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सोमवार, मार्च 8, 2021
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दूरदर्शन भोपाल की भर्तीयों में भारी अनियमितताएं, आरटीआई से हुआ खुलासा

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भोपाल(Bhopal) के दूरदर्शन केंद्र(Dooradarshan Kendra) में प्रादेशिक समाचार एकांश में भ्रष्टाचार और अवैध भर्ती का मामला सामने आया है। जिसमे प्रसार भारती के नियमों को किनारे पर रख वरिष्ठ आईआईएस अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए कर्मचारीयों की अवैध नियुक्ति में लिप्त पाये गए हैं।

आरटीआई(RTI) से मिली जानकारी के अनुसार दूरदर्शन भोपाल द्वारा 23 जनवरी 2014 को प्रसार भारती के निगरानी में 8 संविदा पदों की घोषणा की गई थी। जिसमें एंकर कम संवाददाता ग्रेड- III, संवाददाता, कॉपी एडिटर , ट्रेनी पैकेजिंग लेवल- I, वीडियो पोस्ट-प्रोडक्शन असिस्टेंट ग्रेड- II, ब्रॉडकास्ट एग्जीक्यूटिव ग्रेड- II, जूनियर असाइनमेंट कोऑर्डिनेटर और लाइब्रेरी असिस्टेंट शामिल थे ।

आरटीआई से हुआ भ्रटाचार का खुलासा

आरटीआई से मिली जानकारी से पता चलता है कि प्रसार भारती द्वारा घोषित अंतिम परिणाम में शौकत खान नाम के व्यक्ति का चयन लाइब्रेरी असिस्टेंट के पद पर हुआ था। शौकत खान ने व्यक्तिगत कारणों से कार्यालय ज्वाइन नहीं किया और उसी के साथ मो. इजराइल खान नाम के एक अन्य व्यक्ति को उस रिक्त पद पर बिना प्रक्रीया का पालन किए फर्जी तरीके से नियुक्त कर दिया गया।

यह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के 6 महीने बाद (04/09/2014) बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के प्रसार भारती के भर्ती नियमों को ताक पर रख कर की गई है। आरटीआई से यह भी पाया गया कि मो. इजराइल खान की नियुक्ति सितंबर 2014 में हुई थी जिस दौरान भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी राजीव कुमार जैन प्रादेशिक समाचार एकांश, दूरदर्शन केंद्र भोपाल के निदेशक पद पर नियुक्त थे।

राजधानी भोपाल में प्राइवेट वीडियो वायरल करने का मामला आया सामने

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भोपाल(Bhopal) के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में 23 वर्षीय युवती के न्यूड वीडियो वायरल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी अनूप दीक्षित को गिरफ्तार भी कर लिया है । 2 वर्ष पूर्व इनकी पहचान हुई थी और पहचान प्यार में तब्दील हो गई थी। बताया जा रहा है कि डेटिंग ऐप के माध्यम से इनकी पहचान हुई थी और वीडियो कॉल पर बात करते थे।

डेटिंग ऐप के माध्यम से हुआ था परिचय

23 वर्षीय युवती और आरोपी अनूप दीक्षित का डेटिंग ऐप के माध्यम से 2 वर्ष पूर्व परिचय हुआ था। उसके बाद दोनों में बातचीत शुरू हो गई थी बातचीत प्रेम में बदल गई थी । और फिर यह दोनों वीडियो कॉल पर बात करते थे । उसी दौरान आरोपी द्वारा वीडियोकॉन को रिकॉर्डिंग कर लिया गया था। लगभग यह बातचीत 2 साल तक चलती रही और किसी दिन किसी बात को लेकर दोनों में बिगाड़ हो गया तो आरोपी ने वह वीडियो युवती के परिजनों को सेंड कर दिया।

कॉम्पीटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहे थे

दोनों कंपटीशन एग्जाम की तैयारी कर रहे थे और इसी दौरान इनकी सोशल मीडिया पर एग्जाम की तैयारी को लेकर ही बातचीत शुरू हुई थी और उसके बाद दोनों का तालमेल ज्यादा बढ़ गया था।

