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Monday, May 10, 2021
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मायावती का भाजपा कनेक्शन सामने लाने के लिए दिया निर्दलीय को समर्थन: अखिलेश

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Akhilesh Yadav Samajwadi Party UP
Akhilesh Yadav Samajwadi Party UP

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज कहा कि वह भाजपा व बसपा का सच सामने लाना चाहते थे इसलिए राज्यसभा चुनाव के लिए निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बजाज को समर्थन दिया। अखिलेश यादव शनिवार को आचार्य नरेंद्र देव की पुण्य तिथि पर उन्हें श्रद्घांजलि देने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे।

मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने कहा कि हमने जनता के सामने सच ला दिया है कि बसपा, भाजपा की बी टीम है। अब सब बातें साफ हो गई हैं। वहीं, उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग भाजपा से मिले हुए हैं। भाजपा चुनाव जीतने के लिए किसी के साथ भी गठबंधन कर सकती है। अखिलेश यादव ने कहा कि आज के दिन हम सरदार पटेल, आचार्य नरेंद्र देव जी और वाल्मीकि जी को याद कर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने आगे कहा है कि भाजपा की गलत नीतियों के चलते प्रदेश के किसान बेहाल हैं। बिचौलियों और बड़े व्यापारियों के सरकारी तंत्र से मिलीभगत की वजह से किसान अपनी फसल उन्हें औनपौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार झूठे दावों के बल पर अपनी कमियों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार किसानों की आय दुगनी करने और किसान की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं कृषि उपज की उत्पादन लागत का डेढ़ गुना करने का वादा भूल चुकी है। किसानों को इस वर्ष धान की फसल से बहुत उम्मीद थी, लेकिन किसानों को 1888 रुपये के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के बजाय 800 से 1000 रुपये या अधिकतम 1200 रुपये प्रति कुंतल की दर से धान बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि धान केन्द्रों पर भी नमी के बहाने किसानों का शोषण हो रहा है। धान की खरीद में निजी एजेंसियों की चांदी है। मक्का माटी मोल बिक रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लाये गए नए कृषि विधेयक से खेत पर किसान का मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा। उसकी खेती कॉरपोरेट कंपनियों की शर्तों पर होगी। उन्होंने कहा कि देशवासियों को भाजपा से सावधान रहना चाहिए।

बीएसपी सांसद मलूक नागर पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप, आर्थिक अपराध शाखा में FIR दर्ज

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उत्तरप्रदेश के बिजनौर से बहुजन समाज पार्टी के सांसद मलूक नागर के खिलाफ दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा में धारा 420 और 406 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें जुर्माने के साथ ही 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। मामले में मलूक नागर के अलावा 3 और लोगों अजय कुमार, संजीव कुमार और मनोज कुमार रे पर भी करोड़ों की हेराफेरी करने का आरोप है। आरोप है कि इन चारों व्यक्ति ने नॉएडा स्थित रियल एस्टेट कंपनी एम्स मैक्स गार्डिनिया डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। आरोपों के मुताबिक मलूक नागर पर नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी के 1000 करोड़ रुपये बकाया है, जिसे नागर ने गलत तरीके से अपनी दूसरी परियोजनाओं में लगाकर अथॉरिटी को चूना लगाया है। आरोप है कि काफी कोशिशों के बाद भी नोएडा अथॉरिटी बसपा संसद से यह पैसा वसूल करने में नाकाम रही है।

शिकायतकर्ता कुलदीप नरोत्रा का आरोप है कि मलूक नागर ने पद, पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मुंबई के साथ ही विदेश के कई शाहरों में भी संपत्ति बना ली है। शिकायतकर्ता के मुताबिक अगर सांसद द्वारा की गई धोखाधड़ी की सही तरह से छानबीन करवाई जाए तो काफी बड़े- बड़े घोटाले सामने आ सकते है।

आरोपी सांसद मलूक नागर की तस्वीर

क्या है पूरा मामला ?

