Thursday, November 21, 2019
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कर्णाटक: कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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कर्नाटक के बागी विधायकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। आज हुई सुनवाई में कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर द्वारा विधायकों की अयोग्यता के फैसले को सही ठहराया लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के 17 अयोग्य विधायकों को राहत देते हुए उन्हें उपचुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य विधायकों की याचिका पर 25 अक्टूबर को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन विधायकों को विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने अयोग्य घोषित कर दिया था। न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने इन विधायकों की याचिकाओं पर 25 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की थी।

5 दिसंबर को होगे उपचुनाव

इन विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने की वजह से 17 में से 15 सीटों के लिए पांच दिसंबर को उपचुनाव हो रहे हैं। अयोग्य विधायकों ने अपनी याचिका में 5 दिसंबर को होने वाले उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग भी की थी। विधायकों का कहना था कि उपचुनाव तब तक नहीं होने चाहिए जब तक कि उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न आ जाए।

उपचुनाव न कराने के लिए दायर की थी याचिका

उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 नवंबर है। इन विधायकों ने शीर्ष अदालत में एक आवेदन दायर कर 15 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव की तारीख स्थगित करने का निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया था। इन विधायकों का कहना था कि उनकी याचिकाओं पर कोर्ट का निर्णय आने तक निर्वाचन आयोग को इन सीटों पर चुनाव नहीं कराने चाहिए। अयोग्य घोषित विधायकों की दलील थी कि सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना उनका अधिकार है। अध्यक्ष का निर्णय दुर्भावनापूर्ण है और इससे प्रतिशोध झलकता है। इन विधायकों में से अनेक ने सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अध्यक्ष को पत्र लिखे थे।

तत्कालीन स्पीकर रमेश कुमार ने ठहराया था अयोग्य

बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने विधान सभा में एचडी कुमारस्वामी सरकार के विश्वास प्रस्ताव से पहले ही 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। वहीं विधानसभा में विश्वास मत्र प्राप्त करने मे विफल रहने पर कुमारस्वामी की सरकार ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, बीजेपी के बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व में राज्य में नई सरकार का गठन हुआ।

कर्नाटक विधानसभा का गणित

कर्नाटक विधानसभा में इस समय बीजेपी के पास 105 विधायक हैं जबकि एक निर्दलीय विधायक ने समर्थन दिया है। वहीं विपक्ष (कांग्रेस+जेडीएस+बीएसपी) के पास कुल 101 सीटें हैं। इसमें कांग्रेस के पास 66, जेडीएस के पास 34 और बीएसपी के पास 1 सीट है। इन 17 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव से पहले पाला बदलते हुए इस्तीफा दे दिया था जिसकी वजह से तत्कालीन स्पीकर आर रमेश कुमार ने इन्हें अयोग्य ठहरा दिया था। इस वजह से सदन में सदस्यों की संख्या घटकर 211 रह गई थी और मैजिक नंबर 106 हो गया था। इस आधार पर बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने में सफल रही थी। कर्नाटक की फिलहाल जो 17 सीटें खाली हैं उनसे 15 सीटों पर 5 दिसंबर को उपचुनाव होने हैं।

महाराष्ट्र में विधायकों की खरीद फरोख्त रोकने शरद पवार ने तैयार किया मास्टर प्लान

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Image of ncp chief sharad pawar with congress president sonia gandhi

महाराष्ट्र में शिवसाना और भाजपा का साथ टूटने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग चुका है। वहीं शिवसेना अब कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन में सरकार बनाने के प्रयास में लग गई है। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त के कयास लगाए जा रहे है। जिसे रोकने के लिए एनसीपी प्रमुख ने प्लान तैयार किया है।

एनसीपी नेता और पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार ने कहा कि अगर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का कोई विधायक टूटा तो तीनों दल मिलकर उस बागी विधायक के खिलाफ जॉईंट उम्मीदवार उतारेंगे। मुझे भरोसा है कि हम तीन दल मिलकर एक उम्मीदवार खड़ा करेंगे तो कोई माई का लाल जीत नहीं सकता।

