Friday, September 24, 2021
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शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक एम्स में भर्ती, कोरोना से ठीक होने के बाद पुनः बिगड़ गई तबीयत

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक एक बार फिर दिल्ली एम्स में भर्ती किए गए हैं। उन्हें 21 अप्रैल को कोरोना संक्रमण हुआ था जिसके बाद वह अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए गए थे लेकिन कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के कारण उन्हें पुनः भर्ती किया गया है।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 15 अप्रैल को हुई बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल शामिल हुए थे उसके बाद उन्होंने गुरु नानक कराई थी जिसमें 21 अप्रैल को वह कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए थे और दिल्ली एम्स में भर्ती हो गए थे।

देसी गाय का गौमूत्र है कोरोना का इलाज : सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर

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राजधानी भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचने का नया तरीका बताया है। उन्होंने कहा है कि उकनी बताई दवा के सेवन से कोरोना कभी नहीं होगा। इसका सेवन वे रोज करती है इसलिए अभी तक उन्हें कोरोना नहीं हुआ है।

दरअसल सांसद ने जो दवा बताई है वे देसी गाय का गौमूत्र है। उन्होंने कहा कि रोज इसका सेवन करने से उन्हें आज तक कोरोना नहीं हुआ है। सांसद का दावा तक कर दिया कि प्रतिदिन गौमूत्र के सेवन से फेफड़ों में इंफेक्शन नहीं फैलता। उन्होंने अपनी जनता को सलाह दी कि रोज देसी गाय के गौमूत्र का सेवन करे इससे कोरोना नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत न पड़े इसके लिए हर व्यक्ति को पीपल, बरगद और तुलसी के पौधे लगाने चाहिए। साथ ही साथ उन्होंने भोपाल में एक करोड़ पौधे लगाने की भी घोषणा की है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस परिस्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और जनता को कहा लापरवाह

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शनिवार को कोरोना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद जनता के साथ सरकार और प्रशासन लापरवाह हो गए थे । इसी के चलते कोरोना की दूसरी लहर नुकसान की वजह बनी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने आगे कहा कि कोरोना महामारी मानवता के सामने चुनौती है । हमें गुण-दोष की चर्चा किए बिना एक टीम के रूप में काम करना चाहिए। हम एक टीम के रूप में काम करे और अपने काम को तेज करके इस चुनौती को दूर कर सकते है।

उन्होंने कहा कि हमें पॉजिटिव रहना होगा और मौजूदा परिस्थिति में खुद को कोरोना नेगेटिव रखने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। वर्तमान परिस्थितियों में बेफिजूल बयान देने से भी बचना चाहिए। यह परीक्षा का समय है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा और एक टीम की तरह कार्य करना होगा।

कोविड के वर्तमान हालात पर आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि सफलता और विफलता अंतिम नही है जारी रखने का साहस मायने रखाता है। उन्होंने आगे कहा कि हम इस परिस्थिति का सामना कर रहे है क्योंकि सरकार,प्रशासन और जनता, सभी कोविड की पहली लहर के बाद लापरवाह हो गए थे।

मोबाइल खरीदने के लिए भाई और बहन में हुआ झगड़ा, गुस्से में बहन ने लगाई बड़े तालाब में छलांग

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राजधानी भोपाल के बड़े तालाब में शनिवार की सुबह लगभग 6:15 बजे एक युवती ने छलांग लगा दी। वहीं छलांग लगाने के बाद वाकिंग कर रहे लोगों ने जब युवती को देखा तो तुरंत वीडियो बनाने लगे और उसकी हौसला अफजाई करने लगे। बता दें कि युवती ने छलांग उसके भाई कारण लगाई थी। उसका उसके भाई से झगड़ा हो गया था और उससे गुस्सा होकर उसने बड़े तालाब में छलांग लगा दी। जिसके बाद युवती के भाई ने उसे बचाने के लिए छलांग लगा दी। उसी दौरान जीवन रक्षा के गोताखोर मौके पर पहुंच गए और युवक युवती को बाहर निकाला।

बता दे कि युवती के कूदने के बाद लोग वीडियो बनाकर कई देर तक युवती का हौसला अफजाई करते रहे और उसे तैरने का तरीका भी बताते रहे। जिसके चलते की युवती डूबे ना और उसी दौरान उसके भाई ने भी छलांग लगा दी और उसे बचाया। जब तक यह सूचना गोताखोरों को मिली तब जल जीवन रक्षक के गोताखोर मौके पर पहुंच गए और फिर युवती को बचा लिया गया। वहीं थोड़ी देर बाद तुरंत पुलिस मौके पर पहुंच गई और युवती को हिरासत में ले लिया और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया जहां उसका इलाज जारी है।

