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मुख्यमंत्री के तौर पर 1 महीने में कमलनाथ ने पूरे किए यह 10 बड़े वादे।

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17 दिसंबर को मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 17 जनवरी को अपनी सरकार का एक महीना पूरा कर लिया। वैसे तो एक महीना सरकार को काम संभालने में ही लग जाता है लेकिन मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इस एक महीने में अपने वचनपत्र के कई मुख्य वादे पूरे करके दिखाए है। आइये नजर डालते है इस एक महीने में कमलनाथ सरकार द्वारा किये कुछ अहम फैसलों पर।

1किसानों का कर्ज माफ

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा वादा जो किया था, वह था किसानों की कर्जमाफी का। कमलनाथ सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस की जीत में भी कर्जमाफी का योगदान काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने कुछ घंटों के भीतर प्रदेश के किसानों का सारा कर्जा माफ करके अपना वादा निभाया।

2पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश

मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नही थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आते ही प्रदेश के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार ने एक महीने के भीतर ही अपने इस वादे को भी पूरा करके दिखाया है।

3मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51,000 की

कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलने वाली राशि जो कि पहले 25000 थी, उसको बढ़ाकर 51,000 किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए इस राशि को 51,000 कर दिया।

4आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में इजाफा।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का वादा भी कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले महीने में ही पूरा करके दिखाया। किसानों की कर्जमाफी के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आशा कार्यकर्ताओं को एरियर सहित प्रतिमाह 2 हजार रु. प्रोत्साहन राशि देने का भी आदेश जारी कर दिया था।

5पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण

कांग्रेस के वचनपत्र में एक जो सबसे चौकाने वाला वादा था, वह था गौशाला निर्माण का। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश की हर पंचायत के साथ ही शहरों में भी गौ शालाओं का निर्माण किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने इस विषय मे आदेश जारी कर दिए है और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है।

6अध्यात्म विभाग बनाने का आदेश

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किये गए वादे को पूरा करते हुए अध्यात्म विभाग बनाने के निर्देश दे दिए है। कमलनाथ सरकार ने आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर अध्यात्म विभाग बनाने का वादा किया है।

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा शिप्रा ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनानेऔर पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा।

7प्रदेश के लोगों को रोजगार में 70% आरक्षण

सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 70% स्थानीय आरक्षण देने का वादा किया था। सरकार ने कहा कि प्रदेश में लगे उद्द्योगों को सरकार से मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए 70% स्थानीय लोगों को रोजगार देने होगा। कमलनाथ के इस फैसले से जहां प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलने की खुशी है तो वहीं विपक्ष ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

8बंद होगा व्यापम

शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला, व्यापम को कमलनाथ सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है। कमलनाथ सरकार व्यापम को बंद कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग जैसे संस्था बनाने पर विचार कर रही है।

9दीनदयाल वनांचल योजना को किया बंद

सत्ता में आने साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई दीनदयाल वनांचल योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

10मंत्रियों के बजाय कलेक्टर करेंगे घोषणाएं

एक नई मिसाल कायम करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित घोषणाएं मंत्रियों की जगह कलेक्टरों द्वारा करवाने के आदेश जारी किए है। इससे पहले सरकार की योजनाओं से संबंधित सभी घोषणाएं संबंधित विभाग के मंत्री ही किया करते थे।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, 12 दिसंबर तक का किसान कर्ज होगा माफ !

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photograph of kamalnath
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

मध्य प्रदेश में किसान कर्जमाफी को लेकर कमलनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कर्जमाफी की डेडलाइन मार्च से बढ़ाकर दिसम्बर तक करने का फैसला लिया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 5 जनवरी को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में कर्जमाफी का प्रस्ताव लाया जाएगा।

खबर है कि अब किसानों की कर्ज माफी के लिए मध्यप्रदेश में डेडलाइन 12 दिसंबर 2018 होगी, जबकी पहले यह 31 मार्च तक 2018 तक थी। इसमें सहकारी, आरआरबी और राष्ट्रीयकृत बैंकों के हर किसान के दो लाख रू तक के अल्पकालीन ऋण माफ होंगे। इसके लिए बैंक लोन लेने वाले किसानों की सूची पंचायत में चस्पा की जाएगी। इसके बाद किसान अपना नाम लिखकर बैंक में ऋण माफी के लिए आवेदन देगा और कागजातों की पुष्टि करके सरकार माफ लोन कर देगी। किसानों को सुविधा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर भी आवेदन करने की सुविधा रखी गई है। पिछले दिनों मंत्रियों ने सीएम के सामने डेडलाइन बढ़ने की मांग रखी थी, जिससे किसानों को कर्जमाफी योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके|

