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अरविंद केजरीवाल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, पढ़ें क्या है मामला।

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असम की स्थानीय अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का जमानती वारंट जारी किया है. पिछली सुनवाई में अदालत में केजरीवाल के हाजिर न होने के बाद कोर्ट ने ये वारंट जारी किया है. आपराधिक मानहानि के एक मामले में पेशी के लिए और समय की मांग की केजरीवाल की अर्ज़ी को अदालत ने खारिज कर दिया. केजरीवाल ने दिल्ली में एमसीडी चुनाव की व्यस्तताओं का हवाला देते हुए पेशी के लिए और समय की मांग की थी. प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर टिप्पणी के मामले में केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया था.
उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को लिखी चिट्ठी के जरिये प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए और आयोग से पीएम की शिक्षा से जुड़ी जानकारी सावर्जनिक करने की मांग की थी.
गौरतलब है कि इन दिनों अरविंद केजरीवाल दिल्ली के एमसीडी चुनावों में व्यस्त हैं. वह लगातार ईवीएम में छेड़छोड़ का मुद्दा उठा रहे हैं. उनकी मांग है कि ईवीएम की जगह बैलेट पेपर के जरिए चुनाव हो. अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को ही आरोप लगाया कि चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बन चुका है जो किसी भी कीमत पर दुर्योधन को जितवाना चाहता है. एमसीडी चुनाव में भी राजस्थान से मशीनें मंगवाई जा रही हैं, जबकि दिल्ली में 15 हजार मशीनें उपलब्ध हैं. 2006 से 2013 तक की मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा, बहाने बनाकर 2006 से पहले की मशीन का इस्तेमाल हो रहा है.

सरकार की लापरवाही की वजह से लीक हुई आपकी गोपनीय जानकारी।

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अगर आपका नाम, पता, आधार कार्ड नंबर, डेट ऑफ बर्थ और अकाउंट नंबर कोई जान ले, वो भी एक गूगल सर्च के जरिए. हैरानी की बात है, लेकिन ऐसा हो रहा है. देश के हजारों नागरिकों की ये पर्सनल जानकारियां गूगल पर आसानी से उपलब्ध हैं और वो भी सरकारी वेबसाइट के जरिए.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट से ऐसे डेटा ऐक्सेल शीट आसानी से गूगल के जरिए डाउनलोड की जा सकती है. आप इसे चूक करें या लापरवाही, लेकिन इतने नागरिकों का घर तक का पता किसी के पास भी हो सकता है.

St Hill नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस ओर ध्यान आकर्षित किया है कि आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कैसे हो सकता है. या यों कहें की हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सिक्योर रखे जाने वाले इन पर्सनल जानकारियों की लिस्ट Ms. Excel शीट में गूगल के जरिए आसानी से डाउनलोड करने को उपल्बध हैं. इन डेटा में लगभग हजारों नागरिकों के पैन कार्ड नंबर, जाती और धर्म की जानकारियां आसानी से मिल जाएगी.

हालांकि ये डेटा आधार की वेबसाइट से नहीं लीक हो रहे,बल्कि केंद्र सरकार की दूसरी वेबसाइट्स से डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं. दरअसल सरकार की कुछ स्कीम में इन डेटा की जरुरत होती है और इसकी एक्सेल शीट मेंटेन की जाती है. लेकिन ये सभी जानकारियां मंत्रालयों के लिए ही होती हैं. लेकिन ये डेटा फिलहाल आम पब्लिक के लिए डाउनलोड के लिए उपलब्ध है जो बड़े सवाल खड़ा करता है. 

क्या आधार नंबर को पब्लिक करना सही है? 
आधार ऐक्ट 2016 के मुताबिक किसी नागरिक का आधार डेटा पब्लिश नहीं किया जा सकता. यानी मंत्रालय की वेबसाइट इन डेटा को सिक्योर रखने में नाकामयाब हो रही हैं.

आधार ऐक्ट 2016 के तहत कलेक्ट किया गया कोई भी आधार नंबर या कोर बायोमैट्रिक इनफॉर्मेशन पब्लिक नहीं किया जा सकता और न ही इसे किसी पब्लिक प्लैटफॉर्म पर पोस्ट किया जा सकता है. हालांकि इसके इस्तेमाल कानून के तहत शामिल की गईं एजेंसियां और संस्थाएं कर सकती हैं.

दी वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक महीने पहले डेटा रिसर्चर श्रीनीवास कोडाली ने थर्ड पार्टी वेबसाइट के द्वारा गलती लीक किए गए 5-6 लाख लोगों के पर्सनल डेटा के बारे में बताया था. इस डेटा में आधार नंबर, नाम, कास्ट, जेंडर और फोटोज शामिल थे. 

