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मुख्यमंत्री के तौर पर 1 महीने में कमलनाथ ने पूरे किए यह 10 बड़े वादे।

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17 दिसंबर को मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 17 जनवरी को अपनी सरकार का एक महीना पूरा कर लिया। वैसे तो एक महीना सरकार को काम संभालने में ही लग जाता है लेकिन मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इस एक महीने में अपने वचनपत्र के कई मुख्य वादे पूरे करके दिखाए है। आइये नजर डालते है इस एक महीने में कमलनाथ सरकार द्वारा किये कुछ अहम फैसलों पर।

1किसानों का कर्ज माफ

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा वादा जो किया था, वह था किसानों की कर्जमाफी का। कमलनाथ सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस की जीत में भी कर्जमाफी का योगदान काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने कुछ घंटों के भीतर प्रदेश के किसानों का सारा कर्जा माफ करके अपना वादा निभाया।

2पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश

मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नही थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आते ही प्रदेश के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार ने एक महीने के भीतर ही अपने इस वादे को भी पूरा करके दिखाया है।

3मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51,000 की

कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलने वाली राशि जो कि पहले 25000 थी, उसको बढ़ाकर 51,000 किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए इस राशि को 51,000 कर दिया।

4आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में इजाफा।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का वादा भी कमलनाथ सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले महीने में ही पूरा करके दिखाया। किसानों की कर्जमाफी के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आशा कार्यकर्ताओं को एरियर सहित प्रतिमाह 2 हजार रु. प्रोत्साहन राशि देने का भी आदेश जारी कर दिया था।

5पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण

कांग्रेस के वचनपत्र में एक जो सबसे चौकाने वाला वादा था, वह था गौशाला निर्माण का। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश की हर पंचायत के साथ ही शहरों में भी गौ शालाओं का निर्माण किया जाएगा। सत्ता में आने के साथ ही कमलनाथ सरकार ने इस विषय मे आदेश जारी कर दिए है और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है।

6अध्यात्म विभाग बनाने का आदेश

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किये गए वादे को पूरा करते हुए अध्यात्म विभाग बनाने के निर्देश दे दिए है। कमलनाथ सरकार ने आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर अध्यात्म विभाग बनाने का वादा किया है।

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा शिप्रा ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनानेऔर पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा।

7प्रदेश के लोगों को रोजगार में 70% आरक्षण

सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 70% स्थानीय आरक्षण देने का वादा किया था। सरकार ने कहा कि प्रदेश में लगे उद्द्योगों को सरकार से मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए 70% स्थानीय लोगों को रोजगार देने होगा। कमलनाथ के इस फैसले से जहां प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलने की खुशी है तो वहीं विपक्ष ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

8बंद होगा व्यापम

शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला, व्यापम को कमलनाथ सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है। कमलनाथ सरकार व्यापम को बंद कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग जैसे संस्था बनाने पर विचार कर रही है।

9दीनदयाल वनांचल योजना को किया बंद

सत्ता में आने साथ ही कमलनाथ सरकार ने अपना वादा निभाते हुए शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई दीनदयाल वनांचल योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

10मंत्रियों के बजाय कलेक्टर करेंगे घोषणाएं

एक नई मिसाल कायम करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित घोषणाएं मंत्रियों की जगह कलेक्टरों द्वारा करवाने के आदेश जारी किए है। इससे पहले सरकार की योजनाओं से संबंधित सभी घोषणाएं संबंधित विभाग के मंत्री ही किया करते थे।

कांग्रेस का बड़ा एलान, 2019 में सरकार बनी तो देश के सभी किसानों का कर्जा होगा माफ

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कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा एलान करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी 2019 में जीत दर्ज करके सरकार बनाती है तो देश के सभी किसानों का सारा कर्जा माफ करने का काम करेगी। यह एलान उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग का सम्मेलन में किया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा, प्रदेश का किसान, कारीगर और बुनकर समाज कांग्रेस के झंडे के साथ आ रहा है। खुद को पिछड़े वर्ग का बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी समाज को केवल ठगा है। उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया है।

