Friday, September 24, 2021
Home Tags Amit Shah

Tag: Amit Shah

योगी आदित्यनाथ से नाराज हुए मोदी शाह, बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

0

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले क्या भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह नाराज है? यह ऐसा सवाल है जो कल से हर उस व्यक्ति के मन मे उठ रहा है जो राजनीति को थोड़ा बहुत भी समझता है।

यूपी में फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव के बीच राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेजी से बढ़ रही है राज्य की सियासत भी चुनावी मोड में नजर आने लगी है यही कारण है कि चुनाव से ठीक पहले होने वाले सियासी उठापटक और दलबदल भी अक्सर देखे जाने लगे हैं।

इस बीच एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर भाजपा ऑरकुस के केंद्रीय नेतृत्व की छटपटाहट साफ़ दिखाई देने लगी है खबर है कि 2017 के चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह ने भले ही योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का ताज पहना दिया था लेकिन अब वही शाह योगी को पसंद नहीं करते हैं इसकी वजह उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही हत्याएं घपले घोटाले के साथ-साथ योगी का कमजोर प्रशासन भी माना जा रहा है जिसमें कई ऐसे फैसले लिए गए जो बाद में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए किरकिरी का सबब बन गए।

योगी से अमिता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाराजगी का एक कारण यह भी है कि वह सत्ता और संगठन के बीच आपसी समन्वय बनाने में नाकाम साबित हुए हैं ताजा सर्वे की मानें तो यूपी के 7 परसेंट से ज्यादा विधायक योगी आदित्यनाथ को हटाने के पक्ष में है वह नहीं चाहते कि योगी मुख्यमंत्री बने रहें क्योंकि इससे आगामी चुनाव में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

बीते दिनों भाजपा के संगठन प्रभारी और आर एस एस के प्रमुख पदाधिकारियों ने भी योगी सरकार के कामकाज का फीडबैक लिया था जिसमें भी नेगेटिव फीडबैक ही मिला था जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास ब्यूरोक्रेट रहे एक पूर्व आईएएस को उपमुख्यमंत्री पद पर बिठाकर सत्ता और संगठन के बीच में सामंजस्य बनाने की बात सामने आई थी लेकिन वह बात आई गई हो गई।

मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री किस कदर नाराज हैं इसकी बानगी कल देखने को मिली जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्म दिवस के दिन भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देना तक मुनासिब नहीं समझा जबकि कल ही इन दोनों ने कई ट्वीट अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए लेकिन दोनों प्रमुख नेताओं को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का जन्मदिन याद नहीं आया इसे राजनीतिक पंडित शुभ संकेत नहीं मान रहे हैं।

आपको बता दें कि पिछले दो सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ को न केवल अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से बधाई दी थी बल्कि योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी को रिप्लाई कर धन्यवाद भी दिया था। वहीं मीडिया की कुछ खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जन्मदिन की बधाई दी है।

आपको बता दें कि इसके पहले योगी आदित्यनाथ के हर जन्मदिन पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री उन्हें सोशल मीडिया पर विश किया करते थे लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि बीते कई दिनों से उत्तर प्रदेश में सरकार में फेरबदल की कई संभावनाएं जताई गई लेकिन अभी तक उसमें अमल नहीं हुआ है हो सकता है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व योगी की कार्यशैली और उनके क्रियाकलापों से खुश ना हो इस कारण भी वहीं से किनारा करना चाह रहा है ताकि आने वाले चुनाव में भाजपा अपना स्टैंड क्लियर कर सके।

बीजेपी का कार्यकर्ता झूठ फैलाने में हुआ नाकाम,सामने आया बंगाल हिंसा का एक और सच

0

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के बाद से भड़की हिंसा में अबतक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से BJP ने अपने 9 कार्यकर्ताओं की मौत का दावा कर रही है। वहीं TMC 7 कार्यकर्ताओं की।

वहीं एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें आंगन में पड़े अपने पिता की को बेटी पानी पिलाने की कोशिश कर रही है और गिरकर रोने लगती है। इस वीडियो को बंगाल हिंसा का बताया जा रहा है। संदीप ठाकुर नाम के एक यूज़र ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि राष्ट्रपति शासन लगाकर बंगाल को सेना के हाथ में दे देना चाहिए।

