Monday, August 2, 2021
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भारत के दुश्मनों ने हमारी सेना की शक्ति और उसकी प्रचंडता देखी है: प्रधानमंत्री

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Prime minister narendra modi communicating with Indian army
Prime minister narendra modi communicating with Indian army

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारतीय जवानों के साथ बातचीत करने के लिए लद्दाख में निमू की यात्रा की। लद्दाख में निमू वो जगह है जो ज़ांस्कर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यह सिंधु नदी के तट पर स्थित है। प्रधानमंत्री ने वहां भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और बाद में थल सेना,वायु सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ बातचीत की।

जवानों के पराक्रम को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने हमारे सशस्त्र बलों की वीरता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस और भारत माता के प्रति समर्पण अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक शांति से अपना जीवन जी सकते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हमारे सशस्त्र बल राष्ट्र की रक्षा के लिए मजबूती से तैनात हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के सप्ताहों में हमारे सशस्त्र बलों ने जो अनुकरणीय बहादुरी दिखाई है, उससे दुनिया ने हमारी ताकत को समझा है।

गलवान घाटी में जवानों के बलिदान का स्मरण

प्रधानमंत्री ने भारत माता के उन सभी गौरवान्वित सुपुत्रों को याद किया जिन्होंने गलवान घाटी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि जो जवान शहीद हुए हैं वे पूरे भारत से संबंध रखते थे और भारत भूमि की बहादुरी के प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे लेह-लद्दाख,कारगिल या सियाचिन ग्लेशियर हो,चाहे ऊंचे पहाड़ हों या नदियों में बहने वाला बर्फीला ठंडा पानी,ये सब भारत के सशस्त्र बलों की वीरता के प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि भारत के दुश्मनों ने हमारी सेना की शक्ति और उसकी प्रचंडता देखी है।

प्रधानमंत्री ने दो माताओं- भारत माता और भारत के उन सभी बहादुर सैनिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की माताओं को सम्मान अर्पित किया जो अद्वितीय परिश्रम के साथ देश की सेवा में जुटे हैं।

शांति के लिए हमारी प्रतिबद्धता हमारी कमजोरी नहीं है

प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताते हुए कहा कि शांति,मित्रता और साहस के गुण किस तरह प्राचीन काल से भारत की संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलायाकि भारत ने हमेशा ही उन लोगों को करारा जवाब दिया है जिन्होंने शांति और प्रगति के मौजूदा माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भारत शांति और मित्रता के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन, शांति के लिए इस प्रतिबद्धता को भारत की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आजऔर मजबूत हो रहा है,चाहे वह नौसेना की ताकत हो,वायु सेना की शक्ति हो, या अंतरिक्ष शक्ति हो, सभी बढ़ रही हैं। हमारी सेना की ताकतभी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हथियारों के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास ने हमारी रक्षा क्षमताओं को कई गुना बढ़ा दिया है।

प्रधानमंत्री ने याद करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों का वैश्विक सैन्य अभियानों में बहादुरी और क्षमता का एक लंबा इतिहास रहा हैजिसमें दो विश्व युद्ध भी शामिल हैं।

विकास का युग

प्रधानमंत्री ने कहा कि विस्तारवाद का समय समाप्त हो चुका है और यह विकास का युग है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि यह विस्तारवाद की मानसिकता है जिसने बहुत नुकसान किया है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों मेंभारत की सेनाओं की बेहतरी और भारत की सुरक्षा तैयारियों को आगे बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसमें आधुनिक हथियारों की उपलब्धता सुनिश्चित करना,सीमावर्ती बुनियादी ढांचे में वृद्धि,सीमा क्षेत्र के विकास और सड़कों का विस्तार करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च को तीन गुना बढ़ा दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और हमारे सशस्त्र बलों की बेहतरी सुनिश्चित करने के लिए जा रहे प्रयासोंका भी उल्लेख किया।उन्होंने सीडीएस के गठन, दिल्ली में भव्य राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के निर्माण,दशकों बाद ओआरओपी की मांग को पूरा करने और सशस्त्र बल के जवानों के परिवारों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम जैसे सरकार की हालिया पहलों पर भी प्रकाश डाला।

