Home Tags उत्तर प्रदेश

Tag: उत्तर प्रदेश

Live: मनैया घाट से शुरु हुई प्रियंका की गंगा यात्रा, देखें तस्वीरें

0

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आज उत्तरप्रदेश के त्रिवेणी संगम से आज अपनी तीन दिन लंबी गंगा यात्रा की शुरुआत करेंगी। प्रियंका की यह यात्रा 3 दिन बाद वाराणसी स्थित अस्सी घाट पर खत्म होगी।

अपनी पहली चुनावी यात्रा में बीजेपी को घेरने के लिए वह पीएम मोदी के ‘चाय पे चर्चा’ की तर्ज पर ‘बोट पे चर्चा’ का आगाज करेंगी। इसके जरिए वह प्रयागराज के छात्रों के शिष्टमंडल से बात करेंगी। प्रयागराज से वाराणसी तक चुनाव यात्रा को ‘सांची बात, प्रियंका के साथ’ नाम दिया है। प्रियंका रविवार शाम को ही प्रयागराज पहुंच गईं जहां उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के पैतृक आवास आनंद भवन का दौरा किया।

Picture Tweeted by @Ani on twitter

महासचिव बनने के बाद पहली बार कांग्रेस दफ्तर पहुंचीं प्रियंका, रॉबर्ट वाड्रा पर बोलीं- दुनिया जानती है कि क्या हो रहा

0

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से ईडी के दफ्तर में तीन अफसर सवाल- जवाब कर रहे है। अपने पति रॉबर्ट को ईडी दफ्तर के गेट पर छोड़कर प्रियंका वहां से सीधे कांग्रेस मुख्यालय पहुंची और पदभार संभाला। मुख्यालय पहुंची प्रियंका को वहां पत्रकारों ने घेर लिया। कांग्रेस महासचिव बनने पर उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि राहुल जी ने ये जिम्मेदारी मुझे सौंपी है।

वहीं रॉबर्ट वाड्रा के सवाल पर प्रियंका ने कहा कि पूरी दुनिया को पता है कि क्या हो रहा है।
बता दें कि पेशी के लिए वाड्रा कल ही अमेरिका से लौटे हैं। वह लंदन में अपनी मां का इलाज करा रहे थे और फिर वहां से अमेरिका गए थे। मनी लॉन्ड्रिंग केस में वाड्रा को अग्रिम जमानत पर हैं।

वाड्रा ने गिरफ्तारी की आशंका के बाद पटियाला हाउस कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। जिसपर कोर्ट ने 16 फरवरी तक गिरफ्तारी से राहत भी दी है। वाड्रा मोदी सरकार पर बदने की भावना से कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं तो बीजेपी कानून के राज की दुहाई दे रही है।

प्रियंका गांधी के पती रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ लंदन में संपति खरीद में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। यह प्रॉपर्टी 19 लाख पाउंड में खरीदी गई है। आरोपों के अनुसार भगोड़े हथियार कारोबारी संजय भंडारी ने इस प्रॉपर्टी को खरीदी और 2010 में इसे इसी कीमत पर वाड्रा को बेच दी। ईडी ने हाल में ही वाड्रा के सहयोगी मनोज अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। इसी गिरफ्तारी के बाद वाड्रा पर शिकंजा कसने की अटकलें लगाई जा रही थीं।

11 फरवरी को इस शहर में रोड शो कर मिशन 2019 का आगाज करेंगी प्रियंका

0

सक्रिय राजनीति में धमाकेदार एंट्री करने के बाद अब प्रियंका गांधी अब मिशन 2019 के लिए चुनाव प्रचार शुरु करने वाली है। मंगलवार को भाई राहुल गांधी के घर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में शिमिल हुई प्रयंका ने आगामी चुनाव के लिए रणनीति पर चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार प्रियंका मिशन यूपी की शुरुआत लखनऊ में एक बड़े रोडशो के साथ करेंगी। जिसके लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी फरवरी को लखनऊ पहुंचेंगी।

मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ में प्रियंका गांधी सबसे पहले कांग्रेस मुख्यालय में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी। जानकारों के अनुसार प्रियंका का यह रोडशो 2019 के लोकसभा चुनाव का आगाज होगा।

