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ओवररेटेड चुनाव आयोग का औसत काम, सांप्रदायिक बहसों पर क्यों नहीं लगाता लगाम: रविश कुमार

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छत्तीसगढ़ के दूसरे चरण के मतदान में 562 मशीनों के ख़राब होने की ख़बर छपी है। जिन्हें 15-20 मिनट में बदल देने का दावा किया गया है। चुनाव से पहले मशीनों की बक़ायदा चेकिंग होती है फिर भी इस तादाद में होने वाली गड़बड़ियाँ आयोग के पेशेवर होने को संदिग्ध करती है। क्या लोगों की कमी हैं या फिर कोई अन्य बात है। जबकि छत्तीसगढ़ में गुजरात में इस्तमाल की गई अत्याधुनिक थर्ड जनरेशन का M-3 श्रेणी की मशीनें लाई गईं। एक वीडियो चल रहा है जिसमें छत्तीसगढ़ के मंत्री बूथ के भीतर जाकर अगरबत्ती दिखा रहे हैं और नारियल फोड़ रहे हैं। मतदाता सूची से लेकर ईवीएम मशीनों के मामले में चुनाव आयोग का काम बेहद औसत है।

मतदान प्रतिशत के जश्न की आड़ में चुनाव आयोग के औसत कार्यों की लोक-समीक्षा नहीं हो पाती है। तरह तरह की तरकीबें निकाल कर प्रधानमंत्री आचार संहिता के साथ धूप-छांव का खेल खेल रहे हैं और आयोग अपना मुँह बायें फेर ले रहा है। आयोग के भीतर बैठे डरपोक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि वे प्रधानमंत्री की रैली की सुविधा देख कर प्रेस कांफ्रेंस कराने के लिए नहीं बैठे हैं।

टीवी की बहसों के ज़रिए सांप्रदायिक बातों को प्लेटफ़ार्म दिये जाने पर भी आयोग सुविधाजनक चुप्पी साध लेता है। क्या आयोग का काम रैलियों पर निगरानी रखना रह गया है? खुलेआम राजनीतिक प्रवक्ता सांप्रदायिक टोन में बात कर रहे हैं। एलान कर रहे हैं। टीवी की बहसें सांप्रदायिक हो गई हैं।यह सब चुनावी राज्यों में बकायदा सेट लगाकर हो रहा है। आयोग यह सब होने दे रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। आयोग को अपनी ज़िम्मेदारियों का विस्तार करना चाहिए वरना आयुक्तों को बैठक कर इस संस्था को ही बंद कर दे।

यह एक नई चुनौती है। आख़िर आयोग ने खुद को इस चुनौती के लिए क्यों नहीं तैयार किया? क्या इसलिए कि हुज़ूर के आगे बोलती बंद हो जाती है। क्या आयोग ने न्यूज़ चैनलों के नियामक संस्थाओं से बात की, उन्हें नोटिस दिया कि चुनावी राज्यों में या उसके बाहर भी चुनाव के दौरान, टीवी की बहसों में सांप्रदायिक बातें नहीं होंगी। क्या मौजूदा आयोग को अपनी संस्था की विरासत की भी चिन्ता नहीं है? कैसे खुल कर चैनलों पर राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को खुलकर हिन्दू मुस्लिम बातें करने की छूट दी जा रही है।

यह संस्था ओवररेटेड हो गई है। इसकी जवाबदेही को नए सिरे से व्याख्यायित करने की ज़रूरत है। यही कारण है कि अब लोग चुनाव आयोग के आयुक्त का नाम भी याद नहीं रखते हैं। आयुक्तों को सोचना चाहिए कि वहां बैठकर विरासत को बड़ा कर रहे हैं या छोटा कर रहे हैं। चुनाव का तमाशा बना रखा है। चुनाव का तमाशा तो बनता ही रहा है, आयोग अपना तमाशा क्यों बना रहा है।

नोट: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार है, newbuzzindia.com का इन विचारों से सहमत होना अनिवार्य नही है।

मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होंगे मतदान,5 राज्यों में 11 दिसंबर को आ जायेंगे चुनावी नतीजे:चुनाव आयोग

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देश के चार राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा शनिवार को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हो गयी है। इसमें चुनाव आयुक्त ने कहा एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा का कार्यकाल जनवरी, 2019 में खत्म हो रहा है। अभी केवल 4 राज्यों में ही विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होगा। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में मतदान 12 नवंबर तथा दूसरे चरण के मतदान 20 नवंबर को होंगे

लाइव अपडेट्स

एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा का कार्यकाल जनवरी, 2019 में खत्म हो रहा है: चुनाव आयोग

– चारों चुनावी राज्यों में मतदान VVPAT मशीनों के जरिए करवाई जाएगी: चुनाव आयोग

– चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही आज से मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में लागू हो जाएगी आचार संहिता

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान कराने को लेकर तैयारियां पूरी हैं: चुनाव आयोग

चुनाव में कोई भी उम्मीदवार अधिकतम 28 लाख रुपया खर्च कर सकेंगे: चुनाव आयोग

चारों चुनावी राज्यों में वोटिंग के लिए नई मशीनों का इस्तेमाल होगा: चुनाव आयोग

-मिजोरम और मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होंगे :चुनाव आयोग

