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कमलनाथ ने अपने कैबिनेट में शामिल किए 28 मंत्री, देखें पूरी लिस्ट

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मध्यप्रदेश के भोपाल स्तिथ राजभवन में आज प्रदेश सरकार के भावी मंत्रियों ने शपथ ली। मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपनी टीम के नाम तय करने में तगड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा है। मंत्रियों के नामों पर सहमति बनाने के लिए कमलनाथ ने सोमवार देर रात 2.00 बजे मंत्रिमंडल की सूची को अंतिम रूप दिया। कमलनाथ ने अपनी टीम में 28 मंत्री बनाए है। इस सभी मंत्रियों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया है। सूची को अंतिम रूप देने के लिए कमलनाथ ने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रदेश के नेताओं के साथ मंथन किया। इस दौरान पूर्व मुक्यमंत्री दिग्विजय सिंह और चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस मंत्रिमंडल को मिशन 2019 की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। मालवा-निमाड़ अंचल को सबसे ज्यादा 9 मंत्री मिले हैं। मध्यक्षेत्र से 6 और ग्वालियर-चंबल से 5 मंत्री बनाए जा रहे हैं।

शपथ समारोह आज 3 बजे से राजभवन में हुआ। कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सिंधिया समेत सभी इस कार्यक्रम में शामिल हुए ।

मंत्रिमंडल की पूरी लिस्ट

जेनिफर नामित विधायक : जबलपुर की जेनिफर निवाइस को एंग्लो इंडियन वर्ग में नामित विधायक नियुक्त किया जा रहा है।

1- डॉ। गोविंद सिंह- लहार से सातवीं बार निर्वाचित। पहले कांग्रेस सरकार में गृह और सहकारिता मंत्री रहे।

2- आरिफ अकील- भोपाल उत्तर से छठवीं बार जीते। अल्पसंख्यक कल्याण एवं गैस राहत एवं पुनर्वास मंत्री रह चुके हैं।

3- सज्जन सिंह वर्मा- सोनकच्छ से चौथी बार विधायक बने। नगरीय प्रशासन मंत्री रह चुके हैं। अजा का बड़ा चेहरा।

4- बाला बच्चन- राजपुर से पांचवीं बार विधायक बने। पहले खेल एवं युवा कल्याण और स्वास्थ्य मंत्री रहे।

5- विजयलक्ष्मी साधौ – महेश्वर से तीन बार विधायक रहीं। एक बार राज्यसभा सदस्य और मंत्री रहीं।

6- हुकुम सिंह कराड़ा- शाजापुर से पांचवीं बार के विधायक, पहले उर्जा मंत्री रहे, मालवा का बड़ा चेहरा

ये बनेंगे पहली बार मंत्री –
7- तरूण भनोट- जबलपुर पश्चिम से दूसरी बार विधायक। कमलनाथ के करीबी। ब्राह्मण चेहरा।

8- लखन घनघोरिया- जबलपुर पूर्व से दूसरी बार विधायक। कमलनाथ के करीबी। अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व।

9- ब्रजेंद्र सिंह राठौर-पृथ्वीपुर से पांचवीं बार के विधायक। दिग्विजय गुट के माने जाते हैं। बुंदेलखंड का बड़ा चेहरा।

10- लाखन सिंह यादव- भितरवार विधानसभा से लगातार चौथी बार विधायक बने। सिंधिया गुट में माने जाते हैं।

11- तुलसी सिलावट- सांवेर से चौथी बार के विधायक। मालवा का एससी चेहरा, सिंधिया गुट में माने जाते हैं।

12- गोविंद सिंह राजपूत- सुरखी से तीसरी बार के विधायक। बुंदेलखंड के युवा नेता। सिंधिया गुट में माने जाते हैं।

13- ओमकार मरकाम- डिंडौरी से लगातार तीसरी बार विधायक। आदिवासियों में अच्छी पकड़। कमलनाथ समर्थक।

14- सुखदेव पांसे-मुलताई से तीसरी बार विधायक बने। युवा चेहरा। कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं।

15- प्रभुराम चौधरी- सांची से तीसरी बार के विधायक, अनुसूचित जाति से प्रतिनिधित्व। सिंधिया समर्थक।

16- जयवद्र्धन सिंह-राधौगढ़ से लगातार दूसरी बार विधायक। दिग्विजय सिंह के पुत्र। युवा चेहरा।

17- हर्ष यादव- देवरी से दूसरी बार विधायक बने। यादव समाज का प्रतिनिधित्व। दिग्विजय समर्थक।

18- कमलेश्वर पटेल- सिंहावल से लगातार दूसरी बार विधायक। विंध्य से ओबीसी चेहरा। कमलनाथ करीबी।

19- सचिन यादव- कसरावद से दूसरी बार विधायक। दिग्गज नेता रहे सुभाष यादव के पुत्र और अरूण यादव के भाई

20- पीसी शर्मा- भोपाल दक्षिण-पश्चिम से जीते। दो बार विधायक रहे। ब्राह्मण चेहरा। दिग्विजय सिंह के करीबी।

21- सुरेंद्र सिंह बघेल- कुक्षी से दूसरी बार जीते। एसटी युवा चेहरा। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह के पुत्र। कमलनाथ समर्थक।

22- जीतू पटवारी- राउ से दूसरी बार विधायक। मालवा का तेज तर्रार चेहरा। राहुल गांधी के नजदीकी।

23- उमंग सिंघार- गंधवानी से तीसरी बार जीते। पूर्व उपमुख्यमंत्री जमुनादेवी के भतीजे। दिग्विजय के समर्थक।

24- प्रद्युम्न सिंह- ग्वालियर से दूसरी बार विधायक। मंत्री जयभान सिंह पवैया को हराया। सिंधिया समर्थक।

25- प्रदीप जायसवाल- वारासिवनी से चौथी बार विधायक। कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय जीते। कमलनाथ समर्थक।

26- महेंद्र सिसोदिया- बमौरी से दूसरी बार विधायक। ग्वालियर क्षेत्र का क्षत्रिय चेहरा। सिंधिया समर्थक।

27- इमरती देवी- डबरा से तीसरी बार विधायक। एससी का महिला चेहरा। सिंधिया गुट की मानी जाती हैं।

28- प्रियव्रत सिंह- खिलचीपुर से दूसरी बार विधायक बने। क्षत्रिय युवा चेहरा। दिग्विजय सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं।