इससे पहले तक माना जा रहा था कि 10 फरवरी को प्रियंका लखनऊ जाएंगी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के घर पर मंगलवार शाम को हुई बैठक में तय हुआ कि मिशन यूपी की शुरुआत प्रियंका 11 फरवरी से करेंगी।

प्रियंका गांधी के इलाहाबाद में 10 फरवरी को ही कुंभ में डुबकी लगाने की भी खबरें थीं, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

मंगलवार को ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने औपचारिक रूप से कांग्रेस की पहली बैठक में हिस्सा लिया। जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा कुछ और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस महासचिव के रूप में ताजपोशी के बाद राहुल के साथ प्रियंका ने पहली बार उत्तर प्रदेश में आगे की रणनीति बनाई। प्रदेश में वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस को प्रियंका के आने के नई ताकत मिली है और कार्यकर्ताओं में जोश आ गया है। उन्हें उम्मीद है कि भाई-बहन की इस जोड़ी से वे एक बार फिर दिल्ली में सरकार बनाएंगे। इसी जोश का परिणाम है कि उत्साही कार्यकर्ता उन्हें कई बार पोस्टर में दुर्गा के रूप में दिखा चुके हैं।

इस बैठक से ठीक पहले प्रियंका ने राहुल के घर के पीछे स्थित झुग्गी में पहुंचकर सभी को चौंका दिया। मंगलवार शाम को प्रियंका बैठक से पहले झुग्गी बस्ती में एक दिव्यांग बच्चे से मिलने पहुंची थीं। उन्होंने बच्चे से वादा किया है कि वे उसकी हर संभव मदद करेंगी। प्रियंका का ये अंदाज नया नहीं है। अपनी मां और भाई के संसदीय क्षेत्र अमेठी और रायबरेली में भी जब वे जाती हैं तो ऐसे ही आम लोगों की तरह उनसे बातें करतीं हैं। प्रियंका का यही अंदाज उन्हें खास बनाता है। प्रियंका के इस रूप को देखकर ही लोग उनमें उनकी दादी इंदिरा गांधी का अक्स देखते हैं।

अगर प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ेंगी तो क्या होगा ?

0

राजनीति में प्रियंका गांधी की औपचारिक सक्रियता की घोषणा के बाद भी उनके बारे में अटकलों का दौर खत्म नहीं हुआ है। प्रियंका को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी महासचिव बनाने के अलावा उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी नियुक्त किया है। पूर्वांचल का प्रभार प्रियंका गांधी को देने के बाद से यह अटकल जोर पकड़ रही है कि वे लोकसभा चुनावों में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं।

वाराणसी या बनारस को पूर्वांचल की राजनीति का केंद्र माना जाता है। यहां की राजनीति का असर न सिर्फ पूर्वांचल बल्कि बिहार की कुछ लोकसभा सीटों पर भी होता है। यही वजह थी कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए बनारस की सीट को चुना था। पूर्वी उत्तर प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों में से अधिकांश पर भारतीय जनता पार्टी को 2014 में कामयाबी हासिल हुई थी। भाजपा ने नरेंद्र मोदी के बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ने को इसकी एक प्रमुख वजह के तौर पर पेश किया था।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रियंका गांधी को बनारस से चुनाव लड़ाने की बात चल रही है। इस बारे में बनारस के कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी प्रियंका गांधी से औपचारिक अपील करके उनसे इस सीट से चुनाव लड़ने का आग्रह किया है। बनारस के कुछ कांग्रेस नेताओं की मानें तो आने वाले दिनों में यहां के कुछ प्रबुद्ध लोगों और मुस्लिम समाज की ओर से भी प्रियंका गांधी से लोकसभा चुनाव लड़ने की अपील की जा सकती है।

