Saturday, December 3, 2022
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अपनाये ये उपाय और दिन भर रहें ताजगी से भरपूर।

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सुबह उठकर तरोताजा महसूस करने के लिए हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए, ताकि पूरे दिन शारीरिक, मानसिक रूप से ऊर्जावान बनी रह सकें। अकसर सुबह नींद खुलने पर आप थोड़ा सुस्त और आलस्य महसूस करते हैं, मन करता है कि बस थोड़ी देर और सो लें, कुछ देर यूं ही आंखें मूंदें पड़े रहें। तो श्वास संबंधी व्यायाम आपकी सुस्ती को दूर भगाने में मदद करता है।

दिल्ली की फिटनेस सलाहकार मिनी थापर सुस्ती दूर करने के लिए बताती हैं कि “फेफड़ों को पूरी तरह खोलने के लिए और भरपूर ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए कुछ देर गहरी सांसें लें। फर्श पर चटाई बिछाकर या तो बिलकुल सीधे खड़े हो जाएं या फिर पालथी मारकर बैठ जाएं। गहरी सांसें लें, ताकि आपके फेफड़ों में शुद्ध वायु प्रवेश कर सके। अपनी पसलियों को फैलाएं, सांस को भीतर फेफड़ों तक खींचें, थोड़ी देर ऐसे ही रहें। अब धीरे-धीरे अपनी नाक से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को रोज सुबह पांच-दस मिनट तक दोहराएं।”

संकल्प की ताकत  


दिन की शुरुआत अगर सकारात्मक संकल्प से की जाएं तो यह आपको पूरे दिन रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा। यदि आप कार्यस्थल और घर की तमाम समस्याओं को निपटाना चाहते हैं तो मन में कुछ संकल्प जरूर लें। लगातार मस्तिष्क में ये शब्द दोहराते समय इनमें छिपा संदेश आपके अवचेतन में जाकर समा जाता है और यह प्रत्यक्ष तौर पर फायदा पहुंचाता है।
  
सुबह कुछ देर किसी पार्क में जॉगिंग जरूर करें या तेज कदमों से चलें या फिर प्रकृति के बीच थोड़ी देर बैठें। दरअसल यही वह समय होता है जब आप अपने पूरे दिन के लिए ऊर्जा ग्रहण करते हैं। अब यदि आपने कोई संकल्प लिया है तो उस पर विचार करें। जैसे, ‘मैं जैसा हूं, उसी रूप में खुद से प्यार करता हूं’, ‘मैं ऑफिस में बॉस या सहकर्मियों के साथ बेहतर और खुशगवार संबंध रख सकता हूं’, ‘मैं दूध वाले या महरी से रोज की चिकचिक को आसानी से सुलझा सकता हूं’ या फिर ‘बच्चों की पढ़ाई-कैरियर को लेकर हमेशा बने रहने वाले तनाव को खत्म कर सकता हूं..।’
   
इन बातों को अवचेतन में दोहराते रहें, ठीक वैसे ही जैसे हम बच्चों से मुहावरे या कविता की पंक्तियां दोहराने को कहते हैं। जब भी कोई नकारात्मक विचार या सवाल जेहन में उठने को हो, अपने संकल्पों को दोहराएं।

दोपहर की थकान को बदलें चुस्ती में

दोपहर का समय वह होता है जब आपका ऊर्जा स्तर गिरने लगता है और खुद को दोबारा से ऊर्जावान बनाना जरूरी होता है। मिनी कहती हैं कि दोपहर के समय आप दस मिनट अपनी सभी अवांछित फाइल्स, कार्यक्रम, चिट्ठी-फोन और ईमेल निपटाने के बारे में सोचें। एक बार जरूरी कार्य निपट जाएं तो थोड़ा सुस्ता लें। कोई सुगंधित ऑयल लेकर माथे पर लगा लें, इससे आपको राहत महसूस होगी।

यूकेलिप्टस, लेमनग्रास या रोजमेरी के सुगंधित ऑयल की चार बूंद किसी छोटी सी बोतल में लें। इसमें आधा पानी भरकर आसपास इसका छिड़काव करें। घड़ी की दिशा के अनुसार अपने चारों ओर स्प्रे करें, कोने में, डेस्क या कंप्यूटर के आसपास भी स्प्रे कर सकते हैं।

