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उत्तरपुस्तिका की कॉपी न देने पर विश्वविध्यालय प्रशासन को लगी फटकार

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RTI Right to Information Act

मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने परीक्षार्थियो को उत्तरपुस्तिका की प्रति देने से इनकार करने पर विक्रम विश्वविध्यालय को कड़ी फटकार लगाई है। मामले पर नाराजगी जताते हुए आयोग ने विश्वविध्यालय के कुलपति और कुलसचिव को 10 दिसंबर को आयोग के समक्ष पेश होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और सूचा आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विश्वविध्यालय प्रशासन ने परीक्षा देने वाले छात्रों को उत्तरपुस्तिका की प्रति देने से इनकार कर दिया था। जिसकी शिकायत कई परीक्षार्थियों और पत्रकार कैलाश सनोलिया ने राज्य सूचना आयोग में की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने विश्वविध्यालय के कुलपति व कुलसचिव द्वारा कारण बताओ नोटिस जोरी किया था। जिसपर दिए गए जवाब को आयोग ने अमान्य कर दिया।

तितिक्षा शुक्ला की अपील पर पारित आदेश में सूचना आयुक्त ने कहा कि उत्तरपुस्तिका की प्रति देने के संबंध में आयोग द्वारा विश्वविध्यालय के समक्ष समूची विधिक स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है । इसके बावजूद विश्वविध्यालय ने परीक्षार्थियों को उत्तरपुस्तिका की प्रति देने से इनकार कर दिया था। जिसपर आयोग ने विश्वविध्यालय के कुलपति को फटकार लगाई और चेतावनी देते हुए कहा कि सूचा आयोग के आदेशों में उल्लेखित निर्णयों का सम्मान करें और भविष्य में किसी भी परीक्षार्थी को उसकी मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका की प्रति देने से इंकार हरगिज न करें। इसके साथ ही परिक्षार्थियों को उनकी उत्तरपुस्तिका की प्रति मुहैया कराने के लिए लोक सूचना अधिकारी को सुस्पष्ट निर्देष जारी करें और इस संबंध में कृत कार्यवाही से आयोग को जल्द से जल्द अवगत कराएं। आदेश में चेतावनी देते हुए आयोग ने कहा कि यही ऐसा नही हुआ तो विश्वविध्यालय के विरुद्ध धारा 20 (2) के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी ।

बता दें कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 22 के अनुसार अगर इस कानून को सर्वोपरि प्रभाव हासिल है। यदि कोई और कानून या प्रावधान का सूचना के अधिकार अधिनियम से टकराव होता है तो ऐसी स्तिथि में उन कानून या प्रावधान की जगह सूचना का अधिकार अधिनियम मान्य होगा। देश की सर्वोच्च अदालत ने भी एक मामले में सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, अधिनियम के प्रावधान सर्वोपरि होने के कारण परीक्षा लेने वाले संसथान अपने किसी भी नियम के कारण परीक्षार्थी को उनकी उत्तरपुस्तिका देखने से मन नही कर सकते। साथ ही अगर परीक्षार्थी उत्तरपुस्तिका की प्रति मांगता है तो उसे वो भी उपलब्ध करवाई जनि चाहिए।

मिठी गोबिन्दराम पब्लिक स्कूल में छात्रों ने सीखा कैसे मनाएं दिवाली

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Mithi Govindram Public School

भोपाल के बैरागड़ स्थित मीठी गोबिन्दराम पुब्लिस स्कूल में शनिवार को “सार्थक दीपावली कैसे मनाई जाए” विषय पर अभिप्रेरणात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के छात्रों को भावात्मक, उत्सव के उद्देश्य, प्रदूषण मुक्त, संवेदनशीलता के साथ दीपावली कैसे मनाएं बताया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों जैसे दया, परोपकार, कृतज्ञता, आदरभाव, देशभक्ति तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को जानने की भावना रोपित करना था। सत्र में पहली से आठवी कक्षा तक के छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सिद्ध भाऊजी मौजूद थे। उनके साथ संस्था सचिव श्री ए.सी. साधवानी, संस्था सदस्य मनोहर वासवानी, विद्यालय कार्डिनेटर्स, शिक्षक-शिक्षिकाएँ और छात्र उपस्थित रहे। सिद्ध भाऊजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “शिक्षा अर्जन के साथ-साथ हमारे लिए मानवीय जीवन मूल्यों एवं श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त भी होना चाहिए।