लद्दाख की संस्कृति को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरानलद्दाख की संस्कृति की महानता के साथ ही कुशोक बकुला रिम्पोछे के महान उपदेशों को भी याद किया। उन्होंने लद्दाख को बलिदान की भूमि बताई और कहा कि लद्दाख ने देश को कई देशभक्त दिए हैं।

प्रधानमंत्री ने दृढतापूर्वक कहा कि भारत के लोग गौतम बुद्ध की शिक्षाओं से प्रेरित हैंजिनके लिए आस्था और करुणा के साथ बहादुरी जुड़ा था।

आतंकी से सैनिक बनकर शहीद हुए नजीर अहमद वानी को मिला आशू चक्र

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लांस नायक नाजिर अहमद वनी की फ़ाइल फ़ोटो

कश्मीरी आतंकवादी से सैनिक बने लांस नायक नजीर अहमद वानी घाटी में 6 आतंकवादियों को मारते हुए शहीद हो गए थे। अब उन्हें इस साल अशोक चक्र के लिए चुना गया है। यह शांति काल में सर्वोच्च वीरता का प्रदर्शन करने के लिए मिलने वाला बड़ा गैलेंट्री अवॉर्ड है। नायक एक समय आतंकवादी थे लेकिन वह अपनी इन गतिविधियों को पीछे छोड़ते हुए टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हो गए।

नायक जिस अभियान में शहीद हुए उस समय वह 34 राष्ट्रीय राइफल्स में थे और उनकी पोस्टिंग कश्मीर लाइट इंफेंटरी रेजिमेंट में थी। आतंकियों के छक्के छुड़ाने के कारण उन्हें दो बार सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। कुलगाम के चेकी अश्मुजी गांव के रहने वाले नजीर के परिवार में पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। नजीर एक असाधारण सैनिक थे। शांति काल में असाधारण वीरता दिखाने के लिए अशोक चक्र प्रदान किया जाता है जो सर्वोच्च सम्मान है।

इसके बाद दूसरे नंबर पर कीर्ति चक्र और तीसरे पर शौर्य चक्र आता है। इस साल चार अधिकारियों और सैनिकों को कीर्ति जबकि 12 को शौर्य चक्र दिया जाएगा। नजीर के लिए इख्वान शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। पिछले साल 23 नवंबर 2018 को जब वानी 34 राष्ट्रीय रायफल्स के साथियों के साथ ड्यूटी पर तैनात थे, तब खुफिया एजेंसी से शोपियां के बटागुंड गांव में हिज्बुल और लश्कर के 6 आतंकी होने की खबर मिली थी। जानकारी थी कि आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार हैं। वानी और उनकी टीम के पास आतंकियों के भागने वाले रास्ते को रोकने की जिम्मेदारी थी।

2019 का चुनाव जीतने के लिए मोदी कर सकते है पाकिस्तान से युद्ध: दिग्विजय सिंह

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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 का आम चुनाव जीतने के लिए पाकिस्तान के साथ जंग भी करवा सकते हैं। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। मोदी सरकार को भारत में 3 साल हो गए। इस दौरान ज्यादातर समय हालात तनावपूर्ण ही रहे।

जंग का माहौल बना रही सरकार
एक निजी आयोजन में शिरकत के लिए जोधपुर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि देश को पाकिस्तान से जंग में झोंकने के लिए माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी सरकार लोगों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रही है। इसलिए उसके पास चुनाव जीतने का दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ऐसे हालात में मोदी सरकार पाकिस्तान के साथ जंग लड़ सकती है। 2019 के चुनाव से पहले इसी तरह का माहौल बनाया जा रहा है।
मायावती ने भी दिया था ऐसा बयान
पिछले साल अगस्त में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी कुछ ऐसा ही आरोप लगाया था। आजमगढ़ में एक जनसभा के दौरान मायावती ने कहा था कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए पाकिस्तान के साथ जंग लड़ सकती है।
EVM पर सनसनीखेज बयान
दिग्विजय सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने चुनाव आयोग के इस दावे पर भी सवाल उठाए की EVM से छेड़छाड़ मुमकिन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनसे एक ऐसा शख्स मिला था, जिसने 2 करोड़ रुपये के एवज में एक विधानसभा चुनाव के नतीजे बदलने की पेशकश की थी। इससे पहले कई कांग्रेसी नेताओं के साथ बीएसपी, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी भी EVM पर सवाल उठा चुके हैं।

