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अल्पसंख्यक अधिवेशन में बोले राहुलः डरपोक है मोदी, मेरे सामने 5 मिनट नही टिक पाएंगे

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गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के जेएलएन स्टेडियम में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अल्पसंख्यक अधिवेशन को संबोधित करते हुए आरएसएस, भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल ने सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं भाजपा को चुनौती देता हूं कि वह प्रधानमंत्री मोदी को मेरे साथ बहस के लिए एक मंच पर खड़ा करें । मैं नरेंद्र मोदी जी से 5 साल से लड़ रहा हूं। मैं उन्हें अच्छी तरीके से जान गया हूं। नरेंद्र मोदी मेरे साथ बहस में 5 मिनट टिक नहीं पाएंगे, भाग जाएंगे।

राहुल ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी डरपोक आदमी हैं, वह डरते हैं। मेरे सामने राफेल समेत किसी मुद्दे भी मुद्दे पर बहस में टिक नहीं सकते हैं। आरएसएस और उससे जुड़े लोग भी डरपोक और कायर हैं।

हमारे लाईव ब्ल़ॉग पर पढ़ें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अल्पसंख्यक अधिवेशन की सभी खबरें

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली में की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है।

बेरोजगारी के आंकड़ें दबाकर बैठी मोदी सरकार, 2 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा।

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राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद मामले पर राजनीति तेज हो गई है। बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। वरिष्ट काग्रंस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा, “सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। रिपोर्ट और इसे तैयार करने वाले आयोग का ताल्लुक भारत की जनता से है, न कि किसी राजनीतिक दल से। इसका कोई मतलब नहीं है कि सरकार इस रिपोर्ट को सिर्फ इसलिए जारी नहीं करे कि इसके तथ्य उसके मुताबिक नहीं है।’’

मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए पटेल ने कहा कि सांख्यिकी आयोग के सदस्यों के इस्तीफे से एक और संस्थान निष्क्रिय हो गया है। मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “सांख्यिकी आयोग उन प्रतिष्ठित संस्थानों की कतार में शामिल हो गया है जिनको प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने बर्बाद किया है। इनमें आरबीआई, सीबीआई, सीवीसी, सीबीडीटी, ईडी और आयकर पहले से हैं।’’

सिंघवी ने आगे कहा कि आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोग इस सरकार के दबाव में नहीं झुक सकते और न ही डेटा के साथ छेड़छाड़ का प्रयास कर सकते हैं। परंतु झुकने वाले नौकरशाहों का इस्तेमाल बदले की राजनीति के लिए हो सकता है। इनको आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोगों से सीखना चाहिए।

गौरतलब है कि सांख्यिकी आयोग के दो स्वतंत्र सदस्यों पी सी मोहनन और जे वी मीनाक्षी ने सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने के चलते इस्तीफा दे दिया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मोहनन आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे।

YuvaKrantiYatra Live: मैं जानता हूं कि नरेन्द्र मोदी जी अब आपको रात को नींद नहीं आ रही : राहुल गांधी

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युवा कांग्रेस द्वारा आयोजिय “युवा क्रांति यात्रा” में पहुंचे राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। यूथ कांग्रेस की “युवा क्रांति यात्रा” पिछले महीने महीने यानी दिसंबर, 2018 में शुरू हुई थी, जो देश के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए बुधवार को नोएडा-दिल्ली बॉर्डर से शुरू होकर आईटीओ-इंडिया गेट होते हुए संसद मार्ग से होकर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम पहुंची।

यात्रा में शामिल राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोते हुए कहा कि..