कांग्रेस आलाकमान की ओर से अब तक ऐसा संकेत नहीं दिया गया है कि प्रियंका गांधी बनारस से चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन, जमीनी स्तर से जो सूचनाएं मिल रही हैं उनसे यही लगता है कि पार्टी इसकी तैयारी पूरी कर रही है कि अगर प्रियंका गांधी को चुनाव लड़ना पड़े तो उस वक्त कोई दिक्कत नहीं आए।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर प्रियंका गांधी वाराणसी लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ती हैं तो इसके क्या राजनीतिक मायने होंगे। इससे पूरे चुनावी परिदृश्य पर क्या असर पड़ सकता है? जो लोग बनारस से प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की वकालत कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे न सिर्फ पूरे पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर सकारात्मक असर पड़ेगा बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी पार्टी को इससे फायदा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों राज्यों में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा संकट यही है कि उसके कार्यकर्ताओं की संख्या लगातार घटी है और नतीजतन पार्टी का सांगठनिक ढांचा कमजोर हुआ है। जो लोग पार्टी में हैं भी, वे भी सिर्फ पार्टी के नाम पर चुनावी जीत हासिल करने की उम्मीद कम ही रखते हैं। स्थानीय नेताओं के मुताबिक ऐसे में प्रियंका गांधी के मैदान में उतरने की खबर भर से जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह का जो माहौल बना है वह उनके वाराणसी से चुनावी मैदान में उतरने से और तेजी से बढ़ सकता है।

प्रियंका गांधी के नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनावी मैदान में उतरने का दूसरा असर यह होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी बनाम प्रियंका गांधी का विमर्श खड़ा हो जाएगा। कांग्रेस इस विमर्श को आगे नहीं भी बढ़ाना चाहेगी तब भी यह विमर्श चल पड़ेगा। इससे भाजपा और उसके सहयोगी दलों का वह विमर्श फीका पड़ सकता है जिसमें वे 2019 के लोकसभा चुनावों को नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी करके विकल्पहीनता को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हुए नरेंद्र मोदी के पक्ष में गोलबंदी करना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी के सामने प्रियंका गांधी के उतरते ही आम लोगों में चाहे-अनचाहे यह संदेश चला जाएगा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी के अलावा प्रियंका गांधी भी एक सशक्त विकल्प हैं।

वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी के चुनाव में उतरने का एक असर यह भी हो सकता है कि मोदी को वाराणसी में ही उलझाकर रखने के मकसद से सपा-बसपा गठबंधन इस सीट पर अपना उम्मीदवार न उतारे। पहले भी इस गठबंधन ने राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी में और सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली में उम्मीदवार न उतारने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अगर प्रियंका बनारस से चुनाव लड़ती हैं और सपा-बसपा अपना उम्मीदवार नहीं उतारते हैं तो नरेंद्र मोदी के लिए यह सीट आसान नहीं रहेगी। तब नतीजा किसी भी ओर जा सकता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो प्रियंका गांधी अगर बनारस से लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतरती हैं तो इससे न सिर्फ इस सीट पर रोचक चुनावी संघर्ष देखने को मिलेगा, बल्कि इसका असर पूरे उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

(सत्याग्रह के लिए हिमांशु शेखर द्वारा लिखे गए आलेख के संपादित अंश साभार)

हिंदू परिषद की की धर्मसंसद में संतों का हंगामा, मंदिर निर्माण पूछी तारीख

0

संतों ने धर्मसंसद में किया हंगामा। कार्यक्रम में नीचे बैठे कई संत और लोग नारेबाजी करने लगे। संत राम मंदिर निर्माण की तिथि घोषित करने की मांग कर रहे हैं। मंच से बार बार संतो को शांत करने की अपील की गई। मोहन भागवत ने कहा- मंदिर उसी स्थान पर बनेगा सिर्फ 6 महीने तक इंतजार करें, केंद्र में मोदी की सरकार फिर से लाएं क्योकि कोई दूसरा राम के प्रति समर्पित नहीं है। यह निर्णायक दौर है इसमें धैर्य रखना जरूरी है। विहिप के द्वारा धर्म संसद पर लाये गए प्रस्ताव पर आरएसएसके सर संघचालक मोहन भगवत ने कहा कि, संघ राम जन्मभूमि आंदोलन का कार्यकर्ता है, हमें मंदिर से कम कुछ स्वीकार्य नहीं है। विहिप की दूसरे दिन की धर्म संसद शुरू हो चुकी है।

