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मोदी सरकार के बजट को चुनावी स्टंट बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया बड़ा हमला

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मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष बजट को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमले बोल रहा है। वहीं इसी बाच अब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट को चुनावी स्टेट बताते हुए हमला बोला है।

केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि यह बजट मई में होने वाले लोकसभा चुनावों पर प्रभाव डालेगा। इस बजट में सरकार ने मध्यम वर्ग, किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। यह एक चुनावी बजट है।

वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बजट को ‘अंतिम जुमला’ करार देते हुए कहा था कि कि इससे दिल्ली को निराशा ही हाथ लगी है। केंद्रीय करों में हमारा हिस्सा 325 करोड़ रुपये पर ही अटका रहा और स्थानीय निकायों के लिए कुछ भी आवंटित नहीं किया गया।

बता दें कि 5 लाख तक की आय वालों के लिए टैक्स में छूट की घोषणा करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह अंतरिम बजट नहीं है, बल्कि यह बजट देश के विकास का वाहक बनेगा। सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे 15 हजार तक की आय वाले कामगारों के लिए साठ साल की उम्र के बाद पेंशन की घोषणा भी की है।

राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत, छुआ 100 का आंकड़ा

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राजस्थान के रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की शाफिया जुबैर खां ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 12,228 वोटों से जीत हासिल कर ली है। इस जीत के साथ राजस्थान के विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक सीट कम रह गई है। अभी तक कांग्रेस के पास 99 सीटें थीं जबकि सहयोगी आरएलडी के साथ एक सीट मिलाकर कांग्रेस ने यहां सरकार बनाई थी। इस जीत के बाद कांग्रेस के पास अब कांग्रेस के पास 100 सीटें हैं।
इस लिहाज से कांग्रेस के लिए रामगढ़ विधानसभा सीट शुरू से ही अहम मानी जा रही थी। यह जीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी खास है। वह अपनी पहली परीक्षा में पास हो गए हैं। अशोक गहलोत ने जीत पर कहा, ‘मैं खुश हूं कि लोगों ने सोच-विचारकर कदम उठाया है। उन्होंने सही फैसला किया है। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने ऐसे समय में संदेश दिया है जब इसकी जरूरत थी। यह पार्टी को लोकसभा चुनाव के लिए प्रोत्साहित करेगा।’


इस सीट पर विधानसभा चुनाव के पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के उम्मीदवार प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। रामगढ़ में कांग्रेस ने शाफिया जुबैर खां पर भरोसा जताया था, वहीं बीजेपी ने सुखवंत सिंह और बीएसपी ने जगत सिंह को मैदान में उतारा था। रामगढ़ में दूसरे नंबर पर बीजेपी रही। सुखवंत सिंह को 71,083 वोट मिले। लोकसभा चुनाव से पहले हुए इस आखिरी उपचुनाव को काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान में बीजेपी को क्लीन स्वीप मिली थी।

10 बार कांग्रेस यहां से जीत चुकी है


कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में बीजेपी और उसके स्थानीय नेता ज्ञानदेव आहूजा की काफी किरकरी हुई थी जो बीजेपी की हार की मुख्य वजह रही। जीत के बाद कांग्रेस की प्रत्याशी शाफिया खां ने मीडिया से कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति के चलते ही बीजेपी को यहां हार मिली है। उन्होंने कहा कि रकबर खान की हत्या के मामले में रामगढ़ को काफी बदनाम किया गया था। उन्होंने कहा, ‘लोगों को पता है कि हम काम करने में यकीन करते हैं।’

बीएसपी ने लगाई वोटों में सेंध


रामगढ़ में इस बार कांग्रेस, बीजेपी के साथ बीएसपी के प्रत्याशी के बीच भी मुकाबला था। बीएसपी के वजह से कांग्रेस को कुछ वोटों का नुकसान भी उठाना पड़ा। कांग्रेस का मानना है कि उनका वोटबैंक दलित भी है इस वजह से बीएसपी ने उनके वोटों पर सेंध लगाने का काम किया है वरना जीत का आंकड़ा और अधिक होता।