मित्रों को फायदा पहुंचाने मोदी सरकार ने किया 69381 करोड़ का टेलीकॉम घोटाला: कांग्रेस

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लोकसभा कगुणाव के नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर होता नजर आ रहा है। विपक्ष एक के बाद एक घोटाले के आरोप सरकार पर लगा रहा है। इसी सिलसिले में अब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा घोटाले के आरोप लगाया है।

खेड़ा का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने 4 साल 8 माह के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर अपने मित्रों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए सरकार को यह नुकसान पहुंचाया है। खेड़ा का दावा है कि ये सभी बातें कैग रिपोर्ट में साफ-साफ लिखी हैं। उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर के इस महा घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में कराने की मांग की है।

सोमवार को एक प्रेसवार्ता में पवन खेड़ा ने कहा, मोदी सरकार के कार्यकाल में टेलीकॉम सेक्टर के तीन बड़े घोटाले हुए हैं। ताजा घोटाला माइक्रो वेव स्पेक्ट्रम का सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट को लेकर जो नियम तय गए किए थे, सरकार ने उनका खुलेआम उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के टेंडर नीलामी प्रक्रिया के द्वारा अलॉट किए जाएं, लेकिन मोदी सरकार ने पहले आओ, पहले पाओ के तहत स्पेक्ट्रम दे दिए।

सुप्रीम के निर्देशों की सरकार ने उड़ाई धज्जियां: खेड़ा

आठ जनवरी 2018 को जारी हुई सीएजी रिपोर्ट के 125 पन्नों में स्पेक्ट्रम घोटाला देखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने टूजी मामले के संदर्भ में कहा था कि किसी भी स्पेक्ट्रम को नीलामी और बाजार की शर्तों के अनुसार ही अलॉट किया जाएगा। खेड़ा का कहना है कि मोदी सरकार ने यहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने दोस्तों को ये स्पेक्ट्रम अलॉट कर दिए। कोर्ट ने ऐसे स्पेक्ट्रम अलॉट करते वक्त रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल का ध्यान रखना जरुरी बताया था, मगर सरकार ने पुराने फार्मूले से स्पेक्ट्रम जारी कर दिए।

डिफेंस को छूट नहीं दी, मगर मित्रों को छूट :खेड़ा

पवन खेड़ा के अनुसार, 21 जनवरी 2015 को एक प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा गया था। इसमें डिफेंस के लिए ‘बैंड और इंटरेस्ट जोन’ को स्पेक्ट्रम अलॉट्मेंट में कुछ छूट दिए जाने का प्रावधान था। हैरानी की बात है कि आज तक कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी नहीं दी है। दूसरी ओर मोदी सरकार ने प्राइवेट टेलीकॉम सेक्टर से जो चार्ज लेना था, उसे छोड़ दिया। इसके चलते सरकार को 45 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ तो वहीं मोदी के दोस्तों, जिन्हें स्पेक्ट्रम मिला है, को यह अनुचित लाभ दे दिया गया।

दिल्ली से लौटे सिंधिया समर्थक विधायक, कमलनाथ के शपथग्रहण में होंगे शामिल

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को मुख्यमंत्री घोषित करने के बाद दिल्ली जाकर सिंधिया के निवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अब सिंधिया से मिलने बाद भोपाल लौट आए है. दरअसल यह विधायक दिल्ली में कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को डिप्टी सीएम या प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की मांग को लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए थे. धरने पर बैठे यह विधायक अपनी जिद पर अड़े थे और रविवार दोपहर 12 बजे तक अपनी मांग को पूरे करने की बात कर रहे थे.

वहीं मामले को बढ़ता देख खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन विधायकों को अपने निवास में अन्दर बुलाया और समझाइश दी. जिसके बाद अब यह सभी विधायक भोपाल लौट गये है और कमलनाथ शपथ समारोह में शामिल होंगे.

शनिवार का घटनाक्रम 

समाप्त नही हुआ टकराव, दिल्ली पहुंची सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सूबे का मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। खुद मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कमलनाथ के नाम की घोषणा की गयी। लेकिन कमलनाथ के शपथग्रहण के दो दिन पहले यह मामला एक बार फिर दिल्ली पहुँच गया है। दरअसल कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रदेश की राजनीती में प्रदेश अध्यक्ष जैसा कोई अहम पद दिया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नही। उपमुख्यमंत्री पद सिंधिया ने लिया नही तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी अजय सिंह, अरुण यादव और दिग्विजय सिंह तक का नाम चलने लगा। जिसके बाद सिंधिया समर्थक विधायक कमलनाथ सरकार में खुद का असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। ऐसे में यह सभी नेता कुछ विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली स्तिथ ज्योतिरादित्य सिंधिया के निवास के बाहर धरने पर बैठ गए। मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर ,शिवपुरी ,दतिया और भिंड जिले के यह विधायक सिंधिया को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। यह नेता अब यह मांग कर रहे है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।


