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दिगंबर अखाड़े ने कम्प्यूटर बाबा को किया निष्कासित

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गुरुवार को 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा को दिगंबर अखाड़े ने निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही प्रयागराज कुंभ में अखाड़ा की गतिविधियों में बाबा शामिल नहीं हो पाएंगे। इस बात की पुष्ठी दिगंबर अखाड़े के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने की है। कम्प्यूटर बाबा अपने नाम और काम दोनों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं, फिलहाल बाबा राज्यमंत्री पद से  इस्तीफा देकर शिवराज के खिलाफ करने को लेकर चर्चाओं में बनें हुए हैं।

दिगंबर अखाड़े ने जारी किया पत्र।

बाबा का लगातार शिवराज पर वार :

शिवराज सरकार में राज्यमंत्री रहते हुए लगातार नर्मदा में हो रहे अवैध उत्खनन, गौरक्षा और मंदिर निर्माण के मुद्दे को उठाते रहते थे। जिसे लेकर सरकार की तरफ से किसी प्रकार का कदम ना उठाने पर बाबा ने इस्तीफा देकर शिवराज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकाल कर जगह-जगह आंदोलन करते नजर आ रहें थे।

बाबाओं को मंत्री बनाने पर हुआ था विवाद :

सरकार ने नर्मदानंदजी, हरिहरानंदजी, कंप्यूटर बाबाजी, भय्यूजी महाराज और योगेंद्र महंतजी को राज्य सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया था। जिसे लेकर  विपक्ष लगातार सरकार पर महाकुंभ और नर्मदा घोटाले का  आरोप लगा रही थी, तभी कम्प्यूटर बाबा ने  भी बगावत कर शिवराज की मुश्किले बढ़ा दी थी। 

बाबा पर समागम के दौरान पैसे बांटे का आरोप :

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बाबा ने अपनी मन की बात के ज़रिए सरकार के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। जिसे लेकर 23 अक्टूबर को इंदौर, 30 अक्टूबर को ग्वालियर में उन्होंने मन की बात के ज़रिए संत समागम किया और अब 4 नवंबर को खंडवा, 11 नवंबर को रीवा, 23 नवंबर को जबलपुर में संतों के समागम में मन की बात करने की तैयारी में हैं। बाबा के ग्वालियर में हुए समागम मे पैसे बांटते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके  बाद बाबा पर आरोप लगाए जा रहे थे कि समागम में साधुओं को पैसा देकर बुलाया जाता है।

ग्वालियर समागम की तस्वीर

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

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दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

शिवराज सरकार के खिलाफ कंप्यूटर बाबा करेंगे मन की बात, डैमेज कण्ट्रोल करेंगे अवधेशानंद गिरि

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शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा ठुकरा चुके कंप्यूटर बाबा ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बाबा ने घोषणा की है की वह शिवराज सरकार के खिलाफ संतों का समागम करके ‘मन की बात’ करेंगे’। बाबा का समागम 23 अक्टूबर को इंदौर, 30 अक्टूबर को ग्वालियर, 4 नवंबर को खंडवा, 11 नवंबर को रीवा और 23 नवंबर को जबलपुर में होगा। समागम में कंप्यूटर बाबा नर्मदा में चल रहे अवैध उत्त्खनन, गौरक्षा और राम मंदिर निर्माण को लेकर सरकार के खिलाफ मन की बात करेंगे। 


कंप्यूटर बाबा को मानाने के लिए सरकार के सारे प्रयास विफल होते नजर आ रहे है। शिवराज सरकार और भाजपा के सभी वरिष्ट नेता कंप्यूटर बाबा को मानाने में असफल हो रहे है। ऐसे में सरकार दूसरे राज्यों के बड़े धर्मगुरु और संतों को डैमेज कंट्रोल के लिए प्रदेश लाने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार जूनापीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि को बाबा और सरकार के बीच मध्यस्थता कराने का काम सौंपा गया है। खबर है की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भोपाल दौरे के दौरान भी कम्प्यूटर बाबा को लेकर चर्चा हुई थी। इसी चर्चा में रणनीति बनी कि सरकार और पार्टी का कोई भी नेता बाबा के खिलाफ कोई बयान नहीं देगा। उन्हें मनाने के लिए संतों का सहारा लिया जाएगा। स्वामी अवधेशानंद गिरि को यह जिम्मेदारी सौंपने पर सहमति बनी है। साथ ही बाबा के संपर्क में रहने वाले दूसरे राज्यों के संतों से भी बातचीत की जा रही है। भाजपा को समर्थन देने वाले देश के कुछ संतों की जल्द ही कम्प्यूटर से चर्चा कराई जाएगी।

दरअसल कुछ समय पहले तक राज्य सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले कम्प्यूटर बाबा इस समय सरकार से काफी नाराज चल रहे है। बाबा सार्वजानिक मंच से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर धोखा देने का आरोप लगा रहे है। चुनाव के तुरंत पहले बाबा ने प्रदेश में अपनी सक्रियता बड़ाई है। बाबा सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और सरकार पर जमकर हमला बोल रहे है। बाबा का कहना है की वह इस धर्म विरोधी सरकार में रहकर अपवित्र हो गये है। इस सरकार ने संत समाज की उपेक्षा की है। मुख्यमंत्री शिराज संतों से मिलना नहीं चाहते। नर्मदा के शुद्धिकरण और गौशाला अनुदान के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं किया। जो स्थिति पहले थी, वही आज भी है।

 
कंप्यूटर बाबा ने कहा की ‘हमें खबर मिली है कि सरकार बाहर से संतों को मप्र लेकर आ रही है। इन संतों को मप्र में इकट्ठा किया जा रहा है। यह सरकार संतों  को भी बरगला रही है। पूरा संत समाज एक है। वह इस सरकार के बहकावे में नहीं आएगा। नर्मदा को बचाने के लिए अपनी जान भी दे दूंगा, लेकिन सरकार के बहकावे में नहीं आऊंगा। नर्मदा किनारे होने वाले पौधरोपण, रेत खनन और नर्मदा मैया को नुकसान पहुंचाने वालों को मैं छोड़ूंगा नहीं।


कंप्यूटर बाबा के हाव-भाव देखकर एक बात तो साफ़ है की सरकार के लिए बाबा को मानना अब आसान नही होगा। जिस तरह बाबा ने सीधे मुख्यमंत्री शिवराज के खिलाफ मोर्चा खोला है, अगर उन्हें जल्दी नही मनाया गया तो सरकार को उनका नुक्सान जरूर होगा।

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