बताया जा रहा है कि युवती एयरपोर्ट रोड की रहने वाली है और उसका उसी के भाई से झगड़ा हो गया था। जिसके बाद उसने आकर बड़े तलाव में करीब छलांग लगा दी। झगड़े का कारण मोबाइल बताया जा रहा है। युवती के पास कैमरे वाला मोबाइल नहीं था और वह युवती कैमरे वाले मोबाइल के लिए माता-पिता से बात कर रही थी। उसी दौरान भाई आ गया और कहा कि मैं तुझे मोबाइल दिला दूंगा। लेकिन लॉकडाउन तो खुल जाए उसके बाद मोबाइल की दुकान खुलेगी तो मैं कैमरे वाला मोबाइल दिला दूंगा। इसी बात को लेकर दोनों भाई बहन में झगड़ा हुआ और वह स्कूटी उठाकर सीधे वीआईपी रोड पहुंच गई और छलांग लगा दी। जिसके बाद उसका भाई भी पीछे-पीछे आया और उसने भी युवती को बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी।

मध्यप्रदेश के श्मशान घाटों पर लग रहा है अस्थियों का अंबार

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मध्य प्रदेश में कोरोना से हुई मृत्यु के आंकड़ों पर काफी सवाल उठाए जा रहे है। सरकारी आंकड़ा कुछ और बयान करता है वहीं श्मशान की तस्वीरें कुछ और। ऐसे में इंदौर में कोरोना से हुई मौतें भले ही प्रशासन के आंकड़ों से मेल नहीं खा रहा है। दरअसल मुक्तिधाम पर मृतकों की पड़ी अस्थियां कुछ और ही बता रही है। यहां दाह संस्कार के बाद कई मृतकों के परिजन शव जलाने के वाद अस्थियां ले जाना ही भूल गए जिसका आंकड़ा सैकड़ों में पहुंच रहा है।

बता दे कि इंदौर के पंचकुइया मुक्तिधाम में इन दिनों अस्थियों का अंबार लगा हुआ है। कहीं मृतकों के परिजनों को बीमारी का डर है तो वहीं परिवारिक विवाद के चलते अस्थियां नहीं ले जा रहे है। इसके चलते मुक्तिधाम में बने अस्ति संख्या ग्राम में सैकड़ों की संख्या में अस्थियों के फूल टांगे हुए है।

शिवनारायण भावसार ने कहा कि कई लोग अस्थियां ले जाना भूल जाते है वहीं कई परिवारिक विवाद के चलते वह सालों बाद आते है। दरअसल बीमारी के डर से भी कई लोग अस्थियां लेने नहीं आ रहे है। उनका मानना है कि बीमारी के खत्म होने के बाद ही इन अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अस्थि सभागृह में लगभग 500 से 800 मृतकों की अस्थियां रखी हुई है। उसके साथ ही वहां मौजूद अन्य लोगों का यह कहना था कि कोरोना और लॉकडाउन के बाद पूरी विधि-विधान से अस्थि विसर्जन किया जाएगा इसी कारण से यहां अस्थियां वहीं रखी हुई है।

मध्यप्रदेश में अब ये अस्पताल नहीं कर सकेंगे कोविड मरीजो का इलाज

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले 6 निजी अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अब ये अस्पताल कोविड मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे। बताया जा रहा है कि सरकार के आदेश के बाद भी आयुष्मान योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज नहीं कर रहे थे।

बता दें कि शहर का मेडिसिटी अस्पताल, शिवसागर अस्पताल, आकंक्षा अस्पताल, ट्रू केयर अस्पताल, नर्मदा अस्पताल एवं शुभम अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया था।

जिसके बाद इन अस्पतालों पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को नोटिस थमाने हुए अस्पताल का कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने की अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

भोपाल के निजी अस्पताल में कोरोना हवन

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भोपाल में कोरोना का कहर बरकरार है। ऐसे में ब्लैक फंगस ने भी तबाही मचा रखी है। बताया जा रहा है कि भोपाल में इसके चलते आधे से ज्यादा बिस्तर भर चुके है। कई अस्पतालों के कोविड वार्ड में कोरोना के साथ साथ ब्लैक फंगस का भी इलाज चल रहा है। ऐसे में भोपाल के एक निजी अस्पताल से एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। वे फोटो कोविड इमरजेंसी वार्ड की है जहां आज होम हवन किया गया था।

