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Wednesday, July 15, 2020
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No One Killed Sushant? तो क्या सुशांत के सुसाइड की होगी CBI जांच?

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shushant singh rajput
shushant singh rajput

एक सितारे का समय से पहले अस्त हो जाना कायनात पर कई सवाल खड़े कर जाता है। सुशांत भी मायानगरी के आसमान में किसी तारे की तरह अस्त हुए या फिर टूटे या तोड़ दिए गए और अब इसको लेकर सवाल सदमे के साथ उनके फैन्स के जेहन में सुलग रहे हैं। सोशल मीडिया पर सुशांत की मौत को लेकर उमड़ा जज़्बातों का सैलाब थमा नहीं है बल्कि ‘जस्टिस फॉर सुशांत’ की हैशटैग के साथ इंसाफ मांग रहा हैं।

सुशांत की मौत को उनके फैन्स और चाहने वाले सुसाइड नहीं मान रहे हैं। मुंबई पुलिस के बयान पर सुशांत के फैन्स को भरोसा नहीं है। इसकी बड़ी वजह ये भी हो सकती है कि बॉलीवुड से जुड़े मामलों को लेकर दबाब से गुज़रने का मुंबई पुलिस का पुराना इतिहास है। मरहूम जिया खान की मां ने जिया खान के सुसाइड के मामले में सलमान खान पर सनसनीखेज आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सलमान खान लगातार जांच अधिकारी को फोन कर सूरज पंचौली से पूछताछ न करने का दबाव बना रहे थे । सुशांत के सुसाइड के मामले में भी उनके फैन्स इसी तरह के आरोप लगा रहे हैं। सुशांत के फैन्स के पास मौजूद आरोपों की लिस्ट छोटी और कोरी नहीं की जा सकती है। सवाल इस तरह हैं जिनके जवाब पुलिस, प्रशासन और बॉलीवुड यानी सबसे मांगे गए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सवालों की फेहरिस्त में पहला सवाल ये है कि सुशांत की फंदे पर लटकती तस्वीर सामने क्यों नहीं आई? सवाल ये भी है कि सुशांत के गले में बना निशान किसी रस्सी या तार से बना लगता है जो कि गला घोंटने पर बनता है जबकि फांसी के फंदे का निशान नहीं है। सवाल ये भी है कि सुशांत का बिस्तर पर गिरे होने की फोटो क्यों दिखाई गई?

सवाल कई हैं। सवाल ये भी है कि सुशांत को कूपर हॉस्पिटल क्यों ले जाया गया। दरअसल कूपर हॉस्पिटल में ही दिव्या भारती और परवीन बॉबी को भी ले जाया गया था। मशहूर अभिनेत्री परवीन बॉबी का शव भी उनके घर में बरामद हुआ था जबकि दिव्या भारती ऊंची बिल्डिंग से नीचे गिर गई थीं। ऐसे में एक यूज़र ने लिखा,’ सुशांत सिंह को भी कूपर अस्‍पताल ले जाया गया, गड़बड़ है।’ दरअसल सुशांत के बांद्रा स्थित फ्लैट से कूपर हॉस्पिटल की दूरी बहुत है। ऐसे में यूज़र्स ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

सुशांत की मौत की खबर के साथ ही बड़ी तेजी से एक खबर उनके डिप्रेशन को लेकर भी हाईलाइट हुई। बताया गया कि सुशांत 6 महीने से डिप्रेशन में थे। 6 ही दिन पहले उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सोलियान ने भी खुदकुशी की थी। ऐसे में डिप्रेशन का मरीज होने की वजह से सुशांत के लिए ये दिन काफी मुश्किल भरे वाकई हो सकते थे। लेकिन सोशल मीडिया पर यूज़र्स उनको डिप्रेशन में मानने को तैयार नहीं हैं। उनका सवाल ये है कि डिप्रेशन की थ्योरी को जानबूझकर इसलिए स्थापित किया जा रहा है ताकि सुसाइड साबित किया जा सके। यूज़र्स ने सुशांत के आखिरी वक्त में साथ रह रहे लोगों से पूछताछ की मांग की है। उनका आरोप है कि ये सुसाइड नहीं बल्कि एक सुनियोजित हमला है। यही आरोप सुशांत के आईपीएस जीजा और मामा ने भी लगाए हैं। वो भी ये मानने को तैयार नहीं है कि सुशांत सुसाइड कर सकता है। लोगों के सवाल हैं कि अगर सुशांत डिप्रेशन में थे तो फिर उनके घर में पार्टियों का दौर क्यों जारी था? सवाल ये भी है कि बॉलीवुड में 11 अदद फिल्में देने वाला नौजवान जिसकी 6 महीने बाद शादी संभावित थी वो खुदकुशी कैसे कर सकता है?

