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Video: पुलवामा हमले पर कांग्रेस ने माफी सरकार से पूछे 10 प्रश्न

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कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज कांग्रेस दफ्तर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मोदी सरकार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। प्रेस वार्ता में सुरजेवाला ने सरकार से 10 प्रश्न भी पूछे।

वीडियो में देखें सुरजेवाला की प्रेस वार्ता के प्रमुख अंश

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लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण लाईवः भाजपा की बुराई करते करते लोग देश की बुराई करने लगते हैं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय लोकसभा में भाषण देते हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दे रहे हैं। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब एक गरीब ने दिल्ली की सल्तनत को चुनौती दी तो कांग्रेस इसे पचा नहीं पा रही है।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बगैर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इनके लिए AD का मतलब आफ्टर डायनेस्टी और BC का मतलब बिफोर कांग्रेस है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि दुख होता है कि लोग मोदी और बीजेपी की आलोचना करते-करते लोग देश की बुराई करने लगते हैं।

हमारे लाईव ब्ल़ॉग पर पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में भाषण और उस से जुड़ी अन्य लाईव अपडेट्स

हां, भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए मेरा इस्तेमाल कियाः अन्ना हजारे

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हां, भाजपा ने 2014 में मेरा इस्तेमाल किया। हर कोई जानता है कि लोकपाल के लिए मेरा आंदोलन ही था जिसने भाजपा और आम आदमी पार्टी को सत्ता में पहुंचाया। लेकिन अब मैंने उनसे सब संबंध खत्म कर दिए हैं। 30 जनवरी से अपने गांव रालेगण-सिद्धि में भूख हड़ताल पर बैठे समाजसेवी अन्ना हजारे ने मीडिया को संबोधित करते हुए बात कही। अन्ना हजारे ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार केवल देश के लोगों को गुमराह कर रही है और देश को निरंकुशता की ओर अग्रसर कर रही है। केन्द्र के साथ ही महाराष्ट्र सरकार पर भी हमला बोलते हुए अन्ना ने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार पिछले चार सालों से झूठ बोल रही थी। यह झूठ कब तक जारी रहेगा? राज्य सरकार का दावा है कि मेरी 90 प्रतिशत मांगें भी गलत हैं। इस सरकार ने देश के लोगों को निराश किया है।

समाजसेवी हजारे ने आगे कहा कि वह लोग जिनको 2011 और 2014 में उनके आंदोलन को लाभ हुआ, अब उन्होने इन मांगों से मुंह मोड़ लिया और पिछले पांच वर्षों में उन्हें लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। अन्ना ने भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वह कहते रहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री आएंगे और मेरे साथ मुद्दों पर चर्चा करेंगे। लेकिन मैं उन्हें मना कर देता हूं क्योंकि इसेसे लोग भ्रमित होंगे। वह लोग पहले खुद निर्णय लें और मुझे लिखित रूप में सब कुछ दें क्योंकि मैने उनके आश्‍वासनों पर विश्‍वास खो दिया है।

मंत्रियों सहित मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री फडणवीस

भूख हड़ताल पर बैठे अन्ना हजारे से मिलने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे उनके गांव रालेगन सिद्धी पहुंचे। इससे पहले भी राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ अन्ना की बैठक हुई थी। हालांकि, ये दोनो मुलाकातें बेअसर नजर आईं, क्योंकि अन्ना हजारे से साफ तौर पर कहा है कि वे अपनी भूख हड़ताल फिलहाल खत्म करने वाले नहीं हैं। अन्ना के आंदोलन पर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्र और राज्य ने हजारे की मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनकी मांगों के अनुसार, हमने राज्य में लोकायुक्तों के कार्यान्वयन के लिए एक संयुक्त समिति नियुक्त की है। इसी प्रकार केंद्र ने भी लिखित में अपना आश्‍वासन दिया है। मुझे यकीन है कि वह महाराष्ट्र के लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए वे जल्द से जल्द अनशन खत्म करेंगे।

समर्थन में उतरीं शिवसेना-मनसे

इस बीच हजारे का समर्थन करते हुए शिवसेना ने कहा कि सरकार को एक बुजुर्ग इंसान के जीवन के साथ नहीं खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक बयान में कहा कि उपवास के बजाय, हजारे को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आंदोलन का नेतृत्व करना चाहिए और उनकी पार्टी पूरी ईमानदारी के साथ उनका समर्थन करेगी। उधर, मनसे भी हजारे के समर्थन में उतर आई है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को हजारे से मुलाकात भी की। बैठक के बाद राज ने कहा कि हजारे को अपना उपवास खत्म कर देना चाहिए और इसके बजाय भाजपा सरकार को आड़े हाथ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने उनसे कहा कि इन लोगों के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें।