राज बब्बर ने आगे कहा कि अभी जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, उन राज्यों में किसानों का कर्जा माफ किया गया है। कांग्रेस यह वादा करती है कि 2019 में जब कांग्रेस की सरकार बनेगी तो फिर एक बार पूरे देश के किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा।

वहीं इस मौके पर पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर और प्रदेश प्रभारी अनिल सैनी ने कहा कि पिछड़ा वर्ग की आबादी प्रदेश में 54 प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन उन्हें शासन-सत्ता और प्रशासन में उनकी आबादी के आधार पर प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछड़े वर्ग के समाज पर भरोसा जताया है और आश्वस्त किया है कि पदाधिकारियों की नियुक्ति और टिकट वितरण पर पिछड़ा वर्ग का पूरा ख्याल रखा जाएगा। कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र तैयार कर रही है। इसमें पिछड़ा वर्ग के लिए काफी कुछ होगा।

एसपी छोड़ कांग्रेस में हुए शामिल


कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के नेता एकेश लोधी ने इस दौरान कई नेताओं की जॉइनिंग कराई। एसपी छोड़कर कांग्रेस में आने वालों में प्रवेश राजपूत, प्रभुदयाल कठेरिया, विनोद राजपूत, योगेश राजपूत, ओंकार सिंह, प्रमोद महाजन, योगेश प्रताप सिंह, केशव सिंह, जसराम सिंह समेत अन्य लोग थे।

जब अफ्गानी सांसद ने राते हुए राहुल गांधी से बोला, हमारे देश में बहस बंदूक से होती है।

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राहुल गांधी ने बुधवार को अपने फेसबुक पोज पर अफगानिस्तान सांसद से हुई मुलाकात के बारे में बताया। राहुल ने लिखा कि एक दिन उन्होंने संसद की विजिटर गैलेरी में अफगानिस्तान के कुछ सांसदों को बैठे देखा। उन्होंने सोचा कि ये सांसद विदेश से आए हैं और हम लोग शोर-शराबा कर रहे हैं।

संसद का कार्यक्रम देखने के बाद वह मेरे कार्यालय में आए। मैंने खेद जताया कि वे लोग हंगामे के कारण संसद में अच्छी चर्चा नहीं देख पाए। इस पर एक अफगान सांसद रोने लगी, तो वह हैरान थे। उन्होंने पूछा क्या हुआ, तो सांसद ने कहा कि उनके देश में बहस बंदूक से होती है।

जिसके बाद राहुल ने लिखा कि लोकतंत्र ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें हर कीमत पर इसकी रक्षा करनी होगी।

अटके, लटके और भटके प्रॉजेक्ट्स को हमने किया पूरा – मोदी

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मणिपुर के इंफाल में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुऐ कहा कि पहले की सरकारों ने ही पूर्वोत्तर को दिल्ली से दूर किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों के अटके, लटके और भटके प्रॉजेक्ट्स को हम पूरा कर रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद हमारे सामनेे बहुत बड़ी चुनौती थी, दशकों से लटके, ’लेइशांगअटके और भटके प्रॉजेक्ट को पूरा करना है। मणिपुर के हप्ता कांगजीबंग में पीएम मोदी ने 8 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

इस दौरान उन्होंने चार अन्य योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इस मौके पर पीएम ने कहा, ’जिस मणिपुर को, जिस नॉर्थ ईस्ट को नेताजी ने भारत की आजादी का गेटवे बताया था, उसको अब न्यू इंडिया की विकास गाथा का द्वार बनाने में हम जुटे हुए हैं। मैं खुद बीते साढ़े चार साल में करीब 30 बार नॉर्थ ईस्ट आ चुका हूं। आपसे मिलता हूं, बातें करता हूं तो एक अलग ही सुख मिलता है, अनुभव मिलता है। मुझे अफसर से रिपोर्ट नहीं मांगनी पड़ती, सीधे आप लोगों से मिलती है। ये फर्क है पहले और आज में।

