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70 साल की हुईं हेमा मालिनी,पहली फिल्म के लिए फ‍िगर की वजह से होना पड़ा था रिजेक्‍ट

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बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का आज जन्‍मदिन है। हेमा मालिनी 70 साल की हो गई हैं। हेमा मालिनी एक्‍टर होने के साथ-साथ एक बेहतरीन डांसर भी हैं। डांस की कई विधाओं में उन्‍हें महारत हासिल है। कई दशक तक सिनेमा पर राज करने वाली हेमा मालिनी को अपनी फ‍िगर की वजह से रिजेक्‍ट होना पड़ा था।

माँ की चाहत ने बना दिया डांसर

तमिल परिवार में पैदा हुईं हेमा मालिनी अपने माता पिता की तीसरी संतान थीं। उनकी मां जया लक्ष्‍मी चक्रवर्ती प्रोड्यूसर थीं। उनकी मां चाहती थीं कि वह डांसर बनें और यही वजह थी कि जब वह पांच साल की थीं तो उनकी मां ने उनके पैरों में घुंघरूं बांध दिए थे। उस उम्र में हेमा प्रोफेशनली डांस तो नहीं कर सकती थीं लेकिन वो एक शुरुआत जरूर थी। हेमा मालिनी ये किस्‍सा खुद बता चुकी हैं कि उनका मन करता था कि वो सहेलियों के साथ खेलें, लेकिन मां डांस करने को कहती थीं। बाद में जब वो थोड़ा बड़ी हुईं तो उन्‍होंने खुद डांस करना शुरू किया।

पहली बार फिल्म के लिए हो गयी थी रिजेक्‍ट

कुछ वक्‍त पहले एक न्‍यूज चैनल के कार्यक्रम में हेमा मालिनी ने अपनी जिंदगी का एक और मजेदार किस्‍सा बताया था। उन्‍होंने बताया था कि जब वह 14 साल की थीं तो एक फ‍िल्‍म के लिए उनका नाम आया, लेकिन जब वह डायरेक्‍टर से मिलीं तो उन्‍हें फ‍िगर की वजह से रिजेक्‍ट कर द‍िया गया। हेमा मालिनी ने बताया कि डायरेक्‍टर उस रोल के लिए मोटी हीरोइन चाहता था और वो उस समय काफी पतली थीं।

वर्तमान में उत्‍तर प्रदेश के मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने 1963 में तमिल फ‍िल्‍म Ithu Sathiyam से एक्‍ट‍िंग डेब्‍यू किया था उसके बाद 1968 में आई फ‍िल्‍म सपनों का सौदागर में पहली बार वह बॉलीवुड में नजर आई थीं। उसके बाद हेमा माल‍िनी ने 200 के करीब फ‍िल्‍मों में काम किया।

64 साल की हुई बिंदास अदाओं से पहचान बनाने वाली अदाकारा रेखा,आज भी खूबसूरती में देती है सबको मात

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हिंदी सिनेमा की सदाबहार अदाकारा भानुरेखा गणेशन की खूबसूरती और बेजोड़ अदाकारी आज भी बरकरार है। दशकों में ना जानें कितने सितारे आते हैं और गर्दिश में चले जाते हैं। मगर कुछ ऐसे भी होते हैं जो लोगों के दिलों में राज करते हैं। जिनके फन से सिनेमा और चमकदार बन जाता है। ऐसी ही शख्सियत हैं रेखा। उम्र बढ़ रही है जमाना करवट ले रहा है, मगर रेखा की खूबसूरती अब भी वैसे ही बरकरार है।