संस्कारित शिक्षा द्वारा ही मानव सुयोग्य पदों पर आसीन होकर परिवार, समाज व देश को सही दशा व दिशा प्रदान कर सकता है। पाठ्येतर गतिविधियाँ इस उद्देश्य प्राप्ति में सहायक बनती है। अत: अपने माता-पिता गुरू व बड़ो के प्रति सम्मान का भाव रखते हुए अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर हो तथा आगामी परीक्षा को दृष्टिगत रखते हुए तकनीकी साधनों जैसे मोबाईल से पूर्ण रूप से दूरी बनाए और आज ही मोबाईल अपनी माँ को दे दें और परीक्षा में शतप्रतिशत अंक लाने के लिए पूर्णमनों योग से जुट जाएँ ताकि अकादमिक स्तर पर भी श्रेष्ठतम् अंक प्राप्त हो सके।”

सिद्ध भाऊजी  के उद्बोधन के बाद विद्यालय प्राचार्य डॉ. अजय कांत शर्मा जी ने छात्रों को भाऊजी के द्वारा बताई गई बातों का पालन करने और पढाई को लेकर संकल्पित होने को कहा। कार्यक्रम में शामिल हुए छात्रों ने अपने अनुभव बांटते हुए कहा कि हमने इस दिवाली घर में रंगीन चाइनिज लाइटों का प्रयोग बंद कर दिया है। इसके साथ ही हमने बाजार की बनी मिठाइयों की जगह घर पर बनी मिठाई का सेवन किया तथा जरूरत मंद लोगों को वस्त्र, मिठाई, फल प्रदान किए ताकि वे भी प्रसन्नता पूर्वक त्योहार मना सकें। प्रदूषण रोकने के लिए हमने पटाखे  भी नहीं फोड़े।

8वी और 10वी पास के लिए बैंक में निकली नौकरियां, 40,000 तक है सैलरी !

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बेरोजगारी के इस दौर में बैंक ऑफ बड़ौदा ने बहुत ही शानदार नौकरी निकाली है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 10वी और 8वी पास लोगों के लिए नौकरी पाने का सुनहरा अवसर दिया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स के पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। 

  • पदों का विववरण: स्पेशलिस्ट ऑफिसर
  • पदों की कुल संख्या: 426
  • अंतिम तिथि: 5 दिसंबर, 2017

योग्यता 

मार्केटिंग/सेल्स/रिटेल में अच्छा अनुभव और 2 साल का फुल टाइम एमबीए या समकक्ष पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री/डिप्लोमा आदि होना अनिवार्य है.

इसके एलावा 10वी 12वी पास छात्रों के लिए भी नौकरी निकली है। 

आयु सीमा। 

इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए पदों के मुताबिक अलग-अलग आयुसीमा तय की गई है. जिसमें न्यूनतम 21 साल 35 साल तक सीमा तय की गई है. अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए नोटिफिकेशन देखें.

ऐसे करें आवेदन।

आवेदन करने के लिए इच्छुक उम्मीदवार बैंक ऑफ बड़ौदा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ें। नोटिफिकेशन में आवेदन करने की पूरी जानकारी दी गई है। जिसके बाद आप अपनी योग्यता के अनुसार मौजूद पदों पर आवेदन कर सकते है। 

क्या अब स्कूल यूनिफॉर्म का रंग भी हो जाएगा भगवा! पढ़िए बड़ी खबर

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यूपी के सीएम की कुर्सी पर काबिज होने के बाद से योगी आदित्यनाथ धड़ाधड़ फैसले ले रहे हैं। यूपी के विकास के लिए योगी लगभग हर रोज अलग-अलग विभागों के अफसरों और मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे इसे लेकर वे बेहद गंभीर हैं। बीते दिनों बेसिक शिक्षा विभाग की हुई प्र‍ेजेंटेशन के दौरान कुछ ऐसा वाक्या घटित हुआ जिससे यह साफ़ है कि सीएम योगी जनता के लिए काम करना चाहते हैं।