मध्यप्रदेश में अकेले पड़ते शिवराज, अपने भी नही दे रहे साथ।

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फाइल फोटो

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते हुए तीसरा विधानसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतर रहे है। पिछले दो चुनावों की तरह इस बार भी भाजपा शिवराज भरोसे मैदान में उतर रही है। टिकट वितरण से लेकर घोषणा पत्र तक, कोई भी फैसला शिवराज सिंह की सलाह के बिना नही हो रहा। आरएसएस द्वारा 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों की टिकट काटने के सुझाव को भी शिवराज सिंह ने हासिये पर रख दिया। शिवराज सिंह चौहान की इजाजत के बिना मध्यप्रदेश भाजपा का एक पत्ता भी नही हिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को तक अपनी बहू को टिकट दिलाने के लिए मौन व्रत धारण करना पड़ गया। तो वहीं दिग्गज नेता सरताज सिंह की तो दाल ही नही गली। आलम यह है कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और अमित शाह के बेहद करीबी नेता कैलाश विजयवर्गीय को भी अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए अपनी सीट त्याग करनी पड़ गयी।

एक ओर शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में अपने आगे किसी की चलने नही दे रहे तो वहीं लोग भी अब शिवराज सिंह चौहान से दूरी बना रहे है। चुनाव में जीत हुई तो ताज शिवराज सिंह चौहान के सर पे होगा लेकिन अगर हारी तो हार का ठीकरा भी शिवराज सिंह के सर ही फोड़ा जाएगा।

लगातार 14 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद शिवराज का जादू अब मध्यप्रदेश में फीका पड़ता जा रहा है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी अब हार की सुगबुगाहट होने लगी है। यही कारण है कि गुजरात मे 34 और कर्नाटक में 21 रैली करने वाले प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश में एक दर्जन से भी कम रैली करने वाले है। मध्यप्रदेश में अभी तक आरएसएस भी सक्रिय भूमिका में नही आया है। अचार सहिंता लगने के बाद से शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा में से भी भीड़ गायब होने लगी थी। जिसके कारण मुख्यमंत्री को यह यात्रा बीच मे ही रोकनी पड़ गयी।

सरकार विरोधी लहर से पार पाना शिवराज के लिए मुश्किल

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार को 13 साल और भाजपा सरकार को लगभग 15 साल होने को है। जनता, कर्मचारी वर्ग और यहां तक कि मीडिया भी शिवराज के चेहरे से ऊब चुका है। भाजपा नेताओं के कार्यक्रम में खाली कुर्सी, स्पाक्स का चुनावी मैदान में उतरना और मीडिया में दिखाए गए सर्वे तो यही इशारा कर रहे है। प्रदेश का जो मीडिया अभी तक शिवराज गाथा गए नही थकता था, उसी मीडिया ने संबित पात्रा जैसे प्रवक्ता को होटल के रूम में बैठने को मजबूर कर दिया है।

हार का डर अब पार्टी में बैठे लोगों को भी होने लगा है। तभी कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के नेता पाला बदल रहे है। टिकट घोषित होने से पहले ही भाजपा के दो मौजूदा विधायक और खुद शिवराज सिंह चौहान के साले ने उनका साथ छोड़ कांग्रेस का हांथ थाम लिया है। भाजपा को प्रदेश की सत्ता पर बैठने वाला किसान, युवा और सवर्ण वर्ग भी अब सरकार से रूठा बैठा है।

कांग्रेस की तिकड़ी कर सकती है कमाल

2003 विधानसभा चुनाव हारने के बाद से मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के आरोप लगते आए है। भाजपा की जीत के पीछे भी कांग्रेस के नेताओं का बागी होना एक बड़ा कारण रहा है। लेकिन इस बार हालात पिछले 3 चुनावों से काफी अलग है। कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय समेत कांग्रेस के सभी नेता अब एक मंच पर आ रहे है, एक लाइन पर चल रहे है और एक ही बात बोल रहे है। टिकट बटवारे के बाद जो अंतरकलह कभी कांग्रेस में दिखाई देती थी वह अब भाजपा में दिखाई दे रही है। कांग्रेस पार्टी में दिख रही इस एकता का बड़ा श्रेय समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह को जाता है। दिग्विजय सिंह ने न सिर्फ प्रदेश भर का दौरा कर कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया बल्कि टिकट न मिलने पर नाराज कांग्रेस नेताओं को भी पार्टी के साथ लाए।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने वचन पत्र में भी अपने मित्र संजय गांधी को याद रखा है

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mp congress released manifesto for mp legislative election

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल की उपेक्षा को लेकर लगातार कांग्रेस पर किए जा रहे हमलों के बाद कांग्रेस अभी पूरी तरह से गांधी-नेहरू से बाहर तो नहीं निकल पाई है लेकिन, उसने पटेल के अलावा देवी अहिल्या बाई, स्वामी विवेकानंद, और टंटया भील जैसे नामों को भी अपनाना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी किए गए घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ता पर खास तौर पर जोर दिया गया है।


कांग्रेस  ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को वचन पत्र का नाम दिया है। इस वचन पत्र में प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने मित्र संजय गांधी को भी जगह दी है। संजय गांधी की विधवा मेनका गांधी के सास इंदिरा गांधी का घर छोड़ दिए जाने के बाद कांगे्रस ने भी संजय गांधी का नाम लेना बंद कर दिया था। वचन पत्र में विधानसभा की कार्यवाही को हंगामे से बचाने के लिए कार्यबाधित होने पर सदस्यों को उस दिन का भत्ता न देने प्रावधान लागू करने की घोषणा की गई है। जनता भी विधानसभा में मंत्रियों से सीधे सवाल पूछ सके,इसके लिए जनता प्रहर शुरू करने का एलान किया गया है।

किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज ही माफ होंगे

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के शिवाजी नगर स्थित कार्यालय में चुनाव का वचन पत्र जारी करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता मौजूद थे। चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस वचन पत्र पर कहा कि इसमें दर्ज एक-एक अक्षर घोषणा नहीं है, कांग्रेस का वचन है। हर वचन को सरकार बनने के बाद समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। वचन पत्र में कांग्रेस ने किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज माफ करने का वादा किया है। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश भर में घूम-घूमकर अपनी सभाओं में किसानों का पूरा कर्जा दस दिन में माफ करने की बात कह रहे हैं। राहुल गांधी की इस मंशा के अनुरूप ही छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफी की कोई सीमा निर्धारित नहीं की है। दस दिन का वादा भी किया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के वचन पत्र में दस दिन की समय-सीमा का उल्लेख भी नहीं किया गया है। यद्यपि उस कर्ज को भी माफ करने का वचन कांग्रेस ने दिया है, जो कालातीत हो चुका है। किसानों का बिजली का बिल आधा किए जाने के लिए दस हॉर्सपावर की सीमा निर्धारित की गई है। लगभग डेढ़ दर्जन फसलों के अलावा दूध पर भी पांच रूपए प्रति लीटर का बोनस दिए जाने का वचन दिया गया है। किसानों को फसल बीमा का लाभ ग्रामसभा की अनुशंसा पर दिलाए जाने का वचन भी दिया गया है। राज्य कृषि विकास आयोग का गठन किए जाने का उल्लेख भी किया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि किसानोंे को उनकी उपज को मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकने दिया जाएगा।

