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शुक्रवार, मार्च 5, 2021
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के बयान के बाद कहा , उनकी ट्यूबलाइट काफी देर से जलती है

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कांग्रेस(Congress) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष(Ex National President) राहुल गाँधी(Rahul Gandhi) ने उनकी दादी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री(Prime minister) इंदिरा गाँधी(Indira Gandhi) के इमरजेंसी(Emergency) लगाने के फैसले को एक भूल बताया है। राहुल गांधी ने कहा कि 1975 से 77 के बीच 21 महीने के आपातकाल के दौरान जो कुछ भी हुआ वो गलत था। वहीं राहुल के इस बयान के बाद बीजेपी को बड़ा मुद्दा मिल गया है। बीजेपी ने राहुल गांधी के इमरजेंसी वाले बयान पर अब उन्हें पूरी तरह से घेर लिया है।

मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री(Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chouhan) ने राहुल गांधी को ट्यूबलाइट बताया है। उन्होंने कहा कि राहुल जी की दिक्कत यही है कि वह बहुत वर्षों बाद सोचते हैं। जब 1975 में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी तब हम बच्चे थे लेकिन उसके साथ जेल भी गए थे। आज जब राहुल गांधी बोल रहे हैं तो हम 61 साल के हो गए हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की सोच बहुत पीछे चलती है और उन्हें यह बात अब समझ में आ रही है। हालांकि देर आए दुरुस्त आए लेकिन उन्हें सोचना चाहिए कि वह जो आज कह रहे हैं उन्हें अब कई वर्षों बाद लगेगा कि वह गलती कर रहे थे। तब उन्हें फिर गलती की माफी मांगनी पड़ेगी। उनकी ट्यूबलाइट देर से जलती है।

शिवराज सिंह चौहान ने खंडवा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि नंदू भैया के जाने से जो शून्य पैदा हुआ है वह मध्यप्रदेश के सार्वजनिक जीवन में तथा भाजपा के जीवन में तथा कार्यकर्ता के नाते मेरे भी निजी जीवन में वह शून्य कभी भरा नहीं जाएगा। नंदू भैया जैसा कोई नहीं वह सेवा की समर्पण की एक अलग शख्सियत थे।

बजट पर बोले कमलनाथ- आमजन के लिए निराशा के अलावा और कुछ नहीं

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कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि मेक इन इंडिया,डिजिटल इंडिया के पुराने नारों की तरह अब आत्मनिर्भर के नए नारे के साथ आंकड़ों की हेराफेरी कर देश की जनता को गुमराह करने का काम इस बजट में किया गया है। जो लोग एफडीआई का विरोध करते थे वो आज एफडीआई को हर क्षेत्र में लागू कर रहे है। यह बजट पूरी तरह से आमजन विरोधी और निराशाजनक बजट है।

देश का सबसे बड़ा वर्ग किसान वर्ग जो अपने हक को लेकर सड़कों पर पिछले 2 माह से अधिक समय से आंदोलन कर रहा है , उसके लिए इस बजट में कुछ नहीं है , सिर्फ़ झूठे वादे , वर्षों पुराना आय दोगुनी का एक बार फिर वादा , एक तरफ़ नये कृषि क़ानूनों से मंडी व्यवस्था को ख़त्म करने का काम और आज बजट में मंडी व्यवस्था को मज़बूत करने का झूठा वादा , झूठे वादों से गुमराह करने का काम ? कोरना महामारी के बाद बड़ी संख्या में युवा वर्ग को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है , युवा वर्ग के रोजगार को लेकर इस बजट में कुछ नहीं है।

कई वर्षों पुरानी घोषणाओं को इस बजट में एक बार फिर दोहराने का काम किया गया है। जो लोग कहते थे कि देश नहीं बिकने दूंगा , उनका आज नारा है सब चीज़ बेच दूँगा , यह इस बजट से भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है। गरीब-मध्यमवर्गीय के लिये इस बजट में कुछ नहीं है,

आयकर में छूट की उम्मीद थी लेकिन छूट नहीं बढ़ायी गयी।यह बजट महंगाई बढ़ाने वाला बजट है। पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इस बजट में करो में भारी राहत की जनता को उम्मीद थी लेकिन जनता एक बार फिर ठगी गयी है।