लेइशांग और मणिपुर का नाम आएगा

उन्होंने कहा कि आज मणिपुर को 125 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का भी उपहार मिला है। ये सिर्फ एक चेक पोस्ट नहीं है बल्कि दर्जनों सुविधाओं का केंद्र भी है। अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए पीएम मोदी ने कहा, ’देश के जिन 18 हजार गांवों को रेकॉर्ड समय में अंधेरे से मुक्ति मिली है, उनमें सबसे आखिरी गांव कांगपोकपी जिले का लेइशांग है। जब भी भारत के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के अभियान की बात आएगी तो लेइशांग और मणिपुर का नाम भी आएगा। आज शिक्षा, स्किल और स्पोर्ट्स से जुड़े प्रॉजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया है। मैरी कॉम की जन्मभूमि और कर्मभूमि मणिपुर का देश को स्पोर्टिंग सुपर पावर बनाने में बहुत बड़ा रोल रहने वाला है।’

पीएम मोदी पर ट्रंप के तंज को भारत ने किया खारिज, कांग्रेस ने भी किया हमला

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भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के तंज ने सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों को एक साथ ला दिया है। युद्ध से त्रस्त देश में एक पुस्तकालय के वित्त पोषण को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसने को आधिकारिक सूत्रों ने खारिज कर दिया। कांग्रेस ने भी ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अफगानिस्तान में विकास कार्यों के संदर्भ में भारत को अमेरिका से उपदेश की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि प्रिय ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री का मजाक बनाना बंद करिए। अफगानिस्तान पर भारत को अमेरिका के उपदेश की जरूरत नहीं है। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत ने अफगानिसतान में नेशनल असेंबली की इमारत बनाने में मदद की। मानवीय जरूरतों से लेकर रणनीतिक-आर्थिक साझेदारी तक, हम अफगान भाइयों एवं बहनों के साथ हैं।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी ठीक नहीं है और यह अस्वीकार्य है। हम आशा करते हैं कि सरकार सख्ती से इसका जवाब देगी और अमेरिका को यह याद दिलाएगी कि भारत ने अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर सड़कें एवं बांध बनवाएं हैं तथा तीन अरब डॉलर के मदद की प्रतिबद्धता भी जताई है।’’

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, 12 दिसंबर तक का किसान कर्ज होगा माफ !

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photograph of kamalnath
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की फाईल फोटो

मध्य प्रदेश में किसान कर्जमाफी को लेकर कमलनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कर्जमाफी की डेडलाइन मार्च से बढ़ाकर दिसम्बर तक करने का फैसला लिया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 5 जनवरी को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में कर्जमाफी का प्रस्ताव लाया जाएगा।

खबर है कि अब किसानों की कर्ज माफी के लिए मध्यप्रदेश में डेडलाइन 12 दिसंबर 2018 होगी, जबकी पहले यह 31 मार्च तक 2018 तक थी। इसमें सहकारी, आरआरबी और राष्ट्रीयकृत बैंकों के हर किसान के दो लाख रू तक के अल्पकालीन ऋण माफ होंगे। इसके लिए बैंक लोन लेने वाले किसानों की सूची पंचायत में चस्पा की जाएगी। इसके बाद किसान अपना नाम लिखकर बैंक में ऋण माफी के लिए आवेदन देगा और कागजातों की पुष्टि करके सरकार माफ लोन कर देगी। किसानों को सुविधा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर भी आवेदन करने की सुविधा रखी गई है। पिछले दिनों मंत्रियों ने सीएम के सामने डेडलाइन बढ़ने की मांग रखी थी, जिससे किसानों को कर्जमाफी योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके|

कमलनाथ सरकार कर्जमाफी के लिए तय तारीख 31 मार्च को आगे बढ़ाने का फैसला करने जा रही है। अब 12 दिसंबर 2018 तक के कर्ज को माफ किया जाएगा। हालांकि इसकी कोई अधिकारिक पुष्टी नही हुई है, लेकिन सुत्रों की माने तो कल मंत्रालय मे होने वाली कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया जा सकता है। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलेगा। कैबिनेट की अगली बैठक 5 जनवरी को रखी गई है, जिसमें कर्जमाफी का प्रस्ताव लाया जाएगा। बताया जा रहा है कि मंत्रियों से सलाह मशवरा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि मार्च की सीमा को बढ़ाकर दिसंबर तक कर दिया जाए ।

