Friday, September 24, 2021
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राजधानी भोपाल में रहेगा 56 घंटो का कोरोना कर्फ्यू , 25% दुकानें खोलकर किया जाएगा अनलॉक

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मध्य प्रदेश अब अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है। आज जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में राजधानी भोपाल को अनलॉक करने पर कई फैसले लिए गए है। सरकार ने अपनी ओर से गाइडलाइन बनाई है जिसके अनुसार राजधानी को अनलॉक किया जाएगा।

बता दे कि भोपाल में पिछले 10 दिनों में कोरोना की संक्रमण दर 10 फीसद से गिरकर तीन फीसद पर आ गई है। ऐसे में भोपाल के बाजारों की 25 फीसद दुकानें खोलकर अनलॉक किया जाएगा। वहीं निजी दफ्तर 50 फीसद क्षमता के साथ खुल सकेंगे।

इस बीच सप्‍ताह में शुक्रवार रात 10 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक का कोरोना कर्फ्यू जारी रहेगा। यह निर्णय रविवार को वल्‍लभ भवन में हुई जिला आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में लिया गया है। इसके आदेश जल्‍द भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया जारी करेंगे।

वहीं बाजार में इलेक्‍ट्रीकल्‍स, बिल्डिंग मटेरियल और हार्डवेयर की दुकानें भी सप्‍ताह में दो दिन खोले जाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभी ये दो दिन कौन से होंगे यह कलेक्‍टर निर्णय लेकर आदेश जारी करेंगे। इसके अलावा राज्‍य सरकार की तमाम गाइडलाइन का पालन किया जाएगा।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश युवा कांग्रेस की बैठक ली

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कोरोना काल के दौरान युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने युवा कांग्रेस के किए गए कार्यों की सराहना भी की। साथ ही युवा कांग्रेस से जोड़ने, बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन और कोरोना काल में दिवंगत हुए लोगों के परिवार को न्याय दिलाने के बारे में विस्तृत चर्चा कर दिशा निर्देश दिए है।

वहीं प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भुरिया ने कमलनाथ के निर्देशासनुसार कार्ययोजना तैयार कर सभी पदाधिकारियों को संगठन कार्य और सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरुद्ध कमर कसने के निर्देशित दिए है।

इस बैठक में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव मनीष चौधरी, एकता ठाकुर, प्रदेश मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी, सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष चंचलेश व्यास उपस्थित थे।

ब्लैक और व्हाइट फंगस के बाद मरीज में मिला पीला फंगस, गाजियाबाद के निजी अस्पताल में मिला ये मरीज

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देश में ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के बाद अब एक नया फंगस सामने आया है। ये पीला फंगस है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के बाद पीला फंगस का मामला सामने आया है।

ऐसा दावा किया जा रहा है कि गाजियाबाद में पीला फंगस का एक केस मिला है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि पीला फंगस ( yellow fungus) इन दोनों ब्लैक फंगर और व्हाइट फंगस से ज्यादा खतरनाक है।

दरअसल अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा है कि अस्पताल में मरीज के अंदर पीले फंगस का लक्षण मिला है। उन्होंने अपनी केस स्टडी में ऐसे लक्षण का मरीज नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि इसमें अंदर सांस लेना परेशानी नजर आ रही थी।

उन्होंने ये भी कहा कि यह जो पीला फंगस है इसका ज्यादा इलाज पढ़ाई में नहीं है लेकिन जो ब्लैक फंगस में इंजेक्शन एंफोटरइसिन बी इस्तेमाल होता है वो इसमें कारगार है। उन्होंने कहा कि ये पीला फंगस ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह घाव को भरने नहीं देता है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर हुई एफआईआर

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मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के खिलाफ भोपाल की क्राइम ब्रांच पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। क्राइम ब्रांच ने धारा 188 और डिजास्टर मैनेजमेंट की धारा 54 की धारा के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।

बता दे कि बीजेपी ने क्राइम ब्रांच को कमलनाथ के खिलाफ अपराध दर्ज करने का ज्ञापन सौंपा था। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि कमलनाथ ने प्रेस कान्फ्रेंस में कोरोना को इंडियन वैरिएंट कहकर देश की छवि को धूमिल करने का काम किया है।

दरअसल पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ट्वीट कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के लिए कहा था। कमलनाथ ने सरकार पर कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा छिपाने का सरकार पर आरोप लगाया था।

This class 10 kid raised 665K to purchase oxygen concentrators in the fight against Covid19

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It’s amazing to me how I could raise around ₹6,65,000 in less than two weeks for the right cause. 150+ kind supporters including my friends, family, friends’ families, parents’ friends, and numerous anonymous donors came together to help the people in need and raise more than Rs 6 lakhs to help me purchase oxygen concentrators for the people of Kuchaman City, Rajasthan suffering from covid-19.