सरकारी नौकरयों में नहीं घुस सकेंगे दूसरे राज्यों के बेरोजगार

कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में युवाओं को नौकरी न दिला पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का कोई सीधा वादा नहीं किया है। युवाओं को उद्योगों में रोजगार मिल सके इसके लिए उद्योगपतियों को वेतन अनुदान दिए जाने की योजना का एलान किया गया है। इस योजना का लाभ उन उद्योगपतियों को दिया जाएगा, जो पचास करोड़ के निवेश से नया उद्योग लगाएगें अथवा उद्योग का विस्तार कर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देंगे। सरकार रोजगार के एवज में वेतन का पच्चीस प्रतिशत अथवा दस हजार रूपए प्रतिमाह, जो भी कम उद्योगपति को देगी। सरकारी नौकरियों में राज्य के बाहर के उम्मीदवारों का चयन रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा है कि वे ही लोग शासकीय अथवा सार्वजनिक उपक्रमों में नौकरी के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने दसवीं अथवा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा मध्यप्रदेश से उत्तीण की हो। कांग्रेस ने व्यापमं को बंद कर इसके स्थान पर राज्य कर्मचारी चयन आयोग के गठन का एलान किया है। परिवार की छह लाख से कम बार्षिक आय होने पर चयन परीक्षा शुल्क से छूट देने का वादा किया गया है। अधिकतम आयु सीमा में दो साल की वृद्धि देने का भी उल्लेख वचन पत्र में है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागी रहे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी न दे पाने की स्थिति में हर माह पंद्रह हजार रूपए सम्मान निधि देने का उल्लेख भी वचन पत्र में है।

लड़कियों की पीएचड़ी तक की शिक्षा मुफ्त

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों के लिए चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं के जवाब में कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में एक लाइन में लिखा है कि कन्याओं को स्कूल से पीएचड़ी तक नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। कॉलेज जाने वाली छात्राओं को दो पहिया वाहन के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण दिलाए जाने का भी वचन दिया गया है। महिला अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ ठोस कानून बनाने की बात कही गई है। ज्ञातव्य है कि महिला अपराधों के मामले में देश में मध्यप्रदेश का पहला नंबर होने पर कांग्रेस लगातार शिवराज सिंह चौहान पर हमले कर रही है। महिला अपराधों को कांग्रेस ने चुनाव का मुद्दा भी बनाया है। कांग्रेस का वचन पत्र 75 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित है। इसमें रामपथ गमन का निर्माण और पंचायत स्तर पर गौशालाएं खोलना भी शामिल है। सपाक्स की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने सरकार में आने पर सामान्य वर्ग आयोग के गठन का भी एलान किया है। राज्य के असंतुष्ट कांग्रेस ी नेताओं को साधने के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर विधान परिषद के गठन का कार्ड खेला है। डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस सस्ता करने का वचन भी दिया गया है।

वचन पत्र में नेहरू नहीं संजय गांधी का उल्लेख है

कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस भवन में टंगी तस्वीरों में भी बदलाव देखा गया था। इंदिरा-राजीव के साथ-साथ कमलनाथ ने संजय गांधी की तस्वीर को भी कांग्रेस के दफ्तर में जगह दी है। कांग्रेस के वचन पत्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू के उल्लेख कहीं नहीं है। लेकिन, इंदिरा-राजीव के साथ संजय गांधी का उल्लेख किया गया है। संजय गांधी के नाम पर पर्यावरण मिशन शुरू करने की बात वचन पत्र में कही गई है। समग्र सामाजिक सुरक्षा परिवार कार्यक्रम को वैधानिक मान्यता हेतु राजीव गांधी स्व निराकरण सेवा नाम से अधिनियम बनाया जाएगा। राजीव गांधी स्मार्टकार्ड देने की योजना भी प्रस्तावित है। इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत सौ यूनिट तक बिजली सौ रूपए प्रतिमाह की दर पर दिए जाने की घोषणा की गई है। वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान की सरकार दो सौ रूपए प्रतिमाह की निश्चित दर पर एक हजार वॉट पर बिजली दे रही है। घोषणा पत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर किसान पुत्र स्वावलंबन योजना की घोषणा की गई है। विवेकानंद के नाम पर युवा शक्ति निर्माण मिशन शुरू करने की घोषणा है। देवी अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर लड़कियों की नि:शुल्क शिक्षा योजना शुरू की जाएगी। रानी दुर्गावती के नाम से महिला पुलिस बटालियन बनाने की घोषणा की गई है।

विधायकों ने रोकी सदन की कार्यवाही तो नहीं मिलेगा भत्ता

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सबसे महत्वपूर्ण पहल सदन को जवाबदेह बनाने की दिशा में की है। सदन की कार्यवाही बिना बाधा के चले इसके लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि विधायकों द्वारा सदन की कार्यवाही बाधित किए जाने की स्थिति में उस दिन का भत्ता सदस्यों को नहीं दिया जाएगा। देश में कहीं भी अब तक इस तरह की व्यवस्था लागू नहीं है। राज्यसभा और लोकसभा में भी कार्यवाही बाधित होने पर भी भत्ता नहीं रोका जाता। विधायकों एवं मंत्रियों को प्रतिवर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण पटल पर रखना होगा। विधानसभा में जनता सीधे मंत्रियों से सवाल पूछ सके इसके लिए जनता पहर की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की गई है। इस तरह की व्यवस्था भी देश में कहीं भी प्रचलन में नहीं है।

MP Congress Manifesto: मध्यप्रदेश कांग्रेस का घोषणा पत्र

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कृषि एवं किसान सशक्तिकरण

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, डीजल, खाद, बीज के भाव बढ़ने से लागत बढ़ी है, उस अनुपात में उपज के दाम नहीं मिले हैं। कर्ज बढ़ा है, इन तनावों के चलते आत्‍महत्‍याएं बढ़ी हैं, भाजपा सरकार का किसानों की आय कोदो गुना करने का सपना खोखला साबित हुआ है। म.प्र. में कांग्रेस सरकार बनने पर कांग्रेस पार्टी वचन देती है कि-