धर्मसंसद में संतों ने पीएम मोदी पर भरोसा जताते हुए लोकसभा चुनाव तक राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन स्थगित करने की बात कही है। धर्म संसद में कहा गया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर देकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है। संतों को मोदी सरकार पर पूरा भरोसा है। कुंभ मेला क्षेत्र में विश्‍व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित धर्म संसद का आज दूसरा दिन है। धर्म संसद के आखिरी दिन शुक्रवार को राम मंदिर निर्माण पर बड़े फैसले आने की संभावना है। कुंभ क्षेत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा गरमाया हुआ है। पहले दिन इसे हिंदुओं की आस्था पर चोट करार देते हुए अयोध्या जैसे आंदोलन की घोषणा की गई। स्वामी वासुदेवानंद की अध्यक्षता तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत, योग गुुरु रामदेव समेत अनेक साधु संतों की मौजूदगी में ‘हिंदू समाज के विघटन का षड्यंत्र रोकने’ का प्रस्ताव भी पारित किया गया। गुरुवार को पूरे दिन कवायद चलती रही।

संघ, सरकार और संत तीनों अपनी-अपनी जिम्मेदारी के अनुसार रणनीति बनाने में व्यस्त रहे। इस कवायद से यह बात निकलकर आई है कि कुंभ क्षेत्र में मंदिर पर कोई चौंकाने वाला फैसला आ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत की करीब डेढ़ घंटे तक चली वार्ता का मुख्य विषय था। राम मंदिर निर्माण। मुख्यमंत्री कुंभ क्षेत्र में संघ प्रमुख से मिलकर मंदिर मसले पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करने आए थे। मुख्यमंत्री ने संघ प्रमुख से बताया कि सरकार मंदिर निर्माण करने पर दृढ़ प्रतिज्ञ है, लेकिन कोर्ट की वजह से इसमें समय लग रहा है। इस वजह से सरकार चाहकर भी इसमें जल्दीबाजी नहीं कर पा रही है। इसी तरह संतों से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर निर्माण पर सरकार का समर्थन मांगा। योगी ने शंकराचार्य निश्‍चलानंद को आश्‍वस्त किया कि अयोध्या में मंदिर अवश्य बनेगा लेकिन इसमें उसे मोहलत चाहिए।

देर शाम फिर चली बैठक

पहले दिन की धर्म संसद के समापन के बाद मोहन भागवत, सह सर कार्यवाह कृष्णगोपाल, विहिप के कें द्रीय अध्यक्ष वीएस कोंकजे, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे के बीच शुक्रवार को मंदिर मुद्दे पर होने वाली धर्म संसद को लेकर बैठक हुई। जिसमें संतों में मंदिर निर्माण में देरी से चल रही नाराजगी को दूर करने और मंदिर पर किस तरह का फैसला लिया जाए, इस पर मंथन हुआ। इस बैठक में बाद पहली फरवरी की धर्म संसद के प्रस्ताव की रिपोर्ट में क्या-क्या लिखा जाएगा, यह भी पदाधिकारियों के बीच तय हुआ। कहा जा रहा है शुक्रवार को होने वाले फैसले के विषय में कुछ प्रमुख संतों को एक दिन पहले ही जानकारी दी गई है,जिससे आखिरी दिन माहौल बिगठने ना पाए। यह भी कोशिश हो रही है कि धर्म संसद के आखिरी दिन ज्यादा से ज्यादा से संत पहुंचे।

धर्म संसद पर लगी सरकार की निगाह

केंद्र और प्रदेश सरकार की निगाह भी धर्म संसद पर लगी हुई है। पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद संतों, संघ, विहिप पदाधिकारियों के बीच उपस्थित रहे। प्रदेश सरकार के दोनों अहम व्यक्तियों की कोशिश रही कि मंदिर को लेकर संतों का समर्थन हासिल कर सकें। बताया जा रहा है कि पीएमओ भी कुंभ नगर में मंदिर मसले को लेकर क्या-क्या चल रहा है, इसकी लगातार रिपोर्ट ले रहा है।

भाजपा विधायक का विवादित बयान, राहुल को ‘रावण’ और प्रियंका गांधी को बताया ‘शूर्पणखा’

0

सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी के प्रवेश पर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। कोई कांग्रेस के इस फैसले की आलोचना कर रहा है तो कोई इसे सही कदम बता रहा है। इसी बाच उत्तर प्रदेश के बलिया से भाजपा विधायक ने तो आलोचना की सीमा ही लांघ दी और प्रियंका गांधी वाड्रा को रामायण की शुर्पणखा बता दिया। भाजपा विधायक सुरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ‘रावण’ और उनकी बहन प्रियंका गांधी को ‘शूर्पणखा’ बताया है।