कंस्ट्रक्शन कंपनी जेएमडी लिमिटेड द्वारा दायर किये गये मुक़दमे के अनुसार बीएसपी संसद ने 3 अन्य साथियों के साथ नॉएडा में एक रियल एस्टेट कंपनी एम्स मैक्स गार्डिनिया डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड शुरू की जिसका ऑफिस दिल्ली के विनोबापुरी में है। आरोप है कि मलूक नागर समेत कंपनी के चारों डायरेक्टरों ने जेएमडी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील बेदी से मुलाकात कर नॉएडा अथॉरिटी द्वारा सेक्टर 75 में इको सिटी के आवंटन का दावा पेश किया। कंपनी ने जेएमडी को इको सिटी में लगभग 2 एकड़ व्यावसायिक जमीन लीज पर देने का प्रस्ताव दिया। जमीन का सौदा 2500/- रुपये वर्ग फीट के दाम पर 65.34 करोड़ रुपये में तय किया गया। जिसमें से 15 करोड़ रुपये का भुगतान जेएमडी द्वारा एम्स को कर दिया गया। भुगतान के बाद से ही लीज के डाक्यूमेंट्स देने में एम्स द्वारा देरी की जा रही थी। बार- बार मोहलत लेने के बाद भी जब कंपनी लीज डाक्यूमेंट्स देने में नाकाम रही तो जेएमडी ने नॉएडा अथॉरिटी से संपर्क किया। संपर्क करने के बाद पता चला की एम्स ने लीज के लिए आवेदन ही नही किया। वहीं दूसरी तरफ एम्स ने उस 2 एकड़ जमीन पर बनने वाली दुकानों को बेचने के लिए अखबारों में विज्ञापन तक दे दिया। जिसके बाद जेएमडी ने इस धोखाधड़ी की शिकायत आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज करवाई।

बता दें कि बीएसपी सांसद मलूक नागर 2009 से लगातार लोकसभा सांसद है। बिजनौर से पहले वह मेरठ से भी बीएसपी की टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे। इससे पहले भी दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट नें मलूक नागर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। जब उनकी एक अन्य कंपनी मैसर्स एम्स सान्या डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों का टीडीएस काटने के बाद भी आयकर विभाग में जमा नही किया था।

(नोट: एम्स मैक्स गार्डिनिया डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ यह मामला दिनांक 4/11/2019 को दर्ज किया गया था। वहीं हमें इस मामले की जानकारी आज 10/12/2019 को ईमेल के माध्यम से प्राप्त हुई है)

इस शर्त पर समाजवादी पार्टी के साथ आने को तैयार शिवपाल यादव

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File photo of akhilesh yadav and shivpal yadav

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (पीएसपी) के प्रमुख शिवपाल यादव ने आज मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि वह 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार हैं।

शिवपाल यादव, जो समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह के छोटे भाई और पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा हैं, ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनावों के लिए सपा के साथ गठबंधन कर सकती है, लेकिन वह समाजवादी पार्टी में दोबारा शामिल नहीं होंगे ।

पत्रकारों से बात करते हुए शिवपाल ने कहा, “जब चारों ओर चुनाव होंगे, तो गठबंधन की बातचीत होगी लेकिन हम समाजवादी पार्टी में वापस नहीं जाएंगे। हम उन लोगों से बात करेंगे जो हमारे साथ सहयोगी बनना चाहते हैं।

बता दें कि अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनावों में सपा की हार के बाद मुलायम सिंह ने चाचा-भतीजे को एक साथ लाने के प्रयास किए थे। चुनाव में यादव कबीले के तीन सदस्य-डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव चुनाव हार गए और लोकसभा में पार्टी की संख्या पांच हो गई।

जिसके बाद, बहुजन समाज पार्टी ने भी सपा के साथ गठबंधन तोड़ते हुए घोषणा की कि वह अपने दम पर सभी चुनाव लड़ेगी। बसपा ने अपनी दलित विरोधी नीतियों के लिए सपा को भी जिम्मेदार ठहराया।