बता दे कि शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद कमलनाथ ने जिस पहली फाइल पर दस्तखत किए उसमें मध्य प्रदेश के किसानों का अल्पकालीन फसल ऋण दो लाख रू तक माफ करने की घोषणा की थी। इस घोषणा में ऋण माफी के लिए यह शर्त रखी गई थी कि जिन किसानों ने 31 मार्च 2018 तक ऋण लिया है, उन्हीं के ऋण माफ होंगे। लेकिन पड़ोस की राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने भी ऋण माफी की घोषणा की है और इस ऋण माफी की घोषणा में कर्ज माफी के लिए नियत तिथि 30 नवंबर 2018 रखी गई है। इतना ही नहीं राजस्थान की सरकार ने तो सहकारी बैंकों के किसानों के लिए ऋण माफी की अधिकतम राशि अनलिमिटेड घोषित की है। जिसके बाद कमलनाथ सरकार भी तारीख बढ़ाने जा रही है|

मध्यप्रदेश में मीसाबंदियों की पेशन पर अस्‍थाई रोक, भाजपा का विरोध

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कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के मीसा बंदी पेंशन योजना पर अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। सरकार मीसा बंदियों की जांच कराने के बाद इसे फिर से शुरू करेगी।

इस संबंध में आदेश 28 दिसंबर को जारी कर दिए गए हैं। आदेशानुसार सरकार मीसाबंदियों को मिलने वाली पेशन के संबंध में जांच करवाएगी। सरकार ऐसा लोगों को पेंशन की सूची से बाहर करेगी जो इसके सही पात्र नहीं है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने अपने खास लोगों को उपकृत करने के लिए करोड़ों की फिजूलखर्ची की है। सरकार 75 करोड़ रुपये सालाना लुटा रही थी, इसको तुरंत बंद होना चाहिए।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में फिलहाल 2000 से ज्यादा मीसाबंदी 25 हजार रुपए मासिक पेंशन ले रहे हैं। साल 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियों को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपए की गई। साल 2017 में मीसा बंदियों की पेंशन राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई। इस पर सालाना करीब 75 करोड़ का खर्च आता है। इस रोक पर लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक का कहना है कि जांच की कोई बात है ही नहीं।यह बदले की भावना से फैसला लिया गया है। पेंशन रोकने के विरोध में कोर्ट का सहारा लेंगे।

बंद नहीं की पेंशन, भाजपा बेवजह राजनीति कर रही : सलूजा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा है कि सरकार बने हुए सिर्फ 15 दिन हुए हैं। इतने कम समय में सरकार द्वारा लिये गये जनहितैषी निर्णयों से बौखलाकर भाजपाई जान बूझकर वंदे मातरम् और मीसाबंदियों के मामले को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे भाजपाईयों को पहले सामान्य प्रशासन विभाग का वह परिपत्र पढ़ना चाहिए जो मीसाबंदियों को लेकर जारी हुआ है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि प्रदेश में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के भुगतान में बजट प्रावधान से अधिक व्यय की स्थितियां महालेखाकार के परीक्षण प्रतिवेदनों के माध्यम से संज्ञान में आई है। इस कारण लोक लेखा समिति के समक्ष विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई आती है। शासन ने इस स्थिति की पुर्नरावृत्ति को रोकने के लिए लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाये जाने की आवश्यकता बतायी है। शासन ने यह भी माना है कि लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है और इसके लिए पृथक से विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये जाने का उल्लेख सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र में है।

सलूजा ने कहा कि सरकार के परिपत्र में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि बंद करने के बारे में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। यह कार्यवाही होने के बाद सम्मान निधि राशि का वितरण किया जाएगा।

दि ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर सियासत तेज, इन मशहूर हस्तियों ने तोड़ी चुप्पी

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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब पर आधारित अनुपम खेर की फिल्म द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर सियासत खत्म होने का नाम नही ले रही है। फिल्म के ट्रेलर रिलीज होते ही इस विवाद की शुरुआत हुई जब भारतीय जनता पार्टी ने इसे अपने ऑफिशियल ट्रिटर हैंडल से शेयर किया। वहीं विवाद बढ़ते ही भाजपा-कांग्रेस के साथ कई मशहूर हस्तियां अब इस विवाद में कूद पड़ी है। फिल्म 11 जनवरी को रिलीज होनी है और लगता है कि उसके पहले सह विवाद थमने वाला नही है। कांग्रेस इस फिल्म को भाजपा की साजिश बता रही है तो भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि यह फिल्म डॅा मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब पर आधारित है, जब इस किताब पर उस समय विवाद नही हुआ तो अब क्यों?