कांग्रेस का हौसला बुलंद


रामगढ़ में पलड़ा कांग्रेस का ही भारी रहा है। यहां अब तक 14 विधानसभा चुनावों में 10 बार कांग्रेस और 4 बार बीजेपी जीती है। बीजेपी के ज्ञानदेव आहूजा यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वहीं शाफिया के पति जुबैर खां भी इस सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं। रामगढ़ की इस जीत से अब आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का हौसला और मजबूत हो गया है। अब कांग्रेस की निगाहें राज्य की 25 लोकसभा सीटों पर है।

भाजपा विधायक का विवादित बयान, राहुल को ‘रावण’ और प्रियंका गांधी को बताया ‘शूर्पणखा’

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सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी के प्रवेश पर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। कोई कांग्रेस के इस फैसले की आलोचना कर रहा है तो कोई इसे सही कदम बता रहा है। इसी बाच उत्तर प्रदेश के बलिया से भाजपा विधायक ने तो आलोचना की सीमा ही लांघ दी और प्रियंका गांधी वाड्रा को रामायण की शुर्पणखा बता दिया। भाजपा विधायक सुरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ‘रावण’ और उनकी बहन प्रियंका गांधी को ‘शूर्पणखा’ बताया है।

बैरिया से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने एक सवाल पर कहा कि कांग्रेस एक टूटी हुई नौका हो चुकी है और वह केवल एससी-एसटी एक्ट के कारण राजस्थान और मध्य प्रदेश में जीत गई। आप जानते हैं कि जब राम और रावण का युद्ध होने वाला था तो पहले रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा को भेजा था। राम की भूमिका में मोदी हैं और रावण की भूमिका में राहुल हैं जिन्होंने अपनी बहन शूर्पणखा को उतारा है। मान कर चलिये कि लंका विजय हो गयी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोदी फिर से भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।

सुरेंद्र यहीं नही रुके, उन्होने आगे कहा कि भारत की राजनीति की लंगोट हैं पीएम मोदी। बता दें कि सुरेंद्र सिंह पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में घिर चुके हैं। इससे पहले बिहार में भाजपा के मंत्री ने भी प्रियंका गांधी पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि खूबसूरत चेहरों के दम पर वोट नहीं जीते जा सकते।

बिहार के मंत्री विनोद नारायण झा ने प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस महासचिव बनाए जाने पर कहा, खूबसूरत चेहरों के दम पर वोट नहीं जीते जा सकते। इससे भी बढ़कर तथ्य यह है कि वह रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी हैं, जिन पर भूमि घोटाले और भ्रष्टाचार के कई मामलों में शामिल होने का आरोप है। वह बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन उसके अलावा उनकी कोई राजनैतिक उपलब्धि नहीं है।

दरअसल, यूपी में प्रियंका को पूर्वी यूपी की कमान सौंपने के फैसले को लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। अब यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रियंका के आने से यूपी में त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। पहले सपा-बसपा और सीधे बीजेपी के बीच लड़ाई थी, मगर अब चुनावी जंग में कांग्रेस वापस आ गई है।

बेरोजगारी के आंकड़ें दबाकर बैठी मोदी सरकार, 2 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा।

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राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद मामले पर राजनीति तेज हो गई है। बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। वरिष्ट काग्रंस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा, “सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। रिपोर्ट और इसे तैयार करने वाले आयोग का ताल्लुक भारत की जनता से है, न कि किसी राजनीतिक दल से। इसका कोई मतलब नहीं है कि सरकार इस रिपोर्ट को सिर्फ इसलिए जारी नहीं करे कि इसके तथ्य उसके मुताबिक नहीं है।’’

मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए पटेल ने कहा कि सांख्यिकी आयोग के सदस्यों के इस्तीफे से एक और संस्थान निष्क्रिय हो गया है। मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “सांख्यिकी आयोग उन प्रतिष्ठित संस्थानों की कतार में शामिल हो गया है जिनको प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने बर्बाद किया है। इनमें आरबीआई, सीबीआई, सीवीसी, सीबीडीटी, ईडी और आयकर पहले से हैं।’’

सिंघवी ने आगे कहा कि आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोग इस सरकार के दबाव में नहीं झुक सकते और न ही डेटा के साथ छेड़छाड़ का प्रयास कर सकते हैं। परंतु झुकने वाले नौकरशाहों का इस्तेमाल बदले की राजनीति के लिए हो सकता है। इनको आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोगों से सीखना चाहिए।