शिवसेना और भाजपा के रिश्ते खराब होने के बाद से एनसीपी-कांग्रेस नई रणनीति बनाने में जुटी है। मुंबई में कांग्रेस-एनसीपी की प्रेस कांफ्रेंस में शरद पवार ने कहा, “हम महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव नहीं चाहते। कांग्रेस से चर्चा पूरी होने के बाद शिवसेना से बात होगी। हमें किसी तरह की जल्दबाजी नहीं है।“

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा हालात पर चर्चा की। शिवसेना ने पहली बार कांग्रेस और एनसीपी के साथ आधिकारिक रूप से संपर्क किया था। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर सभी बिंदुओं पर स्पष्टता होनी चाहिए। आज इसी संदर्भ में बैठक हुई। इसी मुद्दे पर आगे की नीति तय की जाएगी।

झारखंड विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने जारी की 19 प्रत्याशियों की नई लिस्ट

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए 19 प्रत्याशियों की अपनी नई लिस्ट जारी कर दी है। जिसमें कांग्रेस ने पाकुर विधानसभा से आलमगिर आलम को टिकट दिया वहीं जामतारा से इरफान अंसारी को विधानसभा टिकट दिया गया है।

बता दें कि 81 सदस्य वाली झारखंड विधानसभा के लिए 30 नवंबर को मतदान शुरू होंगे। मतदान कुल 5 दौर में होने है और पांचवे दौर का मतदान 20 दिसंबर को होना है। वहीं 23 दिसंबर को नतीजे आने वाले है।

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की नई लिस्ट

महाराष्ट्र में कांग्रेस के समर्थन के बाद महागठबंधन की सरकार बनना लगभग तय

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महाराष्ट्र में पूरे दिन बातचीत, बैठक और विचार- विमर्श के दौर के बाद आखिरकार कांग्रेस ने शिवसेना को समर्थन का पत्र दे दिया है। समाचार चैनल एबीपी न्यूज़ के हवाले से यह खबर प्राप्त हुई है।

बता दें कि आज शाम लगभग 5 बजे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से संपर्क करके सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा था। जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने महाराष्ट्र कांग्रेस के विधयकों से बातचीत की।

विधायकों से बातचीत करने के बाद कांग्रेस ने शिवसेना को समर्थन पत्र दे दिया है।

बता दें कि शिवसेना को आज शाम 7:30 बजे तक गवर्नर के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करना है। वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह समर्थन देने पर फैसला कांग्रेस प्रमुख से बात करने के बाद लेंगे।

ऐसे में कांग्रेस के समर्थन के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना- एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।

बड़ी खबर: सरकार बनाने उद्धव ठाकरे ने की सोनिया गांधी ने बातचीत

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महाराष्ट्र में चल रही सियासी उथल-पथल के बीच अब शिवसेना प्रमुख ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से फ़ोन पर बातचीत की है। सूत्रों के मुताबिक दोनों ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बातचीत की। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मिताबिक अभी से कुछ समय पहले ही दोनों नेताओं ने फ़ोन पर बातचीत की।

दता दें कि कुछ ही देर में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के गवर्नर से मुलाकात करने जाएंगे। उन्हें गवर्नर की तरफ से सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए 7:30 बजे तक का समय दिया गया है।

कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता रद्द, 15 सीटों के लिए 5 दिसंबर को होगी वोटिंग

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कर्नाटक विधानसभा की 15 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान आज हो गया है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने चुनाव की तारीखओं का एलान करते हुए कहा कि 5 दिसंबर को मतदान और 9 दिसंबर को मतों की गिनती होगी। इसके साथ ही आज 11 नवंबर से प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।

रद्द हो गई थी बागी विधायकों की सदस्यता

बता दें कि कर्नाटका में कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद कुमारस्वामी की सरकार अल्पमत में आ गई थी और उन्हें अपने सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कुमारास्वामी के इस्तीफे के बाद बीजेपी नेता येदियुरप्पा ने प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। तब बीजेपी पर यह इल्जाम लगा था कि इन बागी विधायकों से पैसे के दम पर इस्तीफा दिलाया गया है। बाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और फैसले के बाद बागी विधायकों को अयोग्य घोषित किए गया था। इन्ही बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होने है।

