Monday, August 2, 2021

मित्रों को फायदा पहुंचाने मोदी सरकार ने किया 69381 करोड़ का टेलीकॉम घोटाला: कांग्रेस

लोकसभा कगुणाव के नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर होता नजर आ रहा है। विपक्ष एक के बाद एक घोटाले के आरोप सरकार पर लगा रहा है। इसी सिलसिले में अब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा घोटाले के आरोप लगाया है।

खेड़ा का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने 4 साल 8 माह के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर अपने मित्रों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए सरकार को यह नुकसान पहुंचाया है। खेड़ा का दावा है कि ये सभी बातें कैग रिपोर्ट में साफ-साफ लिखी हैं। उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर के इस महा घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में कराने की मांग की है।

सोमवार को एक प्रेसवार्ता में पवन खेड़ा ने कहा, मोदी सरकार के कार्यकाल में टेलीकॉम सेक्टर के तीन बड़े घोटाले हुए हैं। ताजा घोटाला माइक्रो वेव स्पेक्ट्रम का सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट को लेकर जो नियम तय गए किए थे, सरकार ने उनका खुलेआम उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के टेंडर नीलामी प्रक्रिया के द्वारा अलॉट किए जाएं, लेकिन मोदी सरकार ने पहले आओ, पहले पाओ के तहत स्पेक्ट्रम दे दिए।

सुप्रीम के निर्देशों की सरकार ने उड़ाई धज्जियां: खेड़ा

आठ जनवरी 2018 को जारी हुई सीएजी रिपोर्ट के 125 पन्नों में स्पेक्ट्रम घोटाला देखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने टूजी मामले के संदर्भ में कहा था कि किसी भी स्पेक्ट्रम को नीलामी और बाजार की शर्तों के अनुसार ही अलॉट किया जाएगा। खेड़ा का कहना है कि मोदी सरकार ने यहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने दोस्तों को ये स्पेक्ट्रम अलॉट कर दिए। कोर्ट ने ऐसे स्पेक्ट्रम अलॉट करते वक्त रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल का ध्यान रखना जरुरी बताया था, मगर सरकार ने पुराने फार्मूले से स्पेक्ट्रम जारी कर दिए।

डिफेंस को छूट नहीं दी, मगर मित्रों को छूट :खेड़ा

पवन खेड़ा के अनुसार, 21 जनवरी 2015 को एक प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा गया था। इसमें डिफेंस के लिए ‘बैंड और इंटरेस्ट जोन’ को स्पेक्ट्रम अलॉट्मेंट में कुछ छूट दिए जाने का प्रावधान था। हैरानी की बात है कि आज तक कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी नहीं दी है। दूसरी ओर मोदी सरकार ने प्राइवेट टेलीकॉम सेक्टर से जो चार्ज लेना था, उसे छोड़ दिया। इसके चलते सरकार को 45 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ तो वहीं मोदी के दोस्तों, जिन्हें स्पेक्ट्रम मिला है, को यह अनुचित लाभ दे दिया गया।

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