आईए देखते है फिल्म पर अभी तक आई प्रमुख बयान

सुरजीत सिंह कोहली( मनमोहन सिंह के भाई )-

दुनिया मनमोहन सिंह की क्षमता को जानती है और कांग्रेस सरकार में उनके 10 साल के कार्यकाल में उनके काम को देखा है। मैं हैरान हूं कि कैसे कोई उनकी छवि खराब करने के बारे में सोच सकता है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह विपक्ष का प्लान है कि लोकसभा चुनाव से पहले डॉक्टर सिंह को खराब नजरिए से पेश किया जाए। बीजेपी ने पीएम रहते हुए भी उनके स्वतंत्र अधिकारों को लेकर छवि खराब करने की कोशिश की थी। जब उन्हें कांग्रेस के खिलाफ कुछ नहीं मिला तो उन्होंने 2019 में सत्ता में आने के बाद डॉ साहब की छवि खराब करने की कोशिश की।

दलजीत सिंह कोहली(भाजपा में शामिल मनमोहन सिंह के भाई)-

देश के लिए उनकी सत्यनिष्ठा या उनके काम को लेकर कोई सवाल या शक किया ही नहीं जा सकता।

एच डी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री)-

‘मैं नहीं जानता किसने इसकी इजाजत दी और क्यों? सच कहूं तो मैं इस तथाकथित ‘एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के बारे में नहीं जानता, बल्कि मुझे लगता है कि मैं भी ’एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ हूं’

अनुपम खेर (अभिनेता)-

केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड फिल्म को देख चुकी है और अब रिलीज से पहले किसी को देखने का हक नहीं, फिर भी मैं कहता हूं कि अगर डॉ. मनमोहन सिंह जी फिल्म को रिलीज होने से पहले देखना चाहेंगे तो हम सिर्फ उनके लिए ही इस बात पर तैयार हो सकते हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह(पंजाब के मुख्यमंत्री)-

भाजपा ने जिस प्रकार फिल्म के ट्रेलर का उपयोग अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कर रही है और इसे भाजपा के नेता प्रचारित कर रहे हैं, इससे उनकी निराशा साफ झलकती है। भाजपा ने जनसमर्थन खो दिया है। यही कारण है कि वह अब इस तरह की सस्ती राजनीति पर उतर आई है। डॉ. सिंह के कटु आलोचक भी कभी ऐसी गलती नहीं कर सकते थे, जैसे भाजपा कर रही है।

अहमद पटेल( वरिष्ट कांग्रेस नेता)-

यह तिकड़मबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है। भाजपा के पास बहुत पैसा है और वह इस बात में व्यस्त है कि इसका दुरुपयोग कैसे किया जाए। वह जो करना चाहते हैं उन्हें करने दीजिए। ऐसी फिल्में आती-जाती रहती हैं, हम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।’

जितने पैसे प्रधानमंत्री ने अपने दोस्तों के माफ किए उतने में बनते 40 एम्स अस्पताल : राहुल गांधी

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राहुल गांधी की फाइल फोटो

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्तों के 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा माफ कर दिए, इतने पैसों में गरीबों के लिए काफी काम हो सकते थे। तुकबंदी करते हुए राहुल ने लिखा, ’’चौकीदार का भेष, चोरों का काम, बैंकों के 41,167 करोड़, सौंपे जिगरी दोस्तों के नाम।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा कि इतने रुपये में मनरेगा के एक साल का खर्च निकल जाता, तीन राज्यों के किसानों का कर्ज माफ हो जाता, देश में 40 नए एम्स अस्पताल खुल जाते।

दरअसल राहुल गांधी पिछले कई समय से प्रधानमंत्री मोदी पर कुछ चुनिंदा द्योगपतियों का कर्ज माफ करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने बाद कांग्रेस ने तीनों राज्यों में किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। जिसके बाद भाजपा दबाव में आ गई है।