काम के दबाव से बचने के लिए


मिनी थापर बताती हैं कि डेस्क या टेबिल पर कोहनी टिकाकर बैठें, हाथों को सीने के सामने से लाते हुए हथेलियों को गालों के ऊपर से लाते हुए  अपनी आंखें बंद करें। यदि आप घर में हैं तो लेटकर भी यह प्रक्रिया दोहरा सकते हैं, लेकिन अपने घुटनों को मोड़ लें। 

दोनों हथेलियों को तब तक साथ रगड़ें जब तक कि वे गर्म न हो जाएं और फिर उन्हें बंद आंखों के ऊपर रखें। गहरी सांसें भरें, इस तरह कि बंद आंखों के अंधेरे को महसूस कर सकें, थकी आंखों पर हथेलियों की गर्माहट का अनुभव करें। इसे महसूस करते हुए मस्तिष्क को खाली कर लें। गहरी सांसें लें, किसी भी समस्या और तनाव का अनुभव न होने पाए। पांच-दस मिनट तक ऐसा करें। शाम के समय भी कुछ ऐसा करें कि दिन भर की थकान मिट सके।

 

आसान क्रियाएं राहत पहुंचाएं

यदि आप दफ्तर से गर्दन और कंधे के दर्द के साथ लौटती हैं तो नियमित व्यायाम जरूरी है। ऐसा करने से मांसपेशियों के दर्द में चंद मिनटों में ही राहत मिल सकती है।
   
फर्श पर चटाई बिछाकर बैठें। गर्म तौलिए को गर्दन के चारों ओर लपेट लें। कुछ सेकंड तक ऐसे ही रहें। इस क्रिया को छह बार दोहराएं। 

तौलिए के दोनों किनारों को खींचकर पकड़ें और अपने कंधे के चारों ओर लपेटें। उंगलियों का हलका सा दबाव पिछले कंधे पर बनाए रखें। हथेलियों को इधर-उधर घुमाती रहें ताकि कंधे पर दबाव बना रहे। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद तौलिया हटा लें। इसे छह बार दोहराएं। व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर सदा स्वस्थ नहीं रह सकता, इसलिए फिट बने रहने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत होती है।

 

 

अपनाएं इन बातों को भी

फिट रहने के लिए योग-ध्यान, सुबह की सैर के साथ जरूरी है कि जो भी खाएं, शरीर की जरूरतों के हिसाब से खाएं। फिटनेस सलाहकार मिनी कहती हैं कि पाचन क्रिया सुचारु होनी चाहिए। थकान या सुस्ती होने पर लेटकर या बैठकर पीठ संबंधी व्यायाम करने से फायदा होता है। हमारा तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) मस्तिष्क से संचालित होता है, छिटपुट व्यायाम करने से दिमाग सक्रिय व सकारात्मक ढंग से सोचने लगता है, जिसका फायदा शरीर को होता है। यदि आप दिन भर कुर्सी पर बैठे रहते हैं तो अनुलोम-विलोम लाभदायक होगा। सुबह सूर्योदय से पहले खाली पेट प्राणायाम करना भी अछा होता है। कपालभारती व वज्रासन भी ठीक होता है।

QUICK BITES:

  • दिन भर तरोताजा रहने के लिए रात को पर्याप्त नींद लें।
  • हर रोज सुबह योग, व्यायाम या प्रणायाम की आदत डालें।
  • खुश रहना सीखें इससे आप हमेशा तरोताजा रहेंगे।
  • तनावमुक्ति के उपाय अपनाएं और खुश रहे





तनावमुक्ति के लिए कुछ अन्य क्रियाएं कर सकते हैं:



1. कुर्सी पर बिलकुल सीधी बैठें, आंखें बंद करें और भीतर से गहरी सांस लें। 
2. धीरे-धीरे सांस लेते हुए महसूस करें कि तपती दुपहरी में आप मैदान में बैठे हैं। आसमान साफ नीला है, लेकिन बादल का एक घना टुकड़ा सूरज को ढांप रहा है। ठीक यही दृश्य अपने शरीर के आसपास भी स्थित करके सोचें कि वहां भी कोई बादल का टुकड़ा है, जो उस चुस्ती को कम कर रहा है।  
3. देखें कि बादलों का वह घना टुकड़ा छोटा और छोटा होता जा रहा है, सूरज साफ चमकने लगा है, इसकी गर्माहट को तब तक महसूस करें जब तक कि सूरज बादल के आखिरी टुकड़े को नहीं मिटा डालता, जब तक कि शरीर में दर्द का-तनाव का-दबाव का थोड़ा सा भी अंश बचा रह जाता है। अब पूरे शरीर में सूरज की पीली ऊर्जा देने वाली रोशनी को महसूस करें। 
4. जूते-मोजे उतार लें, हरी घास पर नंगे पैर टहलें। पृथ्वी की ऊर्जा महसूस करें, ताजा हवा भीतर खींचें। हरियाली को आंखें बंद कर कल्पना में महसूस करें।  
5. पांच-दस मिनट तक घास पर टहलें, मिट्टी की सोंधी गंध को नथुनों से-फेफड़ों से खींचें।

दशहरा क्यों मनाया जाता है और क्या है उसका महत्व : डॉ सौरभ मालवीय

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Newbuzzindia: भारत एक विशाल देश है. इसी भौगोलिक संरचना जितनी विशाल है, उतनी ही विशाल है इसकी संस्कृति. यह इस भारत की सांस्कृतिक विशेषता है ही है कि कोई भी पर्व समस्त भारत में एक जैसी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, भले ही उसे मनाने की विधि भिन्न हो. ऐसा ही एक पावन पर्व है दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है. दशहरा भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. विश्व भर के हिन्दू इसे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं.

कब और क्यों मनाया जाता है दशहरा ?

यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अवतार राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी. रावण भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण करके लंका ले गया था. भगवान राम देवी दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन रावण का वध कर अपनी पत्नी को मुक्त कराया. दशहरा वर्ष की तीन अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है, जिनमें चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा भी सम्मिलित है.

इस दिन लोग नया कार्य प्रारंभ करना अति शुभ माना जाता है. यह शक्ति की पूजा का पर्व है. इस दिन देवी दुर्गा की भी पूजा की जाती है. दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन को बहुत ही शुभ माना जाता है. दशहरा नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है.

कैसे मनाया जाता दशहरा ?

देशभर में दशहरे का उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. जगह-जगह मेले लगते हैं. दशहरे से पूर्व रामलीला का आयोजन किया जाता. इस दौरान नवरात्रि भी होती हैं. कहीं-कहीं रामलीला का मंचन होता है, तो कहीं जागरण होते हैं. दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है. इस दिन रावण, उसके भाई कुम्भकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और अग्नि बाण इन पुतलों को मारते हैं. पुतलों में पटाखे भरे होते हैं, जिससे वे आग लगते ही जलने लगते हैं.

समस्त भारत के विभिन्न प्रदेशों में दशहरे का यह पर्व विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है. आईए जानते है भारत में किस जगह कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

कश्मीर में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

कश्मीर में नवरात्रि के नौ दिन माता रानी को समर्पित रहते हैं. इस दौरान लोग उपवास रखते हैं. एक परंपरा के अनुसार नौ दिनों तक लोग माता खीर भवानी के दर्शन करने के लिए जाते हैं. यह मंदिर एक झील के बीचोबीच स्थित है.

हिमाचल प्रदेश में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा बहुतप्रसिद्ध है. रंग-बिरंगे वस्त्रों से सुसज्जित पहाड़ी लोग अपनी परंपरा के अनुसार अपने ग्रामीण देवता की शोभायात्रा निकालते हैं. इस दौरान वे तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े आदि वाद्य बजाते हैं तथा नाचते-गाते चलते हैं. शोभायात्रा नगर के विभिन्न भागों में होती हुई मुख्य स्थान तक पहुंचती है. फिर ग्रामीण देवता रघुनाथजी की पूजा से दशहरे के उत्सव का शुभारंभ होता है. हिमाचल प्रदेश के साथ लगते पंजाब तथा हरियाणा में दशहरा पर नवरात्रि की धूम रहती है. लोग उपवास रखते हैं. रात में जागरण होता है. यहां भी रावण-दहन होता है और मेले लगते हैं.