I first wanted to target raising ₹2,00,000 thinking that even that wouldn’t be easy, but my father motivated me to set a target to raise ₹5,00,000 so that it’s meaningful and more people can benefit.

In the beginning of April, my family was infected with coronavirus. First my mother, my brother, then me and my father. Fortunately, my family and I weren’t affected severely. I realised how hard it can be specially when people do not have enough support.

After we all tested negative, I saw my dad multiple times speaking on the phone to arrange for oxygen cylinders, plasma, beds, and other vital essentials for people. A few days later I read on the news that 25 people who were infected with covid had died in one day. The deaths though, weren’t not due to the coronavirus but because of the lack of oxygen. I was shocked.

This inspired me to do something for the community and I decided to start a fundraiser for people in need to raise money to purchase oxygen concentrators and oximeters. Though Delhi and other metros were getting numerous supplies already and have best in the class medical facilities, I realised the situation was much worse in smaller towns. My father informed me about situation in our hometown where my grandparents stay that the cases were increasing there everyday, and support was minimal. Unlike in Delhi, there are no oxygen cylinder refilling facilities and there is only one Government hospital. The only option for any patient with fall in oxygen is to get admitted to the hospital since there were very few oxygen concentrators available in the town. I then started a fundraiser for hometown – Kuchaman City, Rajasthan.

I started a fundraiser on milaap.org at the weblink https://milaap.org/fundraisers/support-covid-19-patients-72 .

After getting the fundraiser up and running, I shared the link of the cause with my family, friends, teachers etc. I shared it on various social media platforms and requested everyone else also to share it with their families and friends. At first the fundraiser wasn’t getting enough donations and was a little worried if I could achieve the target. My parents supported me and asked me to follow through and share it with even more people. Multiple accounts retweeted my tweet of the fundraiser.

After the second day the donations started coming in faster. I called my family members, friends etc. and requested them to donate and share. My parents, relatives and friends also shared within their network. In less than a week I had raised over my target – ₹5,00,000 with the help of 153 generous supporters. This is a screenshot taken on 23rd May at 12:00 PM.

We have shipped 5 oxygen concentrators with other multiple necessities such as oximeters and face masks which have already been received by Kuchaman City and are available for use by people. 4 more concentrators have been ordered and will be received next week.

I feel extremely happy that with the support of over 150+ generous donors, we would be able to save few lives. Thanks to all the donors, many of them anonymous for helping me in this. Thanks to all the motivating messages, I have received from everyone. I am proud to support my hometown during the pandemic. I am thankful to my parents who have supported me at every step of this journey. I wish this pandemic gets over soon and life becomes normal for all of us.

About me:

I am Dhruv Mantri, a grade X student at The Shri Ram School, Moulsari Avenue, Gurugram. I live in New Delhi with my parents and my younger brother Krishiv. I love playing football and have represented school before the Covid-19 hit everyone. Being locked at home, I have recently started enjoying boxing.

My inspiration for this initiative were my grandparents and my parents. I have always seen them helping people whenever they can.

मध्यप्रदेश की राजधानी में एक मरीज में मिले ब्लैक और व्हाइट फंगस दोनो के लक्षण

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मध्य प्रदेश कोरोना की महामारी से अभी निपटे ही नहीं कि ब्लैक फंगस से प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन अब व्हाइट फंगस ने भी प्रदेश में अपनी दस्तक दे दी है। राजधानी भोपाल में दूसरा मरीज मिला है। बताया जा रहा है कि इस मरीज को ब्लैक और व्हाइट दोनों फंगस मिले है।