डीटीएच के माध्यम से कई युवती या हो रही है शिकार

शहर में पुलिस लगातार अपील कर रही है कि डेटिंग ऐप के माध्यम से उसी व्यक्ति से बातचीत करे जिसे आप जानते हैं। किसी इस तरह की बातें और वीडियो में इस तरह के प्रति ना करें जो आपके प्राइवेट अंग या प्राइवेट चीज को दर्शाते हैं ।

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह समेत कई दिग्गज नेताओं ने राजभवन में सौपा कृषि कानून के खिलाफ ज्ञापन

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह(Digvijay Singh) के नेतृत्व में कांग्रेस के नेता राजभवन(Governor House) पहुंचे और अपना ज्ञापन सौंपा। कई दिग्गज नेता जैसे जयवर्धन सिंह, पीसी शर्मा, कुणाल चौधरी भी शामिल रहे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की तरफ से लिखे गए इस ज्ञापन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से कृषि कानूनों को वापस लेने का आग्रह किया गया है।

नया कृषि कानून किसी भी रूप में देश के अन्न दाताओं के लिए सही नहीं हैं। चार पन्नों के इस ज्ञापन में कुल 9 बिंदुओं के आधार पर बताया गया कि कृषि कानूनों का क्यों इतना विरोध हो रहा है और इन्हें रद्द करना क्यों ज़रूरी है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की तरफ से यह ज्ञापन उनके अतिरिक्त सचिव राजेश कुमार कौल ने स्वीकार किया।

आज कांग्रेस ने भोपाल में कृषि कानूनों के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस नेताओं पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करनी शुरू कर दी। पुलिस ने लाठीचार्ज करने के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़े। पुलिस की इस कार्रवाई में कांग्रेस नेताओं के साथ किसानों, महिलाओं और मीडियाकर्मियों को भी चोट आईं।

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह समेत 20 कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर केन्द्रीय जेल भेजा था। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कांग्रेस किसानों के लिए संघर्ष करती रहेगी। सरकार की इस दमनकारी नीति के विरुद्ध कांग्रेस दबने और डरने वाली नहीं है।

शुक्रवार को भोपाल में हो रहे किसान आंदोलन में पुलिस प्रशासन ने की यह बड़ी कार्यवाही

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किसानों का प्रदर्शन पूरे भारत मे अब उर्ग हो चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chauhan) ने भी किसानों के खिलाफ प्रशासन को लगा दिया है। भोपाल(Bhopal) में धरने पर बैठे किसानों को शुक्रवार देर रात पुलिस ने हटा दिया। पुलिस ने मौजूदा जगह पहुच कर टेंट और माइक भी हटवा दिए। विजय कुमार जो अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा मध्यप्रदेश के संयोजक है उन्होंने बताया कि , किसान आंदोलन के समर्थन में भोपाल के करोंद कृषि उपज मंडी के गेट के सामने संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे शांतिपूर्ण धरने को आधीरात में बलपूर्वक हटाया गया है

उन्होंने बताया कि यह कार्यवाही इस सरकार के किसान विरोधी चेहरे को उजागर करती है। भाजपा की इस तानाशाही की हम सभी निंदा करते हैं। अपने आप को किसान बताने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों को विरोध दर्ज कराने का अधिकार भी नहीं दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि धरने में सीहोर, विदिशा, रायसेन और भोपाल संभाग के किसान संगठन बैठे थे। उसके अलावा जिला स्तर पर भी प्रदर्शन जारी है। बड़ी बात यह है कि 26 जनवरी को विरोध में किसान अपना विरोध दर्ज करने के लिए परेड निकालेगी और इसमें ट्रैक्टर और बाइक रहेंग ।

किसान संगठनों ने भोपाल में 21 जनवरी की रात धरना शुरू किया था, लेकिन यह धरना 48 घंटे भी नहीं चला और पुलिस ने इसे बर्बरता से हटा दिया। यह भी अभी साफ नही हुआ है कि इस किसान आंदोलन के लिए संगठन के अध्यक्ष ने कलेक्टर से अनुमति ली थी या नहीं।

शिवराज सिंह चौहान ने प्यारे मियां मामले पर एसआईटी जांच का निर्देश दिया

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भोपाल में यौन शोषण का आरोपी प्यारे मियां की शिकार बनी बच्चियों में से एक युवती की पिछले दिनों नींद की गोलियां खाने से मौत हो गई थी। इस मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है और जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन करने का फैसला लिया है।