अपने समय की मशहूर अभिनेत्री परवीन बॉबी को डॉक्टरों ने सिजोफ्रेनिया से ग्रसित बताया था। अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिनों में वो इस डर के अहसास के साथ जीती और मरती रहीं कि कोई उन्हें जान से मारना चाहता है। 22 जनवरी को परवीन की डेड बॉडी उनके फ्लैट में मौत के 2 दिन बाद बरामद हुई। इसी तरह अभिनेत्री दिव्या भारती की भी 19 अप्रैल 1993 को संदेहास्पद मौत हुई। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी बिल्डिंग के पांचवें फ्लोर से कूद कर सुसाइड किया। इन मौतों पर आज भी सवाल उठते हैं। ऐसे में सुशांत के फैन्स को उनका सुसाइड किसी तय स्क्रिप्ट और परफेक्कट डायरेक्शन के साथ फिल्माया लग सकता है।

14 जून को सुशांत सिंह राजपूत ने अपने फ्लैट में पुलिस के मुताबिक सुसाइड कर लिया था। मुंबई पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होना बताया गया है। लेकिन सवाल ये है कि दम आखिर कैसे घुटा? क्या फांसी के उस फंदे से सुशांत का दम घुटा जिसे खुद सुशांत ने हरे पर्दे से तैयार किया था या फिर उनके गले में बने निशान किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा हैं जिसकी जांच अभी बाकी है।

ज़ाहिर सी बात है कि 34 साल के युवा, हंसमुख और जिंदादिल शख्स की फांसी किसी के गले नहीं उतर रही है। अगर ज़िंदगी को लेकर इतना बागी कदम सुशांत उठा सकते थे तो फिर चार लाइनों का सुसाइड नोट लिखने में किसका डर था ? सुशांत का अगर इस कदर मोह भंग हो चुका था तो वो ज़िंदगी के खिलाफ अपनी नाराज़गी को बिना बयां किए कैसे चले गए? ये सोचने की बात है कि सुशांत एक छोटी सी जगह से छोटी सी हैसियत से उस मुकाम पर पहुंचे जहां का लोग सिर्फ ख्वाब ही देख पाते हैं। इसके बावजूद वो सबकुछ न्यौछावर कर देने वाली ज़िंदगी से इतने बेगाने और शिकायती हो गए कि उन्होंने ज़िंदगी की सांसों की जगह फांसी के फंदे को गले लगा लिया?

ये सवाल जज्बाती जरूर लग सकते हैं लेकिन इन सवालों के उठने की वजह बेमानी नहीं कही जा सकती है। मनोचिकित्सकों को भी ये अजीब लग सकता है कि सुबह उठकर 9 बजे अनार का जूस पीने के बाद कोई सुसाइड भी कर सकता है।

बांद्रा में सुशांत एक ड्यूप्लैक्स फ्लैट में रहते थे जिसमें नीचे एक बड़ा हॉल और ऊपर 3 कमरे थे। उनके नौकर छठी मंज़िल पर रहते थे जबकि साथ रहने वाली एक हीरोइन ने कुछ दिन पहले ही फ्लैट छोड़ा था। ऐसे में सोसाइटी में ये भी जानना जरूरी है कि सुशांत के जूस पीने के बाद उस फ्लैट में किसी बाहरी की कोई एन्ट्री तो नहीं हुई। ताकि उनके फैन्स को एक सही जवाब मिल सके कि ‘नो वन किल्ड सुशांत।’

Women eyes creating magic behind the lens

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By: Ankita Mukherjee

We, the audience love to watch films munching on some popcorns and relaxing in the air-conditioned rooms, 8 out of 10 people never look into the details of that film. Who is the director of the film? Did a woman direct it? What is her name? –these sorts of questions are asked by the audience in this male-dominated country and its equal driven film industry. Still now after entering the 21st century, people can’t believe a film can be directed and managed by a woman!

