मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पटखनी देने वाला उम्मीदवार कांग्रेस को अब तक नहीं मिला है। दिल्ली में जब कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बनाने का काम कर रही थी, ठीक उसी वक्त दतिया में कांग्रेस आस्तीनें चढ़ा पेराशूट नेताओं का विरोध कर रहे थे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा दतिया जिले के लिए नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक हरियाण के विधायक उदयभान जाटव को नेताओं की आपसी लड़ाई देखकर कहना पड़ा कि सीट जीतोगे सरकार तब ही बन पाएगी। आपस में लड़ने सरकार नहीं बन सकती।

तीन सीट,तीन सौ दावेदार

दतिया जिला में विधानसभा की कुल तीन सीटें हैं। दतिया,सेंवढ़ा और भांडेर। तीनों सीटों पर अभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले चुनाव में पेड न्यूज के आरोप के चलते चुनाव आयोग ने मिश्रा को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। चुनाव आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

पिछले एक दशक में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया अपनी जड़े काफी मजबूत कर ली हैं। कांग्रेस में उन्हें चुनौती देने वाला कोई नेता भी सामने नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग्वालियर संभाग की अपनी यात्रा की शुरूआत दतिया के पीतांबरा पीठ के दर्शन कर की थी। राहुल गांधी की इस यात्रा का मकसद दतिया सीट वापस कांग्रेस की झोली में लाने का था। लेकिन, दतिया में कांग्रेस एक नहीं हो पा रहे हैं।

राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा

कांग्रेसियों में समन्वय बैठाने आए उदयभान के सामने प्रदेश कांग्रेस के सदस्य दामोदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अब फटे नोट नहीं चलेंगे। आप पार्टी हाइकमान तक बात पहुंचाईएं जिले की तीनों सीटों पर नए चेहरों को मौका दे तो कार्यकर्ता पूरी मेहनत से कांग्रेस को जिताने के लिए लग जाएगा। चुनाव का समय है और कार्यालय से सभी को सूचनाएं नहीं दी जाती। राजेश दांतरे ने कहा कि हमसे राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा लिया गया। रैली की सफलता का श्रेय एक व्यक्ति को दे दिया। यह गलत है। जहां कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होगा वहां कार्यकर्ता मन से काम नहीं करेगा।

आशोक शर्मा ने सलाह दी कि पर्यवेक्षक दतिया में बैठे रहते हैं 7 अन्य दो विधानसभा सीट पर ध्यान ही नही देते। कार्यकर्त्ताओं से भी राय नहीं ली जाती। शिवकुमार पाठक ने टिकट पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए कहा कि दतिया से ब्राह्ण को ही टिकट देना चाहिए।

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