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Wednesday, July 15, 2020
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कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई: प्रियंका गांधी

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यूपी का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर और कानपुर में आठ पुलिस जवानों की हत्या के आरोपी विकास दुबे को गुरुवार की सुबह मध्य प्रदेश के उज्जैन की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ ही उसके दो साथी भी गिरफ्तार किया गया है। विकास की गिरफ्तारी पर विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मसले पर कई सवाल खड़े किए हैं।

प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन’ और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास’ का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हैं। यूपी सरकार को मामले की CBI जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगज़ाहिर करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह पूरी तरह फेल साबित हुई। अलर्ट के बावजूद आरोपी का उज्जैन तक पहुंचना, न सिर्फ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में यह देश मजबूत से क्यों बना मजबूर ?

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यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल को आज भी कॉमनवेल्थ और 2जी घोटालों को लेकर याद किया जाता है। उस समय पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने सड़क पर आ गया था। तब देश विरोध करना और अपने हक़ के लिए आवाज उठाना जानता था। पेट्रोल के दाम में रुपये की वृद्धि करने में भी सरकार का पसीना निकल जाया करता था। सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने का यह भाव जनता के बीच लाने में अरविंद केजरीवाल का “इंडिया अगेंस्ट करप्शन”, अन्ना हजारे का जन लोकपाल आंदोलन और बाबा रामदेव का काला धन के लिए किया गया आंदोलन प्रमुख है।

उस समय एक तरफ अरविंद केजरीवाल देश के युवाओं को सड़क पर ला रहे थे, अन्ना देश की जनता को सत्याग्रह में शामिल कर रहे थे और बाबा रामदेव हर रोज सुबह-सुबह योगा के साथ टीवी पर कालेधन पर बड़े-बड़े आंकड़े दे रहे थे। वहीं दूसरी और नरेंद्र मोदी देश की गरीब जनता को 15-15 लाख रूपये देने की बात कर रहे थे। भ्रष्टाचार मुक्त भारत, कालाधन, जन लोकपाल और 15 लोख, यह 2014 में वोट देने वाले मुद्दे बने।

ऐसे में सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार और महँगाई के खिलाफ इतनी बड़ी औऱ लंबी लड़ाई लड़ने वाला देश आज प्रदर्शन तो दूर बल्कि आवाज उठाने से भी कतरा रहा है। हाल ही में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक आरटीआई के जवाब में 50 विलफुल डिफॉल्टर्स की एक सूची जारी की है। यह देश वो बड़े उद्द्योगपति है जो जानबूझ कर बैंकों से लिए कर्ज को नही चुकाना चाहते है। आरबीआई ने आरटीआई में दी गई जानकारी में बताया कि वह 2019 में इन विलफुल डिफॉल्टर्स का 68,607 करोड़ का कर्ज माफ कर चुकी है।

आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की है सामाजिक कार्यकर्ता साकेत गोखले ने। आपको याद ही होगा राहुल गांधी ने संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से 50 सबसे बड़े डिफॉल्टर्स की सूची मांगी थी। तब निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था। जिसके तुरंत बाद साकेत गोखले ने आरटीआई लगाकर यह जानकारी आरबीआई से मांगी थी। अगर आपको याद नही तो राहुल गांधी ने एक बाद फिर संसद में पूछे गए अपने प्रश्न का वीडियो ट्विटर पे शेयर किया है। उसे आप यहां देश सकते है,

इन 50 विलफुल डिफाल्टर्स की सूची में मेहुल चौकसे की कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड 5,492 करोड़ रुपये की देनदारी के साथ पहले स्थान पर है, दूसरे स्थान पर 4,314 करोड़ रुपए की देनदारी के साथ आरईआई एग्रो लिमिटेड है, जिसके निदेशक संदीप झुनझुनवाला और संजय झुनझुनवाला हैं। इसके बाद भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की विनसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी का नाम है, जिसने 4076 करोड़ रुपये कर्ज ले रखा है, वहीं कानपुर स्थित रोटमैक ग्लोबल 2,850 करोड़ रुपये कर्ज ले रखा है. इसके अलावा सूची कुदोस केमी 2,326 करोड़ रुपए, रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड 2,212 करोड़ रुपए शामिल हैं।