मध्यप्रदेश से दिल्ली पहुंचे इन विधायकों का कहना है कि जनता ने सिंधिया के नाम पर वोट दिए हैं, भाजपा की कब्जे वाली सीट पर भी सिंधिया के नाम पर जनता ने कांग्रेस को जिताया है, ऐसे में जब सिंधिया को मुख्यमंत्री नही बनाया गया है तो अब हम जनता के बीच किस मुंह से जाएं। विधायकों की मांग है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए| दिल्ली में मौजूद विधायकों का कहना है कि अगर 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना है तो हमारे महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। वहीं कुछ विधायकों का तो यह भी कहना है कि सिंधिया जी को सीएम नहीं बनाया गया तो हम कमलनाथ की नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चैम्पियंस ऑफ द अर्थ’अवॉर्ड से किया सम्मानित

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ सम्मान से सम्मानित किया गया । प्रधानमंत्री को ये सम्मान राजधानी दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र में दिया गया । पीएम मोदी के अलावा ये अवॉर्ड फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो को भी दिया गया है। कुछ दिनों पहले ही संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस अवॉर्ड का ऐलान किया गया था।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों को यह सम्मान इंटरनेशनल सोलर अलायंस और पर्यावरण के मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को पर्यावरण के लिए वैश्विक समझौते करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2022 तक प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म करने की शपथ के लिए यह सम्मान दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की पैरवी के लिए अग्रणी कार्यों तथा 2022 तक एकल उपयोग वाली सभी तरह की प्लास्टिक को भारत से हटाने के संकल्प के कारण नेतृत्व श्रेणी में चुना गया है।

वार्षिक ‘‘चैम्पियंस आफ अर्थ’’ पुरस्कार सरकार, सिविल सोसाइटी एवं निजी क्षेत्र में ऐसे असाधारण नेताओं को दिया जाता है जिनके कदमों से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

घमंडी है प्रधानमंत्री मोदी, 23 मार्च से होगा अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन: अन्ना हजारे

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समाजसेवक अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला है।अन्ना हजारे ने कहा कि उन्होंने पिछले 3 साल में  प्रधानमंत्री मोदी को 30 से ज्यादा खत लिखे है और उन्होंने एक खत का भी जवाब नही दिया है। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी को अपने पद पर घमंड हो गया है। 

इससे पहले अन्ना हजारे ने घोषणा की है कि 23 मार्च से वह दिल्ली में सरकार के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत करेंगे। अन्ना हजारे ने कहा कि “यह एक इतना बड़ा आंदोलन होगा जैसा कि पहले कभी नहीं देखा गया होगा और यह सरकार को एक चेतावनी होगी।”

अन्ना हजारे ने कहा कि इस आंदोलन का मकसद वोट बटोरना नही है। जिस तरह जन लोकपाल के लिए आंदोलन किया गया था उसी तरह किसानों के लिए यह आंदोलन किया जाएगा। अन्ना ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन होगा। 

20 विधायकों की बर्खास्तगी पर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दिल्ली की जनता के नाम पत्र