गौरतलब है कि सांख्यिकी आयोग के दो स्वतंत्र सदस्यों पी सी मोहनन और जे वी मीनाक्षी ने सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने के चलते इस्तीफा दे दिया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मोहनन आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे।

YuvaKrantiYatra Live: मैं जानता हूं कि नरेन्द्र मोदी जी अब आपको रात को नींद नहीं आ रही : राहुल गांधी

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युवा कांग्रेस द्वारा आयोजिय “युवा क्रांति यात्रा” में पहुंचे राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। यूथ कांग्रेस की “युवा क्रांति यात्रा” पिछले महीने महीने यानी दिसंबर, 2018 में शुरू हुई थी, जो देश के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए बुधवार को नोएडा-दिल्ली बॉर्डर से शुरू होकर आईटीओ-इंडिया गेट होते हुए संसद मार्ग से होकर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम पहुंची।

यात्रा में शामिल राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोते हुए कहा कि..

शिवराज सरकार ने किया 2000 करोड़ से ज्यादा का कृषी घोटाला, कांग्रेस कराएगी जांच औऱ एफआईआर

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मध्यप्रदेश प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पिछली शिवराज सरकार में हुए फर्जीवाड़े का आए दिन खुलासा हो रहा है। काग्रेस द्वारा की जा रही किसान कर्जमाफी की प्रक्रिया में आ रही गड़बड़ियों पर आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़ा बयान देते शिवराज सरकार पर किसानों के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया है। मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि ‘ पिछली सरकार में फर्ज़ी कर्ज़ का यह बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। हमें लग रहा है कि यह घोटाला 2000 करोड़ से लेकर 3000 करोड़ तक पहुंच सकता है। हम इस घोटाले की जांच कराएंगे और किसी को छोड़ेंगे नहीं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आगे कहा कि, ‘मैं दो-तीन लोगों से मिला, किसी ने भी लोन नहीं लिया है लेकिन लिस्ट में उनके नाम पर लोन दिखाया गया है। कुछ ऐसे भी लोग मिले हैं जिनका नाम गलत तरीके से कर्ज माफी की लिस्ट में शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है और यह दो हजार करोड़ से भी बड़ा हो सकता है। यह बीजेपी शासन का बड़ा घोटाला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी बैंक मैनेजरों के खिलाफ हमारी सरकार कार्रवाई करेगी।

जल्द होगा गौशालाओं का निर्माण

गोशालाओं के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ‘मुझे बड़ा दुःख है कि पिछले 15 वर्षों में जो ख़ुद को गोरक्षक कहते थे, उन्होंने एक भी गोशाला का निर्माण नहीं किया। हमने कल ही निर्णय लिया है कि हम अपने वचन पत्र के वादे के अनुसार गोशालाओं का निर्माण करवाएंगे। हम लक्ष्य तय करेंगे कि कितनी गोशाला कितने समय में हम बना देंके। हम इसकी हर माह समीक्षा करेंगे। हमारी सरकार गोल्फ़ कोर्स की सरकार नहीं है, इसलिए हमने गोल्फ़ कोर्स निरस्त करने का निर्णय लिया है। वहीं राम मंदिर को लेकर कमलनाथ ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को राम मंदिर की याद सिर्फ़ चुनाव के वक़्त ही आती है। पिछले 4.5 वर्षों में उन्हें इसकी याद क्यों नहीं आयी।

कुष्ठ रोग को जड़ से मिटाने मंत्री ने विद्यार्थियों को दिलाया संकल्प

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कमलनाथ सरकार में केबीनेट मंत्री पी.सी.शर्मा ने आज शासकीय कमला नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कुष्ठ रोग को जड़ से मिटाने के लिए विद्यार्थियों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि कुष्ठ रोग भी अन्य बीमारियों की तरह ही है, जिसे उपचार द्वारा ठीक किया जा सकता है। यह छूआछूत या संक्रमण की बीमारी नहीं है। शर्मा ने इस अवसर पर छात्राओं को इस दिशा में उत्कृष्ट प्रयासों के लिये पुरस्कार भी वितरित किए।

राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ जागरूकता अभियान का शुभारंभ करते हुए शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वयं कुष्ठ रोगियों की सेवा की थी। उन्होंने यह संदेश दिया था कि यह रोग किसी को स्पर्श करने से नहीं होता है। शर्मा ने गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनका स्मरण करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि दूसरों को सीख देने से पहले खुद को उस पर अमल करना चाहिए। यह गांधी जी के मूल सिद्धांतों में शामिल है। जनसम्पर्क मंत्री ने छात्राओं से लगन और समर्पण के साथ अपना कार्य करने का आव्हान किया।

