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9 अगस्त को अहमदाबाद कोर्ट के सामने पेश होंगे राहुल गांधी, कोर्ट ने भेजा समन

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राहुल गांधी को अहमदाबाद की एक अदालत ने 9 अगस्त को पेश होने को लेकर समन भेजा है। अप्रैल को एक चुनावी रैली में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि के मुकदमे के सिलसिले में यह समन जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला ?

राहुल ने मध्यप्रदेश में चुनावी रैली के दौरान अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्प्णी करते हुए उन्हें ‘हत्या का आरोपी’ कहा था। राहुल ने 23 अप्रैल को हुई इस रैली में अमित शाह के खिलाफ हत्या के मामले का हवाला देकर राहुल गाँधी ने हमला बोला था। इस मामले में शाह पांच साल पहले बरी हो चुके हैं। राहुल ने शाह के बेटे जय शाह पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

रैली में अमित शाह पर हमला बोलते हुए राहुल ने कहा था, “हत्या के आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह… वाह! क्या आपने जय शाह का नाम सुना है? वह जादूगर हैं, उन्होंने तीन महीने में 50 हजार रुपये को 80 करोड़ रुपये में बदल दिया।”

एक गैंगस्टर शोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़े मामले में अमित शाह का नाम आया था। ये मामला 2005 का है। हालांकि 2014 में कोर्ट ने कहा कि उन्हें शाह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।

शाह ने लोकसभा में रखा कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव, कांग्रेस ने दिया जवाब

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ग्रह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में जम्मू कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव रखते हुए शाह ने कहा ” मेरा प्रस्ताव है कि 20 दिसंबर से जम्मू-कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए और बढ़ाना चाहिए।”

इसके साथ ही शाह ने कहा कि रमज़ान और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को देखते हुए इस साल के अंत तक कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते है।

कांग्रेस ने किया प्रस्ताव का विरोध

गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव का कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने विरोध करते हुए कहा कि “कश्मीर में आज यह हालत हो गयी है कि हर 6 महीने में वहां राष्ट्रपति शासन बढ़ाना पड़ रहा है। इसका कारण 2015 में भाजपा और पीडीपी के बीच हुआ गठबंधन है।”

तिवारी ने आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आपकी इस लड़ाई में हम आपके साथ है लेकिन आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में आप तभी जीत सकते हो जब लोग आपके साथ हों।

लोकसभा चुनाव हो सकते है तो विधानसभा चुनाव क्यों नही ? : तिवारी

शाह द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा कि अगर कश्मीर में शांतिपूर्वक लोकसभा चुनाव करवाए जा सकते है तो फिर विधानसभा चुनाव क्यों नही ?

पीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस, खोदा पहाड़ निकली चुहिया : कांग्रेस का पलटवार

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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई पहली और आखरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

वार्ता में राफेल के मुद्दे पर राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह प्रेस कांफ्रेंस कर रहें। मैंने पीएम मोदी से राफेल को लेकर सवाल पूछा था। मैं उन्हें भ्रष्टाचार पर बहस की चुनौती दी थी, लेकिन उन्होंने मुझसे बहस नहीं की।

राफेल के साथ ही 15 लाख के मुद्दे पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि “हमने पीएम मोदी के झूठ को उजागर किया है। हमने बताया कि वह 15 लाख रुपये नहीं दे सकते हैं। 23 तारीख को पता लग जाएगा कि जनता क्या चाहती है। वैसे प्रधानमंत्री मोदी से सवाल क्यों नहीं किया जाता है।”

पीएम की पहली प्रेस वार्ता, खोदा पहाड़-निकली चुहिया: रणदीप सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रेस वार्ता पर हमला बोलते हुए कहा, “मोदीजी की पहली और आखिरी प्रेसवार्ता, अमित शाह की बैसाखी बना। खोदा पहाड़, निकली चुहिया। 1 घंटे का भाषण, पत्रकारों के चेहरे पर थकान, पत्रकारिता पर बहुत सारा प्रवचन, 1 सवाल नहीं, 1 जबाब नहीं।”

https://twitter.com/rssurjewala/status/1129353549207539714

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री ने दिया पार्टी से इस्तीफा

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लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गेगोंग अपांग ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को अपांग नेे भारतीय जनता पार्टी पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धातों पर नहीं चलने का आरोप लगाया और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को इस्तीफा भेज दिय। अपांग ने इस्तीफे में कहा कि मैं यह देखकर निराश हूं कि भारतीय जनता पार्टी अब अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धातों पर नहीं चल रही। बीजेपी अब सत्ता हासिल करने का मंच बन गई है।

अपने इस्तीफे में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा अब एक नेता की मुट्ठी में है, जो विकेंद्रीकरण या लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया से नफरत करता है और उन मूल्यों को नहीं मानता, जिनके लिए पार्टी की स्थापना हुई थी। अरुणाचल प्रदेश की भाजपा करकार पर बोलते हुए अपांग ने कहा कि बीजेपी को अरुणाचल प्रदेश में साल 2014 में जनादेश नहीं मिला था, लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने खरीद-फरोख्त और हर गंदा तिकड़म करके कालिखो पुल को अरुणाचल का मुख्यमंत्री बनवा दिया।

भाजपा नेत्रत्व पर आरोप लगाते हुए गेगोंग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बावजूद बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश में सरकार बनाई। बीजेपी नेतृत्व ने पूर्वोत्तर में कई अन्य बीजेपी सरकारों के गठन के दौरान नैतिकता का कोई ख्याल ही रखा। 10-11 नवंबर को पासीघाट में हुई राज्यस्तरीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान बीजेपी महासचिव राम माधव ने कई सदस्यों और पदाधिकारियों को अपने विचार तक नहीं रखने दिए।

गेगोंग ने आगे कहा कि चुनाव से पहले पेमा खांडू को अरुणाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय न तो उस नियम के अनुरूप है और न उस परंपरा के, जिसका बीजेपी जैसी काडर वाली पार्टी अनुसरण करती है।

7 दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर कल रवाना होने अमित शाह, 28 जनसभाओं को करेंगे संबोधित

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amit shah
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की फाइल फोटो

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी मध्यप्रदेश के चुनावी रण में कूदने के लिए कल दिल्ली से रवाना होंगे। शाह प्रदेश में 7 दिवसीय चुनावी दौरे के दौरान लगभग 28 जनसभाओं को संबोधित करेंगे। सूत्रों के अनुसार अमित शाह इसी बीच कुछ जगहों पर रोड शो भी कर सकते है।

अमित शाह का पूरा कार्यक्रम

अमित शाह के तय कार्यक्रम के अनुसार वह गुरूवार को इंदौर पहुंचेंगे और सबसे पहले बडवानी में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाह बडनगर और शाजापुर में जनसभाओं को संबोधित करेंगे।

16 नवंबर को शाह खजुराहो, टीकमगढ़, सागर और दमोह में जनसभा को संबोधित करेंगे।

18 नवंबर को शाह सिंगरोली, उमरिया, चुरहट और देवतालाब में भी जनसभा और रोड शो कर सकते है। तो 19 नवंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरसिंहपुर, बैतूल और खातेगांव में जनसभा करेंगे।

23 नवंबर को शाह लखनादौन, बालाघाट और सीहोरा में जनसभाओं को संबोधित करेंगे तो 24 नवंबर को अशोक नगर में उनका रोड शो होगा। इसके साथ ही 26 नवंबर को नीमच कुक्षी और सांवेर में अमित शाह की जनसभा होगी।

आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला – मोदी निर्मित तबाही, नोटबंदी से आई : सुरजेवाला

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randeep singh surjewala in bhopal

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को नोटबंदी की दूसरी बरसी पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेस वार्ता में सुरजेवाला ने कहा कि नोटबंदी को अब दो साल हो गये है। लोगों को समझ आ गया है कि नोटबंदी कोई क्रन्तिकारी कदम नही था बल्कि कालेधन को सफ़ेद करने वाली ‘फेयर एंड लवली योजना’ थी। जिसके कारण लाखों लोग बेरोजगार हो गये, हजारों कारखाने बंद हो गये, 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी और देश की अर्थव्यस्था चौपट हो गयी। सुरजेवाला ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जापान में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए ताली बजा-बजाकर देश के गरीब व मध्यम वर्ग का मजाक उड़ाते हुए कह रहे थे कि “घर में शादी है और पैसे नहीं हैं, देखो नोटबंदी का कमाल”। यह भाजपा के अहंकार की आखिरी सीमा थी। सच तो यह है कि जहां एकतरफ नोटबंदी ने किसान, नौजवान, महिलाएं, छोटे व्यवसायी व दुकानदार की कमर तोड़ डाली, तो दूसरी तरफ कालाधन वालों की हो गई ‘ऐश’, जिन्होंने रातों रात सफेद कर लिया सारा कैश।

नोटबंदी घोटाले ने किया सबको बेज़ार,
किसान हों, नौजवान हों, व्यवसायी या दुकानदार,
रोजी गई, गया रोजगार – अर्थव्यवस्था का बंटाधार,
ऐश की कालाधन वालों ने, भुगत रहे हैं ईमानदार,
वोट की चोट से बताएंगे, कि भाजपाई हैं जिम्मेवार

रणदीप सिंह सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा ” दो साल पहले, 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की तबाही को आर्थिक क्रांति का नया सूत्र बताते हुए तीन वादे किये – सारा काला धन पकड़ा जाएगा, फर्जी नोट पकड़े जाएंगे, आतंकवाद व नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। ऐसे में अब दो साल बाद नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान से नोटबंदी पर जवाब मांगने का समय आ गया है.” कांग्रेस मीडिया प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मौके पर भाजपा सरकार से 8 प्रमुख सवाल किये.

सारा कालाधन कहां गया ?

10 दिसंबर, 2016 को मोदी सरकार ने देश की सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि 15.44 लाख करोड़ पुराने नोटों में 3 लाख करोड़ कालाधन है, जो जमा नहीं होगा और जब्त हो जाएगा। सुरजेवाला ने बताया कि “24 अगस्त, 2018 की आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के दिन चलन में 15.44 लाख करोड़ के नोटों में से 99.9 प्रतिशत मतलब 15.31 लाख करोड़ पुराने नोट तो बैंकों में जमा हो गए। बाकी बचा पैसा भी रॉयल बैंक ऑफ नेपाल व भूटान तथा अदालतों में केस प्रॉपर्टी के तौर पर जमा है। तो फिर कालाधन गया कहां ?

फर्जी नोट कहां गए ?

मोदी जी और बीजेपी ने नोटबंदी के समय बड़े-बड़े दावे किये थे कि नोटबंदी से हजारों करोड़ के नकली नोट पकडे जायेंगे। साल 2017-18 आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक 15.44 लाख करोड़ के पुराने नोटों में से मात्र 58.30 करोड़ ही नकली नोट पाए गए, यानि 0.0034 प्रतिशत। क्या नोटबंदी से नकली नोटों पर नकेल कसना भी भाजपाई जुमला निकला ?

क्या ख़त्म हुआ उग्रवाद और नक्सलवाद ?

बीजेपी ने दावा किया था कि नोटबंदी से नक्सलवाद और उग्रवाद ख़त्म हो जाएगा। नोटबंदी के बाद अकेले जम्मू-कश्मीर में 86 बड़े उग्रवादी हमले हुए, जिनमें 127 जवान और 99 नागरिक शहीद हुए। वहीं 1030 नक्सलवादी हमले हुए, जिनमें 114 जवान शहीद हुए। तो क्या मोदी सरकार ने देश को जानबूझकर गुमराह किया?

क्या नए नोट छापने व बांटने की कीमत नोटबंदी की बचत से 300 प्रतिशत अधिक है?

आरबीआई के मुताबिक साल, 2016-18 के बीच नए नोट छापने तथा लिक्विडिटी ऑपरेशन में लगभग 30,303 करोड़ रु. खर्च हुए है, वहीं नोटबंदी में मात्र 10,720 करोड़ रु. वापस जमा नही हो पाए। क्या भाजपाई बताएंगे कि इतने बड़े आर्थिक नुकसान के लिए कौन जिम्मेवार है?

क्या डिजिटल हो गया इंडिया ?

8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के समय देश में 17.71 लाख करोड़ नगद चलन में था। वहीं 28 अक्टूबर, 2018 को चलन में कैश की मात्रा बढ़कर 19.61 लाख करोड़ हो गई है। तो फिर डिजिटल भुगतान कैसे बढ़ा?

नोटबंदी से पड़ी बेरोजगारी की मार ?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी से सीधे तौर पर 15 लाख नौकरियां गईं और देश की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। क्या यह सीधे तौर पर आर्थिक आतंकवाद नहीं?

क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद बनाने का एक बड़ा घोटाला था ?


रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नोटबंदी को कालेधन को सफ़ेद बनाने वाला देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया। सुरजेवाला ने कहा कि “नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा व आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रु. की संपत्ति पूरे देश में खरीदी। सितंबर, 2016 में बैंकों में यकायक 5,88,600 करोड़ रुपया अतिरिक्त जमा हुआ। नोटबंदी वाले दिन, यानि 8 नवंबर, 2016 को भाजपा की कलकत्ता इकाई के खाता नंबर 554510034 में 500 व 100 रु. के तीन करोड़ रुपए जमा करवाए गए। कर्नाटक के पूर्व मंत्री व भाजपा नेता, जी. जनार्दन रेड्डी (बेल्लारी ब्रदर्स) के सहयोगी, रमेश गौड़ा ने नोटबंदी के बाद खुदकुशी कर ली तथा सुसाईड नोट में लिखा कि 100 करोड़ रु. का कालाधन भाजपा नेताओं द्वारा बदला जा रहा था। क्या भाजपा व आरएसएस को नोटबंदी के निर्णय की जानकारी पहले से थी? क्या कारण है कि भाजपा व आरएसएस ने इतने सैकड़ों व हजारों करोड़ की संपत्ति खरीदी व इसे सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया? क्या इसकी जाँच नहीं होनी चाहिए?”

क्या अमित शाह व भाजपा नेताओं की जाँच हुई?

नोटबंदी के बाद मात्र 5 दिनों में यानि, 10 नवंबर से 14 नवंबर, 2016 के बीच अहमदाबाद जिला को -ऑपरेटिव बैंक में 745.58 करोड़ रु. के पुराने नोट जमा हो गए। इस बैंक के डायरेक्टर, भाजपा अध्यक्ष, श्री अमित शाह हैं, जो इससे पहले बैंक के चेयरमैन भी रहे हैं। 7 मई, 2018 के आरटीआई जवाब (A1 व A2) में बताया गया कि देश में किसी भी जिला को-ऑपरेटिव बैंक में जमा हई पुराने नोटों की यह सबसे बड़ी राशि थी। ऐसा क्यों? क्या इसकी जाँच हुई? क्या श्री अमित शाह की जाँच हुई?

रणदीप सुरजेवाला ने 8 सवाल पूछने के बाद कहा कि आज नोटबंदी को 731 दिन बीत गए हैं और देशवासी भुगत रहे हैं. जनता अब सब समझ गयी है और नोटबंदी का जवाब वोटबंदी करके देगी। कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो नोटबंदी के दौरान कालाधन बदलने वालों की जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसे सजा मिलेगी।

क्या इस बार मिज़ोरम में खाता खोल पाएगी भाजपा ?

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पूर्वोत्तर में कांग्रेस के आख़िरी किले में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने है। अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मिज़ोरम का दौरा कर रहे है। भाजपा यहाँ नरेन्द्र मोदी की योजनाओं के सहारे मैदान में उतर रही है। पिछले चुनाव में सभी सीटों पर जमानत जब्त होने के बाद भी भाजपा इस चुनाव में आत्मविश्वास से भरी हुई है। आत्मविश्वास इतना कि पहली बार सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अमित शाह सभी 40 सीटें जीतने की बात कर रहे है। भाजपा यह सब जितना आसान दिखा रही है उतना आसान यह है नही। कांग्रेस पिछले 10 सालों से मिज़ोरम की सत्ता में है। 4 विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद भी कांग्रेस के पास 30 विधायक है। दरअसल भाजपा मिज़ोरम में जीतने और सरकार बनाने के लिए नही बल्कि और कांग्रेस को हराने और खाता खोलकर मिज़ो नेशनल फ्रंट के साथ मिज़ोरम की राजनीति में एंट्री मारना चाहती है।

मिज़ोरम में पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा से भी कम वोट पाने वाली भाजपा इस विधानसभा चुनाव में पहली बार सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन के संस्थापक और बीजेपी नेता हिमंता बिस्वा ने कहा है की पार्टी मिज़ोरम विधानसभा चुनाव जीतेगी और पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। वहीं कुछ दिनों पहले मिज़ोरम में पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद करके आए अमित शाह ने दावा किया था की पार्टी इस बार मिज़ोरम में सभी 40 सीटों पर जीत दर्ज करेगी।


मिज़ोरम में भाजपा अब तक 5 विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। 1993 में 8, 98 में 12, 2003 में 8, 2008 में 9 और 2013 में 17 सीटों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा था। 5 विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भी भाजपा अब तक मिज़ोरम में अपना खाता तक नही खोल पाई है। पिछले विधानसभा चुनाव में 17 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा की सभी 17 सीटों पर जमानत जब्त हो गयी थी। उस चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 1 से भी कम, 37% था। जो की नोटा से भी कम था। ऐसे में अगर हेमंत बिसवा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने और अमित शाह सभी 40 सीटें जीतने का दावा करते है तो प्रश्न उठता है कि यह भाजपा का आत्मविश्वास है या फिर सिर्फ राजनैतिक जुमला है ?

कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद कांग्रेस धीरे-धीरे पूर्वोत्तर से साफ़ होती जा रही है। अब सिर्फ मिज़ोरम में ही कांग्रेस की सरकार है। दरअसल मई 2016 में भाजपा ने पूर्वोत्तर के गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करने के लिए पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए- नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) की स्थापना की थी। इस गठबंधन में भाजपा के साथ नागा पीपल्स पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल और मिज़ो नेशनल फ्रंट आदी दल शामिल है। दरअसल पूर्वोत्तर में अपने पैर पसारने में हमेशा नाकाम रहने वाली भाजपा ने मोदी सरकार आने के बाद असम, मणिपुर और त्रिपुरा में सरकार बना ली। इसके साथ ही नागालैंड और मेघालय में भी भाजपा के समर्थन के साथ पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन की सरकार है।


भाजपा ने पूर्वोत्तर में कांग्रेस विरोधी दलों को एक करके कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने की रणनीति पर काम किया है। इसी रणनीति के तहत भाजपा अब पूर्वोत्तर में कांग्रेस का आखरी किला भी गिराना चाहती है। इसके लिए खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मिज़ोरम जाकर पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद किया। अमित शाह के अलावा राम माधव, असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल और मंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा मिज़ोरम का दौरा कर रहे है। भाजपा किसी भी तरह से कांग्रेस को मिज़ोरम की सत्ता से बाहर करना चाहती है।

ललथनहवला भरोसे कांग्रेस

कांग्रेस पिछले 10 सालों से मिज़ोरम की सत्ता पर काबिज है। ललथनहवला 10 साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री है और 1973 से मिज़ोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष है। इतने लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले वह शायद देश के पहले व्यक्ति है। राजनीति में आने के पहले वह मिज़ोरम के एक कोऑपरेटिव बैंक में असिस्टेंट के तौर पर भी काम कर रहे थे। बाद में वह मिज़ो नेशनल फ्रंट के आंदोलन से जुड़कर इसके विदेश सचिव बन गये। जिसको लेकर ललथनहवला जेल भी गये। 1967 में जेल से छूटने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। उनको पार्टी की ओर से आइजोल जिले का मुख्य संगठनकर्ता बना गिया गया।


1984-86 तक दो साल के लिए ललथनहवला पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। जिसके बाद वह 1989 से 1998 फिर 2008 से लेकर अब तक राज्य के मुख्यमंत्री है। ललथनहवला को मिजोरम में करिश्माई नेता माना जाता है। वह अब तक 9 विधानसभा चुनाव जीत चुके है। मिजोरम में कांग्रेस एक बार फिर ललथनहवला के भरोसे ही चुनाव लड़ रही है।

बागियों का सहारा

2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44.63% वोट पाकर 40 में से 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी मिज़ो नेशनल फ्रंट, 28.65% वोट पाकर सिर्फ 5 सीटें ही जीत पायी। वहीं 1 सीट एमपीसी के खाते में गई थी। मिजोरम में पिछले काफी समय से कांग्रेस में बगावत का सिलसिला चल रहा है। एक के बाद एक कांग्रेस के मौजूदा विधायक पार्टी छोड़ रहे है। कुछ भाजपा में जा रहे है तो ज्यादातर मिज़ो नेशनल फ्रंट का दामन थाम रहे है।


अमित शाह के दौरे के ठीक पहले राज्य के पूर्व मंत्री बुद्धा धन चकमा कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा के साथ चले गये थे। चकमा के पहले कांग्रेस के दो अन्य विधायक पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके है। इसमें पूर्व गृहमंत्री आर. लालजीर्लियना और लालरिनलियाना सैलो शामिल है। यह दोनों नेता एमएनएफ (मिज़ो नेशनल फ्रंट) में शामिल हो गये थे। इन तीनों नेताओं के बाद कांग्रेस विधायक हमिंगडेलोवा खियांगटे ने सोमवार को मिज़ोरम विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। खियांगटे के इस्तीफे के बाद अब विधानसभा में कांग्रेस के कुल 30 विधायक बचे है।

कुल मिलाकर भाजपा यहाँ अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में बिलकुल नही है। खाता खोलने के लिए भी भाजपा को काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। 10 सालों से विपक्ष में बैठी मिज़ो नेशनल फ्रंट के बलबूते भाजपा यहाँ सत्ता में बैठने का ख्वाब देख सकती है लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन न करना भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित होगा। मिज़ो को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले फायदा होता दिख रहा है लेकिन बहुमत के आंकड़े को पाना मुश्किल है। अन्य छोटे दल अगर कांग्रेस कि कुछ सीटें जीतने में कामयाब हो जाते है तो वह छोटे दल ही मिजोरम में किंग मेकर बनेंगे। ऐसे में मुकाबला फिर राहुल गाँधी बनाम अमित शाह का होगा। अमित शाह के पास खोने के लिए कुछ नही होगा। तो वहीं राहुल गाँधी भी कर्नाटक की तर्ज पर सत्ता बचाने के लिए त्याग से पीछे नही हटेंगें।


पूर्वोत्तर में कांग्रेस के आख़िरी किले में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने है। अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मिज़ोरम का दौरा कर रहे है। भाजपा यहाँ नरेन्द्र मोदी की योजनाओं के सहारे मैदान में उतर रही है। पिछले चुनाव में सभी सीटों पर जमानत जब्त होने के बाद भी भाजपा इस चुनाव में आत्मविश्वास से भरी हुई है। आत्मविश्वास इतना कि पहली बार सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अमित शाह सभी 40 सीटें जीतने की बात कर रहे है। भाजपा यह सब जितना आसान दिखा रही है उतना आसान यह है नही। कांग्रेस पिछले 10 सालों से मिज़ोरम की सत्ता में है। 4 विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद भी कांग्रेस के पास 30 विधायक है। दरअसल भाजपा मिज़ोरम में जीतने और सरकार बनाने के लिए नही बल्कि और कांग्रेस को हराने और खाता खोलकर मिज़ो नेशनल फ्रंट के साथ मिज़ोरम की राजनीति में एंट्री मारना चाहती है।

मिज़ोरम में पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा से भी कम वोट पाने वाली भाजपा इस विधानसभा चुनाव में पहली बार सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन के संस्थापक और बीजेपी नेता हिमंता बिस्वा ने कहा है की पार्टी मिज़ोरम विधानसभा चुनाव जीतेगी और पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। वहीं कुछ दिनों पहले मिज़ोरम में पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद करके आए अमित शाह ने दावा किया था की पार्टी इस बार मिज़ोरम में सभी 40 सीटों पर जीत दर्ज करेगी।


मिज़ोरम में भाजपा अब तक 5 विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। 1993 में 8, 98 में 12, 2003 में 8, 2008 में 9 और 2013 में 17 सीटों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा था। 5 विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भी भाजपा अब तक मिज़ोरम में अपना खाता तक नही खोल पाई है। पिछले विधानसभा चुनाव में 17 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा की सभी 17 सीटों पर जमानत जब्त हो गयी थी। उस चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 1 से भी कम, 37% था। जो की नोटा से भी कम था। ऐसे में अगर हेमंत बिसवा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने और अमित शाह सभी 40 सीटें जीतने का दावा करते है तो प्रश्न उठता है कि यह भाजपा का आत्मविश्वास है या फिर सिर्फ राजनैतिक जुमला है ?

कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद कांग्रेस धीरे-धीरे पूर्वोत्तर से साफ़ होती जा रही है। अब सिर्फ मिज़ोरम में ही कांग्रेस की सरकार है। दरअसल मई 2016 में भाजपा ने पूर्वोत्तर के गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करने के लिए पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए- नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) की स्थापना की थी। इस गठबंधन में भाजपा के साथ नागा पीपल्स पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल और मिज़ो नेशनल फ्रंट आदी दल शामिल है। दरअसल पूर्वोत्तर में अपने पैर पसारने में हमेशा नाकाम रहने वाली भाजपा ने मोदी सरकार आने के बाद असम, मणिपुर और त्रिपुरा में सरकार बना ली। इसके साथ ही नागालैंड और मेघालय में भी भाजपा के समर्थन के साथ पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन की सरकार है।


भाजपा ने पूर्वोत्तर में कांग्रेस विरोधी दलों को एक करके कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने की रणनीति पर काम किया है। इसी रणनीति के तहत भाजपा अब पूर्वोत्तर में कांग्रेस का आखरी किला भी गिराना चाहती है। इसके लिए खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मिज़ोरम जाकर पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद किया। अमित शाह के अलावा राम माधव, असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल और मंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा मिज़ोरम का दौरा कर रहे है। भाजपा किसी भी तरह से कांग्रेस को मिज़ोरम की सत्ता से बाहर करना चाहती है।

ललथनहवला भरोसे कांग्रेस

कांग्रेस पिछले 10 सालों से मिज़ोरम की सत्ता पर काबिज है। ललथनहवला 10 साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री है और 1973 से मिज़ोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष है। इतने लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले वह शायद देश के पहले व्यक्ति है। राजनीति में आने के पहले वह मिज़ोरम के एक कोऑपरेटिव बैंक में असिस्टेंट के तौर पर भी काम कर रहे थे। बाद में वह मिज़ो नेशनल फ्रंट के आंदोलन से जुड़कर इसके विदेश सचिव बन गये। जिसको लेकर ललथनहवला जेल भी गये। 1967 में जेल से छूटने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। उनको पार्टी की ओर से आइजोल जिले का मुख्य संगठनकर्ता बना गिया गया।


1984-86 तक दो साल के लिए ललथनहवला पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। जिसके बाद वह 1989 से 1998 फिर 2008 से लेकर अब तक राज्य के मुख्यमंत्री है। ललथनहवला को मिजोरम में करिश्माई नेता माना जाता है। वह अब तक 9 विधानसभा चुनाव जीत चुके है। मिजोरम में कांग्रेस एक बार फिर ललथनहवला के भरोसे ही चुनाव लड़ रही है।

बागियों का सहारा

2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44.63% वोट पाकर 40 में से 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी मिज़ो नेशनल फ्रंट, 28.65% वोट पाकर सिर्फ 5 सीटें ही जीत पायी। वहीं 1 सीट एमपीसी के खाते में गई थी। मिजोरम में पिछले काफी समय से कांग्रेस में बगावत का सिलसिला चल रहा है। एक के बाद एक कांग्रेस के मौजूदा विधायक पार्टी छोड़ रहे है। कुछ भाजपा में जा रहे है तो ज्यादातर मिज़ो नेशनल फ्रंट का दामन थाम रहे है।


अमित शाह के दौरे के ठीक पहले राज्य के पूर्व मंत्री बुद्धा धन चकमा कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा के साथ चले गये थे। चकमा के पहले कांग्रेस के दो अन्य विधायक पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके है। इसमें पूर्व गृहमंत्री आर. लालजीर्लियना और लालरिनलियाना सैलो शामिल है। यह दोनों नेता एमएनएफ (मिज़ो नेशनल फ्रंट) में शामिल हो गये थे। इन तीनों नेताओं के बाद कांग्रेस विधायक हमिंगडेलोवा खियांगटे ने सोमवार को मिज़ोरम विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। खियांगटे के इस्तीफे के बाद अब विधानसभा में कांग्रेस के कुल 30 विधायक बचे है।

कुल मिलाकर भाजपा यहाँ अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में बिलकुल नही है। खाता खोलने के लिए भी भाजपा को काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। 10 सालों से विपक्ष में बैठी मिज़ो नेशनल फ्रंट के बलबूते भाजपा यहाँ सत्ता में बैठने का ख्वाब देख सकती है लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन न करना भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित होगा। मिज़ो को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले फायदा होता दिख रहा है लेकिन बहुमत के आंकड़े को पाना मुश्किल है। अन्य छोटे दल अगर कांग्रेस कि कुछ सीटें जीतने में कामयाब हो जाते है तो वह छोटे दल ही मिजोरम में किंग मेकर बनेंगे। ऐसे में मुकाबला फिर राहुल गाँधी बनाम अमित शाह का होगा। अमित शाह के पास खोने के लिए कुछ नही होगा। तो वहीं राहुल गाँधी भी कर्नाटक की तर्ज पर सत्ता बचाने के लिए त्याग से पीछे नही हटेंगें।

क्या इस बार मिज़ोरम में खाता खोल पाएगी भाजपा ?

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की फाइल फोटो


पूर्वोत्तर में कांग्रेस के आख़िरी किले में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने है। अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मिज़ोरम का दौरा कर रहे है। भाजपा यहाँ नरेन्द्र मोदी की योजनाओं के सहारे मैदान में उतर रही है। पिछले चुनाव में सभी सीटों पर जमानत जब्त होने के बाद भी भाजपा इस चुनाव में आत्मविश्वास से भरी हुई है। आत्मविश्वास इतना कि पहली बार सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अमित शाह सभी 40 सीटें जीतने की बात कर रहे है। भाजपा यह सब जितना आसान दिखा रही है उतना आसान यह है नही। कांग्रेस पिछले 10 सालों से मिज़ोरम की सत्ता में है। 4 विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद भी कांग्रेस के पास 30 विधायक है। दरअसल भाजपा मिज़ोरम में जीतने और सरकार बनाने के लिए नही बल्कि और कांग्रेस को हराने और खाता खोलकर मिज़ो नेशनल फ्रंट के साथ मिज़ोरम की राजनीति में एंट्री मारना चाहती है।

मिज़ोरम में पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा से भी कम वोट पाने वाली भाजपा इस विधानसभा चुनाव में पहली बार सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन के संस्थापक और बीजेपी नेता हिमंता बिस्वा ने कहा है की पार्टी मिज़ोरम विधानसभा चुनाव जीतेगी और पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। वहीं कुछ दिनों पहले मिज़ोरम में पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद करके आए अमित शाह ने दावा किया था की पार्टी इस बार मिज़ोरम में सभी 40 सीटों पर जीत दर्ज करेगी।


मिज़ोरम में भाजपा अब तक 5 विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। 1993 में 8, 98 में 12, 2003 में 8, 2008 में 9 और 2013 में 17 सीटों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा था। 5 विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भी भाजपा अब तक मिज़ोरम में अपना खाता तक नही खोल पाई है। पिछले विधानसभा चुनाव में  17 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा की सभी 17 सीटों पर जमानत जब्त हो गयी थी। उस चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 1 से भी कम, 37% था। जो की नोटा से भी कम था। ऐसे में अगर हेमंत बिसवा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने और अमित शाह सभी 40 सीटें जीतने का दावा करते है तो प्रश्न उठता है कि यह भाजपा का आत्मविश्वास है या फिर सिर्फ राजनैतिक जुमला है  ?

कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर  

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद कांग्रेस धीरे-धीरे पूर्वोत्तर से साफ़ होती जा रही है। अब सिर्फ मिज़ोरम में ही कांग्रेस की सरकार है। दरअसल मई 2016 में भाजपा ने  पूर्वोत्तर   के गैर कांग्रेसी दलों को एकजुट करने के लिए पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए- नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) की स्थापना की थी। इस गठबंधन में भाजपा के साथ नागा पीपल्स पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल और मिज़ो नेशनल फ्रंट आदी दल शामिल है। दरअसल पूर्वोत्तर में अपने पैर पसारने में हमेशा नाकाम रहने वाली भाजपा ने मोदी सरकार आने के बाद असम, मणिपुर और त्रिपुरा में सरकार बना ली। इसके साथ ही नागालैंड और मेघालय में भी भाजपा के समर्थन के साथ पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन की सरकार है। 


भाजपा ने पूर्वोत्तर में कांग्रेस विरोधी दलों को एक करके कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने की रणनीति पर काम किया है। इसी रणनीति के तहत भाजपा अब पूर्वोत्तर में कांग्रेस का आखरी किला भी गिराना चाहती है। इसके लिए खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मिज़ोरम जाकर पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद किया। अमित शाह के अलावा राम माधव, असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल और मंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा मिज़ोरम का दौरा कर रहे है। भाजपा किसी भी तरह से कांग्रेस को मिज़ोरम की सत्ता से बाहर करना चाहती है।

ललथनहवला भरोसे कांग्रेस

कांग्रेस पिछले 10 सालों से मिज़ोरम की सत्ता पर काबिज है। ललथनहवला 10 साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री है और 1973 से मिज़ोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष है। इतने लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले वह शायद देश के पहले व्यक्ति है। राजनीति में आने के पहले वह मिज़ोरम के एक कोऑपरेटिव बैंक में असिस्टेंट के तौर पर भी काम कर रहे थे। बाद में वह मिज़ो नेशनल फ्रंट के आंदोलन से जुड़कर इसके विदेश सचिव बन गये। जिसको लेकर ललथनहवला जेल भी गये। 1967 में जेल से छूटने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। उनको पार्टी की ओर से आइजोल जिले का मुख्य संगठनकर्ता बना गिया गया।


1984-86 तक दो साल के लिए ललथनहवला पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। जिसके बाद वह 1989 से 1998 फिर 2008 से लेकर अब तक राज्य के मुख्यमंत्री है। ललथनहवला को मिजोरम में करिश्माई नेता माना जाता है। वह अब तक 9 विधानसभा चुनाव जीत चुके है। मिजोरम में कांग्रेस एक बार फिर ललथनहवला के भरोसे ही चुनाव लड़ रही है।

बागियों का सहारा 

amit shah

2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44.63% वोट पाकर 40 में से 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी मिज़ो नेशनल फ्रंट, 28.65% वोट पाकर सिर्फ 5 सीटें ही जीत पायी। वहीं 1 सीट एमपीसी के खाते में गई थी। मिजोरम में पिछले काफी समय से कांग्रेस में बगावत का सिलसिला चल रहा है। एक के बाद एक कांग्रेस के मौजूदा विधायक पार्टी छोड़ रहे है। कुछ भाजपा में जा रहे है तो ज्यादातर मिज़ो नेशनल फ्रंट का दामन थाम रहे है। 


अमित शाह के दौरे के ठीक पहले राज्य के पूर्व मंत्री बुद्धा धन चकमा कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा के साथ चले गये थे। चकमा के पहले कांग्रेस के दो अन्य विधायक पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके है। इसमें पूर्व गृहमंत्री आर. लालजीर्लियना और लालरिनलियाना सैलो शामिल है। यह दोनों नेता एमएनएफ (मिज़ो नेशनल फ्रंट) में शामिल हो गये थे। इन तीनों नेताओं के बाद कांग्रेस विधायक हमिंगडेलोवा खियांगटे ने सोमवार को मिज़ोरम विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। खियांगटे के इस्तीफे के बाद अब विधानसभा में कांग्रेस के कुल 30 विधायक बचे है।

कुल मिलाकर भाजपा यहाँ अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में बिलकुल नही है। खाता खोलने के लिए भी भाजपा को काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। 10 सालों से विपक्ष में बैठी मिज़ो नेशनल फ्रंट के बलबूते भाजपा यहाँ सत्ता में बैठने का ख्वाब देख सकती है लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन न करना भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित होगा। मिज़ो को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले फायदा होता दिख रहा है लेकिन बहुमत के आंकड़े को पाना मुश्किल है। अन्य छोटे दल अगर कांग्रेस कि कुछ सीटें जीतने में कामयाब हो जाते है तो वह छोटे दल ही मिजोरम में किंग मेकर बनेंगे। ऐसे में मुकाबला फिर राहुल गाँधी बनाम अमित शाह का होगा। अमित शाह के पास खोने के लिए कुछ नही होगा। तो वहीं राहुल गाँधी भी कर्नाटक की तर्ज पर सत्ता बचाने के लिए त्याग से पीछे नही हटेंगें।

उपेंद्र कुशवाहा ने तोड़ी चुप्पी, मध्यप्रदेश की 66 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि भाजपा ने सीटों के आधे-आधे बंटवारें के फैसले पर नाराज हैं। साथ ही मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। कुशवाहा ने बताया की पार्टी प्रदेश की 66 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।

बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा, आरएलएसपी और पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार की 40 सीटों में एक साथ चुनाव लड़ा था, जिसमें भाजपा को 22, लोक जनशक्ति पार्टी 6 और आरएलएसपी को तीन सीटें मिलीं थीं।

क्या है मामला :

26 अक्टूबर को दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हुई, जिसमें आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के बटवारें पर फैसला लिया गया। प्रेस कांर्फेंस कर दोनो ने बराबरी की सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही। साथ ही बिहार में भाजपा के सहयोगी दल आरएलएसपी (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) और लोक जनशक्ति पार्टी को भी सम्मान जनक सीटें देने की बात कही।

इसी दिन दूसरी तरफ कुशवाहा की मुलाकात लालू के बेटे और आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) नेता तेजस्वी यादव से हुई, जिसके बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि शायद कुशवाहा अब आरजेडी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ सकतें हैं। साथ ही शाह-नीतीश की लड़ाई से नाराज कुशवाहा के इस्तीफा देने की खबरें भी आने लगी थी। खैर कुशवाहा ने चुप्पी तोड़ते हुए सारी बतों का खंडन किया और मध्यप्रदेश में भाजपा को झटका देते हुए 66 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।

उपेंद्र कुशवाहा और तेजस्वी यादव की मुलाकात।

मध्यप्रदेश में बाहरी पार्टियों की भरमार :

28 नवंबर को मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इस चुनावीं जंग में बाहर की कई पार्टियों ने छलांग लगा दिया है। इसी कड़ी में बिहार में भाजपा के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव लड़ने वाली उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी मध्यप्रदेश में भाजपा की प्रतिव्दंदी बन खड़ी हो गई है। भाजपा-कांग्रेस के अलावा प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, कम्यूनिस्ट पार्टी जैसी कई पार्टियों ने हिस्सा लिया है।

लौह पुरुष की 143वीं जयंती : सरदार का जीवन परिचय और मोदी का भाषण

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बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया गांव में दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा का लोकार्पण किया। यह आजाद  भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा है। प्रतिमा का लोकार्पण सरदार पटेल की 143वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर दी है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गुतरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल भी इस कार्यक्रम में मौजूद थी।

सरदार पटेल का जीवन परिचय :

सरदार पटेल का  जन्म 31 अक्टूबर को नडियाड, मुंबई में एक कृषक परिवार में हुआ। सरदार झवेरभाई पटेल एंव लाडबा देवी के चौथी संतान थे, जिन्होंने लंदन से वकालत की पढ़ाई कर अहमदाबाद में वकालत किया करते थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित होकर सरदार पटेल स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिए। स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार की पहली और सबसे अहम योगदान खेड़ा संघर्ष था, जिसमें उन्हें सफलता भी मिली।

सरदार पटेल आजाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे। सरदार ही थे जिन्होंने भारत की आजादी के बाद अलग-अलग 565 रियासतों और राजा रजवाड़ों को एक कर अखण्ड भारत का निर्माण किया था।

प्रतिमा के साथ प्रमुख आकर्षण केंद्र :

नर्मदा तट पर स्थित सरदार पटेल की विशालकाय प्रतिमा के साथ ही वहां सैलानियों के लिए और भी आकर्षण के केंद्र बनाए गए है। जिससे वहां के लोगों को रोजगार का अवसर भी मिलेगा।

1. सरदार पटेल के जीवन पर आधारित संग्रहालय,

2. भारत भवन प्रदर्शनी सभागृह,

3. 3डी चित्रों का मानचित्रण,

4. 153 मीटर की ऊंचाई पर प्रतिमा के हृदय से सौदर्य का लुफ्त उठा सकेंगें,

5. 250 शिवरों वाला टेंट सिटी,

6. जनजातीय संग्रहालय, हस्तशिल्प बाजार,

7. फूलों की घाटी।

लौह पुरुष  सरदार पटेल की विशालकाय प्रतिमा को देश के करीब सात लाख गांवों से लाए गए लौह से  5 साल में 2500 करोड़ की लागत से बनाया गया,  जिसे 4500 कारीगरों और 250 इंजीनियर्स की मदद से बनाया गया है।

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प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की खास बातें :

प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा का अनावरण किया, इस दौरान उन्होंने सरदार से जुड़ी कई बातों को कार्यक्रम में देश की जनता के सामने रखा।

1. पटेल ना होते तो गिर के शेर और हैदराबाद का चारमिनार देखने के लिए वीजा लेना पड़ता,

2. मोदी ने कहा कि आज जो ये सफर एक पड़ाव तक आ पहुंचा है, उसकी यात्रा एक साल पहले शुरु की गई थी, जिसकी कल्पना 31 अक्टूबर 2010 को अहमदाबाद में सबके सामने रखी गई थी,

3. ये सबसे ऊंची प्रतिमा पूरी दुनिया और हमारी भावी पीढ़ियों को सरदार साहब के साहस, सामथ्र्य और संकल्प की याद दिलाती रहेगी,

4. उन्होंने कहा कि कच्छ से कोहिमा तक, कारगिल से कन्याकुमारी तक आज हम बेरोकटोक कहीं जा पा रहें हैं तो ये सरदार साहब की वजह से,

5. सरदार पटेल की यह प्रतिमा न्यू इंडिया, नए भारत के बढ़ते आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति है. यह प्रतिमा राष्ट्र और किसानों के स्वाभिमान का प्रतीक है.

6. पीएम मोदी- कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य के समावेश थे सरदार पटेल.

7. पीएम मोदी ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सरदार साहब की इस विशाल प्रतिमा को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है.

8. आज भारत के वर्तमान में अपने इतिहास के एक स्वर्णिम पूत्र को उजागर करने का काम किया है. आज धरती से लेकर आसामन तक सरदार का अभिषेक हो रहा है।

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