बंगाल, ओडिशा एवं असम में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

बंगाल, ओडिशा एवं असम में दशहरा दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है.  बंगाल में पांच दिवसीय उत्सव मनाया जाता है. ओडिशा और असम में यह पर्व चार दिन तक चलता है. यहां भव्य पंडाल तैयार किए जाते हैं तथा उनमें देवी दुर्गा की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं. देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. दशमी के दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. महिलाएं देवी के माथे पर सिंदूर चढ़ाती हैं. इसके पश्चात देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है. विसर्जन यात्रा में असंख्य लोग सम्मिलित होते हैं.

गुजरात में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

गुजरात में भी दशहरे के उत्सव के दौरान नवरात्रि की धूम रहती है. कुंआरी लड़कियां सर पर मिट्टी के रंगीन घड़े रखकर नृत्य करती हैं, जिसे गरबा कहा जाता है. पूजा-अर्चना और आरती के बाद डांडिया रास का आयोजन किया जाता है. महाराष्ट्र में भी नवरात्रि में नौ दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है तथा दसवें दिन विद्या की देवी सरस्वती की स्तुति की जाती है. इस दिन बच्चे आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मां सरस्वती के तांत्रिक चिह्नों की पूजा करते हैं.

 

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में दशहरे के उत्सव के दौरान लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की पूजा की जाती है. पहले तीन दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का पूजन होता है. दूसरे दिन कला एवं विद्या की देवी सरस्वती-की अर्चना की जाती है तथा और अंतिम दिन शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना की जाती है. कर्नाटक के मैसूर का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है. मैसूर में दशहरे के समय पूरे शहर की गलियों को प्रकाश से ससज्जित किया जाता है और हाथियों का शृंगार कर पूरे शहर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इन द्रविड़ प्रदेशों में रावण का दहन का नहीं किया जाता.

 

छत्तीसगढ़ में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी दशहरा का बहुत ही अलग तरीके से मनाया जाता है. यहां इस दिन देवी दंतेश्वरी की आराधना की जाती है. दंतेश्वरी माता बस्तर अंचल के निवासियों की आराध्य देवी हैं, जो दुर्गा का ही रूप हैं. यहां यह त्यौहार 75 दिन यानी श्रावण मास की अमावस से आश्विन मास की शुक्ल त्रयोदशी तक चलता है. प्रथम दिन जिसे काछिन गादि कहते हैं, देवी से समारोह आरंभ करने की अनुमति ली जाती है. देवी कांटों की सेज पर विरजमान होती हैं, जिसे काछिन गादि कहा जाता है. यह कन्या एक अनुसूचित जाति की है, जिससे बस्तर के राजपरिवार के व्यक्ति अनुमति लेते हैं. बताया जाता है कि यह समारोह लगभग पंद्रहवीं शताब्दी में आरंभ हुआ था.

 

दशहरे का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है

काछिन गादि के बाद जोगी-बिठाई होती है, तदुपरांत भीतर रैनी (विजयदशमी) और बाहर रैनी (रथ-यात्रा) निकाली जाती है. अंत में मुरिया दरबार का आयोजन किया जाता है.इसका समापन अश्विन शुक्ल त्रयोदशी को ओहाड़ी पर्व से होता है.

दशहरे के दिन वनस्पतियों का पूजन किया जाता है. रावण दहन के पश्चात शमी नामक वृक्ष की पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को ससम्मान प्रदान कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.

इसके साथ ही अपराजिता (विष्णु-क्रांता) के पुष्प भगवान राम के चरणों में अर्पित किए जाते हैं. नीले रंग के पुष्प वाला यह पौधा भगवान विष्णु को प्रिय है.

दशहरे का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है, अपितु यह हमारी सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है.

लेखक का परिचय                            

उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद के पटनेजी गांव में जन्मे डॊ. सौरभ मालवीय बचपन से ही सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के चलते सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है. जगतगुरु शंकराचार्य एवं डॊ. हेडगेवार की सांस्कृतिक चेतना और आचार्य चाणक्य की राजनीतिक दृष्टि से प्रभावित डॊ. मालवीय का सुस्पष्ट वैचारिक धरातल है. ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया’ विषय पर आपने शोध किया है. आप का देश भर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक मुद्दों पर निरंतर लेखन जारी है. उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है, जिनमें मोतीबीए नया मीडिया सम्मान,विष्णु प्रभाकर पत्रकारिता सम्मान और प्रवक्ता डॊट.कॊम सम्मान आदि सम्मिलित हैं. संप्रति- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक, जनसंचार विभाग के पद पर कार्यरत हैं.

