पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के रोडरेज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे दी है। कोर्ट ने सिद्धू पर 1000 रुपये का मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया है। कोर्ट के फैसले का पंजाब की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। पंजाब कांग्रेस में फैसले के बाद बड़ा उलट-फेर दिखाई दे सकता है। पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हाे गई है आैर सिद्धू के समर्थकाें में खुशी की लहर चल पड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने 18 अप्रैल को सुनवाई के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। सिद्धू ने दावा किया था कि गुरनाम सिंह की मौत का कारण विरोधाभासी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कारण स्पष्ट नहीं कर पाई है। सिद्धू इस समय पंजाब सरकार में पर्यटन मंत्री हैैं। मामले में दोषी ठहराए गए सिद्धू के साथी रुपिंदर सिंह संधू ने भी अपील कर रखी है। संधू को हाई कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी।

क्या है पूरा मामला ?

बता दें कि 1988 में पटियाला में कार पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह के साथ सिद्धू का विवाद हो गया था और आरोप है कि इस दौरार हाथापाई तक हो गई थी और बाद में गुरनाम सिंह की अस्‍पताल में मौत हो गई थी। उनकी मौत क कारण हार्ट अटैक बताया गया था। सेशन कोर्ट ने इस मामले में सिद्धू और उनके साथी को बरी कर दिया।

बाद में हाई कोर्ट ने सिद्धू और उनके साथी को गैर इरादतन हत्‍या का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद अौर एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सिद्धू ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की और सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद पिछले दिनों इस पर सुनवाई शुरू हुई। लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट आज इस पर फैसला सुनाएगा।

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