इन सब के साथ ही सरकार ने पूर्व भाजपा सांसद विजय माल्या की कंपनी किंगफ़िशर एयरलाइन्स का भी 1943 करोड़ का कर्ज माफ किया है।

अब आप ध्यान से देखेंगे तो इस सरकार के दो चहरे आपके सामने आएंगे। एक जो यह सरकार कह रही है और एक जो यह कर रही है। सामने से प्रश्न पूछने पर तो यह सरकार नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या जैसे देशद्रोही भगोड़ों पर कठोर कार्यवाही करने की बात करती है। वहीं दूसरी तरफ इन्हें देश से भागने देती है और इनका कर्ज माफ कर जानकारी छिपाती है।

भरष्टाचार की लड़ाई

ऐसा नही है कि मोदी सरकार आने के बाद भ्रष्टाचार बंद हो गया लेकिन शायद भ्रष्टाचार के नाइ परिभाषाएं सामने आ गई है। अच्छा भ्रष्टाचार और बुरा भ्रष्टाचार। अब सरकार द्वारा किया गया भ्रष्टाचार न तो देश के सामने आता है और न ही उसकी जांच होती है। यह भ्रष्टाचार देशहित में हो रहा है और इसकड खिलाफ आवाज़ उठाना अब देशद्रोह है।

कहीं आप देशद्रोही तो नही ?

कोरोना महामारी के बीच टेस्ट किट की खरीद में हुआ घोटाला, सरकार को लगी करोड़ों की चपत

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कोरोना महामारी  के बीच मोदी सरकार द्वारा एक प्राइवेट कंपनी से खरीदी गई रैपिड टेस्ट किट में करोड़ों का घोटाला सामने आ रहा है।  मीडिया में आई रिपोर्ट्स की मानें तो प्राइवेट कंपनी ने चीन से 245 रुपए की रैपिड टेस्टिंग किट खरीदकर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को 600 रुपए प्रति के किट के हिसाब से बेच दी है।

मामले को उठाते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस ने मांग की है कि संकट के समय में मुनाफा कमाने वाली इस कंपनी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, “परीक्षण किटों के आयात पर अराजकता चल रही है और सरकार को बताना चाहिए कि उनके द्वारा क्या कार्रवाई की गई है।”

दरअसल, मुनाफा कमाने वाली इस कंपनी पर आरोप है कि उसने चीन से किट को 245 रुपए में आयात किया। जिसके बाद उसने आईसीएमआर को 600 रुपये प्रति किट के हिसाब से पांच लाख किट की आपूर्ति की। जिससे कंपनी को 18 करोड़ रुपये से ज़्यादा का मुनाफा हुआ।

जिसके बाद ये मामला अदालत भी पहुंचा। जहां कंपनी को इस मुनाफाखोरी के लिए फटकार लगाई गई। जिसके बाद कंपनी 400 रुपये प्रति किट की दर से आपूर्ति करने के लिए तैयार हो गई।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार से कार्रवाई की मांग की है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा, “जब समूचा देश कोरोना वायरस आपदा से लड़ रहा है, तब भी कुछ लोग मुनाफा कमाने से नहीं चूकते। इस भ्रष्ट मानसिकता पर शर्म आती है, घिन आती है। हम पीएम मोदी से मांग करते हैं कि इन मुनाफाखोरों पर जल्द ही कड़ी कार्यवाही की जाए। देश उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा।”

देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है, वहीं कुछ लोग मुनाफा कमाने से बाज नही आ रहे : राहुल गाँधी
देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है, वहीं कुछ लोग मुनाफा कमाने से बाज नही आ रहे : राहुल गाँधी
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देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है, वहीं कुछ लोग मुनाफा कमाने से बाज नही आ रहे : राहुल गाँधी