मेक इन इंडिया ,डिजिटल इंडिया  के पुराने नारों की तरह अब आत्मनिर्भर  के नए नारे के साथ आंकड़ों की हेराफेरी कर देश की जनता को गुमराह करने का काम इस बजट में किया गया है। जो लोग एफ़डीआई का विरोध करते थे वो आज एफ़डीआई को हर क्षेत्र में लागू कर रहे है। यह बजट पूरी तरह से आमजन विरोधी व निराशाजनक बजट है।

बंगाल विधानसभा चुनाव: साथ लड़ेंगे कांग्रेस- लेफ्ट, सीटों को हुआ बटवारा

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बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हलचल शुरू हो गई है। कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों में गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं ने अंतिम रूप ले लिया है। विधानसभा की 193 सीटों को लेकर कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ बंटवारा कर लिया है। इन 193 सीटों में से 101 पर लेफ्ट पार्टियां और 92 पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। वहीं बाकी सीटों के लिए अगली बैठक में फैसला किया जाएगा।

बता दें कि कांग्रेस ने 2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भी वाममोर्चा के साथ गठबंधन किया था। जहां माकपा 148 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 26 सीटों पर उसे जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें उसे 44 सीटों पर जीत मिली थी।

इसके अलावा वामदलों के सहयोगी के तौर पर ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ कर दो सीटें जीती थी। सीपीआई 11 सीटों पर चुनाव लड़कर 1 सीट जीती थी। इसके अलावा रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी 19 सीटों पर चुनाव लड़कर 3 सीटें जीती थी।

इस तरह से देखें तो 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वाम मोर्चे के गठबंधन में सबसे अधिक फायदा कांग्रेस को ही हुआ था। कांग्रेस पार्टी ने मात्र 92 सीटों पर चुनाव लड़कर 44 सीटें जीती, जबकि वामपंथी दल 202 सीटों पर चुनाव लड़कर मात्र 32 सीटें ही जीत पाए थे। 44 सीटें जीतने के कारण कांग्रेस को विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी मिला था। इसके बाद कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन टूट गया था और 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी।

वहीं, इस बार कांग्रेस और लेफ्ट ने फैसला किया था कि साल 2016 के चुनाव में जीती हुई अपनी-अपनी सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट के प्रत्याशी उतरेंगे। इस तरह कांग्रेस को अपनी जीती हुई 44 सीटों के साथ 92 सीटें मिली है और लेफ्ट को अपनी जीती हुई 33 सीटों के साथ 101 सीटें मिली है।इसके बाद बाकी बची सीटों पर अभी पेच फंसा हुआ है, जिस पर दोनों दलों के साथ सहमति बनने बाद बंटवारे का ऐलान होगा। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस इस बार बंगाल में पिछले चुनाव से ज्यादा सीटों पर किस्मत आजमाएंगी।

कांग्रेस की शांतिपूर्वक रैली में हुआ प्रशासन की तरफ से लाठीचार्ज, कई बड़े नेता हुए गिरफ्तार

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मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल(Bhopal) में कांग्रेस पार्टी(Congress Party) की तरफ से किसानों के समर्थन में रैली का आयोजन किया गया था। इस दौरान पुलिस ने कांग्रेस नेताओं पर लाठी चार्ज की और साथ ही साथ आंसू गैस के गोले भी दाग दिए। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की अगुवाई में हुआ था।

कांग्रेस नेताओं की रैली जवाहर चौक से प्रारंभ हुई थी। वहां से कांग्रेस के नेता राजभवन ज्ञापन देने जा रहे थे। रोशनपुरा के पास पुलिस ने बैरीकेड लगाकर कांग्रेस जाने से रोक दिया गया था। मध्य प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं जैसे दिग्विजय सिंह, कुणाल चैधरी , जीतू पटवारी , सज्जन सिंह वर्मा और कई अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। उसके बाद वहां कांग्रेस के नेता बैरीकेड तोड़ने का प्रयास करने लगे। इस दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए गए।