In recent times, a lot more women are getting behind the camera creating some magic, they are bringing a fresh perspective with a diversity of mind-boggling concepts hitting the box office.

There was a time when the only women directors like Mira Nair, Aparna Sen, and Deepa Mehta were giving tough competitions to the male directors in the box office and award ceremonials.

Aparna Sen started off her career as an actor but then she transformed herself into a well-known director. She debuted with ‘36 Chowringhee Lane’ in both Bengali and English language, in the year 1981. She took a high flight after then and made one after another maestro film, ‘15, Park Avenue, The Japanese Wife, Sonata’ and many more in Bengali film industry.

Mira Nair debuted with ‘Salaam Bombay’ in the year 1988. But then she came up with ‘Monsoon Wedding’ which grossed over $30 million worldwide. This daring director came up with a film ‘Kamasutra: a tale of love’ back then in the 90s challenging all the directors. It got critical appreciation and even though it was certified as an adult movie by the CBFC, the mind-set of the audience couldn’t acknowledge the film in a straightway. She also rejected the offer from Warner Brothers in directing the Harry Potter series because of the film ‘The Namesake’ based on the novel written by Jhumpa Lahiri. It grossed in the box office over $20.14 million.

Deepa Mehta is well known for her directorial venture ‘The Elements Trilogy’ (FIRE- $501,533, EARTH- $32,011,576 and WATER -$10,422,387). Back then, female directors wanted to portray social melodrama through a larger than life scale. People used to watch them wholeheartedly. But, with the metamorphosis of time, the mind-set of the directors has changed and they all are working on the concept. Female directors have not stayed back in that race!

Nowadays, the contemporary female directors like Zoya Akhtar, Nandita Das, Meghna Gulzar, Alankita Srivastava, Gauri Shinde, Konkona Sen Sharma, Shonali Bose and many more are trying to show the lives of eminent personalities, the true societal issues and women empowering movies to motivate their audiences, even if they could not be commercially successful.

Zoya Akhtar debuted with Zindagi Na Milegi Dobara where the story unfolds about the three friends. It grossed $21 million in the box office. Whereas she came up with her new film Gully Boy about a gully rapper Divine and it is running successfully in the box office with $2242.3 million and still, it’s counting. But, Nandita Das could not hit the box office with her film Manto but it got a lot of critical appreciation. Meghna Gulzar with her Raazi, Gauri Shinde with her Dear Zindagi, Alankrita Srivastava with her Lipstick under my Burkha, Konkona Sen Sharma with her A Death in the Gunj and Shonali Bose with her Margherita with a Straw concentrated on the concept without worrying about the box office, also they earned more of their budget which indicates they flourished commercially too. Kangana Ranaut, a national award-winning actress turned into a director with her film ‘Manikarnika’ which got released this year. She was entangled with a lot of controversies but still having them she wore the directorial crown of her film.

Bengali female directors are now no less than them. Bengali film industry has opened up its grand gate for all the women who wanted to pursue this career maintaining inequality. Starting with Arundhati Devi, and now Aparna Sen, Sudeshna Roy, Nandita Roy is doing some amazing jobs in the film industry!

Now, women are directing, acting and producing a film! Just like a rising sun, women are holding their heads high above all, in pride. With their extraordinary contribution in the film industry, the future lies within their hands and they have proven it years after years, taking Indian cinema to a new horizon. We should always celebrate their efforts. Cheers to the women power!