रेखा की जिंदगी

10 अक्टूबर, 1954 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मीं रेखा के पिता जेमनी गणेशन मशहूर तमिल अभिनेता और मां पुष्पावल्ली तेलुगू अभिनेत्री थीं। रेखा को अपने पिता से शुरुआत से ही कोई लगाव नहीं था। एक इंटरव्‍यू में रेखा ने कहा था, ‘मेरे लिए ‘फादर’ शब्द का कोई अर्थ नहीं है। मेरे लिए ‘फादर’ का मतलब चर्च का ‘फादर’ है। ‘ रेखा ने 1966 में तेलुगू फिल्म ‘रंगुला रत्नम’ से अभिनय की शुरुआत की थी। फिल्म में उन्होंने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। रेखा को फिल्मों में आने में दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें अभिनय जारी रखना पड़ा।

निजी जिंदगी

रेखा, शादी और प्रेमप्रसंगों को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। रेखा का नाम लंबे समय तक अमिताभ बच्चन के साथ जुड़ता रहा। दोनों की जोड़ी पर्दे पर भी काफी लोकप्रिय रही। दोनों ने ‘ईमान धरम’, ‘गंगा की सौगंध’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘सुहाग’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया। यश चोपड़ा की ‘सिलसिला’ अमिताभ और रेखा की एक साथ आखिरी फिल्म थी। बॉलीवुड में रेखा को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता हैं जिन्होंने अभिनेत्रियों को फिल्मों में परंपरागत रूप से पेश किये जाने के तरीके को बदलकर अपने बिंदास अभिनय से दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनायी।

हिंदी फिल्मों का सफर

हिंदी फिल्मों में रेखा ने अनजाना फिल्म से अपने अभिनय की शुरूआत की। इस फिल्म में अभिनेता विश्वजीत के साथ उनका चुंबन दृश्य विवाद में पड़ गया जिसे देखते हुये फिल्म को सेंसरबोर्ड द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया। अरसे बाद यह फिल्म दो शिकारी के नाम से प्रदर्शित हुयी। फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुयी। बतौर अभिनेत्री के रुप में उनके सिने कैरियर की शुरूआत 1970 में प्रदर्शित फिल्म “सावन भादो” से हुई। फिल्म में उनके नायक की भूमिका नवीन निश्चल ने निभायी। यह फिल्म टिकट खिडकी पर सुपरहिट साबित हुयी और रेखा के अभिनय को भी सराहा गया।

वर्ष 1978 में प्रदर्शित फिल्म “घर” रेखा के सिने कैरियर के लिये अहम फिल्म साबित हुयी। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये वह पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नामांकित की गयी। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म “खूबसूरत” रेखा की एक और सुपरहिट फिल्म रही। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयी।

रेखा का उमराव जान किरदार आज भी यादगार

वर्ष 1981 में रेखा की एक और महत्वपूर्ण फिल्म “उमराव जान” प्रदर्शित हुयी। मिर्जा हादी रूसवा के मशहूर उर्दू उपन्यास “उमराव जान” पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने उमराव जान का किरदार निभाया। इस किरदार को रेखा ने इतनी संजीदगी से निभाया कि सिने दर्शक आज भी उसे भूल नहीं पाये हैं। इस फिल्म के सदाबहार गीत आज भी दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म “सिलसिला” रेखा की उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल की जाती है। माना जाता है कि यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और रेखा के बीच रिश्ते को रूपहले पर्दे पर पेश किया गया। हालांकि फिल्म टिकट खिड़की पर अधिक कामयाब नही रही लेकिन दर्शकों का मानना है कि यह उनकी उत्कृष्ट फिल्मों में एक है।

वर्ष 1988 में प्रदर्शित फिल्म “खून भरी मांग” रेखा की सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। राकेश रोशन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये रेखा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयीं।

नब्बे के दशक में रेखा ने फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया। वर्ष 1996 में प्रदर्शित फिल्म “खिलाड़ियों का खिलाड़ी” में उन्होंने गैंगस्टर माया का किरदार निभाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। फिल्म में दमदार अभिनय के लिये वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयी।