कर्नाटका में उपचुनाव के प्रचार की रणनीति बनाने के लिए बेंगलुरु में कांग्रेस नेताओं ने आज कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में एक बैठक की। बैठक में पार्टी नेता सिद्धारमैया, बीके हरिप्रसाद, डीके शिवकुमार और दिनेश गुंडू राव मौजूद थे।

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस ने उठाया यह बड़ा कदम

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महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ सरकार बनाने को लेकर चल रही असमंजस अब ख़त्म होने जा रही है. कांग्रेस वोर्किंग कमेटी और प्रदेश के बड़े नेताओं के बीच चली बैठक के दौर के बाद अब कांग्रेस फैसले के काफी करीब पहुँच गयी है. सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक शिवसेना और एनसीपी के साथ सरकार में शामिल होना चाहते है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस आलाकमान सरकार में शामिल होने के बजाय बहार से समर्थन देना चाहता है.

विधायकों और नेतृत्व के बीच चल रहे गतिरोध के बीच एक नया रास्ता सामने आया है. जिसके मुताबिक, कांग्रेस महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है। हालांकि, पार्टी सरकार में भले ही शामिल न हो, पर वह अपने लिए स्पीकर का पद मांग सकती है। वहीं, दूसरी तरफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वह शिवसेना को समर्थन देने का फैसला कांग्रेस के रुख को देखकर तय करेगी।

सोनिया गाँधी के साथ बैठक में नही हो पाया फैसला

बता दें कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर होने वाली पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की अहम बैठक में शिवसेना को समर्थन देने को लेकर कोई फैसला नहीं पाया। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए मल्लिकार्जुल खड़गे ने कहा कि महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई और अब महाराष्ट्र के नेताओं के साथ चर्चा करके अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शाम को 4 बजे महाराष्ट्र के बड़े नेताओं के साथ फिर बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। माना जा रहा है कि 4 बजे की बैठक में पार्टी शिवसेना को बाहर से समर्थन देने और अन्य बातों पर ही चर्चा करेगी। NCP भी कांग्रेस के फैसले के बाद अपना रुख साफ कर देगी।

शिवसेना के साथ सरकार बनाने के पक्ष में चव्हाण

इससे पहले कांग्रेस ने रविवार को कहा था कि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन नहीं चाहती है। बीजेपी के राज्य में सरकार बनाने से इनकार के बाद कांग्रेस ने यह प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि पार्टी के नव-निर्वाचित विधायक राज्य में राजनीतिक रूख को लेकर आला-कमान से सलाह लेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम जयपुर में हैं। हम मुद्दे पर यहां चर्चा करेंगे और भविष्य के राजनीतिक रूख पर सलाह लेंगे। पार्टी राज्य में राष्ट्रपति शासन नहीं चाहती है।’ चव्हाण ने कहा कि वह महाराष्ट्र में सरकार बनाने के पक्ष में हैं। आपको बता दें कि राज्यपाल ने सरकार बनाने का दावा करने के लिए शिवसेना को आज शाम 7:30 तक का वक्त दिया है।

तीसरी वर्षगांठ: राहुल ने नोटबंदी को बताया ‘टेरर अटैक’ जिसने अर्थव्यवस्था को किया तबाह

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नोटबंदी को तीन साल पूरे होने पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “नोटबंदी ‘टेरर अटैक’ के बाद यह तीसरा साल है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। कई लोगों की जान ले ली, लाखों छोटे व्यवसायों को मिटा दिया और लाखों भारतीयों को बेरोजगार कर दिया।”

मोदी सरकार कर खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी, कांग्रेस अध्यक्ष ने बुलाई बैठक

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मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों और गिरती अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस 5 नवंबर से पूरे देश में बाद आंदोलन करने की तैयारी में है। जिसकी तैयारियों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2 नवंबर को बड़ी बैठक बुलाई है। बैठक में पार्टी के महासचिव और राज्यों के प्रभारी शामिल होंगे।

इसके साथ ही बैठक के लिए सभी संगठनों के प्रमुखों को भी तलब किया गया है। इस बैठक में 5-15 नवंबर के बीच होने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी का जायजा लिया जाएगा।

पार्टी ने आंदोलन के माध्यम से आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, किसान संकट, सार्वजनिक उपक्रम विनिवेश और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के मुद्दों को उठाने का फैसला किया है।