सेना के जवानों के साथ कश्मीर में हुए बेहद घटिया बर्ताव के वायरल वीडियो के पीछे का सच।

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में सेना के कुछ जवानों के साथ कश्मीर में बेहद बुरा बर्ताव हो रहा है लेकिन जवान धैर्य के साथ हर बदतमीजी को सहन करते हुए दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में भीड़ जवानों पर नफरत का गुबार निकाल रही है लेकिन हमारे शूरवीर पलट कर कुछ भी नहीं कर रहे हैं. वीडियो के जरिए दावा है कि देश के जवानों के साथ ये बर्ताव कश्मीर में हो रहा है।

इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए न्यूबज़्ज़ इंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की. पड़ताल में सामने आया कि ये वीडियो 9 अप्रैल का है. जो श्रीनगर के बाहरी हिस्से पुलवामा का हैं. 9 अप्रैल को कश्मीर में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानि सीआरपीएफ के जवान राज्य में हुए उपचुनाव में चुनाव सुरक्षा ड्यूटी करने के बाद अपने बैरक में लौट रहे थे. इसी दौरान कश्मीर के युवकों ने उनके साथ ये बर्ताव किया.

इस पूरे मामले पर कश्मीर वैली में सीआरपीएफ के पीआरओ ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जवानों का संयम उनके शौर्य के बराबर है.
जवान देश की रक्षा के लिए हैं अपमान का घूंट पीने के लिए नहीं लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील जगह पर शांति बनी रहे इसलिए हमारे देश के जवान अदम्य साहस के साथ अटूट धैर्य का परिचय देते हैं.

सीआरपीएफ मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इतनी भीड़ पर गोली नहीं चलायी जा सकती थी,चलती तो कुछ भी हो सकता था. भारत अपने सुरक्षाबलों को दुश्मन पर वार करना सिखाता है अपने लोगों पर नहीं. शायद स्थानीय लोगों के ये बात समझ में नहीं आती है.

 

उत्पीड़न’ के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे 200 CISF जवान

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कठिन परिस्थितियों में काम करने, खराब खाने और अलाउंसेज की पेमेंट न होने को लेकर आतंरिक तौर पर शिकायत करने से लेकर पीएम को पत्र लिखकर सीआईएसएफ के जवान अपनी परेशानियां बता चुके हैं। लेकिन, अब बेंगलुरु के केम्पे गोडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा में तैनात 200 जवानों ने उत्पीड़न के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया है। यह शिकायतें बताती हैं कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को किस तरह से समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते 3 सालों में 344 अर्ध सैनिक बलों के जवानों ने आत्महत्या कर ली। इनमें से 15 लोगों ने इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही मौत को गले लगा लिया। आंकड़ों के मुताबिक आत्महत्या करने वाले जवानों में से 15 पर्सेंट यानी 53 जवान सीआईएसएफ के थे। इसके अलावा 25 मामले ऐसे रहे हैं, जिसमें जवानों ने अपने ही सहकर्मियों की हत्या कर दी या फिर उन पर फायरिंग कर दी। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों में 13 जवान सीआईएसएफ के ही थे।

इसी साल जनवरी में केम्पे गोडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर एक जवान ने अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। इस पर सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस ने कहा था कि जवान ने निजी कारणों से आत्महत्या कर ली थी। केम्पे गोडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर खराब व्यवस्थाओं को लेकर एक सीआईएसएफ कर्मी ने कहा, ‘खाने का स्टैंडर्ड बेहद खराब है। हमारी शिफ्ट्स में कोई ब्रेक नहीं होता। हमें घर नहीं मिलता है और ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी नहीं मिलता है। सीनियर्स द्वारा दुर्व्यवहार होता है और मनमाने ढंग से सैलरी भी काट ली जाती है।’