प्यारे मियां की हवस का शिकार बनी बालिकाएं राजधानी के शासकीय बालिक गृह में हैं। इनमें से एक बालिका ने पिछले दिनों नींद की गोलियां खा ली थी और उसे गंभीर हालत में हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। इतना ही नहीं बालिका के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सीधे श्मसान घाट ले जाया गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बालिका की मौत को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी बालिका की मौत के मामले पर चर्चा हुई। साथ ही मामले की जांच एसआईटी से कराने को कहा गया।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने राज्य की सरकार पर तंज कसा और कहा है, बेहद निंदनीय , बेहद शर्मनाक .. शिवराज सरकार में भांजियां कही भी सुरक्षित नहीं? प्रदेश की राजधानी में यौन शोषण की शिकार मासूम बच्चियां बालिका गृह में भी सुरक्षित नहीं? उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा है कि, कितनी अमानवीयता, मृत बच्ची को उसके घर तक नहीं जाने दिया गया, उससे अपराधियों जैसा व्यवहार?

उसके परिवार को अंतिम रीति-रिवाजों से भी वंचित किया गया, यह कैसी निष्ठुर व्यवस्था? कहां हैं जिम्मेदार? प्रदेश को कितना शर्मसार करेंगे? मामला बेहद गंभीर, मामले की सीबीआई जांच हो, बाकी बालिकाओं को भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।

राजधानी भोपाल में हाथरस की घटना को दोहराया गया, कमलनाथ ने शिवराज पर निशाना साधते हुए कहा कि मामा कौनसी भांजी आपकी अब शुरक्षित हैं

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भोपाल का प्यारे मिया यौन शोषण केस ने पिछले साल उत्तर प्रदेश में हुए हाथरस दुष्कर्म की तरह मोड़ ले लिया है। जिस प्रकार से हाथरस में पीड़ित बच्ची और परिजनों के साथ पुलिस और प्रशासन ने बेरहमी की थी, उसी तरह भोपल में भी प्यारे मियां यौन शोषण केस मामले में पीड़ित बच्ची और उसके परिजनों के साथ बेरहमी हुई है।

नींद की गोली खाने से पीड़ित बच्ची की बुधवार को मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद गुरुवार को दिन में 2:15 बजे भोपाल पुलिस की निगरानी में बच्ची के शव को घर भेजने की जगह सीधे भदभदा विश्राम घाट लेजाया गया और बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

प्यारे मियां द्वारा प्रताड़ित की गई पांच नाबालिग बच्चियां बाल संप्रेषण गृह में सुरक्षा के लिहाज से अक्टूबर 2020 से रखी गई थी। उन्हीं मे से एक नाबालिग बालिका को नींद की गोली खाने या खिलाए जाने से मौत हो गई। गुरुवार को मृतका का पोस्टमार्टम होना था, और उसी कारण सुबह 9:00 बजे से ही भारी संख्या में हमीदिया अस्पताल में पुलिस बल तैनात रहा।

बच्ची की माँ और परिजन घर पर अपनी बेटी के शव आने का इंतज़ार कर रहे थे। मर्चुरी में पीड़िता के चाचा और पिता ने शव घर ले जाने की जिद की। लेकिन पुलिस परिजनों को बच्ची का शव सौंपना ही नहीं चाहती थी और फिर प्रशासन ने बच्ची का शव सीधे भदभदा विश्राम घाट ले जाने के निर्देश दिए। जिसके बाद नाबालिग का शव भदभदा विश्राम घाट ले जाया गया और उसका अंतिम संस्कार किया गया।

विश्राम घाट पर पुलिस ने खुद से ही अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर रखी थी। रिश्तेदार लगातार पुलिस से गुहार लगाते रहे कि इतनी जल्दबाजी न करे लेकिन पुलिस ने किसी की एक नही सुनी। महिला रिश्तेदारों ने दो बार अर्थी नहीं तैयार करने दी, लेकिन क्राइम ब्रांच की टीम ने इसे फिर से तैयार करी।