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के 10 दिवसीय आंदोलन में नई दिल्ली की एक बड़ी रैली भी शामिल होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विरोध प्रदर्शन के लिए समान विचारधारा वाले दलों को साथ लाने की कोशिश कर रही है।

सोनिया गांधी ने दिवाली की पूर्व संध्या पर सरकार पर हमला किया। नरेंद्र मोदी सरकार को किसानों के प्रति अपने राज धर्म की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि किसान सरकार की नीतियों के कारण पीड़ित हैं।

ये भी पढ़ें: सोनिया ने दिवाली संदेश में केंद्र सरकार को याद दिलाया ‘राजधर्म’

सोनिया गांधी ने एक विस्तृत बयान में कहा था कि सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी  (भाजपा) ने किसानों को धोखा देना शुरू कर दिया था।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाकर फसलों पर खर्च की गई राशि पर किसानों को 50 फीसदी अधिक रिटर्न देने का वादा किया। लेकिन साल दर साल भाजपा सरकार ने कुछ बिचौलियों और जमाखोरों के हित में किसानों के करोड़ों रुपये लुटाए।”

कृषि बाजारों की स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में उनमें से कई एमएसपी से कम दाम पर खरीफ की फसल खरीद रहे थे।

उन्होंने ट्रैक्टर, उर्वरक और अन्य कृषि उपकरणों पर लगाए गए जीएसटी को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इससे किसानों पर बोझ बढ़ा है। यहां तक कि डीजल की कीमत भी लगातार बढ़ रही है। सोनिया ने मांग की कि सरकार किसानों को परेशान करना बंद करे और खेत की उपज का सही मूल्य सुनिश्चित करे।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस ने बनाई नई रणनीति।

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2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस चुनाव में राहुल गांधी या प्रियंका गांधी नही बल्कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा होंगी और पूरा चुनाव उनके कार्यकाल में किये गए कार्यों के इर्द-गिर्द लड़ा जाएगा।

नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने इसको लेकर अभी से फरमान जारी कर कह दिया है कि, पार्टी की तरफ जारी किये जाने वाले किसी भी पोस्टर पर शीला दीक्षित का चेहरा सबसे प्रमुखता के साथ दिखाया जाए।

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली में कांग्रेस के पास दिखाने के लिए जो कुछ भी है, वह शीला दीक्षित के समय का कामकाज ही है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में वह उन्हीं को भुनाएगी। इसके लिए नए नियुक्त किए गए अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा की अगुवाई में बैठक कर फैसला ले लिया गया है।

कई बड़े वादे कर सकती है कांग्रेस

कांग्रेस द्वारा हाल के विधानसभा चुनावों में किये वादों पर नजर डाली जाए तो उसने अपने घोषणा पत्र में कई बड़े-बड़े वादे किये। जिसका लाभ उसे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मिला। वहीं हरियाणा में भी उसे उम्मीद से अच्छे परिणाम मिले।

हरियाणा चुनाव के बाद उत्साह में आई कांग्रेस दिल्ली में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहती। वह पूरी रणनीति बनाकर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और भाजपा का मुकाबला करने को तैयार है। दोनों ही दलों के ट्रंप कार्ड का बारीकी से अध्ययन कर उनका जवाबी उत्तर तैयार किया जाएगा। पार्टी के अध्यक्ष रह चुके एक नेता के मुताबिक विधानसभा चुनाव  में कांग्रेस अरविंद केजरीवाल के फ्री बिजली, पानी और बस-मेट्रो के मुकाबले शानदार योजनाएं पेश करेगी और लोगों का समर्थन फिर से प्राप्त करेगी।

दिल्ली में मजबूत होने की उम्मीद

अध्यक्ष पद को लेकर तमाम उलझनों के बाद भी कांग्रेस ने हरियाँणा में शानदार प्रदर्शन किया है। चूंकि, पड़ोसी राज्य होने के नाते दिल्ली के चुनाव पर हरियाणा काफी असर डालता है, कांग्रेस को उम्मीद है कि वह दिल्ली में भी मजबूती पाने में कामयाब रहेगी। इसके लिए हरियाणा के नेता ऐसे इलाकों में प्रचार करते नजर आएंगे जहां हरियाणा के लोगों की बसावट ज्यादा है।