लोकसभा में तीन तलाक बिल को पास कराने के बाद आज राज्यसभा में मोदी सरकार की असली अग्नी परीक्षा होगी। सरकार के इरादे जरूर बुलंद है लेकिन राज्यसभा की राह इतनी आसान नही है। एक ओर सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नही है वहीं दूसरी ओर सभी विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ एक होते नजर आ रहे है। सभी विपक्षी दल एकजुट होकर इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे हैं। सदन में सांसदों की उपस्थिति को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को व्हिप जारी किया। कांग्रेस ने लोकसभा और राज्य सभा के अपने सभी सांसदों को 31 दिसंबर को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है।

दरअसल आज राज्यसभा में तीन तलाक मुद्दे पर बहस हो सकती है जिसके मद्देनजर पार्टी ने यह व्हिप जारी किया है। कांग्रेस नहीं चाहती कि उसके सांसद तीन तलाक मुद्दे पर पार्टी के खिलाफ जाएं। वहीं लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद भाजपा भी राज्यसभा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसलिए पार्टी ने एक बार फिर से सांसदों के सदन में उपस्थित रहने को लेकर व्हिप जारी किया है।

क्या होता है व्हिप

व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के तहत माना जा सकता है और सदस्यता रद्द कर दी जा सकती है। व्हिप तीन तरह का होता है- एक लाइन का व्हिप। दो और तीन लाइन का व्हिप। इन तीनों मे तीन लाइन का व्हिप महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कठोर कहा जाता है। इसका इस्तेमाल अविश्‍वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए किया जाता है तथा उल्लंघन के बाद सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती है। हालांकि व्हिप को लोकतंत्र की मान्यताओं के अनुकूल नहीं माना जाता है, क्योंकि इसमें सदस्यों को अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि पार्टी की इच्छा के अनुसार कार्य करना होता है जो लोकतंत्र की भावनाओं के विरुद्ध है।

बहुमत का गणित है सरकार के खिलाफ

तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास करवाना सरकार के लिए काफी मुश्किल दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी जरूर बन गई है लेकिल बहुमत से काफी दूर है। राज्यसभा के कुल 244 सांसदों में से भाजपा के पास कुल 73 सांसद हैं। वहीं जेडीयू, अकाली दल, शिवसेना और अन्य संभावित साथी सांसदों को मिलाकर भी एनडीए का आंकड़ा 100 के अंदर ही दिख रहा है।

राज्यसभा में सरकार के संभावित साथी

राज्यसभा के मौजूदा सांसद – 244

  1. बीजेपी के पास सांसद – 73
  2. सहयोगियों में जेडीयू के सांसद – 6
  3. अकाली दल के सांसद – 3
  4. शिवसेना के सांसद – 3
  5. कुछ छोटे दलों के समर्थक सांसद – 3
  6. नामांकित और निर्दलीय साथ आ सकने वाले सांसद- 9

सदन में कुल 244 में से कुल 98 सांसदों का समर्थन

तीन तलाक के मुद्दे पर जहां एनडीए अल्पमत में दिख रही है तो वहीं यूपीए के साथ इस मुद्दे पर बहुमत नजर आ रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस का पास राज्यसभा में 50 सांसद हैं। वहीं तीन तलाक के मुद्दे पर 13-13 सांसदो वाली टीएमसी, एआईडीएमके और समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस के साथ नजर आ रही है। अगर तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद सांसदों के आंकड़ो पर नजर डालें तो यह आंकड़ा बहुमत के साथ 135 के आस-पास दिख रहा है। यह सभी सांसद बिल को राज्यसभा में पारित कराने से पहलेे ज्वांइट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना चाहते हैं।

राज्यसभा में बिल के खिलाफ संभावित सांसद

  1. कांग्रेस के सांसद – 50
  2. टीएमसी के सांसद- 13
  3. एआईडीएमके के सांसद- 13
  4. समाजवादी पार्टी के सांसद- 13
  5. लेफ्ट फ्रंट के सांसद – 7
  6. टीडीपी के सांसद- 6
  7. टीआरएस के सांसद – 6
  8. आरजेडी के सांसद- 5
  9. बीएसपी के सांसद- 4
  10. डीएमके के सांसद- 4
  11. बीजू जनता दल के सांसद- 9
  12. आम आदमी पार्टी के सांसद- 3
  13. पीडीपी के सांसद- 2
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