The journey of Bollywood heroines from ‘Abla’ to ‘Sabla Nari’

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By: Meghna Das Chowdhury

A country’s cinema offers a deep insight into its culture. The reach of the Hindi film industry across India makes it a ready reference for the country’s dominant mores and concerns despite its extraordinary social diversity. But cinema doesn’t just reflect social attitudes, it often plays an important role in shaping them.

Nowhere is this more apparent than in the way Bollywood has changed attitudes towards women. Says Shenjuti Dutta, a film studies professor at St. Xavier’s College Kolkata, “Not only Bollywood but the film industry of every region is inclined towards patriarchy. But it is also true that Bollywood does focus a lot on women-centric films these days.”

Bollywood has been an amalgamation of women-centric films and women playing side roles films. In the 1970s, Zeenat Aman introduced Bollywood viewers to a novel western sensibility with her unconventional personality. She played roles with strong characters in most of her films, like Sheetal in Manoj Kumar’s Roti Kapada Aur Makaan, Rupa in Raj Kapoor’s Satyam Shivam Sundaram, or Roma in Chandra Barot’s Don.

Rumi (Taapsee Pannu) in Manmarziyaan, is most definitely not your typical Bollywood heroine, whether it’s her confusion about love, the way she looked after her ancestral shop or her attitude to social norms. She owned up to her desires and mistakes and lived her life on her own terms. Kangana Ranaut, as Rani in Queen, made us enjoy her transformation from a shy, reserved girl to a woman who owns her life and her fledgling confidence grows over the course of the movie. From Jaya Bachchan to Ratna Pathak Shah, Bollywood mothers have time and again showed why they are the strongest characters in both reel and real life. Swaroop Sampat in Ki & Ka was probably the first Bollywood character to understand that it is okay for a man to sit at home while his wife worked. Sandhya Mridul in Angry Indian Goddesses was a career-oriented woman who never got away without a fight. She readily holds a gun and kills a rapist because the law would do nothing to bring justice.

Even before the liberated women of the 1970s personified by the likes of Zeenat Aman, there were amazing women in leading roles. Fearless Nadia was India’s first stunt girl. But, at the same time, we have women like Simran from Dilwale Dulhania Leh Jayenge; the iconic scene of a woman letting go of father’s running to her lover suggests nothing so much as a transfer of property from one man to another.

From Sajan Kaa Ghaar to Sarabjit the woman evolved as a sister. From Karan Arjun to Kahaani she evolved as a mother. From Dilwale Dulhania Leh Jayenge to NH10 she evolved as a lover. And as these roles evolved, there was a marked change in our society too. Women these days are indeed more independent. They know how to take care of themselves, to make decisions for themselves.

Bollywood now focuses on more woman-centric films. Films like Indian Cabaret, Margarita with a Straw and Pink might have employed the stereotype of the woman as a whore, but also showed her as empowered. Lipstick Under My Burkha politely says, “It takes balls to be a woman”. The film portrays women as autonomous, with real feelings, whether sexual or life desires.

Those desires and dreams are not guided by men. While Bollywood is making an effort to feminize its films it cannot consider the pervasive and entrenched patriarchy in Indian society, get too far ahead of its audience.

Deepika Padukone, Ranbir Kapoor among the few presented with special awards at this year’s IIFA

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By: Talat Mohsin

The International Indian Film Academy Awards (IIFA) celebrated its two-decade journey by giving out special awards this year. Deepika Padukone was awarded with the best actress award for her role in the 2013 action-comedy “Chennai express” while Ranbir Kapoor won the best actor award for the drama movie “Barfi”.

The best film of the last twenty year’s award went to the Hritik Roshan starrer “Kaho Na Pyaar Hai”. Rajkumar Hirani was conferred with the award for his movie “3 idiots”, Pritam won it for “Ae Dil Hai Mushkil”, while the award for outstanding contribution to Indian Cinema was given to choreographer Saroj Khan. The award presented to her by Madhuri Dixit, who also paid attribute to the choreographer by performing on some of her famous songs. The comedian Syed Ishtiaq Ahmed, also known as Jagdeep, was also presented with this award.