मोबाइल-09907890614

ईमेल- malviya.sourabh@gmail.com

वेबसाइट- www.sourabhmalviya.com

पिता और चाचा पर भारी पड़ी अखिलेश यादव की राजनीति, रद्द हुआ कौमी एकता दल का सपा में विलय

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NewBuzzIndia:

  विगत कई दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अंदाज़ों और अटकलों का दौर रहा। इस पसोपेश को किनारे करते हुए प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी  समाजवादी पार्टी में कौमी एकता दल के विलय की संभावनाओं पर विराम लगते हुए अंतिम निर्णय दे दिया गया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हठ के आगे पार्टी के दिग्गजों को झुकना ही पड़ा। मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय रद्द कर दिया गया है। समाजवादी पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही कौमी एकता दल का सपा में विलय कराने के सूत्रधार रहे बलराम यादव की कैबिनेट में वापसी हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम में मुलायम सिंह यादव प्रत्यक्ष रूम से सामने नहीं आए लेकिन सूत्रों से ये खबर मिली की कहीं न कहीं सपा प्रमुख का मोह कौमी एकता दल से जुड़ा था।

संसदीय बोर्ड की बैठक में चार अहम फैसले लिए गए। पहला फैसला कौमी एकता दल के विलय को रद्द करने का रहा। 2 घंटे तक चली समाजवादी पार्टी की बैठक में ये फैसला लिया गया। इस फैसले से एक बात साफ हो गई कि अपने चाचा शिवपाल यादव पर सीएम अखिलेश यादव भारी पड़ गए हैं। दूसरा अहम फैसला बलराम यादव की अखिलेश मंत्रिमंडल में वापसी का है। कौमी एकता दल के एसपी में विलय से सीएम नाराज हो गए थे। इस विलय के सूत्रधार रहे बलराम यादव को अखिलेश ने फौरन अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया था। लेकिन अब विलय रद्द होते ही बलराम यादव की वापसी हो गई।

इसके अलावा दो और अहम फैसले इस बैठक में लिए गए। अब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह समाजवादी पार्टी का चुनाव से ऐन पहले पुनर्गठन करेंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूरे सूबे का दौरा करेंगे। माना जा रहा कि वो चुनाव से पहले हवा का रुख भांपने के लिए हर जिले का दौरा करेंगे।

…तो मोदी, राहुल और बाबा रामदेव आएंगे इनके स्वयंवर में!!

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देश बार में जहाँ  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर  देशभर में को योग दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया।  वहीं मुजफ्फरनगर में आज फिल्मी कलाकारों के साथ जनपदवासियों ने योगा दिवस मनाया। इस कार्यक्रम से पहले संजीव बालियान और राखी सांवत ने भजन कीर्तन के बाद आरती कर सूर्य नमस्कार कर दो घंटे योग किया। बाद में राखी सावंत ने प्रेसवार्ता में योग की अपील कार्टर हुए राखी ने बताया की उनकी खूबसूरती का राज़ योग ही है, साथ ही योग के लिए उन्होंने बाबा रामदेव और प्रधानमंत्री मोदी की जम के तारीफ़ की। यही नहीं राखी ने कहा कि अगर उन्हें फिर से स्वयंवर रचाने का मौका मिलेगा तो इस बार वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और बाबा रामदेव को भी जरूर बुलाएंगी। उन्होंने कहा कि एक मौका सभी को मिलना चाहिए।

FDI के मामले पर अपनों के निशाने पर आए मोदी, स्वदेशी जागरण मंच ने कहा, “ये जनता के साथ विश्वासघात है।”