1.1 सभी किसानों का 2.00 लाख तक कर्जमाफ करेंगे। जिसमें सहकारी बैंक एवं राष्‍ट्रीकृत बैंकों का चालू एवं कालातीत कर्ज शामिल रहेगा।

1.2 किसानों को शून्‍य ब्‍याज योजना का वास्‍तविक लाभ देने के लिए भुगतान की नई तिथि रबी फसल हेतु 31 मई तक और खरीफ फसल हेतु 31 दिसम्‍बर रखेंगे।

1.3 स्‍वामीनाथन आयोग की स्‍थापना यूपीए सरकार के समय हुई थी उनकी सिफारिशें किसानोंके हित में थीं, लेकिन भाजपा सरकार ने नहीं माना है। हमारी कांग्रेस सरकार बनने पर किसानोंको उनकी उपज का उचित मूल्‍य दिलायेंगे। मंडियों में समर्थन मूल्‍य से नीचे फसल नहीं बिकनेदेंगे , कांग्रेस सरकार किसानों को – गेहूँ, धान, ज्‍वार, बाजरा, मक्‍का, सोयाबीन, सरसों,कपास, अरहर, मूंग, चना मसूर, उड़द, लहसुन, प्‍याज, टमाटर तथा गन्‍ने पर बोनसदेगी।

1.4 ‘’इन्दिरा किसान ज्‍योति योजना’’ इस नई योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपावर तक के कृषिप्रयोजन के लिए आधी दर पर विद्युत प्रदाय करेंगे। अंत्‍योदय परिवार को पूर्वकी भांति पूरीछू ट रहेगी।

  • 10 हॉर्सपावर तक के अस्‍थायी विद्युत कनेक्‍शन में 50 प्रतिशत की छू ट दी जायेगी तथा कृषक इसे फसल की थ्रेशिग हेतु इस्‍तेमाल कर सकेगा।
  • किसानों को 3 फ़े स की बिजली प्रतिदिन 12 घंटे देना सुनिश्चित करेंगे, जिसमें कम से कम 8 घण्‍टे दिन का समय रहेगा। 1.5 नवीन फसल बीमा योजन कांग्रेस सरकार नवीन फसल बीमा योजना लायेगी, फसल बीमा की इकाई खेत रहेगा, जो किसान स्‍वेच्‍छा से इससे पृथक रहना चाहते हैं, उन्‍हे अनुमति रहेगी। बीमा कम्‍पनियों द्वाराकिसानों को बीमा पॉलिसी एवं प्रीमियम राशि की रसीद देना सुनिश्चित किया जायेगा।
  • नई फसल आने के पूर्व फसल क्‍लेम का वितरण करायेंगे।
  • ग्रामसभा की अनुशंसा पर फसल बीमा का लाभ किसान को देंगे ।
  • फसल बीमा से वंचित किसानों की फसल नुकसानी पर मुआवजा हेतु भू-राजस्‍व परिपत्र 6-4 में संशोधन करेंगे।
  • बिना कर्ज लिये खेती करने वाले कृषक को भी फसल बीमा से जोड़ेंगे।

1.6 कृषकों का जीवन एवं स्‍वास्‍थ्‍य बीमा किया जायेगा ।

1.7 किसानों को क्रेडिट कार्ड देंगे एवं क्रेडिट कार्डकी लिमिट बढ़ाने के लिए केन्‍द्र को लिखेंगे।

1.8 भूमि अधिग्रहण एक्‍ट 2014 (UPA सरकार के समय का मूल एक्ट) को अक्षरश: लागू किया जायेगा।

1.9 किसान आंदोलन के समय किसानों पर दर्ज आपराधिक व राजनैतिक आंदोलनों में दर्ज सभी प्रकरण वापिस लिये जायेंगे।

1.10 मंदसौर गोलीकांड लाठीचार्जकांड की पुन: न्‍यायायिक जांच माननीय उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश से कराने के लिए माननीय मुख्‍य न्‍यायाधीश से अनुरोध करेंगे।

1.11 किसान को उपज का भुगतान तीन दिन के भीतर जिस तरह किसान चाहेगा उस तरह करेंगे। आयकर विभाग द्वारा नगद भुगतान की निर्धारित सीमा को इस प्रयोजन हेतु बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे।

1.12 मंडियों में इलेक्‍ट्रॉनिक धर्मकांटा लगवायेंगे।

1.13 मंडी कमेटियों का पुनर्गठन करेंगे, मंडी अधिनियम में संशोधन करेंगे तथा प्रदेश एवं देश की अन्‍य मंडियों से जोड़ेंगे ।

1.14 मण्‍डी शुल्‍कों का युक्तियुक्‍तकरण करेंगे ।

1.15 मंडियों में ग्रेडिग प्‍लांट के लिए किसानों के स्‍वसहायता समूह/ समितियों को रिक्‍त भूमि आवंटित की जायेगी।

1.16 सूचना एवं परामर्शकेन्‍द्र खोलेंगे तथा मंडियों में ठहरने एवं रियायती दर पर भोजन की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.17 राज्‍य कृ षि विकास आयोग की स्‍थापना की जायेगी।

1.18 सरदार वल्‍लभ भाई पटेल किसान पुत्र स्‍वावलंबन योजना पात्रता- कृषक परिवार के शिक्षित बेरोजगार जो स्‍नातक हैं और वह स्वयं कृषि विकास एवं विस्‍तार तथा कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, सहायक कृषि उद्योग जैसे पशुपालन, डेयरी विकास, कुक्‍कुट पालन, आदि करने के इच्‍छुक हैं, जिनकी आयु सीमा 25 से 50 वर्षहै और वे ग्रामीण क्षेत्र के मूल निवासी हैं तथा अन्‍य किसी व्‍यवसाय/नौकरी से उनकी आय नहीं है, वे पात्र होंगे। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सुविधाएं:-

  •  रियायती ब्याज दर पर 5 वर्षके लिए रूपये 1 करोड़ तक का ऋण बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।
  •  कृषि प्रयोजन के लिए विद्युत में 25 प्रतिशत की छू ट देंगे।
  • सिंचाई कर में छू ट देंगे।
  • उपज के विक्रय की स्‍वतंत्रता तथा मंडी कर से छू ट देंगे।

1.19 गुणवत्‍तायुक्‍त और प्रमाणित बीज समय पर उपलब्‍ध करायेंगे, बीज उत्‍पादन सहकारी समिति और स्‍वसहायता समूह को जोड़ेंगे।