रेखा ने कई फिल्मों में अपने बिंदास अभिनय से दर्शकों को रोमांचित किया है। इन फिल्मों में उत्सव, कामसूत्र और आस्था जैसी कई फिल्में शामिल हैं। 1970 के दशक की सर्वाधिक चर्चित और सफल फिल्मी जोड़ियों में अमिताभ बच्चन और रेखा का नाम आता है। वर्ष 2010 में उन्हें पदमश्री से अलंकृत किया गया। रेखा ने अपने चार दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 175 फिल्मों में अभिनय किया है।

रणबीर कपूर की दादी कृष्‍णा राज कपूर का निधन, लम्बे समय से थी बीमार

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बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता राज कपूर की पत्नी कृष्‍णा राज कपूर का मुंबई में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 87 वर्ष की उम्र की थी। कृष्‍णा राज कपूर कुछ समय से बीमार चल रही थीं। इस खबर के बाद से बॉलीवुड में शोक का माहौल है। ऐसे में बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां ऋषि कपूर के घर पहुंच रही हैं। बीमारी के चलते कृष्‍णा राज कपूर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह कृष्‍णा राज कपूर ने अंतिम सांस ली। इस खबर के आते ही उनके पुत्र और एक्टर रणधीर ने अपना बयान जारी कर कहा, ”आज सुबह मैंने अपनी मां को खो दिया। ”

योगी आदित्यनाथ को करना चाहिए ‘गैस निकालने’ वाला आसन – ट्विंकल खन्ना

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इंडिया टुडे वुमेन समिट एंड अवॉर्ड्स में ट्विंकल खन्ना पूरी तरह से मजाक के मूड में थीं. ट्विंकल ने सारे सवालों के जवाब बड़े ही दिलचस्प अंदाज में दिए. होस्ट कोएल पुरी ने जब ट्विंकल खन्ना से यूपी के नए सीएम योगी आदित्यनाथ के बारे में पूछा तो मिस फनीबोन्स का जवाब था,

उन्हें एक आसन करने की जरूरत है जिससे गैस बाहर निकालने में मदद मिलती है. लेकिन मुझे लगता है वो फैशन भी चेंज कर रहे हैं. मैंने तो ट्वीट भी किया था कि एशियन पेंट्स को अब ऐलान कर देना चाहिए कि सीजन का नया रंग भगवा है, इस टैगलाइन के साथ- ऑरेंज इज द न्यू ब्राउन

उरी शहीदों पर ओम पुरी का विवादित बयान, देश हुआ शर्मसार

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Newbuzzindia: उरी हमले में मारे गए जवानों के शोक से देश अभी उबर भी नही सका की देश के अलग अलग हिस्से से इस हमले पर अलग अलग प्रतिक्रिया आने लगी है। इसी क्रम में अब जाने-माने अभिनेता ओमपुरी ने शहीदों की शहादत पर विवादित बयान दिया है। ओमपुरी ने कहा कि किसने कहा है जवानों से कि सेना में भर्ती हो और बंदूक उठाए।
 
एक टीवी चैनल के डिबेट शो में ओमपुरी ने यह विवादित बयान दिया है। सैनिकों की शहादत पर फिल्म अभिनेता ओमपुरी ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि “क्या देश में 15-20 लोग भी ऐसे हैं, जिन्हें बम बांधकर पाक भेजा जा सके ? कौन जबरदस्ती लोगों को फौज में भेजता है। किसने उनसे कहा कि वे फौज में जाएं।”

सलमान पर भड़की शिवसेना, कहा-पाकिस्तानी एक्टर्स ज्यादा पसंद है तो खुद भी पाकिस्तान जाने की कर ले तैयारी। 

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Newbuzzindia: भारत-पाकिस्तान सम्बन्ध लगातार बिगड़ रहे है और उरी अटैक के बाद से इन संबंधों में गहरी खाई बन गयी है। और इन्ही संबंधों का असर सीधे तौर पर पाकिस्तानी कलाकारों पर भी पड़ा है जो भारत में रह रहे है और काम कर रहे है।

