Monday, June 21, 2021

आजादी के 70 साल बाद देश को अचानक क्यों पड़ी मसूका की जरुरत ?

7 जुलाई  को नई दिल्ली के संविधान क्लब में भीड़ द्वारा की जा रही लोगों की हत्या को दूर करने के लिए मसूका (मानव सुरक्षा कानून)  पेश किया गया था।

यह कानून नेशनल कैम्पेन अगेन्स्ट मोब लिंचिंग द्वारा प्रस्तावित किया गया है . नेशनल कैम्पेन अगेन्स्ट मोब लिंचिंग की स्थापना देश के कुछ युवा नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर की है, जिनमे  तहसीन पूनावाला, शेहला राशिद,शेहजाद पूनावाला , कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी शामिल है . पिछले कुछ महीनों में देश के अन्दर भीड़ द्वारा लोगों की हत्या किये जाने के बाद यह कानून पेश किया गया है .

मसूका की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए टीम मसूका के सदस्य
मसूका की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए टीम मसूका के सदस्य

 

 

 

मासुका समिति में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े की अध्यक्षता में अनास तनवीर और प्रांजल किशोर भी शामिल हैं।

 

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य कमजोर व्यक्तियों को प्रभावी सुरक्षा प्रदान करना, अपराध करने वाले लोगों को दंडित करना, और पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए पुनर्वास और क्षतिपूर्ति प्रदान करना है।

एक नीजी चैनल से बातचीत के दौरान समीति के संस्थापक तहसीन पूनावाला ने कहा था की  “हमने भीड़ द्वारा की जा रही  हत्याओं को एक गैर-जमानती अपराध बनाने का प्रस्ताव दिया है और इसके तहत दोषी ठहराए गए लोगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रस्ताव है  । यह भी अनिवार्य है कि न्यायिक जांच के दौरान संबंधित क्षेत्र के स्टेशन हाउस ऑफिसर को आरोपों से बरी ना हो जाने तक के लिए  निलंबित कर दिया जाना चाहिए। यह प्रावधान रखा गया है क्योंकि अगर 100 लोगों की भीड़ एक क्षेत्र में प्रवेश कर रही है और किसी से दुर्व्यवहार कर रही  है, तो यह क्षेत्र के संबंधित पुलिस अधिकारी की सहमति के बिना नहीं हो सकता है। ”

 

 

मसूका की जरुरत क्यों  ..?

 

यह सब जाने के बाद आपके दिमाग में कई सवाल उत्पन्न हो रहे होंगे . जैसे, आजादी के 70 साल बाद देश में अचानक ऐसा क्या हुआ जो देश को मसूका की जरुरत पड़ रही है ? दरअसल इस सवाल का जवाब आपको हाल ही में हुई घटनाओं से मिलेगा . पिछले कुछ समय में देश को भीड़ का एक बहुत ही भयानक चेहरा देखने को मिला . कहीं गौरक्षा के नाम पर तो कहीं देशभक्ति ने नाम पर भीड़ द्वारा लोगों की हत्या की जा रही है .

जुनैद का नाम तो आप लोगों ने सुना ही होगा . 17 वर्षीय जुनैद जब ईद की खरीददारी करके अपने घर बल्लभगढ़ जा रहा था तभी भीड़ द्वारा उसकी हत्या कर दी गयी . ट्रेन में सीट पर हुए विवाद पर भीड़ द्वारा हत्या जैसे गंभीर अपराध को अंजाम दिया गया . ऐसी ही और भी कई घटनाएँ है जैसे बीफ के शक में अख़लाक़ की हत्या और रोहित वेमुला की रहस्यमय मौत .

 

कांग्रेस नेता और टीम मसूका के सदस्य शेहजाद पूनावाला का कहना है की ” मैं आरएसएस को पसंद नहीं करता , लेकिन अगर भीड़ द्वारा आरएसएस के कार्यकर्ता की हत्या की जा रही है तो हम मसूका कानून के द्वारा वहां भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवेदन करेंगे ”

मसूका को लेकर सरकार का रुख अभी तक सामने नही आया है . यह देखना बाकी है की भीड़ द्वारा लोगों की हत्या पर सरकार कब हरकत में आती है और मसूका को संसद और विधान सभा में पेश करती है .

अगर आप भी मसूका कानून का समर्थन करते है और मसूका कानून को लागू करवाने में टीम मसूका का साथ देना चाहते है तो Twitter पर शेहजाद पूनावाला  , तहसीन पूनावाला , पंखुरी पाठक  और शेहला रशीद आदी से संपर्क कर सकते है .

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