दु:खद: हर साल 100 से ज्यादा जवान कर रहे है आत्महत्या।

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देश के सैनिकों का एक दु:खद सच यह भी है कि हर साल 100 से ज्यादा जवान आत्महत्या कर लेते हैं। साल 2016 में विभिन्न परिस्थितियों में 125 जवानों ने आत्महत्याएं कीं। शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा, ‘101 सैनिक, 19 एयरमैन और 5 नाविकों ने पिछले साल आत्महत्याएं कीं।’ इस के अलावा साथी जवानों की हत्याओं के भी 3 गंभीर मामले सामने आए।

इस साल 13 आर्मी जवान आत्महत्याएं कर चुके हैं। इसी तरह एयरफोर्स से भी 2 ऐसे मामले संज्ञान में आए हैं। दुर्गम इलाकों में देश की सेवा के लिए तत्पर सैनिक तनाव के चलते आत्महत्या कर रहे हैं।

भामरे ने बताया, ‘सरकार ने दिक्कतों को दूर करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें गुजर-बसर की स्थिति, बेहतर रहन-सहन और परिजनों को भी सेवाओं का लाभ शामिल है।’ बताया गया कि तनाव मिटाने के लिए योग व मेडिटेशन कार्यक्रमों की भी शुरुआत की गई है।

वह कहते हैं, ‘बड़ी संख्या में अफसरों को जवानों व उनके परिजनों की काउंसलिंग के लिए लगाया जाता है। इस के साथ-साथ बाहर के मनोवैज्ञानिकों की भी इस मुहिम में मदद ली जा रही है।’ एक अफसर ने बताया कि आजकल के दौर में जवानों का घर से मोबाइल फोन के जरिए सीधे जुड़े रहना, उनके भीतर कई बार तनाव पैदा कर देता है।

‘मोदी के रहते भारत-पाक रिश्तों के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं।’

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NewBuzzIndia:  सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि मोदी जब तक भारत के वजीर-ए-आजम रहेंगे, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधर नही सकते।

अजीज ने कहा कि पाकिस्तान की संसद ने सर्वसम्मति से भारत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कश्मीर में ‘बर्बरता’ की निंदा, सिंधु जल समझौते को रद्द करने की भारत की धमकी की निंदा और बलूचिस्तान में भारत के हस्तक्षेप भारत द्वारा नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन, भारत द्वारा कश्मीर को अभिन्न अंग मानने को नकारना जैसे मुद्दे शामिल हैं।

अजीज ने आरोप लगाया कि कश्मीर हिंसा से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत ने उरी में खुद ही हमला कराया, लेकिन इससे कश्मीर में हुई बर्बरता को छिपाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में भारत के आधिपत्यवादी रुख का पाकिस्तान विरोध करता रहा है और बराबरी के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने की मांग करता रहा है। अजीज ने कहा कि पाकिस्तानी संसद के निंदा प्रस्ताव का मकसद दुनिया को यह बताना है कि पूरा पाकिस्तान भारतीय आक्रमण के खिलाफ एकजुट है।

भारत के केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा साल 2018 तक पाकिस्तान से लगी भारत की सीमा को पूरी तरह सील कर दिए जाने के एलान पर अजीज ने कहा कि अगर लोगों की आवाजाही व व्यापारिक संबंध बरकरार रहा, तो पाकिस्तान-भारत सीमा को सील कर देने में कोई बुराई नहीं है।

राष्ट्रवाद की बात करने वाली मोदी सरकार “वन रैंक-वन पेंशन” पर करे बात : जावेद अख्तर

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Newbuzzindia: भारत पाकिस्तान सम्बन्ध पर बोलते हुए आज गीतकार जावेद अख्तर ने बड़ा बयान दिया है । एक हिंदी न्यूज़ चैनल पर जावेद अख्तर पाकिस्तानी कलाकारों के भारत में काम करने पर बात कर रहे थे ।  इसी बीच जावेद अख्तर से ओम पुरी के बयान पर कुछ कहने को कहा । जावेद अख्तर ने ओम पुरी के बयान की निंदा करते हुए आगे कहा कि..

