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लोकसभा में सोनिया गांधी ने मजदूरों के लिए उठाई आवाज़, याद दिलाई पंडित नहरू की बात

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image of upa chairperson sonia gandhi speaking at loksabha

लोकसभा में आज यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रेलवे की 6 इकाइयों के कंपनीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले चरण में रायबरेली की कोच फैक्ट्री का कंपनीकरण किया जा रहा है जो कि निजीकरण की शुरुआत है। सोनिया गांधी ने आगे कहा कि यह देश की अमूल्य संपत्ति को कौड़ियों के दाम चंद निजी हाथों के हवाले करने शुरुआत है। इससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे।

रायबरेली की कोच फैक्ट्री को मुद्दा उठाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार ने इस प्रयोग के लिए रायबरेसी की मॉर्डन कोच फैक्ट्री को भी चुना है। जिसमें बुनियादी क्षमता से ज्यादा उत्पादन हो रहा है और ये रेलवे का सबसे आधुनिक रेलवे कारखाना है। यह सबसे अच्छी इकाइयों में जानी जाती है। सोनिया गांधी ने कहा कि इसमें 2 हजार मजदूरों और कर्मचारियों की मेहनत लगी है लेकिन अब उन परिवारों को भविष्य खतरे में है।

पंडित नहरू की बात दिलाई याद

लोकसभा में सोनिया गांधी ने कहा कि पंडित नेहरू ने सार्वजनिक उद्योगों को आधुनिक भारत का मंदिर कहा था और आज इस तरह के मंदिर खतरे में है। आज कुछ खास पूंजीपतियों और उध्दयोगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे उद्योगों को संकट में डाल दिया गया है।

सोनियो गांधी ने आगे कहा कि एचएएल, एमटीएनएल के साथ क्या हो रहा है यह किसी से छुपा नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र की सभी कंपनियों की रक्षा की जाए।

हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कमलनाथ ने दिया इस्तीफा, राहुल गांधी के साथ कि बैठक

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लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद एक और राहुल गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके और पार्टी नए अध्यक्ष की तलाश कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी राहुल गांधी के समर्थन में इस्तीफा दे रहे है।

ज्ञात हो कि हरियाणा में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक में राहुल गांधी ने कहा था की चुनाव के बाद आए नतीजों के बाद हार की जिम्मेदारी लेते हुए किसी भी महासचिव या प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा नही दिया। जिसके बाद कांग्रेस के लगभग 200 से ज्यादा नेता इस्तीफा दे चुके है।

इसी बीच अब बड़ी खबर आई है कि हार की जिम्मेदारी लेते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अपने इस्तीफे राहुल गांधी के समक्ष रख दिये है। हालांकि अभी तक उनके इस्तीफे को मंजूर नही किया गया है।

आज पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि “राहुल जी के साथ हुई बैठक में मैंने और कमलनाथ जी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की। इस्तीफे नतीजे घोषित होने वाले दिन ही दे दिए गए थे। मुख्यमंत्रियों को हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए, बाकी फैसला पार्टी हाईकमान को करना है।”

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोहन मारकम को बनाया छत्तीसगढ़ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज शुक्रवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पड़ पर मोहन मारकम की नियुक्ति कर दी। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव से विधायक मोहन मारकम बस्तर इलाके से आते है और छत्तीसगढ़ के बड़े आदिवासी नेता है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से ही नए अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस पद के लिए मोहन मारकम से साथ ही मनोज मंडावी से मुलाकात की। इस बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रभारी पीएल पुनिया भी शामिल थे।

शाह ने लोकसभा में रखा कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव, कांग्रेस ने दिया जवाब

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ग्रह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में जम्मू कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव रखते हुए शाह ने कहा ” मेरा प्रस्ताव है कि 20 दिसंबर से जम्मू-कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए और बढ़ाना चाहिए।”

इसके साथ ही शाह ने कहा कि रमज़ान और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को देखते हुए इस साल के अंत तक कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते है।