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इन्होंने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया …
मेरे प्यारे दिल्लीवासी,
आज इस खुले पत्र के माध्यम से मैं आपसे सीधे बात करना चाहता हूँ। मन दुःखी है। पर निराश नहीं हूँ। क्यूँकि मुझे आप पर भरोसा है। दिल्ली के और देश के लोग मेरी आशा हैं। 
तीन साल पहले आपने 70 में से 67 विधायक चुनकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनायी थी। आज इन्होंने आपके 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया। इनका कहना है की ये 20 विधायक “लाभ के पद” पर थे। 
हमने इन 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था और इन्हें अलग अलग जिम्मेदारियाँ दी थी। जैसे एक विधायक को सरकारी स्कूलों की ज़िम्मेदारी दी। वो रोज़ सरकारी स्कूलों में जाता था, देखता था कि टीचर आए हैं, सब कुछ ठीक चल रहा है। जहाँ ज़रूरत होती थी वहाँ ऐक्शन लेता था। इसी तरह एक विधायक को सरकारी अस्पतालों की ज़िम्मेदारी दी, एक विधायक को मोहल्ला क्लीनिक की ज़िम्मेदारी दी। इस तरह 20 विधायकों को हमने अलग अलग जिम्मेदारियाँ दी। बदले में इन विधायकों को कोई सरकारी गाड़ी नहीं दी, कोई बंगला नहीं दिया, एक नया पैसा तनख़्वाह नहीं दी। कुछ भी नहीं दिया। ये सभी विधायक अपने ख़ुद के पैसे ख़र्च करके काम करते थे क्योंकि ये सब आंदोलन से आए थे और देश के लिए काम करने का जुनून था। 
जब इनको कुछ नहीं दिया तो ये “लाभ का पद” कैसे हो गया? आपके इन विधायकों ने चुनाव आयोग को कहा कि इन्हें अपनी बात कहने का मौक़ा दिया जाए। ये साबित कर देंगे कि इन्होंने कोई लाभ नहीं लिया। चुनाव आयोग ने इन्हें 23 जून को पत्र लिखकर कहा कि इन्हें सुनवाई के लिए तारीख़ दी जाएगी। उसके बाद इन्हें सुनवाई की कोई तारीख़ नहीं दी गयी और सीधे केंद्र सरकार ने आपके इन 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया, बिना सुनवाई किए, बिना इनके सबूत और गवाह देखे। 
ये तो केंद्र सरकार जनता के साथ घोर अन्याय कर रही है। आपके द्वारा चुने हुए 20 विधायकों को बिना सुनवाई के मनमाने ढंग से बर्खास्त कर दिया? 
केंद्र सरकार ऐसा पहली बार नहीं कर रही। पिछले तीन सालों में उन्होंने आपके द्वारा चुनी हुई दिल्ली सरकार को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आपके 18 विधायकों के ख़िलाफ़ झूठे मुक़दमे लगा कर गिरफ़्तार किया गया। जब कोर्ट में पेशी हुई तो कोर्ट ने सबको छोड़ दिया। कई मामलों में तो कोर्ट ने केंद्र सरकार को फ़र्ज़ी मुक़दमे लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई। फिर इन्होंने आपके CM अरविंद केजरीवाल पर CBI की रेड करवा दी लेकिन इनको कुछ नहीं मिला। फिर इन्होंने आपके विधायकों को करोड़ों रुपए देकर ख़रीदने की कोशिश की। पर आपके विधायक इतने मज़बूत निकले कि ये लोग आपके एक विधायक को भी नहीं तोड़ पाए। फिर इन्होंने केजरीवाल सरकार की 400 फ़ाइलो की जाँच के आदेश दे दिए। इनको उम्मीद थी कि इन फ़ाइलो में केजरीवाल के ख़िलाफ़ ज़रूर कुछ मिल जाएगा और ये केजरीवाल को गिरफ़्तार कर लेंगे। 6 महीने तक LG साहब के दफ़्तर में 20 अफ़सर इन फ़ाइलो की जाँच करते रहे पर इनको कुछ नहीं मिला। 
सब तरफ़ से हारकर इन्होंने अब आपके 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया। ये लोग आख़िर ये सब क्यों कर रहे हैं? ये लोग हमें इतना तंग क्यों कर रहे हैं? हमारा क़सूर क्या है? 