These awards display the kind of favoritism that persists in the glittering life of Bollywood. Rani Mukherjee in “black”, Aishwarya Rai in “raincoat”, Alia Bhatt in “Highway”, Priyanka Chopra in “Barfi”, Tabu in “Maqbool”, Ratna Pathak Shah in “Lipstick under my burkha”, Vidya Balan in “the dirty picture” and “Kahani”, Konkona Sen Sharma in “page 3”, Kalki Koechlin in “Margarita with a Straw” and the list continues. Was Deepika’s performance in the comedy better than all of their performances? Or was it just another instance of the elaborate favoritism in Bollywood.

The belief is further strengthened by the choice of best movie made in Bollywood in the last 20 years. Surely, one would think that the award would go to a movie that broke barriers and stereotypes or had a good message.

At least a movie with a good storyline. The likes of movies such as “My name is Khan”, “Udaan”, “Queen”, “Dor”, “Rang De Basanti”, “Amir”, “Gangs of Wasseypur” did not find any mention on the platform. Is it still a competition if the winners are not chosen fairly?

This year the IIFA for the best actress was won by Alia Bhatt for her role in the spy-thriller “Raazi”, while the best actor award for won by Ranveer Singh for his role in the period movie “Padmaavat”. Raazi won the award for the best film of the year.

Kabir Singh negatively portraying doctors, Mumbai Doctor writes to Health Minister

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Shahid Kapoor and Kiara Advani starrer Kabir Singh has become an instant hit. The film portrays a self destructive doctor. The dark character of Kabir Singh didn’t go well in doctor community. A Mumbai based doctor, Dr. Pradeep Ghatge, writes to the health minister, stating his concern over the image it forms for the doctors.

“They have shown absolute nonsense in the movie. Cracking an MBBS exam itself is a very difficult task. How can an alcoholic person with bad habits top the university exam? Doctors will surely stand against this movie. We need to maintain the image of doctors in the society,” Ghatge said while speaking to ANI.

Ghatge also said that the Censor Board should take action against such movies.

“Today, due to the situation of doctors in the county, many are choosing not to join this profession. The Censor Board should take action against the movie. In future, Censor Board should involve Indian Medical Association when movies like these are made,” he said.

‘Kabir Singh’ is the Hindi remake of Telugu hit ‘Arjun Reddy.’ The original blockbuster starred Vijay Deverakonda and Shalini Pandey.

A journalist took to the court after being assaulted by Salman Khan

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Bollywood’s Superstar Salman Khan aka ‘Bhai’ never fails to show up in the news be it with regard to his Blackbuck poaching, rash driving, Pooja Mishra and now assault.

Recently, a TV journalist named Ashok Pandey has made a complaint against him and his bodyguard in the court by filing an FIR stating that he (Bhai) has allegedly assaulted him after he tried to film the actor who was riding a bicycle.

The complaint has been made in the court of RR khan, Additional Chief Metropolitan Magistrate, Andheri, under IPC sections 323 ( causing hurt), 392 (robbery), and 506 ( criminal intimidation).

”The matter will come up for hearing on July 12. AT that time, the court will decide whether the police will be directed to conduct an investigation, or issue summons to the accused”, Gupta told IANS. He adds more by stating that permission has been taken from two bodyguards to film khan which they agreed to but when he started shooting the grudged against his car and started assaulting him. Bhai himself offered his Bhaigiri (bossy) by joining the assault by snatching his mobile phone in order to delete important data from it.

The journalist is now appealing to the police to carry forward a detail inquiry in the matter and take necessary action under the law.

Action director and father of Ajay Devgan, Veeru Devgan dies

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Veeru Devgan, the popular action director behind films such as “Roti Kapda Aur Makaan” and “Mr Natwarlal” and the father of actor Ajay Devgn, passed away in Mumbai on Monday morning. He was 77. The cause of death is immediately not known but family sources said Veeru had not been keeping well for some time. His funeral will be held at Vile Parle West Crematorium at 6 pm.

Veeru, who hailed from Amritsar, ran away from his home to try his luck in films. He initially wanted to become an actor but became a stuntman and later an action choreographer, the veteran stunt director had recalled in several interviews.