जानकरी मिली है कि भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इस व्हाइट फंगस का मरीज भर्ती है। और इस मरीज में व्हाइट के साथ ब्लैक फंगस के भी इंफेक्शन है। राज्य में यह पहला मामला है जहां दोनों इंफेक्शन किसी मरीज में देखे गए है।

बता दें कि प्रदेश में ब्लैक फंगस के मामले तेजी से बढ़ रहे है। 600 से ज्यादा ब्लैक फंगस के मरीज सामने आ चुके है। वहीं 30 से ज्यादा की मौत हो चुकी है।

मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में नहीं हो रहा है वैक्सीनशन, ये है कारण

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 18 और उसके ऊपर वालों के लिए टीकाकरण शुरू हुए 15 दिन से अधिक समय बीत जाने पर भी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कोविड टीका नहीं लग रहा है। इसकी वजह वैक्सीनेश की जटिल प्रक्रिया बताई जा रही है।

दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में स्लाॅट बुकिंग की जटिल प्रक्रिया लोगों के टीकाकरण कराने में बाधा बन रही है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 18 वर्ष से अधिक उम्र से अधिक लोगों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकी है।  ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग है जिनके पास स्मार्ट फोन और इंटरनेट है। वे ही लोग टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे है।

बता दें कि शुरवात में शहरी क्षेत्रों में भी वैक्सीन के प्रति लोगों का कम रुझान दिखाई दिया था। लेकिन बाद में लोगों ने टीका लगवाना शुरू कर दिया था। हालांकि अब ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर जागरूकता नहीं दिखाई दे रही है। कई केंद्र तो ऐसे है जहां पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह से शाम तक बैठी रहती है, लेकिन टीका लगवाने कोई नही आता।

मध्यप्रदेश में खाली है डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के पद

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मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। डॉक्टरों के 5 हजार पद तो वहीं नर्सिंग स्टाफ के 16 हजार पद खाली है पूरे प्रदेश भर में खाली है। वहीं प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टर के 800 से ज्यादा पद खाली है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश में अभी लगभग 16996 लोगों पर एक डॉक्टर की व्यवस्था है। जबकि डब्ल्यूएचओ(WHO) के मुताबिक एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए।

बता दे कि सरकार के वैकेंसी निकालने के बाद भी कोई आने को तैयार नहीं है। पिछले साल अप्रैल में मात्र 6 मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती हुई थी। लेकिन उनका भी समय पूरा होने से पहले हटा दिया गया।

प्रचार-प्रसार में व्यस्त मोदी सरकार ने वैक्सीन उत्पादन/रिसर्च पर नही किया 1 पैसा खर्च

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कोरोना महामारी के कारण जहां हर रोज हजारों लोगों की मौत हो रही है तो वहीं सरकार द्वारा मीडिया के माध्यम से ऐसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है जैसे वैक्सीन भारत सरकार के नेतृत्व में ही बन रही है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में यह स्वीकार किया कि उसने वैक्सीन के विकास में एक पैसा भी नहीं लगाया।

सरकार में कोर्ट ने बताया कि यह वैक्सीन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका के अनुसंधान से बनी।

भारत मे दो कोरोना वैक्सीन को अनुमति मिली है। जिसमें  पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) कोविशील्ड बनाता है और हैदराबाद की भारत बायोटेक कोवैक्सीन का निर्माण करती है।

वैक्सीन का श्रेय लेने के लिए सरकार ने किया प्रचार


मोदी सरकार ने बिना कोई दावा किए कुछ ऐसी छवि बनाने की कोशिश की जैसे भारत सरकार ही सब कुछ कर रही है। यह धारणा 28 नवंबर 2020 से ही बनने लगी थी जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे जाकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और हैदराबाद जाकर भारत बायोटेक लैब का दौरा व निरीक्षण किया था।

प्रमाणपत्र में भी लगाई तस्वीर


टीका लगने के बाद मिलने वाले प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री मोदी का चित्र रहने से यह धारणा और मजबूत हो गई कि वैक्सीनें केंद्र सरकार के नेतृत्व में निर्मित की जा रही हैं। किसी ने इस भ्रांति का खंडन भी नहीं किया और सरकार में बैठे मंत्री, सांसद और भाजपा नेता भी इस धारणा को मजबूत करने वाले बयान देते चले गए।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही आलोचना