यशवंत सिन्हा का मोदी पर निशाना, बोले- भाजपा में कोई नहीं उठा सकता उनके खिलाफ आवाज

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भाजपा के वरिष्ठ नेता रह चुके पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा इन दिनों खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोल रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले अब विपक्ष के साथ ही भाजपा के अपने नेता भी प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना कर रहे है। शत्रुघन सिन्हा, अरुण शौरी, यशवंक सिन्हा के साथ ही अब केंद्र मंत्री नितिन गडकरी के बयान भी अब पार्टी के लिए मुश्किल खडी कर रहे हैं। इसी बाच अब यशवंत सिन्हा ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी ने सबको मैनेज करके रखा हुआ है। कोई भी उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता। लोकसभा चुनाव 2014 का जिक्र करते हुए सिन्हा ने कहा कि उस समय देश की जनता ने पार्टी को जबरदस्त जनादेश दिया था और वो भाजपा की ऐतिहासिक जीत थी इसमें कोई शक नहीं है लेकिन पीएम मोदी ने लोगों के विश्‍वास के साथ धोखा किया और सब बर्बाद कर दिया।

लालकृष्ण आडवाणी के दौर को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि तब ऐसा कुछ नहीं था। तब सब साथ मिलकर चलते थे। हर कोई पार्टी में अपनी बात रखता था। कई मुद्दों पर चर्चा होती थी और हर खबर पर ध्यान दिया जाता था लेकिन मोदी ने सब बिखेर दिया।

नोटबंदी के मुद्दे पर बोलते हुए सिन्हा ने कहा कि मोदी के इस फैसले से जनता का उनसे मोहभंग हुआ। 1000 के बदले 2000 का नोट लाई, इसमें क्या तर्कसंगत था। छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ लेकिन मोदी ने उनका हाल जानने या समझने तक की कोशिश नहीं की।

बता दें कि सिन्हा भाजपा के बागी नेता बन चुके हैं। हाल ही के दिनों में उन्होंने सपा और बसपा को गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि अगर मोदी को सत्ता से हटाना है तो उत्तर प्रदेश में तीनों एकसाथ हो जाओ।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली में की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी को शेर और विपक्ष को बताया कुत्ते-बिल्ली

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रविवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने रविवार को भाजपा युवा मोर्चा के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जंगल का राजा बताते हुए विपक्ष की तुलना कुत्ते- बिल्ली से की। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा के खिलाफ जुटे विपक्ष में एक भी राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं है।

देवेन्द्र फडणवीस ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोलता हुए कहा कि पीएम मोदी के खिलाफ प्रस्तावित गठबंधन के पास पीएम पद का उम्मीदवार नहीं है। वहां हर दिन एक नया प्रधानमंत्री उम्मीदवार होता है। यह लोग सिर्फ सत्ता के लिए साथ आए हैं। इनके पास देश के लिए कार्य करने की कोई योजना या इच्छाशक्ति नहीं है।

मोदी को बताया जंगल का राजा

फडणवीस का आगे विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि डीएमके के नेता एमके स्टालिन, बसपा सुप्रीमों मायावती, एनसीपी प्रमुख शरद पवार या फिर पश्‍चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ये सभी अपने राज्यों में नेता है। वहीं पीएम मोदी जहां भी जाते हैं लाखों लोगों को अपनी तरफ खींचते हैं। वहीं कुत्ते- बिल्ली सिर्फ अपने क्षेत्रों में राज करते हैं। मोदी जंगल के राजा हैं।

बजट की तारीफ करते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने कार्यक्रम में कहा कि मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट गरीब, किसान और आम आदमी के हित के मुताबिक बनाया गया है।

अगर प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ेंगी तो क्या होगा ?