सूत्रों के अनुसार सपा के वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि अगर दोनों नेताओं ने हाथ मिला लिया तो सपा कुछ हद तक मजबूत हो जाएगी और खुद को एक हद तक पुनर्जीवित कर सकती है।

कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मुद्दे पर भाजपा के समर्थन में खड़ी हुई बसपा

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bsp chief mayawati

बहुजन समाज पार्टी के सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मोदी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आज संसद में कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं क्योंकि इसकी अवधि खत्म हो रही है।

बता दें की कांग्रेस के साथ कई विपक्षी दलों ने कश्मीर में लड़े राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा था कि कश्मीर में बड़ी हिंसा के लिए भाजपा और पीडीपी गठबंधन जिम्मेदार है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा क्यों नही ?

Mahagathbandhan lasted for Lok Sabha Elections only as BSP and SP parted ways

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Stable alliances in Indian politics are myths. The fact was soon discovered after a disastrous performance by BSP and SP in Lol Sabha elections. They are now separate, like they were in the past.

After weeks of blaming SP for the failure in Lok Sabha elections, , BSP supremo Mayawati on Monday announced that her party will contest all elections alone in future.

She tweeted, “The behaviour of the SP after the Lok Sabha general elections compels the BSP to think whether it will be possible to defeat the BJP further. That is not possible. So in the interest of the party and the movement, the BSP will now fight all the major elections on its own.”

“Everyone is aware that forgetting everything of the past, as well as anti-BSP and anti-Dalit decisions such as reservation in promotions and bad law and order during the SP rule in 2012-2017, the BSP adhered to the ‘gathbandhan dharma’ with the Samajwadi Party in the interest of the country,” she tweeted in Hindi.

Mayawati’s statement comes a day after the BSP reviewed its performance in the Lok Sabha polls and its alliance with the Akhilesh Yadav-led party. The BSP, which had contested the election in alliance with the SP and Ajit Singh’s Rashtriya Lok Dal, had won 10 seats and the SP, just five.

Soon after she announced her decision, SP national general secretary Ramashankar Vidyarthi told journalists in Balia that Mayawati was speaking against the SP in haste because of the Dalit support for the SP and Akhilesh.

“She is weakening the fight for social justice,” he said, adding that Dalit society is getting connected with the SP and Akhilesh in a big way. “People know about the reality about what the ‘malkin’ of the alliance has done.”

Earlier in June, Mayawati had announced her decision for the BSP to go solo in the bypolls to 11 Assembly seats in Uttar Pradesh. She had then said that the split would not be permanent if Akhilesh got his act together. Her statement also comes weeks after she said Akhilesh had asked her to not give tickets to Muslims as it would result in religious polarisation.

मायावती के तंज पर प्रियंका का जवाब, बोली हम चुनाव लड़ रहे है..

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बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा कांग्रेस पर किये गए तंज पर अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पलटवार किया है। प्रियंका ने मायावती पर पलटवार किया है।

दरअसल बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा था और कहा था कि ” कांग्रेस पार्टी उत्तरप्रदेश में 7 सीटें भी क्यों छोड़ रही है, उसे सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए। सपा-बसपा और आरएलडी का गठबंधन भाजपा को हराने के लिए काफी है।”

मायावती के इस बयान को कांग्रेस को लेकर उनके गुस्से के तौर पर देखा जा रहा था। जानकारों का कहना है कि जिस तरह कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश में अपनी सक्रियता बड़ाई है और जिस तरह प्रियंका गांधी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद से मुलाकात की तजि उससे मायावती को अपने वोट बैंक पर खतरा नजर आ रहा है।