मोदी सरकार की वैक्सीन पॉलिसी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना की जा रही है। ब्रिटिश अखबार ‘गार्जियन’ ने लिखा कि जब अमेरिका और पश्चिम यूरोप के देश कोरोना से बचाव की वैक्सीन विकसित करने के लिए अरबों डॉलर लगा रहे थे, तब भारत ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को कोई मदद नहीं दी। ‘गार्जियन’ की रिपोर्ट सही होने की पुष्टि 11 मई को केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे से हो गई। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कोर्ट को बताया कि उसने पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और हैदराबाद के भारत बायोटेक को वैक्सीन रिसर्च के लिए कोई रकम नहीं दी। सीरम इंस्टीट्यूट को क्लीनिकल ट्रायल के लिए भी कोई रकम नहीं दी गई।

6 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन कर दी निर्यात

मोदी सरकार की आलोचना इस बात पर भी हो रही है कि देश में जहां कोरोना के केस बढ़ रहे थे तो वहीं सरकार ने 6 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन दुनिया के दर्जनों देशों को निर्यात कर दिए और कुछ को मुफ्त में भी दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पहली लहर खत्म होने के बाद सरकार निश्चिंत हो गई थी कि अब देश में टीके की जरूरत नहीं पड़ेगी?

इस समय भी कई देशों के पास करोड़ों टीकों का भंडार भरा हुआ है लेकिन वे उन्हें भारत को देने में आनाकानी कर रहे हैं। जो टीका 100-150 रुपए का बनता है, उसे रूस जैसा मित्र देश भारत को 1000 रुपए में बेच रहा है। भारत में 18 करोड़ लोगों को टीका लग चुका है जो दुनिया में सबसे ज्यादा है लेकिन 135 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश को अभी बहुत अधिक वैक्सीन की जरूरत है। यह कहा जा रहा है कि इतने लोगों का टीकाकरण होने में कम से कम 2 वर्ष लग जाएंगे। इसलिए भी वैक्सीन की दूसरी डोज को लेने की अवधि बढ़ाई गई। टीका बनाने के लिए कई कंपनियों को लाइसेंस देने का सुझाव दिया जा रहा है लेकिन क्या ऐसी कंपनियों को सरकार अथवा पीएम केयर्स फंड से वित्तीय मदद मिलेगी?

भोपाल डीआईजी हुए सख्त, समझाइश देते हुए कहा तुम्हारी घटिया हरकतों से बड़े बुज़ुर्ग मर गए शर्म आना चाहिए

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भोपाल की सड़कों पर डीआईजी का सख्त अंदाज देखने को मिला। उन्होंने लोगों को पहले भी समझाइश दी थी लेकिन जब लोग नहीं माने तब दोबारा सड़कों पर उतरकर अनाउंसमेंट करते हुए डीआईजी इरशाद वली ने स्थानीय लोगों को जमकर लताड़ लगाई।

बता दे कि इरशाद वली काजीकेम्प की सड़कों पर अपने महकमे के साथ उतर गए। इरशाद वली गलियों में अनाउंसमेंट करते हुए निकले। उन्होंने किसी पर कार्रवाई नहीं की लेकिन उनको सख्त भाषा में समझा दिया। उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि इसके बावजूद भी लोग नहीं मानते तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया।

दरअसल उन्होंने संकरी गलियों से गुजरते हुए अनाउंसमेंट करते हुए कहा कि “तुम्हारी घटिया हरकतों से बड़े बुज़ुर्ग मर गए है। शर्म आना चाहिए। शर्म हया सब बेच खाई है। बार बार समझा रहा हूं। तुम्हारी हरकतों से घर वाले, बड़े बुज़ुर्ग मरेंगे। बेवकूफों पर कुछ असर नहीं होता है।

काजी कैंप पर कुछ दिनों पहले पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने कई दुकानों को सील करने का काम किया था। यहां की तमाम गलियों को सील कर दिया गया था। बैरिकेड लगाकर चेकिंग व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। कई लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किए गए थे। इसके बावजूद यहां के लोग कोरोना कर्फ़्यू के नियम को लगातार तोड़ रहे हैं। यही कारण रहा कि अब खुद डीआईजी इरशाद वली ने इस इलाके की कमान संभाली और लोगों को अब अपने ही अंदाज में समझाएं दे रहे हैं।