दरअसल वो फोटो ISBT स्तिथ पालीवाल अस्पताल की है। जहां आज इमरजेंसी वार्ड में हवन किया गया था। सूत्रों के अनुसार हवन जल्दी कोरोना को हराने के लिए आयोजित करवाया गया था। जानकरी मिली है कि अस्पताल प्रबंधन कोरोना के साथ साथ उन आत्माओ को भी शांति दिलाना चाहता है जिन्होंने अपने प्राण कोरोना के चलते दिए है।

सूत्रों से ये भी पता चला कि जब इस घटना को लेकर मरीजो के परिजनों से इस पूजा और हवन को लेकर सवाल किए तब डॉ पालीवाल ने जवाब देते हुए ये कहा कि ये हवन आप लोगों के भले के लिए ही करवाया जा रहा है। इस हवन की ताकत से जल्द से जल्द मरीज कोरोना से ठीक होने लगेंगे। इसके साथ साथ जिन लोगों की मृत्यु कोरोना से हुई है उनकी आत्मा को शांति मिले उसके लिए भी ये हवन करवाया गया है।

इजरायल के बाद अब अमेरिका में भी मास्क पहनना जरूरी नही

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संयुक राष्ट्र अमेरिका में अब कोरोना का कहर समाप्त हो चला है और वहां की स्थिति सामान्य हो रही है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने कहा है कि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों को अब मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है। सीडीसी ने आगे कहा कि यह निर्णय घर के अंदर और बाहर दोनों के लिए सही है। यह संकेत कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब महामारी से आम जीवन के तरफ तेजी से लौट रहा है।

सीडीसी के घोषणा के बाद, राष्ट्रपति जो बिडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस बिना मास्क पहने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में पत्रकारों के सामने आए। बाइडेन ने कहा कि “मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। एक महान दिन। यह सफलता हमें इतनी जल्दी टीकाकरण करने से संभव हुआ है”।

नवीनतम सीडीसी के दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए, बाइडेन ने कहा कि पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों को कोविड -19 के अनुबंध का बहुत कम जोखिम है।

राष्ट्रपति बाइडन ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘यदि आप पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुके हैं, तो आपको भीड़ भाड़ वाले स्थानों को छोड़कर अन्य स्थान पर मास्क लगाने की आवश्यकता नहीं है.’ राष्ट्रपति ने कहा कि टीकाकरण आपके और आपके आसपास के लोगों के जीवन को बचाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि 114 दिनों में 250 मिलियन वैक्सीन शॉट्स दिए गए हैं।

भोपाल में ब्लैक फंगस के कारण 2 दिन में भर चुके है आधे से ज़्यादा बेड

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भोपाल में ब्लैक फंगस (Black fungus) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 70 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके है। पिछले 15 दिनों में तेजी से ब्लैक फंगस का संक्रमण फैला है। हमीदिया अस्पताल में इस बीमारी के इलाज के लिए बनाया गया वार्ड भी फुल होने के कगार पर आ चुका है। 2 दिन में आधे बेड फुल हो चुके है।

बता दे कि भोपाल में अलग-अलग अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 70 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। हमीदिया अस्पताल में लगभग 23 मरीज भर्ती है। कोविड वार्ड में भर्ती 8 मरीजों का ब्लैक फंगस और कोरोना दोनों का एक साथ इलाज हो रहा है।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ब्लैक फंगल इंफेक्शन को लेकर सरकार अलर्ट मोड पर है। सरकार ने बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि पहले फेज में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल और जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में यूनिट शुरू की जा रही है।

वहीं ब्लैक फंगस इंफेक्शन से निपटने के लिए चार विंग काम कर रही है। जिसमे ईएनटी, नेत्र रोग विभाग, न्यूरोलॉजी और मेडिसन को मिलाकर एक  यूनिट बनायी गयी है।

राजधानी भोपाल में 14 साल से कम उम्र के बच्चे हुए कोरोना संक्रमित

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मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर बच्चों के लिए भी घातक सिद्ध हो रही है। जानकरी के अनुसार दूसरी लहर में बड़ी संख्या में 14 साल से कम उम्र के बच्चे भी संक्रमित हुए है। अगर सिर्फ भोपाल में ही देखे तो 54000 मरीजों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2700 है।

दरअसल दूसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने से सरकार के भी कान भी खड़े हो गए है। ऐसा भी माना जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरी लहर में 50 प्रतिशत मरीज 14 साल से कम उम्र के बच्चे हो सकते हैं।

बता दे कि इस आपदा से निपटने के लिए सरकार ने खास तौर पर बच्चों के लिए अस्पतालों में आईसीयू बनाए जाने के निर्देश दे चुकी है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बच्चों के लिए अलग से 50 बिस्तरों का आईसीयू बनाया जाएगा।