1.20 सहायक कृषि आधारित उद्योग जैसे- पशुपालन, डेयरी विकास, कुक्‍कुट पालन, म‍त्‍स्‍य पालन, उद्यानिकी के लाभ के लिए किसानों को प्रोत्साहन देंगे, रियायती ब्याज दर पर बैंक से 5 वर्ष का ऋण उपलब्‍ध कराएंगे।

1.21 दूध उत्‍पादक कृषक को दुग्‍ध संघ के माध्‍यम से प्रति लीटर 5 रूपये बोनस देंगे। दुधारू पशुओं का बीमा/ चिकित्‍सा सुविधा नि:शुल्क करेंगे।

1.22 खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्र, सिंचाई आदि में कर/शुल्‍क की दरों बढ़ोतरी नहीं करेंगे ।

1.23 कृषि यंत्र तथा किसानी के उपयोग की वस्‍तुओं व पशुआहार पर 0 प्रतिशत जीएसटी हेतु जीएसटी काउंसिल (भारत सरकार) को अनुशंसा भेजेंगे ।

1.24 अमानक खाद, बीज तथा कीटनाशक बेचने वाले विक्रेताओं के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही के लिए कानून बनायेंगे । खाद की आपूर्ति समय पर सहकारी समितियों के माध्‍यम से करायेंगे।

1.25 मिट्टी एवं बीज परीक्षण नि:शुल्क सुविधा प्रदाय करेंगे।

1.26 मेरा खेत मेरा तालाब – ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्‍तर को बनाये रखने के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।

1.27 सिंचाई के साधन की अनुदान राशि में बढ़ोतरी करेंगे।

1.28 कृषि पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति बनाएंगे, पूंजी उपलब्‍ध करायेंगे। उद्योग विभाग के अनुदान की पात्र सूची में कृषि आधारित उद्योगों को जोड़ेंगे।

1.29 फसल की अनुकू लता के आधार पर स्‍पेशल एग्रीकल्‍चर ज़ोन स्‍थापित करेंगे। 1.30 200 से 500 हेक्टर विशेष कृषि प्रक्षेत्र विकसित किये जायेंगे, जिसमें एक ही स्‍थान पर कृषि उपकरण, सिंचाई, विद्युत, बीजोपचार, मिट्टी परीक्षण, ग्रेडिग, भण्‍डारण की सुविधा रहेगी, इन क्षेत्रों को मण्‍डी कर से मुक्‍त रखेंगे।

1.31 कृ षि भूमि की रजिस्‍ट्री में छूट’- प्रदेश के किसानों को खेती के विस्‍तार हेतु पटवारी हल्‍के में कृषि भूमि खरीदने पर स्‍टाम्‍प 6 प्रतिशत तथा कृषक महिलाओं के लिए 3 प्रतिशत स्‍टाम्‍प शुल्‍क रहेगा। इसमें शर्त यह रहेगी कि संबंधित व्‍यक्ति की प्रमुख आय खेती से हो। कृषि भूमि की रजिस्‍ट्री के आधार पर ही स्‍वत: नामांतरण एवं सीमांकन की व्‍यवस्‍था करेंगे। पारिवारिक बंटवारे के अंतर्गत स्‍टाम्‍प शुल्‍क 1 प्रतिशत की दर से पंजीकृत करने की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.32 गौशाला- प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में गौशाला खोलेंगे एवं चिन्हित क्षेत्रों में गौ अभ्‍यारण्‍य बनाएंगे, इनके संचालन एवं रख रखाव के लिये सरकार अनुदान देगी ।

  • गौशाला में गोबर खाद, कण्‍डा व गौमूत्र एवं अन्‍य वस्‍तुओं का व्‍यावसायिक स्‍तर पर उत्‍पादन करायेंगे ।
  •  मुख्‍य मार्गों पर गौवंश के संरक्षण एवं देखभाल के लिए अस्‍थायी शिविर की व्‍यवस्‍था, दुर्घटना में घायल गायों का उपचार एवं मृत गायों के अंतिम संस्‍कार की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.33 पशुओं से फसल क्षति पर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को सरलीकरण करेंगे तथा वन/ राजस्‍व विभाग को जवाबदेह बनायेंगे।

1.34 कृषकों की निजी भूमि पर छोटे-बड़े झाड़ लगे हैं जिनको काटने की अनुमति नहीं मिलती और न ही कृषक कृषि एवं अन्‍य कार्यकर पाता है, ऐसे जटिल प्रावधानों को शिथिल करेंगे।

1.35 कृषकों की कन्‍याओं के विवाहों के लिए ‘’कृषक कन्‍या विवाह सहायता योजना’’ प्रारंभ करेंगे। प्रोत्‍साहन राशि 51,000 रु. दी जायेगी। इस लाभ के लिए 2.5 एकड़ तक के खाताधारक भी पात्र होंगे।

1.36 आधुनिक कृषि उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग किसान करें, इसके लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रोत्‍साहन कार्यक्रम चलायेंगे।

1.37 आधुनिक कृषियंत्र जिनकी लागत दो लाख तक है उस पर 50 प्रतिशत अनुदान देंगे।

1.38 बंजर, बीहड़ एवं दुर्गम क्षेत्र की भूमि को कृषि योग्‍य बनाने एवं एक फसली क्षेत्र को दो फसली, दो फसली क्षेत्र को तीन फसली क्षेत्र बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलायेंगे।

1.39 जैविक कृ षि उत्‍पाद – जैविक कृषि उत्‍पाद के प्रमाणीकरण के लिए केन्‍द्र स्‍थापित करेंगे तथा जैविक उत्‍पाद की ब्रांडिग करेंगे।

  • जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणित बीज एवं विपणन हेतुविशेष पैके ज देंगे।

1.40 किसानों को आधुनिक तकनीकी के आधार पर सब्‍जी, मसाला, औषधि फसल एवं फूल उत्‍पादन आदि के लिये पॉलीहाउस एवं ग्रीनहाउस की वर्तमान योजना के साथ-साथ छोटे आकार 1 हजार से 5 हजार वर्गफीट की यूनिट भी बनायेंगे तथा रियायती ब्याज दर पर बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।

1.41 किसानों के लिए नई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना प्रारंभ करेंग, इसके अंतर्गत 1000 रु. मासिक पेंशन देंगे, जिसके अंतर्गत 60 वर्षके एवं 2.5 एकड़ से कम भूमिधारक तथा अन्य किसी स्रोतों से आय न होने वाले किसान पात्र होंगे।

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने जारी की 155 प्रत्याशियों की पहली सूची।

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madhya pradesh congress leaders including kamalnath and jyotiraditya scindia and digvijay singh