कन्हैया ने लिखा आंबेडकर के नाम खत, साधा मोदी सरकार पर निशाना।

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कल संविधान जनक बाबा भीमराव आंबेडकर की जयंती थी, ऐसे में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार ने एक खत लिखा। उसने अपने खत में लिखा कि आपको क्रांतिकारी नीला और लाल सलाम, आपको यह खत इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि इस मौके पर मैं आपके दिल का हाल जानना चाहता हूं। मैं जानना चाहता हूं कि आपको कैसा लगता है जब कोई बातें आपकी करे और संविधान को लागू करने की बजाए मनुस्मृति को लागू करने की कोशिश करे।
इस खत में कन्हैया ने आत्म सम्मान, न्याय और समानता जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने खत में कहा कि आज समाज के लोग डर में जी रहे हैं उनसे उनकी आजदी को छीनी जा रही है। वहीं पंजाब विश्वविद्यालयों मामले को लेकर भी खत में चिंता जताई है और कहा कि फीस वृद्धि का विरोध करने पर छात्रों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज कराया जा रहा है।
कन्हैया ने खत में बाबा भीमराव आंबेडकर से शिकायत करते हुए कहा कि आपने जो इस समाज को रास्ता दिखाया था। आज समाज उससे भटकाया जा रहा है, लेकिन हम आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि हम आपकी बताई आजादी को हासिल करके रहेंगे।
वहीं, रोहित वेमूला को याद करते हुए कन्हैया ने खत में लिखा कि आप हमारे जैसे कई युवाओं के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं, लेकिन विश्वविद्यालयों में ऐसी परिस्थितियां पैदा की जा रहीं हैं कि जिसमें रोहित जैसे बेहद प्रतिभावान छात्रों की जीवन जीने की इच्छा तक को मार दिया जा रहा है।

गुजरात में हुआ परीक्षा में पास करवाने वाले पेन का आविष्कार!

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मार्च का महीना आते ही पता नहीं क्यों एक डर लगने लगता है। ऐसा लगता है जैसे आबोहवा में एग्जाम की खुशबू फैलने लगी हो। एग्जाम के इस मौसम को हम कई सालों तक महसूस करते हैं और ये हमारे अंदर कुछ इस तरह घर कर जाता है कि बड़े होने पर भी मौसम बदलने पर हमें अपने बचपन की याद आ जाती है।

लोग अपने बच्चों की परीक्षाओं को लेकर काफ़ी घबराए रहते हैं। बहुतों के लिए ये ज़िंदगी और मौत के सवाल जैसा होता है। कई बच्चे पूरे साल पढ़ने के बावजूद स्ट्रेस में आ जाते हैं और उनके मां-बाप भी काफ़ी परेशान दिखाई पड़ते हैं।

गुजरात से एक पम्फलेट की तस्वीर सामने आई है

 

लेकिन गुजरात में इस समस्या को दूर करने का एक नया तरीका निकाला गया है। वहां एग्जाम देने वाले बच्चों के लिए एक ऐसा पेन सेट तैयार किया गया ही जो एग्जाम को पास कराने की गारंटी देता है।

जी हां हम मज़ाक नहीं कर रहे। गुजरात से एक पम्फलेट की तस्वीर सामने आई है जिसमें इस बात काका वादा करा गया है कि अगर लोग अमुक पेन सेट ख़रीदते हैं तो उस पेन का प्रयोग करने वाला बच्चा निश्चित तौर पर पास हो जाएगा।

ये पेन गुजरात का एक मंदिर बनाता है। इस मंदिर का नाम है कष्टभंजन मंदिर और ये पंचमहल जिले में स्थित है। इस पेन सेट की कीमत मात्र 1900 रुपए है। और ये एग्जाम पास करवाने की 100% गारंटी देता है।

पूरे पैसे लौटा दिए जाएंगे

बात यहीं ख़त्म नहीं होती, इसमें ये दावा भी किया गया है कि इसके इस्तेमाल के बाद अगर बच्चा पास नहीं होता है तो पूरे पैसे लौटा दिए जाएंगे। लेकिन ये पेन आपको इतनी आसानी से नहीं मिलेगा। इसके लिए आपको अपना फ़ोन नंबर, हॉल टिकेट की फोटोकॉपी आदि डॉक्यूमेंट्स मुहैया करवाने होंगे।

ऐसा दावा किया गया है कि इस पेन को ख़ास यज्ञ करके बनाया गया है। साथ ही ये स्ट्रेस को कम करने का भी कार्य करता है।