Veeru worked in more than 80 Bollywood films and did stunt work for major heroes such as Dilip Kumar, Dharmendra, Vinod Khanna, Rajesh Khanna and Jeetendra among others.

Veeru also turned director with “Hindustan Ki Kasam” in 1999.

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुई उर्मिला मातोंडकर

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बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई हैं। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने उर्मिला का पार्टी में स्‍वागत किया। उर्मिला ने दिल्‍ली में राहुल गांधी से मिलकर कांग्रेस की सदस्‍यता ली। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस उन्‍हें मुंबई नॉर्थ सीट से लोकसभा चुनाव 2019 के दंगल में उतार सकती है। हालांकि कांग्रेस और उर्मिला की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

उर्मिला ने बयान करी करते हुए कहा कि “राहुल गांधी और कांग्रेस से जुड़े सभी लोगों का शुक्रिया जिन्‍होंने मेरा यहां इतना अच्‍छा स्‍वागत किया। ये दिन मेरे लिए बेहद महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि मैं आज सक्रिय राजनीति में कदम रख रही हूं। दरअसल, बचपन से मेरी सोच महात्‍मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्‍लभ भाई पटेल के विचारों से मेल खाती है। मेरी पूरी पर्सनालिटी इनके विचारों से काफी मिलती- जुलती है। इसलिए मैंने कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया है।”

पार्टी में शामिल होते ही उन्‍होंने मोदी सरकार पर हमला करना भी शुरू कर दिया। उन्‍होंने कहा कि संविधान पर कहीं न कहीं आज प्रहार हो रहा है। साथ ही उर्मिला ने यह भी साफ कर दिया कि वह कांग्रेस की विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में आई हैं और कहीं जाने वाली नहीं हैं। वह लंबे समय तक राजनीति में रहेंगी।

बता दें कि मुंबई नॉर्थ सीट पर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का दबदबा रहा है। इसलिए कांग्रेस को इस सीट के लिए हमेशा कड़ा मुकाबला करना पड़ा है। इस सीट से पिछली बार कांग्रेस के संजय निरूपम को भारी मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। बताया जा रहा है कि ऐश्‍वर्या जोशी और शिल्‍पा शिंदे जैसी अभिनेत्रियों के नाम पर भी मुंबई नॉर्थ सीट के लिए चर्चा हुई, लेकिन पार्टी ने इन नामों को गंभीरता से नहीं लिया।

गौरतलब है कि मुंबई की 6 लोकसभा सीटों के लिए चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा। इसी दिन राज्य की 17 अन्य सीटों के लिए भी वोट डाले जाएंगे। यदि उर्मिला मातोंडर को उम्मीदवार बनाया जाता है तो उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा सांसद गोपाल शेट्टी से होगा।

गोविंद भी मुंबई नॉर्थ से लड़ चुके हैं चुनाव अभिनेता गोविंदा ने साल 2004 में पूर्व पेट्रोलियम मंत्री राम नाईक को मुंबई नॉर्थ से पराजित किया था। नाईक इस समय उत्तर प्रदेश के राज्यपाल हैं। नाईक को वर्ष 2009 में संजय निरूपम के हाथों फिर हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन साल 2014 में मोदी लहर के दौरान गोपाल शेट्टी ने निरूपम को पराजित कर दिया। इसके बाद संजय निरूपम मुंबई नॉर्थ-वेस्‍ट सीट पर शिफ्ट हो गए, जहां उनकी अच्‍छी पकड़ है।

Mika Singh offers role to Actor turned Watchman Savi Sidhu in his latest production film, Aadat

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Just a week ago, the heartwarming story of Savi Sidhu, actor-turned-watchman, did rounds on the internet. Savi, who started his Bollywood career with films like Black Friday and Patiala House, currently works for 12 hours a day as a security guard. Film stars like Rajkumar Rao and Anurag Kashyap came in support of the actor and lauded his determination to live with dignity. The news created tremors and the waves reached Mika Singh. He offered him a role in his upcoming production, Bhushan Patel’s Aadat, which stars Karan Singh Grover and Bipasha Basu in the lead roles. Not just this, the singer also told him to stop working as a security guard and join his team instead.