शिवसेना ने इन पाकिस्तानी कलाकारों को भारत छोड़ने की धमकी दी थी। जिसके बाद बॉलीवुड सितारे सलमान खान पाकिस्तानी कलाकारों के समर्थन में आये थे। और कहा था कि ‘वे कलाकार हैं आतंकी नहीं। सरकार उन्हें परमिशन और वीजा देती है। वो आतंकी थे, ये कलाकार हैं, वर्क परमिट हमारी सरकार देती है उन्हें। सर्जिकल स्ट्राइक में जो मारे गए वो आतंकी थे, उन्हें मारा तो ठीक किया’।

सलमान खान के इस बयान के विरोध में शिवसेना और एमएनएस मैदान में आ गयी है । शिवसेना की मनीषा कायंदे ने सलमान खान को साफ़ लफ़्ज़ों में हिदायत दी है कि ‘आपको पाकिस्तानी कलाकार इतने पसंद है तो आपको भी पाकिस्तान शिफ्ट हो जाना चाहिए। 

राज ठाकरे ने भी सलमान खान के बयान का विरोध करते हुए कहा कि, हमें समझने की जरूरत है कि जौ सैनिक हमारे बॉर्डर की रक्षा करते हुए शहीद होते हैं उनकी पाकिस्तान से कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है। जो गोलियां उन्हें लगती हैं वो असली होती हैं, फिल्मी नहीं जो सलमान अपनी फिल्मों में झेलते हैं।

बिहार के ‘शकुनि मामा’ जस्टिस मार्कण्डेय काटजू पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा!

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NewBuzzIndia: बिहार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायधीश मार्कंडेय काटजू के खिलाफ आज एक स्थानीय अदालत में शिकायत दर्ज कर उन पर देशदोह का मुकदमा चलाए जाने का अनुरोध किया गया है। अधिवक्ता अरविंद कुमार ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ओम प्रकाश की अदालत में काटजू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए, 500, 501 और 505 के तहत आज एक परिवाद पत्र दायर किया। अदालत द्वारा इस मामले की सुनवाई की तारीख निश्चित की जानी अभी बाकी है।

कल किए हुए अपने पोस्ट पर विरोध होने पर काटजू ने सफाई देते हुए फेसबुक पर बाद में लिखा था कि वह बस मजाक कर रहे थे। लेकिन आज फिर उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि बिहारवासियों को उनके खिलाफ शिकायत संयुक्त राष्ट्र में करना चाहिए। जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ था तो उन्होंने अपने सम्मान के लिए भगवान कृष्ण से अपील की थी। उन्होंने आगे कहा है, ‘नीतीश कुमार कहते हैं हम अपने को बिहार का ‘माई-बाप’ मानने लगे हैं। मैं बिहारवासियों का ‘माई-बाप’ नहीं बल्कि उनका शकुनी मामा हूं।’

गौरतलब है कि काटजू ने अपने फेसबुक पोस्ट में पाकिस्तान पर टिप्पणी की थी कि ‘पाकिस्तान को हम कश्मीर एक शर्त पर दे सकते हैं कि उसे कश्मीर के साथ-साथ बिहार भी लेना पडेगा।’

धमाका: एक बार फिर साथ आएँगे सलमान और शाहरुख़ खान..!!

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Newbuzzindia: इस साल शाहरूख खान की फिल्म ‘फैन’ रिलीज हुई है.. वहीं सलमान खान की भी सिर्फ एक फिल्म ‘सुल्तान’ आई। दोनों ही फिल्में यशराज बैनर तले बनी है। लिहाजा, दोनों ही फिल्मों को एक साथ ‘बुसान इंटरनेश्नल फिल्म फेस्टिवल’ में स्क्रीन किया जाएगा।