कुष्ठ निवारण के लिए दिलाया संकल्प


मंत्री पीसी शर्मा ने कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं को संकल्प दिलाया कि सभी कुष्ठ पीड़ित अथवा कुष्ठ मुक्त परिवार से समान व्यवहार रखेंगे। कुष्ठ रोगियों को सम्मान देंगे। उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेंगे। कुष्ठ रोगियों को उपचार दिलाने में सहयोग करेंगे। गांव, प्रदेश और देश को कुष्ठ मुक्त बनाने के लिए सतत् प्रत्यनशील रहेंगे। शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के साथ ही सभी को यह संकल्प भी दिलाया कि वे आगामी एक वर्ष में भोपाल में मौजूद सभी 220 कुष्ठ रोगियों को कुष्ठ मुक्त करेंगे।

स्पर्श अभियान का किया शुभारंभ


जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा ने विद्यालय में स्पर्श अभियान का भी शुभारंभ किया औऱ कुष्ठ रोगी जावेद और नफीस से हाथ मिलाते हुए संदेश दिया कि कुष्ठ रोगियों से हाथ मिलाने या उनके साथ रहने से सामान्य व्यक्ति को कुष्ठ रोग नहीं होता।

स्कूली विद्यार्थियों को ब्लैक बोर्ड और कुर्सियों की सौगात


कार्यक्रम के संयुक्त आयोजक भोपाल क्लासिक लायंस क्लब द्वारा छात्राओं को दो ब्लैक बोर्ड भेंट किए गए। कार्यक्रम में मौजूद मध्यप्रदेश तृतीय श्रेणी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रमोद तिवारी ने छात्राओं के लिए दो सौ कुर्सियां प्रदान करने की स्वीकृति दी।

पूर्व मुख्यमंत्री गौर को एक बार फिर मिला कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर

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लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस में गौर को लेकर घमासान जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ऑफर को ठुकराने के बाद गौर को फिर एक बार कांग्रेस से चुनाव लड़ने का ऑफर मिला है। इस बार केबीनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने गौर को कांग्रेस में शामिल होने का खुला न्यौता दिया है। वर्मा ने गौर को भोपाल सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया। सज्जन ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी बाबूलाल गौर का हमेशा से सम्मान करती आई है और उनको उसी पार्टी से चुनाव लड़ना चाहिए जहां सम्मान मिलता हो।

बता दें कि इससे पहले दिग्विजय सिंह ने बाबूलाल गौर को कांग्रेस की टिकट पर भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का अॉफर दिया था। जिस पर पहले गौर ने विचार करने की बात कही थी और बाद में प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की नसीहत के बाद उन्होने सिंह का अॉफर ठुकरा दिया था।

हांलाकि गौर ने कांग्रेस का अॉफर ठुकराने के साथ ही भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि भाजपा में अब वरिष्ठ नेताओं की इज्जत नही है।

मिशन ‘गौशाला’ पर कमलनाथ सरकार ने शुरु किया काम, प्रदेश भर में बनेंगी गौशाला

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कांग्रेस ने विधानसभा चुनावो के समय अपने वचन पत्र में हर ग्राम पंचायत में एक गौशाला खोलने का वादा किया था। जिसको पूरा करने के लिए अब कमलनाथ सरकार ने काम करना शुरू कर दिया गया है। निराश्रित पशुओं की उचित देखभाल के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर गौशालाओं के सब्सटेंशियल मॉडल विकसित के लिए अपर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा मंडल श्री इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में अपर मुख्य सचिव वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा पशुपालन विभाग, प्रमुख सचिव कृषि विभाग और प्रमुख सचिव कृषि को समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। आयुक्त मनरेगा को समिति में सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। समिति द्वारा गौशालाओं के सब्सटेंशियल मॉडल निर्माण एवं संचालन के लिए आवश्यक मार्गदर्शीय सिद्धांतों का निर्धारण और समय-समय पर प्रदेश स्तर की समीक्षा की जायेगी।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में अनुमानित 6 लाख निराश्रित गोवंश हैं। प्रदेश में कुल पंजीकृत 1285 गौशाला में से 614 क्रियाशील गौशाला हैं, जिनमें 1,53,834 गौवंश हैं। सड़कों पर आवारा घूम रहे निराश्रित गोवंश को गौ-शालाओं में रखने की तैयारी की जा रही है। 16 जनवरी से भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। पशुपालन, मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री लाखन सिंह यादव ने बताया था कि 5 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को शहर के बाहरी इलाके सूखी सेवनिया में बनी बरखेडी गौशाला में रखा जायेगा। गौसंवर्धन के मद में 50 करोड़ रूपये हैं। गौशाला में उनके लिए चारे की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के सभी 52 जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिख कर कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में आने वाली पंचायतों में वह सरकारी भूमि चिन्हित करें, जहां गौशाला बनाई जा सके। फिर हमें इसकी सूचना दी जाए ताकि गौशाला निर्माण किया जा सके।