“ये कैसा राष्ट्रवाद है ..? आज सरकार देशभक्ति की बात करती है । सेना की बात करती है और सेना के जवानों की बात करती है लेकिन जंतर- मंतर पर बैठे जवानों की बार नही करते ।

जावेद अख्तर ने मोदी सरकार का नाम लिए बिना हमले करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति की बात करने वाले “वन रैंक वन पेंशन ” पर बात क्यों नही करते..?

जावेद अख्तर ने आगे कहा कि राजनीती के लिए हम सेना और जवानों की बात करते है लेकिन जवानों की सुविधा और सैलरी की बात नही करते । शहीद होने के बाद उनके परिवार के बारे में बात नही करते ।

देखना दिलचस्प होगा की सर्जिकल अटैक के बाद अब मोदी सरकार “वन रैंक-वन पेंशन ” पर क्या बोलती है..?

उरी शहीदों पर ओम पुरी का विवादित बयान, देश हुआ शर्मसार

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Newbuzzindia: उरी हमले में मारे गए जवानों के शोक से देश अभी उबर भी नही सका की देश के अलग अलग हिस्से से इस हमले पर अलग अलग प्रतिक्रिया आने लगी है। इसी क्रम में अब जाने-माने अभिनेता ओमपुरी ने शहीदों की शहादत पर विवादित बयान दिया है। ओमपुरी ने कहा कि किसने कहा है जवानों से कि सेना में भर्ती हो और बंदूक उठाए।
 
एक टीवी चैनल के डिबेट शो में ओमपुरी ने यह विवादित बयान दिया है। सैनिकों की शहादत पर फिल्म अभिनेता ओमपुरी ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि “क्या देश में 15-20 लोग भी ऐसे हैं, जिन्हें बम बांधकर पाक भेजा जा सके ? कौन जबरदस्ती लोगों को फौज में भेजता है। किसने उनसे कहा कि वे फौज में जाएं।”

जाने क्या है ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और कैसे सेना इसे देती है अंजाम ?

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Newbuzzindia: उरी हमले के बाद भारत के तरफ से जवाबी हमले के तौर पर जो कार्यवाही हुई है उसकी हर तरफ वाहवाही हो रही है। इस पूरे ऑपरेशन में जो सबसे नया शब्द लोगों तक पहुँचा वो है ‘सर्जिकल स्ट्राइक’।  ऐसे में अगर आप ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का असल मतलब नहीं जानते, तो आइए हम आपको बताते हैं। – क्या है ‘सर्जिकल स्ट्राइक’।
‘सर्जिकल स्ट्राइक’ सेना के उस हमले को कहा जाता है जो अचानक हो और किसी एक तय इलाके या ठिकाने को नष्ट करने के लिए किया जाए। सेना ऐसे हमले में ये विशेष रूप से ध्यान रखती है कि आसपास मौजूद अन्य चीजों को कम या फिर न के बराबर नुकसान पहुंचे। पीओके में सेना के सर्जिकल स्ट्राइक को रक्षा विशेषज्ञों ने बताया एक बेहतर कदम और भी हैं तरीके ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ सिर्फ थल सेना के जरिए ही नहीं बल्कि हवाई हमले के जरिए भी हो सकती है। हवा से की गई सर्जिकल स्ट्राइक को ‘प्रिसिशन बॉम्बिंग’ के नाम से भी जाना जाता है, जब फाइटर प्लेन के जरिए उन जगहों को ही निशाना बनाया जाता है जिन्हें नष्ट करना है। ये ‘कारपेट बॉम्बिंग’ से बिल्कुल अलग होता है। कारपेट बॉम्बिंग में बम उस पूरे इलाके में गिराए जाते हैं जब सही जगह का अनुमान न लगाया जा सके। 2003 के इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी वायुसेना द्वारा किए सद्दाम हुसैन के सरकारी ठिकानों पर हमलों को ‘हवाई सर्जिकल स्ट्राइक’ या ‘प्रिसिशन बॉम्बिंग’ के रूप में देखा जा सकता है।