6 से 15 अक्टूबर तक चलने वाले इस फिल्म फेस्टिवल में अली अब्बास जफर निर्देशित फिल्म ‘सुल्तान’ ओपन सिनेमा सेक्शन में प्रदर्शित की जाएगी। वहीं मनीष शर्मा निर्देशित ‘फैन’ एशियन सिनेमा सेक्शन में दिखाई जाएगी। हम्मम.. कोई शक नहीं कि खान्स फैन इस खबर से बेहद खुश होंगे। आखिर साल खत्म होते होते शाहरूख- सलमान एक साथ आ ही गए।

बहरहाल, फिल्म फेस्टिवल की बात छोड़ दें.. तो सलमान, शाहरूख की कई फिल्में लाइन में हैं। दोनों खान एक के बाद एक धमाकेदार फिल्मों के साथ फैंस के सामने आने वाले हैं।

फ्रांस हमले पर बोली तस्लीमा, “उन्हें ‘इस्लामी आतंकी’ नहीं ‘अल्लाह के सिपाही’ बोलो

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NewBuzzIndia: 

Taslima Nasreen, Writer

धर्म और जातियों के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण लगातार विवादों के घेरे में रहने वाली बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने फ्रांस में हुए आतंकी हमले की नींदा करते हुए एक बार और इस्लाम पर हमला बोल दिया है। 

अभी हाल में उन्होंने एक ट्वीट कर के एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। तस्लीमा ने ट्वीट कर कहा, “इस्लामिक आतंकवादियों ने फ्रांस में 80 लोगों का क़त्ल किया है। वो और भी मारेंगे। वो दुनिया भर में अल्लाह के कानून को फैलाना चाहते हैं।”

Tweet by Taslima Nasreen

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तस्लीमा यही नहीं रुकी, उन्होंने आगे ट्वीट कर के कहा कि “उन्हें इस्लामिक आतंकी ना कहें, उन्हें अल्लाह का सिपाही बोलिए।”

Tweet by Taslima Nasreen

तस्लीमा के लगातार आ रहे ट्वीट्स से यही लगता है की उन्होंने इस्लाम की ख़िलाफ़त कर दी है। ये ऐसी लेखिका हैं जो अपने गैर- मज़हबी विचारों के कारण धर्म के ठेकेदारों और उनके अनुयायियों के निशाने पर रहती हैं।

बकरीद को ले कर के इरफ़ान खान ने दिया विवादित बयान, कहा ‘बकरे की कुर्बानी गलत, देना है तो अपने अज़ीज़ की दो कुर्बानी।’

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NewBuzzIndia:

हैदर, तलवार और पीकू जैसी ना जाने कितने फ़िल्मों में अपने अभिनय से खुद का लोहा मनवाने वाले अभिनेता इरफ़ान खान ने इस्लाम के बड़े पर्व ईद-उल-जुहा (बकरीद) को ले कर के विवादित बयान दे दिया है।

ज़रूर पढ़ें…मोदी को भी नहीं बख़्शा स्वामी ने किया पलटवार, कहा ‘मैं नहीं भागता पब्लिसिटी के पीछे, पब्लिसिटी मेरे पीछे भागती है।’

अपनी आने वाली फ़िल्म मदारी के प्रमोशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इरफ़ान ने कहा कि ‘कुर्बानी का मतलब, अपनी किसी अज़ीज़ चीज़ की कुर्बानी होता है। ये नहीं की आप बाज़ार से दो बकरे खरीद कर लाए और उसकी कुर्बानी दे दें। आपको उन बकरों से कोई लेना देना ही नहीं तो वो कुर्बानी कहा से हुई ? उससे आपकी कौन सी दुआ कुबूल होगी ? आगे उन्होंने कहा कि ‘हर कोई अपने दिल से पूछे की किसी की जान लेने से उसे कैसे कोई दुआ मिल सकती है ?’
अंत में उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि, ‘हमें फिर से ये समझना होगा कि ये त्यौहार बनाए क्यों गए हैं।’

तो मोदी के विरोध से होती है केजरीवाल की कमाई, विरोध करने या विरोध होने पर मिलता हैं लाखों का चंदा

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