Saturday, October 23, 2021

नोटबंदी के चलते अब तक 82 मौतें , 80 लाख मजदूर हुए बेरोजगार !


Newbuzzindia : ​नोटबंदी के कारण देश की बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने के सरकार के दावों के बावजूद 25 दिन बाद भी स्थिति समान्य होती नज़र नहीं आ रही। अब तक नोट बंदी की वजह से देश भर में करीब 82 लोगों की मौत हो चुकी है। मज़दूरों और किसानों को भी इसका भारी खामियाज़ा भुगतना पड़ा रहा है।
नोट बंदी से मरने वालों की संख्या 82 हुई

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नोट बंदी के बाद से 1 दिसंबर तक मरने वालों की संख्या 82 हो गई है। ताज़ा मामले की जानकारी देते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि बिहार के बलरामपुर में गुरुवार को एक 32 दिनों के बच्चे की नोटबंदी के चलते इलाज में देरी से मौत हो गई।
इंडियन एक्सप्रेस ने बिहार के एक और मामले की जानकारी देते हुए बताया कि नोटबंदी के चलते पैसों की कमी की वजह से अस्पताल ने 12 घंटे तक एक लाश को उसके परिजनों को नहीं सौंपा।
पीएम मोदी के नोटबंदी के ऐलान के दूसरे दिन ही ओड़िशा में एक नवविवाहित महिला को उसके ससुराल वालों ने दहेज में नए नोटों की मांग न पूरी होने के कारण मौत के घाट उतार दिया।
नोट बंदी से करीब 80 लाख मज़दूरों को नहीं मिली दिहाड़ी

नोटबंदी के ऐलान के बाद से 80 लाख से ज़्यादा बीड़ी मज़दूर बेरोज़गारी की स्थिति में पहुंच गए हैं। बीड़ी मज़दूरों को 8 नवंबर के बाद से कोई भी दिहाड़ी नहीं मिली है। बता दें कि बीड़ी उत्पादन में देश की तकरीबन 2000 कंपनियां काम करती हैं। इस कारोबार की कीमत करीब 7000 करोड़ है। जो कि नोट बंदी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ के मुताबिक इस कारोबार में 80 लाख मज़दूरों में करीब 70 फीसदी महिला मज़दूर हैं। जो कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से आती हैं।
सूरत का डॉयमंड पॉलिंशिंग कारोबार पर भी नोट बंदी के कारण प्रभावित हुआ है। बता दें कि इस कारोबार में तकरीबन 20 लाख मज़दूर काम करते हैं।
ताजनगरी आगरा की शू मेकिंग इंडस्ट्री पर भी नोट बंदी का बुरा असर पड़ा है। नोटबंदी के बाद से जूतों के उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

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