कमलनाथ सरकार कर्जमाफी के लिए तय तारीख 31 मार्च को आगे बढ़ाने का फैसला करने जा रही है। अब 12 दिसंबर 2018 तक के कर्ज को माफ किया जाएगा। हालांकि इसकी कोई अधिकारिक पुष्टी नही हुई है, लेकिन सुत्रों की माने तो कल मंत्रालय मे होने वाली कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया जा सकता है। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलेगा। कैबिनेट की अगली बैठक 5 जनवरी को रखी गई है, जिसमें कर्जमाफी का प्रस्ताव लाया जाएगा। बताया जा रहा है कि मंत्रियों से सलाह मशवरा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि मार्च की सीमा को बढ़ाकर दिसंबर तक कर दिया जाए ।

बता दे कि शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद कमलनाथ ने जिस पहली फाइल पर दस्तखत किए उसमें मध्य प्रदेश के किसानों का अल्पकालीन फसल ऋण दो लाख रू तक माफ करने की घोषणा की थी। इस घोषणा में ऋण माफी के लिए यह शर्त रखी गई थी कि जिन किसानों ने 31 मार्च 2018 तक ऋण लिया है, उन्हीं के ऋण माफ होंगे। लेकिन पड़ोस की राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने भी ऋण माफी की घोषणा की है और इस ऋण माफी की घोषणा में कर्ज माफी के लिए नियत तिथि 30 नवंबर 2018 रखी गई है। इतना ही नहीं राजस्थान की सरकार ने तो सहकारी बैंकों के किसानों के लिए ऋण माफी की अधिकतम राशि अनलिमिटेड घोषित की है। जिसके बाद कमलनाथ सरकार भी तारीख बढ़ाने जा रही है|

मध्यप्रदेश में मीसाबंदियों की पेशन पर अस्‍थाई रोक, भाजपा का विरोध

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कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के मीसा बंदी पेंशन योजना पर अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। सरकार मीसा बंदियों की जांच कराने के बाद इसे फिर से शुरू करेगी।

इस संबंध में आदेश 28 दिसंबर को जारी कर दिए गए हैं। आदेशानुसार सरकार मीसाबंदियों को मिलने वाली पेशन के संबंध में जांच करवाएगी। सरकार ऐसा लोगों को पेंशन की सूची से बाहर करेगी जो इसके सही पात्र नहीं है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने अपने खास लोगों को उपकृत करने के लिए करोड़ों की फिजूलखर्ची की है। सरकार 75 करोड़ रुपये सालाना लुटा रही थी, इसको तुरंत बंद होना चाहिए।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में फिलहाल 2000 से ज्यादा मीसाबंदी 25 हजार रुपए मासिक पेंशन ले रहे हैं। साल 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियों को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपए की गई। साल 2017 में मीसा बंदियों की पेंशन राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई। इस पर सालाना करीब 75 करोड़ का खर्च आता है। इस रोक पर लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक का कहना है कि जांच की कोई बात है ही नहीं।यह बदले की भावना से फैसला लिया गया है। पेंशन रोकने के विरोध में कोर्ट का सहारा लेंगे।

बंद नहीं की पेंशन, भाजपा बेवजह राजनीति कर रही : सलूजा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा है कि सरकार बने हुए सिर्फ 15 दिन हुए हैं। इतने कम समय में सरकार द्वारा लिये गये जनहितैषी निर्णयों से बौखलाकर भाजपाई जान बूझकर वंदे मातरम् और मीसाबंदियों के मामले को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे भाजपाईयों को पहले सामान्य प्रशासन विभाग का वह परिपत्र पढ़ना चाहिए जो मीसाबंदियों को लेकर जारी हुआ है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि प्रदेश में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के भुगतान में बजट प्रावधान से अधिक व्यय की स्थितियां महालेखाकार के परीक्षण प्रतिवेदनों के माध्यम से संज्ञान में आई है। इस कारण लोक लेखा समिति के समक्ष विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई आती है। शासन ने इस स्थिति की पुर्नरावृत्ति को रोकने के लिए लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाये जाने की आवश्यकता बतायी है। शासन ने यह भी माना है कि लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है और इसके लिए पृथक से विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये जाने का उल्लेख सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र में है।

सलूजा ने कहा कि सरकार के परिपत्र में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि बंद करने के बारे में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। यह कार्यवाही होने के बाद सम्मान निधि राशि का वितरण किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के शपथग्रहण में केजरीवाल के शामिल न होने का यह हो सकता है बड़ा कारण

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मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ ने सोमवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में शपथ ली। शपथ में कांग्रेस और विपक्ष के वरिष्ट नेताओं से साथ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी भी शामिल हुए। वहीं विपक्षी एकता के इस मंच से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नदारद दिखे। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री केजरीवाल को नियोता भी भेजा गया है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नही हो पाया है कि आखिर अरविंद या आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता कार्यक्रम में शामिल क्यों नही हुआ। वहीं अटकलें इस बात की भी लगे जा रही है कि सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा सिख दंगों पर सुनाए गए फैसले के चलते केजरीवाल कार्यक्रम में शामिल नही हुए।

तो क्या सिख दंगों के दाग ने केजरीवाल को भोपाल आने से रोका ?

सिख दंगों का कोई आरोपी बचना नही चाहिए: केजरीवाल

कमलनाथ की शपथ के साथ ही सोमवार को 1984 के सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके बाद दिल्ली में आप के सांसद भगवंत मान ने मांग की है कि सिख दंगों में कमलनाथ पर भी केस चलना चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं केजरीवाल ने भी सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि वे इसका स्वागत करते हैं। केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि दंगे में शामिल कोई भी आरोपी नहीं बचना चाहिए, चाहे कोई कितनाभी ताकतवर क्यों न हो। आम आदमी पार्टी इससे पहले भी सिख दंगों में कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि सिख दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ सफेद कुर्ते पहनकर घूम रहे हैं। कांग्रेस ने 32 साल से अपनी मानसिकता नहीं बदली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिख दंगों के दाग से बचने के लिए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कमलनाथ के शपथग्रहण में शामिल नही हुए ?

शिवराज के बनाए आलीशान भवन से सरकार चलाएँगे कमलनाथ

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मध्यप्रदेश में 15 साल का वनवास काटने के बाद कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आई है। कमलनाथ ने प्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ भी ले ली है और अब वह 613 करोड़ से ज्यादा की लागत से बने नए एनेक्सी भवन से सरकार चलाएंगे। शपथग्रहण के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ एनेक्सी भवन आए, जिसके लिए यहां खास तैयारी की गई थी। नए एनेक्सी भवन को फूलों से सजाया गया था। वहीं सुरक्षा के लिए भी कड़े इंतजाम किए गए थे। इस बिल्डिंग को आकार देने का काम तो पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने किया था, लेकिन अब कमलनाथ इसमें बैठेंगे। मंत्रालय में जगह कम पड़ने की वजह से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2015 में नई एनेक्सी भवन बनाने का सपना देखा था।

जनवरी 2015 में शिवराज सिंह ने एनेक्सी भवन का निर्माण शुरू कराया। कोशिश तो ये थी कि मौजूदा विधानसभा चुनाव के 6 महीने पहले ही इसका शुभारंभ हो जाए, लेकिन सीएम शिवराज सिंह के ये अरमान पूरे नहीं हो सके और अब कमलनाथ इस नई कॉपोर्रेट बिल्डिंग से अपनी सरकार चलाएंगे। मध्य प्रदेश की सबसे महंगी बिल्डिंग बताए जा रहे एनेक्सी की पांचवीं मंजिल पर सीएम का कमरा है। इस कमरे में भव्य सिंहासननुमा कुर्सी रखी गई है। जिस पर पहले तो शिवराज सिंह को बैठना था, लेकिन अब कमलनाथ इस पर बैठकर राज्य की बागडोर संभालेंगे। इस बिल्डिंग में 200 लोगों के बैठने के लिए खास हॉल बनाया गया है। यहां अफसरों के साथ सीएम कमलनाथ बैठक करेंगे। इसमें एलईडी स्क्रीन के साथ ही प्रोजेक्ट कर लगाए गए हैं। इसका लोकार्पण पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना था। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई थी। सितंबर के आखिरी हफ्ते में भोपाल में हुए कार्यकर्ता महाकुंभ के वक्त ही इसका लोकार्पण होना था। लेकिन उस वक्त ये नहीं हो सका और उसके कुछ दिनों बाद ही चुनाव आचार संहिता लगने की वजह से पूर्व सीएम शिवराज सिंह भी यहां नहीं बैठ सके।

ऐसी है नई एनेक्सी बिल्डिंग

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बीते कार्यकाल में भोपाल के मंत्रालय भवन में अति आधुनिक एनेक्सी बनाने का फैसला किया था। 615 करोड़ खर्च करके पांच मंजिल बनी इस एनेक्सी में जिस तरह का मुख्यमंत्री सचिवालय तैयार किया गया है, वह शायद पूरे देश में नहीं होगा। नई बिल्डिंग में सीएम और मुख्य सचिव के लिए अलग से लिफ्ट लगाई गई है। वहीं जिस कमरे में सीएम बैठेंगे बुलेटप्रूफ कांच लगाए गए हैं। अकेले सीएम के सचिवालय को ही हाईटेक बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए। एनेक्सी में सीएम के कमरे की सजावट पर ही एक करोड़ से ज्यादा खर्च हुए हैं। ग्रीन बिल्डिंग के सिद्धांतों के हिसाब से इसे डिजाइन किया गया है। ये बिल्डिंग कुल पांच लाख 75 हजार वर्गफीट में फैली हुई है। वहीं इसमें 1180 कारों की पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।

करीब 6 लाख वर्ग फीट में बनी और धौलपुर के पत्थरों से सजी मंत्रालय की यह एनेक्सी कार्पोरेट तर्ज पर बनी है। इसकी पांचवीं मंजिल के 40 हजार वर्गफीट एरिया में सीएम सचिवालय बनाया गया है। इसमें सीएम कक्ष के बगल में मीटिंग रूम है। पांच हजार वर्गफीट ओपन एरिया है। 50 मीटर की लॉबी है, जिसमें सीएम सचिवालय के अधिकारी बैठ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक के लिए भी हाईटेक हॉल बनाया गया है। जिसमें ई-कैबिनेट की व्यवस्था की गई है। बड़े-बड़े प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। इसमें 700 कारों के खड़े रहने के लिए मल्टी लेवल पार्किंग बनाई गई है। इसके अलावा अलग-अलग विभागों के प्रमुख सचिवों के लिए हाईटेक ऑफिस और मीटिंग रूम बनाए गए हैं। इसे आकार लेने में साढ़े तीन साल लगे हैं।

दिल्ली से लौटे सिंधिया समर्थक विधायक, कमलनाथ के शपथग्रहण में होंगे शामिल

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को मुख्यमंत्री घोषित करने के बाद दिल्ली जाकर सिंधिया के निवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अब सिंधिया से मिलने बाद भोपाल लौट आए है. दरअसल यह विधायक दिल्ली में कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को डिप्टी सीएम या प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की मांग को लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए थे. धरने पर बैठे यह विधायक अपनी जिद पर अड़े थे और रविवार दोपहर 12 बजे तक अपनी मांग को पूरे करने की बात कर रहे थे.

वहीं मामले को बढ़ता देख खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन विधायकों को अपने निवास में अन्दर बुलाया और समझाइश दी. जिसके बाद अब यह सभी विधायक भोपाल लौट गये है और कमलनाथ शपथ समारोह में शामिल होंगे.

शनिवार का घटनाक्रम 

समाप्त नही हुआ टकराव, दिल्ली पहुंची सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सूबे का मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। खुद मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कमलनाथ के नाम की घोषणा की गयी। लेकिन कमलनाथ के शपथग्रहण के दो दिन पहले यह मामला एक बार फिर दिल्ली पहुँच गया है। दरअसल कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रदेश की राजनीती में प्रदेश अध्यक्ष जैसा कोई अहम पद दिया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नही। उपमुख्यमंत्री पद सिंधिया ने लिया नही तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी अजय सिंह, अरुण यादव और दिग्विजय सिंह तक का नाम चलने लगा। जिसके बाद सिंधिया समर्थक विधायक कमलनाथ सरकार में खुद का असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। ऐसे में यह सभी नेता कुछ विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली स्तिथ ज्योतिरादित्य सिंधिया के निवास के बाहर धरने पर बैठ गए। मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर ,शिवपुरी ,दतिया और भिंड जिले के यह विधायक सिंधिया को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। यह नेता अब यह मांग कर रहे है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।


मध्यप्रदेश से दिल्ली पहुंचे इन विधायकों का कहना है कि जनता ने सिंधिया के नाम पर वोट दिए हैं, भाजपा की कब्जे वाली सीट पर भी सिंधिया के नाम पर जनता ने कांग्रेस को जिताया है, ऐसे में जब सिंधिया को मुख्यमंत्री नही बनाया गया है तो अब हम जनता के बीच किस मुंह से जाएं। विधायकों की मांग है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए| दिल्ली में मौजूद विधायकों का कहना है कि अगर 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना है तो हमारे महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। वहीं कुछ विधायकों का तो यह भी कहना है कि सिंधिया जी को सीएम नहीं बनाया गया तो हम कमलनाथ की नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।

जंबूरी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे कमलनाथ, तैयारियां तेज