प्रदर्शन के दौरान आधा दर्जन से ज्यादा आंसू गैस के गोले दागे गए। वहीं वाॅटर कैनन से पानी की बौछारें छोड़कर भीड़ को हटाने की कोशिश की गई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के द्वारा पथराव भी हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के जख्मी होने के भी समाचार है। जिसके संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए कहा है कि , किसानो के समर्थन में आज मध्यप्रदेश के भोपाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हज़ारों किसान भाइयों व कांग्रेसजनो पर शिवराज सरकार के ईशारे पर किये गये बर्बर लाठीचार्ज , आंसू गैस व वाटर केनन छोड़े जाने की व गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा करता हूँ।

कमलनाथ ने यह भी कहा कि ,इस लाठीचार्ज में कई किसान भाइयों, कांग्रेसजनो , महिलाओं व मीडिया के साथियों को चोटे आयी है। उनके स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। किसानो के समर्थन में हमारा संघर्ष जारी रहेगा, हम ऐसे दमन से डरने-दबने वाले नहीं है।

मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के चलते , कांग्रेस कल करेगी राजभवन का घेराव

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किसान आंदोलन(Farmer Agitation ) का समर्थन कर रही कांग्रेस(Congress) राजभवन(Governor House) का घेराव करने की तैयारीकर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ(Kamalnath) ने ट्विटर(Twitter) पर 23 जनवरी को राजभवन घेराव में शामिल होने की अपील पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से की है।

कमलनाथ ने ट्वीट में विस्तार से कार्यक्रम बताते हुए लिखा है कि मोदी सरकार के तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में 23 जनवरी को सुबह 11:30 बजे जवाहर चौक पर इकट्ठा होंगे और वहीं से राजभवन कूच करेंगे। कमलनाथ ने अधिक से अधिक संख्या में राजभवन घेराव मे शामिल होने की अपील कांग्रेस नेताओं से की है।

कमलनाथ ने भोपाल के करीबी जिले यानी सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा आदि से भीड़ जुटाने के निर्देश जिला अध्यक्षों और पूर्व मंत्रियों को दिये हैं। इन लोगों पर यह जिम्मेदारी भी रहेगी कि लोगों को जहाँ से लाया गया है उन्हें वापस वहाँ छोड़ना भी होगा।

राजभवन घेराव की अपील को दिग्विजय सिंह और एमपी कांग्रेस ने भी अपने ट्विटर पर शेयर की है। जिससे प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोग जुट सकें। कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जब तक काले कृषि कानून वापस नहीं होते उसका आंदोलन जारी रहेगा।

22 जनवरी को आयोजित होगी कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी की बैठक

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इंडियन नेशनल कांग्रेस(Indian National Congress) ने अपनी कार्यसमिति सीडब्ल्यूसी(CWC) की बैठक 22 जनवरी को बुलाई है। पार्टी इस बैठक में किसानों के मुद्दों, अर्नब गोस्वामी चैट लीक और कोविड-19 महामारी पर चर्चा करेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि यह बैठक वर्चुअल आयोजित की जाएगी और इसकी अध्यक्षता कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी।

हजारों किसान पिछले कई महीनों से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, जिसमें तीनों कानूनों को निरस्त करने की मांग की गई है। बुधवार को किसानों और सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही। मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीनों कृषि कानूनों को लेकर सरकार के ऊपर निशाना साधते हुए कहा था कि यह कानून कृषि क्षेत्र को तबाह करने के लिए लाए गए हैं।

कांग्रेस ने अर्नब गोस्वामी से जुड़े कथित चैट लीक को लेकर सरकार को घेरने के लिए पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी, पूर्व गृहमंत्री सुशील शिंदे, पूर्व कानून मंत्री और विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा। कांग्रेस ने देश की सुरक्षा से जुड़ी गुप्त सूचना लीक करने को देशद्रोह बताया और मामले की तत्काल जांच की मांग की।

अर्नब की व्हाट्सऐप चैट पर कांग्रेस हमलावर, चार पूर्व मंत्रियों ने कहा- इसमें नहीं मिल सकती माफी

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रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी BARC के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता की कथित व्हाट्सऐप चैट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बुधवार को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों एके एंटनी, सुशील कुमार शिंदे और सलमान खुर्शीद के साथ प्रेस वार्ता की।