नोटेबंदी से पहले भाजपा ने बैंक में जमा किए 1 करोड़ रूपये, सामने आया बैंक स्टेटमेंट

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Newbuzzindia: 8 नवंबर को नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान कर के देश को हैरान कर दिया। इस ऐलान के बाद दावा किया जा रहा था कि इसकी भनक किसी को भी नहीं थी। कहा गया है कि प्रधानमंत्री समेत सिर्फ 6 लोगों को इसके बारे में जानकारी थी।

लेकिन अब जो मामला सामने आया है कि इस ऐलान के कुछ घंटे पहले ही भाजपा ने खातों में भारी नकदी जमा किया गया। पश्चिम बंगाल में भाजपा के खाते में एक साथ 1 करोड़ रुपए जमा कराए जाने का मामला सामने आया है।

इस मामले में CPI-M ने सवाल उठाते हुए फैसले की गोपनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि प्रदेश भाजपा ने कोलकाता में इंडियन बैंक की चित्तरंजन एवेन्यू शाखा में अपने बैंक खाते में एक करोड़ रुपये जमा कराए थे।

सीपीएम के प्रदेश सचिव सुर्जया कांत मिश्रा ने कहा है कि यह संभव है कि भाजपा के लोगों को नोट बैन के बारे में पहले से पता था तभी उन्होंने पूरे देश में बड़ी राशि बैंकों में जमा करवा कर अपना काला धन सफेद कर लिया। जमा की गई राशि में 60 लाख रुपये एक हजार के नोट के थे और बाकी 40 लाख 500 के नोट थे।

तो वहीं सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी ट्वीट कर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बैंक स्टेटमेंट की कॉपी ट्वीट कर बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

लोकतंत्र जीता, NDTV पर लगे एक दिन के बैन को सरकार ने हटाया

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Newbuzzindia: एनडीटीवी इंडिया पर लगाया गया एक दिन का बैन हटा दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह खबर दी है। एनडीटीवी इंडिया को ठानकोट कवरेज के दौरान संवेदनशल जानकारी प्रसारित करने के लिए नौ नवंबर को ऑफ एयर रहने का आदेश दिया गया था। इस पर काफी विवाद हुआ था। पीटीआर्इ ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया के खिलाफ जारी आदेश को रोक दिया है। वहीं एएनआई के अनुसार, हाल फिलहाल नौ नवंबर के ब्‍लैक आउट आदेश को होल्‍ड पर रखा गया है। मंत्रालय इस पर विचार कर रहा है। इससे पहले सोमवार को चैनल ने बैन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

इससे पहले सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक एनडीटीवी इंडिया चैनल ने इस साल जनवरी में पठानकोट एयर बेस पर हुए आतंकी हमले की कवरेज में संवेदनशील जानकारी लीक की थी।  इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंच सकता था और आम लोगों और सुरक्षाकर्मियों की जान को खतरा पहुंच सकता था क्योंकि आतंकी भी लगातार टीवी चैनलों के संपर्क में थे। चैनल ने पठानकोट हमले के दौरान एयरबेस में रखे गोला-बारूद, एमआईजी फाइटर विमान, रॉकेट लॉन्चर, मोर्टार, हेलीकॉप्टर्स उनके फ्यूल टैंक के बारे में जानाकरी साझा की थी। ये सूचनाएं पाकर आतंकी या उनके आका हमारे सुरक्षा ठिकानों को और अधिक नुकसान पहुंचा सकते थे।

इस संबंध में चैनल को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अपने जबाव में चैनल ने इसे सब्जेक्टिव इन्टरप्रिटेशन कहा था। साथ ही कहा था कि ये जानकारी पब्लिक डोमेन में पहले से ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। जिसके बाद सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय ने 9 नवंबर को चैनल के प्रसारण पर बैन लगाने का आदेश दिया। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता का ‘‘प्रत्यक्ष उल्लंघन’’ करार दिया था। संपादकों के समूह ने मांग की कि इस आदेश को ‘‘तत्काल रद्द’’ किया जाए।

Zee Media के मालिक और भाजपा सांसद सुभाष चंद्रा ने कहा, “आजीवन प्रतिबंधित हो NDTV”

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 Newbuzzindia: Zee Media के मालिक और  भाजपा के राज्‍यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने समाचार चैनल NDTV India पर एक दिन का बैन लगाए जाने का समर्थन करते हुए ट्वीट किया कि “एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के प्रतिबंध की सजा कम है। उन्‍होंने लिखा, NDTV पर 1 दिवसीय प्रतिबन्ध नाइंसाफी है, यह सजा बहुत कम है! देश की सुरक्षा से खिलवाड़ के लिए उन पर आजीवन प्रतिबन्ध लगाना चाहिए था। मेरा तो यह भी विश्वास है की अगर NDTV न्यायालय में जाए तो उसे वहां से भी फटकार ही मिलेगी।” चंद्रा ने यूपीए शासन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जी पर प्रतिबंध की बात चली थी तो बुद्धिजीवियों ने मौन साध लिया था।”

 उन्‍होंने लिखा, “UPA काल में Zee पर प्रतिबन्ध की बात चली थी तब NDTV, बाकि तथाकथित बुद्धिजीवीयों ने मौन धारण करा था, Editors Guild भी चुप्पी साधे हुआ था। पर आज गलत को गलत कहने पर, कुछ लोग आपातकाल कह रहे है! क्या देश की सुरक्षा का कोई भी महत्त्व नहीं?”