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राष्ट्रीय स्वयं संघ की सम्बद्ध संगठन स्‍वदेशी जागरण मंच ने सरकार के एफडीआई के नियमों में ढील देने के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह देश की जनता के साथ विश्वासघात है और इसका प्रभाव स्थानीय कारोबारियों के लिए यह ठीक नहीं होगा। मोदी सरकार की कुछ आर्थिक नीतियों के आलोचक रहे स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि भाजपा नीत सरकार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) पर वही नीति अपना रही है जो पिछली सरकारों ने अपनाई और इसका रोजगार सृजन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने से कहा, ”खुदरा, रक्षा और फार्मा जैसे क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोलना और नियमों में ढील देना देश की जनता के साथ विश्वासघात है। ऐसा करके इस सरकार ने सामान्य तौर पर देश के साथ और विशेष रूप से स्थानीय कारोबारियों के साथ अच्छा नहीं किया है।” नीति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार को सिंगल-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में नियमों में ढील देने के मामले में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था और दुर्भाग्य की बात है कि राजग सरकार ने भी ऐसा ही किया है।

महाजन ने आरोप लगाया कि इस सरकार के साथ दिक्कत यह है कि यह पिछली सरकार की तरह की सोच के साथ काम करती है और उसे लगता है कि विकास और रोजगार सृजन केवल एफडीआई के साथ ही संभव है। उन्होंने दावा किया, ”जबकि अब एफडीआई नीति अपनाने से देश में रोजगार सृजन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस नीति का उद्देश्य रोजगार सृजन करना नहीं, बल्कि भारतीय लोगों से नौकरी छीनना है।”

गौरतलब है कि केंद्रीय वाणिज्‍य राज्‍य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यह एलान किया कि केंद्र सरकार ने उड्डयन, रक्षा समेत कई क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा को बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया है।

“जब वो तोड़ने से ना रोक सके तो बनाने से कौन रोकेगा, बनेगा राम मंदिर।” -योगी आदित्यनाथ

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भले ही भाजपा राम मंदिर मामले पर बोलने से बचती रहती है पर अभी जैसे ही यूपी में चुनाव का माहौल आया अपने इरादों को स्पष्ट करते हुए आखिर भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात कह दी है। आदित्यनाथ राम मंदिर मामले पर एक बार और विवादित बयान दे कर विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं।

ज़रूर पढ़ें, शिक्षा और देश दोनों का भगवाकरण है ज़रूरी। : कठेरिया

पार्टी सांसद योगी आदित्यनाथ ने यूपी के बस्ती में राम मंदिर को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने भड़काऊ अंदाज में कहा कि जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने से कोई नहीं रोक सका, तो भला मंदिर बनाने से कौन रोकेगा।
रविवार को रामकथा के अयोजन में पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को धमकी भरे अंदाज में कहा, ‘भगवान राम के मंदिर को बनने से कोई नहीं रोक सकता है। जब ढांचा ढहाने से कोई नहीं रोक पाया तो मंदिर बनाने से कौन रोकेगा। छह दिसंबर को कार सेवकों ने ढांचा ढहाने के बाद ईट का एक-एक टुकड़ा अपने साथ लेकर चले गए और अपने हिसाब से उसका इस्तेमाल किया।’

ये भी पढ़ें… कैराना मामले पर योगी आदित्यनाथ ने उगला ज़हर, जाने क्या है पूरा मामला

मदर टेरेसा पर फिर हमला

बीजेपी सांसद यही नहीं रुके। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में भारत रत्न मदर टेरेसा को लेकर भी टिप्पणी की। आदित्यनाथ ने कहा, ‘मदर टेरेसा धर्मांतरण करवाती थी। आज भी सेवा के नाम पर धर्मांतरण जारी है। टेरेसा के लोग भारत का इसाईकरण करने का काम करते हैं। देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इन इसाईयों ने किस तरह से खतरनाक स्थ‍िति पैदा कर रखी है, इसे देखना है तो झारखंड, अरूणाचल, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय जाइए।’

ये भी पढ़ें, तो अब चेतन भगत होंगे RBI के गवर्नर!!

‘कैराना मामले पर किसी ने पुरस्कार क्यों नहीं लौटाया ?’