-छत्तीसगढ़ में पहले फेज के मतदान 12 नवंबर तथा दूसरे फेज के मतदान 20 नवंबर को होंगे :चुनाव आयोग

-राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को मतदान होंगे : चुनाव आयोग 

विधानसभा चुनाव 2018: मध्यप्रदेश का चुनावी समीकरण,इन सीटों पर आ सकती है कांग्रेस

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मध्य प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग के द्वारा इस संबंध में आज अहम घोषणा की जा सकती है। EC शनिवार शाम तक मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में चुनाव होने तय हैं, जबकि तेलंगाना में चुनाव कराए जाने की संभावना है।

मध्य प्रदेश का चुनावी समीकरण

वर्तमान में बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें है। इनमें से 230 सीटों पर ही चुनाव होते हैं और बाकी के एक सदस्य को नॉमिनेट किया जाता है।मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 166 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस के पास 57 सीटें हैं और बीएसपी के पास 4 सीटें हैं। यहां की मुख्य लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। वहीं बसपा का भी राज्य में अच्छा दबदबा है। इन तीनों मुख्य पार्टियों के अलावा इस बार के विधानसभा चुनाव में कई पार्टियां उतरने वाली हैं जिसमें सपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस जैसी पार्टियां शामिल है। वहीं इस बार एससी\एसटी एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ सपाक्स की ‘अनारक्षित समाज पार्टी’ ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

राजस्थान का चुनावी समीकरण

राजस्थान में कुल 200 सीटें हैं। जिसमें सरकार 161 सीट पर काबिज है। इस में 160 सीट भाजपा के ही पास है और एक एनपीपी के पास है। विपक्ष के पास कुल 36 सीट हैं जिसमें कांग्रेस 25, बीएसपी 2 एनयूजेडपी 2 और निर्दलीय 7 सीट हैं। जबकि तीन सीट अभी खाली है। इस विस चुनाव में भी सीधे तौर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। जबकि इन दोनों के अलावा कई क्षेत्रीय पार्टियां भी अपनी किस्मत आजमाने जा रही है।

छत्तीसगढ़ का चुनावी समीकरण

छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं और एक नॉमिनेटेड सीट है। पिछले चुनाव यानि की 2013 के विस चुनाव परिणाम के मुताबिक बीजेपी के पास 49 सीट, कांग्रेस को 39, बीएसपी को 1 और अन्य को एक सीट मिली थी। यहां भी मुख्य रूप से लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच की है। इन दोनों के अलावा कांग्रेस नेता और पूर्व में सीएम रह चुके अजीत जोगी ने जनता कांग्रेस-जोगी के नाम से पार्टी बनाई है और वे बीएसपी के साथ गठबंधन में चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।

मिजोरम का चुनावी समीकरण

पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में कुल 40 विधानसभा सीटें हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। कुल 40 में से 34 सीटों पर जीत कर यहां कांग्रेस की सरकार बनी थी। बाकी के सीटों में एमएनएफ को 5 और और एमपीसी को 1 सीट मिली थी। इस बार यहां जीत हासिल करने के लिए बीजेपी भी जोर लगा रही है।

तेलंगाना की चुनावी समीकरण

तेलंगाना में कुल 119 विधानसभा सीटें हैं। यहां पिछली बार 2014 में लोकसभा चुनाव के साथ ही यहां चुनाव कराए गए थे। उस दौरान केसीआर की पार्टी टीआरएस को 90 सीटें मिली थी। इसके अलावा कांग्रेस को 13, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को 7, बीजेपी को 5 और सीपीआईएम को 1 सीट मिली थी। इस बार भी इन्हीं पार्टियों के बीच मुकाबला है।

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा अब कुछ ही देर में,राहुल गाँधी कर रहे हैं सभा

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की भी आज घोषणा हो सकती है। चुनाव आयोग ने इसकी पूरी तैयारियां भी कर ली हैं। चुनाव आयोग आज दोपहर तीन बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला है जिसमें इन राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो सकती है। पहले यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 12:30 बजे होनी थी, लेकिन किसी कारणवश अब यह प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन बजे रखी गई है। आयोग अलग-अलग चरणों में यह चुनाव करवा सकता है। आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद ही राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाएगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा पहले ही कमर कस चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शानिवार को मध्य प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में आज चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।

तेलंगाना विधानसभा चुनाव की भी हो सकती है घोषणा

मध्य प्रदेश में 2013 में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों की घोषणा 4 अक्टूबर को की गई थी। इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी आचार संहिता जल्द लागू हो सकती है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनावों की भी घोषणा की जा सकती है।

हालांकि, माना ये भी जा रहा है कि तेलंगाना में 9 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, इसलिए उसके बाद ही चुनावों के तारीखों की घोषणा की जाएगी। इसके अलावा ऐसा भी माना जा रहा है कि 12 अक्टूबर के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत मनीला दौरे पर जा रहे हैं। जब वह वहां से वापस लौटेंगे, उसके बाद ही चुनाव के तारीखों की घोषणा होगी।

कहां-कितनी सीटें?

बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 231 सीटों पर चुनाव होगा, जबकि राजस्थान में 200 सीटों पर, छत्तीसगढ़ में 91 सीटों पर, मिजोरम में 40 सीटों पर और तेलंगाना में कुल 119 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने हैं।

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