गौरतलब कि सूचना प्रसारण मंत्रालय के पैनल ने पठानकोट हमले की कवरेज के चलते NDTV इंडिया पर एक दिन के लिए नौ नवंबर को प्रतिबंध लगाया है। सरकार के इस कदम को आपातकाल बताया जा रहा है। चैनल ने अपने बचाव में कहा है कि उसकी कवरेज सबसे संतुलित थी।
पत्रकारों की संस्‍था एडिटर्स गिल्‍ड ने भी प्रतिबंध के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए इसे गलत और राजनीतिक कदम बताया है। गिल्ड ने बैन को हटाए जाने की मांग की है। सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि हिंदी न्यूज चैनल के खिलाफ कार्रवाई ‘‘देश की सुरक्षा’’ के हित में की गयी । नायडू ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राजग सरकार मीडिया की स्वतंत्रता का बेहद सम्मान करती है और इस प्रकार के मुद्दों से केवल देश की सुरक्षा और संरक्षा प्रभावित होगी।

उत्तर प्रदेश चुनाव में एक साथ मैदान में उतरेंगी कांग्रेस- सपा!

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Newbuzzindia:  उत्तर प्रदेश के सपा परिवार में चल रहे कई दिनों से घमासान आखिर थम रहा है। अब यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए हर पार्टी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए गठबंधन की एक और दिलचस्प कोशिश शुरू हुई है। खबर है कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी अभी तक गठबंधन की बात को सिरे से नकार रही थीं, लेकिन अब इन दोनों पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ने की अटकले तेज़ हो गई हैं। मंगलवार को कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। जिसके बाद से ही ये अटकलें तेज हो गईं हैं।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए रणनीति तैयार कर रहे प्रशांत किशोर

इस मुलाकात को सपा-कांग्रेस गठबंधन की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों ही पक्षों ने बातचीत का ब्योरा नहीं दिया। कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव में रणनीति तैयार कर रहे प्रशांत किशोर अभी तक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को अकेले ही विधान सभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर रहे थे, लेकिन लगता है अब उन्हें सहयोगी दलों की ज़रूरत दिखने लगी है। यही नहीं, अभी तक समाजवादी पार्टी किसी भी गठबंधन में शामिल न होने की बात कर रही थी, लेकिन अब गठबंधन की वो ख़ुद पहल कर रही है।

शक के घेरे में भोपाल एनकाउंटर, सबूत के आभाव में रिहा होने वाले थे मारे गए युवक

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भोपाल सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी कार्यकर्ताओं को जेल से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर पुलिस ने मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया है।

इस ख़बर के देश भर में फैलने के बाद तमाम न्यूज़ पोर्टल और पत्रकारों ने सवाल खड़ा शुरू किया ही था कि इस बीच सीपीआई नेता अमीक जामेई ने सिमी कार्यकर्ताओं के एंकाउंटर को साजिश बताया है।

अमीक जामेई देश मे निर्दोष मुस्लिम युवाओ की रिहाई की तहरीक मे शामिल रहें हैं और पिछले कई महीनो से जेलों में बंद निर्दोष युवाओ से देश में मुलाक़ात करते रहें हैं।

Also Read: 13 तथ्य जो भोपाल में हुए 8 आतंकियों के एनकाउंटर को फर्जी साबित कर रहे है !

जामेई का कहना हैं कि भोपाल सेन्ट्रल जेल में कुछ कैदी अगली अदालत की तारीखों मे छूटने वाले थे क्योंकि इनके खिलाफ दर्ज मामलो में पुलिस पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई थी।

अमीक जामेई ने आगे बताया कि ‘मैं हाल में जयपुर व जोधपुर के केंद्रीय कारागार मे बंद निर्दोष युवाओ से मिलने गया था और तजर्बे के आधार पर कह सकता हूँ कि आतंक के आरोप में बंद किसी भी कैदियों की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त होती है कि बिना किसी साजिश के कोई परिंदा भी वहां पर नहीं मार सकता। उन्होंने ने कहा कि ऐसे इल्ज़ाम मे बंद क़ैदियो की बैरक पर सीसीटीवी कैमरे की नज़र होती है।

जामेई ने कहा कि इन युवाओं का नाम सिमी से जोड़कर फंसाने वाले अधिकारी बेनकाब होने वाले थें इसलिए उन्होंने खुद को बचाने के लिए पहले इन्हें गोलियों से भुना फिर गोली मारकर मुठभेड़ का नाम दे दिया।

उन्होंने ने कहा कि आला अधिकारियों के इस षड्‍यंत्र में पुलिस के एक गार्ड को भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पडा।

जामेई ने मांग किया है कि सेन्ट्रल जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज शिवराज सरकार देश के सामने रखे।

संघ पर सबसे बड़ा प्रहार, दिग्विजय ने कहा ‘संघ और सिमी के आतंकी मिल कर कराते हैं दंगा।’

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NewBuzzIndia:  कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी के आठ आतंकियों के फरार होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए  कहा कि आरएसएस और कट्टरपंथी विचारधारा के लोग मिलकर दंगे कराते हैं। सोमवार सुबह में सिमी के आठ आतंकी एक हेड कांस्टेबल की हत्या कर फरार हो गए थे। दिग्विजय सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘जिस प्रकार सिमी के लोग जेल तोड़ के भाग रहे है, यह जांच का विषय है कि इसमें मिलीभगत तो नहीं हैं।’

वहीं, मीडिया से बातचीत के पहले दिग्विजय सिंह ने ट्विटर के जरिए भी बजरंग दल पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा, ‘सिमी और बजरंग दल पर मैंने प्रतिबंध लगाने की सिफ़ारिश तत्कालीन एनडीए सरकार से की थी। उन्होंने सिमी पर तो लगा दिया बजरंग दल पर नहीं लगाया।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि दोनों मिल कर दंगे कराते हैं। खण्डवा से भी जेल तोड़ कर सिमी के लोग भागे और भोपाल की जेल से भी सिमी के लोग भागे थे।
अपने अंतिम ट्वीट में कांग्रेस महासचिव ने लिखा, सरकारी जेल से भागे हैं या किसी योजना के तहत भगाये गये हैं ? जांच का विषय होना चाहिये। दंगा फ़साद ना हो प्रशासन को नज़र रखना पड़ेगा।

तो न्यायप्रणाली को ही बंद करना चाहती है मोदी सरकार!! सुप्रीम कोर्ट ने लगाई जबर्दस्त फटकार

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NewBuzzIndia: सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम की सिफारिशों के बावजूद हाईकोर्टों में जजों की नियुक्ति नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए  प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालती कक्ष बंद हैं। क्या आप न्यायपालिका को बंद करना चाहते हैं ? आप पूरे संस्थान के काम को पूरी तरह ठप नहीं कर सकते। कोर्ट ने आगे नाराज़गी जताते हर सरकार से कहा कि आप पूरे संस्थान को काम करने से पूरी तरह से नहीं रोक सकते।

पीठ ने कहा कि ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ को अंतिम रूप नहीं दिए जाने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया ‘ठप नहीं हो सकती’। कोर्ट ने जजों की नियुक्ति से जुड़ी फाइलों को आगे बढ़ाने की धीमी रफ्तार की आलोचना करते हुए चेताया कि वह तथ्यात्मक स्थिति पता करने के लिए पीएमओ और विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिवों को तलब कर सकती है। इस पीठ में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव भी शामिल थे। अदालत इस मामले में अब 11 नवंबर को आगे सुनवाई करेगी।

जब बांग्लादेश और पाकिस्तान में ट्रिपल तलाक बैन है, तो भारत में क्यों नहीं ? : तस्लीमा नसरीन

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NewBuzzIndia: अपने नास्तिक रवैये की वजह से हमेशा विवादों में रहने वाली बांग्लादेशी साहित्यकार तस्लीमा नसरीन ने एक निजी टीवी चैनल को अपना इंटरव्यू दिया और ट्रिपल तलाक को ले कर के अपनी राय स्पष्ट की।
NDTV को दिए अपने इंटरव्यू में तस्लीमा ने कहा कि, जब बांग्लादेश और पाकिस्तान में ट्रिपल तलाक को बंद कर दिया गया है तो भारत में अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ ?

NDTV के इस tweet को तस्लीमा ने retweet किया है। उनके इस समर्थन के विरोध में एक बहुत बड़ा तबका खड़ा हो सकता है पर यह बात सोचने और समझने की है कि मुस्लिम बहुसंख्यक देशों में भी जब ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को ठंडे बस्ते में बंद कर दिया गया है, तो भारत में ये राजनीतिक मुद्दा क्यों बना पड़ा है।
उन्होंने अपने इंटरव्यू में आगे कहा कि आज पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में बैन किया गया है, हो सकता है आगे आने वाले दिनों में उन्हें बैन कर दिया जाए।

https://twitter.com/ndtv/status/788760073472348160?p=v

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