तीन तलाक पर सरकार की अग्नि परीक्षा, यह है बहुमत का गणित

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लोकसभा में तीन तलाक बिल को पास कराने के बाद आज राज्यसभा में मोदी सरकार की असली अग्नी परीक्षा होगी। सरकार के इरादे जरूर बुलंद है लेकिन राज्यसभा की राह इतनी आसान नही है। एक ओर सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नही है वहीं दूसरी ओर सभी विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ एक होते नजर आ रहे है। सभी विपक्षी दल एकजुट होकर इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे हैं। सदन में सांसदों की उपस्थिति को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को व्हिप जारी किया। कांग्रेस ने लोकसभा और राज्य सभा के अपने सभी सांसदों को 31 दिसंबर को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है।

दरअसल आज राज्यसभा में तीन तलाक मुद्दे पर बहस हो सकती है जिसके मद्देनजर पार्टी ने यह व्हिप जारी किया है। कांग्रेस नहीं चाहती कि उसके सांसद तीन तलाक मुद्दे पर पार्टी के खिलाफ जाएं। वहीं लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद भाजपा भी राज्यसभा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसलिए पार्टी ने एक बार फिर से सांसदों के सदन में उपस्थित रहने को लेकर व्हिप जारी किया है।

क्या होता है व्हिप

व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के तहत माना जा सकता है और सदस्यता रद्द कर दी जा सकती है। व्हिप तीन तरह का होता है- एक लाइन का व्हिप। दो और तीन लाइन का व्हिप। इन तीनों मे तीन लाइन का व्हिप महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कठोर कहा जाता है। इसका इस्तेमाल अविश्‍वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए किया जाता है तथा उल्लंघन के बाद सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती है। हालांकि व्हिप को लोकतंत्र की मान्यताओं के अनुकूल नहीं माना जाता है, क्योंकि इसमें सदस्यों को अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि पार्टी की इच्छा के अनुसार कार्य करना होता है जो लोकतंत्र की भावनाओं के विरुद्ध है।

बहुमत का गणित है सरकार के खिलाफ

तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास करवाना सरकार के लिए काफी मुश्किल दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी जरूर बन गई है लेकिल बहुमत से काफी दूर है। राज्यसभा के कुल 244 सांसदों में से भाजपा के पास कुल 73 सांसद हैं। वहीं जेडीयू, अकाली दल, शिवसेना और अन्य संभावित साथी सांसदों को मिलाकर भी एनडीए का आंकड़ा 100 के अंदर ही दिख रहा है।

राज्यसभा में सरकार के संभावित साथी

राज्यसभा के मौजूदा सांसद – 244

  1. बीजेपी के पास सांसद – 73
  2. सहयोगियों में जेडीयू के सांसद – 6
  3. अकाली दल के सांसद – 3
  4. शिवसेना के सांसद – 3
  5. कुछ छोटे दलों के समर्थक सांसद – 3
  6. नामांकित और निर्दलीय साथ आ सकने वाले सांसद- 9

सदन में कुल 244 में से कुल 98 सांसदों का समर्थन

तीन तलाक के मुद्दे पर जहां एनडीए अल्पमत में दिख रही है तो वहीं यूपीए के साथ इस मुद्दे पर बहुमत नजर आ रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस का पास राज्यसभा में 50 सांसद हैं। वहीं तीन तलाक के मुद्दे पर 13-13 सांसदो वाली टीएमसी, एआईडीएमके और समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस के साथ नजर आ रही है। अगर तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद सांसदों के आंकड़ो पर नजर डालें तो यह आंकड़ा बहुमत के साथ 135 के आस-पास दिख रहा है। यह सभी सांसद बिल को राज्यसभा में पारित कराने से पहलेे ज्वांइट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना चाहते हैं।

राज्यसभा में बिल के खिलाफ संभावित सांसद

  1. कांग्रेस के सांसद – 50
  2. टीएमसी के सांसद- 13
  3. एआईडीएमके के सांसद- 13
  4. समाजवादी पार्टी के सांसद- 13
  5. लेफ्ट फ्रंट के सांसद – 7
  6. टीडीपी के सांसद- 6
  7. टीआरएस के सांसद – 6
  8. आरजेडी के सांसद- 5
  9. बीएसपी के सांसद- 4
  10. डीएमके के सांसद- 4
  11. बीजू जनता दल के सांसद- 9
  12. आम आदमी पार्टी के सांसद- 3
  13. पीडीपी के सांसद- 2

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