आदित्यनाथ ने कैराना के मामले पर दुख प्रकट करते हुए कहा, ‘हिंदू कब तक पलायन करेगा और वह जाएगा कहां ? पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से हिंदुओं को भगाया गया। तब किसी ने असहिष्णुता की बात नहीं की। तब किसी ने कोई पुरस्कार वापस नहीं किया।’

स्वामी का विवादित बोल, रघुराम राजन को बताया कांग्रेसी एजेंट

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राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी एक बार फिर से अपने विवादित बयान की वजह से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। स्वामी ने ट्वीट कर रघुराम राजन पर फिर से निशाना साधा है। अपने ट्वीट में उन्होंने राजन को कंग्रेसी एजेंट बताया है। उन्होंने कहा कि राजन का फैसला उनके आरोप को सिद्ध भी करता है।

ये भी पढ़ें… ‘प्रधानमंत्री जी सब जानते हैं उन्हें रघुराम राजन की ज़रूरत नहीं है।’

उन्होंने आरबीआई गवर्नर के उस फैसले पर टिप्पणी कहा कि, राजन ने कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद फिर से शिक्षा के क्षेत्र में लौट जाए। स्वामी ने कहा, ‘बीजेपी के सरकार में आने के बाद से ही राजन कांग्रेस के एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे और उनका यह फैसला मेरे इश शक को सही साबित करता है।’

ये भी पढ़ें… ‘महंगाई पर प्रधानमंत्री को ना घेरें, खाएं पतली दाल।’ : बाबा रामदेव

तो अब चेतन भगत होंगे RBI गवर्नर !!!

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मंत्रालयों एवं विभिन्न सरकारी विभागों में की जा रही नियुक्तियों पर घमासान मैच हुआ है। इसी विवाद में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता द्वारा चेतन भगत का नाम लिए जाने से एक नया विवाद शुरू हो गया है। इस पर चेतन भगत ने प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि, बतौर गवर्नर वो बाकी लोगों से बेहतर काम करेंगे।

AAP के प्रवक्‍ता राघव चड्ढा ने सरकारी पदों पर हो रही नियुक्तियों पर हमला करते हुए कहा था कि पार्टी द्वारा भगत को आरबीआई गवर्नर, अनुपम खेर को इसरो चीफ और एकनाथ खडसे को एनआईए चीफ बना देना चाहिए।

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ये भी पढ़ें…शिक्षण संस्थानों का होगा भगवाकरण: भाजपा सांसद आर. एस. कठेरिया

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आम आदमी पार्टी के नेताओं पर पलटवार करते हुए चेतन भगत ने कहा कि उन्‍हें अपनी पिछली नौकरी की वजह से अर्थव्‍यवस्‍था और मौद्रिक नीतियों की उनसे ज्‍यादा समझ है।

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कैराना मामले पर योगी आदित्यनाथ ने उगला ज़हर, कहा ’60 फीसदी आबादी हुई है कम।’

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मिस्र के राष्ट्रपति मुर्सी सहित 11 लोगों को खुफिया सूचनाओं को लीक करने के आरोप में आजीवन कारावास की सज़ा

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Mohammad Morsi, Former President of Egypt

काहिरा की एक अदालत ने मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को ख़ुफ़िया सूचनाओं को लीक करने और जासूसी के आरोप में शनिवार को आजीवन कारवास की सजा सुनाई। मुर्सी और अलजजीरा के दो पत्रकारों सहित 11 लोगों पर जासूसी का आरोप है।

मुर्सी को काहिरा की अदालत ने 15 साल जेल की सजा सुनाई। अदालत ने सात मई को सुनाए गए एक फैसले की भी पुष्टि कर दी, जिसमें छह को मौत की सजा सुनाई गई थी। अदालत को प्रारंभिक फैसले के बाद मिस्र के ग्रैंड मुफ्ती शावकी आलम से सजा पर सलाह लेनी थी, जो देश में सबसे बड़े धार्मिक नेता हैं।

मिस्र के कानून के मुताबिक, मौत की सजा पर मुफ्ती के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। अदालत उनकी राय से बंधा हुआ नहीं है, लेकिन उनका आदर करता है। जिन लोगों को मौत की सजा दी गई है, उनमें अल जजीरा चैनल के पूर्व समाचार निदेशक इब्राहिम हेलाल भी शामिल हैं। वे मिस्र में नहीं हैं और उनकी अनुपस्थिति में यह फैसला सुनाया गया है।

इसके अलावा, मौत की सजा पाने वालों में राजनीतिक कार्यकर्ता अहमद अफीफी, फ्लाइट अटेंडेंट मोहम्मद किलानी तथा शिक्षाविद् अहमद इस्माइल हैं, जो हिरासत में हैं। फैसले के खिलाफ मिस्र की अपीली अदालत में अपील की जा सकती है।