प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ये बेहद गंभीर मामला है, इसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस मामले में प्रधानमंत्री को खुद सामने आकर जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियान की जानकारी सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे कुछ लोगों को होती है और ऐसे में इसका पता लगना चाहिए कि यह संवेदनशील जानकारी कैसे लीक हुई।

अर्नब गोस्वामी की चैट में बालाकोट हमले से पहले इसका जिक्र होने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, 73 साल के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ऐसा खिलवाड़ होते हुए इस देश ने नहीं देखा। आजाद हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री, उनका कार्यालय, गृहमंत्री एवं पूरी सरकार की मर्यादा को छिन्न-भिन्न होते हुए भी यह देश देख रहा है। बड़े-बड़े दिखने वाले लोग कितने बौने हो जाते हैं कि अपना ईमान एक ऐसे व्यक्ति के साथ मिलकर जो अपने आप को पत्रकार कहता है, बेच रहे हैं। देश के साथ जो खिलवाड़ प्रधानमंत्री, अमित शाह और अर्नब गोस्वामी ने मिलकर जो किया वो पूरा देश स्तब्ध होकर देख रहा है। इस मामले में किसने ये जानकारी लीक की, पता चलना जरूरी है।

पूर्व रक्षामंत्री एंटनी ने कहा, ये व्हाट्सएप बातचीत पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। हर देशभक्त भारतीय स्तब्ध है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यह हमारे सशस्त्र बलों खासकर वायु सेना के जवानों की सुरक्षा से जुड़ा है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी और बहुत संवेदनशील जानकारी कुछ ऐसे लोगों के पास थी जिनके पास नहीं होनी चाहिए। सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे सिर्फ चार-पांच लोगों को इस तरह के अभियान के बारे में पता होता है, ऐसे में बालाकोट एयर स्ट्राइक से कुछ दिनों पहले एक पत्रकार को इस बारे में कैसे पता चला? सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी लीक करना राष्ट्र विरोधी कृत्य और राष्ट्रद्रोह है।

पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा, हम संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे। सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत जो करना चाहिए था वो नहीं किया। मुझे उम्मीद है कि जांच होगी और जो गुनाह हुआ है उसकी सजा मिलेगी। इस मामले में माफी नहीं दी जा सकती है।

पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार में, संविधान और हमारी व्यवस्था में आप सभी भली-भांति जानते हैं कि न्यायपालिका का क्या महत्व है। हम सभी लोग जहां इस देश में एक तरफ पार्लियामेंट पर निर्भर हैं तो दूसरी ओर न्यायपालिका पर हमारा विश्वास हैसमय-समय पर बहुत सारी बातें उठती हैं, अफवाहें उठती हैं लेकिन हमेशा हमारा यह मत रहा है अगर हमने न्यायपालिका पर विश्वास खो दिया तो फिर कुछ नहीं बचेगा। न्यायपालिका को लेकर जो कुछ इस बातचीत में कही गई है, इससे कई सवाल उठते हैं। इसमें जज के बिकने जैसी बातें हैं। उन्होंने कहा कि इस बातचीत में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के बारे में जो बातें की गई हैं वो बहुत दुखद हैं। ये बातें बहुत विचिलित करती हैं।

बता दें कि अर्नब गोस्वामी और ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता के बीच हुई एक कथित व्हाट्सऐप चैट लीक हुई है। ये व्हाट्सऐप चैट 23 फरवरी, 2019 की हैं। इनसे पता चलता है कि अर्नब को पहले से पता था कि भारतीय सेना का बालाकोट में स्ट्राइक का प्लान है। इसी को लेकर विपक्षी दल सरकार को घेर रहे हैं और कह रहे हैं कि केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा के साथ समझौता किया है।

पीएम मोदी से ज्यादा समझदार हैं किसान, उन्हें पता कि देश में क्या हो रहा है: राहुल गांधी का सरकार पर हमला

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश की आम जनता की लड़ाई आज किसान लड़ रहे हैं। वे हमारे भोजन की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें उनका पूरा समर्थन करना चाहिए। अभी तक खेती में किसी का एकाधिकार नहीं था। इन कृषि कानूनों से किसानों का हाल आजादी से पहले वाला हो जाएगा। सरकार को इन तीनों कानून को वापस लेना होगा। हम सरकार पर दबाव बना रहे हैं। ये प्रेस कॉन्फ्रेस भी सरकार पर दबाव बनाने के लिए की जा रही है। किसानों को न थकाया जा सकता है और न ही बेवकूफ बनाया जा सकता है। किसान प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा समझदार हैं। उन्हें पता है कि देश में क्या हो रहा है।