दरसअल ये आंध्रप्रदेश का वीडियो है। इसका पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है। इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना पीड़ित की बेटी एक बोतल में पानी भरकर अपने पिता को देने के लिए जा रही है लेकिन उसकी मां उसे इस डर से रोक रही है । 50 वर्षीय शख्स ने अपनी बेटी और पत्नी के सामने अंतिम सांस ली।

https://www.indiatoday.in/coronavirus-outbreak/story/heartbreaking-wailing-daughter-fights-mother-water-covid-positive-father-andhra-pradesh-village-1799040-2021-05-05

अपने दिए नारे पर भी अमल नहीं कर पाई BJP, 5 राज्यों को मिलाकर भी नही हुआ 200 पार

0

देश में कोरोना का कहर बरकरार है। ऐसे में बीते दिनों 5 राज्यों में चुनाव हुए है । वहीं आज पश्चिम बंगाल, असम, केरल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे काफी हद तक साफ हो चुके है। बंगाल में ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करती दिख रही है। असम में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए वापसी कर रही है। केरल में भी सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की वापसी हो रही हैम वहीं तमिलनाडु में सत्ता पलट रही है और कांग्रेस-डीएमके गठबंधन बहुमत से सरकार बना रही है। पुद्दुचेरी में अभी तक के रुझानों के अनुसार एनडीए सरकार बना रही है।

  • पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी हैट्रिक बनाने की ओर अग्रसर है। रुझानों में टीएमसी 208 सीटों की बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। नंदीग्राम की सीट भी ममता बचाती नजर आ रही है। वहीं बीजेपी डबल डिजिट से भी कम महज 81 सीटों पर सिमटती दिख रही है। बीजेपी के तमाम बड़े नेता भी अपनी सीट हार रहे है।
  • असम में बीजेपी अपना गढ़ बचाने में कामयाब होती दिख रही है। रुझानों में सत्तारूढ़ एनडीए को 78 सीटों पर बढ़त मिली है जबकि कांग्रेस के नेतृत्व में बने महागठबंधन को 47 सीटों पर बढ़त हासिल हुई है। असम में सरकार बनाने के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है।
  • तमिलनाडु में बीजेपी और एआईएडीएमके का गठबंधन है। यहां पिछले 10 सालों से एआईएडीएमके काबिज है। लेकिन इस बार यहां सत्ता पलट रही है। पूर्व मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि की पार्टी डीएमके सत्ता पर काबिज होती दिख रही है।रुझानों में एआईएडीएमके गठबंधन महज 84 सीटों से आगे है जबकि डीएमके गठबंधन ने 149 सीटों पर बढ़त बना रखी है।
  • केरल में विधानसभा की 140 सीटें है। वर्तमान में यहां सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है।और इस बार भी एलडीएफ दोबारा सत्ता में आ सकती है। रुझानों में एलडीएफ 98 और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) 41 सीटों से आगे है।वहीं तीसरे मोर्चे बीजेपी को एक ही सीट मिलती नजर आ रही है।
  • पुडुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है। कुल 30 सीटों वाले पुडुचेरी में एनडीए की सरकार बन सकती है। 12 सीटों पर आए रुझानों के अनुसार, यहां एनडीए 8 सीटे और यूपीए को 3 सीटे मिल रही है। यहां बहुमत के लिए 16 सीटें चाहिए। चुनाव शुरू होने से कुछ महीने पहले यहां कांग्रेस-डीएमके गठबंधन की सरकार गिर गई थी।

बंगाल चुनाव: खेला होबे, बीजेपी अपनी शतक से भी चूक गई

0

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार तीसरी बार बनना लगभग तय हो गया है। रूझानों में ममता बनर्जी की पार्टी 202 सीटों पर आगे है।

ऐसे में कई बड़े नेताओं में ममता को बधाई दी है। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बधाई देते हुए ट्वीट किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की नफ़रत की राजनीति को हराने वाली जागरुक जनता, जुझारू नेता ममता बनर्जी व टीएमसी के समर्पित नेताओं व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई।

उन्होंने आगे लिखा कि ये भाजपाइयों के एक महिला पर किए गए अपमानजनक कटाक्ष ‘दीदी ओ दीदी’ का जनता द्वारा दिया गया मुंहतोड़ जवाब है।

बता दे कि भाजपा ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव प्रचार किया था। वहीं देश के गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में 200 सीटें जीतने की घोषणा की थी पर भाजपा 100 सीटें भी नहीं हासिल कर सकी।

