#Newbuzzindia/नई दिल्ली | सत्ता में आने से पहले से ही NDA की नजर, UPA कार्यकाल में लायी गयी योजना मनरेगा पर थी। मनरेगा को शुरूआती दौर से ही भ्रष्टाचार और ख़राब काम में सर्वोपरि योजना में गिना जाता था। सभी का मानना था कि मोदी यदि सत्ता में आते है तो तुरंत ही मनरेगा को बन्द कर देंगे। पर ऐसा नही हुआ जब मोदी ने एक बार संसद में कहा कि मनरेगा बन्द नही होगी क्योकि यह UPA के काले कामों का जीता जागता उदाहरण है।

पिछले साल का मनरेगा का रिकॉर्ड देखा जाए तो यह 49 दिन प्रति परिवार तक पंहुचा है जो की अब तक का सबसे अधिक का आकड़ा है। वहीँ दावा किया गया है कि बीते कुछ सालों में मनरेगा ने नई बुलंदियों को छुआ है और इससे भ्रष्टाचार और ख़राब काम में कमी आई है। यह सब कुछ मोदी सरकार के मनरेगा को अपने तरीके से संचालित करने के कारण ही संभव हो पाया है।

इस बात का जिक्र करते हुए सरकार का कहना है कि पिछले साल MNREGA के तहत आने वाले लोगों को वेतन का भुगतान भी समय पर हुआ है। प्रदर्शन, पहल और रणनीति वित्त वर्ष 2015-16 और वित्त वर्ष 2016-17 के टाइटल वाली रिपोर्ट में मोदी सरकार ने दावा किया है कि पिछले साल कुल 235 करो़ड़ व्यक्ति दिवस काम का सृजन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ मनरेगा के जरिये कई नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट पहलों के साथ 46.43 लाख हेक्टेयर जमीन तक सिंचाई की संभावनाओं पैदा किया जा सका है साथ ही मोदी सरकार ने इस योजना के लिए 33.61 लाख को लाभान्वित बनाया है।

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