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राजनीति में प्रियंका गांधी की औपचारिक सक्रियता की घोषणा के बाद भी उनके बारे में अटकलों का दौर खत्म नहीं हुआ है। प्रियंका को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी महासचिव बनाने के अलावा उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी नियुक्त किया है। पूर्वांचल का प्रभार प्रियंका गांधी को देने के बाद से यह अटकल जोर पकड़ रही है कि वे लोकसभा चुनावों में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं।

वाराणसी या बनारस को पूर्वांचल की राजनीति का केंद्र माना जाता है। यहां की राजनीति का असर न सिर्फ पूर्वांचल बल्कि बिहार की कुछ लोकसभा सीटों पर भी होता है। यही वजह थी कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए बनारस की सीट को चुना था। पूर्वी उत्तर प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों में से अधिकांश पर भारतीय जनता पार्टी को 2014 में कामयाबी हासिल हुई थी। भाजपा ने नरेंद्र मोदी के बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ने को इसकी एक प्रमुख वजह के तौर पर पेश किया था।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रियंका गांधी को बनारस से चुनाव लड़ाने की बात चल रही है। इस बारे में बनारस के कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी प्रियंका गांधी से औपचारिक अपील करके उनसे इस सीट से चुनाव लड़ने का आग्रह किया है। बनारस के कुछ कांग्रेस नेताओं की मानें तो आने वाले दिनों में यहां के कुछ प्रबुद्ध लोगों और मुस्लिम समाज की ओर से भी प्रियंका गांधी से लोकसभा चुनाव लड़ने की अपील की जा सकती है।

कांग्रेस आलाकमान की ओर से अब तक ऐसा संकेत नहीं दिया गया है कि प्रियंका गांधी बनारस से चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन, जमीनी स्तर से जो सूचनाएं मिल रही हैं उनसे यही लगता है कि पार्टी इसकी तैयारी पूरी कर रही है कि अगर प्रियंका गांधी को चुनाव लड़ना पड़े तो उस वक्त कोई दिक्कत नहीं आए।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर प्रियंका गांधी वाराणसी लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ती हैं तो इसके क्या राजनीतिक मायने होंगे। इससे पूरे चुनावी परिदृश्य पर क्या असर पड़ सकता है? जो लोग बनारस से प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की वकालत कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे न सिर्फ पूरे पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर सकारात्मक असर पड़ेगा बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी पार्टी को इससे फायदा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों राज्यों में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा संकट यही है कि उसके कार्यकर्ताओं की संख्या लगातार घटी है और नतीजतन पार्टी का सांगठनिक ढांचा कमजोर हुआ है। जो लोग पार्टी में हैं भी, वे भी सिर्फ पार्टी के नाम पर चुनावी जीत हासिल करने की उम्मीद कम ही रखते हैं। स्थानीय नेताओं के मुताबिक ऐसे में प्रियंका गांधी के मैदान में उतरने की खबर भर से जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह का जो माहौल बना है वह उनके वाराणसी से चुनावी मैदान में उतरने से और तेजी से बढ़ सकता है।

प्रियंका गांधी के नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनावी मैदान में उतरने का दूसरा असर यह होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी बनाम प्रियंका गांधी का विमर्श खड़ा हो जाएगा। कांग्रेस इस विमर्श को आगे नहीं भी बढ़ाना चाहेगी तब भी यह विमर्श चल पड़ेगा। इससे भाजपा और उसके सहयोगी दलों का वह विमर्श फीका पड़ सकता है जिसमें वे 2019 के लोकसभा चुनावों को नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी करके विकल्पहीनता को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हुए नरेंद्र मोदी के पक्ष में गोलबंदी करना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी के सामने प्रियंका गांधी के उतरते ही आम लोगों में चाहे-अनचाहे यह संदेश चला जाएगा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी के अलावा प्रियंका गांधी भी एक सशक्त विकल्प हैं।

वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी के चुनाव में उतरने का एक असर यह भी हो सकता है कि मोदी को वाराणसी में ही उलझाकर रखने के मकसद से सपा-बसपा गठबंधन इस सीट पर अपना उम्मीदवार न उतारे। पहले भी इस गठबंधन ने राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी में और सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली में उम्मीदवार न उतारने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अगर प्रियंका बनारस से चुनाव लड़ती हैं और सपा-बसपा अपना उम्मीदवार नहीं उतारते हैं तो नरेंद्र मोदी के लिए यह सीट आसान नहीं रहेगी। तब नतीजा किसी भी ओर जा सकता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो प्रियंका गांधी अगर बनारस से लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतरती हैं तो इससे न सिर्फ इस सीट पर रोचक चुनावी संघर्ष देखने को मिलेगा, बल्कि इसका असर पूरे उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

(सत्याग्रह के लिए हिमांशु शेखर द्वारा लिखे गए आलेख के संपादित अंश साभार)

लोकसभा चुनाव : मोदी और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनीं यह तीन महिलाएं

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Priyanka gandhi Mayawati and mamata banerjee