कोरोना से प्रदेश में बिगड़ते हालातों की जिम्मेदारी लें भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया

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कोरोना के बढ़ते प्रकोप से पूरा प्रदेश परेशान है। प्रदेश के दो प्रमुख शहर इंदौर और भोपाल में हालात दिन-प्रतिदिन हालात बेकाबू होते जा रहे है। इसके लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनो रुप से भाजपा नेता ज्यातिरादित्य सिंधिया जिम्मेदार हैं। मध्यप्रदेश इस समय देश का एकलौता ऐसा राज्य है जहां न तो स्वास्थ मंत्री है और न ही मंत्रिमंडल का गठन हुआ है। जिसके कारण प्रदेश सरकार कोरोना को रोकने में पूरी तरह नाकामयाब हुई है।

जिम्मेदारी लें ज्यातिरादित्य सिंधिया ?

पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 9 मार्च का अपना इस्तीफा 10 मार्च को ट्विटर के माध्यम से सार्वजनिक किया। इसके पहले ही सिंधिया खेमे के 22 विधायक मध्यप्रदेश से निकालकर कर्नाटक पहुंच गए थे जिसमें 6 मंत्री भी शामिल थे। स्वास्थ मंत्री तुलसीराम सिलावट भी इसी दल में मौजूद थे। उस समय तक देश में कोरोना के 39 मरीज सामने आ चुके थे और दुनिया भर में 1 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके थे। ऐसे में 20 मार्च तक चले इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गवर्नर के समक्ष अपना इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफे के अगले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान कर दिया लेकिन तब तक मामले 250 पर पहुंच गए थे। वहीं जनता कर्फ्यू के तुरंत बाद सरकार ने 21 दिनों का लॉकडाउन लगा दिया।

ऐसे में इस मारामारी से लड़ने के लिए प्रदेश के पास न तो मजबूत सरकार है और न ही मंत्रिमंडल। ऐसी परिस्तिथियों में स्वास्थ मंत्री का किरदार बहुत अहम होता है।

प्रदेश में बेकाबू होता कोरोना

प्रदेश में कोरोना के मामलों की बात करें तो स्वास्थ्य संचालनालय मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दिनांक 10/04/2020 को जारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक 451 मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से 33 लोगों की मौत हाे चुकी हैं। जिसमे 2 वरिष्ठ डॉक्टर भी शामिल हैं।

प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रुप में शिवराज सिंह चौहान ने चुपके चुपके राजभवन जाकर शपथ तो ले ली लेकिन इससे पहले कि वे अपने मंत्रिमंडल का गठन करते केंद्र सरकार ने देशभर में लॉकडाउन कर दिया जिसके कारण मंत्रिमंडल गठन की तैयारी धरी की धरी रह गई और अब जब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और ऐसे वक्त में लॉकडाउन बढ़ाना ही एकमात्र उपाय है तो फिर उन तैयारियों पर ग्रहण लग सकता है।

(लेख में व्यक्त किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार है)

वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व गृहमंत्री रामकृष्ण द्विवेदी का 87 की उम्र में देहांत, इंदिरा गाँधी के थे बेहद करीबी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 87 वर्षीय रामकृष्ण द्विवेदी ने शुक्रवार को राजधानी के मेदांता अस्पताल में दम तोड़ दिया। उत्तर प्रदेश में पंडित कमलापति त्रिपाठी की सरकार में प्रदेश के गृह मंत्री रहे रामकृष्ण द्विवेदी काफी दिन से बीमार चल रहे थे। बीमारी के चलते उन्हें हाल ही में मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने एनएसयूआई व यूथ कांग्रेस समेत कांग्रेस के कई अन्य संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