प्रियंका ने मायावती के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि सपा-बसपा गठबंधन भाजपा को हराने के लिए काफी है। हम अकेले चुनाव लड़ रहे है, हमें किसी को परेशान नही करना है। हमारा उद्देश्य भाजपा को हराना है और उनका उद्देश्य भी भाजपा को हराना है।

https://twitter.com/ANINewsUP/status/1107648698924687360?s=19

मोयावती ने ट्विटर पर की धमाकेदार एंट्री

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bsp chief mayawati

जहां एक ओर सभी राजनैतिक पार्टीयां सोशल मीडिया को इस्तेमाल करते हुए चुनावी माहौल तैयार करती हैं, वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) जैसे बड़े राजनीतिक दल ने आज तक सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी। बसपा के किसी भी बड़े नेता का भी कोई आधिकारिक अकाउंट नहीं था। जिसके बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक नई शुरुआत की है और ट्विटर पर अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया है।

मायावती का यह अकाउंट अक्टूबर 2018 में ही बनाया गया था, मगर जनवरी तक इस पर कोई ट्वीट नहीं था। 22 जनवरी को उन्होंने पहला ट्वीट किया। मायावती ने लिखा, ‘नमस्कार भाइयो-बहनो, पूरे सम्मान के साथ मैं आप सबके समक्ष ट्विटर पर कदम रख रही हूं। यह मेरा पहला ट्वीट है। @sushrimayawati मेरा आधिकारिक अकाउंट है और यहीं से मैं भविष्य में आप सबसे जुड़ूंगी। धन्यवाद।’ बता दें कि मायावती जैसी बड़ी नेता और बीएसपी जैसे बड़े राजनीतिक दल का सोशल मीडिया पर ना होना, उनके समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स के लिए हैरानी का विषय था। कई बार बीएसपी के नाम से कुछ फर्जी हैंडल भी चर्चा में आए, लेकिन पार्टी ने हमेशा ही इनका खंडन किया और साफ किया कि इनसे बीएसपी का कुछ लेना-देना नहीं है।

मायावती का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट

बुधवार को मायावती का ट्विटर अकाउंट वेरिफाइड भी हो गया और उस पर ब्लू टिक भी आ गया। बीएसपी ने भी एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मायावती के ट्विटर अकाउंट के बारे में जानकारी दी है। अकाउंट वेरिफाइ होने के बाद मायावती के फॉलोअर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। खबर लिखे जाने तक उनके करीब 7,500 फॉलोअर्स थे।

BJP’s Sadhana Singh accused Mayawati of compromising her dignity for power

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Making derogatory comments on the opposing politicians is the essence of Indian Politics. Though it is not something to be proud of and as the elections approach, the ‘hate-speech’ become frequent.

Recently, a lawmaker of BJP in Uttar Pradesh, Sadhana Singh, grab eyeballs with her comments on BSP supremo – Mayawati. She said that Mayawati “was a blot on womankind”. Sadhana also accused her of “selling her dignity for power”.

“She (Mayawati) has no self-respect… she was almost molested earlier and yet… in history, when Draupadi was molested, she took a vow to seek revenge… but this woman, she lost everything, but still sold her dignity for the sake of power. We strongly condemn Mayawati ji. She is a blot on womankind. A woman who gulped insults for comfort and power … is a blot on womankind,” Sadhana Singh, the legislator from Mughalsarai, said at a rally on Saturday.

When her remarks drew attention, she expressed ‘regret’ over her comments. “I had no intentions of disrespecting anyone. I express regret if someone was hurt by my words,” she said in a statement.

Sadhana Singh’s comments referred to the infamous episode when Mayawati was assaulted by Samajwadi Party workers at a guest house in Lucknow in 1995. This incident triggered decades of animosity and would have continued forever. It ended when the two parties decided to come together for the national elections in Uttar Pradesh. The announced a “gathbandhan” or alliance at a joint press conference by Mayawati and Akhilesh Yadav last week. The BSP chief said that she had decided to put the past behind her “for the sake of the nation”, seemingly aimed at Prime Minister Narendra Modi who had, at a rally, taunted her for “forgetting” that episode while allying with the Samajwadi Party.

BSP-SP alliance agree on 50-50 in UP, Blocks the entry for Congress

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The BSP-SP alliance hammer the final nail in the coffin of Congress in UP as they finalize on seat proportion. They will contest on 38-38 seats each out of 80 Lok Sabha seats.