बता दें कि 294 में बहुमत के लिए 147 सीटें चाहिए जबकि टीएमसी इससे कहीं आगे 200 का आंकड़ा पार कर चुकी है।

बंगाल चुनाव: बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच राहुल गांधी ने रद्द की जनसभाएं, बाकी दलों से भी की ये अपील

0

पश्चिम बंगाल में बढ़ते कोरोना संक्रमण से जनता की सुरक्षा के मद्देनजर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपनी सभी जनसभाएं रद्द कर दी हैं। पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में विधानसभा का चुनाव हो रहा है जिसमें अब अंतिम चरण के ही चुनाव बचे हैं।

राहुल ने अन्य दलों के नेताओं से भी अपील की है कि वह भी पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर जनसभाएं करना बंद कर दें जिससे भीड़ ना बढ़े और कोरोना संक्रमण को रोका जा सके।

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस और वामदलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है प्रधानमंत्री गृहमंत्री लगातार पश्चिम बंगाल में सभाएं कर रहे हैं तो उधर ममता बनर्जी भी सत्ता वापसी का पूरा जोर लगा रही हैं।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाम दल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं बीते दिनों कांग्रेस के 1 उम्मीदवार की कोरोनावायरस कारण मौत भी हो चुकी है यही कारण है कि राहुल गांधी ने अपनी आगामी सभी जनसभाएं कैंसिल कर दी हैं।

पश्चिम बंगाल में कोरोना तेजी से बढ़ रहा है लेकिन चुनावों की आड़ में नेता कोरोनावायरस की गाइडलाइन का पालन नहीं कर पा रहे हैं जिसके कारण लोग अधिक मात्रा में संक्रमित हो रहे हैं।

भाजपा की स्थापना के पीछे थे यह दो चेहरे, कठिन रहा था संघर्ष

0

6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी। कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी के सामने भाजपा खुद को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित करने में कामयाब रही। आज की भारतीय जनता पार्टी पहले जनसंघ के नाम से जानी जाती थी। 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में जनसंघ की स्थापना हुई थी।

1977 में जेपी आंदोलन के बाद जब विभिन्न दलों को मिलाकर जनता पार्टी की सरकार बनी तो जनसंघ भी इसमें शामिल हुई। इस सरकार में दो मंत्री बने-अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी। अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने, वहीं लालकृष्ण आडवाणी को सूचना प्रसारण मंत्रालय मिला। मोरारीजी देसाई के नेतृत्व में बनी यह सरकार ज्यादा दिनों तक चल नहीं पायी। और जनसंघ ने खुद को सरकार से अलग कर लिया।

शुरुआत में पार्टी ने अपनी छवि एक हिंदुत्ववादी पार्टी के रूप में रखी थी। आमतौर पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को भारतीय जनता पार्टी के मातृसंस्था के रूप में देखा जाता है। देश के हिन्दी प्रांतों में पार्टी ने अपना काम शुरू किया। भाजपा के संगठन का काम लालकृष्ण आडवाणी देखते थे लेकिन पार्टी का चेहरा अटल बिहारी वाजपेयी थे। यह देश में मंडल कमीशन का दौर था। लिहाजा उन दिनों भाजपा के लिए खुद की प्रासंगिकता बनाये रखने की चुनौती थी।

लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण आंदोलन छेड़ दिया था। पहले से ही जातिगत आंदोलन के माहौल में अब हिंदुत्ववादभी प्रमुख बिंदु बन चुका था। जहां-जहां आडवाणीका रथ गया, वहां-वहांपार्टी का आधार बढ़ता गया। इस बीच 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मसजिद के विध्वंस की खबर ने पूरे देश को चौंका दिया। भाजपा अब देश की राजनीति में जगह बना चुकी थी।अब लोग इसे कांग्रेस के विकल्प के रूप में देख रहे थे।

1996 में अटलजी के नेतृत्व में केंद्र में पहली बार भाजपा की सरकार बनी, लेकिन बहुमत नहीं होने के कारण यह सरकार 13 दिन ही रही। फिर 1998 में अटलजी दूसरी बार सरकार में आये।अपनी विकास यात्रा के इस मोड़ पर भाजपा ने अपनी सामाजिक और राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए कई क्षत्रपों से गठजोड़ किया। इसमें समता पार्टी के नीतीश कुमार, बसपा की मायावती, बीजद के नवीन पटनायक आदि प्रमुख हैं।

