modi bhakt

आज एक भक्त मिल गया था, लगा एक …जी डंका बजाने हमने पूछा भाई ये तो बताओ किस बात को लेकर सरकार की इतनी प्रशंषा कर रहे हो ..रोज़गार बढ़े नहीं, कालाधन आया नहीं, विकास दर गिरती जा रही है, किसान मरते जा रहे हैं, भूखे सोने वालों की तादाद में हम एशिया में नम्बर 1 हो गए हैं, कोई युद्ध भी हमने नहीं जीता है फिर काहे की गोड़धरई, सामने वाला चटक गया, कहने लगा तुम पाकिस्तानी हो क्या, देश इतना आगे बढ़ रहा है और तुम ये कम्युनिस्ट टाइप बात कर रहे हो, सोच बदलो क्योंकि देश बदल रहा है..

 

तब हमारा दिमाग ठनका, काहे की सोच बदलें भाई, मनु स्मृति पढ़ना शुरू कर दें, महिलाओं औऱ पुरुषों को बराबरी का दर्जा देना बंद कर दें या फिर मौजूदा दौर की तरह हर बात के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दें, ग्रोथ रेट गिर रही है पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, किसान मर रहा कर्ज़ तले पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, करप्शन बढ़ रहा है, पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, लोग भूखे सो रहे हैं पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, गंगा नहीं साफ हुई पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, कालाधन नहीं आया पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, रोज़गार खत्म हो रहे बेरोज़गारी बढ़ रही , इसके लिए भी पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, बिजली, पीने का पानी, सड़क नहीं बन पा रही पाकिस्तान ज़िम्मेदार है, हर दिन रेल हादसे हो रहे हैं, पाकिस्तान ज़िम्मेदार है…

हद है यार, कुछ तो ऐसा बोलो जो कहा हो और वो हुआ हो, सिवाय झुनझुने के किसी के हाथ में कुछ नहीं है, हम सब जानते हैं कि छले गए हैं लेकिन फिर भी कसीदे झोंक रहे हैं, पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी, जीएसटी, दाल, चावल, गेंहू, गाड़ी, हर चीज़ ने आपकी कमर ही तोड़ी है, रात के आगोश में जब देश के करोड़ों लोग भूखे पेट सोते हैं ना तब साहब गंज जैसी जगह पर देश के प्रधानमंत्री के खाने में एक सरकार 9 करोड़ रुपये खर्च करती है, जब भी आप बाढ़ जैसी परेशानी का सामना कर रहे होते हैं ना तब आपके सिर के ऊपर से गुजरने वाला उधनखटोला इन्ही का होता है..

उड़नखटोले से याद आया चुनाव का समय याद कीजिये औऱ सोचिये की उस समय कितने विमान आपके शहर में होते थे, आपके ऊपर से गुजरते थे लेकिन क्या आज ऐसा है, कोई है जो आपसे आपके दर्द के बारे में पूछता है, जवाब मिलेगा नहीं औऱ गलती से पूछ लिया तो या तो आपको देशद्रोही घोषित कर दिया जाएगा या फिर मिलेगी लाठी, काहे के देशद्रोही यार, भारत में पैदा हुए, श्री राम से लेकर हाजी अली तक माथा टेका, सबका सम्मान किया और सबको साथ ही देखना चाहते हैं, फिर कैसे हम देशद्रोही हो गए, हां हमारे राम ने हमको गौ हत्या के नाम पर किसी की जान लेना नहीं सिखाया, धर्म के नाम पर बांटना नहीं सिखाया, बेटियों की आवाज़ दबाना नहीं सिखाया, हमारे राम ने तो माँ के एक बार कहने पर घर त्याग देना सिखाया, पत्नी की लाज रखना सिखाया ,
वचन देना और निभाना सिखाया और फिर जब पानी सिर से ऊपर निकल जाए तो राष्ट्र हित में अहंकार का अंत करना सिखाया, इनलोगों ने अपने फायदे के लिए राम के मायने ही बदल दिए और तुम कहते हो हां यही हैं अच्छे दिन…

-अनुराग सिंह

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