बैरिया से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने एक सवाल पर कहा कि कांग्रेस एक टूटी हुई नौका हो चुकी है और वह केवल एससी-एसटी एक्ट के कारण राजस्थान और मध्य प्रदेश में जीत गई। आप जानते हैं कि जब राम और रावण का युद्ध होने वाला था तो पहले रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा को भेजा था। राम की भूमिका में मोदी हैं और रावण की भूमिका में राहुल हैं जिन्होंने अपनी बहन शूर्पणखा को उतारा है। मान कर चलिये कि लंका विजय हो गयी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोदी फिर से भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।

सुरेंद्र यहीं नही रुके, उन्होने आगे कहा कि भारत की राजनीति की लंगोट हैं पीएम मोदी। बता दें कि सुरेंद्र सिंह पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में घिर चुके हैं। इससे पहले बिहार में भाजपा के मंत्री ने भी प्रियंका गांधी पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि खूबसूरत चेहरों के दम पर वोट नहीं जीते जा सकते।

बिहार के मंत्री विनोद नारायण झा ने प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस महासचिव बनाए जाने पर कहा, खूबसूरत चेहरों के दम पर वोट नहीं जीते जा सकते। इससे भी बढ़कर तथ्य यह है कि वह रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी हैं, जिन पर भूमि घोटाले और भ्रष्टाचार के कई मामलों में शामिल होने का आरोप है। वह बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन उसके अलावा उनकी कोई राजनैतिक उपलब्धि नहीं है।

दरअसल, यूपी में प्रियंका को पूर्वी यूपी की कमान सौंपने के फैसले को लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। अब यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रियंका के आने से यूपी में त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। पहले सपा-बसपा और सीधे बीजेपी के बीच लड़ाई थी, मगर अब चुनावी जंग में कांग्रेस वापस आ गई है।

अखिलेश सरकार के रिवरफ्रंट घोटाले के केस में 4 राज्यों में ईडी की छापेमारी

0

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार के वक्त हुए तथाकथित रिवर फ्रंट घोटाला मामले में एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ समेत देश में कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में भी ईडी ने छापेमारी की। नोएडा के सेक्टर-62 में सर्च ऑपरेशन करते हुए कई इंजीनियरों के साथ सिंचाई विभाग के कई अधिकारियों के खिलाफ भी छापेमारी की कार्रवाई की गई है।

दरअसल सपा शासनकाल के दौरान लखनऊ में बने गोमती रिवरफ्रंट के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आए है। योगी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद गोमती रिवरफ्रंट का दौरा किया था। जिसके बाद गोमती नदी चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट और गोमती नदी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट में हुई वित्तीय अनियमितताओं की न्यायिक जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट 16 मई 2017 को राज्य सरकार को सौंपी थी। जिसमें दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की सिफारिश की गई थी। समिति ने जांच के घेरे में आए तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन और तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश भी की थी।

इन अफसरों पर आरोप

ईडी ने मामले में तत्कालीन चीफ इंजीनियर गोलेश चंद्र (रिटायर्ड), एसएन शर्मा, काजिम अली और सुपरिटेंडेंट इंजीनियर शिवमंगल यादव (रिटायर्ड), अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव (रिटायर्ड) और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सुरेशयादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। सीबीआई नामजद आरोपियों से पूछताछ करने के साथ ही कई अहम दस्तावेज कब्जे में ले चुकी है।

बजट बड़ाया फिर काम आधे में लटका

बताया जा रही है कि रिवरफ्रंट के निर्माण के लिए पहले 747.49 करोड़ का बजट था। जिसे बढ़ाकर बाद में मुख्य सचिव की बैठक में निर्माणकार्य के लिए 1990.24 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया था। जसके बाद जुलाई, 2016 में 1513.51 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। निर्माणकार्य में स्वीकृत राशि से 1437.83करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन करीब 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका था। आरोप है कि तत्कालीन सरकार को भी इस संबंध में शिकायतें मिली थी लेकिन कोई कार्यवाही नही की गई।

ईडी के सम्मुख पेश नहीं हुईं बी चंद्रकला

सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित खनन घोटाले में आरोपी आईएएस अधिकारी और हमीरपुर की पूर्व जिलाधिकारी बी चंद्रकला गुरूवार को प्रर्वतन निदेशालय के समक्ष पेश नहीं हुई। ईडी ने हमीरपुर की तत्कालीन जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर गुरुवार को पेश होने के लिए कहा था लेकिन शैक्षणिक अवकाश पर चल रही बी चंद्रकला के स्थान पर उनके वकील एस अहमद साउद लखनऊ में ईडी के दफ्तर पहुंचे और निदेशालय द्वारा मांगे गए जरूरी दस्तावेजों को अधिकारियों के हवाले किया। बाद में अहमद ने पत्रकारों को बताया कि ईडी ने जिन दस्तावेजों की मांग उनके मुवक्किल से की थी, उन्हे आज सौंप दिया गया है। उनकी मुवक्किल कुछ समय बाद इस मामले में ईडी के सामने पेश हो सकती है।

हम किसानों का कर्ज माफ करते हैं, मोदी उद्योगपतियों का: राहुल

0
राहुल गांधी की फ़ाइल फ़ोटो

लोकसभा चुनाव को लेकर राहुल ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। बुधवार को अपनी बहन प्रियंका गांधी को सक्रीय राजनीति में लाने के बाद गुरुवार को राहुल ने रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर हमला बोला है।

प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए राहुल ने कहा कि पीएम मोदी ने अच्छे दिन का वादा किया था, वह अच्छे दिन कहां है? चौकीदार ने इन चार साल में साबित कर दिया कि वह चोर है। कर्जमाफी के मुद्दे पर राहुल ने कहा कि मोदी सरकार कहती है हमारे पास पैसा नहीं है। हमनें एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में दस दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ किरके दिखाया है। हमनें जो वादा किया था, उसे हमने दो दिन के अंदर ही पूरा कर दिया।

पीएम मोदी ने 15 से 20 उद्योगपतियों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है। वह पैसा आपका था, वह अमेठी, यूपी, और देश के अन्य युवाओं का पैसा था। नरेंद्र मोदी जी के साथ साठगांठ करके उद्योगपति अपना कर्जा माफ कराते हैं। पूरे देश में मनरेगा चलाने के लिए 35 हजार करोड़ रुपये लगते हैं, पीएम मोदी ने एक साल का मनरेगा का पैसा नरीव मोदी के नाम किया। वह 30 हजार करोड़ रुपये लेकर भाग गया।

जांच के ड़र से सीबीआई प्रमुख को हटाया

राहुल ने आगे कहा कि सीबीआई के डायरेक्टर कहता है कि मैं राफेल की जांच करूंगा, चौकीदार ने चोरी की मैं जांच करूंगा तो पीएम मोदी ने डेढ़ बजे रात को ऑर्डर लिखके सीबीआई डायरेक्टर को निकाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह गलत हुआ और फिर से उसे डायरेक्टर बनाया जाता है। दो घंटे के अंदर उन्हे हटाने के लिए फिर से मीटिंग बुलाई जाती है। आखिर इतनी जल्दी क्यों, क्योंकि चौकीदार चोर है और यह बात अब यह हर युवा समझ गया है।

एमपी के सिंधिया को यूपी भेजने के पीछे यह है कांग्रेस अध्यक्ष की रणनीति

0

कांग्रेस ने 2019 के चुनाव के लिए लंबे इंतेजार के बाद आखिरकार अपनी सियासी ट्रंप कार्ड चल ही दिया। अपने युवा चेहरे प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ यूपी को दो हिस्सों में बांटकर कमान सौंप दी। वेस्टर्न यूपी में कांग्रेस के लिए खोई हुई सियासी जमीन तलाशना सिंधिया के लिए आसान नही होगा। कमजोर संगठन के बल पर मध्य प्रदेश की तरह परिणाम देने, पुराना वोट बैंक सहेजने और किसान- नौजवान का नारा बुलंद करने का दबाव सिंधिया पर रहेगा।

वेस्टर्न यूपी में तीन दशक से कमजोर होगी कांग्रेस

वेस्टर्न यूपी में करीब तीन दशक से कांग्रेस के पंजे की पकड़ बेहद कमजोर है। एक-दो जिलों को छोड़ दें तो ज्यादातर जगह क्षेत्रीय दलों के आगे भी पार्टी कहीं नहीं टिक पाती। हालात ऐसे हो गए हैं कि संसद और विधानसभा में पार्टी की नुमाइंदगी ही न के बराबर रह गई। हालांकि राहुल गांधी अपने स्तर से वेस्टर्न यूपी में गंभीर मुद्दे पर सक्रिय रहे। किसानों की जमीन अधिगृहण के मुद्दे पर जेवर इलाके के भट्टा-पारसौल में आंदोलन का हिस्सा बने। सहारनपुर के दलित उत्पीड़न के मामले पर दस्तक देकर लोगों को ध्यान खींचा, लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक मजबूती नहीं मिली।

दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण को कांग्रेस के साथ लाना बड़ी चुनौती

मध्यप्रदेश में महाराज के नाम से जाने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को वेस्ट यूपी में कभी कांग्रेस के वोट बैंक रहे दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण को साधने के लिए करिश्मा दिखाना होगा। कमजोर हो चुकी कांग्रेस का वोटर दलित बीएसपी, ब्राह्म्ण बीजेपी और मुस्लिम, एसपी तथा बीएसपी की तरफ खिसक गया। कांग्रेस के एक प्रदेश पदाधिकारी के मुताबिक पुराने वोट बैंक से साथ की किसान और नौजवान इस बार पार्टी के खास अजेंडे में रहेगी।

युवाओं पर भी रहेगी नजर

युवाओं को साधने के लिए ही नौजवान चेहरे को यहां उतारा है। इसी के साथ चुनावी मेनिफेस्टों में किसानों के लिए कर्जमाफी सरीखे काफी लुभावने वादे भी पार्टी सामने लाकर करिश्मा करने की सोच रही है। खुद राहुल गांधी का कहना है कि युवा प्रियंका और ज्योतिरादित्य यूपी को सियासत को बदलें। वह बहुत डायनामिक है। एसपी तथा बीएसपी के मजबूत होने और बीजेपी के मुख्य सियासी दल के तौर पर सामने के बाद से कांग्रेस के हालत ऐसे हो गए कि वेस्टर्न यूपी की ज्यादातर सीटों पर वह नंबर 4 की पार्टी बनकर रह गई। बीजेपी, एसपी और बीएसपी ही अलग अलग जगह पहले दूसरे और तीसरे नंबर पर काबिज रही। ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। 2014 में मेरठ से सिने तारिका नगमा तक अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी। 2017 के चुनाव में एसपी के साथ लड़ने के बाद कई सीटों पर कांग्रेस बुरी तरह हारी थी।

एक बार फिर संगठन खड़ा करने की चुनौती

वेस्टर्न यूपी में कांग्रेस को खड़ा करने के लिए यहां के जनाधार वाले नेताओं को संगठन में तरजीह देने की तैयारी हैं। हर जिले से चर्चित और पुराने चेहरों की तलाश शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के एक प्रदेश पदाधिकारी के मुताबिक जल्द ही वेस्ट जोन को दो या तीन जोन में बांटकर दूसरी पंक्ति को मजबूत किया जाएगा। जोन प्रभारी अपनी रिपोर्ट सिंधिया को देंगे। इसी के साथ मंडल, जिला, तहसील, ब्लॉक और बूथ स्तर पर जल्द नए चेहरों को भी लगाया जाएगा।