जवाब न दें! अगर फ़ोन पर आपसे कोई कहे ये बात।

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आजकल मार्केट में लोगों को ठगने के नए-नए तरीके आ गए हैं। कोई ऑनलाइन क्लिक्स के नाम पर ठग रहा है तो कोई पुराना चिट फण्ड का सहारा ले रहा है। लोग भी इस मामले में ज़रा सी कोताही बरतते हैं और उनको भारी नुकसान झेलना पड़ता है।

लोग अब फ़ोन कर के भी आपको ठगने की फ़िराक में हैं। हम एटीएम का पिन पूछने वाले गिरोह की बात नहीं कर रहे बल्कि ये नए अपराधी आपसे ही हामी भरवा कर आपका पैसा गायब कर देने का हुनर जानते हैं। ये लोग आपसे कुछ ऐसा कहते हैं जिसका जवाब आपको बिल्कुल नहीं देना चाहिए।

आमतौर पर जब आप किसी को फ़ोन करते हैं या आपको किसी का फ़ोन आता है तो लोग कहते हैं ‘हेलो’। जिसके जवाब में सामने वाला भी हेलो कहता है। लेकिन अब ये ठग आपसे ‘हां’ कहलवाने की फ़िराक में रहते हैं। अगर कोई आपसे फ़ोन पर कहे ‘कैन यू हियर मी?’ तो इस बात का जवाब कभी मत दीजिए।

सीबीएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार आप इस सवाल के बदले जो हामी भरते हैं उसका प्रयोग कुछ लोग आपका पैसा लूटने में कर सकते हैं। इस सवाल का प्रयोग करके बहुत से लोग दूसरों को बेवकूफ बना रहे हैं। वो आपके जवाब जो कि हां में होता है को रिकॉर्ड कर लेते हैं और फिर उसका प्रयोग गलत तरह से करते हैं।

जवाब न दें

आप ऐसे वक़्त में कोई जवाब न दें। आपको फ़ोन काट देना चाहिए। ऐसा आप तब करें जब आपके पास कोई अंजान फ़ोन कॉल आए। आपकी एक हां को स्कैम करने वाले इस रूप में प्रयोग कर सकते हैं जैसे आपने किसी बात के लिए हां कहा हो। भले ही आप बाद में मना करें लेकिन ये लोग आपके रिकॉर्ड किए गए ‘हां’ के जवाब को बाद में इस्तेमाल करके बच सकते हैं।इसके अलावा अगर सामने वाला व्यक्ति आपको कोई ख़ास नंबर एंटर करने के लिए बोलता है तब भी ऐसा न करें क्योंकि इससे उनके पास आपकी कई दूसरी जानकारियां भी पहुंच सकती हैं। ऐसे फ़ोन कॉल से बचने के लिए आप अपने फ़ोन में डू नॉट डिस्टर्ब एक्टिवेट करवा सकते हैं।

कोशिश करिए कि कोई भी अंजान व्यक्ति अगर आपसे किसी तरह की कोई जानकारी मांगने की कोशिश कर रहा है तो आप खुद उससे पूछ ताछ करना शुरू कर दें। ऐसे में सामने वाला डर जाएगा और आपको जागरुक देखकर खुद बा खुद पीछे हट जाएगा।

अपनाये ये उपाय और दिन भर रहें ताजगी से भरपूर।

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सुबह उठकर तरोताजा महसूस करने के लिए हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए, ताकि पूरे दिन शारीरिक, मानसिक रूप से ऊर्जावान बनी रह सकें। अकसर सुबह नींद खुलने पर आप थोड़ा सुस्त और आलस्य महसूस करते हैं, मन करता है कि बस थोड़ी देर और सो लें, कुछ देर यूं ही आंखें मूंदें पड़े रहें। तो श्वास संबंधी व्यायाम आपकी सुस्ती को दूर भगाने में मदद करता है।

दिल्ली की फिटनेस सलाहकार मिनी थापर सुस्ती दूर करने के लिए बताती हैं कि “फेफड़ों को पूरी तरह खोलने के लिए और भरपूर ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए कुछ देर गहरी सांसें लें। फर्श पर चटाई बिछाकर या तो बिलकुल सीधे खड़े हो जाएं या फिर पालथी मारकर बैठ जाएं। गहरी सांसें लें, ताकि आपके फेफड़ों में शुद्ध वायु प्रवेश कर सके। अपनी पसलियों को फैलाएं, सांस को भीतर फेफड़ों तक खींचें, थोड़ी देर ऐसे ही रहें। अब धीरे-धीरे अपनी नाक से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को रोज सुबह पांच-दस मिनट तक दोहराएं।”