उत्तरप्रदेश में बुजुर्ग कांग्रेसियों के साथ उपेक्षित व्यवहार होने पर आवाज उठाने के कारण उनको ही कांग्रेस से निकाल दिया गया था। गौतलब है हाल ही में उनकी पार्टी में वापसी जरूर हो गई थी, लेकिन वह अपनी उपेक्षा से काफी परेशान थे।
मूल रूप से गोरखपुर के विकास खंड जंगल कौडिय़ा के भंडारों गांव के निवासी पंडित रामकृष्ण द्विवेदी दो बार विधान परिषद सदस्य भी रहे हैं। इसके सात ही उनकी कांग्रेस में काफी लम्बे समय तक गहरी पैठ रही है।


पूर्व गृहमंत्री रामकृष्ण द्विवेदी ने 1971-72 में उत्तर प्रदेश के सातवें मुख्यमंत्री रहे त्रिभुवन सिंह (टीएन) सिंह को गोरखपुर के तत्कालीन मानीराम विधानसभा उप चुनाव में शिकस्त दी थी। पंडित रामकृष्ण द्विवेदी गोरखपुर के मानीराम से उपचुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री टीएन सिंह को मात दी थी।

राज्यपाल से मिले कमलनाथ, बोले हमारे पास पर्याप्त संख्या मौजूद

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अभी अभी प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन से मिलकर बाहर आए है। राज्यपाल द्वारा 17 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराने के आदेश के बाद कमलनाथ उनसे मिलने उनके निवास गए थे। तकरीबन 30 मिनट चली इस मुलाकात के बाद कमलनाथ ने मीडिया से बात की

एएनआई को दिए बयान में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमने मध्यप्रदेश में बने राजनैतिक परिदृश्य पर चर्चा की और विधानसभा में दिए उनके अभिभाषण के लिए उनका धन्यवाद किया। मैंने उनको कहा कि हम सभी संवैधानिक कामों के लिए तैयार है लेकिन हम संविधान के बाहर कुछ नही करेंगे। भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लाई है, हमारे पास पर्याप्त संख्या है।

कमलनाथ ने आगे कहा कि अगर किसी को लगता है कि हमारे पास पर्याप्त संख्या नही है तो वो अविश्वास प्रताव लाए, मुझे क्यों फ्लोर टेस्ट देना है ? उन 16 बागी विधायकों को जो भी परेशानी है वह सामने आके बताएं।

मध्यप्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा बनी शोभा ओझा

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मध्यप्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता शोभा ओझा को आज मध्यप्रदेश महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। वह कल सुबह 10.30 बजे महिला आयोग कार्यालय श्यामला हिल्स भोपाल में पदभार ग्रहण करेंगी।

बता दें कि शोभा ओझा लंबे समय से कांग्रेस पार्टी में अपनी सेवा दे रही है और इस समय वह मध्यप्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता के पद पर काबिज है।

मध्यप्रदेश में भाजपा को झटका, 10 दिन आगे बढ़ा फ्लोर टेस्ट

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मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी उठापठक के बीच अब कमलनाथ सरकार के लिए राहत के पल सामने आए है। मध्यप्रदेश विधानसभा को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया है और इसके साथ ही कांग्रेस को अब बहुमत साबित करने के लिए 10 दिन का समय और मिल गया है।

विधानसभा स्थगित होने से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गवर्नर को पत्र लिखकर कहा कि भाजपा ने कांग्रेस के 21 विधायकों को बैंगलोर में बंदी बनाकर रखा है और दबाव में वीडियो जारी करवा रही है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट करवाना असंवैधानिक होगा।

कोर्ट का रुख कर सकती है भाजपा

विधानसभा स्थगित होना भाजपा के लिए बड़ा झटका है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव समेत भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहे है। गोपाल भार्गव ने ताजा बयान में मुख्यमंत्री कमलनाथ से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग तक कर डाली। सूत्रों के अनुसार भाजपा विधानसभा के स्थगन को रोकने और फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।

मध्यप्रदेश का सियासी ड्रामा जारी, कांग्रेस के पक्ष में वोट कर सकते है 9 भाजपा विधायक