पीड़िता की मां ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। मां का आरोप है कि महिला थाना प्रभारी अजिता नायर, बाल कल्याण समिति के कृपा शंकर चौबे और बालिका गृह की अधीक्षिका अंतोनिया ने उनकी बेटी को जबरदस्ती नींद की गोली खिलाई है।

मां ने आरोप लगाए है कि उनकी बेटी अस्पताल में तड़पती रही लेकिन उन्हें उनकी बेटी से मिलने नहीं दिया गया। हम अपनी बेटी की शादी के सपने देख रहे थे और हमारे सपने ही उजड़ गए। मां ने कहा बेटी को रीति-रिवाज के साथ विदा नहीं कर पाए।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने घटना की निंदा करते हुए शर्मनाक बताया है। कमल नाथ ने ट्वीट कर लिखा है, ‘बेहद निंदनीय, बेहद शर्मनाक है। शिवराज सरकार में भांजियाँ कही भी सुरक्षित नहीं? प्रदेश की राजधानी में यौन शोषण की शिकार मासूम बच्चियाँ बालिका गृह में भी सुरक्षित नहीं ? कितनी अमानवीयता, मृत पीडिता को उसके घर तक नहीं जाने दिया,
उससे अपराधियों जैसा व्यवहार?

कमल नाथ ने आगे लिखा कि, ‘उसके परिवार को अंतिम रीति- रिवाजों से भी वंचित किया गया, यह कैसी निष्ठुर व्यवस्था ? कहाँ है ज़िम्मेदार ? प्रदेश को कितना शर्मशार करेंगे ?
मामला बेहद गंभीर, मामले की सीबीआई जाँच हो, बाक़ी बालिकाओं को भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए। उनके इलाज की भी समुचित व्यवस्था हो। दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो।

मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के चलते , कांग्रेस कल करेगी राजभवन का घेराव

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किसान आंदोलन(Farmer Agitation ) का समर्थन कर रही कांग्रेस(Congress) राजभवन(Governor House) का घेराव करने की तैयारीकर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ(Kamalnath) ने ट्विटर(Twitter) पर 23 जनवरी को राजभवन घेराव में शामिल होने की अपील पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से की है।

कमलनाथ ने ट्वीट में विस्तार से कार्यक्रम बताते हुए लिखा है कि मोदी सरकार के तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में 23 जनवरी को सुबह 11:30 बजे जवाहर चौक पर इकट्ठा होंगे और वहीं से राजभवन कूच करेंगे। कमलनाथ ने अधिक से अधिक संख्या में राजभवन घेराव मे शामिल होने की अपील कांग्रेस नेताओं से की है।

कमलनाथ ने भोपाल के करीबी जिले यानी सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा आदि से भीड़ जुटाने के निर्देश जिला अध्यक्षों और पूर्व मंत्रियों को दिये हैं। इन लोगों पर यह जिम्मेदारी भी रहेगी कि लोगों को जहाँ से लाया गया है उन्हें वापस वहाँ छोड़ना भी होगा।

राजभवन घेराव की अपील को दिग्विजय सिंह और एमपी कांग्रेस ने भी अपने ट्विटर पर शेयर की है। जिससे प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोग जुट सकें। कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जब तक काले कृषि कानून वापस नहीं होते उसका आंदोलन जारी रहेगा।

भोपाल में दर्ज हुआ पहला लव जिहाद का मामला

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भोपाल(Bhopal) में लव जिहाद(Love Jihad) के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020 के तहत पहला मामला दर्ज हुआ है। यह मामला अशोका गार्डन(Ashoka Garden) में दर्ज किया गया है। युवक ने अपना धर्म छुपाकर एक हिन्दू लड़की से प्रेम प्रसंग किया और उसके बाद उसको धर्म परिवर्तन करने का दबाब बनाने लगा।

लव जिहाद के मामले में राजधानी के अशोका गार्डन थाने में पहला केस दर्ज किया गया। आरोपी असद ने आशु बनकर एक छात्रा से दोस्ती की। आरोपी ने अपना धर्म छुपाकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म भी कर डाला। जब छात्रा को युवक की सच्चाई के बारे में पता चला तब अरोपी ने उसे अपना धर्म परिवर्तन करने का दबाब बनाया।