संकल्प की ताकत  


दिन की शुरुआत अगर सकारात्मक संकल्प से की जाएं तो यह आपको पूरे दिन रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा। यदि आप कार्यस्थल और घर की तमाम समस्याओं को निपटाना चाहते हैं तो मन में कुछ संकल्प जरूर लें। लगातार मस्तिष्क में ये शब्द दोहराते समय इनमें छिपा संदेश आपके अवचेतन में जाकर समा जाता है और यह प्रत्यक्ष तौर पर फायदा पहुंचाता है।
  
सुबह कुछ देर किसी पार्क में जॉगिंग जरूर करें या तेज कदमों से चलें या फिर प्रकृति के बीच थोड़ी देर बैठें। दरअसल यही वह समय होता है जब आप अपने पूरे दिन के लिए ऊर्जा ग्रहण करते हैं। अब यदि आपने कोई संकल्प लिया है तो उस पर विचार करें। जैसे, ‘मैं जैसा हूं, उसी रूप में खुद से प्यार करता हूं’, ‘मैं ऑफिस में बॉस या सहकर्मियों के साथ बेहतर और खुशगवार संबंध रख सकता हूं’, ‘मैं दूध वाले या महरी से रोज की चिकचिक को आसानी से सुलझा सकता हूं’ या फिर ‘बच्चों की पढ़ाई-कैरियर को लेकर हमेशा बने रहने वाले तनाव को खत्म कर सकता हूं..।’
   
इन बातों को अवचेतन में दोहराते रहें, ठीक वैसे ही जैसे हम बच्चों से मुहावरे या कविता की पंक्तियां दोहराने को कहते हैं। जब भी कोई नकारात्मक विचार या सवाल जेहन में उठने को हो, अपने संकल्पों को दोहराएं।

दोपहर की थकान को बदलें चुस्ती में

दोपहर का समय वह होता है जब आपका ऊर्जा स्तर गिरने लगता है और खुद को दोबारा से ऊर्जावान बनाना जरूरी होता है। मिनी कहती हैं कि दोपहर के समय आप दस मिनट अपनी सभी अवांछित फाइल्स, कार्यक्रम, चिट्ठी-फोन और ईमेल निपटाने के बारे में सोचें। एक बार जरूरी कार्य निपट जाएं तो थोड़ा सुस्ता लें। कोई सुगंधित ऑयल लेकर माथे पर लगा लें, इससे आपको राहत महसूस होगी।

यूकेलिप्टस, लेमनग्रास या रोजमेरी के सुगंधित ऑयल की चार बूंद किसी छोटी सी बोतल में लें। इसमें आधा पानी भरकर आसपास इसका छिड़काव करें। घड़ी की दिशा के अनुसार अपने चारों ओर स्प्रे करें, कोने में, डेस्क या कंप्यूटर के आसपास भी स्प्रे कर सकते हैं।

काम के दबाव से बचने के लिए


मिनी थापर बताती हैं कि डेस्क या टेबिल पर कोहनी टिकाकर बैठें, हाथों को सीने के सामने से लाते हुए हथेलियों को गालों के ऊपर से लाते हुए  अपनी आंखें बंद करें। यदि आप घर में हैं तो लेटकर भी यह प्रक्रिया दोहरा सकते हैं, लेकिन अपने घुटनों को मोड़ लें। 

दोनों हथेलियों को तब तक साथ रगड़ें जब तक कि वे गर्म न हो जाएं और फिर उन्हें बंद आंखों के ऊपर रखें। गहरी सांसें भरें, इस तरह कि बंद आंखों के अंधेरे को महसूस कर सकें, थकी आंखों पर हथेलियों की गर्माहट का अनुभव करें। इसे महसूस करते हुए मस्तिष्क को खाली कर लें। गहरी सांसें लें, किसी भी समस्या और तनाव का अनुभव न होने पाए। पांच-दस मिनट तक ऐसा करें। शाम के समय भी कुछ ऐसा करें कि दिन भर की थकान मिट सके।

 

आसान क्रियाएं राहत पहुंचाएं

यदि आप दफ्तर से गर्दन और कंधे के दर्द के साथ लौटती हैं तो नियमित व्यायाम जरूरी है। ऐसा करने से मांसपेशियों के दर्द में चंद मिनटों में ही राहत मिल सकती है।
   
फर्श पर चटाई बिछाकर बैठें। गर्म तौलिए को गर्दन के चारों ओर लपेट लें। कुछ सेकंड तक ऐसे ही रहें। इस क्रिया को छह बार दोहराएं। 

तौलिए के दोनों किनारों को खींचकर पकड़ें और अपने कंधे के चारों ओर लपेटें। उंगलियों का हलका सा दबाव पिछले कंधे पर बनाए रखें। हथेलियों को इधर-उधर घुमाती रहें ताकि कंधे पर दबाव बना रहे। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद तौलिया हटा लें। इसे छह बार दोहराएं। व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर सदा स्वस्थ नहीं रह सकता, इसलिए फिट बने रहने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत होती है।

 

 

अपनाएं इन बातों को भी

फिट रहने के लिए योग-ध्यान, सुबह की सैर के साथ जरूरी है कि जो भी खाएं, शरीर की जरूरतों के हिसाब से खाएं। फिटनेस सलाहकार मिनी कहती हैं कि पाचन क्रिया सुचारु होनी चाहिए। थकान या सुस्ती होने पर लेटकर या बैठकर पीठ संबंधी व्यायाम करने से फायदा होता है। हमारा तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) मस्तिष्क से संचालित होता है, छिटपुट व्यायाम करने से दिमाग सक्रिय व सकारात्मक ढंग से सोचने लगता है, जिसका फायदा शरीर को होता है। यदि आप दिन भर कुर्सी पर बैठे रहते हैं तो अनुलोम-विलोम लाभदायक होगा। सुबह सूर्योदय से पहले खाली पेट प्राणायाम करना भी अछा होता है। कपालभारती व वज्रासन भी ठीक होता है।

QUICK BITES:

  • दिन भर तरोताजा रहने के लिए रात को पर्याप्त नींद लें।
  • हर रोज सुबह योग, व्यायाम या प्रणायाम की आदत डालें।
  • खुश रहना सीखें इससे आप हमेशा तरोताजा रहेंगे।
  • तनावमुक्ति के उपाय अपनाएं और खुश रहे





तनावमुक्ति के लिए कुछ अन्य क्रियाएं कर सकते हैं:



1. कुर्सी पर बिलकुल सीधी बैठें, आंखें बंद करें और भीतर से गहरी सांस लें। 
2. धीरे-धीरे सांस लेते हुए महसूस करें कि तपती दुपहरी में आप मैदान में बैठे हैं। आसमान साफ नीला है, लेकिन बादल का एक घना टुकड़ा सूरज को ढांप रहा है। ठीक यही दृश्य अपने शरीर के आसपास भी स्थित करके सोचें कि वहां भी कोई बादल का टुकड़ा है, जो उस चुस्ती को कम कर रहा है।  
3. देखें कि बादलों का वह घना टुकड़ा छोटा और छोटा होता जा रहा है, सूरज साफ चमकने लगा है, इसकी गर्माहट को तब तक महसूस करें जब तक कि सूरज बादल के आखिरी टुकड़े को नहीं मिटा डालता, जब तक कि शरीर में दर्द का-तनाव का-दबाव का थोड़ा सा भी अंश बचा रह जाता है। अब पूरे शरीर में सूरज की पीली ऊर्जा देने वाली रोशनी को महसूस करें। 
4. जूते-मोजे उतार लें, हरी घास पर नंगे पैर टहलें। पृथ्वी की ऊर्जा महसूस करें, ताजा हवा भीतर खींचें। हरियाली को आंखें बंद कर कल्पना में महसूस करें।  
5. पांच-दस मिनट तक घास पर टहलें, मिट्टी की सोंधी गंध को नथुनों से-फेफड़ों से खींचें।

भोपाल: एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल विश्वविद्यालय की डिग्री हुई अमान्य

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Newbuzzindia:  

ये वो वक़्त है जब देश के हर विश्वविद्यालय में एडमिशन का दौर चल रहा है। अलग अलग राज्य से विद्यार्थी बिना जानकारी एकत्रित किए कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। वे स्नातकोत्तर में प्रवेश लेने के लिए स्नातक से अलग विषयों का चयन कर रहे हैं,जिसका कोई क्रम नहीं बन रहा। अबतक ऐसे अनेकों प्रसंग बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में सामने आ चुके हैं ,जिन्हें बीयू नें फर्जी बताकर विद्यार्थियों को पीएचडी करने से रोक दिया है।