लोकसभा चुनाव को लेकर मोसम जमने लगा है। वार- जलटवार और आरोप- प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरु हो चुका है। भाजपा अपना लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के चहरे पर लड़ने वाली है तो वही विपक्ष संगठित रूप से चुनाव में उतरने वाला है। 2014 के चुनाव में भाजपी की जीत के पीछे महंगाई जैसे मुद्दे पर महिलाओं का समर्थन की अहम भूमिका थी। इस चुनाव में जहां विपक्ष के पास कई बड़े मिहिला चहरे हैं तो वहीं भाजपा के पास महिला चहरों की कमी दिखाई देगी। भाजपा के पास जो लोकप्रीय और आक्रमक महिला नेता 2014 में थी, वह या तो इस लोकसभा चुनाव में उतरेंगी नही या फिर उनका प्रभाव पिछली बार की तरह नही होगा। सुषमा स्वराज पहले ही अगला चुनाव लड़ने से इंकार कर चुकी है तो स्मृती इरानी पिछला चुनाव हार चुकी है। वहीं उमा भारती का कद भी अब पहले जितना नही रहा। ऐसे में जब चुनाव अभीयान के दौरान विपक्ष की महिला नेता जब प्रधानमंत्री और भाजपा पर सीधा हमला बोलेंगी तो भाजपा को मजबूत और लोकप्रीय महिला नेताओं की कमी जरूर खलेगी।

वहीं विपक्ष की बात करें तो प्रियंका की एंट्री ने कांग्रेस को नई जान दे दी है। राहुल ने भी प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर और महत्वपूर्ण पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देकर अपने इरादे साफ कर दिया हैं। उधर दो अन्य दिग्गज महिला नेता भी इस चुनाव में भाजपा को चुनौती देने को तैयार हैं। ये हैं पश्‍चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती। ये दोनों नेका मोदी और एनडीए गठबंधन को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होते दिख रहे हैं, हालांकि अभी कोई औपचारिक ऐलान होना बाकी है।

बीजेपी छोड़ चुके वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि विपक्ष के पास बीजेपी से ज्यादा मजबूत महिला नेतृत्व है। जनता अगले आम चुनाव में इस नेतृत्व को वोट करेगी और खासतौर पर महिलाओं का समर्थन मिलेगा। बीजेपी के लिए यह परेशान होने का वक्त है, खासतौर पर तीन हिंदीभाषी राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद।

प्रियंका की राजनीति में औपचारिक एंट्री पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्‍न मानाया था। तमाम वरिष्ठ नेताओं ने इसे स्वागतयोग्य फैसला बताया है। हालांकि मायावती और ममता के पास प्रियंका से कहीं ज्यादा अनुभव है और माना जा रहा है कि दोनों अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का चेहरा हो सकती हैं।

मायावती ने जहां उत्तर प्रदेश में अपने सबसे बड़े विरोधी दल समाजवादी पार्टी से पुरानी ’दुश्मनी’ भुलाकर गठबंधन किया, वहीं दूसरी ओर ममता ने पिछले महीने ही कोलकाता में संयुक्त विपक्ष रैली का आयोजन किया था। जिसमें लगभग सभी बड़े विपक्षी दलों के नेता या उनके प्रतिनिधि पहुंचे थे। हालांकि ममता की इस रैली में खुद बीएसपी सुप्रीमो मायावती के ना आने और अपनी जगह अपने प्रतिनिधि सतीश चंद्र मिश्रा को भेजने पर कई तरह के कयास भी लगे।

महिलाओं के लिए मोदी सरकार मे शुरु की कई योजनाएं लोकिन महंगाई पर नही कर पाए काबू
कई ऐसी महिलाओं के हित की योजनाएं हैं जो मोदी सरकार ने ही शुरू कीं। मोदी सरकार ने ’बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया, उज्ज्वला योजना के जरिए ऐसे करोड़ों घरों में मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंचाए जहां आज तक महिलाएं चूल्हे पर खाना पकाती थीं। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने लाखों शौचालयों से भी सबसे ज्यादा महिलाओं को ही लाभ हुआ है। इस सभी योजनाओं के बावजूद मोदी सरकार महंगाई को काबू करने में पूरी तरह से नाकामयाब रही। मोदी की 26 सदस्यीय कैबिनेट में छह महिलाएं हैं और सबसे महत्वपूर्ण पांच सदस्यीय कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी में भी दो महिलाएं (विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण) हैं।

कांग्रेस परिवार के करीबी नेताओं की मानें तो प्रियंका महिलाओं, युवाओं और फर्स्ट टाइम वोटर्स को लुभा सकती हैं। प्रियंका की औपचारिक एंट्री भले ही 2019 में हुई हो, लेकिन वह पिछले करीब 20 सालों से अपने भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्रों अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के दौरान अहम भूमिका निभाती आई हैं।