कांग्रेस ने किया प्रस्ताव का विरोध

गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव का कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने विरोध करते हुए कहा कि “कश्मीर में आज यह हालत हो गयी है कि हर 6 महीने में वहां राष्ट्रपति शासन बढ़ाना पड़ रहा है। इसका कारण 2015 में भाजपा और पीडीपी के बीच हुआ गठबंधन है।”

तिवारी ने आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आपकी इस लड़ाई में हम आपके साथ है लेकिन आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में आप तभी जीत सकते हो जब लोग आपके साथ हों।

लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा चुनाव क्यों नही ? : तिवारी

शाह द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव करवाए जा सकते है तो फिर विधानसभा चुनाव क्यों नही ?

सभी नवनिर्वाचित सांसदों से मिले राहुल गांधी, पार्टी को दिया यह संदेश

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शनिवार को दिल्ली में संपन्न हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस अघ्यक्ष राहुल गांधी ने नव निर्वाचित सांसदों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि कांग्रेस से जुड़े हर व्यक्ति को याद रखना चाहिए कि वह संविधान को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है।

राहुल ने आगे कहा कि “कांग्रेस के 52 सांसद बीजेपी से इंच-इंच लड़ने के लिए काफी हैं। बीजेपी नफरत और गुस्से का इस्तेमाल हमारे खिलाफ करेगी और आप इसका आनंद उठाएं, आप आक्रामक बनें, ये समय आत्ममंथन करने और फिर से ऊर्जा ग्रहण करने का समय है। हमारी लड़ाई हर व्यक्ति के लिए है भले ही उसका रंग, उसकी आस्था कुछ भी क्यों न हो। हमारा संघर्ष देश के प्रत्येक नागरिक के लिए जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने आगे कहा कि यह लड़ाई जाति, धर्म, लिंग, रंगभेद से परे है। बता दें कि संसदीय दल की बैठक में लोकसभा सांसदों के साथ ही कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसदों ने भी हिस्सा लिया।

एक बार फिर कांग्रेस संसदीय दल की नेता चुनी गई सोनिया गांधी, 12 करोड़ वोटरों का किया धन्यवाद

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लोकसभा चुनावों के नतीजे के बाद आज शनिवार को हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक बार फिर कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया है। बैठक के दौरान पार्टी के सभी 52 लोकसभा सांसद मौजूद रहे। बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने कहा कि हम उन सभी 12.13 करोड़ मतदाताओं का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने कांग्रेस में विश्वास जताया।

बता दें कि संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद समेत कई नेता मौजूद रहे।

राहुल गांधी ने भी किया संबोधित

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बैठक को संबोधित करने हुए सभी मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि ” हर कांग्रेस कार्यकर्ता को यह याद रखना है कि वह सब देश के संविधान के लिए लड़ रहे है। वह सभी देश के हर नागरिक के लिए लड़ रहे है, बिना उसके रंग और विचारधारा देखे “

कर्नाटक में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन, नगरीय निकाय चुनाव में बन रही सबसे बड़ी पार्टी

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लोकसभा चुनाव मव भले ही कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा हो और कर्नाटक में सिर्फ एक सीट से उसके खाते में आई हो लेकिन नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया है। नगरीय निकाय चुनाव के वोटों की गिनती जारी है और ताजा नतीजों के अनुसार कांग्रेस सबसे आगे दिख रही है। वहीं भाजपा दूसरे और जेडीएस तीसरे नंबर पर दिखाई दे रही है।

शाम तक चुनाव के पूर्ण परिणाम आ जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लोकल निकाय चुनाव की वोटिंग में कांग्रेस और जेडीएस महागठबंधन आगे चल रहा है। वहीं भाजपा पीछे नजर आ रही है। कांग्रेस-476, जेडीएस-162, बीजेपी-341 और वहीं अन्य दल- 189 सीटों पर लीड कर रहे हैं।

इस बार अलग-अलग लड़े कांग्रेस और जेडीएस

बता दें कि इस बार के निकाय चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग अलग चुनाव लड़ा है। लेकिन राज्य में दोनों की साझा सरकार है। शाम तक नतीजे घोषित किए जाएंगे।

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटों पर प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की थी वहीं बीजेपी ने कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों में 25 सीटों पर जीती दर्ज की और बाकी तीन सीटों में एक-एक सीट कांग्रेस, जेडीएस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती।

कांग्रेस ने एक महीने के लिए चैनलों में प्रवक्ता भेजना बंद किया, बीजेपी भी करे ऐसा: रविश कुमार

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कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एक महीने के लिए चैनलों में प्रवक्ता न भेजने का एलान किया है। कांग्रेस का यह फैसला मीडिया और राजनीति के हित में है। कम से कम कांग्रेस के हित में तो है। क़ायदे से कांग्रेस को यह काम चुनाव के पहले करना चाहिए था जब तेजस्वी यादव ने ऐसा करने के लिए विपक्षी दलों को पत्र लिखा था। चुनाव हारने के बाद समाजवादी पार्टी ने अपने प्रवक्ताओं की टीम भंग कर दी ताकि वे किसी डिबेट में अधिकृत तौर पर जा ही न सकें। यह फ़ैसला कहीं से मीडिया विरोधी नहीं है। वैसे भी मीडिया से संपर्क रखने का एकमात्र तरीक़ा डिबेट नहीं है। कांग्रेस के इस फ़ैसले को 2014 के बाद मीडिया की नैतिकता में आए बदलवा के संदर्भ में देखना चाहिए।

कांग्रेस का यह फ़ैसला अच्छा है मगर कमज़ोर है। उसे प्रवक्ताओं के साथ खलिहर हो चुके सीनियर नेताओं पर भी पाबंदी लगा देनी चाहिए। अगर वे जाना बंद न करें तो अमित शाह से बात कर बीजेपी में ज्वाइन करा देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भरी सभा में अपने सांसदों से कहा कि छपास और दिखास से दूर रहें। किसी ने नहीं कहा कि एक जनप्रतिनिधि को चुप रहने की सलाह देकर प्रधानमंत्री सांसद की स्वायत्ता समाप्त कर रहे हैं। मतलब साफ़ था कि पार्टी एक जगह से और एक तरह से बोलेगी। आपने पाँच साल में बीजेपी सांसदों को चुप ही देखा होगा जबकि उनमें से कितने ही क़ाबिल थे। बिना मीडिया से बोले एक सांसद अपना कार्यकाल पूरा करे यह भयावह है।

कांग्रेस को चुनावों के समय मीडिया के स्पेस में मिली जगह का अध्ययन करना चाहिए। राहुल गांधी को थोड़ी बहुत जगह तो मिली लेकिन बाकी नेताओं को बिल्कुल नहीं। राहुल गांधी की सभा को सिंगल और आधे कॉलम में छापा गया जबकि बीजेपी के हर नेता की सभी को बड़ा कर छापा गया। सरकार की असफलताओं पर पर्दा डाला गया और विपक्ष का निरंतर मज़ाक़ उड़ाया गया। पूरे पाँच साल यही चला है। सारी बहस बीजेपी के थीम को सही मानते हुए की गई। स्क्रीन पर बीजेपी का एजेंडा फ़्लैश करता रहा और कांग्रेस के प्रवक्ता वहाँ जाकर उस बहस को मान्यता देते रहे।

एक सवाल आप सभी पूँछें। क्या मीडिया में विपक्ष दिखता था? वह मार खाते लुटते पिटते दिखता था। खुलेआम एंकर विपक्ष के नेता को पप्पू कहता था। मज़ाक़ उड़ाया गया। मीडिया ने एक रणनीति के तहत विपक्ष और कांग्रेस को ग़ायब कर दिया। कांग्रेस के प्रेस कांफ्रेंस को स्पीड न्यूज़ में सौ ख़बरों के बीच चलाया गया और बीजेपी नेताओं की हर बात बहस हुई। बहस भी एकतरफ़ा हुई। मीडिया ने सरकार के सामने जनता की बात को भी नहीं रखा। एंटी विपक्ष पत्रकारिता की शुरूआत हुई ताकि लोगों को लगे कि मीडिया आक्रामक है। सवाल सरकार से नहीं विपक्ष से पूछा गया। विपक्ष नहीं मिला तो लिबरल को गरियाया गया।

कांग्रेस में नैतिक बल नहीं है। वरना हिन्दी प्रदेशों के तीनों मुख्यमंत्री अब तक व्हाइट पेपर रख सकते थे कि बीजेपी की सरकारों में किस मीडिय को पैसा दिया गया। पैसा देने का मानक क्या था और किस तरह भेदभाव किया गया। कांग्रेस की टीम अब तक अपनी रिपोर्ट लेकर तैयार होती कि कैसे इस चुनाव में मीडिया ने एकतरफ़ा बीजेपी के लिए काम किया। अज्ञात जगहों से आए निर्देशों के मुताबिक़ न्याय पर चर्चा नहीं हुई। कांग्रेस बग़ैर मीडिया से लड़े कोई लड़ाई नहीं लड़ सकती है। उसके मैनिफ़ेस्ट में मीडिया में सुधार की बात थी मगर उसके नेता ही चुप लगा गए।

मैं तो बीजेपी से भी अपील करता हूँ कि वह अपना प्रवक्ता न भेजे। अभी तक गोदी मीडिया के एंकर कम लागत वाली चाटुकारिता और प्रोपेगैंडा कर रहे थे। स्टूडियो में तीन लोगों को बिठाया और चालू। बीजेपी अब कहे कि मोदी सरकार की कामयाबी को ज़मीन से दिखाइये। जब ज़मीन से रिपोर्ट बनेगी तो कई सौ रिपोर्टरों को नौकरी मिलेगी। भले ही संघ की विचारधारा के रिपोर्टर को ही मिले। पर क्या यह संघ के हित में नहीं है कि उसकी बीन पर नाचने वाले एक एंकर न होकर कई रिपोर्टर हों। कम से कम वह अपने समर्थकों को रोजगार तो दिलाए। बीजेपी ने मेरा बहिष्कार किया है फिर भी मैं चाहता हूँ कि वह प्रवक्ता किसी भी चैनल में न भेजे। जब बहिष्कार नहीं किया था और एंकर नहीं बना था तब से इस डिबेट के ख़िलाफ़ लिख रहा हूँ।

डिबेट की प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है। इसकी उपयोगिता प्रोपेगैंडा फैलाने तक ही सीमित है। इसमें सूचना नहीं होती है। सिर्फ धारणा होती है। डिबेट के कारण किसी चैनल के पास कंटेंट नहीं हैं। मेहनती रिपोर्टर हटा दिए गए हैं। एंकरों को लाया गया है जो पूरी सैलरी लेकर चौथाई काम करते हैं। डिबेट में कोई काम नहीं करना होता है। सिर्फ प्रवक्ताओं के आने के समय पर नज़र रखनी होती है। अपना पेट कम रखना होता है और कपड़े ठीक पहनने होते हैं। एक एंकर औसतन दो से तीन घंटे ही काम करता है। मेरी मानें तो डिबेट करने वाले सारे एंकर की सैलरी आधी कर जी जानी चाहिए। डिबेट ने चैनलों की रचनात्मकता को समाप्त कर दिया है। कंटेंट से ख़ाली चैनल एक दिन न चल पाए अगर बीजेपी और कांग्रेस अपना प्रवक्ता न भेजें। ख़ाली हो चुके चैनलों को भरने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस अपनी हत्या की क़ीमत पर क्यों उठाए ?

कांग्रेस को यह क़दम कम से कम एक साल के लिए उठाना चाहिए था। एक महीने तक प्रवक्ता न भेजने से दूसरे नंबर के एंकर मारे जाएँगे। क्योंकि इस दौरान बड़े एंकर छुट्टी पर होते हैं। यूपीए के समय एक पद बड़ा लोकप्रिय हुआ था। राजनीतिक संपादक का। संपादक नाम की संस्था की समाप्ति के बाद यह पद आया। तब भी राजनीतिक संपादक महासचिवों और मंत्रियों के नाम और इस्तीफे की ख़बर से ज़्यादा ब्रेक नहीं कर पाते थे। लेकिन अब तो सूत्र भी समाप्त हो गए हैं। शपथ ग्रहण के दिन तक राजनीतिक संपादक बेकार बैठे रहे। मीडिया के मोदी सिस्टम में किसी को हवा ही नहीं लगी कि कौन मंत्री था। चैनलों के सीईओ राजनीतिक संपादकों को निकाल कर भी काफ़ी पैसा बचा सकते हैं। इनका काम सिर्फ मोदी-शाह के ट्वीट को री ट्वीट करना है। इनकी जगह क़ाबिल रिपोर्टरों पर निवेश किया जा सकता है।

न्यूज़ चैनल तटस्थ नहीं रहे। अब नहीं हो सकते। चैनल सिर्फ सत्ता के प्रति समर्पित होकर ही जी सकते हैं। उन्हें सत्ता में समाहित होना ही होगा। इन चैनलों में लोकतंत्र की हत्या होती है। एंकर हत्यारे हैं। आप खुद भी चैनलों को देखते समय मेरी बात का परीक्षण कीजिए। उम्मीद है मोदी समर्थक भी समझेंगे। वे मोदी की कामयाबी और मीडिया की नाकामी में फ़र्क़ करेंगे। एक सवाल पूछेंगे कि क्या वाक़ई डिबेट में मुद्दों की विविधता है? जनता की समस्याओं का प्रतिनिधित्व है? क्या वाक़ई इन चैनलों की पत्रकारिता पर गर्व होता है?

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है)

पीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस, खोदा पहाड़ निकली चुहिया : कांग्रेस का पलटवार

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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई पहली और आखरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

वार्ता में राफेल के मुद्दे पर राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह प्रेस कांफ्रेंस कर रहें। मैंने पीएम मोदी से राफेल को लेकर सवाल पूछा था। मैं उन्हें भ्रष्टाचार पर बहस की चुनौती दी थी, लेकिन उन्होंने मुझसे बहस नहीं की।

राफेल के साथ ही 15 लाख के मुद्दे पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि “हमने पीएम मोदी के झूठ को उजागर किया है। हमने बताया कि वह 15 लाख रुपये नहीं दे सकते हैं। 23 तारीख को पता लग जाएगा कि जनता क्या चाहती है। वैसे प्रधानमंत्री मोदी से सवाल क्यों नहीं किया जाता है।”

पीएम की पहली प्रेस वार्ता, खोदा पहाड़-निकली चुहिया: रणदीप सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रेस वार्ता पर हमला बोलते हुए कहा, “मोदीजी की पहली और आखिरी प्रेसवार्ता, अमित शाह की बैसाखी बना। खोदा पहाड़, निकली चुहिया। 1 घंटे का भाषण, पत्रकारों के चेहरे पर थकान, पत्रकारिता पर बहुत सारा प्रवचन, 1 सवाल नहीं, 1 जबाब नहीं।”

https://twitter.com/rssurjewala/status/1129353549207539714

बिहार में बोले प्रधानमंत्री मोदी, एक तरफ वोट भक्ति और दूसरी तरफ देशभक्ति की राजनीति

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बिहार के अररिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आज कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश मे आज एक तरफ वोटभक्ति की राजनीति हो रही है तो दूसरी तरफ देशभक्ति की।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि “याद करिए 26/11 को मुम्बई में जब आतंकी हमला हुए था तब कांग्रेस सरकार ने क्या किया था ? तब देश के वीर जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर बदल लेने की इजाजत मांगी थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने उन्हें कुछ भी करने के लिए मन कर दिया।

कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया क्यों क्योंकि वो वोटेभक्ति की राजनीति करती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि ” सबको पता था कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें सजा देने की बजाय हिंदुओं को आतंकी बताने पर ध्यान लगाया।

https://twitter.com/ANI/status/1119516297262452737?s=19

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