Newbuzzindia: अब तक आपने ऐसे नेताओं को देखा होगा जो पार्टी के लिए वोट मांगते हैं लेकिन क्या आपने कभी ऐसे इंसान को देखा है जो नोटा के लिए वोट मांगता हो, हम आपको इस चुनावी समर में मिलवाते है एक शख्स से जो वोट डालने के लिए तो आपसे कहता है लेकिन नोटा के लिए..

 

ये हैं अरविंदो सर..
जनाब इंग्लिश के प्रोफेसर हैं..लेकिन इनदिनों उत्तरप्रदेश की पूरी सियासत को इन्होंने हिलाकर रख दिया है, इनका कहना है कि देश में नोटा को प्रभावी बनाया जाना चाहिए, मांग तो जायज है लेकिन इस चुनावी माहौल में ये होना बेहद मुश्किल है भाई, अब सवाल ये उठता है कि नोटा के लिए ये मुहिम आखिर क्यों ?
1- विधानसभा क्षेत्र में अगर आपका प्रत्याशी मन मुताबिक नहीं है ।
2- अगर उसने पिछले वादे नहीं पूरे किए हैं ।
3- अगर इन प्रत्याशियों में कोई आपराधिक प्रवृत्ति का है ।
4- अगर इन प्रत्याशियों ने अपनी सरकारों में आपसे वादा खिलाफी की है ।
4- अगर इनमें से किसी को भी आप अपना अहम वोट नहीं देना चाहते तो आप नोटा को दबाइए, इसे मजबूत बनाइए ताकि हम राइट टू रिजेक्ट की लड़ाई आगे बढ़ा सकें ।
सवाल आपका है क्या हम इनमें से चुनने के लिए मजबूर हैं ?
सबसे अहम बात
– व्यापम घोटाले में करीब 50 मौतों का आंकड़ा सामने आया, पूरे देश की नजर पड़ी, अब न्याय की आस है ।
– 1965 में 700 जवान शहीदु हुए, नमन ।
– 1999 कारगिल युद्ध में करीब 527 जवान शहीद हुए । उन्हें भी नमन ।
– उत्तरप्रदेश में डेंगू से करीब 5 हजार लोगों की मौत हुई, अपना घर बार बेचकर लोगों ने अपनों को इलाज करवाया, हर घर से किसी ना किसी को डेंगू हुआ, पूरे प्रदेश में हालात बेकाबू थे, तब किस सरकार ने आपके साथ न्याय किया, किसने आपका दर्द समझा,
किसने आपके आंसू पोछे ?
पीछे मुड़कर देखेंगे तो शायद उन सिसकियों के सिवाय कुछ और जहन में याद ना आए लेकिन आगे देखेंगे तो देखिए नोटा खड़ा है इसे मजबूत कीजिए और अपना जवाब दीजिए ।

अनुराग सिंह

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