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madhya pradesh congress chief kamalnath
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कल प्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर जंबूरी मैदान में शपथ लेंगे। जिसको लेकर प्रदेश प्रशासन की तैयारियां जोरों पर चल रही है। इस भव्य समारोह में बड़ी तादाद में लोगों के आने की संभावनाएं है। जिसके लिए सरकारी प्रेस में लगभग 2000 से ज्यादा कार्ड छापे जा रहे है। कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी। कमलनाथ स्वयं विशिष्ट अतिथियों को आने का न्यौता दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि समारोह में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा प्रमुख मायावती, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का नाम फाइनल हो चुका है। तो वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी संपर्क किया जा रहा है। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए कार्यकर्ताओं को बदलाव का संदेश देना चाहती है। 15 साल बाद सत्ता में हो रही वापसी के मद्देनजर शासन को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में सोमवार को कार्यकर्ता भोपाल आएंगे।

सोनिया गाँधी भी होंगी शामिल, पचौरी बोले यह ‘सौभाग्य की बात’

कमलनाथ के शपथग्रहण समारोह को लेकर अन्य दलों के नेताओं के साथ-साथ अब यूपीऐ अध्यक्ष सोनिया गाँधी भी शामिल होंगी। कमलनाथ के विशेष आमंत्रण पर आ रही सोनिया गाँधी के साथ ही प्रियंका गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी भोपाल आ रहे है। सोनिया गांधी के शपथ ग्राह समारोह में पहुंचने को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी ने कहा कि सोनिया गांधी का आना हमारे लिए सौभाग्य की बात। पचौरी ने कहा कि कमलनाथ एक बेहतरीन मुख्यमंत्री साबित होंगे।

एसपीजी, अधिकारीयों और कांग्रेस नेता ले रहे जायजा

राजधानी में कल होने वाले इस भव्य आयोजन को लेकर सुरक्षा तैयारियां भी जारों पर है। दिल्ली से भोपाल पहुंची एसपीजी ने शनिवार को जंबूरी मैदान में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इसके साथ ही स्थानीय अधिकारी और कांग्रेस के नेता भी सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेते नजर आए।

समाप्त नही हुआ टकराव, दिल्ली पहुंची सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सूबे का मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। खुद मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कमलनाथ के नाम की घोषणा की गयी। लेकिन कमलनाथ के शपथग्रहण के दो दिन पहले यह मामला एक बार फिर दिल्ली पहुँच गया है। दरअसल कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रदेश की राजनीती में प्रदेश अध्यक्ष जैसा कोई अहम पद दिया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नही। उपमुख्यमंत्री पद सिंधिया ने लिया नही तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी अजय सिंह, अरुण यादव और दिग्विजय सिंह तक का नाम चलने लगा। जिसके बाद सिंधिया समर्थक विधायक कमलनाथ सरकार में खुद का असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। ऐसे में यह सभी नेता कुछ विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली स्तिथ ज्योतिरादित्य सिंधिया के निवास के बाहर धरने पर बैठ गए। मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर ,शिवपुरी ,दतिया और भिंड जिले के यह विधायक सिंधिया को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। यह नेता अब यह मांग कर रहे है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।
मध्यप्रदेश से दिल्ली पहुंचे इन विधायकों का कहना है कि जनता ने सिंधिया के नाम पर वोट दिए हैं, भाजपा की कब्जे वाली सीट पर भी सिंधिया के नाम पर जनता ने कांग्रेस को जिताया है, ऐसे में जब सिंधिया को मुख्यमंत्री नही बनाया गया है तो अब हम जनता के बीच किस मुंह से जाएं। विधायकों की मांग है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए| दिल्ली में मौजूद विधायकों का कहना है कि अगर 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना है तो हमारे महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। वहीं कुछ विधायकों का तो यह भी कहना है कि सिंधिया जी को सीएम नहीं बनाया गया तो हम कमलनाथ की नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।

समर्थकों से नही मिले सिंधिया

अपनी मांग के साथ दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायकों से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुलाकात नही की है। ऐसे में कुछ नेता निवास के बाहर धरने पर बैठ गए है तो वहीं कुछ विधायक दिल्ली स्तिथ मध्यप्रदेश निवास चले गए है और आगे की रणनीति बना रहे है। कांग्रेस के सिंधिया समर्थक विधायकों की इस मांग ने कांग्रेस के अंदर एक बार फिर तूफान खड़ा कर दिया है। अब कांग्रेस आलाकमान इसका क्या समाधान निकालेगा यह देखने वाली बात है।

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