Savi’s friends informed him that Mika was trying to get in touch with him, After a few days, I received a call from him, and I thought it was a prank. Mika was direct. You are not doing this job anymore, you are joining my group,’ he told me. The next day, he sent a car to take me to his house. He gave me some new clothes and food. I start working with him in the next 10 days, he told a newspaper.

“I received a call from him, and I thought it was a prank. Mika was direct. ‘You are not doing this job anymore, you are joining my group,’ he told me. The next day, he sent a car to take me to his house. He gave me some new clothes and food. I start working with him in the next 10 days,”
Savi Sidhu

Mika Singh also promises to recommend him for other roles as well. As well as he plans to find him jobs as an acting coach.

Mika Singh is always in the news for the wrong reasons. Sometimes due to his rash behaviour and sometimes his outspoken attitude. This time, he showed that his heart is made of a gem.

पैसा लेकर भाजपा का प्रचार-प्रसार करने तैयार बॉलीवुड हस्तियां: कोबरापोस्ट के स्टिंग में खुलासा

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हम पैसा लेकर भाजपा और मोदी जी का प्रचार-प्रसार करने के लिए तैयार, कोबरा पोस्ट के स्टिंग आपरेशन में बोली बॉलीवुड हस्तियां

नॉन प्रॉफिट न्यूज़ वेबसाइट कोबरापोस्ट ने आज तीन दर्जन से अधिक बॉलीवुड हस्तियों पर एक स्टिंग ऑपेरशन किया है। स्टिंग ऑपेरशन का नाम “ऑपेरशन कराओके” (Operation Karaoke) रखा गया है। स्टिंग ऑपेरशन में ऐसी बॉलीवुड हस्तियों के पर्दाफाश किया गया है, जो पैसे के लिए लोकसभा चुनावों में अपने सोशल मीडिया पर किसी भी राजनीतिक पार्टी को बढ़ावा देने के लिए तैयार थे।
इन बॉलीवुड हस्तियों में निर्देशक, अभिनेता, गायक, स्टैंड-अप कॉमेडियन और डांसर शामिल हैं। जिन कलाकारों का स्टिंग ऑपेरशन में नाम आया है उनमें गायक अभिजीत भट्टाचार्य, कैलाश खेर, मीका सिंह और बाबा सहगल शामिल है। वहीं अभिनेताओं में जैकी श्रॉफ, शक्ति कपूर, विवेक ओबेरॉय, सोनू सूद, अमीषा पटेल, महिमा चौधरी, श्रेयस तलपड़े, पुनीत इस्सर, सुरेंद्र पाल, पंकज धीर और उनके बेटे निकितिन धीर, टिस्का चोपड़ा, दीपशिखा नागपाल, अखिलेश मिश्रा, मिशाल मिश्रा , सलीम जैदी, राखी सावंत, अमन वर्मा, हितेन तेजवानी और पति गौरी प्रधान, एवलिन शर्मा, मिनिषा लांबा, कोएना मित्रा, पूनम पांडे, सनी लियोन शामिल हैं।

इनके अलावा हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल, राजपाल यादव, उपासना सिंह, कृष्ण अभिषेक और विजय ईश्वरलाल पवार; और कोरियोग्राफर गणेश आचार्य और नृत्यांगना भावना सेठ भी शामिल हैं।

इन कलाकारों ने ठुकराया प्रस्ताव

पैसा लेकर राजनैतिक दल के लिए प्रचार प्रसार करने वाले इन कलाकारों की लिस्ट के अलावा कुछ कलाकार ऐसे भी थे जिन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इन कलाकारों में विद्या बालन, अरशद वारसी, रज़ा मुराद और सौम्या टंडन शामिल है।

बता दें कि कोबरापोस्ट के पत्रकारों ने एक काल्पनिक पीआर एजेंसी से होने का नाटक किया और ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर राजनीतिक पार्टी को बढ़ावा देने के प्रस्ताव के साथ इन हस्तियों से संपर्क किया।

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