कुछ ऐसा ही प्रकरण अपर्णा सिंह के साथ हुआ जो पीजीडीसीए के बाद माखनलाल चतुर्वेदी पत्रिकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से लेटरल एंट्री के माध्यम से एमएससी के तृतीय सेमेस्टर में थी।अपनी डिग्री की पढ़ाई विवि से पूरी करने के बाद उन्होंने पीएचडी करने  के लिए बीयू में आवेदन किया था।बीयू नें छात्रा अपर्णा सिंह की एमएससी की डिग्री को अमान्य घोषित कर दिया।इस प्रकरण के बाद स्थायी समिति के निर्णय के बाद बीयू ने इस प्रकरण को यूजीसी के पास भेजा था।यूजीसी ने इस तरह की डिग्री को अमान्य घोषित किया है।

अमान्य डिग्री के इस गोरख धंधे की प्रक्रिया के बाद यूजीसी ने जबाब भेजा की छात्रा अपर्णा सिंह पीजीडीसीए और बीकॉम के बाद विद्यार्थी माखनलाल विवि से एक साल में एमएससी कर बीयू कंप्यूटर साइंस में पीएचडी करने पहुँच रहे है।यूजीसी ने अपने जवाब को छात्रा एवं विवि दोनों तक पंहुचा दिया है।इस तरह के प्रकरण बार बार देखे जा सकते है जिनसे विद्यार्थी अपने आपको डगा हुआ महसूस करते है।

यूजीसी के जवाब के बाद माखनलाल विवि ने छात्रा अपर्णा को तृतीय सेमेस्टर में प्रवेश दे दिया है,अगर इसको दूसरी नजर से देखें तो विवि की नियमावली में ऐसा कोई नियम नहीं है।उच्च शिक्षा विभाग की नियमावली 6.2 इस प्रकार के प्रवेश को अनुमति नहीं देता है।इसी वजह से बीयू और यूजीसी दोनों ने डिग्री को अमान्य करार किया था।

प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में विद्यालय व विश्वविद्यालय खुले हुए है जो इस तरह के अमान्य डिग्री को मान्य बता कर अपना बैंक अकाउंट भरते जा रहे है,जिनसे उनका तो फायदा हो रहा है मगर इस चक्कर में छात्रों का कैरियर बर्बाद हो रहा है।

सुब्रमण्यम स्वामी को है डर, कही कॉलेज मदरसों में ना तब्दील हो जाए… पढ़ें पूरी खबर

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subramanyam swami

NewBuzzIndia: 

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज में हॉस्टल फीस बढ़ाए जाने पर हो रहे विरोध में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी आ गए हैं। स्‍वामी ने सोमवार को पूछा कि क्‍या संस्‍था को एक ‘मदरसा’ में बदला जा रहा है? स्‍वामी ने बताया कि उन्‍होंने इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है। एक ट्वीट में स्‍वामी ने कहा, “मैंने एचआरडी मंत्री को एक पत्र लिखकर हिन्‍दू कॉलेज द्वारा छात्राओं से तिगुनी हॉस्‍टल फीस वसूले जाने पर आपत्ति जताई है। क्‍या संस्‍था को मदरसा बनाया जा रहा है?”

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2016-2017 से सेशन से शुरू होनी थी। हॉस्‍टल में एडमिशन के लिए जारी किए गए प्रास्‍पेक्‍टस ने छात्राओं में रोष पैदा कर दिया है। उनका आरोप है कि नियम ‘भेदभावपूर्ण’ हैं और ‘मॉरल पुलिसिंग’ के लिए बनाए गए हैं।

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हॉस्‍टल की फीस पर भी छात्राओं ने ज़बरदस्त रोष ज़ाहिर किया। हिन्‍दू कॉलेज के पुरुष विद्यार्थियों से जहां 47,000 रुपए  हॉस्‍टल चार्जेस लिए जाएंगे, वहीं लड़कियों से 82,000 रुपए से ज्‍यादा का भुगतान करने को कहा गया है। स्‍टूडेंट्स इस कथित भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

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