आरोपी ने उसके साथ मारपीट भी की है। हिन्दू संगठन इस मामले को लेकर अशोका गार्डन थाने पहुंच गए और युवक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020′ के तहत मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

एएसपी राजेश सिंह भदौरिया ने कहा कि बताया कि दोनों की दोस्ती वर्ष 2019 से थी। और लड़का और लड़की दोनों जब रायसेन गए तब युवक के धर्म के बारे में लड़की को पता चला था। पुलिस ने 3/5 धर्म स्वतंत्र कानून की धारा और 376 के तहत मामला दर्ज किया है।

विवादित जमीन का आरएसएस से कोई लेना देना नहीं, भोपाल पुलिस ने जबरन डाली पेंच

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रविवार को राजधानी के हनुमानगंज, टीलाजमापुरा और गौतम नगर थाना क्षेत्रों में लगी धारा 144 सोमवार रात को हटा ली गई है। यहां स्थिति सामान्य है। मंगलवार से सभी दुकानें खुलने लगेंगी। राजदेव कालोनी स्थित जिस भूखंड पर बांउड्री वाल का निर्माण होना है वहां ज्यादातर दुकानें बंद रहीं।

राजदेव कॉलोनी की जिस 37,268 वर्ग फीट जमीन का कब्जा दिलाने को लेकर रविवार को तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू और 11 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लगाई गई थी। ऐसा बताया जा रहा है कि यह जमीन राजदेव जनसेवा न्यास के नाम पर है।

जमीन के सामने संघ कार्यालय है और ट्रस्ट के सभी सदस्य संघ से जुड़े हुए हैं, लेकिन दस्तावेज बताते हैं कि उस विवाद से संघ का कोई नाता नहीं है। संघ के मध्यभारत प्रांत प्रचार प्रमुख ओमप्रकाश सिसौदिया ने भी कहा कि विवाद से संघ का कोई संबंध नहीं है।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने भी कहा कि जमीन ट्रस्ट की है। कुछ लोग कह रहे हैं कि ट्रस्ट ने इसे आरएसएस को दान कर दी जो पूर्णत: गलत है। ट्रस्ट ऐसा कर भी नहीं सकता। पूरा मामला वक्फ बोर्ड, न्यास और शेख इस्माइल व सुलेमान के बीच था। संघ कभी भी इसमें पक्षकार नहीं रहा। हर न्यायालय में ट्रस्ट के पक्ष में फैसला आया। कोर्ट के फैसले के आधार पर ही पिछले साल दिसंबर में जमीन का कब्जा ट्रस्ट को सौंपा गया।

टीकाकरण के दूसरे दिन राजधानी के जेपी अस्पताल में था सन्नाटा ,टीका सेंटर पर कोई वालियंटीयर नही था समय पर मौजूद

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मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh) में कोरोना वैक्सीनेशन(Corona Vaccine) अभियान के तहत भोपाल(Bhopal) में सोमवार को वैक्सीनेशन का दूसरा दिन है। जेपी अस्पातल में सुबह 9 बजे से सेंटर शुरू होने के डेढ़ घंटे बाद यानी लगभग 10:30 बजे पहले फ्रंट लाइन वर्कर वैक्सीन पहुंचा। आज भोपाल के 12 सेंटर पर सुबह 9 बजे से वैक्सीन रजिस्टर्ड लोगों को लगाना है।

पहले फेज के पहले डोज के लिए 1200 लोगों को वैक्सीन लगना था, लेकिन करीब 50% ने ही टीका लगवाया। हालांकि एम्स और चिरायु अस्पताल में वैक्सीनेशन 100% रहा। यहां पर सभी 100 रजिस्टर्ड वर्कर्स ने वैक्सीनेशन कराया।

भोपाल में देर रात तक कई सेंटर पर वैक्सीन लगाया गया, लेकिन उसके बाद भी लक्ष्य से यह काफी कम रहा। पहले दिन 1200 हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया था। अब डॉक्टरों को उम्मीद है कि सोमवार को यह संख्या काफी बढ़ जाएगी। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर आईडी चौरसिया ने मीडिया को बताया कि वह पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं। टीका लग जाने के 32 घंटे बाद भी उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई।