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बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रियंका का मोदी- योगी सरकार पर हमला

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर देश में बढ़ रही बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को आड़े हांथों लिया है। प्रियंका ने उत्तरप्रदेश और बिहार में शिक्षकों के 4 लाख पद खाली होने की एक खबर को शेयर करते हुए अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा,

उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लगभग 2 लाख पद खाली पड़े हैं। युवा नौकरियाँ निकलने का रास्ता देख रहे हैं। धूप-बारिश में खड़े प्रदर्शन कर रहे हैं।

मगर रोजगार देने की बात पर BJP सरकार के लोग मुँह फेर लेते हैं या कहते हैं कि उत्तर भारत के युवाओं में योग्यता नहीं है।

– प्रियंका गांधी

दअरसा दरअसल प्रियंका गांधी अपने इस ट्वीट में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के उस बयान पर हमला बोल रहीं थी जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में नौकरियों की कमी नही है बल्कि उत्तर भारत के युवाओं में योग्यता की कमी है।

प्रियंका गांधी का ट्वीट

9 अगस्त को अहमदाबाद कोर्ट के सामने पेश होंगे राहुल गांधी, कोर्ट ने भेजा समन

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राहुल गांधी को अहमदाबाद की एक अदालत ने 9 अगस्त को पेश होने को लेकर समन भेजा है। अप्रैल को एक चुनावी रैली में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि के मुकदमे के सिलसिले में यह समन जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला ?

राहुल ने मध्यप्रदेश में चुनावी रैली के दौरान अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्प्णी करते हुए उन्हें ‘हत्या का आरोपी’ कहा था। राहुल ने 23 अप्रैल को हुई इस रैली में अमित शाह के खिलाफ हत्या के मामले का हवाला देकर राहुल गाँधी ने हमला बोला था। इस मामले में शाह पांच साल पहले बरी हो चुके हैं। राहुल ने शाह के बेटे जय शाह पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

रैली में अमित शाह पर हमला बोलते हुए राहुल ने कहा था, “हत्या के आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह… वाह! क्या आपने जय शाह का नाम सुना है? वह जादूगर हैं, उन्होंने तीन महीने में 50 हजार रुपये को 80 करोड़ रुपये में बदल दिया।”

एक गैंगस्टर शोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़े मामले में अमित शाह का नाम आया था। ये मामला 2005 का है। हालांकि 2014 में कोर्ट ने कहा कि उन्हें शाह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।

सरकार को अस्थिर करना भाजपा की आदत बन गई है: सिद्धारमैया

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former chief minister of karnataka siddaramaiah
Image of former chief minister of karnataka siddaramaiah, tweeted by @ani

कर्नाटक का सियासी संग्राम लाइव, जानें पल पल की अपडेट

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के 15 विधायकों के इस्तीफे के बाद शुरु हुई सियासी लडाई आज भी जारी है। इस्तीफा दे चुके ज्यादातर विधायक मुंबई जाकर होटल में रुके हुए है। कांग्रेस भाजपा पर विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा रही है तो वही भाजपा इस मामले में अपना हाथ होने के इंकार कर रही है। कांग्रस ने आज सर्कुलर जारी करते हुए सभी विधायकों को विधायक दल की बैठक में पहुंचने को कहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस्तीफा देने वाले कुछ विधायक आज वापिस आ सकते है।

कर्नाटक की इस सियासी लड़ाई की पल-पल की अपडेट से जुड़े रहने के लिए पढ़ते रहें हमारा यह लाइव ब्लाग

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और बीके हरिप्रसाद आज बेंगलुरु जाएंगे।

हमने राज्य में विकास नहीं होने के कारण विधायक पद से इस्तीफा दिया है। कर्नाटक सीएम विधायकों को बताए बिना विदेश यात्रा पर चले जाते है, राज्य में कोई काम नहीं हुआ। हम यहां 2 दिन रुकेंगे और फिर लौटेंगे।

जेडीएस नेता नारायण गौड़ा, मुंबई में

कुल 10 विधायकों (कांग्रेस-जेडीएस) ने स्पीकर और कर्नाटक के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हम अभी भी कांग्रेस पार्टी में हैं लेकिन हमने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। हमें किसी मंत्री पद की उम्मीद नहीं है।

मुंबई में कांग्रेस नेता एसटी सोमशेखर

​​सरकार को अस्थिर करना भाजपा की आदत रही है। यह अलोकतांत्रिक है, लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए जनादेश नहीं दिया। लोगों ने हमें ज्यादा वोट दिए हैं। जेडी (एस) और कांग्रेस दोनों को एक साथ 57% से अधिक वोट मिले है।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

इस बार न केवल बीजेपी की राज्य शाखा बल्कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता भी शामिल हैं। उनके निर्देश पर सरकार को अस्थिर करने के प्रयास किए गए हैं। यह लोकतंत्र और लोगों के जनादेश के खिलाफ है। वे पैसे और पद की पेशकश कर रहे हैं।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

उन्होंने बीजेपी के साथ सांठगांठ की, मैंने उनसे वापस आने और अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया है। हमने उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिका दायर करने और इस्तीफा स्वीकार नहीं करने का अनुरोध करने का फैसला किया है।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

हम अध्यक्ष से भी दलबदल विरोधी कानून के तहत कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध कर रहे हैं। हम अपने पत्र में उनसे अनुरोध कर रहे हैं कि वे न केवल उन्हें अयोग्य घोषित करें बल्कि उन्हें 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोकें।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम से मेरा कोई संबंध नही है। मैं संविधान के अनुसार काम कर रहा हूं। अब तक किसी भी विधायक ने मुझसे मिलने का समय नही माँगा है। अगर कोई मुझसे मिलना चाहता है, तो मैं अपने कार्यालय में उपलब्ध रहूंगा।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष, के आर रमेश कुमार

​​गृहमंत्री राजनाथ सिंह कह रहे हैं कि ‘हम कहीं परेशान नहीं हैं, हमें सरकार गिराने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हम इस बारे में नहीं जानते हैं’। बीएस येदियुरप्पा भी यही कह रहे हैं, लेकिन वह अपने पीए को हमारे सभी मंत्रियों को लेने के लिए भेज रहे हैं।

डीके शिवकुमार, कांग्रेस

अपनी विफलता के लिए किसी पर भी आरोप लगाना कांग्रेस का स्वभाव बन गया है। उनके विधायकों ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उसी के अनुसार निर्णय लेंगे।

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी

बेंगलुरु में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कब्बन पार्क से राजभवन तक मार्च निकाला।

विधायकों के इस्तीफे स्वीकारने से जुड़े प्रश्न पर बोले विधानसभा अध्यक्ष, ” इस मामले में कुछ नियम हैं,उन के अनुसार फैसला लिया जाएगा। मुझे जिम्मेदारी के साछ फैसला लेना होगा। इस मामले में किसी समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया गया है।

बल्लेबाज आकाश विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री मोदी के तेवर सख्त, हो सकती है कार्यवाही

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भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और इंदौर से विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा सरकारी कर्मचारी की बल्ले से पिटाई करने पर प्रधानमंत्री मोदी की तीखी प्रतिक्रिया आई है।

भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि “बीजेपी संसदीय दल की बैठक में पीएम ने आज कहा कि किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार जो पार्टी का नाम खराब करता है, वह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए, फिर चाहे वो कोई भी हो।

रूडी ने आगे कहा कि “पीएम मोदी ने आज पार्टी के सभी सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।

बता दें कि कुछ दिनों पहले भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय का सरकारी कर्मचारी को बल्ले से पीटते हुए वीडियो वायरल हो गया था। जिसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। वहीं इस मामले में आकाश की गिरफ्तारी हुई उर उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मुद्दे पर भाजपा के समर्थन में खड़ी हुई बसपा

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bsp chief mayawati

बहुजन समाज पार्टी के सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के मोदी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आज संसद में कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं क्योंकि इसकी अवधि खत्म हो रही है।

बता दें की कांग्रेस के साथ कई विपक्षी दलों ने कश्मीर में लड़े राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा था कि कश्मीर में बड़ी हिंसा के लिए भाजपा और पीडीपी गठबंधन जिम्मेदार है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा क्यों नही ?

शाह ने लोकसभा में रखा कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव, कांग्रेस ने दिया जवाब

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ग्रह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में जम्मू कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव रखते हुए शाह ने कहा ” मेरा प्रस्ताव है कि 20 दिसंबर से जम्मू-कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए और बढ़ाना चाहिए।”

इसके साथ ही शाह ने कहा कि रमज़ान और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को देखते हुए इस साल के अंत तक कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते है।

कांग्रेस ने किया प्रस्ताव का विरोध

गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव का कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने विरोध करते हुए कहा कि “कश्मीर में आज यह हालत हो गयी है कि हर 6 महीने में वहां राष्ट्रपति शासन बढ़ाना पड़ रहा है। इसका कारण 2015 में भाजपा और पीडीपी के बीच हुआ गठबंधन है।”

तिवारी ने आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आपकी इस लड़ाई में हम आपके साथ है लेकिन आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में आप तभी जीत सकते हो जब लोग आपके साथ हों।

लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा चुनाव क्यों नही ? : तिवारी

शाह द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव करवाए जा सकते है तो फिर विधानसभा चुनाव क्यों नही ?

मोदी कैबिनेट से बाहर हुई मेनका गांधी को मिल सकती है यह बड़ी जिम्मेदारी

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ऐतिहासिक जीत और पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट में कुल 24 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्य मंत्रियों को शामिल किया है।

एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार में कई नए चेहरों को शामिल किया है तो वहीं दूसरी ओर के दिग्गज नेता सरकार से बाहर भी हुए है। सरकार में जिन नेताओं को जगह नही मिली है उनमें अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, राज्यवर्धन राठौर और मेनका गांधी शामिल है। अरुण जेटली और सुषमा स्वराज के बारे में कहा जा रहा है कि यह स्वयं की मर्जी से सरकार में शामिल नही हुए वहीं राठौर और मेनका गांधी को सरकार से बाहर रखने का कारण अभी तक स्पष्ट नही हुआ है।

मेनका गांधी पिछली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थी। 8 बार की सांसद मेनका गांधी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें सरकार में शामिल न करके पार्टी उन्हें लोकसभा का अस्थाई स्पीकर बना सकती है।

मोदी सरकार में शामिल मंत्रियों की सूची

कैबिनेट मंत्री

  1. राजनाथ सिंह ( उत्तर प्रदेश)
  2. अमित शाह (पहली बार) (गुजरात)
  3. नितिन गडकरी (महाराष्ट्र)
  4. सदानंद गौड़ा (कर्नाटक)
  5. निर्मला सीतारमण (राज्यसभा सदस्य) (तमिलनाडु)
  6. राम विलास पासवान (बिहार)
  7. नरेंद्र सिंह तोमर (मध्य प्रदेश)
  8. रविशंकर प्रसाद (बिहार)
  9. हरसिमरत कौर बादल (पंजाब)
  10. थावर चंद गहलोत (राज्यसभा सदस्य) (मध्य प्रदेश)
  11. एस जयशंकर (पहली बार) (दिल्ली)
  12. डॉ. रमेश पोखरियाल (पहली बार) (उत्तराखंड)
  13. अर्जुन मुंडा (पहली बार) (झारखंड)
  14. स्मृति इरानी (उत्तर प्रदेश)
  15. डॉ हर्षवर्धन (दिल्ली)
  16. प्रकाश जावडेकर (राज्य सभा सदस्य) (मध्य प्रदेश)
  17. पीयूष गोयल (राज्य सभा सदस्य)
  18. धर्मेंद्र प्रधान (राज्य सभा सदस्य)
  19. मुख्तार अब्बास नकवी (राज्य सभा सदस्य) (उत्तर प्रदेश)
  20. प्रहलाद जोशी (पहली बार) (कर्नाटक)
  21. महेंद्र नाथ पांडेय (उत्तर प्रदेश)
  22. अरविंद सावंत (पहली बार) (महाराष्ट्र)
  23. गिरिराज सिंह (बिहार)
  24. गजेंद्र सिंह शेखावत (राजस्थान)

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार

  1. संतोष कुमार गंगवार (उत्तर प्रदेश)
  2. राव इंद्रजीत सिंह (हरियाणा)
  3. श्रीपद नाइक (गोवा)
  4. जितेंद्र सिंह (जम्मू कश्मीर)
  5. किरन रिजिजू (अरुणाचल प्रदेश)
  6. प्रहलाद पटेल (पहली बार) (मध्य प्रदेश)
  7. आर के सिंह (बिहार)
  8. हरदीप सिंह पुरी (पंजाब)
  9. मनसुख मांडविया (गुजरात)

राज्य मंत्री

  1. फग्गन सिंह कुलस्ते (मध्य प्रदेश)
  2. अश्विनी चौबे (बिहार)
  3. अर्जुनराम मेघवाल (राजस्थान)
  4. जनरल वीके सिंह (उत्तर प्रदेश)
  5. कृष्णपाल सिंह गुर्जर (हरियाणा)
  6. राव साहब दानवे (महाराष्ट्र)
  7. जी कृष्ण रेड्डी (पहली बार) (तेलंगना)
  8. पुरुषोत्तम रुपाला (गुजरात)
  9. रामदास आठवले (महाराष्ट्र)(राज्यसभा सदस्य)
  10. साध्वी निरंजन ज्योति (उत्तर प्रदेश)
  11. संजीव बालियान (उत्तर प्रदेश)
  12. बाबुल सुप्रीयो (पश्चिम बंगाल)
  13. संजय शामराव (पहली बार)( महाराष्ट्र)
  14. अनुराग ठाकुर (पहली बार)(हिमाचल प्रदेश)
  15. सुरेश अंगाडी (पहली बार) (कर्नाटक)
  16. नित्यानंद राय (पहली बार) (बिहार)
  17. रतनलाल कटारिया (पहली बार) (हरियाणा)
  18. वी मुरलीधरन (पहली बार)(राज्यसभा) (महाराष्ट्र)
  19. रेणुका सिंह (पहली बार)(छत्तीसगढ़ )
  20. सोम प्रकाश (पहली बार) (पंजाब)
  21. रामेश्वर तेली (पहली बार)(असम)
  22. प्रताप चंद(ओडिशा)
  23. कैलाश चौधरी (पहली बार)(राजस्थान)
  24. देबश्री चौधरी (पहली बार) (पश्चिम बंगाल)

कांग्रेस ने एक महीने के लिए चैनलों में प्रवक्ता भेजना बंद किया, बीजेपी भी करे ऐसा: रविश कुमार

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कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एक महीने के लिए चैनलों में प्रवक्ता न भेजने का एलान किया है। कांग्रेस का यह फैसला मीडिया और राजनीति के हित में है। कम से कम कांग्रेस के हित में तो है। क़ायदे से कांग्रेस को यह काम चुनाव के पहले करना चाहिए था जब तेजस्वी यादव ने ऐसा करने के लिए विपक्षी दलों को पत्र लिखा था। चुनाव हारने के बाद समाजवादी पार्टी ने अपने प्रवक्ताओं की टीम भंग कर दी ताकि वे किसी डिबेट में अधिकृत तौर पर जा ही न सकें। यह फ़ैसला कहीं से मीडिया विरोधी नहीं है। वैसे भी मीडिया से संपर्क रखने का एकमात्र तरीक़ा डिबेट नहीं है। कांग्रेस के इस फ़ैसले को 2014 के बाद मीडिया की नैतिकता में आए बदलवा के संदर्भ में देखना चाहिए।

कांग्रेस का यह फ़ैसला अच्छा है मगर कमज़ोर है। उसे प्रवक्ताओं के साथ खलिहर हो चुके सीनियर नेताओं पर भी पाबंदी लगा देनी चाहिए। अगर वे जाना बंद न करें तो अमित शाह से बात कर बीजेपी में ज्वाइन करा देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भरी सभा में अपने सांसदों से कहा कि छपास और दिखास से दूर रहें। किसी ने नहीं कहा कि एक जनप्रतिनिधि को चुप रहने की सलाह देकर प्रधानमंत्री सांसद की स्वायत्ता समाप्त कर रहे हैं। मतलब साफ़ था कि पार्टी एक जगह से और एक तरह से बोलेगी। आपने पाँच साल में बीजेपी सांसदों को चुप ही देखा होगा जबकि उनमें से कितने ही क़ाबिल थे। बिना मीडिया से बोले एक सांसद अपना कार्यकाल पूरा करे यह भयावह है।

कांग्रेस को चुनावों के समय मीडिया के स्पेस में मिली जगह का अध्ययन करना चाहिए। राहुल गांधी को थोड़ी बहुत जगह तो मिली लेकिन बाकी नेताओं को बिल्कुल नहीं। राहुल गांधी की सभा को सिंगल और आधे कॉलम में छापा गया जबकि बीजेपी के हर नेता की सभी को बड़ा कर छापा गया। सरकार की असफलताओं पर पर्दा डाला गया और विपक्ष का निरंतर मज़ाक़ उड़ाया गया। पूरे पाँच साल यही चला है। सारी बहस बीजेपी के थीम को सही मानते हुए की गई। स्क्रीन पर बीजेपी का एजेंडा फ़्लैश करता रहा और कांग्रेस के प्रवक्ता वहाँ जाकर उस बहस को मान्यता देते रहे।

एक सवाल आप सभी पूँछें। क्या मीडिया में विपक्ष दिखता था? वह मार खाते लुटते पिटते दिखता था। खुलेआम एंकर विपक्ष के नेता को पप्पू कहता था। मज़ाक़ उड़ाया गया। मीडिया ने एक रणनीति के तहत विपक्ष और कांग्रेस को ग़ायब कर दिया। कांग्रेस के प्रेस कांफ्रेंस को स्पीड न्यूज़ में सौ ख़बरों के बीच चलाया गया और बीजेपी नेताओं की हर बात बहस हुई। बहस भी एकतरफ़ा हुई। मीडिया ने सरकार के सामने जनता की बात को भी नहीं रखा। एंटी विपक्ष पत्रकारिता की शुरूआत हुई ताकि लोगों को लगे कि मीडिया आक्रामक है। सवाल सरकार से नहीं विपक्ष से पूछा गया। विपक्ष नहीं मिला तो लिबरल को गरियाया गया।

कांग्रेस में नैतिक बल नहीं है। वरना हिन्दी प्रदेशों के तीनों मुख्यमंत्री अब तक व्हाइट पेपर रख सकते थे कि बीजेपी की सरकारों में किस मीडिय को पैसा दिया गया। पैसा देने का मानक क्या था और किस तरह भेदभाव किया गया। कांग्रेस की टीम अब तक अपनी रिपोर्ट लेकर तैयार होती कि कैसे इस चुनाव में मीडिया ने एकतरफ़ा बीजेपी के लिए काम किया। अज्ञात जगहों से आए निर्देशों के मुताबिक़ न्याय पर चर्चा नहीं हुई। कांग्रेस बग़ैर मीडिया से लड़े कोई लड़ाई नहीं लड़ सकती है। उसके मैनिफ़ेस्ट में मीडिया में सुधार की बात थी मगर उसके नेता ही चुप लगा गए।

मैं तो बीजेपी से भी अपील करता हूँ कि वह अपना प्रवक्ता न भेजे। अभी तक गोदी मीडिया के एंकर कम लागत वाली चाटुकारिता और प्रोपेगैंडा कर रहे थे। स्टूडियो में तीन लोगों को बिठाया और चालू। बीजेपी अब कहे कि मोदी सरकार की कामयाबी को ज़मीन से दिखाइये। जब ज़मीन से रिपोर्ट बनेगी तो कई सौ रिपोर्टरों को नौकरी मिलेगी। भले ही संघ की विचारधारा के रिपोर्टर को ही मिले। पर क्या यह संघ के हित में नहीं है कि उसकी बीन पर नाचने वाले एक एंकर न होकर कई रिपोर्टर हों। कम से कम वह अपने समर्थकों को रोजगार तो दिलाए। बीजेपी ने मेरा बहिष्कार किया है फिर भी मैं चाहता हूँ कि वह प्रवक्ता किसी भी चैनल में न भेजे। जब बहिष्कार नहीं किया था और एंकर नहीं बना था तब से इस डिबेट के ख़िलाफ़ लिख रहा हूँ।