काफी इंतजार के बाद आखिर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। उम्मीदवारों की पहली सूची में 155 नामों को को शामिल किया गया है।

सूची को देखकर पता चलता है कि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को बराबरी से टिकट दिया गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने सूची जारी की है।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव: कांग्रेस की पहली सूची के प्रमुख नाम

  1. जोरा- बनवारी लाल शर्मा
  2. सुमावली- एदल कंसाना
  3. मुरैना- रघुराज सिंह कसाना
  4. दिमनी- गिरिराज दंडोतिया
  5. अंबा सुरक्षित- कमलेश जाटव
  6. अटैक- हेमंत कटारे
  7. लहार- डॉक्टर गोविंद सिं
  8. मेहगांव- ओ पी एस भदौरिया
  9. ग्वालियर ग्रामीण- मदन कुशवाहा
  10. ग्वालियर- प्रद्युमन सिंह तोमर
  11. ग्वालियर ईस्ट- मुन्नालाल गोयल
  12. भितरवार- लखन सिंह यादव
  13. डबरा सुरक्षित- श्रीमती इमरती देवी
  14. शिमला- घनश्याम सिंह
  15. भांडेर सुरक्षित- राकेश संतराम
  16. करेरा सुरक्षित- जसवंत जाटव
  17. पोहरी- सुरेश
  18. रथखेड़ा पिछोर- केपी सिंह
  19. चाचौड़ा- लक्ष्मण सिंह
  20. राघोगढ़- जयवर्धन सिंह
  21. बीना सुरक्षित- शशि कुमार कथूरिया
  22. खुरई- अरुणोदय चौबे
  23. सुर्खी- गोविंद सिंह राजपूत
  24. देवरी- हर्ष यादव
  25. नरयावली सुरक्षित- सुरेंद्र चौधरी
  26. सागर- नेवी जैन
  27. बंडा- तरवार सिंह लोधी
  28. टीकमगढ़- यादवेंद्र सिंह
  29. पृथ्वीपुर- बृजेंद्र सिंह राठौर
  30. निवाड़ी- कैप्टन सुरेंद्र सिंह यादव
  31. खरगापुर- श्रीमती चंदा सिंह गौर
  32. महाराजपुर- नीरज दीक्षित
  33. चांदला- हरिप्रसाद अनुरागी
  34. छतरपुर- आलोक चतुर्वेदी
  35. बिजावर- शंकर प्रताप सिंह बुंदेला
  36. जबेरा- प्रताप सिंह लोधी
  37. पवई- मुकेश नायक
  38. गुनौर सुरक्षित- शिवदयाल बागरी
  39. चित्रकूट- नीलांशु चतुर्वेदी
  40. रैगांव सुरक्षित- कल्पना वर्मा
  41. सतना- सिद्धार्थ कुशवाहा
  42. नागौद- यादवेंद्र सिंह
  43. अमरपाटन- राजेंद्र कुमार सिंह
  44. सिरमौर- श्रीमती अरुणा तिवारी
  45. सिमरिया- त्रियुगी नारायण शुक्ला
  46. त्योंथर- रमाशंकर पटेल
  47. मऊगंज- सुखेंद्र सिंह बन्ना
  48. देवतालाब- श्रीमती विद्यावती पटेल
  49. रीवा- अभय मिश्रा
  50. गूढ़- सुंदर लाल तिवारी
  51. चुरहट- अजय सिंह राहुल
  52. सिहावल- कमलेश्वर पटेल
  53. चितरंगी सुरक्षित- श्रीमती सरस्वती सिंह
  54. सिंगरौली- श्रीमती रेनू भवानी
  55. सुरक्षित- श्रीमती कमलेश सिंह
  56. व्यवहारी सुरक्षित- रामपाल सिंह
  57. जयसिंह नगर- ध्यान सिंह
  58. जेतपुर सुरक्षित- श्रीमती उमा धुर्वे
  59. कोतमा- सुनील शराब
  60. अनूपपुर सुरक्षित- बसु लाल सिंह
  61. पुष्पराजगढ़ सुरक्षित- फुन्दूलाल सिंह मार्को
  62. बरवाड़ा- विजय राघवेंद्र सिंह
  63. विजयराघवगढ़- पदमा शुक्ला
  64. बहोरीबंद- सौरभ सिंह सिसोदिया
  65. पाटन- नीलेश अवस्थी
  66. बरगी- संजय यादव
  67. जबलपुर कैंट- आलोक मिश्रा
  68. जबलपुर पश्चिम- तरुण भनोट
  69. सिहोरा एसटी- खिलाड़ी सिंह
  70. शाहपुरा सुरक्षित- भूपेंद्र मरावी
  71. डिंडोरी सुरक्षित- ओंकार सिंह मरकाम
  72. बिछिया सुरक्षित- नारायण सिंह पट्टा
  73. मंडला सुरक्षित- संजीव छोटे लाल उइके
  74. बैहर सुरक्षित- संजय उइके
  75. लांजी- श्रीमती हिना लिखी राम कावरे
  76. परसवाड़ा- श्रीमती मधु भगत
  77. बरघाट सुरक्षित- अर्जुन सिंह काकोडिया
  78. काकोडिया सिवनी- मोहन सिंह चंदेल
  79. केवलारी- रजनीश हरवंश सिंह
  80. लखनादोन- योगेन्द्र सिंह बाबा
  81. गोटेगांव – नर्मदा प्रसाद प्रजापति
  82. नरसिंहपुर – लाखन सिंह पटेल
  83. तैंदूखेड़ा – संजय शर्मा
  84. गाडरवाड़ा – सुनीता पटेल
  85. अमरवाड़ा- कमलेश शाह
  86. सौंसर – विजय चौरे
  87. परासिया -सोहनलाल वाल्मीकि
  88. मुलताई – सुखदेव पांसे
  89. बैतूल – निलय कुमार डागा
  90. घोड़ाडोंगरी ब्रह्माभालवी
  91. भैंसादेही – दामू सिंह सिरसाम
  92. टिमरनी – अभिजीत शाह(अंकित बाबा)
  93. हरदा – आर.के. दोगने
  94. सिवनी-मालवा -ओमप्रकाश रघुवंशी
  95. सोहागपुर- सत्यपाल पालया
  96. उदयपुरा – देवेन्द्र पटेल गदरवास
  97. भोजपुर – सुरेश पचौरी
  98. सांची – डॉ.प्रभुराम चौधरी
  99. सिलवानी- देवेन्द्र पटेल
  100. विदिशा – शशांक भार्गव
  101. बासौदा – निशंक जैन
  102. कुरवाई – सुभाष गोहट
  103. सिरोंज – अशोक त्यागी
  104. शमशाबाद- ज्योत्सना यादव
  105. बैरसिया – जय श्री हरिकरण
  106. भोपाल-उत्तर- आरिफ अकिल
  107. भोपाल-दक्षिण पीसी शर्मा
  108. आष्टा – इंजी. गोपाल सिंह
  109. इच्छावर- शैलेन्द्र पटेल
  110. सीहोर – सुरेन्द्र सिंह ठाकुर
  111. नरसिंहगढ़- गिरीश सिंह भंडारी
  112. राजगढ़ – बापू सिंह तोमर
  113. खिलचीपुर- प्रियव्रत सिंह
  114. सारंगपुर- कला मालवीय
  115. सुसनेर – महेन्द्र सिंह परिहार
  116. आगर – विपिन वानखेड़े
  117. शाजापुर – हुकुम सिंह कराडा
  118. कालापिपल- कुनाल चौधरी
  119. सोनकच्छ- सज्जन सिंह वर्मा
  120. देवास – जय सिंह ठाकुर
  121. बगाली – कमल सिंह वसकले
  122. मांधाता- नारायण सिंह पटेल
  123. हरसूद (एसटी) – सुखराम साल्वे
  124. नेपानगर (एसटी) श्रीमती सुमित्रा देवी कस्दकार
  125. बुरहानपुर – हमीदकांजी
  126. बिकनगांव (एसटी) श्रीमती झूमा सोलंकी
  127. बादवाह – सचिन बिरला
  128. महेश्वर – (एससी) से विजय लक्ष्मी साधो
  129. कसरावद – सचिन यादव
  130. भगवानपुरा (एसटी) – विजय कुमार सोलंकी
  131. सेंधवा (एसटी) – ग्यारसीलाल रावत
  132. राजपुर (एसटी) – बाला बच्चन
  133. बदवानी (एसटी) – रमेश पटेल
  134. जोबत (एसटी) – श्रीमती कलावती भूरिया
  135. झाबुआ (एसटी)- डा- विक्रांत भूरिया
  136. तान्दला (एसटी) – वीर सिंह भूरिया
  137. सरदारपुर (एसटी) -प्रताप ग्रेवाल
  138. गंधवानी (एसटी) -उमंग सेंगर
  139. कुक्षी (एसटी) -सुरेंद्र सिंह बघेल
  140. मनावर (एसटी)- हीरा अलावत
  141. धरमपुरी (एसटी)- प्राची लाल मेदा
  142. धार – श्रीमती प्रभा सिंह गौतम
  143. बदनावर – राजवर्धन सिंह
  144. इंदौर 3 -अश्वनी जोशी
  145. डा.अम्बेदकर नगर -अंतर सिंह डाबर
  146. रउ – जीतू पटवरी
  147. सांबेर (एससी) -तुलसी सिलावत
  148. नागद खाचरोद -दिलीप सिंह गुर्जर
  149. तराना (एससी) – महेश परमार
  150. घटिया (एससी)- राम लाल मालवीय
  151. बढनगर – मुरली मोरवाल
  152. रतलाम गांव (एसटी) -लक्ष्मण सिंह डिंडौर
  153. सेलाना (एसटी) -हर्ष विजय गेहलोत
  154. जौरा – केके सिंह कालूखेडा
  155. सुवसरा -हरदीप सिंह डांगलोत

