राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि उसे इस बात पर ताज्जुब है कि अगर भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो फिर कब होगा। शिवसेना ने कहा कि अगर राम मंदिर का निर्माण 2019 चुनावों से पहले नहीं हुआ तो यह देश के लोगों को धोखा देने जैसा होगा जिसके लिए भाजपा और संघ को उनसे माफी मांगनी होगी।

केन्द्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की राज्य सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 1 जनवरी को दिए इंटरव्यू में राम मंदिर पर पीएम मोदी के बयान को लेकर उनपर हमला बोला है। दरअसल इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि मंदिर निर्माण पर सरकार कोई भी कदम न्यायिक प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही उठाएगी। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में शिवसेना ने कहा, वह (मोदी) राम के नाम पर सत्ता में आए थे हालांकि उनके मुताबिक भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं। अब सवाल यह है कि अगर बहुमत वाली सरकार में मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब बनेगा।’’

संपादकीय में शिवसेना ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य प्रतिमा बनाई है लेकिन राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सरदार’ वाला साहस नहीं दिखा पाए। संपादकीय में आगे कहा कि राम मंदिर के लिए आंदोलन 1991-92 में शुरू हुआ था और सैकड़ों ‘कारसेवकों’ ने अपनी जान गंवाई थी। इसमें पूछा गया, किसने यह नरसंहार किया और क्यों? एक ओर सैकड़ो हिंदू कारसेवक मारे गए साथ ही मुंबई बम धमाकों में दोनों पक्ष ( हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय) के सैकड़ों लोग मारे गए। अगर फैसला उच्चतम न्यायालय को ही करना था तो यह नरसंहार एवं खूनखराबा क्यों?’’

उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने आगे पूछा कि क्या भाजपा एवं आरएसएस इन हत्याओं एवं खूनखराबे की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है। संपादकीय में कहा गया, सिखों के नरसंहार (1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद) के लिए जिस तरह से कांग्रेस को माफी मांगनी पड़ी उसी प्रकार हमें भी उन लोगों की भावनाओं को समझना होगा जो हिंदुओ के नरसंहार के लिए (भाजपा से) माफी की मांग करते हैं।’’

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