भाजपा की विकास यात्रा का एक ओर अहम पड़ाव रहा पहली बार दक्षिणी राज्य कर्नाटक में येदुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाना। पर, अपने विरोधाभाष के कारण यह सरकार नहीं चली। आज भारतीय जनता पार्टी केंद्र में अपने दम पर सत्ता में है लेकिन अब भी बतौर राष्ट्रीय पार्टी के रूप में राजनीतिक पंडित उस पर कई सवाल उठाते हैं।

आज नरेंद्र माेदी-अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा सबका साथ-सबका विकास का नारा लेकर अपनी विकास यात्रा के अगले चरण पर चल रही है। पश्चिम व उत्तर में अपने परचम लहराने के बाद अब वह पूरब और दक्षिण में भी अपना विजय पताका लहराने की कोशिश में जुटी है।

केंद्रीय मंत्री ने गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड पर पुर्नविचार की अपील की

0

ग्वालियर पहुंचे नरेंद्र सिंह तोमर से सोमवार को संवाददाताओं ने जब किसान आंदोलन और किसानों के गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने के ऐलान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सभी किसान यूनियनों से आग्रह करता हूं कि 26 जनवरी हमारा गणतंत्र दिवस है, यह राष्ट्रीय त्योहार है, यह आजादी बड़ी कुर्बानी के बाद देश को मिली है, किसान के किसी भी कदम से गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित न हो यह जिम्मेवारी किसान की भी है।

किसानों की माली हालत सुधारने के लिए बीते छह सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई कदम उठाए हैं। किसानी का क्षेत्र फायदे का क्षेत्र बने, नए नौजवान भी इस ओर आकर्षित हो सकें, किसान तकनीक का उपयोग करके महंगी फसलों की ओर जा पाए। इसके लिए दो नए कानून और एक बिल में संशोधन कुल मिलाकर तीन नए कानून बनाए गए हैं।

किसान यूनियनों से हर बार यही कहा गया है कि, वह प्रावधान पर चर्चा करें, जिस प्रावधान से किसान को तकलीफ है उस पर विचार करने के लिए और उसमें संशोधन करने के लिए सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है और करना चाहती है मगर यूनियन की तरफ से प्रावधान पर चर्चा नहीं हो पा रही है।

बंगाल प्रचार के लिए भाजपा ने शुरू की “एक मुट्ठी चावल” योजना

0

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (bjp national president) जे पी नड्डा(J.P. Nadda) के बंगाल दौरे के दौरान उनके काफिले पर हमला हुआ था। इसे देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत रखी गई है। नड्डा की पर्सनल सिक्योरिटी की जिम्मेदारी सीआरपीएफ हाथों में है।

जेपी नड्डा बंगाल में पार्टी के ‘एक मुट्ठी चावल’ कार्यक्रम की शुरुआत की। एक मुट्ठी चावल’ कार्यक्रम के तहत बीजेपी कार्यकर्ता राज्य के 48,000 गांवों में किसानों के घरों में जाकर चावल एकत्र करेंगे और उन्हें नए कृषि कानूनों के बारे में बताएंगे ।

जेपी नड्डा ने कहा, पश्चिम बंगाल की जनता अपना मन बना लिया है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि सरकार बनाएं और जनता का आशीर्वाद ले। उन्होंने यह भी कहा कि आज हमने एक मुट्ठी चावल अभियान की शुरुआत की है और हमारे कार्यकर्ता गांव गांव जाएंगे एक मुट्ठी चावल लेंगे और सौगंध दुर्गा मां की खाएंगे कि उनकी लड़ाई बीजेपी का कार्यकर्ता लड़ेगा।

नड्डा ने यह भी कहा कि अभी हमने गीत सुना, मोदी तुम आगे बढ़ो, किसान तुम्हारे साथ हैं। जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बनें हैं किसानों के लिए और खेती के लिए केंद्र सरकार ने छह गुना बढ़ा दिया है।यही यूपीए की सरकार का कृषि बजट 22 हजार करोड़ रुपये था और उसके बाद मोदी जी ने इसे बढ़ाकर एक लाख 34 हजार करोड़ कर दिया है।

सरकारी, निजी, डीम्‍ड सभी संस्‍थानों के लिए होंगे समान नियम

0

कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) को हरी झंडी दे दी है। 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है। नई शिक्षा नीति की उल्लेखनीय बातें सरल तरीके की इस प्रकार हैं:

5 Years Fundamental

  1. Nursery 4 Years
  2. Jr KG 5 Years
  3. Sr KG 6 Years
  4. Std 1st 7 Years
  5. Std 2nd 8 Years

3 Years Preparatory

  1. Std 3rd 9 Years
  2. Std 4th 10 Years
  3. Std 5th 11 Years

3 Years Middle

  1. Std 6th 12 Years
    10.Std 7th 13 Years
    11.Std 8th 14 Years

4 Years Secondary
12.Std 9th @15 Years
13.Std SSC @16 Years
14.Std FYJC @17Years
15.STD SYJC @18 Years

खास बातें :

केवल 12वीं क्‍लास में होगा बोर्ड, MPhil होगा बंद, कॉलेज की डिग्री 4 साल की। 10वीं बोर्ड खत्‍म, MPhil भी होगा बंद,अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा। बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा। अब सिर्फ 12वींं में बोर्ड की परीक्षा देनी होगी। जबकि इससे पहले 10वी बोर्ड की परीक्षा देना अनिवार्य होता था, जो अब नहीं होगा। वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी।

9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी । स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा। 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है। वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी।4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में MA कर सकेंगे.अब स्‍टूडेंट्स को MPhil नहीं करना होगा। बल्कि MA के छात्र अब सीधे PHD कर सकेंगे।

स्‍टूडेंट्स बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स. हायर एजुकेशन में 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 50 फीसदी हो जाएगा। वहीं नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर वो दूसरा कोर्स कर सकता है । हायर एजुकेशन में भी कई सुधार किए गए हैं। सुधारों में ग्रेडेड अकेडमिक, ऐडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल ऑटोनॉमी आदि शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे।वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे।एक नैशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम (NETF) शुरू किया जाएगा. बता दें कि देश में 45 हजार कॉलेज हैं।

शिवराज कैबिनेट का विस्तार: सिंधिया समर्थकों के साथ यह भी लेंगे शपथ

0

मध्यप्रदेश के राज्य सरकार के कैबिनेट का विस्तार तय हो गया है। शिवराज की टीम में दो मंत्री शामिल किए जाएंगे। रविवार 3 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे राजभवन में होगा शपथ सम्मारोह। मंत्रिमंडल विस्तार की सूचना मंत्रालय से राजभवन भेजी गई है और इसकी पुष्टि राजभवन ने कर दी है।

कैबिनेट विस्तार में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत के साथ मध्यप्रदेश के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक भी शपथ लेंगे। मंत्रियों और नए मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाने के लिए रविवार सुबह 11 बजे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भोपाल आएंगी।

उपचुनाव के परिणाम 10 नंवबर को आए थे। इसके बाद से शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की चार दौर की बैठकें हुई। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार सुबह ही राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति मिली है। इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया है।

तुलसी को जल संसाधन व गोविंद को परिवहन व राजस्व विभाग मिलेगा

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि तुलसी सिलावट को जल संसाधन और गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन व राजस्व विभाग मिलना लगभग तय है। शिवराज सरकार सत्ता में आने के बाद सिलावट और राजपूत को यही विभाग सौंपे गए थे। बीजेपी अब इन दोनों को अन्य विभाग देना चाहती थी, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व और सिंधिया के बीच हुई सहमति के बाद दाेनों को एक बार फिर उन्हीं विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

4 पद रह जाएंगे खाली

शिवराज कैबिनेट के 14 सदस्‍यों गोविंद सिंह राजपूत, तुलसीराम सिलावट, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, डॉ. प्रभुराम चौधरी, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंषाना, हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज दंडौतिया, सुरेश धाकड़ और ओपीएस भदौरिया ने चुनाव लड़ा था। इसमें से इमरती देवी, एदल सिंह कंषाना और गिर्राज दंडोतिया चुनाव हार गए थे। इसमें से 2 तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को छह माह का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव के दौरान ही मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब दोनों को फिर से कैबिनेट में लिया जा रहा है। इसके बाद भी 4 पद खाली रह जाएंगे। यानी आगे भी कैबिनेट विस्तार होगा।