तीन-तलाक पर 3 बार अध्यादेश ला चुकी मोदी सरकार अब चौथी बार संसद में यह बिल पेश करने की तैयारी में है. इस बार यह बिल पास हो जाए, इसके लिए सरकार ने कई तैयारियां भी की है. दरअसल मुसलमानो में तीन तलाक के दुरूपयोग को रोकने के लिए मोदी सरकार चौथी बार अध्यादेश ला रही है।

तीन तलाक से जुड़े चौथे अध्यादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को मंजूरी दी गई। इसमें विपक्ष की कुछ मांगों को भी शामिल किया गया है।

पिछले सत्र में नही हो पाया था पास


पिछले सत्र में जब सरकार ने अंतिम दिन राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने यह कहकर बिल पास नहीं होने दिया कि सरकार ने बहुत ही हड़बड़ी में बिना सबकी सहमति लिए इसे पेश कर दिया। अब इसे संसद के बजट सत्र में पेश किया जएगा।

विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने पहले ही कुछ प्रमुख बदलाव किए थे। इन प्रमुख बदलावों में-

1- इस मामले में एफआईआर तभी स्वीकार्य की जाएगी जब पत्नी या उसके नजदीकी खून वाले रिश्तेदार दर्ज कराएंगे। विपक्ष और कई संगठनों की चिंता की थी कि इस मामले में एफआईआर का कोई दुरुपयोग कर सकता है।

2- पति और पत्नी के बीच मैजिस्ट्रेट समझौता करा सकते हैं, अगर बाद में दोनों के बीच इसकी पहल होती है। इससे पहले के बिल में इसके लिए प्रावधान नहीं थे। विपक्ष का तर्क था कि इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।

3- तत्काल तीन तलाक अभी गैरजमानती अपराध बना रहेगा लेकिन अब इसमें ऐसी व्यवस्था कर दी गई है, जिसके बाद मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है लेकिन इससे पहले पत्नी की सुनवाई करनी होगी। इससे पहले बिल में तीन साल की सजा के प्रावधान के बाद जमानत की गुंजाइश नहीं दी गई थी।

गौरतलब है कि तीन तलाक पर सरकार की तरफ से प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि तीन तलाक पर कानून बनाने में सरकार हड़बड़ी दिखा रही है। इस प्रस्तावित कानून में कई खामियां हैं जिन पर बहस होनी चाहिए और इस बिल में आवश्यक संशोधनों को शामिल किया जाना चाहिए।

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