविंद या आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता कार्यक्रम में शामिल क्यों नही हुआ। वहीं अटकलें इस बात की भी लगे जा रही है कि सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा सिख दंगों पर सुनाए गए फैसले के चलते केजरीवाल कार्यक्रम में शामिल नही हुए।

तो क्या सिख दंगों के दाग ने केजरीवाल को भोपाल आने से रोका ?

सिख दंगों का कोई आरोपी बचना नही चाहिए: केजरीवाल

कमलनाथ की शपथ के साथ ही सोमवार को 1984 के सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके बाद दिल्ली में आप के सांसद भगवंत मान ने मांग की है कि सिख दंगों में कमलनाथ पर भी केस चलना चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं केजरीवाल ने भी सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि वे इसका स्वागत करते हैं। केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि दंगे में शामिल कोई भी आरोपी नहीं बचना चाहिए, चाहे कोई कितनाभी ताकतवर क्यों न हो। आम आदमी पार्टी इससे पहले भी सिख दंगों में कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि सिख दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ सफेद कुर्ते पहनकर घूम रहे हैं। कांग्रेस ने 32 साल से अपनी मानसिकता नहीं बदली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिख दंगों के दाग से बचने के लिए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कमलनाथ के शपथग्रहण में शामिल नही हुए ?

शिवराज के बनाए आलीशान भवन से सरकार चलाएँगे कमलनाथ

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मध्यप्रदेश में 15 साल का वनवास काटने के बाद कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आई है। कमलनाथ ने प्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ भी ले ली है और अब वह 613 करोड़ से ज्यादा की लागत से बने नए एनेक्सी भवन से सरकार चलाएंगे। शपथग्रहण के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ एनेक्सी भवन आए, जिसके लिए यहां खास तैयारी की गई थी। नए एनेक्सी भवन को फूलों से सजाया गया था। वहीं सुरक्षा के लिए भी कड़े इंतजाम किए गए थे। इस बिल्डिंग को आकार देने का काम तो पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने किया था, लेकिन अब कमलनाथ इसमें बैठेंगे। मंत्रालय में जगह कम पड़ने की वजह से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2015 में नई एनेक्सी भवन बनाने का सपना देखा था।

जनवरी 2015 में शिवराज सिंह ने एनेक्सी भवन का निर्माण शुरू कराया। कोशिश तो ये थी कि मौजूदा विधानसभा चुनाव के 6 महीने पहले ही इसका शुभारंभ हो जाए, लेकिन सीएम शिवराज सिंह के ये अरमान पूरे नहीं हो सके और अब कमलनाथ इस नई कॉपोर्रेट बिल्डिंग से अपनी सरकार चलाएंगे। मध्य प्रदेश की सबसे महंगी बिल्डिंग बताए जा रहे एनेक्सी की पांचवीं मंजिल पर सीएम का कमरा है। इस कमरे में भव्य सिंहासननुमा कुर्सी रखी गई है। जिस पर पहले तो शिवराज सिंह को बैठना था, लेकिन अब कमलनाथ इस पर बैठकर राज्य की बागडोर संभालेंगे। इस बिल्डिंग में 200 लोगों के बैठने के लिए खास हॉल बनाया गया है। यहां अफसरों के साथ सीएम कमलनाथ बैठक करेंगे। इसमें एलईडी स्क्रीन के साथ ही प्रोजेक्ट कर लगाए गए हैं। इसका लोकार्पण पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना था। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई थी। सितंबर के आखिरी हफ्ते में भोपाल में हुए कार्यकर्ता महाकुंभ के वक्त ही इसका लोकार्पण होना था। लेकिन उस वक्त ये नहीं हो सका और उसके कुछ दिनों बाद ही चुनाव आचार संहिता लगने की वजह से पूर्व सीएम शिवराज सिंह भी यहां नहीं बैठ सके।

ऐसी है नई एनेक्सी बिल्डिंग

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बीते कार्यकाल में भोपाल के मंत्रालय भवन में अति आधुनिक एनेक्सी बनाने का फैसला किया था। 615 करोड़ खर्च करके पांच मंजिल बनी इस एनेक्सी में जिस तरह का मुख्यमंत्री सचिवालय तैयार किया गया है, वह शायद पूरे देश में नहीं होगा। नई बिल्डिंग में सीएम और मुख्य सचिव के लिए अलग से लिफ्ट लगाई गई है। वहीं जिस कमरे में सीएम बैठेंगे बुलेटप्रूफ कांच लगाए गए हैं। अकेले सीएम के सचिवालय को ही हाईटेक बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए। एनेक्सी में सीएम के कमरे की सजावट पर ही एक करोड़ से ज्यादा खर्च हुए हैं। ग्रीन बिल्डिंग के सिद्धांतों के हिसाब से इसे डिजाइन किया गया है। ये बिल्डिंग कुल पांच लाख 75 हजार वर्गफीट में फैली हुई है। वहीं इसमें 1180 कारों की पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।

करीब 6 लाख वर्ग फीट में बनी और धौलपुर के पत्थरों से सजी मंत्रालय की यह एनेक्सी कार्पोरेट तर्ज पर बनी है। इसकी पांचवीं मंजिल के 40 हजार वर्गफीट एरिया में सीएम सचिवालय बनाया गया है। इसमें सीएम कक्ष के बगल में मीटिंग रूम है। पांच हजार वर्गफीट ओपन एरिया है। 50 मीटर की लॉबी है, जिसमें सीएम सचिवालय के अधिकारी बैठ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक के लिए भी हाईटेक हॉल बनाया गया है। जिसमें ई-कैबिनेट की व्यवस्था की गई है। बड़े-बड़े प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। इसमें 700 कारों के खड़े रहने के लिए मल्टी लेवल पार्किंग बनाई गई है। इसके अलावा अलग-अलग विभागों के प्रमुख सचिवों के लिए हाईटेक ऑफिस और मीटिंग रूम बनाए गए हैं। इसे आकार लेने में साढ़े तीन साल लगे हैं।

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