मध्यप्रदेश कांग्रेस की पहली सूची

मध्यप्रदेश चुनाव : कांग्रेस की बैठक टलते ही फर्जी लिस्ट हुई वायरल

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी की दिल्ली में चल रही बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है। वहीं दूसरी ओर बैठक टलते ही सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों के नाम की एक लिस्ट वायरल होने लगी। जिसमें 150 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी ने इस लिस्ट को फर्जी बताया है और जल्द ही मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर चर्चाओं का दौर जल्द ही शुरु होगा।

150 नाम वाली फर्जी लिस्ट :

मध्यप्रदेश कांग्रेस पार्टी की मीडिया सेल की अध्यक्ष शोभा ओझा ने इस लिस्ट को फर्जी बताते हुए इसका खंडन किया है। बता दें कि इस लिस्ट में अटेर से हेमंत कटारे, रोघौगढ़ से जयवर्धन सिंह, पवई से मुकेश नायक, रीवा से कविता पांडे, गोविंदपुरा से गोविंद गोयल जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल थे।

Exclusive: दिग्विजय सिंह से झड़प की खबरों का सिंधिया ने किया खंडन

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मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की ख़बरें एक बार फिर सामने आ रही है. कल दिग्विजय सिंह की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी थी. चिट्ठी में दिग्विजय सिंह ने सोनिया गाँधी से टिकट बटवारे वो लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. हालाँकि दिग्विजय सिंह ने इस चिट्ठी पर सफाई देते हुए इस चिट्ठी को फर्जी करार दे दिया था.

मीडिया में फैली सिंधिया-दिग्विजय में झड़प की खबर

मीडिया आज सुबह-सुबह सुबह खबर आई की देर रात स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में दिग्विजय सिंह और सिंधिया के बीच झड़प हो गयी थी. टिकट बटवारे को लेकर दिग्विजय सिंह और सिंधिया राहुल गाँधी के सामने ही बहस करने लगे. प्रदेश के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच हुई इस लड़ाई के कारण राहुल गाँधी भी काफी नजर हो गए है.


सिंधिया ने किसी भी विवाद का किया खंडन

मीडिया में ख़बरें आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह से किसी भी विवाद का खंडन किया है. सिंधिया के करीबी सू्त्रों के मुताबिक कल रात स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में उनका दिग्विजय सिंह से कोई विवाद नहीं हुआ. 

Update: दिग्विजय सिंह ने भी किया किसी भी तरह के विवाद का खंडन


ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद अब दिग्विजय सिंह ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया से किसी भी तरह के विवाद का खंडन किया है। दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर अककॉउंट पर लिखा कि “मीडिया में यह गलत खबर चलाई जा रही है कि मेरे और सिंधिये जी के बीच कोई विवाद हुआ है जिसमे राहुल गांधी जी को बीच बचाव करना पड़ा। मध्यप्रदेश कांग्रेस के हम सभी नेता एक है और इस भ्रष्ट भाजपा सरकाकर को मध्यप्रदेश में हारने के लिए प्रतिबद्ध है।


https://twitter.com/digvijaya_28/status/1057991702785351681?s=19

चंबल- ग्वालियर में सिंधिया की अच्छी पकड़ के बावजूद 2013 में कांग्रेस कैसे हार गई चुनाव ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हाल ही में 2 दिन के लिए ग्वालियर-चम्बल दौरे पर आए हुए थे। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो राहुल गांधी का ये दौरा प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट करने को लेकर भी था।दरअसल ग्वालियर-चम्बल इलाके में ज्योतिरादित्य सिंधिया का पैठ माना जाता है लेकिन इसके बावजूद भी 2013 विधानसभा चुनाव में बड़े अंतर से हारना ज़हन में जरुर खटकता है कि आखिर ये कैसे हो गया ?