मैं बताता हूँ कि ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। तीन साल पहले आपने देश की सबसे ईमानदार सरकार चुनी। पिछले तीन सालों में आपकी सरकार ने ढेरों काम किए- दिल्ली में बिजली के दाम देश में सबसे कम कर दिए, तीन साल से दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ने नहीं दिए, पानी मुफ़्त कर दिया, 309 कालोनियों में पाइप बिछा कर घर घर तक पानी पहुँचाया, सरकारी स्कूलों का कायापलट किया, प्राइवट स्कूलों से बढ़ी फ़ीस वापिस दिलवाई, मोहल्ला क्लीनिक बनाए, सभी अस्पतालों में दवाई और टेस्ट मुफ़्त कर दिए, बुज़ुर्गों की पेन्शन बढ़ा दी, कई नए फ़्लाइओवर बनाए, कई नई सड़के बनवाई, कई कालोनियों में गली और नालियाँ बनवाई। आपकी ईमानदार सरकार ने इन तीन सालों में और भी ढेरों काम किए। 
अब 2 साल बचे हैं। इन दो सालों में और बहुत सारे काम करने हैं। पूरी दिल्ली में CCTV कैमरे लगाने हैं, पूरी दिल्ली में फ़्री Wi Fi देने की योजना बना ली है, सरकारी सेवाओं की डोरस्टेप डिलिवरी की योजना लागू होने जा रही है, हर महीने राशन घर घर तक पहुँचाने का इंतज़ाम कर रहे है, दिल्ली की सारी कच्ची कालोनियों में पानी, सीवर, गली और नाली बनाने का काम शुरू हो गया है। ये सब काम अगले 2 साल में करने हैं। 
ये लोग इसी बात से घबरा रहे हैं। जिस तेज़ी से केजरीवाल सरकार काम कर रही है, इन्हें उसी बात से डर लग रहा है। केजरीवाल जी अपने अच्छे कामों की वजह से दिल्ली ही नहीं, पूरे देश में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। ये केजरीवाल सरकार को काम नहीं करने देना चाहते। 
भाजपा का अपना ग्राफ़ तेज़ी से गिर रहा है। भाजपा से आज सब ग़ुस्सा हैं- दलित, किसान, व्यापारी, मज़दूर, यूथ, विद्यार्थी, अल्पसंख्यक- सब इनसे नाराज़ हैं। ये लोग केजरीवाल को काम करने से हर हाल में रोकना चाहते हैं। 
20 विधायकों को बर्खास्त करके इन्होंने दिल्ली पर चुनाव थोप दिए। अब आचार संहिता लग जाएगी और दिल्ली में सारा सरकारी काम रुक जाएगा। उसके बाद लोक सभा के चुनाव आ जाएँगे। फिर आचार संहिता लग जाएगी और फिर सारा सरकारी काम रुक जाएगा। और उसके बाद विधान सभा के चुनाव आ जाएँगे। 
तो इन 20 विधान सभाओं पर चुनाव थोप कर एक तरह से भाजपा ने अगले दो सालों तक दिल्ली में सारा विकास का काम रोक दिया। और इन 20 विधानसभाओं में चुनाव पर फ़िज़ूल में आपका पैसा व्यर्थ होगा। 
क्या ये गंदी राजनीति नहीं है? क्या दिल्ली को इस तरह चुनावों में धकेलना ठीक है? क्या दिल्ली के सारे विकास कार्यों को दो साल तक ठप करना सही है? क्या इस तरह ग़ैर संवैधानिक और ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से आपके चुने हुए विधायकों को बर्खास्त करना सही है?
मुझे आपसे ही उम्मीद है। आप ज़रूर इसका सही और असरदार जवाब देंगे। 
आपका अपना
मनीष सिसोदिया

अम्बेडकर इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एन्ड रिसर्च सेंटर में इंडस्ट्री मीट 2017 का आयोजन

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दिल्ली के अम्बेडकर इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एन्ड रिसर्च सेंटर में इंडस्ट्री मीट 2017 का आयोजन किया गया। जिसमें देश की नामी कंपनियों के डायरेक्टर्स ने शिरकत की और 

यह लोग हुए शामिल

इस दौरान आप विधायक एसके बग्गा, प्रिंसिपल प्राफेसर राजीव कपूर, सीईओ दिनेश पांडेय, डिप्टी डायरेक्टर सुमन धवन भी मौजूद रहे।

हमारा उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को रोजगार देने का है: प्रोफेसर कपूर

इस दौरान प्रोफेसर कपूर ने कहा कि हमारा उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को रोजगार देने का है, इसके लिए 40 नामी कंपनियों के साथ करार किया गया, इसके साथ ही कैंपस में IT पार्क भी बनाया जाएगा, जिसमें बड़ी कंपनियों को ऑफिस दिए जाएंगे, जिससे छात्रों को आसानी से रोज़गार मुहैया होंगे ।

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