Their only concession for the Congress is to spare the two seats — Amethi, which is Congress president Rahul Gandhi’s constituency, and Sonia Gandhi’s seat Raebareli. Mayawati and Akhilesh Yadav announced they were leaving two seats for “other parties” but didn’t elaborate.

On this grand alliance, Chief Minister Yogi Adityanath said that it would bring anarchy, corruption and political instability in the state.

“This is a coalition of casteist, corrupt and opportunistic mindset that doesn’t want development and good governance. Public knows everything and this unholy alliance will be given a perfect answer,” says Yogi Adityanath.

BSP-SP rivalry needs no mention. Nearly 25 years ago, the Samajwadi Party, then led by Akhilesh Yadav’s father Mulayam Singh, and the BSP had an acrimonious falling out after their shaky coalition government in Uttar Pradesh crashed. The two parties parted as sworn enemies in 1995 after Samajwadi workers roughed up Mayawati at a guest house in Lucknow for pulling out of their coalition government.

“For the sake of the nation, we decided to rise above the Lucknow guest house incident and again come together,” Mayawati stressed, a clarification aimed at PM Modi, who had at a recent rally in Agra scorned her for “forgetting” that episode while allying with the Samajwadi Party.

Akhilesh Yadav added emphatically: “I want to tell all my workers, any insult to Mayawatiji is a personal insult to me.”

The syrupy new found love among ‘bua-bhatija’ has only one motive – keeping BJP at bay. Since UP alone accounts for 80 seats, every party knows that it is the ‘king-maker’ state. Performing well in UP clears the road to form the majority. Both BSP and SP knows that tackling BJP individually would be quite dangerous. So, they are uniting their forces and giving BJP a run for their money. Let’s see if this ‘mahagathbandhan’ is ductile or brittle and how it would fare after the 2019 polls.

Ready to Fight Alone says Congress after SP-BSP alliance Lok Sabha Polls

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The idea of United Opposition Front has taken its last breathe as SP-BSP snub Congress. Once bitter rivals and now allies in Uttar Pradesh, Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav and Bahujan Samaj Party boss Mayawati met in Delhi on Friday to discuss a mahagathbandhan or grand alliance to take on the BJP in the heartland state.

The Grand Alliance was on the cards since the 2018 by-polls in UP. (Read more: The downfall of BJP lies in ideas up-bringing communal-ism. :Akhilesh  and  Bypoll Results: A setback to saffron Juggernaut) Once SP and BSP were bitter rivals. It changed after BJP annihilated these stalwarts completely in the 2014 Lok Sabha Polls as well as Assembly Polls. It was a wake-up call for these regional powerhouses and they responded well by forming a Grand-Alliance to keep BJP at bay.

The alliance, say sources, will have room for smaller parties. The final decision on seat-sharing will be taken after January 15, sources said, adding Chaudhary Ajit Singh’s Rashtriya Lok Dal or RLD is likely to get three seats in the grand alliance.

Even though the Congress will be kept out of the coalition, Akhilesh Yadav and Mayawati do not intend to field any candidate in Amethi and Raebareli – the stronghold of the Gandhis, sources added.

Akhilesh Yadav had last week indicated at payback when his party’s only lawmaker in Madhya Pradesh did not make it to new Chief Minister Kamal Nath’s list of ministers. The Congress, he said, had gone back on its promise to do so, despite his party’s role in helping the Congress reach the majority mark.

“Thanks to the Congress, they did not make our vidhayak (legislator) a minister,” Akhilesh Yadav had told reporters last week. By doing so, the Congress had “cleared the path for Uttar Pradesh,” he had said.

2019 Polls is important for both these parties. The BJP and its allies had won 73 of the 80 seats in the last general elections in Uttar Pradesh. On the other side, BSP was wiped out in the 2014 Lok Sabha election and in the 2017 Assembly election, it won just 19 seats. It is evident that the 2019 Lok Sabha general elections will be a fight for survival for the BSP supremo and her party. SP will also suffer from the same fate if it doesn’t perform well.