पैठ सिंधिया की लेकिन वोट भाजपा को

साल 2013 विधानसभा चुनाव में ग्वालियर- चम्बल की 34 सीटों में से बीजेपी को 20, कांग्रेस को 12 और बसपा को 2 सीटें मिली थ। कांग्रेस के इस हार के पीछे गुटबाजी का कारण माना जाता है। दरअसल 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष रहे कांतिलाल भूरिया सभी कोंग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में नाकाम थे, जिस तरह से आज वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वोट का बंटवारा

2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेसीनेताओं में टिकट को लेकर नोक झोक भी हार का कारण माना जाता है। दिग्विजय सिंह चुनाव से खुद को दूर रखाथा तो सिंधिया बड़े चेहरे के रूप में सामने थे। मामला ये हुआ कि दिग्विजय के क्षेत्रमें सिंधिया प्रचार करने से दूर रहे तो सिंधिया के क्षेत्र में और दूसरे नेता दूर रहे।इस वजह से कई नेताओं ने दूसरे दल में जाना उचित समझा। नतीजा चम्बल-ग्वालियर में पैठहोने के बावजूद कांग्रेस मात्र 12 सीटें ही जीत पाई।

एकजुट करने की कोशिश

2012018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश के सभी नेताओं को एकजुट करने के लिए हरसंभव प्रयास करने में जुटे हुए हैं ताकि वोट बटवारा होने से रोका जाये और 15 साल का सूखा भी ख़त्म हो. यही कारण है कि राहुल गांधी 2 दिन के लिए ग्वालियर-चम्बल दौरे पर थे। इन दो दिन के दौरे पर राहुल गांधी कई धार्मिक स्थल भी गये और रोड शो भी किए। ख़ास बात यह है कि राहुल गांधी प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को साथ लेकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इशारा साफ़ है कि इस बार राहुल गांधी किसी भी प्रकार की गुटबाजी नहीं देखना चाहते जो हार का कारण बनें।

टिकट का खेल

बहरहाल अभी यह कहना ठीक नहीं होगा कि कांग्रेस खेमे में सब कुछ ठीक ही चल रहा है। क्योंकि आने वाले दिनों में जैसे ही टिकट मिलने ना मिलने का खेल सामने आएगा एक बार फिर से 2013 जैसा माहौल देखने को मिल सकता है।

क्या नरसिंहपुर में आमने-सामने होंगे पचौरी-विवेक तन्खा

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का प्रभाव क्षेत्र माने जाने वाले नरसिंहपुर जिले में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा का दखल बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। तन्खा की पहल पर ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने रविवार को जबलपुर एवं नरसिंहपुर जिले के टिकट के दावेदार नेताओं को बुलाकर चर्चा की है। यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नरसिंहपुर सीट से तन्खा को विधानसभा का चुनाव लड़ा सकती है। तन्खा ने इस बात से इंकार किया है कि उनके पुत्र विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

तन्खा ने लड़ा था जबलपुर से लोकसभा का चुनाव

सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा ने लोकसभा का पिछला चुनाव जबलपुर से लड़ा था। वे भारतीय जनता पार्टी के राकेश सिंह के खिलाफ चुनाव हार गए थे। राकेश सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस में बने नए राजनीतिक समीकरणों में विवेक तन्खा ताकतवर रूप में उभरकर सामने आए हैं। माना यह जाता है कि कमलनाथ,ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह को एक करने में विवेक तन्खा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। विवेक तन्खा, कमलनाथ के ज्यादा करीबी माने जाते हैं।

कमलनाथ करीबियों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी माने जाते हैं। सुरेश पचौरी की सलाह पर ही कमलनाथ ने शोभा ओझा को मीडिया विभाग का अध्यक्ष और राजीव सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रशासन और संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। सुरेश पचौरी के नरसिंहपुर-होशंगाबाद संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं हमेशा ही रहतीं हैं। सुरेश पचौरी नरसिंहपुर और होशंगाबाद की राजनीति में लगातार दिलचस्पी भी दिखाते हैं।

नरसिंहपुर के किसान आंदोलन में भी सुरेश पचौरी ने मुख्यमंत्री के समक्ष किसानों की मांगे रखीं थीं। ऐसे में नरसिंहपुर जिले में टिकट के दावेदारों को विवेक तन्खा के जरिए चर्चा के लिए कमलनाथ द्वारा बुलाया जाना नए राजनीतिक समीकरणों के बनने का संकेत दे रहा है।

2019 का चुनाव जीतने के लिए मोदी कर सकते है पाकिस्तान से युद्ध: दिग्विजय सिंह

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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 का आम चुनाव जीतने के लिए पाकिस्तान के साथ जंग भी करवा सकते हैं। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। मोदी सरकार को भारत में 3 साल हो गए। इस दौरान ज्यादातर समय हालात तनावपूर्ण ही रहे।

जंग का माहौल बना रही सरकार
एक निजी आयोजन में शिरकत के लिए जोधपुर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि देश को पाकिस्तान से जंग में झोंकने के लिए माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी सरकार लोगों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रही है। इसलिए उसके पास चुनाव जीतने का दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ऐसे हालात में मोदी सरकार पाकिस्तान के साथ जंग लड़ सकती है। 2019 के चुनाव से पहले इसी तरह का माहौल बनाया जा रहा है।
मायावती ने भी दिया था ऐसा बयान
पिछले साल अगस्त में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी कुछ ऐसा ही आरोप लगाया था। आजमगढ़ में एक जनसभा के दौरान मायावती ने कहा था कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए पाकिस्तान के साथ जंग लड़ सकती है।
EVM पर सनसनीखेज बयान
दिग्विजय सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने चुनाव आयोग के इस दावे पर भी सवाल उठाए की EVM से छेड़छाड़ मुमकिन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनसे एक ऐसा शख्स मिला था, जिसने 2 करोड़ रुपये के एवज में एक विधानसभा चुनाव के नतीजे बदलने की पेशकश की थी। इससे पहले कई कांग्रेसी नेताओं के साथ बीएसपी, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी भी EVM पर सवाल उठा चुके हैं।

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