डिबेट की प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है। इसकी उपयोगिता प्रोपेगैंडा फैलाने तक ही सीमित है। इसमें सूचना नहीं होती है। सिर्फ धारणा होती है। डिबेट के कारण किसी चैनल के पास कंटेंट नहीं हैं। मेहनती रिपोर्टर हटा दिए गए हैं। एंकरों को लाया गया है जो पूरी सैलरी लेकर चौथाई काम करते हैं। डिबेट में कोई काम नहीं करना होता है। सिर्फ प्रवक्ताओं के आने के समय पर नज़र रखनी होती है। अपना पेट कम रखना होता है और कपड़े ठीक पहनने होते हैं। एक एंकर औसतन दो से तीन घंटे ही काम करता है। मेरी मानें तो डिबेट करने वाले सारे एंकर की सैलरी आधी कर जी जानी चाहिए। डिबेट ने चैनलों की रचनात्मकता को समाप्त कर दिया है। कंटेंट से ख़ाली चैनल एक दिन न चल पाए अगर बीजेपी और कांग्रेस अपना प्रवक्ता न भेजें। ख़ाली हो चुके चैनलों को भरने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस अपनी हत्या की क़ीमत पर क्यों उठाए ?

कांग्रेस को यह क़दम कम से कम एक साल के लिए उठाना चाहिए था। एक महीने तक प्रवक्ता न भेजने से दूसरे नंबर के एंकर मारे जाएँगे। क्योंकि इस दौरान बड़े एंकर छुट्टी पर होते हैं। यूपीए के समय एक पद बड़ा लोकप्रिय हुआ था। राजनीतिक संपादक का। संपादक नाम की संस्था की समाप्ति के बाद यह पद आया। तब भी राजनीतिक संपादक महासचिवों और मंत्रियों के नाम और इस्तीफे की ख़बर से ज़्यादा ब्रेक नहीं कर पाते थे। लेकिन अब तो सूत्र भी समाप्त हो गए हैं। शपथ ग्रहण के दिन तक राजनीतिक संपादक बेकार बैठे रहे। मीडिया के मोदी सिस्टम में किसी को हवा ही नहीं लगी कि कौन मंत्री था। चैनलों के सीईओ राजनीतिक संपादकों को निकाल कर भी काफ़ी पैसा बचा सकते हैं। इनका काम सिर्फ मोदी-शाह के ट्वीट को री ट्वीट करना है। इनकी जगह क़ाबिल रिपोर्टरों पर निवेश किया जा सकता है।

न्यूज़ चैनल तटस्थ नहीं रहे। अब नहीं हो सकते। चैनल सिर्फ सत्ता के प्रति समर्पित होकर ही जी सकते हैं। उन्हें सत्ता में समाहित होना ही होगा। इन चैनलों में लोकतंत्र की हत्या होती है। एंकर हत्यारे हैं। आप खुद भी चैनलों को देखते समय मेरी बात का परीक्षण कीजिए। उम्मीद है मोदी समर्थक भी समझेंगे। वे मोदी की कामयाबी और मीडिया की नाकामी में फ़र्क़ करेंगे। एक सवाल पूछेंगे कि क्या वाक़ई डिबेट में मुद्दों की विविधता है? जनता की समस्याओं का प्रतिनिधित्व है? क्या वाक़ई इन चैनलों की पत्रकारिता पर गर्व होता है?

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है)

बिहार में बोले प्रधानमंत्री मोदी, एक तरफ वोट भक्ति और दूसरी तरफ देशभक्ति की राजनीति

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बिहार के अररिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आज कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश मे आज एक तरफ वोटभक्ति की राजनीति हो रही है तो दूसरी तरफ देशभक्ति की।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि “याद करिए 26/11 को मुम्बई में जब आतंकी हमला हुए था तब कांग्रेस सरकार ने क्या किया था ? तब देश के वीर जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर बदल लेने की इजाजत मांगी थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने उन्हें कुछ भी करने के लिए मन कर दिया।

कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया क्यों क्योंकि वो वोटेभक्ति की राजनीति करती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि ” सबको पता था कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें सजा देने की बजाय हिंदुओं को आतंकी बताने पर ध्यान लगाया।

https://twitter.com/ANI/status/1119516297262452737?s=19

Video: पुलवामा हमले पर कांग्रेस ने माफी सरकार से पूछे 10 प्रश्न

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कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज कांग्रेस दफ्तर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मोदी सरकार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। प्रेस वार्ता में सुरजेवाला ने सरकार से 10 प्रश्न भी पूछे।

वीडियो में देखें सुरजेवाला की प्रेस वार्ता के प्रमुख अंश

https://youtu.be/2IKi9rxCy4A

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