जानें आखिर क्यों प्रियंका गांधी को मिली सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी ?

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सक्रिय राजनीती में प्रियंका गाँधी के प्रवेश के बाद उत्तरप्रदेश के साथ ही देश की राजनीती का परिदृश्य तीजी से बदल रहा है। प्रियंका के आने से जहां कांग्रेस के हौसले बुलंद है तो वहीं भाजपा के साथ ही सपा-बसपा गठबंधन भी अब कांग्रेस के इस मास्टर स्ट्रोक के जवाब तलाश करने में लग गए हैं। ऐसे में एक सवाल सबके अंदर उठ रहा है कि आखिर प्रियंका को देश और उत्तर प्रदेश की जगह पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित क्यों रखा गया।

लोग एक सवाल और पूछ रहे हैं कि अगर प्रियंका को सियासत में आना ही था तो कांग्रेस ने माहौल क्यों नहीं बनाया? जिसे गांधी परिवार का सबसे बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा था, उसकी सियासी एंट्री की घोषणा एक पन्ने की प्रेस विज्ञप्ति से हुई और उस पन्ने पर भी केसी वेणुगोपाल को संगठन महासचिव बनाने को ज्यादा प्रमुखता दी गई थी।

उस दिन राहुल गांधी अपने हर भाषण में ऐसे बोलते रहे जैसे प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद कांग्रेस में बराबर हो। पार्टी के एक बुजुर्ग नेता प्रियंका की टाइमिंग पर नहीं कांग्रेस के रवैये पर शक जताते हुए पूछते हैं कि सबसे बड़ा धमाका करने से पहले पार्टी थोड़ी तैयारी करती तो अच्छा होता। संजय गांधी को महासचिव बनाने से पहले भी माहौल बनाया गया था। उनके निधन के बाद राजीव सियासत में आए तो माहौल गमगीन था फिर भी मीडिया को खबर दी गई थी। जब राहुल गांधी पहले महासचिव और फिर अध्यक्ष बनाए गए तो उनको भी तरजीह मिली। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी गांधी के नाम का एलान प्रेस विज्ञप्ति में पांचवी लाइन में किया गया है।

कांग्रेस की मीडिया टीम से जुड़े एक नेता एक अजीब ही बात कहते हैं – ‘पिछले कुछ दिनों में अचानक एक परिवर्तन तेजी से हुआ है। अगर प्रियंका गांधी को ताकतवर बनाना ही था तो उनकी टीम क्यों कमजोर की जा रही है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला प्रियंका गांधी के बेहद खास माने जाते हैं। लेकिन इधर प्रियंका गांधी के नाम का ऐलान हुआ है और उधर वे हरियाणा के जिंद से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि वे पहले से ही विधायक थे। कांग्रेस में कोई तो ऐसा है जो नहीं चाहता कि प्रियंका गांधी पावरफुल हो जाएं।’

भाजपा के नेताओं के पास जब बुधवार की दोपहर खबर पहुंची कि प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है तो उसके भी बड़े-बड़े नेता चौंक गए। एक नेता ने हैरान होते हुए अपने एक करीबी से कहा – ‘कांग्रेस की यही समस्या है। या तो ये बिना ज्यादा सोचे-समझे लिया गया फैसला है या फिर कुछ ज्यादा ही सोचा गया है। अगर प्रियंका गांधी को सियासत में लाना ही था तो उत्तर प्रदेश के एक इलाकाई नेता की तरह क्यों लाए। कम से कम पूरे उत्तर प्रदेश का इंचार्ज बनाते। प्रेस विज्ञप्ति में ये लिखने की क्या जरूरत थी कि प्रियंका सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश ही देखेंगी।