बीएसपी प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि मायावती का महिला होना कभी उनकी नेतृत्व क्षमता के आड़े नहीं आया। उन्होंने कहा, ’मायावती ने पार्टी को जमीन से उठाकर इस मुकाम तक पहुंचाया है। महत्वपूर्ण बात है कि उन्होंने महिलाओं, दलितों, पिछड़ी जातियों को एकजुट किया है। वह एक राष्ट्रीय नेता हैं।’ ममता बनर्जी वही नेता हैं, जिन्होंने 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार को 2011 के विधानसभा चुनाव में पश्‍चिम बंगाल से उखाड़ फेंका था। वह अपनी सादगी और तेज-तर्रार राजनीतिक लहजे से अलग पहचान बनाती हैं। वह अकसर बीजेपी पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर देश में एक सेक्युलर सरकार की जरूरत पर जोर देती रहती हैं।

शिवराज सरकार ने किया 2000 करोड़ से ज्यादा का कृषी घोटाला, कांग्रेस कराएगी जांच औऱ एफआईआर

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मध्यप्रदेश प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पिछली शिवराज सरकार में हुए फर्जीवाड़े का आए दिन खुलासा हो रहा है। काग्रेस द्वारा की जा रही किसान कर्जमाफी की प्रक्रिया में आ रही गड़बड़ियों पर आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़ा बयान देते शिवराज सरकार पर किसानों के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया है। मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि ‘ पिछली सरकार में फर्ज़ी कर्ज़ का यह बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। हमें लग रहा है कि यह घोटाला 2000 करोड़ से लेकर 3000 करोड़ तक पहुंच सकता है। हम इस घोटाले की जांच कराएंगे और किसी को छोड़ेंगे नहीं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आगे कहा कि, ‘मैं दो-तीन लोगों से मिला, किसी ने भी लोन नहीं लिया है लेकिन लिस्ट में उनके नाम पर लोन दिखाया गया है। कुछ ऐसे भी लोग मिले हैं जिनका नाम गलत तरीके से कर्ज माफी की लिस्ट में शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है और यह दो हजार करोड़ से भी बड़ा हो सकता है। यह बीजेपी शासन का बड़ा घोटाला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी बैंक मैनेजरों के खिलाफ हमारी सरकार कार्रवाई करेगी।

जल्द होगा गौशालाओं का निर्माण

गोशालाओं के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ‘मुझे बड़ा दुःख है कि पिछले 15 वर्षों में जो ख़ुद को गोरक्षक कहते थे, उन्होंने एक भी गोशाला का निर्माण नहीं किया। हमने कल ही निर्णय लिया है कि हम अपने वचन पत्र के वादे के अनुसार गोशालाओं का निर्माण करवाएंगे। हम लक्ष्य तय करेंगे कि कितनी गोशाला कितने समय में हम बना देंके। हम इसकी हर माह समीक्षा करेंगे। हमारी सरकार गोल्फ़ कोर्स की सरकार नहीं है, इसलिए हमने गोल्फ़ कोर्स निरस्त करने का निर्णय लिया है। वहीं राम मंदिर को लेकर कमलनाथ ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को राम मंदिर की याद सिर्फ़ चुनाव के वक़्त ही आती है। पिछले 4.5 वर्षों में उन्हें इसकी याद क्यों नहीं आयी।

पूर्व मुख्यमंत्री गौर को एक बार फिर मिला कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर

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लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस में गौर को लेकर घमासान जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ऑफर को ठुकराने के बाद गौर को फिर एक बार कांग्रेस से चुनाव लड़ने का ऑफर मिला है। इस बार केबीनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने गौर को कांग्रेस में शामिल होने का खुला न्यौता दिया है। वर्मा ने गौर को भोपाल सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया। सज्जन ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी बाबूलाल गौर का हमेशा से सम्मान करती आई है और उनको उसी पार्टी से चुनाव लड़ना चाहिए जहां सम्मान मिलता हो।

बता दें कि इससे पहले दिग्विजय सिंह ने बाबूलाल गौर को कांग्रेस की टिकट पर भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का अॉफर दिया था। जिस पर पहले गौर ने विचार करने की बात कही थी और बाद में प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की नसीहत के बाद उन्होने सिंह का अॉफर ठुकरा दिया था।

हांलाकि गौर ने कांग्रेस का अॉफर ठुकराने के साथ ही भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि भाजपा में अब वरिष्ठ नेताओं की इज्जत नही है।

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