“आज देश के सामने एक त्रासदी आ गई है, सरकार देश की समस्या नजरअंदाज करना चाहती है और गलत सूचना दे रही है। मैं अकेले किसानों के बारे में बोलने वाला नहीं हूं क्योंकि यह त्रासदी का हिस्सा है। यह युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह वर्तमान के बारे में नहीं बल्कि आपके भविष्य के बारे में है।”

कमलनाथ शासन में रहे मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी के आवास पर छापा

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मध्यप्रदेश(Madhya Pradesh) के ई-टेंडरिंग घोटाले(E-tender Scam) के जांच के चलते कमलनाथ सरकार(Kamalnath government) में मुख्य सचिव रहे एम गोपाल रेड्डी(M. Gopal Reddy) आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने रेड्डी के हैदराबाद स्थित आवास पर छापा मारा है। इस दौरान ईडी के अधिकारियों ने रेड्डी के यहां मौजूद दस्तावेजों की छानबीन की। शिवराज सरकार के दौरान जब यह घोटाला हुआ था तब रेड्डी जल संसाधन विभाग के एसीएस थे।

प्रवर्तन निदेशालय ने भोपाल, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित करीब 16 जगहों पर छापेमारी की है। रेड्डी के अलावा उन कंपनियों के यहां भी छापे की सूचना है, जिन्हें टेंडर में टेम्परिंग कर ठेके दिए गए। एक टीम ने बुधवार को भोपाल में हैदराबाद की ही आईटी कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन के मानसरोवर कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर पर कार्रवाई की थी। सबसे ज्यादा जल संसाधन के 7 ठेकों के ई टेंडर में घोटाले होने के आरोप हैं।

मध्यप्रदेश ईओडब्ल्यू ने कंपनी के 3 डायरेक्टर विनय चौधरी, वरुण चतुर्वेदी और सुमित गोलवलकर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। ईओडब्ल्यू का आरोप है कि इन्होंने फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार कर अपने कस्टमर कंपनी को मध्यप्रदेश के अधिकारियों की मिलीभगत से ई-टेंडर में बिडिंग कराकर काम दिलाया था। 

किसान बिल के विरोध में कई किसानों ने दी अपने प्राणों की आहुति- विवेक त्रिपाठी

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मध्यप्रदेश युवा कांग्रस के मीडिया प्रभारी विवेक त्रिपाठी लगातार केंद्र सरकार द्वारा पारित किसान बिल का विरोद कर रहे है। आज उसी श्रंखला में भोपाल युवा कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष रोहित राजोरिया ने आज रातिबड में किसानों के समर्थन में मोदी सरकार द्वारा देश के अन्नदाता के ऊपर थोपे जा रहे कृषि बिल का विरोध किया। अध्यक्ष का कहना है कि जिन किसानों के समर्थन मे आज वह खड़े है उनमे से कुछ किसानों ने संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी ।

किसानों को श्रद्धांजलि दी गयी

ग्रामीण अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार अब भी नही जाग रही है । ऐसी सरकार को जगाने के लिए और शहीद किसानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पण करने के लिए मध्यप्रदेश के प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष डॉ विक्रांत भूरिया ने सभी जिला अध्यक्षों को निर्देशित देते हुए मुख्यालय पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित करवाई गई।

युवा कांग्रेस भोपाल ग्रामीण अध्यक्ष रोहित राजोरिया एवं नरेंद्र यादव ने इस श्रद्धांजलि सभा को आयोजित किया। इसमे मुख्यरूप से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव श्री शेष नारयण ओझा,मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी , प्रदेश महासचिव अभिषेक परमार,सचिव अनिल मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा विधानसभा अध्यक्ष दशरथ राजपूत,देवांश तोमर ,नरेंद्र बघेल राहुल मंडलोई ,राहुल राजपूत ,आकाश जागीरदार ,और समस्त पदाधिकारी और किसान भाइयों ने उपस्थित होकर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।