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देर शाम जारी हुई मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यसूची से फ्लोर टेस्ट को शामिल नहीं किए जाने के बाद एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा जहां राज्यपाल से मिलकर कल ही फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग कर रही है तो वहीं कांग्रेस कह रही है कि विधानसभा की कार्यवाही अध्यक्ष ही तय करेंगे।

जहां एक ओर फ्लोर टेस्ट की उम्मीद में भाजपा के विधायक भी दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना हो चुके है तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया सलाहकार पंकज शर्मा ने ट्वीट कर बड़ी बात कही है। पंकज शर्मा ने ट्वीट करते हुए दावा किया है कि मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के 9 विधायक कर क्रास वोटिंग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि कल सोमवार को फ्लोर टेस्ट नहीं होगा।

इससे पहले भाजपा विधायक दल फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर राजभवन पहुंचा थे। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और बीजेपी के मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा सहित कई भाजपा नेता थोड़ी देर में राज्यपाल टंडन से मुलाकात कर कल ही फ्लोर टेस्ट कराया जाए। बता दें कि राज्यपाल के निर्देश के बावजूद विधानसभा की कार्यसूची से फ्लोर टेस्ट के विषय को शामिल नहीं किया गया है।


गौरतलब है कि कल से शुरू होने वाले बजट सत्र में विधानसभा की कार्यसूची से फ्लोर टेस्ट के विषय को को शामिल नहीं किया गया है। इस लिहाज से ये माना जा रहा है कि कल सदन में फ्लोर टेस्ट नहीं कराया जाएगा। बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन ने कल ही सीएम कमलनाथ को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा था कि किसी भी शर्त में 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराया जाना है, सदन की कार्यवाही किसी भी शर्त में स्थगित नहीं की जाएगी। वहीं, विधानसभा की कार्यसूची राज्यपाल के अभिभाषण के बाद भाषण पर कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रस्ताव है।

वहीं, दूसरी ओर फ्लोर टेस्ट कराए जाने को लेकर कहा है कि कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि हमारे 16 विधायकों को भाजपा ने बंधक बना लिया है और इन हालातों में क्या फ्लोर टेस्ट करना संविधानिक होगा? इससे पहले आज ही सभी विधायकों ने एक पत्र जारी कर कहा था कि हम विधानसभा अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत होने में असमर्थ हैं, कृपया इसे ही हमारा इस्तीफा समझा जाए।

एनआरसी के खिलाफ मार्च निकालने आगे बड़े चंद्रशेखर आजाद, कांग्रेस ने दिया समर्थन

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नागरिकता संशोधन कानून (Citizen Amendmend Act) के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहा है। पूरा विपक्ष और सामाजिक संगठन इस बिल के खिलाफ सड़क पर उतर गए है। कल जहां कांग्रेस और और बाकी विपक्षी दलों ने भारत बंद का एलान किया था तो वहीं आज भीम आर्मी भी नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में मार्च करने वाली है।


भीम आर्मी प्रमुख आज दिल्ली के जामा मस्जिद से लेकर जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की तैयारी में है। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने सीएए (Citizen Amendmend Act) और एनआरसी (National Register of Citizens) के विरोध में मार्च का ऐलान किया था। हालांकि दिल्ली पुलिस ने चंद्रशेखर को मार्च की इजाजत नहीं दी है और मार्च से पहले उनकी गिरफ्तारी के कयास लगाए जा रहे है।

इसी बीच भीम आर्मी प्रमुख ने ट्वीट करते हुए सफाई देते हुए ट्वीट किया कि कृपया मेरी गिरफ्तारी की अफवाहों पर ध्यान न दें। मैं जामा मस्जिद पहुंच रहा हूँ।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दिया समर्थन

भीम आर्मी द्वारा निकाले जाने वाले इस मार्च को कांग्रेस का समर्थन मिला है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मार्च का समर्थन करते हुए कहा कि मैं चन्द्रशेखर की भीम आर्मी की जामा मस्जिद से लेकर जंतर मंतर तक निकाली जा रही CAA और NRC के खिलाफ मार्च का समर्थन करता हूँ।’

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