प्रियंका गांधी कहां से चुनाव लड़ेंगी इस पर भी सस्पेंस कायम है। कांग्रेस के ताकतवर नेताओं से जब इस बारे में जानना चाहा तो पता चला कि राहुल गांधी रायबरेली जा सकते हैं और प्रियंका गांधी अमेठी से चुनाव लड़ सकती हैं। वैसे प्रियंका की टीम बताती है कि मैडम अभी चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं। वे पूरी तरह पूर्वांचल पर फोकस करना चाहती हैं।

उत्तर प्रदेश के कम से कम आधे दर्जन ऐसे नेता हैं जो अपने ड्राइंग रूम में बरसों से सोनिया और राहुल के साथ प्रियंका गांधी की तस्वीर लगाये बैठे थे। इनमें से कई नेता प्रियंका के सक्रिय राजनीति में इस तरह से आने से उतने हैरान-परेशान नहीं हैं। इन्हें लगता है कि 1984 के बाद से पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस धीरे-धीरे कमजोर होती गई है। लेकिन अगर प्रियंका ने वहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी तो उसे ज़िंदा किया जा सकता है।

प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अवध की भी जिम्मेदारी मिली है मतलब कि कुल मिलाकर 42 सीटें उनके पास हैं। 2014 में कांग्रेस इनमें से सिर्फ दो सीटें – अमेठी और रायबरेली ही – जीत पाई थी। लेकिन 2009 में उसे इनमें से 15 सीटें मिली थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पूर्वी उत्तर प्रदेश और अवध में 10 फीसदी वोट मिले थे, जबकि पश्चिम उत्तर प्रदेश में उसे सिर्फ पांच फीसदी वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। अगर इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो प्रियंका गांधी को पूर्वांचल में सोच-समझकर लाया गया है। यहां की 42 में से 40 सीटें कांग्रेस के पास नहीं है लेकिन उसका पुराना वोट बैंक पूरी तरह खिसका नहीं है। 2009 में उसके इसी वोट बैंक ने चमत्कार करते हुए उसे 15 सीटें दिलवाई थीं।

कांग्रेस के पूर्वांचल के एक नेता कहते हैं प्रियंका गांधी के सियासत में आने का एलान भले ही धमाकेदार ना हुआ हो लेकिन लखनऊ में दस फरवरी को होने वाली रैली धमाका करेगी। प्रियंका की बड़े पर्दे पर एंट्री उसी दिन समझिए। अब तक कांग्रेस के कार्यकर्ता में ना जोश था, ना चुनाव जीतने का यकीन। 2017 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी के नाम पर वोट मांग चुके हैं और हार भी चुके हैं। इस बार कुछ नया और अलग कहने को है। कांग्रेस के दफ्तर की खबर रखने वाले एक पत्रकार बताते हैं कि अगर 2014 में अमित शाह उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जीतने का फॉर्मूला गढ़ सकते हैं तो प्रियंका गांधी भी ऐसा कर ही सकती हैं। इस बार आर या पार होगा। गांधी परिवार ने बंद मुट्ठी खोल दी है। अब ये मुट्ठी लाख की होगी या खाक की, उत्तर प्रदेश का वोटर तय करेगा। अगर राहुल गांधी की किस्मत में प्रधानमंत्री बनना लिखा है तो 2019 से बेहतर मौका नहीं मिलेगा और प्रियंका से बढ़िया कोई और नहीं जो कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश जीत सके।

इसीलिए पूरे देश में राहुल गांधी घूमेंगे और उत्तर प्रदेश – बल्कि उस पूर्वांचल को जहां से कांग्रेस को जीतने की सबसे ज्यादा उम्मीद है – प्रियंका गांधी संभालेंगी। राहुल गांधी ने अमेठी में अपने वोटरों से भी कुछ इसी अंदाज़ में कहा कि अब वे अमेठी कम ही आएंगे क्योंकि उन्हें बाकी जगहों पर भी ध्यान देना है। प्रियंका उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी क्योंकि वे बाकी देश में अभी नहीं जाएंगी।

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