वेस्टर्न यूपी में कांग्रेस का हाल

वेस्टर्न यूपी में 20 साल से अधिक वक्त से ज्यादातर जिलों में कांग्रेस की सियासी नुमाइंदगी नहीं है। फिलहाल सहारनपुर में दो विधायक नरेश सैनी और मसूद अहमद हैं। वहां 2012 में भी दो विधायक थे। बाकी इस जिले में किसी विधानसभा में कोई सदस्य नहीं है। इससे पहले 2012 में बुलंदशहर के स्याना से दिलनवाज खां, खुर्जा से बंशी पहाड़िया, शामली से पंकज मलिक, मथुरा से प्रदीप माथुर विधायक रहे। बीते बीस सालों में हापुड़ से गजराज सिंह, गाजियाबाद से सुरेंद्र मुन्नी, रामपुर के बिलासपुर से संजय कपूर और मिलक से काजिम अली खां, एमएलए बने। बिजनौर, मुरादाबाद, बदायूं, अमरोहा, संभल, बागपत, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, आगरा आदि जिलों से लंबे वक्त से कोई एमएलए नहीं बना। अलीगढ़ से विवेक बंसल एमएलसी जरूर रहे। एमपी के तौर पर रामपुर से नूर बानो, गाजियाबाद से सुरेंद्र गोयल, मेरठ से अवतार सिंह भड़ाना, मुरादाबाद से पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन जरूर जीते। बाकी सीटों पर जीत का मुंह की ताकना पड़ा।

सिंधिया को यूपी भेजने का सियासी मतलब

कांग्रेस के सीनियर नेताओं की माने तो महाराज को वेस्ट यूपी की कमान एक खास रणनीति के तहत सौंपी हैं। सिंधिया मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। उनका जिला ग्वालियर और वेस्ट यूपी के आगरा जिले की सीमा मिलती है। वह वेस्ट यूपी की सियासत पर बारीकी से नजर रखने हैं। युवा चेहरे हैं। सियासत में उनकी साफ छवि है। राहुल गांधी के बहुत करीबी हैं। पार्टी में पहली पक्ति से असरदार नेता हैं। मध्य प्रदेश के हाल के चुनाव में हुई जीत के पीछे सिंधिया का जुझारूपन किसी से छिपा नहीं है।

प्रियंका की सक्रीय राजनीति में एंट्री, राहुल बोले- अब हम फ्रंटफुट पर खेलेंगे

0

2019 लोकसभा चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने का फैसला ले लिया है। राहुल गांधी ने प्रियंका को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महासचिव न्युक्त किया है और उन्हे पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी सौपीं है। इसके साथ ही राहुल ने गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रियंका गांधी के साथ उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है।

प्रियंका की एंट्री के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अब हम बैकफुट पर नहीं फ्रंटफुट पर खेलेंगे और यूपी में कांग्रेस की विचारधारा को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश करेंगे। मैं व्यक्तिगत रूप से काफी खुश हूं कि मेरी बहन (प्रियंका) जो खुद में कर्मठ और सक्षम हैं, वह अब मेरे साथ काम करेंगी।

प्रियंका के चुनाव लड़ने के सवाल पर राहुल ने कहा कि इसका फैसला प्रियंका करेंगी। हालांकि मैंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य को दो महीने के लिए यूपी नहीं भेजा है बल्कि कांग्रेस की जो विचारधारा है उसे यूपी में फिर से मजबूत बनाने के लिए कहा है। मुझे उम्मीद है कि वह दोनों मिलकर कांग्रेस को यूपी में मजबूत बनाएंगे।

हमारे दिल में मायावती जी और अखिलेश के लिए प्यार

सपा-बसपा से जुड़े सवालों पर राहुल ने कहा कि मायावती जी और अखिलेश ने हमें गठबंधन में शामिल नहीं किया, यह उनका फैसला है लेकिन हमारे दिल में उनके लिए प्यार है, कोई नफरत नहीं है। हम तीनों ही बीजेपी को हराने के लिए लड़ रहे हैं। मायावती जी, अखिलेश और हमारी विचारधारा में बहुत समानता है और उन्हें जहां भी जरूरत होगी हम उन्हें सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

भाजपा ने उत्तर प्रदेश को बर्बाद किया

राहुल ने कहा कि हम यूपी की जनता, युवा और किसानों को कहना चाहते हैं कि आपने भाजपा को बहुत समय दिया है। उन्होंने पूरा यूपी बर्बाद कर दिया। इन्हें हटाइए, हमें लाइए, हम आपको नई दिशा देंगे। हम किसी जाति और धर्म की बात नहीं करेंगे। जो यूपी के युवा को चाहिए वह कांग्रेस दे सकती है।

सोशल मीडिया पर जुड़ें

38,210FansLike
0FollowersFollow
1,236FollowersFollow
1FollowersFollow
1,256FollowersFollow
789FollowersFollow

ताजा ख़बरें